राजस्थान में विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, एवं जैव विविधता

राजस्थान में विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, एवं जैव विविधता

इस लेख में राजस्थान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की कार्यप्रणाली और जन सूचना पोर्टल जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई है। इसमें राज्य के प्रमुख विज्ञान केंद्रों, जैव विविधता और वानिकी प्रोजेक्ट्स (RFBP) को कवर किया गया है। यह लेख विशेष रूप से RAS, REET, CET और राजस्थान पुलिस जैसी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग

राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी परियोजनाओं को सुव्यवस्थित, योजनाबद्ध एवं उचित दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने वर्ष 1987 में कम्प्यूटर निदेशालय की स्थापना की। 13 मई, 2022 को इसके कार्य क्षेत्र के अनुरूप इस संस्था का नाम सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग (Department of information Technology & communication- DOIT & C) कर दिया गया। 13 मई, 2022 को सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग के कार्यविधि नियमों में संशोधन किया गया। संशोधित कार्यविधि नियम निम्न प्रकार है-
राजस्थान में कम्प्यूटरीकरण के लिए नोडल एजेन्सी के रूप में कार्य करना, सरकारी विभागों और संगठनों में कम्प्यूटर, दूरसंचार और आधुनिक कार्यालय उपकरणों के प्रयोग के प्रति जागरूकता पैदा करना, उन्हें प्रोत्साहित करना एवं उनका प्रचार करना।

निम्नलिखित को सम्मिलित करते हुए राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी एवं दूरसंचार के विकास और प्रयोग से संबंधित सभी पहलुओं पर नीतियों का निरूपण करना:
  1. समग्र निर्देश और मार्गदर्शन करना।
  2. विभागों के कम्प्यूटरीकरण के लिये नीति और उनके क्रियान्वयन को मॉनिटर करना।
  3. सरकार में प्रयुक्त होने वाली समुचित संचार/नेटवर्क प्रौद्योगिकी की पहचान करना
  4. सरकार की सभी एजेन्सियों द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी एवं दूरसंचार अवसंरचना के सृजन और सुदृढ़ीकरण के मामले में समन्वय करना।

राजकॉम्प इन्फो सर्विसेज लिमिटेड

वर्ष 1989 में राज्य सरकार ने राजस्थान स्टेट कम्प्यूटर सर्विसेज राजकॉम्प (Rajasthan State Computer Service-RajComp) नामक उपक्रम की सोसाइटी के रूप में स्थापना की थी। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार क्षेत्र में प्रशिक्षण, राज्य सरकार के विभागों को तकनीकी परामर्श प्रदान करना एवं परियोजनाओं को क्रियान्वित करना है। सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग एवं राजकॉम्प राज्य सरकार की सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार योजनाओं को क्रियान्वित करते है।

राजस्थान नॉलेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड

शहरी एवं दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना प्रौद्योगिकी शिक्षा प्रदान कर ''डिजिटल डिवाइड'' को मिटाने हेतु राजस्थान नॉलेज कॉर्पोरेशन की स्थापना की गई है। आर.के.सी.एल. का RS-CIT पाठ्यक्रम राजस्थान सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है। राज्य सरकार के अनुमोदन के पश्चात् इस पाठ्यक्रम के लिये राज्य कर्मचारियों को शुल्क पुनर्भरण के आदेश जारी किये गये हैं।

विभाग द्वारा किये गये अभिनव प्रयोग
जन सूचना पोर्टल: जन सूचना पोर्टल का लोकार्पण दिनांक 13.09.2019 को माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा किया गया। जनसूचना पोर्टल 13 विभागों की 23 योजनाओं से संबंधित 44 सूचनाओं के साथ आरम्भ किया गया।
परियोजना का उद्देश्य: जनसूचना पोर्टल-2019 का उद्देश्य सोशल ऑडिट के साथ-साथ आम-जन को सरकारी विभागों, प्राधिकरणों, निगमों आदि से संधारित सूचनाएँ क्षेत्रवार व निजी जानकारी के अनुसार सरल भाषा व आसान तरीके से उपलब्ध करवाया जाना है।
परियोजना की वर्षवार प्रगति: जनसूचना पोर्टल पर उपलब्ध सूचनाओं की प्रगति तालिका दिनांक 21 दिसम्बर 2022 तक निम्नानुसार है:

राज उद्योग-मित्र
यदि कोई उद्यमी नये सूक्ष्म, लघु या मध्यम उद्यम (MSME) को शुरू करना या उसे संचालित करना चाहता है, तो उसे एमएसएमई एक्ट 2019 के तहत् राज्य में 3 साल तक किसी भी प्रकार की स्वीकृति लेने की आवश्यकता नहीं है। उद्यमी राज उद्योग-मित्र पोर्टल पर आधार नंबर के माध्यम से रजिस्टर कर 3 साल तक की अवधि के स्वीकृति पत्र प्राप्त कर सकता है। 3 वर्ष की अवधि के लिए किसी भी कानून के तहत् उसके उद्यम का निरीक्षण नहीं किया जाएगा। इस योजना में मुख्य रूप से उन व्यवसायियों को रजिस्ट्रेशन करने का लाभ प्राप्त होगा, जो नये व्यवसाय या स्टार्टअप को शुरू करना चाहते हैं। इस एक्ट का उद्देश्य राज्य में आजीविका, समावेशी आर्थिक विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देना है।

राजस्थान सेंटर फॉर एप्लीकेशन डेवलपमेंट (RajCAD)
सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग के आंतरिक मानव संसाधनों के तकनीकी कौशल का उपयोग और संवर्धन करते हुए उपयुक्त लागत में विश्वसनीय और समयबद्ध तरीके से राज्य सरकार की आईटी परियोजनाओं को विस्तारित करने के मिशन को दृष्टिगत रखते हुए, विभाग द्वारा राजस्थान सेंटर फॉर एप्लीकेशन डेवलपमेंट (RajCAD) की स्थापना की गई है। वर्तमान में 58 सूचना सहायक/सहायक प्रोग्रामर की संख्या के साथ संचालित है।

राजीव गाँधी फिनटेक डिजिटल इंस्टीट्यूट (RGFDI), जोधपुर
फिनटेक दुनियाभर में सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक है। फिनटेक क्षेत्र में वित्तीय सेवाओं के वितरण में तीव्रता, मजबूती, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के लिए तथा वित्तीय अनुप्रयोगों के विकास एवं उत्पादों में नई डिजिटल तकनीकों का उपयोग किया जाता है। देश में फिनटेक स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में वृद्धि के साथ, वित्तीय और नवीन आई.टी. प्रौद्योगिकियों के मिश्रित कौशल वाली जनशक्ति की आपूर्ति एवं उपलब्धता में एक बड़ा अंतर है।
राज्य के युवाओं को फिनटेक क्षेत्र में तैयार करने के उद्देश्य से राजस्थान सरकार ने बजट सत्र वर्ष 2021-22 में राजीव गाँधी फिनटेक डिजिटल इंस्टीट्यूट स्थापित किए जाने की घोषणा की थी।

इस संस्थान में दो प्रकार के पाठ्यक्रम आयोजित किये जायेंगे-
  • प्रथमतः यह एक फिनिशिंग स्कूल की तरह कार्य करेगा जहाँ डिजिटल एवं वित्तीय प्रौद्योगिकी डोमेन में प्रमाण पत्र कोर्सेज तथा डिप्लोमा कोर्सेज की सुविधा उपलब्ध होगी।
  • द्वितीयतः यह इंस्टीट्यूट विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् (एआईसीटीई) द्वारा मान्यता प्राप्त होगा तथा यह संस्थान वित्तीय प्रौद्योगिकी डोमेन में स्नातक, स्नातकोत्तर डिग्री और डॉक्टरेट अनुसंधान के पाठ्यक्रम आयोजित करेगा।

आरटीआई पोर्टल
राजस्थान ऐसा पहला प्रदेश है जहाँ सभी विभागों/बोर्डों/स्वायत्त शासन संस्थाओं को ऑनलाइन “आर.टी.आई. पोर्टल” पर जोड़ दिया गया है। आर.टी.आई. पोर्टल पर आर.टी.आई. अधिनियम-2005 के तहत् अनिवार्य सभी सूचनाएँ एवं सेवाएँ प्रदान की जाती है। इसे माननीय मुख्यमंत्री द्वारा 01 अक्टूबर, 2013 को शुरू किया गया था। वर्तमान में 275 विभागों के 58000 से अधिक सहायक लोक सूचना अधिकारी, लोक सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपील अधिकारी ऑनलाइन “आरटीआई पोर्टल” rti.rajasthan.gov.in का उपयोग कर रहे है।

