राजस्थान की जलवायु | Rajasthan ki jalvayu

राजस्थान की जलवायु

इस लेख में राजस्थान की जलवायु की प्रमुख विशेषताओं और भौगोलिक विविधताओं का संपूर्ण विवरण दिया गया है।
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यहाँ आप राज्य के विभिन्न जलवायु प्रदेशों, तापमान, आर्द्रता और वर्षा के वितरण को विस्तार से समझेंगे। राजस्थान के सामान्य ज्ञान और परीक्षाओं की तैयारी हेतु यह लेख एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका है।

मौसम

किसी स्थान विशेष पर किसी विशेष समय में वायुमण्डलीय दशाओं के योग को मौसम (Weather) कहते हैं।

वायुमण्डलीय दशा का अर्थ

  • तापमान, वर्षा, वायुदाब, हवाएँ, आर्द्रता इत्यादि शामिल हैं।
  • मौसमी दशाएँ सामान्यतः एक दिन से दूसरे दिन या एक स्थान से दूसरे स्थान पर मौसम के तत्वों की मात्रा, वितरण एवं सक्रियता में अंतराल होता है।

जलवायु

दीर्घकालीन (लगभग 30 वर्ष) वायुमण्डलीय दशाएँ जलवायु कहलाती है।
ग्रीक शब्द 'क्लाइमा' से बना हैं।

नोट- (i) ताप बढ़ने पर वायुदाब कम होता है।
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  • हवाएँ उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर चलती हैं।
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  • मौसम- अल्पकालीन वायुमण्डलीय दशाएँ।
  • मानसून- शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के ‘मौसिम’ शब्द से हुई हैं।
  • भारतीय मानसून की सर्वप्रथम व्याख्या अरबी यात्री ‘अलमसूदी’ के द्वारा की गई है।

जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक निम्न हैं-

1. राजस्थान की अक्षांशीय स्थिति

  • अक्षांश रेखाएँ किसी भी स्थान की स्थिति, तापमान व जलवायु का निर्धारण करती है। राजस्थान का अक्षांशीय विस्तार 23°3' से 30°12' उत्तरी अक्षांश है, यह अक्षांशीय अंतराल 7°9' है।
  • अक्षांशीय विस्तार के आधार पर राजस्थान शीतोष्ण/उपोषिण कटिबन्ध में आता है।
  • राजस्थान के डूंगरपुर तथा बाँसवाड़ा से कर्क रेखा गुजरती है इसलिए इनका दक्षिणी भाग उष्णकटिबन्ध में आता है लेकिन इनका उत्तरी भाग उपोष्ण कटिबन्ध में आता है। इस आधार पर राजस्थान के दो जिले उष्ण कटिबन्ध में आते हैं तथा 41 जिले उपोष्ण कटिबन्ध में आते हैं।
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  • सूर्य की लम्बवत किरणें दक्षिण से उत्तर की ओर जाने पर तिरछी हो जाती है इस कारण सर्वाधिक तिरछी किरणें श्रीगंगानगर एवं हनुमानगढ़ में तथा लम्बवत किरणें डूंगरपुर एवं बाँसवाड़ा में गिरती हैं।
  • 21 मार्च से 23 सितम्बर तक सूर्य की स्थिति उत्तरायण होती है तथा 23 सितम्बर से 21 मार्च तक सूर्य की स्थिति दक्षिणायन होती है।
  • 21 मार्च एवं 23 सितम्बर को सूर्य की लम्बवत किरणें भूमध्य रेखा पर होती है इस कारण पृथ्वी के दोनों भागों में दिन एवं रात की अवधि बराबर - बराबर होती है।
  • 21 जून को सूर्य की लम्बवत किरणें कर्क रेखा पर होती है इस कारण इस दिन उत्तरी गोलार्द्ध पर सबसे बड़ा दिन (13 ½ घंटे) एवं सबसे छोटी रात (10 ½ घंटे) होती है, इसी 21 जून को दक्षिणी गोलार्द्ध में सबसे बड़ी रात (13 ½ घंटे) एवं सबसे छोटा दिन (10 ½ घंटे) होता है।  
  • 22 दिसम्बर को सूर्य की लम्बवत किरणें मकर रेखा पर होती है इस कारण इस दिन दक्षिणी गोलार्द्ध में सबसे बड़ा दिन
  • (13 ½ घंटे) एवं सबसे छोटी रात (10 ½ घंटे) होती है, इसी 22 दिसम्बर को उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे बड़ी रात (13 ½ घंटे) एवं सबसे छोटा दिन (10 ½ घंटे) होता है।

