राजस्थान के प्रमुख त्यौहार
इस लेख में राजस्थान के प्रमुख त्यौहार और उनसे जुड़ी सांस्कृतिक मान्यताओं का विस्तृत विवरण दिया गया है। इसमें हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र से फाल्गुन माह तक आने वाले पर्वों, प्रसिद्ध मेलों और क्षेत्रीय रीति-रिवाजों की गहन जानकारी शामिल है। साथ ही, विभिन्न धर्मों के उत्सवों और महत्वपूर्ण दिवसों का भी उल्लेख है, जो पाठकों को राजस्थान की विविधता और गौरवशाली परंपराओं से परिचित कराएगा।
- चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ, फाल्गुन
- गुलाबी गणगौर - नाथद्वारा
- गणगौर प्रतीक है - पार्वती
- बिना ईसर की गणगौर - जैसलमेर
1. चैत्र
- चैत्र कृष्ण प्रथमा - बादशाह मेला (ब्यावर) - इस दिन अकबर ने टोडरमल को दो दिन का बादशाह बनाया।
- चैत्र कृष्ण प्रथमा - धुलंडी, फूलडोल मेला (शाहपुरा, भीलवाड़ा), लट्ठ मार होली (करौली), पत्थर मार होली (बाड़मेर) गणगौर पूजन प्रारम्भ, राजस्थान की स्थापना इस दिन हुई थी (30 मार्च, 1949, बुधवार), आर्य समाज की स्थापना, RSS की स्थापना, गुरुनानक जन्म, झूलेलाल जयंती, महर्षि गौतम जयंती।
- चैत्र कृष्ण एकादशी जौहर मेला (चित्तौड़गढ़)
- चैत्र कृष्ण अष्टमी - घुड़ला, बास्योड़ा।
- चैत्र शुक्ल प्रथम - हिन्दू नववर्ष, बसंत नवरात्र प्रारम्भ, विक्रमी संवत व शक संवत प्रारम्भ, सृष्टि की रचना
- चैत्र शुक्ल द्वितीया - सिंजारा।
- चैत्र शुक्ल तृतीया - गणगौर (शिव-पार्वती) सर्वाधिक गीतों वाला त्योहार जैसलमेर में चैत्रशुक्ल चतुर्थी को बिना ईसर की गणगौर मनाई जाती है क्योंकि चैत्र शुक्ल तृतीय के दिन बीकानेर के शासक ने जैसलमेर पर आक्रमण कर गणगौर की सवारी से ईसर को उठा लिया था। जयपुर, उदयपुर की गणगौर प्रसिद्ध है।
- उदयपुर व जोधपुर में धींगा गणगौर मनाई जाती है।
नोट- राव सातलदेव की मृत्यु गणगौर के दिन होने कारण जोधपुर में तथा बुधसिंह के छोटे भाई जोधसिंह की जैतसागर झील में गणगौर विसर्जन के समय डूबने से मृत्यु हो गई जिस कारण बूंदी राज परिवार में गणगौर नहीं मनाई जाती है।
- चैत्र शुक्ल तृतीया के दिन हिण्डोन सिटी, करौली में महावीर जी का मेला भरता था।
- चैत्र शुक्ल पंचमी - गुलाबी गणगौर/चुनड़ी गणगौर (नाथद्वारा)
- चैत्र शुक्ल अष्टमी - अशोकाष्टमी, करौली में लक्खी मेला।
- चैत्र शुक्ल नवमी - रामनवमी (राम का जन्म), सरयू नदी में स्नान, झुंझार जी का जन्म। व्यापारी खाते बदलते हैं।
- चैत्र पूर्णिमा - हनुमान जयंती व संत पीपा जयंती।
2. वैशाख
- वैशाख कृष्ण तृतीया - धींगा गणगौर (राणा अमरसिंह के समय प्रारम्भ)
- बैंतमार गणगौर - जोधपुर
- वैशाख शुक्ल तृतीया - आखा तीज, अबूझ सावा, सर्वाधिक बाल विवाह, द्वापर युग का प्रारम्भ, सात अन्न की पूजा। - बीकानेर की स्थापना परशुराम जयंती, सत्ययुग व त्रेतायुग का प्रारम्भ।
- वैशाख पूर्णिमा - बुद्ध पूर्णिमा, गरासियों का कुम्भ (आबू, सिरोही), मातृ कुण्डिया का मेला (रासमी गाँव, चित्तौड़)
नोट- मातृकुण्डिया मेले को मेवाड़ का हरिद्वार कहते हैं।
- वैशाख पूर्णिमा- पीपल पूर्णिमा, अबूझ सावा।
3. ज्येष्ठ
- ज्येष्ठ अमावस्या - बड़ अमावस्या, सावित्री पूजा, सहरियों का कुम्भ (सीताबाड़ी, बाराँ)।
- ज्येष्ठ शुक्ल दशमी - इस दिन भागीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाये थे जिस कारण गंगा दशहरा मनाया जाता है।
- ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी - निर्जला एकादशी, बिना जल पीये व्रत। उदयपुर में पतंग उड़ाई जाती है।
4. आषाढ़
- आषाढ़ कृष्णा एकादशी - योगिनी एकादशी
- आषाढ़ शुक्ला एकादशी - देवशयनी एकादशी - इस दिन से देवता चार माह के लिए सो जाते हैं जिस कारण सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं।
- आषाढ़ पूर्णिमा - गुरू पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा, कोकिला व्रत पूर्णिमा।