राजस्थान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विकास

राज्य के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को उद्देश्यपूर्ण ढंग से प्रोत्साहित करने एवं राज्य की नीतियों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के समावेश हेतु सलाह एवं सहयोग प्रदान करने हेतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की स्थापना 1983 में की गयी।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डी.एस.टी.) की स्थापना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के सहयोग से समाज में वैज्ञानिक वातावरण विकसित करने तथा जनता की सामाजिक-आर्थिक स्थिति विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों एवं समाज के कमजोर वर्ग के उत्थान हेतु की गई।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए तथा विभिन्न कार्यक्रमों में उद्देश्यपूर्ण उपयोग के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग के साथ-साथ राज्य की नीति में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग के साथ-साथ राज्य की नीति में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के समावेश के लिए विभिन्न विभागों से समन्वय करता है।
विभाग के विभिन्न कार्यक्रम एवं गतिविधियों को अजमेर (मुख्यालय-जयपुर), बीकानेर, कोटा, जोधपुर और उदयपुर स्थित सुस्थापित क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से निष्पादित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त स्टेट रिमोट सेन्सिंग एप्लीकेशन सेन्टर (एस.आर.एस.ए.सी.), जोधपुर द्वारा सुदूर संवेदन गतिविधियां की जा रही हैं।

उद्देश्य
  • सामाजिक-आर्थिक उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों को बढ़ावा देने के क्रम में राज्य सरकार को नीति निर्धारण हेतु सहयोग प्रदान करना।
  • सामाजिक-आर्थिक उद्देश्यों खासकर/विशेषकर पिछड़ेपन, बेरोजगारी एवं गरीबी की समस्या के समाधान हेतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्रों का चिन्हिकरण करना।
  • शैक्षणिक, वैज्ञानिक एवं अभियांत्रिकी संस्थानों में अनुसंधान को बढ़ावा देना एवं उत्कृष्टता केन्द्रों की स्थापना एवं उनका संचालन।
  • राज्य के प्राकृतिक संसाधनों के लाभप्रद उपयोग हेतु संस्थानों/संगठनों के सहयोग से विकास एवं अनुसंधान परियोजनाओं के निर्धारण हेतु सहयोग/सहायता/समन्वय स्थापित करना।
  • अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नये वैज्ञानिक क्षेत्र जैसे- नैनो टैक्नोलॉजी, बायोटैक्नोलॉजी, उपग्रह संचार, प्लाज्मा तकनीकी तथा प्रौद्योगिकियों का मानकीकरण आदि क्षेत्रों में गतिविधियों का निर्धारण एवं क्रियान्वयन।
  • राज्य के जन सामान्य में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने एवं विज्ञान के लोकप्रियकरण हेतु विज्ञान पार्क/विज्ञान केन्द्रों की स्थापना।
  • विद्यालय स्तर पर विज्ञान विषय की शिक्षा की अवस्थिति का आंकलन एवं विज्ञान विषय के अध्ययन के सुदृढ़ीकरण हेतु कार्य योजना का निर्धारण।
  • प्रौद्योगिकी हस्तानान्तरण एवं सफल प्रौद्योगिकियों की राज्य के विभागों के माध्यम से पुनरावृत्ति हेतु अन्तर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों/सी.एस.आई.आर. प्रयोगशालाओं से सहभागिता करना।
  • राज्य की वैज्ञानिक संस्थाओं एवं अन्य राज्यों की विज्ञान परिषदों से कार्यक्रम आधारित सहयोग एवं समन्वय स्थापित करना।
  • सुदूर संवेदन एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) के माध्यम से राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का डाटा बेस तैयार करना एवं इन आंकड़ों का उपयोग विकास परियोजनाओं एवं कार्यक्रमों के निर्धारण हेतु किया जाना।
  • मानव संसाधन विकास की विशिष्ट आवश्यकता की पहचान हेतु उद्योगों एवं शैक्षणिक संस्थानों में संबंध स्थापित करने की संभावनाएं खोजना। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में शिक्षा प्राप्त व्यक्तियों हेतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित उद्यमिता विकास कार्यक्रम आयोजित करना।
  • राज्य के लिये विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी दृष्टिकोण दस्तावेज का निर्धारण।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी गैप्स के चिन्हिकरण में सहायता एवं व्यूह रचना बनाने में सेतु का काम करना।
  • आधारभूत स्तर के नवप्रवर्तकों की सृजनशीलता को बढ़ावा देने, नवप्रवर्तकों द्वारा किये जा रहे प्रयासों को मान्यता प्रदान करने तथा नवाचारों को व्यावहारिक रूप में क्रियान्वित करने के लिये आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास के कार्यों हेतु इनाम एवं पारितोषिक की स्थापना।
  • बौद्धिक सम्पदा अधिकार की ऐसी व्यवस्था किया जाना जिसमें सभी प्रकार के आविष्कारकों को बौद्धिक सम्पदा के सृजन एवं संरक्षण हेतु प्रेरणा मिल सके एवं इस पद्धति के अन्तर्गत लोकहित में इन आविष्कारों के प्रभावी देशीय वाणिज्यकरण हेतु प्रभावशाली, सहयोग एवं विशुद्ध नीति परिवेश का निर्माण करना।

वित्तीय वर्ष 2022-23 की महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ

  • एस्ट्रोनोमी विज्ञान में अमेरिकी अन्तरिक्ष एजेन्सी नासा द्वारा प्रायोजित अन्तर्राष्ट्रीय खगोलीय खोज, अभियान में राज्य के साइंस एवं स्पेस क्लब के 400 विद्यार्थियों को भाग लेने का अवसर प्रदान किया गया। विद्यार्थियों द्वारा 600 से अधिक खगोलीय गतिविधियों की पहचान की गयी।
  • आजादी की 75 वीं वर्षगांठ पर आजादी के अमृत महोत्सव के अन्तर्गत राजस्थान साइंस लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन सभी 33 जिला मुख्यालयों पर किया गया जिसमें साइंस बुक सेशन, फैलोशिप प्रोग्राम, इनोवेशन पीचींग सेशन AWSAR प्रोग्राम, डीबेट कम्पीटीशन एवं स्लोगन राईटिंग कम्पीटीशन आदि को सम्मिलित किया गया।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा एस्ट्रोनाइट स्काई ट्यूरीज़्म का आयोजन विभिन्न स्थानों पर यथा जवाहर कला केन्द्र, सांभर लेक तथा बीकानेर हाउस दिल्ली में किया गया। इस कार्यक्रम में लीरियड उल्का बौछार का आनंद प्रतिभागियों द्वारा उठाया गया एवं टेलीस्कोप के माध्यम से चन्द्रमा भी देखा गया। इस कार्यक्रम में लगभग 960 विद्यार्थियों एवं आमजन ने हिस्सा लिया।
  • महिला दिवस पर प्रथम बार दिनांक 15.03.2022 को राज्य की 101 महिला वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया।
  • विभाग द्वारा क्षेत्रीय कार्यालयों अजमेर, भरतपुर, कोटा, बीकानेर, उदयपुर एवं जोधपुर के खण्ड स्तरीय विज्ञान नाटक उत्सव प्रतियोगिता 2022 के विजेता प्रतिभागियों द्वारा राज्य स्तरीय नाटक उत्सव प्रतियोगिता 2022 में भाग लिया गया। राज्य स्तरीय विजेता टीम द्वारा दिनांक 18.11.2022 को मुम्बई में राष्ट्रीय स्तर आयोजित पर विज्ञान नाटक उत्सव 2022 में द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
  • विभाग द्वारा क्षेत्रीय कार्यालयों अजमेर, भरतपुर, कोटा, बीकानेर, उदयपुर एवं जोधपुर के खण्ड स्तरीय मॉडल एवं टिचिंग एड प्रतियोगिता 2022 में आयोजित की गयी। राज्य स्तरीय विज्ञान मॉडल एवं टिचिंग एड प्रतियोगिता 2022 दिनांक 06 व 07 दिसम्बर, 2022 को उप क्षेत्रीय विज्ञान केन्द्र, जोधपुर में की गयी। जिसमें 25 टीम मॉडल एवं 16 टीचिंग एड मॉडल प्रदर्शित किये गये। इनमें से चयनित प्रथम 5 मॉडल व 3 टीचिंग को माह जनवरी, 2023 के अंत में नेहरू साइन्स सेंटर मुंबई में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्तर प्रतियोगिता में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त होगा।

गतिविधियाँ एवं कार्यक्रम

विभाग के विभिन्न कार्यक्रम/गतिविधियो का क्रियान्वयन अजमेर (मुख्यालय जयपुर), बीकानेर, कोटा, जोधपुर और उदयपुर में स्थापित विभाग के क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से किया जा रहा है। सुदूर संवेदन अनुप्रयोगो आधारित गतिविधियां "स्टेट रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेन्टर" जोधपुर के माध्यम से सम्पादित की जा रही है। राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के समन्वय से स्थापित क्षेत्रीय विज्ञान केन्द्र, जयपुर एवं उपक्षेत्रीय विज्ञान केन्द्र, जोधपुर द्वारा भी विज्ञान संचार एवं लोकप्रियकरण की विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जा रही है।
राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने एवं विभाग के निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु विभागीय कार्यकलाप निम्नांकित केन्द्र/प्रभागों के माध्यम से क्रियान्वित किये जा रहे है।
  1. राज्य सुदूर संवेदन अनुप्रयोग केन्द्र (स्टेट रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेन्टर)
  2. विज्ञान संचार एवं लोकप्रियकरण प्रभाग
  3. विज्ञान एवं समाज प्रभाग
  4. उद्यमवृति विकास कार्यक्रम प्रभाग
  5. अनुसंधान एवं विकास प्रभाग
  6. जैव प्रौद्योगिकी प्रभाग
  7. पेटेंट सूचना केन्द्र प्रभाग

