राजस्थान की सिंचाई परियोजनाएँ | rajasthan ki sinchai pariyojana

राजस्थान की सिंचाई परियोजना

इस लेख में राजस्थान की लघु, मध्यम और वृहद् सिंचाई परियोजनाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है। इसमें राम जल सेतु (ERCP), इंदिरा गांधी नहर और चंबल घाटी जैसी बड़ी योजनाओं के लाभ, संबंधित नदियों और लाभांवित जिलों की महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी।
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सिंचाई परियोजना का वर्गीकरण

  • लघु सिंचाई परियोजना : 0 - 2000 हेक्टेयर
  • मध्यम सिंचाई परियोजना : 2000 - 10000 हेक्टेयर
  • वृहत सिंचाई परियोजनाएँ : 10000 हेक्टेयर से अधिक
  • बहुउद्देश्यीय परियोजना : जिनका उद्देश्य दो या दो से अधिक होता है जैसे- पेयजल, सिंचाई तथा विद्युत उत्पादन

राम जल सेतु लिंक परियोजना

समझौता- 28 जनवरी, 2024 को राजस्थान तथा मध्यप्रदेश के मध्य इस समझौते को संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल पूर्वी क्षेत्र नहर परियोजना (PKC-ERCP) नाम दिया गया। जिसे बाद में राम जल सेतु लिंक परियोजना नाम दिया गया।
इसमें राजस्थान के 17 जिलों को पेयजल के साथ सिंचाई भी उपलब्ध करवाया जायेगा जो निम्न है-
PKC-ERCP
  • सिंचाई उपलब्ध का लक्ष्य- 4 लाख हेक्टेयर
  • पेयजल उपलब्ध का लक्ष्य 2051 तक रखा गया।
  • इस परियोजना के तहत् दिल्ली-मुम्बई औद्योगिक गलियारा को पानी उपलब्ध करवाया जायेगा।
  • लागत- ₹45 हजार करोड़
  • इस परियोजना का पहले नाम 'पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना' (Eastern Rajasthan canal Project ERCP) था।

इस परियोजना पर निम्न बांध निर्मित होंगे-
  1. नवनेरा बैराज (ऐबरा गांव, दीगोद तहसील, कोटा)- कालीसिंध नदी सर्वाधिक भराव क्षमता
  2. कुन्नु बैराज (शाहबाद तहसील, बाराँ)- कुन्नु नदी
  3. रामगढ़ बैराज (किशनगंज तहसील, बाराँ)- कूल नदी
  4. महलपुर बैराज (मांगरौल तहसील, बाराँ)- पार्वती नदी
  5. मेज बैराज (इन्द्रगढ़ तहसील, बूँदी)- मेज नदी
  6. राठौड़ बैराज (चौथ का बरवाड़ा, सवाईमाधोपुर)- बनास नदी
  7. डूंगरी बैराज (खण्डार तहसील, सवाईमाधोपुर)- बनास नदी

राजस्थान की प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाएँ

भाखड़ा-नांगल परियोजना
  • सहयोग- पंजाब, हरियाणा, राजस्थान
  • नदी- सतलज
  • इस परियोजना का सर्वप्रथम विचार 1908-09 में लुईस डेने के द्वारा दिया गया।
नोट- भाखड़ा-नांगल समझौता (1959) के तहत राजस्थान का हिस्सा 15.22%

भाखड़ा बाँध (हिमाचल प्रदेश)
  • जवाहर लाल नेहरू ने इसे चमत्कारी विराट वस्तु की संज्ञा दी।
  • भारत का सबसे ऊँचा दूसरा बाँध (प्रथम ऊँचा - टिहरी बाँध, उत्तराखंड)
  • भारत का सबसे ऊँचा गुरुत्वीय बाँध-भाखड़ा बाँध
  • निर्माण- 1962 (हार्वेस्लोकेम के निर्देशन में)
  • आधारशिला - 17 नवम्बर, 1955, जवाहर लाल नेहरू
  • राष्ट्र को समर्पित - 1962
  • ऊँचाई - 225.55 मीटर (740 फीट)
  • लम्बाई - 518.16 मीटर (1700 फीट)
  • चौड़ाई - 9.14 मीटर (30 फीट)
  • भाखड़ा बाँध के पीछे गोविंद सागर जलाशय है जो पंजाब हरियाणा व राजस्थान को पेयजल तथा सिंचाई और दिल्ली, चंडीगढ़ को पेयजल की आपूर्ति करता है।