5. श्रावण
- सावन के सोमवार।
- इस महीने में नवसास-बहु साथ नहीं रहती है।
- श्रावण कृष्णा पंचमी - नाग पंचमी - नागों की पूजा।
- मंडोर (जोधपुर) में नागपंचमी मेला।
- भाद्रपद कृष्ण षष्ठी
- श्रावण कृष्णा नवमी - निडरी नवमी, नेवला पूजन।
- श्रावण एकादशी- कामिका व्रत , यह विष्णु भगवान का व्रत है।
- श्रावण अमावस्या - हरियाली अमावस्या।
- वह स्त्री जिसकी संतान जन्म लेते ही मर जाती है वह स्त्री इस दिन व्रत करती है।
- इस दिन मांगालियावास (अजमेर) में कल्पवृक्ष का मेला व पूजा होती है।
- डिग्गीपुरी के राजा का टोंक में मेला, बुड्ढा जोहड़ गुरूद्वारा (श्रीगंगानगर)
- श्रावण शुक्ला तृतीया - श्रावणी तीज/छोटी तीज (हरियाली तीज), सिंजारा, पेड़ पर झूला, जयपुर में सवारी। पति-पत्नी के प्रेम का त्योहार।
- जयपुर की तीज की सवारी प्रसिद्ध है जिसमें सबसे आगे सजे हुये हाथी-घोड़े, बीच में तीज माता व अंत में महिलाएँ होती है, जो गीत गाती है।
- इस दिन से हिन्दू त्योहारों का प्रारम्भ हो जाता है जिस कारण कहते हैं- तीज त्योहार बावड़ी ले डूबी गणगौर।
- तीज का त्योहार श्रृंगारिक त्योहार है, जिस दिन शिव पार्वती की पूजा होती है।
नोट : बूंदी में कजली तीज का मेला भरता है।
- श्रावण पूर्णिमा - रक्षाबंधन, नारियल पूर्णिमा, अमरनाथ यात्रा समाप्त हो जाती है। बर्फ का शिवलिंग बनता है। श्रवण कुमार की पूजा।
नोट : प्रारम्भ - आषाढ़ पूर्णिमा, अमरनाथ यात्रा।
6. भाद्रपद
- भाद्रपद कृष्ण तृतीया - नीम पूजा, बड़ी तीज/सातूड़ी तीज/ कजली तीज/ बूढ़ी तीज, इस दिन गौरी/पार्वती का व्रत होता है क्योंकि इसी दिन पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था। महिलाएँ सत्तू खाती है।
- भाद्रपद कृष्ण षष्ठी - हल छठ/भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्मदिन।
- उब छठ - अविवाहित लड़कियां चन्द्रोदय तक खड़े रहकर व्रत करती है।
- धमोली - मारवाड़ में महिलाएँ सूर्योदय से पहले कलेवा करती है।
- भाद्रपद कृष्ण षष्ठी - हल छठ (बलराम जी का जन्म)। ऊब छठ।
- कृष्ण जन्माष्टमी के दिन रात्रि 12 बजे कृष्ण भगवान का जन्म होता है। जिसमें प्रसाद के रूप में 'पंजीरी' बांटी जाती है। पंजीरी धनिया, मिश्री, गोटा, मखाना, गोंद डालकर तैयार की जाती है। नाथद्वारा में मेला भरता है।
- भाद्रपद कृष्ण अष्टमी - कृष्ण जन्माष्टमी
- शक्कर पीर बाबा का उर्स - नरहड़ के पीर - चिड़ावा, झुंझुनूं।
- भाद्रपद कृष्ण नवमी -गोगा नवमी।
- भाद्रपद कृष्ण द्वादशी - बछबारस - बछड़े की पूजा।
- भाद्रपद अमावस्या - सतिया अमावस्या।
- भाद्रपद शुक्ल तृतीया - हरतालिका तीज, शिव-पार्वती की पूजा होती है।
- भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी - गणेश चतुर्थी, इस दिन लड़कों का सिंजारा होता है, इस दिन रणथम्भौर में गणेश का मेला भरता है।
- भाद्रपद शुक्ल पंचमी - ऋषि पंचमी, इस दिन जाने-अनजाने में हुए पापों को धोने हेतु व्रत होता है। इस दिन माहेश्वरी समाज में रक्षाबंधन मनाया जाता है। इस दिन गंगा स्नान व बृहस्पतिजी की पूजा होती है।
- भाद्रपद शुक्ल अष्टमी - राधाष्टमी, इस दिन सलेमाबाद (किशनगढ़, अजमेर) में मेला भरता है। इस दिन राधा रानी का जन्म हुआ था।
- भाद्रपद शुक्ल दशमी - तेजा दशमी, विश्वकर्मा जयंती, खेजड़ली वृक्ष मेला (खेजड़ली गाँव, जोधपुर)।
- भाद्रपद शुक्ल एकादशी - जलझुलनी/देवझुलनी एकादशी (भगवान विष्णु को बेवाण में बैठाकर जलाशय में स्नान करवाया जाता है।) पुरूष व्रत रखते हैं।
नोट - बेवाण लकड़ी की मन्दिरनुमा आकृति होती है।
- भाद्रपद चतुर्दशी - अनंत चतुर्दशी, इस दिन गणेश प्रतिमा का विसर्जन होता है। पुरुष व्रत रखते हैं।
नोट - गणेशजी की स्थापना भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को होती है।
- भाद्रपद पूर्णिमा - श्राद्ध।
7. आश्विन
- कृष्ण एकम से अमावस्या - श्राद्ध।
- भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक (16 दिन) मालव प्रदेश में माता पार्वती को समर्पित सांझी का त्योहार मनाया जाता है।
- आश्विन शुक्ल प्रथम - नवरात्रा शारदीय।
- आश्विन शुक्ल अष्टमी - दुर्गाष्टमी, इस दिन कुँवारी कन्याओं को भोजन करवाया जाता है।
- आश्विन शुक्ल नवमी - महानवमी, कुंवारी कन्याओं को भोजन करवाया जाता है।
- आश्विन शुक्ल दशमी - कोटा में दशहरा का मेला भरता है (भारत में दशहरे का मेला मैसूर का प्रसिद्ध है।) इस दिन विजयादशमी मनायी जाती है तथा खेजड़ी वृक्ष की पूजा की जाती है क्योंकि इस दिन पाण्डवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र खेजड़ी वृक्ष पर छुपा कर एक वर्ष अज्ञातवास काटा था। इस दिन लीलटांस पक्षी के दर्शन शुभ माने जाते हैं। हथियारों की पूजा।
नोट : लीलटांस की रचना कन्हैयालाल सेठिया ने की थी।
- दशहरा प्रसिद्ध - कोटा, भरतपुर, जयपुर। डीग
- आश्विन पूर्णिमा - शरद पूर्णिमा इस दिन रात को खीर बनाकर चन्द्रमा की रोशनी में रखते हैं जिसे सुबह खाते हैं। इस दिन चन्द्रमा से अमृत की वर्षा होती है। इस दिन मारवाड़ महोत्सव मनाया जाता है। इसे रास पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन चित्तौड़गढ़ में मीरा महोत्सव तथा बांसवाड़ा में मानगढ़ धाम मेले का आयोजन होता है।
8. कार्तिक
- कार्तिक कृष्ण चतुर्थी - करवा चौथ का व्रत किया जाता है। चौथ माता का मन्दिर चौथ का बरवाड़ा (सवाईमाधोपुर) में है।
- कार्तिक कृष्ण अष्टमी - अहोई अष्टमी का व्रत होता है। संतान की लम्बी उम्र के लिए व्रत।
- कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी - धनतेरस, धन्वंतरी व यमराज की पूजा होती है। इस दिन चाँदी खरीदना शुभ माना जाता है।
- कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी - रूप चौदस, इस दिन हनुमानजी की पूजा होती है। इस दिन छोटी दीपावली या काणी दीपावली मनाई जाती है।
- कार्तिक अमावस्या - दीपावली, इस दिन भगवान राम का वनवास पूर्ण हुआ था। इस दिन महावीर स्वामी व दयानंद सरस्वती की पुण्य तिथि मनाई जाती है।
- कार्तिक शुक्ल प्रथमा - गोवर्धन पूजा व अन्नकूट मनाया जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को बाएं हाथ की सबसे छोटी अंगुली पर उठाया था।
- अन्नकूट - मिठाई का बड़ा लड्डू बनाते हैं, अन्नकूट नाथद्वारा का प्रसिद्ध है, चावल के लूटने को भीलों की लूट कहते हैं।
- कार्तिक शुक्ल (यमुना स्नान) द्वितीया - भैयादूज, इस दिन यम द्वितीया मनाई जाती है।
- कार्तिक शुक्ल अष्टमी - इस दिन गोपाष्टमी व सूर्याष्टमी मनाई जाती है। गाय व बछड़े का पूजन होता है।
- कार्तिक शुक्ल नवमी - आँवला नवमी / अक्षय नवमी - भोजन में आँवला खाया जाता है। आँवला वृक्ष की पूजा होती है।
- कार्तिक शुक्ल एकादशी - देवउठनी ग्यारस / देवोत्थान / प्रबोधिनी / तुलसी एकादशी मनायी जाती है।
- इस दिन तुलसी का विवाह सालिगराम से किया जाता है।
नोट - देवशयनी एकादशी - आषाढ़ शुक्ल एकादशी।
- कार्तिक पूर्णिमा - इस दिन पुष्कर मेला भरता है जो सबसे बड़ा व रंग-बिरंगा मेला है, इस मेले में सर्वाधिक विदेशी पर्यटक आते है। इस दिन सांख्य दर्शन के प्रणेता कपिल मुनि का मेला (कोलायत, बीकानेर) भरता है। इस दिन गुरुनानक जयंती आती है। भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस को मारा। (सत्यनारायण पूर्णिमा) इस दिन गुरुनानक जयन्ती मनाई जाती है।
9. मार्गशीर्ष
- मार्गशीर्ष कृष्णा अष्टमी - इस दिन कालभैरव जयंती मनायी जाती है।
- मार्गशीर्ष कृष्णा दशमी - इस दिन दत्तात्रेय ऋषि का जन्म हुआ था।
- मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी - गीता जयंती मनायी जाती है।
10. पौष
- अमावस्या - इस दिन चौहटन (बाड़मेर) में सुईया मेला भरता है जिसे अर्द्धकुम्भ की मान्यता है।
11. माघ