राज्य सुदूर संवेदन अनुप्रयोग केन्द्र (स्टेट रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेन्टर)

  • विभाग का जोधपुर स्थित स्टेट रिमोट सेन्सिग एप्लीकेशन सेन्टर, राज्य के विभिन्न विभागों की विकास योजनाएँ बनाने हेतु प्राकृतिक संसाधनों व अन्य आधारभूत ढाँचे सम्बन्धी सूचनाएँ उपलब्ध कराते हुए 39 वर्षों से महत्वपूर्ण योगदान प्रदान कर रहा है।
  • लाभान्वित होने वाले महत्वपूर्ण विभाग हैं- कृषि, जलग्रहण विकास विभाग, भू-जल, वन विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, शिक्षा विभाग, नगर नियोजन विभाग, पंचायती राज विभाग, पशुपालन विभाग, नगर विकास विभाग, जल संसाधन विभाग, निर्वाचन विभाग, ऊर्जा विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग, आबकारी विभाग, पुलिस विभाग, यातायात विभाग, औद्योगिक विभाग, आयुर्वेदिक विभाग, रेलवे विभाग इत्यादि।
  • वर्तमान में केन्द्र पर वन, जलग्रहण विकास एवं मृदा संरक्षण, जल संसाधन, कृषि, शिक्षा RIICO निर्वाचन विभाग के सहयोग से विभिन्न योजनाओं पर कार्य चल रहा है। इस वर्ष केन्द्र ने उपग्रह छाया चित्रों की मदद से विभिन्न जिलों के वन खण्डों के नक्शे पूर्ण कर वन विभाग को सौंप दिए है।
  • कृषि विभाग द्वारा तैयार किये जा रहे कृषकों के मृदा स्वास्थ्य कार्ड का विभिन्न फसलों में आवश्यकतानुसार खाद के उचित प्रबंधन हेतु सिंचित एवं असिंचित क्षेत्रों के खसरा मानचित्रों पर रिमोट सेन्सिग एवं जी.आई.एस. तकनीक का उपयोग करते हुए वैज्ञानिक जानकारियों को चिन्हित कर प्रबंधन का कार्य किया जा रहा है।
  • प्रत्येक वर्ष केन्द्र द्वारा खरीफ एवं रबी के मौसम में उपग्रह छाया चित्रों के माध्यम से प्रदेश स्तर पर 22 जिलों में गेहूँ, 22 जिलों में सरसों एवं 4 जिलों में कपास फसल के क्षेत्रफल ज्ञात किया जा रहा हैं। जिनका उपयोग कृषि विभाग, राजस्थान सरकार, राजस्व विभाग, राजस्थान सरकार एवं केन्द्र सरकार द्वारा प्रदेश में कुल बुआई क्षेत्रफल एवं कृषि उत्पादन के आँकड़ों के पूर्वानुमानों में किया जाता है।
  • प्रदेश स्तर पर मानवीय एवं प्राकृतिक गतिविधियों के कारण होने वाले परिवर्तनों की व्याख्या के लिए समय-समय पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (NRSC- हैदराबाद) भारत सरकार केन्द्र को विभिन्न परियोजनाएँ आवंटित की जाती हैं। केन्द्र में चल रही परियोजनाएँ LULC 50K-3CY-RJ, NWCA 3CY-RJ एवं Land Degradation (Second Cycle) - 2015-16 का कार्य पूर्ण कर डाटाबेस अंतरिक्ष विभाग को भिजवा दिया गया हैं। इन योजनाओं से प्राप्त जानकारियों का उपयोग प्रदेश की विभिन्न विकास योजनाओं में किया जा सकेगा।

अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार के सहयोग से राज्य में विभिन्न हिस्सों के जल ग्रहण विकास विभाग द्वारा जल ग्रहण क्षेत्रों में किये जा रहे कार्यों का मूल्यांकन कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करना। उक्त परियोजना के तहत 1970 जल ग्रहण क्षेत्रों में किये जा रहे कार्यों का मूल्यांकन कर प्रतिवेदन अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार को प्रस्तुत कर दिया गया हैं।

राजस्व मंडल, अजमेर के सहयोग से राज्य के समस्त गाँवों के खसरा मानचित्रों को डिजीटाईजेशन एवं जियोरेफरेन्सिंग का कार्य किया जा रहा हैं। उक्त परियोजना के तहत राज्य की 191 तहसीलों के गाँवों के खसरा मानचित्रों का जियोरेफरेन्सिंग एवं मोजेकिंग का कार्य पूर्ण कर भू-प्रबंध विभाग को सौंप दिया गया हैं, जो कि विभाग द्वारा धरा पोर्टल पर अपलोड कर दिया जायेगा।

Soil Health Card Scheme परियोजना के अंतर्गत 194 तहसीलों में 25637 ग्रामों के Village-Wise खसरा मैप के नक्शे के प्रिन्ट कृषि विभाग, जयपुर को उपलब्ध करा दिये गये हैं। जिनका उपयोग मिट्टी के नमूने खसरा वाईज लेने में किया जा रहा हैं।

  • राज्य की बीकानेर जिले की बरसींगसर माईन्स, अजमेर जिले की कयाड माईन्स एवं नागौर जिले की कसनाऊ मातासुख माईन्स क्षेत्रों के 10 किमी. रेडियस एरिया के भू उपयोग मानचित्र तैयार कर सम्बन्धित संस्थाओं को सौंप दिया गया है जो कि संस्थाओं द्वारा खान के कार्य किये जाने के कारण क्षेत्र में पर्यावरण के अध्ययन हेतु काम में लिया जायेगा।
  • अंतरिक्ष विभाग के सहयोग से चल रही RGDWM परियोजना के तहत राज्य के समस्त क्षेत्रों की 1 : 50K Scale पर पानी की गुणवत्ता के डिजीटल डाटा बेस तैयार कर अंतरिक्ष विभाग को प्रस्तुत कर दिये गये हैं। उक्त डाटा बेस जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को क्षेत्र में जलापूर्ति में मददगार साबित होंगे।
  • SAC, Ahmedabad, अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार के सहयोग से राज्य के विभिन्न हिस्सों में वेट लैण्ड मेपिंग एवं उनकी निगरानी हेतु कार्य किया जा रहा हैं। उक्त कार्य में उच्च क्षमता के सेटेलाईट डाटा उपयोग कर 1 : 25000 पैमाने पर मानचित्र तैयार करने का कार्य प्रगति पर हैं।
  • NRSC, ISRO, हैदराबाद ने राज्य में निर्मित PMGSY रोड का Geo-reference करना एवं अंतरिक्ष विभाग के पोर्टल पर नचसवंक किये जाने हेतु कार्य आवंटित किया गया हैं, जिसमें से 30 जिलों के नक्शे NRSC, ISRO, हैदराबाद को उपलब्ध करा दिये गये हैं। उक्त डाटा बेस को पोर्टल के माध्यम से आम नागरिक भी जानकारी प्राप्त कर सकेगा।
  • NRSC, ISRO, हैदराबाद ने SIS-DP Update परियोजना के अंतर्गत सम्पूर्ण राज्य के लिए नवीनतम सेटेलाईट डाटा उपयोग कर 1 : 10000 स्केल पर मानचित्र तैयार करने हेतु कार्य आवंटित किया गया हैं। उक्त परियोजना के अंतर्गत स्पंदक Use/Land Cover, Road, Rail, मृदा आबादी इत्यादि के नक्शे तैयार किये जायेंगे, जिसमें से टोंक जिले का कार्य प्रगति पर हैं। इनका उपयोग राज्य की विभिन्न विकास योजनाओं में काम में लिया जायेगा।

सैटकॉम परियोजना

  • उपग्रह संचार प्रणाली (सेटेलाईट कम्यूनिकेशन) आधारित संचार तंत्र की राज्य में विभिन्न विभागों के प्रचार प्रसार की गतिविधियों हेतु DECU (Development and Educational Communication Unit) इसरो, भारत सरकार, अहमदाबाद के साथ परियोजना की स्थापना वर्ष 2005 में हुई थी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग इस योजना के लिये नोडल विभाग है।
  • प्रतियोगिता दक्षता कार्यक्रम के तहत राजकीय महाविद्यालयों के व्याख्याताओं द्वारा सैटकॉम जयपुर में रिकॉर्ड करवाकर एवं उन्हें यू-ट्यूब पर अपलोड करवाकर छात्रों तक पहुँचाया जाता है।
  • विभाग की विभिन्न गतिविधियों की रिकॉर्डिंग की जाती है। साथ ही विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों के लिये व्याख्यानों की रिकॉर्डिंग की जाती है।

