राजस्थान में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज
इस लेख में राजस्थान की प्रमुख ग्रामीण विकास योजनाओं और पंचायती राज ढांचे का विस्तृत विवरण दिया गया है। इसमें डांग, मगरा, और मेवात क्षेत्रीय विकास कार्यक्रमों के साथ-साथ 'मुख्यमंत्री जिला नवाचार निधि' और 'अरावली' संस्था की कार्यप्रणाली को समझाया गया है। यह लेख RAS, REET, और पटवार जैसी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ग्रामीण विकास
देश के चहुँमुखी विकास के लिए ग्रामीण क्षेत्र का विकास होना नितान्त आवश्यक है। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुये स्वतंत्रता प्राप्ति के तीसरे दशक से ही ग्रामीण क्षेत्र के योजनाबद्ध विकास ने नया मोड़ लिया और अति पिछड़े तथा गरीबी से ग्रस्त परिवारों को सीधे लाभ पहुँचाने की दिशा में प्रयास किये गये, लेकिन राज्य में ग्रामीण विकास को और अधिक प्राथमिकता एवं विशेष महत्व देते हुए वर्ष 1971 में विशिष्ट योजना संगठन की स्थापना की गई। वर्ष 1979 में पुनर्गठन के साथ-साथ इसका कार्य क्षेत्र बढ़ाकर इसे "विशिष्ट योजनाएँ एवं एकीकृत ग्रामीण विकास विभाग" का नाम दिया गया। 1 अप्रैल 1999 से इस विभाग का नाम "ग्रामीण विकास विभाग" किया गया। ग्रामीण विकास विभाग द्वारा क्रियान्वित अधिकांश योजनाओं का क्रियान्वयन जिला स्तर पर पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से किया जा रहा है। अतः जिला स्तर पर समन्वय हेतु जिला ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ का गठन किया गया। इसी तरह राज्य स्तर पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज्य स्तर पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज की गतिविधियों में समन्वय पंचायती राज विभाग का विलय किया गया है। मंत्रिमण्डल आज्ञा संख्या 73/2003 दिनांक 25.08.2003 की पालना में मंत्रिमण्डल सचिवालय की अधिसूचना संख्या F.27 (2) Cab/2003 दिनांक 18.03.2006 एवं विभागीय परिपत्र क्रमांक एफ 4 (66) पराज/पीसी/विलय/2003/638 जयपुर, दिनांक 23.03.2006 के द्वारा वर्तमान में इस विभाग का नाम "ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग" है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अधीन समस्त योजनाओं का क्रियान्वयन अतिरिक्त मुख्य सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के माध्यम से किया जा रहा है।
इसमें निम्न योजनाएँ हैं-
डांग क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम
कार्यक्षेत्र
डांग क्षेत्रीय विकास योजना राज्य के निम्न 8 जिलों यथा सवाईमाधोपुर, करौली, कोटा, बूंदी, बाराँ, धौलपुर, भरतपुर एवं झालावाड़ है।
वित्त पोषण
योजना शत-प्रतिशत राज्य वित्त पोषित है।
विशेषताएँ
योजना डांग क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में क्रियान्वित की जा रही है।
योजनान्तर्गत ग्राम के समग्र विकास की संकल्पना को ध्यान में रखते हुए योजना के अन्तर्गत शामिल 6 घटकों यथा-
- जनोपयोगी
- ग्रामीण स्वच्छता, शौचालय निर्माण व तरल एवं ठोस कचरा प्रबंधन
- स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता
- गाँव की आंतरिक सड़कें मय नाली निर्माण एवं अप्रोच रोड़
- शिक्षा, चिकित्सा की सुविधायें
- ग्रामीण क्षेत्र में रोशनी की व्यवस्था से संबंधित गतिविधियों के कार्य प्राथमिकता से लिए जायेंगे।
मगरा क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम
परिचय
राजस्थान राज्य के दक्षिणी-मध्य के जनजाति उपयोजना क्षेत्र के अलावा वह क्षेत्र जो पहाड़ियों से घिरा हुआ है तथा जहाँ अन्य पिछड़ी जाति एवं अल्पसंख्यक लोगों का अधिवास है, को मगरा क्षेत्र कहा जाता है। मगरा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के आर्थिक एवं सामाजिक विकास के साथ-साथ इस क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विकास हेतु वर्ष 2005-06 में मगरा क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया है।
