राजस्थानी शब्दावली | Rajasthani Shabdawali

राजस्थानी शब्दावली

इस लेख में राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण जीवन शैली से जुड़े पारंपरिक शब्दावली की विस्तृत जानकारी दी गई है।
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इसमें खेती-बाड़ी के प्राचीन उपकरणों, सिंचाई के साधनों, पशुपालन से संबंधित शब्दों और मारवाड़ी जनजीवन में प्रयुक्त होने वाले विशिष्ट नामों का अनूठा संग्रह पढ़ने को मिलेगा।
  • निंनाण - खेत से खरपतवार हटाना।
  • सूड़ - खेत बिजाई से पूर्व झाड़ - कचरा हटाना।
  • लावणी - फसल कटाई
  • खलों - अनाज निकालना
  • दंताणी - कचरा इकट्ठा करने का उपकरण
  • जेली - दो सींग का उपकरण जिससे लकड़ी इकट्ठा होती है।
  • चौसींगी - चार सींग का उपकरण जिससे अनाज निकालने में प्रयोग होता है।
  • दांती - फसल काटने का उपकरण
  • रूमा - कस्सी से छोटा
  • कुदाली, पावड़ों कस्सी - खुदाई के उपकरण
  • हल/सीर - भूमि जोतने के काम आने वाला उपकरण
  • गैंती - कठोर जमीन की खुदाई का उपकरण
  • उनालू/रबी - सर्दियों में होने वाली फसल जैसे - चना, गेहूँ, जौ।
  • स्यालु/खरीफ - गर्मियों में मानसून से होने वाली फसल। जैसे - ज्वार, बाजरा, मक्का, मूंगफली, मूंग, मोठ।
  • बुवाई - खेत की जुताई करना।
  • हींसू - पत्थर खोदने का मजबूत लोहे का उपकरण।
  • चड़स - कुएँ से पानी निकालने का उपकरण।
  • रहट/ओठ - सिंचाई के लिये कुएँ से पानी निकालने का उपकरण जिस पर चक्कर लगे होते है।
  • ढीकली - लकड़ी के चड़स बाँधकर कुएँ से पानी निकालने का उपकरण जो तुला की तरह काम करता है।
  • भूण - पानी निकालने के लिये कुऐं पर चक्कर के पास लकड़ी की लगी गिल्ली भूण कहलाती है।
  • खेल/पो - पशुओं के पानी पीने का हौज।
  • डोर- कुएँ से पानी निकालने की रस्सी।
  • डीश - खेत में
  • प्लाऊ बान - जमीन को पोल करना।
  • लाव- चड्स में काम आने वाली रस्सी।
  • बाड़- पशुओं को खेत में नुकसान करने से रोकने के लिये लकड़ियों से बनाई गई दीवार।
  • खाई - पशुओं को खेत में घुसने से रोकने के लिये जमीन खोदकर मिट्टी से चारों ओर बनाई गई दीवार।
  • अड़वो/ओझाको/ओधो - पशुओं व पक्षियों को डराने के लिये लकड़ी से तैयार किया गया मानव रूप।
  • मचान/डागला - झोंपड़ीनुमा। पेड़ पर बनाते हैं।
  • झोंपड़ी - घास-फूस से तैयार किया गया मकान।
  • गोफण/गुलेल - पक्षियों को भगाने के लिये पत्थर फेंकने का उपकरण।
  • खूँटा - पशुओं को बांधने के लिये जमीन में गाढ़ी गई लकड़ी।
  • मेख- जमीन या दीवार में लगाई गई कील जिससे घोड़ा बांधा जाता है।
  • बटोड़ा - थेपड़ी को इकट्ठा करना।
  • थेपड़ी- गोबर को हाथ से थेपकर सुखाना।
  • छाणा- गोबर को बिना थेपे ही सुखाना।
  • कण्डे/आरणा - जंगल से चुनकर लाये गये छाणे।
  • रोड़ी/कुरड़ी- गोबर- कचरे का ढेर।
  • चावर/पाटा/केरण- सुहागों या बान के बाद जमीन को समतल करने के लिए लकड़ी का पाटा फेरना।
  • सुहागो - खेत की भूमि को पोला करना
  • बान- बुवाई से पूर्व भूमि को पोला करना।
  • जुड़ा- हल खींचने के लिये बैलों के कंधों पर लगा डंडा।
  • समेल- जुड़े के दोनों ओर सुराग निकालकर डाली गई लकड़ी।
  • हकन/नूंणिया/नाड़ा- जुड़े व हल के बीच लगी रस्सी।
  • रखत- कुछ समय के लिये बिना बुवाई छोड़ी गई भूमि।
  • हड़ावो- बिना बुवाई की गई भूमि।
  • अडाण- सिंचाई योग्य भूमि।
  • खेई - लकड़ी का बड़ा बंडल।
  • भरोटयो - कटी हुई लकड़ी का बंडल।