नांगल बाँध
  • रोपड़ (पंजाब)
  • यह बाँध 1952 में बनकर तैयार हो गया था। यह सतलज नदी पर भाखड़ा बाँध से 13 किमी. नीचे की ओर बनाया गया है। ऊँचाई- 29 मीटर (95 फीट), लम्बाई- 340.8 मीटर (1000 फीट)
  • इसमें से 2 नहरें - 1. बिस्त दो आब (पंजाब), 2. भाखड़ा नहर-पंजाब, हरियाणा, राजस्थान
  • सर्वाधिक लाभांवित जिले- हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर
  • अन्य लाभांवित जिले- चूरू, सीकर, झुंझुनूँ, बीकानेर
  • इस परियोजना में कुल विद्युत उत्पादन- 1532 mw
  • राजस्थान का हिस्सा- 233 mw
  • इस परियोजना में सिंचाई 2.3 लाख हेक्टेयर पर होती है।

व्यास परियोजना
  • सहयोग- पंजाब, हरियाणा, राजस्थान
  • राजीव गाँधी लोंगोवाल समझौता- 1985
  • ईराडी आयोग- 1986

इसमें राजस्थान का हिस्सा निम्न प्रकार से है-
  • पोंग बाँध से 59 प्रतिशत जबकि पंडोह बाँध से 20 प्रतिशत हिस्सा है।
  • पोंग बाँध में से IGNP को शीतकाल में जलापूर्ति होती है।

व्यास सतलज लिंक परियोजना (BSLP)
भाखड़ा व नाँगल बाँध में पानी की आपूर्ति बनाये रखने एवं व्यास नदी के अतिरिक्त जल को प्रयुक्त करने हेतु पंडोह बाँध से यह लिंक नहर निकाली गई है।

चम्बल घाटी परियोजना
  • सहयोग - राजस्थान, मध्यप्रदेश
  • इसमें 3 चरणों में 4 बाँधों का निर्माण हुआ है।
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नोट- राजस्थान और मध्यप्रदेश के मध्य साझेदारी 50 : 50% की है।
  • चम्बल घाटी परियोजना में कुल विद्युत उत्पादन- 386 mw
  • राजस्थान का हिस्सा - 193 mw
  • मध्यप्रदेश का हिस्सा- 193 mw
  • कोटा बैराज के जल का उपयोग सिंचाई हेतु किया जाता है जिसमें बायीं तथा दायीं ओर से नहरें निकाली गई है।
  • बायीं नहर में कोटा तथा बूंदी जिले को सिंचाई हेतु जलापूर्ति होती है।
  • दायीं नहर से कोटा, बारां तथा मध्यप्रदेश को सिंचाई हेतु जलापूर्ति होती है।

कोटा बैराज की दायीं लिफ्ट नहरें निम्न हैं- 1. जालीपुरा नहर-कोटा, 2. दीगोद नहर-कोटा, 3. अंता नहर-बाराँ, 4. अंता माइनर नहर-बाराँ, 5. पंचेल नहर-बाराँ, 6. गणेशगंज नहर-बाराँ, 7. सोरखण्ड नहर- बाराँ, 8. कचारी नहर-बाराँ

चम्बल-भीलवाड़ा पेयजल परियोजना (वर्ल्ड बैंक)- भीलवाड़ा को चम्बल से पाइप के जरिए पानी पहुँचाया जाएगा। वर्ष 2010-11 में चम्बल नदी (कोटा) से ट्रेन टैंकरो द्वारा भीलवाड़ा में पानी पहुँचाया गया।

माही बजाज सागर परियोजना
  • समझौता-1966
  • सहयोग- राजस्थान (45) : गुजरात (55)

माही बजाज सागर परियोजना
  • माही बजाज सागर, बाँसवाड़ा (बोरखेड़ा गाँव)
  • कागदी पिकअप बाँध, बाँसवाड़ा
  • कड़ाना बाँध, गुजरात