विज्ञान संचार एवं लोकप्रियकरण प्रभाग

राज्य में वैज्ञानिक वातावरण निर्माण, जन-साधारण में वैज्ञानिक रुचि विकसित करने एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाते हुए दैनिक जीवन को सरल एवं सुलभ रूप से व्यतीत करने हेतु उनको प्रेरित करने के उद्देश्य से विभाग द्वारा विज्ञान संचार एवं लोकप्रियकरण प्रभाग के माध्यम से विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों को सम्पादित किया जाता है। विभाग द्वारा वर्ष 2022-23 के दौरान उपरोक्त उद्देश्यों को दृष्टिगत रखते हुए निम्न गतिविधियों/कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है:-

1. विज्ञान केन्द्र द्वारा सम्पादित गतिविधियाँ

2. विज्ञान लोकप्रियकरण प्रतियोगितायें
विज्ञान मॉडल एवं टीचिंग एड प्रतियोगिता 2022: राज्य स्तर पर इस प्रतियोगिता का आयोजन क्षेत्रीय कार्यालय जोधपुर द्वारा दिनांक 6-7 दिसम्बर को किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर इस प्रतियोगिता का आयोजन नेहरू विज्ञान केन्द्र, मुम्बई द्वारा दिनांक 01 से 03 फरवरी, 2023 को किया जाएगा।

3. राष्ट्रीय विज्ञान दिवस
नेशनल साइंस डे का आयोजन दिनांक 28.02.2022 को पहाड़ी, जिले भरतपुर में किया गया। जिसमें लगभग 1000 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। साथ ही नेशनल साइंस डे ऑनलाइन के माध्यम से भी किया गया।

4. राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस 2022 में विज्ञान केन्द्र कोटा द्वारा दिनांक 19 अक्टूबर, 2022 व 20 अक्टूबर, 2022 को ऑनलाइन माध्यम से संदर्भ व्यक्ति प्रशिक्षण कार्यशाला 2022 का आयोजन किया गया। उपरोक्त कार्यशाला Youtube link https://youtu-be/yS0ew525uDM पर लाइव चलाया गया एवं इसे 2 हजार लोगों द्वारा देखा जा चुका है।

5. आकाश दर्शन कार्यक्रम
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, कला एवं संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के संयुक्त तत्वाधान में NIGHT SKY TOURISM कार्यक्रम का शुभारम्भ दिनांक 21.01.2021 को माननीय मंत्री कला एवं संस्कृति विभाग एवं मुख्य सचिव महोदय के द्वारा किया गया। इसी क्रम में वर्ष 2022-23 में विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमें लगभग 2145 लोग लाभान्वित हुए।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा विज्ञान को लोकप्रिय करने के उद्देश्य से राज्य में विज्ञान केन्द्रों एवं विज्ञान उद्यानों की स्थापना की जा रही है। वर्तमान में विभाग के अधीन निम्न केन्द्र/उद्यान संचालित हैं:-
  1. विज्ञान उद्यान व क्षेत्रीय विज्ञान केन्द्र, जयपुर।
  2. उप क्षेत्रीय विज्ञान केन्द्र, जोधपुर।
  3. विज्ञान उद्यान, झालावाड़।
  4. विज्ञान उद्यान, नवलगढ़ (झुंझुनूँ)।
  5. विज्ञान केन्द्र, कोटा।
  6. विज्ञान केन्द्र, उदयपुर।
  7. विज्ञान केन्द्र, बीकानेर।

विज्ञान उद्यान व क्षेत्रीय विज्ञान केन्द्र, जयपुर:- जन साधारण में, विशेषकर विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण निर्मित करने व विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने में शास्त्री नगर, जयपुर में स्थापित
राज्य के पहले विज्ञान उद्यान ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया है। यहाँ दैनिक क्रिया-कलापों में निहित वैज्ञानिक सिद्धान्तों को मॉडल्स के माध्यम से खेल-खेल में समझाया गया है तथा वानस्पतिक महत्व बताने हेतु औषधीय पौधों का खण्ड भी विकसित किया गया है।

आउटडोर मॉडल्स में डायनासोर, पी.एस.एल.वी. का मॉडल एवं पवन चक्की प्रमुख है। यहाँ प्राकृतिक हरियाली के बीच खुले में ऊर्जा, क्रिया-प्रतिक्रिया, दृष्टिभ्रम, खनिज, गणित, यांत्रिकी, ध्वनि आदि के सिद्धान्तों पर आधारित मॉडल्स स्थापित है।

इन्फोरमेशन टेक्नोलॉजी दीर्घा का निर्माण सूचना प्रौद्योगिकी व संचार विभाग के सहयोग से पूर्ण किया जा चुका है, जिसके अन्तर्गत विभिन्न कम्प्यूटर अनुप्रयोग व संचार तकनीक प्रदर्शन के साथ-साथ “तारामण्डल” एवं टेलीस्कोप द्वारा अंतरिक्ष के रहस्यों को भी दर्शकों को प्रदर्शित किया जा रहा है।

टेक्नोलॉजी दिवस, विज्ञान दिवस, पर्यावरण दिवस आदि पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन कर इनका महत्व जन सामान्य तक पहुँचाया जाता है। विज्ञान पर आधारित कार्यशालाओं का भी आयोजन विगत वर्षों में किया गया है जैसे सरकारी विद्यालयों की छात्राओं हेतु कम्प्यूटर पर कार्यशालाएं, इलैक्ट्रानिक कार्यशाला, मॉडल निर्माण कार्यशाला, वैज्ञानिक नुक्कड़ नाटक, पर्यावरण, जल व वायु की जाँच पर कार्यशाला, कम्प्यूटर एनीमेशन पर कार्यशाला एवं प्रदर्शनी।

यातायात के नियमों का विज्ञान जन सामान्य तक सरलता से पहुँचाने हेतु यहाँ ट्रैफिक पार्क भी स्थापित है जहाँ यातायात पुलिस के माध्यम से जन साधारण को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से वर्ष भर जागरूक तथा अद्यतन किया गया है। यहाँ प्रतिवर्ष परिवहन विभाग एवं यातायात पुलिस के सहयोग से जनवरी माह में राष्ट्रीय पिलर भी स्थापित है जो कि हाइड्रोस्टेटिक बियरिंग आधार पर चलता है। एक बैटरी चलित वाहन से दर्शकों को विज्ञान उद्यान परिसर भ्रमण कराया जाता है। यह वाहन मितव्ययी, शोररहित, पर्यावरण मित्र तथा विद्युत संचालित है। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं राज्य सरकार के 50-50 प्रतिशत पूँजीगत सहयोग से विज्ञान उद्यान, शास्त्रीनगर, जयपुर को क्रमोन्नत करते हुए राशि ₹ 8.50 करोड़ की पूँजीगत लागत से जन सामान्य में विज्ञान के लोकप्रियकरण व संचार के उद्देश्य से राज्य का पहला क्षेत्रीय विज्ञान केन्द्र निर्मित किया गया है।

इस केन्द्र की कुल पूँजीगत लागत के 50 प्रतिशत राशि संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की क्रियान्वयन एजेंसी नेशनल कौंसिल ऑफ साईन्स म्यूजियम, कोलकाता को उपलब्ध कराई गई है। शेष 50 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की गई है। परियोजना की क्रियान्वयन एजेन्सी नेशनल कौंसिल ऑफ साईन्स म्यूजियम, कोलकाता है। परियोजना हेतु कुल 10 एकड़ भूमि उपयोग में ली गई है जिसमें क्षेत्रीय विज्ञान केन्द्र, ट्रैफिक पार्क एवं विज्ञान उद्यान समेकित रूप में निर्मित हैं।

क्षेत्रीय विज्ञान केन्द्र भवन में लगभग 4000 वर्गमीटर का क्षेत्रफल के दो मंजिले भवन में निम्न मुख्य आकर्षण है:-
  • फ्रंटियर्स ऑफ एस्ट्रोनॉमी आंतरिक दीर्घा
  • बायोमेडिकल रिवोल्यूशन आंतरिक दीर्घा
  • फन साइन्स आंतरिक दीर्घा
  • 3-डी फिल्म थियेटर
  • ऑडिटोरियम
  • मिनी तारामण्डल
  • कम्प्यूटर कक्ष
  • लाइब्रेरी
  • कांफ्रेंस कक्ष
  • प्रदर्शनी कक्ष
उपरोक्त के अतिरिक्त डायनोपार्क एवं नए मॉडल्स भी आकर्षण का केन्द्र है।