- माघ कृष्ण चतुर्थी - तिल चौथ। गणेशजी व चौथ माता को तिल का भोग लगाया जाता है। संकट चौथ।
- माघ अमावस्या - मौनी अमावस्या, मनु का जन्मदिवस।
- माघ शुक्ल एकम से नवमी - इन नौ दिनों में गुप्त नवरात्रे किये जाते हैं तथा नौ देवियों की पूजा होती है।
- 1. शैलपुत्री 2. ब्रह्मचारिणी 3. चंद्रघटा 4. कुष्मांडा 5. स्कंदमाता 6. कात्यायनी 7. कालरात्रि 8. महागौरी 9. सिद्धिदात्री।
- माघ शुक्ल पंचमी - बसंत पंचमी, सरस्वती पूजन (मंदिर-पिलानी), कामदेव-रति की आराधना, यौवनोत्सव, बसंत का प्रारंभ। गार्गी पुरस्कार वितरण।
- माघ पूर्णिमा -स्नान।
- जैसलमेर में मरूमेला भरता है, जिसमें लोकसंगीत, रंग बिरंगी पोशाक, ऊँटों की सजावट की जाती है। इस दिन डूंगरपुर में बेणेश्वर मेला भरता है जिसे आदिवासियों का कुम्भ कहते हैं।
12. फाल्गुन
- फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी - शिवरात्रि - शिवजी का जन्म (शिवजी पार्वती की शादी)
नोट - शिवरात्रि मेला - शिवाड़ (सवाईमाधोपुर) महाशिवरात्रि पशु मेला - करौली।
- फाल्गुन शुक्ल द्वितीया - इसे फुलेरा दूज कहते है। यह अबूझ सावा है।
- फाल्गुन शुक्ल एकादशी - पुत्र होने पर पीहर से बच्चे के लिये व वस्त्र खिलौना लाना, जिसे ढुढ़ पूजन कहते है।
- फाल्गुन पूर्णिमा - होली मनायी जाती है। हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रहलाद था जो विष्णु भक्त था जिसे जलाने के लिए हिरण्यकश्यप की बहिन होलिका स्वयं जल गई।
- देवर भाभी की होली- ब्यावर की प्रसिद्ध है।
- कोडमार होली - भिनाय (अजमेर)
- लठ्ठमार होली महावीर जी (करौली) की प्रसिद्ध है।
- पत्थर मार होली बाड़मेर की प्रसिद्ध है।
- भगोरिया होली मेवाड़ की प्रसिद्ध है।
- अंगारों की होली - केकड़ी, अजमेर
- गोबर के कंडो की होली - गलियाकोट (डूंगरपुर)
- कोड़ामार होली - भिनाय (अजमेर)
- फूलों की होली - गोविन्द देवजी (जयपुर)
- दूध-दही की होली - नाथद्वारा (राजसमंद)
- राड़ रमण होली - भीलूड़ा गांव (डूंगरपुर)
- भाटा गैर होली - आहौर (जालौर)
- सांगोद (कोटा) में होली पर न्हाण महोत्सव मनाया जाता है।
- मंडोर (जोधपुर) में होली पर रावजी की गैर खेली जाती है।
- उदयपुर में तलवारों की गैर प्रसिद्ध है।
- आंगी बांगी की गैर कनाना व लाखेटा गाँव (बाड़मेर) की प्रसिद्ध है।
नोट - होलिका के होने वाले पति इलोजी थे। ईला/ईली नृत्य होली पर होता है। बाड़मेर व जालौर में संतान प्राप्ति हेतु महिलाएँ करती है ।
मकर सक्रांति - 14 जनवरी
- सूर्य मकर राशि में प्रवेश।
- सूर्य का उत्तरायण में प्रवेश।
- रूठी सास को मनाने की परंपरा।
- सास, देवर, जेठ को जगाना।
- पतंग महोत्सव होता है, राजस्थान विकास निगम द्वारा जयपुर में कराया जाता है।
- पंजाब में लोहड़ी, बीहू-पूर्वी भारत, पोंगल दक्षिण भारत।
- तेरूंड़ा -सुहासिनिया को 13 वस्तुएँ दान करना।
नोट - सुहासिनिया बहू-बेटी को कहते है।
जैन धर्म के त्यौहार
- ऋषभदेव/आदिनाथ जयंती - चैत्र कृष्ण नवमी।
- चैत्र शुक्ल नवमी - ऋषभ जयंती/जैनधर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव/आदिनाथ का जन्मदिवस।
- महावीर जयन्ती (चैत्र शुक्ल त्रयोदशी) - महावीर स्वामी जैन धर्म के अन्तिम व 24वें तीर्थंकर हुये इस दिन जयपुर में विशाल जुलूस निकाला जाता है।
- रोट तीज (भाद्रपद शुक्ल तृतीया) - इस दिन जैन अनुयायी रोट व खीर बनाते हैं।
- क्षमापणी पर्व (अश्विन कृष्ण प्रथमा) - इस दिन जैन अनुयायी एक-दूसरे के पास जाकर सालभर की गई गलतियों की क्षमा/माफी मांगते है। दिगम्बर जैन में मनाया जाता है। इसे पड़ता ढोक भी कहते है।
- पर्यूषण पर्व (भाद्रपद कृष्ण द्वादशी से भाद्रपद शुक्ल पंचमी) - यह जैन धर्म का महापर्व कहलाता है। पर्यूषण का अन्तिम दिन 'संवत्सरी' कहलाता है।
- दशलक्षण पर्व - श्वेताम्बर इस पर्व को भाद्रपद कृष्ण एकादशी से शुक्ल पंचमी तथा दिगम्बर इसे भाद्रपद शुक्ल पंचमी से चतुर्दशी तक मनाते है।