1 अप्रैल 1983 को इंदिरा गांधी द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया।
केज कल्चर योजना- आधुनिक तकनीकी से मछली पालन होता है। इसमें 56 तैरते हुए पिंजरे स्थापित हैं।

इसमें 2 नहर हैं-
  1. आनन्दीपुर भूकिया नहर (बायीं नहर)- बांसवाड़ा में सिंचाई होती है।
  2. भीखाभाई सागवाड़ नहर (दायीं नहर)- डूंगरपुर में सिंचाई होती है।

माही बजाज सागर राजस्थान का सबसे लम्बा बाँध (पक्का बाँध) है (कुल लम्बाई 3109 मीटर)

नोट- राजस्थान का सबसे ऊँचा बाँध जाखम बाँध (81 मीटर) है।

इसमें कुल विद्युत उत्पादन (4 इकाइयाँ) निम्न प्रकार से हैं-
  1. 25 mw × 2 = 50 (1986)
  2. 45 mw × 2 = 90 (1989)
कुल विद्युत उत्पादन = 140 mw

  • संपूर्ण विद्युत उत्पादन केवल राजस्थान करता है।
नोट- सर्वाधिक लाभांवित जिले- बाँसवाड़ा, डूंगरपुर (आसपुर, सागवाड़ा, सीमलवाड़ा)

वृहद सिंचाई परियोजना

गंगनहर परियोजना
  • नदी- सतलज नदी (हुसैनीवाला- फिरोजपुर, पंजाब)
  • निर्माण - महाराजा गंगासिंह
  • आधारशिला/शिलान्यास- 5 सितम्बर 1921 (महाराजा गंगासिंह द्वारा) फिरोजपुर हेडबॉक्स पर
  • उद्घाटन- 26 अक्टूबर, 1927 (वायसराय लॉर्ड इरविन)- शिवपुर हैड (फतुई- श्रीगंगानगर)
  • राजस्थान में प्रवेश- खंखा-गाँव (शिवपुर-श्रीगंगानगर)
  • कुल लम्बाई = 129 किमी., राजस्थान में लम्बाई = 17 किमी.
  • गंगनहर की मुख्य शाखाएँ - लक्ष्मीनारायण जी, लालगढ़, करणीजी, समीक्षा/समीजा
  • लाभान्वित जिला- श्रीगंगानगर
नोट- सतजल नदी का पानी राजस्थान में लाने के लिए सतजल नदी घाटी समझौता हुआ- 4 दिसम्बर, 1920
  • यह नहर, शिवपुर, श्रीगंगानगर, जोरावरपुर, पदमपुर, रायसिंहनगर, स्वरूपशहर तथा अनूपगढ़ तक जाती है।
  • इस नहर की वितरिकाओं की लम्बाई = 1280 किमी.
नोट- गंगनहर से पूर्व बीकानेर रियासत में पश्चिमी यमुना नहर से सिंचाई होती थी।
  • यह राजस्थान की प्रथम वृहद परियोजना है।
  • गंगनहर विश्व की प्रथम पक्की नहर है।
  • इस नहर के आधुनिकीकरण के लिए 31 मई, 2000 को केन्द्रीय जल आयोग द्वारा स्वीकृति दी गई जिसे 2008 तक पूर्ण किया गया।

गंगनहर लिंक परियोजना

  • निर्माण शुरू-1984
  • उद्देश्य-गंगनहर का निर्माण एवं मरम्मत के दौरान वैकल्पिक जल व्यवस्था करना।
  • इसकी शुरुआत- लोहागढ़ (हरियाणा) से साधुवाली (श्रीगंगानगर) तक
  • साधुवाली में गंगनहर में मिल जाती है।
  • कुल लम्बाई-76 किमी.
  • राज्य में यह प्रवेश राजस्थान तथा पंजाब की सीमा पर करती है।