कार्यक्षेत्र
मगरा क्षेत्र में राज्य के निम्न 5 जिलों यथा ब्यावर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद एवं पाली को सम्मिलित किया गया है।
वित्त पोषण
यह शत-प्रतिशत राज्य वित्त पोषित योजना है।
विशेषताएँ
योजना मगरा क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में क्रियान्वित की जा रही है।
इस योजना का आवश्यक होने पर अन्य योजनाओं के साथ डवटेलिंग किया जा सकेगा।
योजनान्तर्गत ग्राम के समग्र विकास की संकल्पना को ध्यान में रखते हुए जेध्री-योजनान्तर्गत शामिल 6 घटकों यथा-
- जनोपयोगी
- ग्रामीण स्वच्छता, शौचालय निर्माण व तरल एवं ठोस कचरा प्रबंधन
- स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता
- गाँव की आंतरिक सड़कें मय नाली निर्माण एवं अप्रोच रोड़
- शिक्षा, चिकित्सा की सुविधायें
- ग्रामीण क्षेत्र में रोशनी की व्यवस्था से संबंधित गतिविधियों के कार्य प्राथमिकता से लिए जायेंगे।
मेवात क्षेत्रीय विकास योजना
परिचय
अलवर एवं भरतपुर जिले का मेव बाहुल्य क्षेत्र जो मेवात क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। उसके विकास हेतु राज्य सरकार द्वारा वर्ष 1986-87 से मेवात क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया है।
कार्यक्षेत्र
राज्य के निम्न 3 मेव बाहुल्य जिलों यथा-
- अलवर जिले की पंचायत समितियाँ (6)- लक्ष्मणगढ़, रामगढ़, कठूमर, उमरेण, मालाखेड़ा, गोविन्दगढ़।
- डीग जिले की पंचायत समितियाँ (4)- नगर, डीग, कामा, पहाड़ी।
- तिजारा जिले की पंचायत समितियाँ (4)- तिजारा, मुण्डावर, किशनगढ़बास, कोटकासिम।
इस योजना में 14 पंचायत समितियाँ आती हैं।
वित्त पोषण
योजना शत प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित है।
विशेषताएँ
योजनान्तर्गत ग्राम के समग्र विकास की संकल्पना को ध्यान में रखते हुए जेश्री- योजनान्तर्गत शामिल 6 घटकों यथा -
- ग्रामीण स्वच्छता, शौचालय निर्माण व तरल एवं ठोस कचरा प्रबंधन
- स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता
- गाँव की आन्तरिक सड़कें मय नाली निर्माण एवं अप्रोच रोड़
- शिक्षा, चिकित्सा की सुविधाएँ
- ग्रामीण क्षेत्र में रोशनी की व्यवस्था
- जनप्रतिनिधि, जनता, जनोपयोगी से संबंधित गतिविधियों के कार्य प्राथमिकता से लिये जायेंगे।
मुख्यमंत्री जिला नवाचार निधि योजना
परिचय
राज्य के प्रत्येक जिले में क्षेत्र की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप जिला कलेक्टर द्वारा नवाचारों के समावेश करते हुए विकास में समरूपता प्राप्त करने एवं निवेश के विकेन्द्रीकरण की दृष्टि से मुख्यमंत्री महोदय की बजट घोषणा 2019-20 के क्रम में "मुख्यमंत्री जिला नवाचार निधि" योजना का शुभारम्भ किया गया है। राजस्व विभाग द्वारा इस योजना को लागू करना था। सितम्बर, 2020 में मुख्यमंत्री महोदय के निर्देश पर ग्रामीण विकास को हस्तान्तरित के उपरांत विभाग द्वारा दिनांक 06.04.2021 को दिशा-निर्देश जारी किये गये।
उद्देश्य
क्षेत्रीय जन-आकांक्षाओं के अनुरूप जनोपयोगी परिसम्पत्तियों एवं रोजगार के अवसरों का सृजन करना।
नवाचारों का प्रयोग कर ऐसी गतिविधियों का क्रियान्वयन जिनके लिये पूर्व में संचालित राजकीय योजनाओं में प्रावधान उपलब्ध नहीं है।
वित्त पोषण
योजना शत प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित है।
विशेषताएँ
योजना शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लागू है।