2. समुद्र से दूरी/महाद्वीपीयता

  • समुद्र के नजदीक समकारी प्रभाव जबकि समुद्र से दूर विषमकारी प्रभाव होता है, इसी कारण राजस्थान में महाद्वीपीय जलवायु (Continental Climate) पाई जाती है जो कि गर्म एवं शुष्क होती है जिसमें सामान्यतः नमी की कमी पाई जाती है।
  • पश्चिमी बंगाल राज्य का विस्तार 23° से 30° उत्तरी अक्षांश के मध्य है तथा यहाँ की जलवायु उष्ण आर्द्र जलवायु है जिसका कारण है बंगाल की खाड़ी के नजदीक स्थित होना अर्थात् यहाँ समकारी प्रभाव पाया जाता है।
  • राजस्थान तथा पश्चिमी बंगाल समान अक्षांशीय स्थिति होने के बाद भी पश्चिमी बंगाल में राजस्थान जैसी तापक्रमीय विभिन्नताएँ नहीं पाई जाती हैं।
राजस्थान की कच्छ की खाड़ी से दूरी 225 किलोमीटर, खम्भात की खाड़ी 275 किलोमीटर, अरब सागर की दूरी 400 किलोमीटर तथा बंगाल की खाड़ी की दूरी 2900 किलोमीटर है।

3. समुद्र तल से ऊँचाई

धरातल से 165 मीटर ऊँचाई की ओर जाने पर 1°C तापमान कम हो जाता है।
राजस्थान में झालावाड़ एवं माउण्टआबू एक ही समान अक्षांशीय स्थिति पर स्थित होने पर भी माउण्टआबू झालावाड़ की अपेक्षा अधिक आर्द्रता रखता है जिसका कारण है झालावाड़ समुद्र तल से औसत ऊँचाई 410 मीटर जबकि माउण्टआबू 1200 मीटर औसत ऊँचाई रखता है।
इसलिए राजस्थान का सर्वाधिक आर्द्रता वाला स्थान माउण्टआबू है जबकि सर्वाधिक आर्द्रता वाला जिला झालावाड़ है।

4. अरावली पर्वतमाला की स्थिति

  • यह राजस्थान को दो भागों में विभाजित करती है जिसका विस्तार राज्य में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर है इस पर्वतीय प्रदेश के समानान्तर अरब सागर मानसून शाखा निकल जाती है।
  • इस पर्वतीय प्रदेश की दिशा मानसून हवाओं की दिशा के प्रतिकूल या लम्बवत होती तो मानसून हवाएँ इनकी ऊँचाई के कारण ऊपर उठ जाती हैं जिसके परिणामस्वरूप राज्य के पश्चिमी भाग में वर्षा कम होती है।
  • अरावली पर्वतमाला के पूर्वी भाग में अधिक वर्षा होती है लेकिन पश्चिमी भाग वृष्टिछाया प्रदेश होता है। इस पर्वतीय प्रदेश का दक्षिणी पूर्वी भाग अधिक ऊँचाई में होने के कारण यहाँ तापमान अन्य भागों के अपेक्षा कम पाया जाता है तथा गर्मियों के दिनों में 'लू' का अनुभव कम होता है तथा इस भाग में वर्षा भी अधिक होती है जिसके कारण इस भाग में आर्द्र जलवायु पाई जाती है। इसमें स्थित माउण्टआबू में ग्रीष्म ऋतु अपेक्षाकृत कम गर्म एवं रातें ठंडी होती हैं।

5. पवनें

अरब सागर मानसून पवन एवं बंगाल की खाड़ी की पवन भी राज्य की जलवायु को प्रभावित करती है।
अरब सागर मानसूनी पवन राज्य में वर्षा किये बिना ही अरावली पर्वतमाला के सामानान्तर निकल जाती है यह पवन राज्य के दक्षिणी भाग में ही वर्षा कर पाती है।
बंगाल की खाड़ी की पवन अपनी आर्द्रता को गंगा के मैदान में छोड़ देती है जबकि यह पवन अरावली के पूर्वी भाग में ही वर्षा कर पाती है जबकि अरावली का पश्चिमी भाग शुष्क रह जाता है।
राज्य के उत्तरी भाग के श्रीगंगानगर एवं हनुमानगढ़ में मावठ होती है जिसका कारण है पश्चिमी विक्षोभ/भूमध्य सागरीय पवन (शीतोष्ण कटिबन्ध चक्रवात) है। यह वर्षा रबी की फसल के लिए अमृत के समान है।