राजस्थान नहर परियोजना : जनक-कंवर सैन

आधारशिला - 31 मार्च, 1958 (गृहमंत्री गोविंद वल्लभ पंत द्वारा)
उद्घाटन - 11 अक्टूबर, 1961 (डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा)
राजस्थान नहर का नाम बदला गया - 2 नवंबर, 1984 (इंदिरा गाँधी) इसलिए इसे इंदिरा गाँधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) कहते हैं।
इस नहर की सबसे पहले परिकल्पना महाराजा गंगा सिंह ने की तथा प्रथम सार्थक कदम महाराजा शार्दूल सिंह ने उठाया।

इन्दिरा गाँधी नहर परियोजना - मुख्य बिन्दु
बिन्दु विवरण
परियोजना का उद्गम स्थल व्यास तथा सतलज नदियों के संगम पर स्थित हरिके बैराज
जल उपलब्धता/आबंटन रावी व्यास नदियों के अधिशेष जल में राजस्थान का हिस्सा।
इन्दिरा गाँधी फीडर नहर-लम्बाई 204 किमी. ( 170 किमी. पंजाब व हरियाणा में तथा 34 किमी. राजस्थान में )
इन्दिरा गाँधी मुख्य नहर का उद्गम इन्दिरा गाँधी फीडर के अन्तिम छोर से
इन्दिरा गाँधी मुख्य नहर की लम्बाई 445 किमी.
राजस्थान में नहर का आरम्भ हनुमानगढ़ जिले से
गहराई 21 फूट
इन्दिरा गाँधी के तली की चौड़ाई 134 फूट
लाभांवित जिले श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर, चूरू, झुंझुनूँ, सीकर, नागौर तथा बाड़मेर फलोदी, जोधपुर, बालोतरा

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  • 1 जनवरी 1987 को मोहनगढ़ (जैसलमेर) से पानी प्रवाहित हो गया, मोहनगढ़ से 2 उपशाखाएँ निकाली- (1) लीलवा, (2) दीघा
  • सागरमल शाखा के अंतिम छोर से बाबा रामदेव लिफ्ट नहर (पुराना नाम-बरकतुल्ला खाँ नहर) निकाली गई है जिसे गडरा रोड (बाड़मेर) तक ले जाना प्रस्तावित है।
  • इस नहर की सबसे पहले परिकल्पना महाराजा गंगा सिंह ने की तथा प्रथम सार्थक कदम महाराजा शार्दुल सिंह ने उठाया।

I.G.N.P. से सिंचाई लक्ष्य रखा गया:
  • → प्रथम चरण - 5.53 लाख हेक्टेयर
  • → दूसरा चरण - 14.10 लाख हेक्टेयर
कुल लक्ष्य = 19.63 लाख हेक्टेयर

  • वर्तमान में दोनों चरणों को मिलाकर 16.17 लाख हेक्टेयर सिंचाई उपलब्ध होती है।
  • इंदिरा गाँधी नहर परियोजना में स्काडा सिस्टम SCADA (सुपरवाईजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्जिविशन) स्थापित किया गया है।
  1. आईजीएनपी (इंदिरा गाँधी नहर परियोजना) के अंतिम छोर से 2 उपशाखाएँ- लीलवा, दीघा तथा एक अन्य उपशाखा सागरमल गोपा शाखा के अंतिम छोर से गडरा रोड़ ( बरकतुल्लाह खाँ उपशाखा जिसे वर्तमान में बाबा रामदेव शाखा) भी निकाली गई है।
  2. आईजीएनपी से सर्वाधिक सिंचाई- बीकानेर
  3. आईजीएनपी का सर्वाधिक कमांड एरिया- बीकानेर, जैसलमेर

इंदिरा गाँधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) के लाभ

  • पश्चिमी राजस्थान में सिंचाई वृद्धि
  • खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता
  • किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार
  • वनस्पति एवं चारागाह भूमि का विकास
  • मरूस्थलीय क्षेत्र में जैव-विविधता में बढ़ोतरी
  • मरूस्थलीकरण को नियंत्रण
  • मत्स्य पालन
  • औद्योगिक विकास
  • जल विद्युत उत्पादन

इंदिरा गाँधी नहर परियोजना से हानि
  • लवणीयता की समस्या
  • सेम की समस्या (वाटर लेगिंग)
  • सिंचाई के कारण रासायनिक खादों का आर्थिक प्रयोग के कारण अनुपजाऊ हो जाना।