इस योजना का अन्य योजनाओं/जनसहभागिता के साथ कन्वर्जेस किया जा सकेगा बशर्ते प्रस्तावित कार्य अन्य योजना मद में अनुमत हो एवं राशि का प्राप्त होना सुनिश्चित किया जावे।
मुख्यमंत्री क्षेत्रीय विकास योजना
प्रस्तावना
माननीय मुख्यमंत्री, राजस्थान सरकार की बजट घोषणा 2022-23 के बिन्दु संख्या 84.0.0 के अंतर्गत की गई घोषणा के अनुसरण में मुख्यमंत्री क्षेत्रीय विकास योजना (CM Area Development Scheme) प्रारंभ की जा रही है। जो ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग की संचालित योजनाओं यथा महात्मा गाँधी आदर्श ग्राम योजना, मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम पंचायत योजना, श्री योजना एवं स्मार्ट विलेज योजना का स्थान लेगी।
योजना का उद्देश्य
यह योजना राजस्थान प्रदेश के दुर्गम, दूरस्थ एवं पिछड़े सहित राज्य के संपूर्ण क्षेत्र में व्यवस्थित आधारभूत संरचना एवं ग्रामीण विकास के लिए प्रदेश के भौगोलिक-आर्थिक-सामाजिक स्तर पर क्षेत्रीय भिन्नताओं, आवश्यकताओं तथा संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए समग्र विकास पर बल देगी। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक एवं आधारभूत ढांचागत विकास एवं सुविधाएँ उपलब्ध करवाने हेतु एक समग्र योजना तैयार कर क्षेत्र के निवासियों को आधारभूत सुविधाएँ यथा - ग्राम स्वच्छता, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा, स्वास्थ्य, ग्रामीण आन्तरिक सड़कें, रोशनी, शिक्षा प्राथमिकता से उपलब्ध करवाई जायेगी। इसमें आधारभूत संरचना विकास को महत्व देते हुए कार्य लिये जायेंगे। साथ ही जन सहभागिता प्रोत्साहन तथा आदर्श ग्राम के लक्ष्यों को भी इसमें समुचित प्रेरक रूप में समाहित किया जायेगा।
अरावली
(एसोशिएशन फॉर रूरल एडवांस्मेंट थ्रू वॉलेंटरी एक्शन एण्ड लोकल इन्वॉल्वमेंट)
- स्थापना का उद्देश्य: अरावली की स्थापना राजस्थान सरकार द्वारा वर्ष 1994 में बजटीय घोषणा के तहत् सरकारी और गैर सरकारी (स्वैच्छिक संगठनों) के बीच साझेदारी को सशक्त करने एवं राज्य में सामाजिक एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य हेतु की गई।
- कार्यव्यवस्था: अरावली का पंजीकरण 23 जुलाई, 1994 को ग्रामीण विकास विभाग द्वारा राजस्थान सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1958 के अंतर्गत किया गया। वर्तमान में अरावली का प्रशासनिक विभाग ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग है। अरावली के अध्यक्ष माननीय मंत्री ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग, राजस्थान सरकार है।
अरावली के प्रमुख उद्देश्य है
- सरकारी व गैर सरकारी संगठनों के मध्य साझेदारी को प्रोत्साहित करना।
- राज्य में स्वैच्छिक संस्थाओं एवं सरकारी एवं विभागीय कार्मिकों का क्षमतावर्धन विभिन्न प्रशिक्षणों एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से करना।
- ग्रामीण विकास के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने हेतु परियोजनाओं का निर्माण, क्रियान्वयन, परियोजनाओं का मूल्यांकन व प्रबोधन कार्य करना।
- ग्रामीण क्षेत्रों के विकास हेतु उचित प्रौद्योगिकी का अनुसंधान कर पहचान करना व स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से पायलट करना।
- स्वैच्छिक प्रयासों और स्थानीय भागीदारी के माध्यम से ग्रामीण विकास हेतु समग्र रणनीति व दृष्टिकोण को मजबूत करना।
- ग्रामीण विकास के क्षेत्र में हुए प्रभावी प्रयासों का दस्तावेजीकरण करना व राज्य के प्रमुख हितभागियों के समक्ष रखना।
- सरकारी एजेंसियों और स्वयंसेवी संस्थाओं के मध्य साझेदारी व संवाद को बढ़ावा देने हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम, सेमिनार, कार्यशालाओं, बैठकों का संचालन व प्रयोजन करना।

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