विद्यालयों को क्षेत्रीय विज्ञान केन्द्र की गतिविधियों/कार्यक्रमों से जोड़ा गया है। वर्तमान में क्षेत्रीय विज्ञान केन्द्र के मॉर्डनाइजेशन पर भी कार्य किया जा रहा है, जिसमें मुख्य रूप से डायनाटोरियम, न्यूक्लियर पॉवर गैलरी एवं इनोवेशन हब का कार्य निर्माणाधीन है।

उपक्षेत्रीय विज्ञान केन्द्र जोधपुर
भारत सरकार के 50 प्रतिशत वित्तीय सहयोग से ₹ 2.60 करोड़ की कुल पूंजीगत लागत से लगभग 4 एकड़ क्षेत्रफल में जोधपुर में भी उपक्षेत्रीय विज्ञान केन्द्र का कार्य क्रियान्वयन एजेंसी नेशनल कौंसिल ऑफ साईन्स म्यूजियम, कोलकाता द्वारा किया गया है।

उप क्षेत्रीय विज्ञान केन्द्र के प्रमुख आकर्षण :-

हमारी विज्ञान एवं तकनीकी धरोहर
प्राचीन भारतीयों का विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर महत्वपूर्ण प्रभुत्व रहा है। गणित का आधार, खगोल विज्ञान, चिकित्सा शास्त्र, धातु विज्ञान, जहाज निर्माण, नगर योजना, जल ऊर्जा का दोहन, कपड़ा, तकनीकी शिल्प आदि हजारों वर्षों पहले भी भारतीय सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा रहे थे। गणित के सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक शून्य की खोज भारत की देन है। हमारी विज्ञान और तकनीकी धरोहर दीर्घा दर्शाती है कि समय के साथ कैसे कला और साहित्य के साथ साथ भारतीय भूमि पर एक अत्यन्त महत्वपूर्ण विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्कृति का विकास हुआ। प्राचीन संस्कृत ग्रन्थों में हमें 20वीं सदी की सोच की छाप देखने को मिलती है।

जल दीर्घा
इस दीर्घा में जल से सम्बन्धित सभी मुद्दों को दिखाया गया है जिसमें शुष्क क्षेत्रों पर विशेष जोर है, जहां प्रभावी जल प्रबन्धन सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। दीर्घा में विभिन्न भागीदारी पूर्ण प्रदर्शनों, सूचना, बूथ, प्रश्नोत्तर इत्यादि के माध्यम से विभिन्न वैज्ञानिक और सामाजिक पहलुओं को जानने का अवसर मिलता है।

मनोरंजन विज्ञान
मनोरंजन विज्ञान प्रदर्शनी में हस्तचालित प्रदर्श है, जो विभिन्न विषयों जैसे द्रव्यता, ध्वनि, प्रकाशिकी, लुढ़कती गेंदें, भ्रम आदि वैज्ञानिक सिद्धांतों की व्याख्या करते हैं। यह प्रदर्शन दर्शकों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करते हैं।

विज्ञान उद्यान
इस केन्द्र में एक सुविकसित विज्ञान उद्यान है जिसमें बाह्य प्रदर्श है जो विभिन्न वैज्ञानिक सिद्धान्तो जैसे कम्पन्न, गणित, प्रत्यक्ष ज्ञान, गुरुत्वाकर्षण अवमानना, संगीत, ध्वनि आदि की व्याख्या करते हैं। कुछ प्रमुख भारतीय वैज्ञानिकों के जीवन और योगदान का प्रदर्शन और डायनासोर के तीन मॉडलों का प्रदर्शन उनके प्राकृतिक माहौल में किया गया है। खुले आकाश में लगे यह प्रदर्श दर्शकों में विशेषतः बच्चों में, वैज्ञानिक उपकरणों के साथ खेलते हुए सीखने का अवसर प्रदान करते हैं।

तारामण्डल
एक साथ 20-25 छात्रों के बैठने की क्षमता वाला, हवा से फूलने वाला तारामण्डल आगन्तुकों का गुम्बद के भीतर बैठकर रात्रि आकाश निरीक्षण करने का अवसर प्रदान करता है। इस सुविधा द्वारा आकाश अवलोकन, तारामण्डल की पहचान, दिशा खोज आदि के बारे में जाना जा सकता है।

शैक्षणिक गतिविधियाँ
आगन्तुकों और छात्रों के लिए पाठ्यक्रम से सम्बन्धित विभिन्न वैज्ञानिक विषयों पर विज्ञान प्रदर्शनी एंव व्याख्यापूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। साथ ही उन विषयों पर प्रदर्शन किए जाते हैं जो हमारे दैनिक जीवन को व्यवहारिक और आकर्षक ढंग से प्रभावित करते हैं।

इनोवेशन हब
NCSM के सहयोग से इनोवेशन हब की स्थापना का कार्य प्रगति पर है। इनोवेशन हब के स्थापित होने पर विद्यार्थियों, युवाओं को नवाचारों से संबंधित प्रयोगों को स्वयं करके सीख सकेंगें।

विज्ञान उद्यान, झालावाड़

  • विज्ञान पार्क झालावाड़ में NCSM द्वारा फन साइन्स के इण्डोर व आउटडोर मॉडल्स लगभग 98 लाख की लागत से लगाने की सहमति प्रदान कर दी गयी थी।
  • RSRDC द्वारा विज्ञान पार्क झालावाड़ में सभी स्ट्रीट लाइट को एल.ई.डी. लाइट द्वारा बदलने, सोलर लाईट लगाने का कार्य पूर्ण हो चुका है।
  • आगामी वर्ष में विज्ञान पार्क झालरापाटन में प्लेनेटोरियम, म्यूजिकल फाउन्टेन, लाइब्रेरी बिल्डिंग स्थापित करने का तकनीकी पी.डब्ल्यू.डी. से प्राप्त कर लिये गये है, जिन्हें आगामी वर्ष में स्थापित किया जायेगा।

विज्ञान उद्यान, नवलगढ़ (झुन्झुनू)

नवलगढ़ में लगभग 1.11 हैक्टेयर भूमि पर विज्ञान उद्यान का निर्माण कार्य पूर्ण कर जनता के ज्ञानार्जन हेतु खोल दिया गया है। यहाँ पर फन साईन्स व न्यूक्लियर गैलरी विषय पर इन्दोर गैलेरीज स्थापित है। साथ ही खुले हरे भरे स्थान में वैज्ञानिक सिद्धान्तों को सरल रूप में सिखाने हेतु मॉडल्स भी लगाये गये है। सौर ऊर्जा व पवन ऊर्जा के उपयोग भी यहां दिखाये गये है।
विज्ञान के प्रचार प्रसार से जुड़े मुरारका फाउण्डेशन, नवलगढ़ के संयुक्त तत्वाधान में शेखावटी क्षेत्र की अनेकों स्कूलों के संभागियों के बीच विज्ञान प्रश्नोत्तरी का सफलता पूर्वक चरणबद्ध आयोजन किया गया एवं सफल संभागियों को पुरस्कृत किया गया।

विज्ञान केन्द्र कोटा

विभाग द्वारा कोटा, उदयपुर एवं बीकानेर में विभाग के क्षेत्रीय कार्यालयों के अधीन विज्ञान केन्द्र संचालित किये जा रहे हैं जहाँ कि विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियाँ आयोजित की जाती है। विज्ञान केन्द्र कोटा में राजकीय योजनान्तर्गत बाल विज्ञान कांग्रेस का क्षेत्रीय स्तर पर आयोजन करवाया गया जिसमें चयनित विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर भी पुरस्कार प्राप्त किए।
राज्य सरकार की योजनान्तर्गत विज्ञान केन्द्र कोटा में संदर्भ व्यक्ति प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कोटा विज्ञान केन्द्र पर मॉडल एवं टीचिंग एड प्रतियोगिता का क्षेत्रीय एवं राज्य स्तरीय आयोजन किया गया, जिसमें चयनित विद्यार्थियों एवं अध्यापकों के मॉडल्स को राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में प्रदर्शित किया गया।
विज्ञान केन्द्र, कोटा में क्षेत्रीय स्तरीय नाटक प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया जिसमें चयनित नाटक को राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर मिला एवं प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान हासिल किए।

विज्ञान केन्द्र, बीकानेर

कार्यालय को विज्ञान संचार एवं लोकप्रियकरण प्रभाग के अंतर्गत विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण पैदा करने एवं विज्ञान का प्रचार प्रसार करने हेतु विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन मुख्यालय द्वारा जारी स्वीकृति अनुसार किया जाता है, इन कार्यक्रमों द्वारा भाग लेने वाले बच्चे राज्य स्तर एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करते है साथ ही विभाग द्वारा बेरोजगार विद्यार्थियों के लिये स्वयं का रोजगार स्थापित करने हेतु उन्हें प्रोत्साहित करने, विभिन्न राजकीय योजना एवं उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी देने के उद्देश्य से उद्यमिता जागृति शिविर भी आयोजित किये जाते है। इसी प्रकार पेटेंट सूचना केंद्र प्रभाग के अंतर्गत बौद्धिक संपदा के अधिकार का संरक्षण विषय पर संभागियों को जानकारी प्रदान की जाती है, इस प्रभाग के अंतर्गत संभागियों को पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, जी.आई, आई.सी. ले आउट डिजाइन, इंडस्ट्रीयल डिजाइन, न्यूप्लांट वेरायटी एवं ट्रेडसीक्रेट के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाने के लिये आई.पी.आर शिविर भी आयोजित किये जाते हैं।