इंदिरा गाँधी नहर परियोजना की पेयजल परियोजनाएँ
  1. कंवर सेन लिफ्ट परियोजना- बीकानेर + श्रीगंगानगर के 228 गाँवों को पेयजल तथा लूणकरणसर (बीकानेर) तहसील में सिंचाई होती है। निर्माण - 1968 से 1976
  2. राजीव गाँधी लिफ्ट नहर परियोजना (जोधपुर लिफ्ट नहर योजना) - जोधपुर की जीवन रेखा है। जोधपुर लिफ्ट नहर से कायलाना झील (जोधपुर) को जलापूर्ति होती है।
3. आपणी योजना (गंधेली-साहिबा परियोजना)- यह आईजीएनपी की नोहर-साहबा लिफ्ट नहर से जर्मनी की K.F.W. कम्पनी के वित्तीय सहयोग से प्रारंभ की गई है।
I. चरण : चूरू, हनुमानगढ़
II. चरण : सीकर, झुंझुनूँ

राजीव गाँधी सिद्धमुख व नोहर सिंचाई परियोजना

  • 1981 में राजस्थान, पंजाब तथा हरियाणा के मध्य समझौते के तहत् इसका निर्माण किया गया।
  • शिलान्यास- 5 अक्टूबर, 1989 (राजीव गाँधी)- भिरानी गाँव (हनुमानगढ़)
  • लोकार्पण- 12 जुलाई 2002 (सोनिया गाँधी) - भिरानी गाँव
  • लाभान्वित जिले- 1.   हनुमानगढ़ - नोहर, भादरा, 2. चूरू - राजगढ़ तथा तारानगर
  • पेयजल उपलब्ध होता है- हरिके बैराज

नोट- इसमें वित्तीय सहयोग यूरोपियन संघ द्वारा किया गया। लेकिन 1998 में परमाणु परीक्षण के बाद यह वित्तीय सहयोग बंद कर दिया गया, जिसके स्थान पर नाबार्ड ने वित्तीय सहयोग दिया।

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सिद्धमुख रतनपुरा वितरिका
शुरुआत - 30 जून, 1999, भिरानी
सिंचाई - हनुमानगढ़, चूरू

गुड़गांव/यमुना नहर
नदी - यमुना,
निर्माण - 1966-1985
सहयोग - राजस्थान और हरियाणा, लाभान्वित जिला - भरतपुर, डीग अजान बांध तथा केवलादेव को जलापूर्ति।

भरतपुर नहर
निर्माण- 1964
नदी- यमुना
सहयोग- राजस्थान, उत्तरप्रदेश
लाभान्वित जिला- भरतपुर, डीग
कुल लम्बाई- 28 किमी.
राजस्थान में कुल लम्बाई- 12 किमी.

नर्मदा नहर परियोजना

  • साझेदारी-गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश की संयुक्त परियोजना है।
  • शुरुआत 18 मार्च, 2008
  • राजस्थान में कुल लम्बाई 74 किमी, राजस्थान में प्रवेश - सीलू, सांचौर (जालौर) जल आपूर्ति - सरदार सरोवर बाँध
  • लाभान्वित- जालौर, बाड़मेर
  • एकमात्र सिंचाई परियोजना जिसमें से फव्वारा पद्धति (स्प्रिंकलर मैथड) से सिंचाई की जाती है।
  • नर्मदा नहर पर जालौर में 3 लिफ्ट नहरें निकाली गई हैं- 1. सांचौर, 2. पनोरिया, 3. भादोरिया सिंचाई उपलब्ध 2.46 लाख हेक्टेयर।

बीसलपुर परियोजना देवली तहसील (टोंक)

  • नदी-बनास
  • जलापूर्ति- टोंक, अजमेर, जयपुर, नागौर, दौसा (नवीनतम जोड़ा गया)

नाबार्ड के वित्तीय सहयोग से संचालित है-
वर्ष 1988-89 में प्रारम्भ यह बहुउद्देशीय (सिंचाई व पेयजल) परियोजना है, जिसमें देवली तहसील (टोंक) के पास बीसलपुर गाँव में बनास नदी पर 574 मीटर लम्बा व 39.5 मीटर ऊँचा कंक्रीट बाँध बनाया गया हैं।