  • चरणोट / बीड़- पशुओं को चराने की भूमि।
  • चड़सा- चड़स से सिंचाई योग्य भूमि।
  • मोरी हालो- नहर से सिंचाई योग्य भूमि।
  • पड़त- बिना जुती भूमि।
  • झांखड़- झाड़ियों से भरी भूमि।
  • पछोर- तालाब के पीछे की भूमि।
  • मोहरी- पशुओं के मुँह पर बांधी जाने वाली रस्सी।
  • नाथ- बैल के नाक की रस्सी।
  • दांवणों/नूंजणों - पशुओं को नियंत्रण में करने के लिये पैरों में बाँधी जाने वाली रस्सी।
  • बरां- बैलगाड़ियों में सामान को बाँधी जाने वाली रस्सी।
  • बोरा - जूट या पशुओं के बालों से बना पात्र जिसमें घास-फूस डाला जाता है।
  • कोठी- मिट्टी से बना अनाज रखने का बड़ा पात्र जिसे चार पायों पर पैदा बनाकर चारों ओर दीवार बनाकर तैयार किया जाता है।
  • बखारी - कमरे में बनाया गया अनाज रखने का पात्र
  • साल- अन्दर का मकान।
  • बैठक - बाहर का मकान जो मेहमानों के लिये होता है।
  • धोरा- कुएँ, नहर से पानी पहुँचाने की नाली।
  • धोरा- रेत के ऊँचे टीले।
  • फेटूड़ा- छोटे बच्चों पर किसी बुरी आत्मा का असर।
  • नजरया- लकड़ी के डंडे पर काली हांडी लटकाना।
  • पणा- पतली रेत जो तालाब के पेंदे में होती है।
  • छींकी- बछड़े को दूध पीने से रोकने व पशुओं के फसल को नुकसान से बचाने के लिये मुँह पर लगा अवरोध।
  • ठाठिया/ठमोल्या- कागज से तैयार किये बर्तन।
  • पालणा- छोटे बच्चों का टोकरीनुमा झूला।
  • पिटारी- बांस का बना पात्र जिसमें सांप रखा जाता है।
  • चंगेड़ी/कोवड़ी- अनाज रखने का छोटा पात्र।
  • तांगा/छकड़ो- घोड़ागाड़ी।
  • रथ- कई घोड़ों से जुड़ी गाड़ी।
  • महावत - हाथी को काबू में करने वाला व्यक्ति।
  • रेवड़- भेड़-बकरियों का झुंड।
  • गवालियों - रेवड़ रखने वाला व्यक्ति।
  • झोरणों/रई/झोरा/रवाई - लकड़ी से बना बेलनाकार डंडा जिसमें दही बिलाया जाता है।
  • नेतरा/नेता - झोरणें पर लगाई जाने वाली रस्सी।
  • नींगली - घी का पात्र।
  • जाँवण- दही जमाने के लिये काम में ली जाने वाली खटाई, दही, छाछ।
  • ऊटेरना - पशुओं के शरीर पर दागना।
  • गोड़लिया - पशुओं के शरीर पर कलात्मक निशान।
  • टोयिया - ऊँटनी का नवजात बच्चा।
  • मावठ- सर्दियों में होने वाली वर्षा।
  • लू - गर्मियों में चलने वाली गर्म हवा।
  • पुरवाई- पूर्व दिशा से चलने वाली हवाएँ।
  • आंधी- तेज गति से चलने वाली धूल भरी हवा।
  • बंभूलियों - गोल चक्कर में चलने वाली हवा।
  • जीणपोश - घोड़े की पीठ के वस्त्र।
  • काठी/जीण - कपड़े की गुद्दी।
  • गजगाव- जीण के आगे पीछे का चँवर।
  • तंग - जीण को कसने वाली रस्सी।
  • जेरबंद- गले के नीचे लटकने वाला कपड़ा।
  • तुमची- जीण के पीछे लगने वाली रस्सी जो पूँछ के नीचे तक होती है।
  • गिरबाण- ऊँट की नाक में पहनाई जाने वाली लकड़ी की कील।
  • नकेल/बेलचा - गिरबाण में बाँधी जाने वाली रस्सी।
  • पलाण- ऊँट पर लकड़ी का आसन।
  • बलोवणी- दही मथने का मिट्टी का बर्तन।
  • मटका- मिट्टी का पानी का बर्तन।
  • चिरपनिया- मटका ढकने का मिट्टी का ढक्कन।
  • लोटड़ी- पानी ठण्डा रखने का मिट्टी का बर्तन जिसका पैदा नहीं होता है तथा मुंह छोटा होता है इसे ऊँट के बगल में लटकाकर रखते हैं।
  • कुंजिया- लोटड़ी के आकार का जिसके पैदा होता है।
  • सुराही- कुंजिया के आकार की।
  • सिट्टा/सरा - बाजरे की बाल।
  • कड़बी- सिट्टे के नीचे का हिस्सा जो चारे के काम आता है।
  • काकड़ा- कपास के बीज।
  • डींडू- कपास का फल।
  • बण- कपास का पौधा।
  • परात -आटा गूंथने का पात्र।
  • डेगची- सब्जी बनाने का पात्र।