6. मिट्टी

राजस्थान के पश्चिमी भाग में रेतीली बलुई मिट्टी पाई जाती है जो मोटे कणों वाली मिट्टी होती है यह मिट्टी दिन में अधिक तापमान ग्रहण कर लेती है जिसके कारण दिन में अधिक गर्म एवं रात के समय जल्दी से ठंडी हो जाती है।
राज्य के पश्चिमी भाग में वातावरण की शुष्कता मिट्टी की बलुई प्रकृति, वनस्पति की कमी तथा स्वच्छ आकाश के कारण रात्रि के समय तापमान अचानक नीचे गिर जाता है।
राज्य में सबसे कम वर्षा वाला जिला जैसलमेर है जहाँ सर्वाधिक दैनिक तापान्तर देखने को मिलता है, इसी पश्चिमी क्षेत्र में फलौदी राज्य का सबसे शुष्कतम स्थान है।
इस कारण राज्य के पश्चिमी भाग में शुष्क एवं अर्द्धशुष्क जलवायु पाई जाती है।
राज्य के दक्षिणी-पूर्वी एवं पूर्वी भाग में काली एवं जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है। इस मिट्टी की मुख्य विशेषता यह है कि ये धीरे-धीरे गर्म होती है तथा धीरे-धीरे ही ठंडी होती है। इस प्रकार की मिट्टी में सर्वाधिक नमी देखने को मिलती है जिसके कारण इसमें सर्वाधिक आर्द्रता बनी रहती है। इस कारण राज्य के दक्षिणी-पूर्वी एवं पूर्वी भाग में आर्द्र जलवायु पाई जाती है।

7. वनस्पति

वनस्पति भी मुख्य रूप से जलवायु को प्रभावित करती है क्योंकि वनों की अधिकता वायुमण्डलीय दशाओं को प्रभावित करती है जैसे पश्चिमी राजस्थान में वनों की कमी के कारण शुष्क जलवायु पायी जाती है जिसके कारण मौसम में भी शुष्कता बनी रहती है।
अरावली पर्वतीय प्रदेश एवं दक्षिणी-पूर्वी प्रदेश में वनों की अधिकता के कारण इनमें आर्द्र जलवायु देखने को मिलती है।
वनों की लगातार कटाई होने से जलवायु परिवर्तन के लिए उत्तरदायी कारक बन रहे हैं।

8. तापमान

  • यह जलवायु को सर्वाधिक प्रभावित करता है।
  • दिन के समय स्थलीय भाग अधिक तापमान ग्रहण कर लेता है जिसके परिणामस्वरूप यहाँ निम्न वायुदाब उत्पन्न हो जाता है जबकि जलीय भाग पर कम तापमान के कारण उच्च वायुदाब उत्पन्न हो जाता है।
नोट : पवनें उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर चलती है।
  • इस कारण दिन के समय जल समीर चलती है।
  • रात के समय स्थलीय भाग पर कम तापमान होता है जिसके कारण यहाँ उच्च वायु दाब उत्पन्न हो जाता है लेकिन इसकी तुलना में जलीय भाग पर अधिक तापमान होने के कारण यहाँ निम्न वायुदाब उत्पन्न हो जाता है इस कारण स्थलीय समीर रात के समय चलती है।
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राजस्थान की जलवायु की विशेषताएँ

1. विषम जलवायु प्रदेश
राजस्थान को वर्षा तथा तापमान के आधार पर निम्न जलवायु प्रदेश में विभाजित किया जाता है जैसे- शुष्क, अर्द्धशुष्क, उपआर्द्र, आर्द्र तथा अति आर्द्र है।

2. अपर्याप्त वर्षा
राजस्थान के अधिकतर भाग में अपर्याप्त वर्षा होती है जिसके कारण अकाल की स्थिति देखने को मिलती है जैसे सन् 1999-2001, 2006, 2009-10 में सूखे एवं अकाल की स्थिति देखने को मिली है।

3. वर्षा की असमानता
सम्पूर्ण राज्य में वर्षा की मात्र समान रूप से नहीं है जैसे अरावली के पूर्वी भाग में अधिक वर्षा तथा पश्चिमी भाग में कम वर्षा देखने को मिलती है।
कभी-कभी राज्य में अधिक बाढ़ आ जाती है जैसे 1975 में सांभर की बाढ़, 1980 में जोधपुर की बाढ़, 1981 में जयपुर की बाढ़, 2000 में लूणकरणसर (बीकानेर) की बाढ़ तथा सन् 2006 में कवास (बाड़मेर), पाली, जोधपुर तथा जालौर में बाढ़ आई थी।