विज्ञान केन्द्र, उदयपुर

विभाग द्वारा विज्ञान लोकप्रियकरण के उद्देश्य से क्षेत्रीय कार्यालय, उदयपुर द्वारा विज्ञान केन्द्र का संचालन किया जा रहा है। विज्ञान केन्द्र में आउटडोर मॉडल्स व तीन इण्डोर गैलरी - ऑप्टीकल इल्यूसन, मिरर मैजिक, आई.टी. गैलरी के अन्तर्गत विभिन्न विज्ञान मॉडल्स स्थापित है।
साथ ही "गाँधी और विज्ञान" पर आधारित प्रदर्शनी स्थापित की है जिसमें अलग-अलग पोस्टरों के माध्यम से गांधी जी के जीवन और उनके द्वारा किये गये विज्ञान आधारित प्रयोगों का फोटो सहित विवरण अंकित है।
क्षेत्रीय कार्यालय उदयपुर के अन्तर्गत विभिन्न कार्यक्रम/गतिविधियों का क्रियान्वयन किया गया है। विभाग के निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित विभिन्न गतिविधियों जैसे बाल विज्ञान काँग्रेस, विज्ञान नाटक प्रतियोगिता, विज्ञान मॉडल एवं टीचिंग एड प्रतियोगिता, विज्ञान चित्रकला प्रतियोगिता आदि का आयोजन किया जाता है। विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रूचि उत्पन्न करने व अनुसंधानात्मक प्रवृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस का आयोजन दिनांक 7-8 दिसम्बर 2019 को पेसिफिक यूनिवर्सिटी उदयपुर में किया गया। राष्ट्रीय बाल विज्ञान काँग्रेस का मुख्य विषय "स्वच्छ, हरित और स्वस्थ राष्ट्र हेतु विज्ञान, तकनीक और नवाचार" है।

विज्ञान एवं समाज प्रभाग

प्रौद्योगिकी आधारित अनुप्रयोगों के माध्यम से राज्य में उपलब्ध संसाधन के विवेकपूर्ण दोहन एवं राज्य में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में जन सामान्य की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विज्ञान एवं समाज प्रभाग के अंतर्गत निम्नलिखित योजनाओं का क्रियान्वयन एवं संचालन किया जा रहा है:-
  • उपयुक्त प्रौद्योगिकी पर पायलेट/विशिष्ट परियोजनाएं
  • प्रौद्योगिकी प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण केंद्र
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संदर्भ केंद्र
  • महिलाओं के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
  • प्रौद्योगिकी दिवस का आयोजन
  • विज्ञान एवं समाज प्रभाग के अंतर्गत गतिविधियों पर कार्यशाला
  • टेक्नोलॉजी प्रोक्योरमेंट एंड डेवलपमेंट एंड सॉफ्टवेयर।
इस प्रभाग के द्वारा संपादित की जा रही गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य देश के विभिन्न अनुसंधान संस्थानों एवं प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित की जा रही ग्रामोपयोगी तकनीकों/प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण की उपादेयता का आकलन कर इन प्रौद्योगिकियों का राज्य के सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में विसरित किया जाना है। प्रभाग के अंतर्गत संचालित किये जा रहे विभिन्न कार्यक्रम के माध्यम से राज्य के ग्रामीण दस्तकारों, कर्मकारों एवं जन सामान्य तक नवविकसित नव प्रौद्योगिकियों की सम्यक जानकारी उपलब्ध कराये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप लक्षित समूह के सामाजिक एवं आर्थिक स्तर में गुणात्मक परिवर्तन लाया जा सके।

राज्य के पिछड़े क्षेत्र यथा राजसमंद जिले के कुंभलगढ़ की आदिवासी महिलाओं तथा निवाई जिले के दूरदराज क्षेत्रों की स्कूली छात्राओं एवं महिलाओं में उनके स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान को बढ़ाये जाने तथा माहवारी के दौरान साफ-सफाई आदि की नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजसमंद जिले के कुंभलगढ़ ग्राम एवं देवली में दो अलग-अलग तकनीकों पर तीन वर्षीय पायलेट परियोजना प्रारंभ की गई है। परियोजनाओं के प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के सफल संचालन एवं मूल्यांकन के पश्चात् परियोजना के तृतीय चरण हेतु चालू वित्त वर्ष 2022-23 में वित्तीय अनुदान स्वीकृत किया जायेगा।

ग्रामीण स्तर के शौचालयों के सीवेज निस्तारण हेतु दो वर्षीय पायलेट परियोजना स्वीकृत की जा चुकी है। परियोजना के प्रथम वर्ष में स्वीकृत अनुदान के विरूद्ध परियोजना की स्थापना का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। चालू वित्त वर्ष 2022-23 में प्रथम वर्ष की वार्षिक रिपोर्ट के मूल्यांकन पश्चात द्वितीय वर्ष हेतु वित्तीय अनुदान स्वीकृत कर दिया जायेगा।

प्रौद्योगिकी प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण केंद्र के अंतर्गत विभाग द्वारा मणिपाल विश्वविद्यालय, जयपुर में प्रथमतः 5 वर्ष हेतु केन्द्र स्वीकृत किया जा चुका है। परियोजना के प्रथम वर्ष में स्वीकृत अनुदान के विरुद्ध परियोजना की स्थापना का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। चालू वित्त वर्ष 2022-23 में प्रथम वर्ष की वार्षिक रिपोर्ट के मूल्यांकन पश्चात द्वितीय वर्ष हेतु वित्तीय अनुदान स्वीकृत कर दिया जायेगा।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संदर्भ केंद्र योजना के अंतर्गत राजसमंद जिले के आदिवासी क्षेत्र में प्रथमतः 5 वर्ष हेतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संदर्भ केंद्र स्वीकृत किया जा चुका है। परियोजना के द्वितीय वर्ष में स्वीकृत अनुदान के विरुद्ध परियोजना की स्थापना का कार्य प्रगति पर है।

उद्यमिता विकास प्रभाग

  • उद्यमिता जागृति शिविर- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी वर्ग के विद्यार्थियों को स्वरोजगार स्थापित करने के लिये प्रेरित करने के उद्देश्य से विभाग के क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से राज्य के शिक्षण संस्थाओं तथा इंजीनियरिंग कॉलेज/पॉलीटेक्निक/आई.टी.आई./विज्ञान संकाय कॉलेज इत्यादि में तीन दिवसीय उद्यमिता जागृति शिविरों का आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता है।
  • उद्यमिता विकास कार्यक्रम- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी वर्ग के स्नातक विद्यार्थियों को स्वयं के उद्योग स्थापित करने के उद्देश्य से 4-6 सप्ताह उद्यमिता विकास कार्यक्रमों का आयोजन विभाग द्वारा करवाया जाता है। कार्यक्रम में रोजगार स्थापित करने संबंधित समस्त जानकारियों से प्रशिक्षणार्थियों को अवगत कराया जाता है।
  • Knowledge Agumentation through Research in Young Aspirants (KARYA)- इस कार्यक्रम के तहत Basic Sciences (भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित व जीव विज्ञान) के छात्र व छात्राएं, जो कि राजस्थान राज्य सरकार संस्थानों (राज्य सरकार विश्वविद्यालयों व सरकारी कॉलेज) में अध्ययनरत हैं, को अल्पकालिक परियोजनाओं पर आठ सप्ताह तक भारतवर्ष के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों (DAE's, DBT's, IIT's, CSIR's, DST's, UGC, MHRD व अन्य) में कार्य करने का अवसर प्रदान किया जाता है। 100 चयनित छात्र व छात्राओं को इस कार्यक्रम के तहत कार्य करने के लिए फैलोशिप राशि प्रदान की जाती हैं। कोरोना महामारी के कारण इस बार 200 छात्रों को अवसर प्रदान किया है।
  • कौशल विकास कार्यक्रम- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कौशल विकास हेतु 4-6 सप्ताह के कौशल विकास कार्यक्रमों का आयोजन विभाग द्वारा करवाया जाता है। इस कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी वर्ग के आई.टी.आई/विज्ञानवर्ग पास विद्यार्थियों को स्वरोजगार अर्जित करने के उद्देश्य से विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षण करवाया जाता है।