- सोलह कारण - भाद्रपद माह में मनाया जाता है।
- सुगन्ध दशमी (भाद्रपद शुक्ल दशमी) - इस दिन जैन अनुयायी मंदिर में धूप रखते है तथा व्रत का उद्यापन करते है।
- रत्नत्रय- यह उत्सव भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी से पूर्णिमा तक मनाया जाता है।
- अष्टाहनिका - प्रति चौथे महिने आषाढ़, कार्तिक, फाल्गुन में शुक्ल पक्ष अष्टमी से पूर्णिमा तक मनाया जाता है।
- इस दिन नन्दीश्वर द्वीप व सिद्ध चक्र विधान की पूजा की जाती है माना जाता है कि इस दिन देवगण नन्दीश्वर द्वीप के बावन चैत्यालयों के दर्शन करने आते है ।
सिक्खों के त्यौहार
- गुरूनानक जयन्ती-कार्तिक पूर्णिमा को गुरूनानक जयन्ती मनाई जाती है।
- गुरू नानकजी का जन्म 1469 ई. में तलवंडी (पाक) में हुआ था।
- लोहड़ी-मकर सक्रांति को मनाई जाती है। (13 जनवरी)
- वैशाखी- सिक्ख धर्म के 10वें व अन्तिम गुरू गुरू गोविन्द सिंह ने 13 अप्रैल, 1699 को आनन्दपुर साहेब (पंजाब) में 'खालसा पंथ' की स्थापना की जिसकी खुशी में प्रतिवर्ष 13 अप्रैल को वैशाखी मनाई जाती है।
- गुरू गोविन्दसिंह जयन्ती- पौष शुक्ल सप्तमी को मनाई जाती है।
- गुरू गोविन्द सिंह का जन्म पटना में हुआ था।
ईसाईयों के त्यौहार
- नववर्ष दिवस- एक जनवरी
- गुड फ्राइडे- ईसा मसीह की मृत्यु का दिन।
- इस्टर- अप्रैल में गुड फ्राइडे के बाद रविवार को मनाया जाता है।
- गुड ईस्टर के रविवार के पूर्व शुक्रवार को ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया। इस दिन ईसा का शहीद दिवस मनाया जाता है।
- क्रिसमस डे- 25 दिसम्बर इस दिन ईसा मसीह का जन्मदिन मनाया जाता है।
सिंधी समाज के त्योहार
- चेटीचण्ड/झूलेलाल जयन्ती- चैत्र शुक्ल द्वितीया
- थदड़ी/बड़ी सातम- भाद्रपद कृष्ण सप्तमी- इस दिन सिंधी समाज का 'बास्योड़ा' मनाया जाता है। इस दिन पीपल वृक्ष पर चांदी की मूर्ति रख पूजा की जाती है।
- चालसा महोत्सव- प्रतिवर्ष 16 जुलाई से 24 अगस्त।
- असूचंड पर्व - फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी।
मुस्लिमों के त्योहार
मुस्लिमों के त्योहार हिजरी संवत पर आते है। हिजरी संवत का प्रारम्भ 622 ई. को हुआ था क्योंकि इस दिन मोहम्मद साहब मक्का छोड़कर मदीना गये थे। हिजरी संवत के एक वर्ष में 354 दिन होते हैं।
हिजरी संवत के महिने- (1) मोहर्रम (2) सफर (3) रवि अव्वल (4) रवि उस्मानी (5) जमदियल अव्वल (6) जमादि उस्मानी (7) रज्जब (8) शावान (9) रमजान (10) शव्वाल (11) जिल्काद (12) जिल्हिद
- मोहर्रम- हिजरी संवत के प्रथम महिने मोहर्रम में हजरत मोहम्मद साहब के पुत्र हजरत इमाम-हुसैन धर्म विरोधियों से लड़ते हुये कर्बला (ईरान) के मैदान में शहीद हो गये जिसकी स्मृति में ताजिये निकाले जाते हैं। रामसिंह जयपुर का एकमात्र शासक है जिसका ताजिया निकाला जाता है।
- ईद-उल-मिलाल-दुलनबी- रबी उल अव्वल माह की 12 तारीख। 570 ई. में मोहम्मद साहब का जन्म मक्का (सऊदी अरब) में हुआ था। जिसकी खुशी में यह त्योहार मनाया जाता है। इसे बारावफात भी कहते है।
- ईद-उल-फितर- रमजान माह में 30 दिन रोजे रखे जाते हैं रोजे पूरे होने पर शव्वाल माह की प्रथम तारीख को ईद-उल-फितर मनाई जाती है। इस दिन सवैया बनाई जाती है। जिस कारण इसे सवैया ईद या मीठी ईद कहते हैं।
- ईद-उल-जुहा- हजरत इब्राहिम ने अपने पुत्र इस्माइल की अल्लाह को कुर्बानी दी जिसकी स्मृति में यह त्योहार मनाया जाता है तथा प्रतीक रूप में बकरे की कुर्बानी दी जाती है। यह त्योहार जिल्हिज 10 तारीख में मनाया जाता है। इसे बकरा ईद भी कहते है।
- शबेरात- यह त्योहार शावान माह की 14 तारीख को मनाया जाता है। माना जाता है। कि इस दिन सभी मनुष्यों के कर्मों की जांच होती है तथा कर्मों के अनुसार भाग्य का निर्धारण किया जाता है।
शब-ए-कद्र
- रमजान माह की 27 तारीख इस दिन कुरान मुकम्मल हुआ। मुस्लिम अपने परिजनों की कब्र पर जाकर मोक्ष की दुआ करते हैं।