4. वर्षा की अनिश्चितता
राज्य में वर्षा का होना भी निश्चित नहीं है क्योंकि यहाँ कभी कभी पूर्णरूप से सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिसके कारण अन्न, जल तथा चारे की कमी हो जाती है जैसे छप्पन का अकाल एक भयानक अकाल था तथा सन् 2009 में राज्य के 27 जिले अकाल से ग्रस्त थे।

5. वर्षा की अनियमितता
राज्य में वर्षा जून, कभी जुलाई तथा कभी कभी मध्य सितम्बर तक वर्षा नहीं होती है इस कारण राज्य में वर्षा की अनियमितता देखने को मिलती है। राज्य में अधिकतम वर्षा जुलाई तथा अगस्त महीने में देखने को मिलती है।

6. तापमान में विषमता
राज्य में तापमान की विषमता अधिक मिलती है। जैसे वर्षा ऋतु में तापमान 29°C से 32°C तक देखने को मिलता है तथा ग्रीष्म ऋतु में तापमान 35° से 50° तक देखने को मिलता है तथा शीत ऋतु में तापमान 5° से 15°C तक देखने को मिलता है।

ऋतुओं के प्रकार निम्न हैं

1. ग्रीष्म ऋतु - ( मार्च से मध्य जून )
  • राज्य का औसत वार्षिक तापान्तर- 38° C

तापमान-
  • अधिकतम- 40° - 50° C
  • न्यूनतम- 35° - 40° C
  • राजस्थान में सबसे शुष्क स्थान- फलौदी
  • राजस्थान में सबसे गर्म जिला- चूरू
  • सर्वाधिक दैनिक तापान्तर- जैसलमेर
  • न्यूनतम दैनिक तापान्तर- डूंगरपुर
  • न्यूनतम वार्षिक तापान्तर- बाँसवाड़ा
  • राजस्थान में सबसे गर्म महीना- जून
  • सर्वाधिक आर्द्र महीना- अगस्त
  • सबसे कम आर्द्र महीना- अप्रैल
  • सर्वाधिक आँधियाँ- मई माह में
  • राजस्थान में मानसून पूर्व वर्षा दोगड़ा कहलाती है।

मानसून से पूर्व भारत में कुछ स्थानों पर वर्षा होती है इसे मानसून पूर्व वर्षा कहते हैं जैसे-
  • (i) आम्र वर्षा - केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र। मार्च और अप्रैल में।
  • (ii) चेरी ब्लॉसम/फूलों की बौछार- केरल और कर्नाटक में होती है जो कॉफी की कृषि को फायदा पहुँचाती है।
  • (iii) नॉर्वेस्टर/बोर्डोचिल्ला/बारदोली छीड़ा - असम, बंगाल, झारखण्ड और छत्तीसगढ़ में तेज हवाओं के साथ बारिश।
  • (iv) काल बैशाखी - पश्चिम बंगाल
  • (v) पीली वर्षा - छत्तीसगढ़
  • (vi) टी-शॉवर - असम।

2. वर्षा ऋतु (मध्य जून से सितम्बर)
  • अधिकतम तापमान- 30° - 35° C
  • न्यूनतम तापमान- 25° - 30° C
  • सर्वाधिक वर्षा वाला महीना- जुलाई
  • सर्वाधिक आर्द्रता वाला महीना- अगस्त

भारत में दक्षिणी-पश्चिमी मानसून पवनें प्रवेश करती है जिसकी दो शाखाएँ निम्न है-
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(A) अरब-सागरीय मानसून
  • भारत में सर्वप्रथम प्रवेश केरल से होता है।
  • भारत में मालाबार तट को मानसून का प्रवेश द्वार कहते हैं।
  • भारत में अन्त में लद्दाख में मानसून प्रवेश करता है।
  • मैस्करियन द्वीप समूह भारतीय मानसून का घर कहलाता है।
  • नोट- राजस्थान में सर्वप्रथम अरब सागर शाखा का मानसून मध्य जून तक पहुँचता है जबकि राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा बंगाल की खाड़ी शाखा से होती हैं।
  • राजस्थान में सर्वप्रथम मानसून बाँसवाड़ा में प्रवेश करता है।
  • राजस्थान में सर्वप्रथम अरब सागर शाखा प्रवेश करती है, जिसकी दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर होती है।
  • इसके बाद में बंगाल की खाड़ी शाखा प्रवेश करती है जिसकी दिशा दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर होती है।
  • राजस्थान के पश्चिमी भाग में कम वर्षा होने का कारण है, अरब सागर मानसूनी शाखा अरावली पर्वतमाला के समानान्तर निकल जाती है।
  • अरब सागर शाखा राजस्थान के दक्षिणी भाग में सर्वाधिक वर्षा करती है।
  • माउण्ट आबू (सिरोही) में सर्वाधिक वर्षा अरब सागर शाखा से होती है।
  • अरब सागर शाखा तथा बंगाल की खाड़ी शाखा दोनों बाँसवाड़ा जिले में मिल जाती है, इसलिए मानसून की सर्वाधिक सक्रियता बाँसवाड़ा में रहती है।