अनुसंधान एवं विकास प्रभाग

  • अनुसंधान एवं विकास प्रभाग के अंतर्गत विभाग द्वारा ऐसे कार्यक्रमों व अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिये वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है जो राज्य के साधारण नागरिक के जीवन स्तर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से व्यापक सुधार करने में सहायक सिद्ध होगी।
  • अनुसंधान एवं विकास परियोजनायें- योजनान्तर्गत राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विज्ञान से संबंधित एवं राजकीय व अर्द्ध-शासकीय विभागों/संस्थाओं से अनुसंधान एवं विकास परियोजनायें आमंत्रित की जाती है। राज्य की ज्वलंत व मूलभूत समस्याओं को दृष्टिगत रखते हुए संबंधित विषय विशेषज्ञों की अनुशंसा के आधार पर चयनित अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
  • विद्यार्थी परियोजना कार्यक्रम- इस योजना के अंतर्गत राज्य के प्रतिभावान विद्यार्थियों से उनके अध्ययन काल में ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की सहायता से जन साधारण को लाभान्वित की जाने वाली विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य किये जाने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। उक्त योजना के अन्तर्गत राज्य के महाविद्यालयों विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विज्ञान संकाय में अध्ययनरत विद्यार्थी अपने प्राध्यापक के दिशा निर्देशन में एक वर्ष के लिये स्वीकृत विद्यार्थी परियोजना पूर्ण करते हैं।
  • कार्यशाला/सेमीनार/कॉन्फ्रेंस/मीटिंग्स- विज्ञान के दिन-प्रतिदिन बदलते हुए परिप्रेक्ष्य को दृष्टिगत रखते हुए विभाग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विभिन्न आयामों में हुई नवीनतम खोज/उपलब्धियों के विचार-विमर्श एवं प्रचार प्रसार हेतु समय-समय पर आयोजित होने वाली कार्यशालायें/सेमीनार व बैठकों के लिए विभाग द्वारा वित्तीय सहायता, उत्प्रेरक राशि के रूप में प्रदान की जाती है।
  • ट्रेवल सपोर्ट- इस योजना के अर्न्तगत राज्य के वैज्ञानिकों को अन्तर्राष्ट्रीय सेमीनार/कॉन्फ्रेंस में भाग लेने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

जैव प्रौद्योगिकी प्रभाग

राजस्थान में जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने हेतु राजस्थान जैव प्रौद्योगिकी नीति, 2015 की घोषणा की गई है। राजस्थान जैव प्रौद्योगिकी नीति, 2015 के मुख्य उद्देश्य:-
  • राज्य को जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी बनाना।
  • राज्य में रोजगार व उद्यमिता के नये अवसर सृजित करना।
  • राज्य में औद्योगिक पूंजीगत निवेश को आकर्षित करना।
  • अनुसंधान एवं विकास के अंतर्गत औद्योगिक व व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देना, जिससे कि व्यावसायिक घरानों का सहयोग प्राप्त हो सकें।
  • अकादमिक- औद्योगिक के मध्य परस्पर विनिमय को बढ़ाकर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करना।
  • जैव सुरक्षा के क्षेत्र में राज्य की स्थिति को सुदृढ़ करना।
  • केंद्रीय सहायता हेतु जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में केंद्र और राज्य के बीच संबंधों को सुदृढ़ करना।
बायोटेक के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास हेतु ऐसी परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिये वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है जो राज्य के साधारण नागरिक के जीवन स्तर में बायोटेक के माध्यम से व्यापक सुधार करने में सहायक सिद्ध होगी। योजनान्तर्गत राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों, आयुर्विज्ञान, अभियांत्रिकी, महाविद्यालयों तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी गतिविधियों में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं एवं राजकीय व अर्ध-शासकीय विभागों/संस्थाओं से बायोटेक अनुसंधान एवं विकास परियोजनायें आमंत्रित की जाती है। राज्य की ज्वलंत व मूलभूत समस्याओं को दृष्टिगत रखते हुए संबंधित विषय विशेषज्ञों की अनुशंसा के आधार पर चयनित बायोटेक अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

बायोटेक के क्षेत्र में कार्यशाला: जैवप्रौद्योगिकी क्षेत्र में दिन-प्रतिदिन बदलते हुए परिप्रेक्ष्य को दृष्टिगत रखते हुए विभाग बायोटेक के विभिन्न आयामों में हुई नवीनतम खोज/उपलब्धियों के विचार-विमर्श एवं प्रचार प्रसार हेतु समय-समय पर आयोजित होने वाली कार्यशालायें/सेमीनार व बैठकों के लिए विभाग द्वारा वित्तीय सहायता, उत्प्रेरक राशि के रूप में प्रदान की जाती है।

बाँयोटेक कार्यक्रम एवं स्कूल- राजस्थान बाँयोटेक के क्षेत्र में विकास कर रहा है। बाँयोटेक क्षेत्र में कौशल विकास हेतु 60 दिनों (300 घंटे) के कौशल विकास कार्यक्रमों का आयोजन विभाग द्वारा करवाया जाता है। इस कार्यक्रम में बाँयोटेक वर्ग/विज्ञान वर्ग पास विद्यार्थियों को स्वरोजगार अर्जित करने के उद्देश्य से बाँयोटेक के क्षेत्र में प्रशिक्षण करवाया जाता है।

सेंटर फॉर इंटीग्रेटिव जीनोमिक्स- राज्य में जैवप्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जयपुर में समग्र आनुवांशिकी केंद्र की स्थापना करना। प्रस्तावित केंद्र राज्य में पादप जैवप्रौद्योगिकी, जन्तु जैवप्रौद्योगिकी, चिकित्सा जैवप्रौद्योगिकी, कैंसर व स्टेमसेल के क्षेत्रों में उच्च स्तरीय अनुसंधान संबंधी सहायता प्रदान करेगा। इस हेतु विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन बनवाई गई है।

पेटेन्ट सूचना केन्द्र
विभाग में स्थापित पेटेंट सूचना केन्द्र के द्वारा बौद्धिक सम्पदा अधिकार के प्रति जागरूकता पैदा करने हेतु कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है। प्रतिवर्ष विभाग द्वारा बौद्धिक सम्पदा अधिकार एवं भौगोलिक संकेतक पर कार्यशालाओं के लिए स्वीकृतियां जारी की जाती है। विभाग द्वारा राज्य के 5 विश्वविद्यालयों में आई. पी.आर. सेल स्थापित किये जा चुके हैं। विभाग द्वारा पेटेन्ट सूचना केन्द्र,टेक्नोलॉजी एण्ड इनोवेशन सपोर्ट सेन्टर (TISC) के माध्यम से लघु एवं मध्यम स्तर के उद्योगों को पेटेन्ट, डिजाइन, ट्रेडमार्क एवं अन्य बौद्धिक सम्पदा की तकनीकी एवं वित्तीय सहायता के लिए विभागों में बौद्धिक सम्पदा सुविधा केन्द्र स्थापित किया जा रहा है।

जैव विविधता (Biodiversity)

जैव आरक्षित क्षेत्र

नंदा देवी: यह जैवमण्डल रिजर्व नंदा देवी शिखर के चारों ओर उत्तराखण्ड राज्य में है। इसे 1988 में “UNESCO” द्वारा ‘वर्ल्ड हेरिटेज साइट’ घोषित किया गया। 2005 में इसे नंदा देवी फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान के रूप में विस्तार किया गया।

कंचनजंगा: यह उत्तरी सिक्किम जिले में अवस्थित है। माउन्ट कंचनजंगा को भी इसी के अंतर्गत रखा गया है। कंचनजंगा पर्वत विश्व का तीसरा सबसे ऊँचा पर्वत है।

मानस: मानस नेशनल पार्क हिमालय के पर्वत पदीय (Foot Hill) क्षेत्र में उपस्थित है।

दिबांग: यह अरूणाचल प्रदेश में अवस्थित है। इस जैवमण्डल रिजर्व क्षेत्र में मैलिंग नेशनल पार्क तथा दिबांग घाटी जीव अभयारण्य अवस्थित है।

डिबरू: यह असोम के तिनसुकिया में अवस्थित है। इस नेशनल वन्यजीव पार्क की उत्तरी सीमा ब्रह्मपुत्र व लोहित नदी तथा दक्षिण सीमा डिबरू नदी द्वारा घिरी हुई है। यह जैव विविधता हॉट-स्पॉट है।

नोकरेक: यह जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र मेघालय के पश्चिम गारो पहाड़ी राज्य में ‘तुरा शिखर’ से लगभग 12 कि.मी. दूरी पर है। इसे मई 2009 में UNESCO द्वारा जैव आरक्षित की सूची में रखा गया है।

सुंदरवन: यह आरक्षित क्षेत्र पश्चिम बंगाल में सुंदरवन डेल्टा में अवस्थित है। यह नेशनल पार्क बंगाल के शेरों का सबसे बड़ा रिजर्व क्षेत्र है। यह नेशनल पार्क सघन रूप से सुंदरी वृक्षों वाले वन अथवा मैंग्रोव वन से घिरा है।