- रज्जब की 14 तारीख-शब-ए-मेराज
- मोहम्मद साहब की अल्ला से मुलाकात
- शब-ए-कद्र - रमजान की 27 तारीख
- कुरान पृथ्वी पर भेजी गई।
जनवरी
- 12 जनवरी - राष्ट्रीय युवा दिवस व स्वामी विवेकानन्द जयन्ती।
- 15 जनवरी - थल सेना दिवस।
- 19 जनवरी - महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि।
- 23 जनवरी - सुभाष चन्द्र बोस जयन्ती।
- 26 जनवरी - गणतंत्र दिवस।
- 26 जनवरी 1950 भारत का संविधान लागू हुआ था। आजादी पूर्व (1947 से) 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता था जिसकी घोषणा 1929 के लाहौर अधिवेशन में पं. जवाहरलाल नेहरू ने की। इस दिन पुरस्कारों का वितरण व परेड होती है।
- 30 जनवरी - शहीद दिवस/गाँधीजी की पुण्यतिथि 30 जनवरी, 1948 नाथूराम गोडसे ने बिड़ला मंदिर में गाँधीजी की हत्या कर दी थी। इस दिन 2 मिनट का मौन रखा जाता है।
फरवरी
- 21 फरवरी - विश्व मातृभाषा दिवस।
- 22 फरवरी - विश्व स्काउट दिवस।
मार्च
- 8 मार्च - विश्व महिला दिवस।
- 22 मार्च - विश्व जल दिवस।
अप्रैल
- 7 अप्रैल - विश्व स्वास्थ्य दिवस।
- 14 अप्रैल - डॉ. अम्बेडकर जयन्ती।
- 22 अप्रैल - विश्व पृथ्वी दिवस।
मई
- 1 मई - विश्व मजदूर दिवस
- 7 मई - रविन्द्रनाथ टैगोर जयन्ती
- 9 मई - महाराणा प्रताप जयन्ती
- 28 मई - वीर दामोदर सावरकर जयन्ती
- 31 मई - विश्व तम्बाकू निषेध दिवस
जून
- 5 जून - विश्व पर्यावरण दिवस
- 21 जून - अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस
- 26 जून - अंतर्राष्ट्रीय मादक द्रव्य निषेध दिवस
जुलाई
- 15 जुलाई - विश्व युवा कौशल दिवस
- 31 जुलाई - मुंशी प्रेमचंद जयन्ती
अगस्त
- 15 अगस्त - स्वतंत्रता दिवस
- 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ था। सांस्कृतिक आयोजन, परेड, पुरस्कार वितरण किये जाते हैं। दिल्ली के लाल किले पर प्रधानमंत्री झण्डा फहराते है तथा भाषण देते है।
- 20 अगस्त - सद्भावना दिवस
- 29 अगस्त - राष्ट्रीय खेल दिवस
सितम्बर
- 5 सितम्बर - शिक्षक दिवस इस दिन डॉ. राधाकृष्ण की जयन्ती मनाई जाती है।
- 8 सितम्बर - विश्व साक्षरता दिवस
- 14 सितम्बर - हिन्दी दिवस
- 27 सितम्बर - विश्व पर्यटन दिवस
अक्टूबर
2 अक्टूबर - विश्व अहिंसा दिवस। इस दिन गांधी जयन्ती मनाई जाती है। इस दिन लाल बहादुर शास्त्री जयन्ती भी मनाई जाती हैं
5 अक्टूबर - विश्व शिक्षक दिवस
8 अक्टूबर - भारतीय वायुसेना दिवस
16 अक्टूबर - विश्व खाद्य दिवस
24 अक्टूबर - संयुक्त राष्ट्र दिवस
31 अक्टूबर - राष्ट्रीय एकता दिवस इस दिन सरदार वल्लभ भाई पटेल जयन्ती मनाई जाती है।
महत्वपूर्ण मेले व महोत्सव
बीकानेर, चूरू और उत्तरी क्षेत्र:
- ऊँट महोत्सव: बीकानेर (जनवरी) - विशेष: 6-8 मार्च 2022
- राजस्थान कबीरयात्रा: बीकानेर (2-8 अक्टूबर 2021) - विशेष: यह एक यात्रा संगीत समारोह है
- कपिल मुनि का मेला: कोलायत (बीकानेर) (कार्तिक पूर्णिमा) - विशेष: जांगल प्रदेश का सबसे बड़ा मेला
- जाम्भो जी का मेला: मुकाम, बीकानेर
- साहवा मेला: साहवा, चूरू (गुरुनानक जयन्ती पर) - विशेष: राजस्थान में सिक्खों का सबसे बड़ा मेला
- गुरुद्वारा बुड्ढा जोहड़ मेला: श्रीगंगानगर (श्रावण अमावस्या) - विशेष: हरियाली अमावस्या पर
- सालासर बालाजी मेला: सालासर, चूरू (चैत्र पूर्णिमा)
- गोगाजी मेला: गोगामेड़ी, हनुमानगढ़ (भाद्रपद कृष्ण नवमी)
- डाडा पम्पाराम मेला: विजयनगर (श्रीगंगानगर) (फाल्गुन माह)
भरतपुर, डीग और धौलपुर क्षेत्र:
- डीग महोत्सव: डीग (कृष्ण जन्माष्टमी पर)
- ब्रज होली महोत्सव: भरतपुर (फरवरी-मार्च) - विशेष: 12-14 मार्च 2022
- भोजन थाली मेला: कामां (डीग) (भाद्रपद शुक्ल पंचमी)
- गंगा दशहरा मेला: कामां (डीग) (ज्येष्ठ माह) - विशेष: ज्येष्ठ शुक्ल सप्तमी से द्वादशी तक
- कृष्ण जन्माष्टमी पर्व: कामां (डीग) (भाद्रपद कृष्ण अष्टमी) - विशेष: अगस्त