(B) बंगाल की खाड़ी का मानसून
  • भारत में यह मानसून सर्वप्रथम प्रवेश- अण्डमान -निकोबार द्वीप समूह
  • यह मानसून सर्वप्रथम 25 से 30 मई के मध्य प्रवेश करता है।
  • सर्वाधिक वर्षा- मासिनराम और चेरापूँजी
  • भारतीय मानसून का इंजन तिब्बत का पठार कहलाता है।
  • अरब सागर शाखा तथा बंगाल की खाड़ी की शाखा दोनों आपस में पंजाब एवं हरियाणा में मिलकर धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) में भारी वर्षा करती हैं।
  • बंगाल की खाड़ी शाखा सर्वप्रथम झालावाड़ जिले में प्रवेश करती है।
  • राज्य में 1 जून से 30 सितम्बर, 2024 की समयावधि में वास्तविक वर्षा 662.44 मिमी. दर्ज की गई जो कि सामान्य वर्षा 417.46 मिमी. की तुलना में 58.68% अधिक रही है।
वर्षा ऋतु -
राजस्थान में दो मानसूनी शाखाएं प्रवेश करती है- अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी।
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नोट-
  • राज्य में वर्षा की मात्रा बढ़ती है- उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व
  • राज्य में वर्षा दिनों की संख्या बढ़ती है- उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व
  • राज्य में वर्षा की मात्रा घटती है- दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम
  • राज्य में वर्षा दिनों की संख्या घटती है- दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम
  • राजस्थान में औसत वर्षा- 57.5 सेमी.
  • राजस्थान में मानसून का आगमन- 15 जून

(3) शीत ऋतु (अक्टूबर से फरवरी)
  • उपनाम- प्रत्यावर्तन समय
  • इसको लौटता हुआ मानसून भी कहते हैं।
  • इस ऋतु में अधिकतम तापमान- 20°-28°C तथा न्यूनतम तापमान- 6°-8°C तक होता है।
  • शीत लहरों को स्थानीय भाषा में 'सीली' कहते हैं।
  • दीपावली के आस-पास पड़ने वाली हल्की सर्दी को 'गुलाबी सर्दी' कहते हैं।
  • जब तापमान 0°C से नीचे चला जाता है तो उसे 'पाला पड़ना' कहते हैं।
  • भारत का सबसे ठण्डा महीना- दिसम्बर है।
  • राजस्थान का सबसे ठण्डा महीना- जनवरी है।
  • लौटते हुए मानसून से भारत में तमिलनाडु (कोरोमण्डल तट) में वर्षा होती है।

इस ऋतु में राजस्थान में तापमान कम होने के निम्न कारण है-
  • राजस्थान, पंजाब तथा हरियाणा पर महाद्वीपीय जलवायु का प्रभाव पड़ता हैं।
  • हिमालय में हिमपात होने के कारण शीत लहर का प्रभाव होता है।
  • कैस्पियन सागर तथा तुर्कमेनिस्तान से शीत लहर का प्रभाव भी होता है जिसके कारण भारत के उत्तरी-पश्चिमी भागों में कोहरा तथा पाला का भी प्रभाव होता है।

पश्चिमी विक्षोभ/मावट/महावट
  • भूमध्य सागर से उठकर आने वाले चक्रवात जिन्हें 'गोल्डन ड्रॉप्स' भी कहते है।
  • उपयोगी- गेहूँ, चना (राजस्थान में), सेब (भारत में)
  • शीत ऋतु में होने वाली वर्षा मावठ कहलाती है।
  • सर्वाधिक प्रभाव- उत्तरप्रदेश
  • पश्चिमी विक्षोभों को भारत में 'जेट स्ट्रीम' पवन लाती है।
  • जेट स्ट्रीम की खोज रॉस बी ने की है।
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राजस्थान की जलवायु- 5 प्रकार