जाखम परियोजना (प्रतापगढ़)

  • विद्युत उत्पादन- 5.4 mw, निर्माण - जनजातीय उपयोजना के तहत, सिंचाई - प्रतापगढ़
  • नदी- जाखम, सिंचाई उपलब्ध- 23.5 हेक्टेयर, निर्माण- 1997-98

इंदिरा गांधी लिफ्ट नहर-करौली
  • राज्य की सबसे ऊँची लिफ्ट नहर।
  • 125 मीटर ऊँचाई पर पानी को लिफ्ट किया गया।
  • लाभान्वित जिले-करौली, सवाईमाधोपुर
  • सुजलम परियोजना-बाड़मेर
  • भारतीय सेना के लिए प्रारंभ की गई है।
  • यह खारे पानी को मीठा पानी बनाने की योजना है।

जवाई परियोजना (पाली)

  • पश्चिमी राजस्थान का सबसे लम्बा बाँध
  • मारवाड़ का अमृत सरोवर, सेई परियोजना (उदयपुर) के द्वारा इसमें पानी पहुँचाया जा रहा है।

राजगढ़ सिंचाई परियोजना (झालावाड़)

  • नदी- कन्ठाली व आहू नदी

भीखाभाई सागवाड़ा नहर (डूंगरपुर)

  • नदी- माही

पांचना परियोजना

  • करौली, सहयोग- अमेरिका
  • मिट्टी से निर्मित बाँध
  • 5 नदियों के संगम पर - अटा, मांची, भैसावट, बरखेड़ा, भद्रावती

परवन वृहद बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना

  • जलापूर्ति: खानपुर, झालावाड़, कोटा, बाराँ, एवं झालावाड़।
  • 2.01 लाख हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा तथा कुल 1402 गाँवों में पेयजल सुविधा उपलब्ध।
  • सिंचाई लाभ- बूंद-बूंद/फव्वारा पद्धति से सिंचाई सुविधा प्रदान है।

इन्दिरा गाँधी फीडर (पंजाब भाग) और सरहिन्द फीडर
  • इन्दिरा गाँधी फीडर की रि-लाईनिंग के लिए 23 जनवरी, 2019 को भारत सरकार और पंजाब सरकार के साथ एक अनुबन्ध पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

सिंचाई के साधन
  • कुएँ 24% जयपुर  
  • नलकूप 42% जयपुर
  • नहर 30% श्रीगंगानगर
  • तालाब 1% भीलवाड़ा
  • अन्य 3%

प्रथम बहुउद्देशीय परियोजना
  • विश्व टेनेसी (USA) निर्माण - 1932-33 
  • भारत दामोदर (पश्चिमी बंगाल, झारखण्ड) 1948
  • राजस्थान गंगनहर - 1927

राज्य में 6 मध्यम परियोजनाएँ (गरदड़ा, तकली, गागरिन, ल्हासी अंधेरी एवं हथियादेह) तथा 40 लघु सिंचाई परियोजनाओं का कार्य प्रगति पर है।

प्रमुख योजनाएँ

1. अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत-2.0)
शुरुआत- भारत सरकार द्वारा 1 अक्टूबर, 2021
उद्देश्य- शहरी निकायों के सभी घरों को 2025-26 तक "हर घर नल" द्वारा पेयजल उपलब्ध करवाना।

2. राजस्थान जल क्षेत्र आजीविका सुधार परियोजना
अवधि- 1 अप्रैल, 2017 से 31 मार्च, 2028 (11 वर्ष)
सहयोग- जायका (जापान अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी)
उद्देश्य- राज्य के सभी जिलों की सिंचाई परियोजनाओं के पुनर्वास तथा नवीनीकरण को बढ़ावा देना।
इसमें कुछ परियोजनाएँ- 137

3. मरम्मत, नवीनीकरण पुनर्स्थापन योजना (आरआरआर)
यह योजना जनवरी, 2005 में भारत सरकार द्वारा राज्य सरकार के सहयोग से छोटे जल संरचनाओं की मरम्मत और सुधार के लिए शुरू की गई थी, जो 60 : 40 वित्त पोषण पैटर्न पर आधारित थी। वर्ष 2017-18 में इस योजना को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का हिस्सा बना दिया गया।
ये परियोजनाएँ 14 जिलों यथा अजमेर, बाराँ, बूंदी, भरतपुर, चित्तौड़गढ़, दौसा, धौलपुर, डूंगरपुर, जयपुर, झालावाड़, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर, सीकर और टोंक में संचालित होगी।

4. मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 (एम.जे.एस.ए. 2.0)
राज्य में अधिकतम वर्षा जल संचयन जल संरक्षण और उपलब्ध जल संसाधनों
के विवेकपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए फरवरी 2024 में शुरू की गई।

5. राजस्थान राज्य जल विकास निगम लिमिटेड
स्थापना- 1984
मुख्यालय- जयपुर
उद्देश्य- जल संरक्षण तथा विकास

6. सिंचाई प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान
स्थापना- 1984
मुख्यालय- कोटा।
उद्देश्य- जल संरक्षण करने वालों को प्रोत्साहन करना तथा सिंचाई/कृषि विभाग के कर्मचारियों का जल संरक्षण से संबद्ध प्रशिक्षण देना।

7. कमाण्ड क्षेत्र विकास कार्यक्रम
स्थापना- 1974-75
उद्देश्य- सिंचाई परियोजनाओं का बेहतर उपयोग तथा विकास करना।

8. जल ग्रहण विकास कार्यक्रम
स्थापना- 1995-96
उद्देश्य - वर्षा जल को एकत्रित करना, चारागाह का विकास करना तथा मिट्टी के कटाव को रोकना।

9. राजीव गाँधी जल प्रबंधन मिशन
स्थापना- 2001
इसका उद्देश्य- राजस्थान में उपलब्ध सही व भू-जल संसाधनों के विकास एवं संरक्षण करना।

10. राजस्थान जल क्षेत्र पुनः सरंचना कार्यक्रम
स्थापना- 2002
उद्देश्य- सिंचाई परियोजनाओं का विकास करना तथा सतही जल संसाधनों का विकास करना।

11. वर्षा जल संचयी कार्यक्रम - 2004
स्थापना- 2004
यह सीकर जिले से प्रारम्भ किया गया जिसका मुख्य उद्देश्य जल को एकत्रित करके भविष्य के लिए सुरक्षित रखना।

12. पार्वती कालीसिन्ध चम्बल परियोजना
स्थापना- 2005
यह नदी जोड़ो परियोजना से संबंधित है जो राजस्थान एवं मध्यप्रदेश के मध्य साझेदारी है।

13. स्काडा योजना
स्थापना- 2010
यह तकनीकी आई.जी.सी.पी./आई.जी.एन.पी. में है जो कम्प्यूटरीकृत तकनीकी प्रणाली है जो जल के प्रवाह को नियंत्रित करती है।

14. पणिहारिन परियोजना
स्थापना- 2010
यह योजना पंचपदरा (बालोतरा) से शुरू की गई है जिसका उद्देश्य मारवाड़ क्षेत्र के लोगों को शुद्ध जल उपलब्ध करवाना है।

15. जल शुद्धिकरण संयंत्र
स्थापना- 2010
कासनाऊ व माता सुख लिग्नाइट की खानों के खारे पानी को मीठा पानी बनाने के लिए शुरू की गई है।

16. सिंचाई प्रबंधन संस्थान
स्थापना- 2014
मुख्यालय- बीकानेर

17. चम्बल सिंचित क्षेत्र परियोजना
शुरुआत- जून 1974
सहयोग- विश्व बैंक
लाभान्वित- कोटा, बूंदी, बारां।
उद्देश्य- सिंचाई उपलब्ध करवाना, भूमि सुधार करना, कृषि उत्पादन में वृद्धि करना।

18. राजाड परियोजना
शुरुआत- 1993
उद्देश्य- चम्बल नदी में सेम समस्या के समाधान के लिए
सहयोग- कनाडा