- बारह भाई मेला: धौलपुर
- बाबू महाराज का मेला: धौलपुर (भाद्रपद शुक्ल द्वितीया) - विशेष: गुर्जर जाति के आराध्य देव हैं
करौली, सवाई माधोपुर और अजमेर क्षेत्र:
- श्री महावीर जी मेला: चांदन गांव, करौली (चैत्र शुक्ला त्रयोदशी से वैशाख कृष्ण एकम) - विशेष: राजस्थान में जैन समुदाय का सबसे बड़ा मेला है और सद्भाव का उदाहरण है
- गणेश जी मेला: रणथम्भौर, सवाईमाधोपुर (भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी)
- शिवरात्रि मेला: शिवाड़, सवाईमाधोपुर (माघ शुक्ल चतुर्थी)
- कैला देवी मेला: करौली (अप्रैल) - विशेष: चैत्र शुक्ल अष्टमी
- चौथ माता मेला: चौथ का बरवाड़ा (माघ कृष्ण चतुर्थी)
- नागौर मेला: नागौर (जनवरी-फरवरी) - विशेष: 6-9 फरवरी 2022
- धार्मिक संगीत समारोह: पुष्कर (अजमेर)
- ख्वाजामोइनुद्दीन चिश्ती का उर्स: अजमेर (रज्जब माह की) - विशेष: 27 जनवरी से 2 फरवरी 2022, 1 से 6 तारीख (810वां उर्स)
- पुष्कर मेला: पुष्कर (अजमेर) (कार्तिक पूर्णिमा) - विशेष: कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा, 1-8 नवम्बर 2022
- कल्पवृक्ष मेला: मांगलियावास (ब्यावर) (श्रावण अमावस्या)
- चारभुजानाथ मेला: मेड़ता सिटी, नागौर (श्रावण शुक्ल एकादशी से भाद्रपद कृष्ण तृतीया)
जयपुर, दौसा और अन्य:
- जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल: जयपुर (5-15 मार्च 2022) - विशेष: यह एक साहित्यिक उत्सव है
- आभानेरी महोत्सव: आभानेरी (दौसा) (सितम्बर-अक्टूबर) - विशेष: पर्यटन विभाग द्वारा, 27-28 सितम्बर 2022
- अंतराष्ट्रीय फोटोग्राफी महोत्सव: जयपुर
- पिंकसिटी फेस्टिवल: जयपुर (जनवरी)
- पतंग महोत्सव: जयपुर (14 जनवरी) - विशेष: मकर संक्रांति पर
- ग्रीष्म महोत्सव: जयपुर (मई-जून)
- हाथी महोत्सव: जयपुर (मार्च) - विशेष: 17 मार्च 2022
- तीज उत्सव: जयपुर (जुलाई-अगस्त/अगस्त 2022) - विशेष: (श्रावण शुक्ल 3) 31 जुलाई-1 अगस्त
- गणगौर उत्सव/मेला: जयपुर (मार्च-अप्रैल) - विशेष: (चैत्र शुक्ल 3) 4-5 अप्रैल 2022
- राजस्थान फेस्टिवल: जयपुर (30 मार्च) - विशेष: 30 मार्च 2022
- बाणगंगा मेला: बैराठ (कोटपुतली-बहरोड़) (वैशाख पूर्णिमा)
- शीतला माता मेला: शील की डूंगरी, चाकसू (जयपुर) (चैत्र कृष्ण अष्टमी)
- रानी सती मेला: झुंझुनूं (भाद्रपद अमावस्या)
- मेहन्दीपुर बालाजी मेला: मेहन्दीपुर (दौसा) (चैत्र पूर्णिमा)
- चूहड़ सिद्ध का मेला: अलवर (महाशिवरात्रि पर)
- नरहड़ पीर मेला/उर्स: नरहड़ (झुंझुनूं) (कृष्ण जन्माष्टमी)
- भर्तृहरि का मेला: भर्तृहरि (अलवर) (वैशाख व भाद्रपद) - विशेष: कनफटे साधुओं का कुम्भ कहलाता है। यहाँ भर्तृहरि की समाधि है
कोटा, बूंदी और दक्षिणी राजस्थान:
- दशहरा उत्सव: कोटा (अक्टूबर) - विशेष: आश्विन शुक्ल दशमी
- एडवेंचर स्पोर्ट्स: कोटा-बूंदी (फरवरी) - विशेष: 05-22 अक्टूबर 2022
- बूंदी उत्सव: बूंदी (नवम्बर-दिसम्बर) - विशेष: 11-13 नवम्बर 2022
- कजली तीज मेला: बूंदी (भाद्रपद कृष्ण तृतीया) - विशेष: 14-15 अगस्त 2022
- गौमतीसागर मेला: झालरापाटन (झालावाड़) (वैशाख पूर्णिमा)
- सीताबाड़ी मेला: सीताबाड़ी (बारां) (ज्येष्ठ अमावस्या) - विशेष: यह हाड़ौती क्षेत्र का सबसे बड़ा मेला है
- चन्द्रभागा मेला: झालरापाटन (झालावाड़) (कार्तिक पूर्णिमा) - विशेष: अक्टूबर-नवम्बर इसे हाड़ौती का सुरंगा मेला कहा जाता है, 7-9 नवम्बर 2022
- डोल मेला: बारां (भाद्रपद शुक्ल एकादशी) - विशेष: डोल तालाब के किनारे, जलझुलनी एकादशी पर देव विमानों सहित शोभा यात्रा निकलती है
- कपिलधारा मेला: बारां (कार्तिक पूर्णिमा)
- मैंगो फेस्टिवल: बांसवाड़ा (7-9 जून 2019) - विशेष: यह राजस्थान का पहला मैंगो फेस्टिवल था
- वागड़ मेला: डूंगरपुर (नवम्बर)
- कुम्भलगढ़ फेस्टिवल: राजसमंद (दिसम्बर) - विशेष: 1-3 दिसम्बर 2022