1. शुष्क जलवायु

  • वर्षा- 10-20 सेमी.
  • ग्रीष्म ऋतु में औसत तापमान - 40°C - 45°C
  • शीत ऋतु में औसत तापमान- 12°-16°C
  • जिले- जैसलमेर, बीकानेर, गंगानगर, बाड़मेर, बालोतरा, जोधपुर का पश्चिमी भाग, फलौदी, हनुमानगढ़, नागौर तथा चूरू का पश्चिमी भाग।
  • वनस्पति- मरूद्भिद/जीरोफाइट्स
  • इस जलवायु प्रदेश में दैनिक तथा वार्षिक तापांतर सर्वाधिक होता है।

2. अर्द्ध-शुष्क जलवायु

  • वर्षा- 20-40 सेमी.
  • ग्रीष्म ऋतु में तापमान - 32°C - 36°C
  • शीत ऋतु में तापमान- 10°C - 16°C
  • जिले - जोधपुर का पूर्वी भाग, बालोतरा, श्रीगंगानगर एवं हनुमानगढ़ का कुछ भाग, चूरू, झुंझुनूं, सीकर, नागौर, डीडवाना-कुचामन, पाली, जालौर।
  • वनस्पति - स्टेपीज प्रकार

3. उपआर्द्र जलवायु

  • वर्षा- 40-60 सेमी.
  • ग्रीष्म ऋतु में तापमान - 28°C - 34°C
  • शीत ऋतु में तापमान - 12°C - 18°C
  • जिले - जयपुर, अलवर, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, अजमेर, टोंक, पाली, ब्यावर, सिरोही, जालौर।
  • वनस्पति- मिश्रित पतझड़

4. आर्द्र जलवायु

  • वर्षा- 60-80 सेमी.
  • ग्रीष्म ऋतु में तापमान - 32°C - 34°C
  • शीत ऋतु में तापमान - 14°C - 18°C
  • जिले - धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर, बूँदी, राजसमंद, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डीग, भरतपुर, प्रतापगढ़ का उत्तरी भाग, दौसा, उदयपुर का उत्तरी भाग तथा कोटा का उत्तरी भाग आता है।

5. अति आर्द्र जलवायु

  • वर्षा- 80-120 सेमी. से अधिक
  • ग्रीष्म ऋतु में तापमान - 30°C - 36°C
  • शीत ऋतु में तापमान - 14°C - 18°C
  • जिले - कोटा, बाराँ, झालावाड़, उदयपुर का दक्षिणी भाग, सलूम्बर, चित्तौड़गढ़ का दक्षिणी भाग जो कोटा के नजदीक है, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, माउण्ट आबू।
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कोपेन का वर्गीकरण

  • कोपेन का जन्म- रूस
  • निधन- ऑस्ट्रिया
  • कोपेन को रूस और जर्मनी की नागरिकता प्राप्त थी।
  • इन्होंने अपने वर्गीकरण में सांकेतिक भाषा का उपयोग किया।
  • कोपेन ने कैण्डोले (1874 ई.) के वर्गीकरण को आधार माना था।
  • वर्गीकरण आधार- (i) तापमान, (ii) वर्षा तथा वनस्पति
  • वर्गीकरण 1900 ई. में तैयार किया गया तथा 1918 में प्रस्तुत किया गया।

कोपेन ने अपने जलवायु वर्गीकरण का आधार तापमान तथा वर्षण के मासिक मानों को रखा है। उन्होंने जलवायु के पाँच प्रकार माने हैं, जिनके नाम है-

1. उष्ण कटिबंधीय जलवायु, जहाँ वर्ष भर औसत मासिक तापमान 18° सेल्सियस से अधिक रहता है।

2. शुष्क जलवायु, जहाँ तापमान की तुलना में वर्षण बहुत कम होता है और इसलिए शुष्क है। शुष्कता कम होने पर यह अर्द्ध-शुष्क मरूस्थल (S) कहलाता है। शुष्कता अधिक है तो यह मरूस्थल (W) होता है।

3. गर्म जलवायु, जहाँ सबसे ठंडे महीने का औसत तापमान 18° सेल्सियस और -3° सेल्सियस के बीच रहता है।

4. हिम जलवायु, जहाँ सबसे गर्म महीने का औसत तापमान 10° सेल्सियस से अधिक और सबसे ठंडे महीने का औसत तापमान 3° सेल्सियस से कम रहता है।