पंचमढ़ी: यह आरक्षित क्षेत्र मध्यप्रदेश राज्य में सतपुड़ा श्रेणी में अवस्थित है। इस क्षेत्र में तीन वन्य जीव आरक्षित इकाइयां सम्मिलित है- (1) बोरी सेन्युरी (2) सतपुड़ा नेशनल पार्क (3) पंचमढ़ी सेन्युरी

सिमलीपाल: यह ओडिशा के मयूरभंज में अवस्थित है। यह नेशनल पार्क एक टाइगर रिजर्व है। इसमें कुछ सुंदर जलप्रपात है। जैसे- जोरान्दा और बारेहीपानी आदि।

अचानकमार अमरकंटक: यह मध्यप्रदेश तथा छत्तीसगढ़ दो राज्यों के क्षेत्र में अवस्थित है। इसका क्षेत्र अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियों के मध्य जलविभाजक का कार्य करता है। यह क्षेत्र “Genetic Express highway” द्वारा दो जैविक हॉट स्पोट्स-पश्चिमी घाट तथा पूर्वी हिमालय को जोड़ता है।

कच्छ का रण: यह गुजरात के कच्छ राज्य में अवस्थित है। छोटा कच्छ का रण भारतीय जंगली गधों के अभयारण्य के लिए प्रसिद्ध है।

नीलगिरि: यह एक अंतर्राष्ट्रीय जीव अभ्यारण्य है। यह पश्चिमी घाट की नीलगिरि पहाड़ियों में अवस्थित है। इसे “UNESCO” के द्वारा वर्ल्ड हेरीटेज साइट के लिए चुना गया है।

अगस्त्यमलाई: यह क्षेत्र केरल में कोल्लम और तिरुवनंतपुरम, तथा तमिलनाडु के तिरुन्नलवेली व कन्याकुमारी जिलों के दक्षिण में पश्चिमी घाट के अंत में है।

मन्नार की खाड़ी: मन्नार की खाड़ी भारत के दक्षिण-पूर्व तथा श्रीलंका के पश्चिमी तट के मध्य है। इस नेशनल पार्क तथा इसके 10 कि.मी के बफर जोन को 1989 में अभ्यारण्य घोषित किया गया।

ग्रेट निकोबार: यह जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र ग्रेट निकोबार द्वीप का लगभग 85% क्षेत्र सम्मिलित करता है। यह आरक्षित क्षेत्र जंतु व पौधों की विभिन्न प्रकार की प्रजातियों का आवास है। यह भौगोलिक रूप से अण्डमान निकोबार प्रदेश का भाग है।

शेषाचलम- यह जैव आरक्षित क्षेत्र आंध्रप्रदेश में है।

शीत मरुस्थल- यह जैव आरक्षित क्षेत्र हिमाचल प्रदेश में है।

पन्ना- यह जैव आरक्षित क्षेत्र मध्यप्रदेश में है।

किसी भौगोलिक क्षेत्र एवं पारिस्थितिकीय क्षेत्र में विविध तरह के जीव-जन्तु, पशु-पक्षी आदि पाये जाते हैं, उसे जैव विविधता माना जाता है। राजस्थान इस दृष्टि से बहुत सम्पन्न है। यहाँ गाय, भैंस, ऊँट, बैल, घोड़े, खच्चर, भेड़ बकरी आदि पालतु जानवरों की कई-कई नस्लें पाई जाती हैं। आसाम के बाद राजस्थान में जलवायु की विविधता, अरावली पर्वत श्रेणियों और दक्षिण-पूर्व के मनमोहक हरे-भरे जंगलों के कारण अनेक जातियों के वन्य जीव पाये जाते हैं। यहाँ बाघ, तेन्दुआ, शियाशौश, जरख, जंगली बिल्ली, रेगिस्तानी बिल्ली, बिज्जू, भेड़िया, सियार, लोमड़ी, जंगली कुत्ता, बूच, जल मानुष, नेवला, सालर आदि मांसाहारी पशु पाये जाते हैं। काला हिरण, चिंकारा, सांभर, नीलगाय, चीतल, चौसिंगा, भालू, जंगली सूअर, खरगोश बंदर एवं लंगूर आदि शाकाहारी पशु देखे जाते हैं। वन्य जीव सुरक्षा हेतु यहाँ भारतीय वन्य जीव कानून 1972 लागू है। इनके संरक्षण और संवर्धन हेतु यहाँ अनेक नेशनल पार्क एवं अभ्यारण्य हैं।
  • राजस्थान में अनेक पक्षियों की कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं। मोर, गोडावन, कबूतर, गौरैया, कई तरह की चिड़ियाएँ, मुर्गे, जंगली मुर्गे, गिलहरी, खातीचिड़े, उड़न गिलहरी, फाख्ता, मैना, विदेशी पक्षी शार्थ आदि यहाँ के जंगलों और अभ्यारण्यों में देखे जा सकते हैं।
  • अकेले माउण्ट आबू अभ्यारण्य में वनस्पति की लगभग 830 प्रजातियाँ उपलब्ध हैं, जिनमें से 300 से अधिक वृक्ष, झाड़ी, लताएँ आदि हैं। डिकिल्पटेरा आबूएनसिम विश्वभर में केवल आबू पर्वत पर ही पाया जाता है। कारा, जंगली गुलाब एवं फर्ब की भी कुछ दुर्लभ प्रजातियाँ यहाँ पाई जाती हैं।
  • चित्तौड़ जिले के सीतामाता अभ्यारण्य में सैकड़ों प्रजातियों के वृक्ष, झाड़ियाँ, लताएँ आदि पाये जाते हैं। वृक्षों में प्रमुख हैं- सागवान, तेन्दू, साल, गोडल, खैर, महुआ, बहेड़ा, धावड़ा, कलम, चुरेल, सिरस, खांखरा, करंज, सेमल, जामुन, कचनार, आंवला, अमलताश आदि। इन वृक्षों के नीचे बांस, कारोंदा, दूधी, आमट आदि की सघन झाड़ियाँ हैं। जैसलमेर क्षेत्र में सावण साग पाई जाती है।
  • चम्बल नदी के तटों पर बबूल, खैर, शीशम, ढाक, धौंक, बेर, सिरस, नीम, बिलायती बबूल आदि के वृक्ष पाये जाते हैं।
  • भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़) अभ्यारण्य में धौंक, सालर, गुरजन, खिरनी, महुआ, अमलताश, बहेड़ा, बेर, चुरेल, हल्दू, कलम आदि के वृक्ष पाये जाते हैं।
  • दर्रा अभ्यारण्य में धोकड़ा, रोज़, खैर, गुर्जन, तेन्दू, कड़ाया, कलम, छीला एवं बेर आदि के वृक्ष पाये जाते हैं। जवाहर सागर अभ्यारण्य में धोकड़ा, बांस, खैर, कुमठा, सिरस, ढाक आदि के वृक्ष मिलते हैं। इस तरह हम पाते हैं कि राजस्थान जैव विविधता में सम्पन्न है।

राजस्थान वानिकी एवं जैव-विविधता प्रोजेक्ट (Rajasthan Forestry and Bio-diversity Project R.F.B.P.)
राजस्थान में यह प्रोजेक्ट जापान बैंक फॉर इण्टरनेशनल कॉरपोरेशन की वित्तीय सहायता से चलाया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के निम्नांकित उद्देश्य हैं-
(i) अरावली पारिस्थितिकीय स्थिति का संरक्षण
(ii) जैव विविधता का संरक्षण
(iii) मरुस्थल विस्तार को रोकना
(iv) आर्द्र-क्षेत्र की स्थिति को सुधारना एवं
(v) मरु-क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं को बनाये रखना।

इसके अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्र में ईंधन, चारा, वन-उत्पाद और रोजगार मुहैया कराने हेतु भी यह काम करता है।
R.F.B.P प्रोजेक्ट राजस्थान के 18 जिलों में लागू है और इसे वन-विभाग कार्यान्वित कर रहा है। क्षेत्रीय जातियों को भी इससे जोड़ा जा रहा है।

जैव प्रौद्योगिकी (Bio-Technology)

जैव प्रौद्योगिकी आधुनिक युग की तकनीक है, जिसमें वनस्पति और जीवों की नस्लों को सुधारा जा सकता है। बढ़ती हुई जनसंख्या के दबाव में अनाज के उन्नत बीजों को इसी तकनीक से प्राप्त कर अच्छी पैदावार की जा सकती है। आज गेहूँ, बाजरा, मक्का आदि की उन्नत किस्में जैव प्रौद्योगिकी के द्वारा संभव हो सकी हैं।
जैव प्रौद्योगिकी का राजस्थान जैसे राज्य के लिए विशेष महत्त्व है। यहाँ पानी की कमी है। अतः ज्वार, बाजरा, मक्का आदि के बीजों की ऐसी किस्म तैयार करना उद्देश्य है कि वे कम से कम पानी द्वारा ज्यादा से ज्यादा फसल दे सकें।

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को RPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।