राजस्थान की अन्य मुख्य सिंचाई परियोजना

परियोजना स्थान
हरिश्चन्द्रकोटा
गोपालपुरकोटा
तकलीकोटा
सावन भादोकोटा
जवाहर सागरकोटा
मेजबूँदी
गरदड़ाबूँदी
चाकणबूँदी
गुढ़ाबूँदी
परवनझालावाड़
बैंथलीबाराँ
विलासबाराँ
अंधेरीबाराँ
गागरिनझालावाड़
कालीसिंधझालावाड़
चोली/चंवलीझालावाड़
छापीझालावाड़
भील सागरझालावाड़
पिप्लादझालावाड़
पिप्लादासवाई माधोपुर
ईसरदासवाई माधोपुर
मोरेलसवाई माधोपुर
इन्दिरा गाँधी सिंचाई लिफ्ट परियोजना (चम्बल नदी)करौली
टोरड़ी सागरटोंक
डिब्बू सागरटोंक
माधोसागरदौसा
चीरमिरीदौसा
रेडियो सागरदौसा
झिल्ल-मिल्लीदौसा
नारायण सागरब्यावर
ओराईचित्तौड़गढ़
गंभीरीचित्तौड़गढ़
सोम कागदरउदयपुर
मानसी-वाकलउदयपुर
सोम-कलीडूंगरपुर
सोम-कमला-अम्बाडूंगरपुर
भीखा-भाई सागवाड़डूंगरपुर
बाण्डी सेदड़ाजालौर
अनासबाँसवाड़ा
चूलीदेहकरौली
कालीतीरधौलपुर
मोरा सागर बांधसवाई माधोपुर
सरजू सागर बांधसीकर

राज्य योजनान्तर्गत चालू सिंचाई परियोजनाओं

क्रमांक परियोजना का नाम जिला
1 2 3
( अ ) वृहद परियोजनाएँ- सिंचाई
1 नर्मदा जालौर, बाड़मेर
2 परवन झालावाड़
3 धौलपुर लिफ्ट धौलपुर
4 रेगिस्तान क्षेत्र में राजस्थान जल क्षेत्र पुनःसंरचना परियोजना हनुमानगढ़
5 पीपलाखूंट हाई लेवल कैनाल बाँसवाड़ा
6. E.R.C.P. 21 जिलों में
( ब ) मध्यम परियोजनाएँ- सिंचाई-
1 तकली कोटा
2 गागरिन झालावाड़
3 ल्हासी बाराँ
4 गरदडा बूँदी
5 हथियादेह बाराँ
( स ) लघु सिंचाई परियोजनाएँ- सिंचाई
1 रैंजिंग ऑफ मानसरोवर बाँध सवाई माधोपुर
2 खोह करौली
3 समर सरोवर अलवर
4 दोहरी माईनर (नाबार्ड) करौली
5 लोहलाई (नाबार्ड) सवाई माधोपुर
6 कोटारी (नाबार्ड) सीकर
7 रेवा झालावाड़
8 कनवाडा झालावाड़
9 चाकन बूँदी
10 अहमदी बाराँ
11 संतूरमाताजी बूँदी
12 रोशनवाडी झालावाड़
13 घाटी (नाबार्ड) झालावाड़
14 फोलाई लिफ्ट (नाबार्ड) बूँदी
15 जाखा मंझोला माईनर (नाबार्ड) बाराँ
16 गैंडोली लिफ्ट (नाबार्ड) बूँदी
17 पिण्ड प्रतापगढ़
18 वाडोल का नाका (टीएसपी) डूंगरपुर
19 साबरमती- II (टीएसपी) उदयपुर
20 बोर का भाटड़ा (टीएसपी) डूंगरपुर
21 भंवराना कैनाल (टीएसपी) डूंगरपुर
22 साबरमती (टीएसपी) उदयपुर
23 मामेर (टीएसपी) उदयपुर
24 भंवर सैमला (टीएसपी) प्रतापगढ़
25 रेन का नाका (नाबार्ड) चित्तौड़गढ़
26 साखेड़ा माईनर (नाबार्ड) चित्तौड़गढ़
27 अम्बापुरा लिफ्ट टी.एस.पी. (नाबार्ड) बाँसवाड़ा
28 झांटला माईनर (टीएसपी) (नाबार्ड) प्रतापगढ़
29 वासा सिरोही
30 बत्तीसा नाला (नाबार्ड) सिरोही

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को RPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।