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5. बर्फीली जलवायु, जहाँ सबसे गर्म महीने का तापमान 10° सेल्सियस से कम रहता है।
  • कोपेन ने जलवायु प्रकारों को व्यक्त करने के लिए वर्ण संकेतों का प्रयोग किया है, वर्षा तापमान के वितरण प्रतिरूप में मौसमी भिन्नता के आधार पर प्रत्येक प्रकार को उप-प्रकारों में बाँटा गया है।
  • कोपेन ने अंग्रेजी के बड़े वर्णों S को अर्द्ध - मरूस्थल के लिए और W को मरूस्थल के लिए प्रयोग किया है। इसी प्रकार उप-विभागों को व्यक्त करने के लिए अंग्रेजी के निम्नलिखित छोटे वर्णों का प्रयोग किया गया है।जैसे- f (पर्याप्त वर्षण), m (शुष्क मानसून होते हुए भी वर्षा वन ), c (चार महीनों से कम अवधि में औसत तापमान 10° सेल्सियस से अधिक) और g (गंगा का मैदान)।

राज्य के संदर्भ में कोपेन का जलवायु वर्गीकरण निम्न प्रकार से है-

1. Aw- आर्द्र जलवायु।
  • जलवायु - अति आर्द्र जलवायु।
  • वर्षा - 80 से 120 सेमी. से अधिक।
  • वनस्पति - सवाना प्रकार।
  • विस्तार - कोटा, बाराँ, झालावाड़, चित्तौड़गढ़ का कुछ भाग जो कोटा के नजदीक है, उदयपुर, सलूम्बर, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, माउण्ट आबू स्थान।

2. Cwg- उपआर्द्र जलवायु।
  • जलवायु- आर्द्र एवं उपआर्द्र जलवायु।
  • वर्षा- 40 से 80 सेमी.।
  • वनस्पति- मानसूनी प्रकार।
  • विस्तार- जयपुर, कोटपुतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, डीग, अलवर, भरतपुर, करौली, सवाईमाधोपुर, बूंदी, टोंक, दौसा, अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, सिरोही, राजसमंद, धौलपुर।

3. BShw - अर्द्धशुष्क जलवायु।
  • जलवायु- अर्द्धशुष्क जलवायु।
  • वर्षा - 20 से 40 सेमी.।
  • वनस्पति- स्टेपी प्रकार (छोटी घास)।
  • विस्तार- सीकर, चूरू, झुंझुनूँ, नागौर, जोधपुर, जोधपुर का पूर्वी भाग, डीडवाना-कुचामन, ब्यावर का कुछ भाग, पाली, बाड़मेर, बालोतरा, जालौर।

4. BWhw - शुष्क जलवायु/मरूस्थलीय जलवायु।
  • जलवायु- मरूस्थलीय जलवायु।
  • वर्षा- 10 से 20 सेमी.।
  • वनस्पति- जीरोफाइट्स प्रकार।
  • विस्तार- श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, फलौदी, जोधपुर (पश्चिमी भाग), जैसलमेर।
  • आधार- तापमान, वाष्पीकरण, वर्षा को माना है।
  • वर्गीकरण दिया गया- 1931
  • संशोधन किया- 1948

थार्नवेट का वर्गीकरण
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जलवायु के प्रकार-4

1. EA'd- शुष्क जलवायु प्रदेश।
  • जलवायु- शुष्क जलवायु
  • वर्षा- 10 से 15 सेमी.।
  • विस्तार- बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा, फलौदी, जोधपुर (पश्चिमी भाग)

2. DB'w- मिश्रित जलवायु प्रदेश।
  • जलवायु- मिश्रित जलवायु प्रदेश।
  • वर्षा- 15 से 20 सेमी.।
  • विस्तार- श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, बीकानेर

3. DA'w- अर्द्ध शुष्क जलवायु प्रदेश।
  • जलवायु- अर्द्ध शुष्क जलवायु प्रदेश।
  • वर्षा- 50 से 80 सेमी.।
  • विस्तार- जयपुर, अलवर, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, डीग, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर, टोंक, दौसा, अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, बूंदी, प्रतापगढ़, जालौर, नागौर, डीडवाना-कुचामन, पाली, राजसमंद, जोधपुर का पूर्वी भाग, बालोतरा का कुछ भाग।

4. CA'w – शुष्क आर्द्र जलवायु प्रदेश।
  • जलवायु- शुष्क आर्द्र/उप आर्द्र जलवायु प्रदेश।
  • वर्षा- 80 से 100 सेमी.।
  • विस्तार- कोटा, बाराँ, झालावाड़, उदयपुर, सलूम्बर, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़ का कोटा के नजदीक वाला भाग, बाँसवाड़ा, माउण्ट आबू स्थान।