- मेवाड़ महोत्सव: उदयपुर (मार्च-अप्रैल) - विशेष: 4-6 अप्रैल 2022
- शिल्पग्राम महोत्सव: उदयपुर (दिसम्बर) - विशेष: 21-31 दिसम्बर 2022
- फोर्ट फेस्टिवल: चित्तौड़गढ़ (फरवरी-मार्च) - विशेष: 12-13 मार्च 2021
- जौहर श्रद्धांजलि समारोह: चित्तौड़गढ़ (चैत्र कृष्ण एकादशी) - विशेष: (जौहर स्मृति संस्थान द्वारा) 26-28 मार्च 2022
- मीरां महोत्सव: चित्तौड़गढ़ (आश्विन पूर्णिमा)
- आदि महोत्सव: उदयपुर (जून) - विशेष: आदिवासियों की संस्कृति व कलाओं को संरक्षण देने के उद्देश्य से 14 से 16 जून 2019 को आयोजित किया गया
- उदयपुर बर्ड फेस्टिवल: उदयपुर (16-18 सितम्बर 2022)
- सीतामाता मेला: सीतामाता (बारां) (ज्येष्ठ अमावस्या)
- गलियाकोट उर्स: गलियाकोट (डूंगरपुर) (मुहर्रम 27) - विशेष: दाऊदी बोहरा सम्प्रदाय का उर्स है
- गौतमेश्वर मेला: गौतमेश्वर (प्रतापगढ़) (वैशाख पूर्णिमा)
- प्रताप जयन्ती: हल्दीघाटी (राजसमंद) (ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया)
- मानगढ़ धाम मेला: मानगढ़ (बांसवाड़ा) (आश्विन पूर्णिमा)
- घोटिया अम्बा मेला: घोटिया (बोरीगामा, बांसवाड़ा) (चैत्र अमावस्या)
- चेतक अश्व मेला: हल्दीघाटी (राजसमंद) (19 जनवरी) - विशेष: प्रतिवर्ष महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर आयोजित होता है, पिछले 3 साल से बंद है
- अन्नकूट महोत्सव: नाथद्वारा (राजसमंद) (कार्तिक शुक्ल एकम)
- राम रावण मेला: बड़ी सादड़ी (चित्तौड़गढ़) (चैत्र शुक्ल दशमी)
- ऋषभदेव (उदयपुर): (चैत्र कृष्ण अष्टमी व नवमी)
- मातृकुण्डिया मेला: राश्मी (चित्तौड़गढ़) (वैशाख पूर्णिमा)
- विक्रमादित्य मेला: उदयपुर (चैत्र अमावस्या)
- एकलिंग जी मेला: कैलाशपुरी (उदयपुर) (फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी)
मारवाड़ और थार क्षेत्र:
- रणकपुर जवाई बाँध महोत्सव: रणकपुर (सादड़ी, पाली) (दिसम्बर) - विशेष: 21-22 दिसम्बर 2022
- शरद महोत्सव: माउन्ट आबू (सिरोही) (दिसम्बर) - विशेष: 29-30 दिसम्बर 2022
- ग्रीष्म महोत्सव: माउन्ट आबू (मई-जून) - विशेष: 13-15 मई 2022
- मारवाड़ महोत्सव: जोधपुर (अक्टूबर) - विशेष: 8-9 अक्टूबर 2022 (आश्विन पूर्णिमा)
- मरु महोत्सव: जैसलमेर (जनवरी-फरवरी) - विशेष: 13-16 फरवरी 2022 (माघ पूर्णिमा)
- थार महोत्सव: बाड़मेर (फरवरी) - विशेष: 28-30 मार्च 2022
- बैलून महोत्सव: बाड़मेर (अप्रैल)
- जैसलमेर पतंग महोत्सव: जैसलमेर (फरवरी) - विशेष: 15 से 17 फरवरी 2022
- वीरपुरी मेला: मंडोर (जोधपुर) (श्रावण का अंतिम सोमवार)
- खेजड़ली मेला: खेजड़ली मेला, जोधपुर (भाद्रपद शुक्ल दशमी)
- नागपंचमी मेला: मंडोर, जोधपुर (भाद्रपद शुक्ल पंचमी) - विशेष: यह मेला कुछ वर्षों से बंद है
- धींगा गवर बेंतमार मेला: जोधपुर (वैशाख कृष्ण तृतीया)
- रामदेवरा मेला: रूणेचा (जैसलमेर) (भाद्रपद शुक्ल द्वितीया) - विशेष: इसमें तेरहताली नृत्य का आयोजन एकादशी तक होता है
- सुईया मेला: चौहटन, बाड़मेर (पौष अमावस्या) - विशेष: इसे 'अर्द्धकुम्भ' कहा जाता है
- गोर मेला: सियावा, सिरोही (वैशाख शुक्ल चतुर्थी)
- नाकोड़ा मेला: नाकोड़ा, बाड़मेर (शीतलाष्टमी पर)
- चुंभी तीर्थ मेला: चुंभी तीर्थ, जैसलमेर (भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी)
अन्य:
- फुलडोल महोत्सव: शाहपुरा (भीलवाड़ा) (चैत्र कृष्णा 1-5) - विशेष: यह रामस्नेही सम्प्रदाय का महोत्सव है
- डिग्गी के कल्याण जी का मेला: डिग्गीपुरी (टोंक) (श्रावण अमावस्या) - विशेष: भगवान विष्णु ने राजा डिगव के कुष्ठ रोग का निदान किया था, इसलिए इस मंदिर का नाम कल्याण मंदिर पड़ा
- अलवर महोत्सव: अलवर (फरवरी)
- शेखावाटी महोत्सव: (लक्ष्मणगढ़) सीकर (फरवरी-मार्च) - विशेष: 20-22 दिसम्बर 2022
- मत्स्य महोत्सव: अलवर (फरवरी)
- जयपुर जैज़ एंड ब्लूज फेस्टिवल: जयपुर (11-13 नवम्बर 2022)

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