ट्रिवार्था के अनुसार जलवायु वर्गीकरण

  • जलवायु वर्गीकरण का आधार- वर्षा, तापमान
  • इन्होंने कोपेन के जलवायु वर्गीकरण का संशोधन किया है।
इनके अनुसार राज्य की जलवायु के चार प्रकार है-
कोपेन ट्रिवार्था कोपेन ट्रिवार्था
1. Aw Aw 2. BWhw BWh
3. BShw BSh 4. Cwg Caw

महत्वपूर्ण तथ्य

  • राज्य का सबसे गर्म महीना जून जबकि सबसे ठण्डा महीना जनवरी है।
  • जिला स्तर पर सबसे गर्म जिला चूरू एवं सर्दियों में सबसे ठण्डा जिला भी चूरू है।
  • वार्षिक तापांतर सर्वाधिक चूरू में तथा दैनिक तापांतर सर्वाधिक जैसलमेर में होता है।
  • सर्वाधिक आर्द्रता सुबह (5 am) तथा कम आर्द्रता 3 pm पर होती है।
  • सर्वाधिक आर्द्रता वाला महीना- अगस्त
  • न्यूनतम आर्द्रता वाला महीना- अप्रैल
  • सर्वाधिक आर्द्रता वाला संभाग- कोटा
  • न्यूनतम आर्द्रता वाला संभाग- जोधपुर
  • सर्वाधिक आर्द्रता वाला जिला- झालावाड़
  • न्यूनतम आर्द्रता वाला जिला- जैसलमेर
  • सर्वाधिक आर्द्रता वाला स्थान- माउण्ट आबू (सिरोही)
  • न्यूनतम आर्द्रता वाला स्थान- फलौदी
  • सर्वाधिक वाष्पोत्सर्जन वाला जिला- जैसलमेर
  • न्यूनतम वाष्पोत्सर्जन- डूंगरपुर
  • राजस्थान की औसत वार्षिक वर्षा- 57.51/58 सेमी.
  • सूर्य की सर्वाधिक सीधी किरणें बोरकुण्ड गाँव, कुशलगढ़, तहसील (बाँसवाड़ा) में जबकि सर्वाधिक तिरछी किरणें कोणा गाँव (श्रीगंगानगर) में होती है।
  • सर्वाधिक आँधियाँ- श्रीगंगानगर ( 27 दिन )
  • न्यूनतम आँधियाँ- झालावाड़ ( 3 दिन )
  • अडारव- तेज आवाज वाली पवन को कहते हैं।
  • वज्र तूफान- दक्षिण-पूर्व से आने वाला तूफान।
  • भारतीय मौसम विभाग वेधशाला- जंतर मंतर
  • ग्रीष्म ऋतु में माउंट आबू (सिरोही) सबसे ठंडा स्थान है, जिसका कारण उसकी उच्चावच स्थिति है।
  • सीली- पौष माह में चलने वाली ठण्डी हवाएँ।
  • तवा- ज्येष्ठ माह में चलने वाली गर्म हवाएँ।
  • धराऊ- उत्तर दिशा से चलने वाली हवा।
  • समदरी- दक्षिण-पश्चिम से आने वाली हवा।
  • सूर्या- उत्तर-पश्चिम से आने वाली हवा।
  • चील- दक्षिण-पूर्व से आने वाली हवा।
  • संजेरी- उत्तर-पूर्व से आने वाली हवा।
  • लंकाऊ- दक्षिण से आने वाली हवा।
  • पुरवईया- बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवा।
monsoon

मानसून 2024 की स्थिति निम्न है:-
श्रेणी नाम जिले संख्या
असामान्य वर्षा (सामान्य से 60 प्रतिशत तथा इससे अधिक) अजमेर, अलवर, ब्यावर, भरतपुर, बीकानेर, दौसा, धौलपुर, डीडवाना-कुचामन, जयपुर, करौली, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, नागौर, सवाई-माधोपुर, टोंक, बालोतरा, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, फलौदी, बूँदी 21
अधिक वर्षा (सामान्य से 20 से 59 प्रतिशत) बाँसवाड़ा, बाराँ, भीलवाड़ा, चूरू, गंगानगर, हनुमानगढ़, झुंझुनूँ, जोधपुर, कोटा, पाली, राजसमंद, सीकर 12
सामान्य वर्षा (सामान्य से (+) 19 प्रतिशत से (-) 19 प्रतिशत तक) चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, जालौर, झालावाड़, प्रतापगढ़, सलूम्बर, सिरोही, उदयपुर 08
कम वर्षा (सामान्य से (-) 20 प्रतिशत से (-) 59 प्रतिशत) 0
न्यून वर्षा (सामान्य से (-) 60 प्रतिशत व इससे कम) 0

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Kartik Budholiya

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राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को RPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।