  • चकला - लकड़ी का पाटा जिस पर रोटी बेली/बनाई जाती है।
  • बेलन- लकड़ी का गोलाकार जिससे रोटियाँ बेली/बनाई जाती है।
  • तोवा / तवा- लोहे का बना गोलाकार जिसे चूल्हे पर रखकर रोटियाँ बनाई जाती है।
  • भूंगली- लकड़ी/लोहे की नलिका जिससे चूल्हा जलाने के लिए फूंक दी जाती है।
  • बाजोट /चौकी - लकड़ी का बना पाटा जिस पर खाना खाते समय थाली रखी जाती है।
  • घाणी - लकड़ी का यंत्र जिससे तिल, राई का तेल निकाला जाता है।
  • लीतरा - चप्पल को कहते हैं।
  • हारा - दूध गर्म करने का।
  • ओतर - बारात को दी जाने वाली विदाई।
  • सज्जादी - नमाज पढ़ते समय बिछाने का वस्त्र।
  • साकी - शराब या हुक्का पिलाने वाला व्यक्ति।
  • वीरमूठ - राजा द्वारा कवि को दिया जाने वाला नगद पुरस्कार।
  • मिसल - राजदरबार में पंक्तिबद्ध तरीके से बैठने की रीति।
  • सांसण - राजाओं द्वारा ब्राह्मणों, चारणों को दान में दी गई भूमि।
  • एडर - ऊँट का पांचवां पैर।
  • थुई - ऊँट के ऊपर।
  • पौलपात - युद्ध के समय किले का मुख्य द्वार खोलकर सर्वप्रथम युद्ध करने वाला चारण।
  • बाग पकड़ाई - दुल्हे की घोड़ी की लगाम पकड़ने का नेग।
  • भातड़ियाँ - गाँव-गाँव फिरकर काम करने वाला स्वर्णकार।
  • वेठणी - बेगार का काम करने वाली स्त्री।
  • घाटी - अनाज पीसने की घरेलू चक्की के चारों तरफलगा घेरा।
  • बोहरगत - ब्याज पर रुपया उधार देने का धंधा करने वाला।
  • मसौती - रसोई में रुमाल की तरह काम करने वाला वस्त्र।
  • टोकसी - नारियल के कड़े आवरण से बना छाछ डालने का छोटा पात्र।
  • डांगड़ी रात - तीर्थयात्रा से लौटकर करवाया जाने वाला रात्रि जागरण।
  • चावर - जुताई के बाद भूमि को समतल करने के लिए फेरा जाने वाला मोटा पाट।
  • ओजू/वूजू - नमाज पढ़ने से पूर्व शुद्धि के लिए हाथ पाँव धोना।
  • ठाण - पशुओं का चारा डालने का उपकरण
  • ढींगरा - पशुओं के गले में लटकाने वाला लकड़ी का टुकड़ा, जो पशुओं को भागने से रोकता है।
  • लोडौ - भीगी मिर्च - दाल आदि पीसने का सिलबट्टा।
  • गोड़लिया/अटेरना - लोहे के सरिये या मिट्टी की ढकनी को गर्म कर पशुओं के शरीर पर लगाया जाने वाला निशान या दाग।
  • तुक्कल - बड़ी साइज की पतंग को कहा जाता है।
नोट :- जयपुर के सवाई मानसिंह ने पतंगबाजी प्रारम्भ की थी।

  • बजेड़ा - पान का खेत (तमोली-पान की खेती करने वाला)
  • काकड़ा - कपास का बीज।
  • रांदी - मृत पशुओं की खाल उतारनें के काम आने वाला तीखा औजार।
  • चेला - तराजू के पालड़े
  • नेतारा - झेरने की रस्सी
  • झेरणा - लकड़ी से बना जो दही बिलौने के काम आता है।
  • कढ़ावणी - दूध गर्म करने का मिट्टी का बर्तन।
  • फंकणी - चूल्हे में फूंक मारने की नलिका।
  • मींढ़ा - नर भेड़
  • लरड़ी - मादा भेड़
  • छकड़ा - घोड़ा गाड़ी
  • गिवारणी - गलियों में महिलाओं के शृंगार का सामान बेचने वाली।
  • घेघरी - चने का फल
  • कांकड़ - दो गांवों के बीच की सीमा।
  • मिरड़ों - खेजड़ी की गलियों को एकत्रित किया स्थान।
  • कनोई/कन्दोई - हलवाई
  • पोतड़ा - शिशु की लंगोटी
  • ग्याबण - गर्भवती
  • मुसाण - शमशान भूमि।
  • कुरड़ी - कचरा स्थान।
  • पालर - बरसात का पानी।
  • आखा - मांगलिक अवसर पर काम आने वाले चावल या गेहूँ के दाने।
  • गसब - छोटी तोप जिसे ऊँट खींच सके।
  • जेंढ़क - विजय के उपलक्ष में बजने वाला ढोल।
  • तागड़ी - कमर पर बंधा काला धागा।
  • त्रिगूढ - स्त्री का रूप बनाकर पुरूषों द्वारा किया जाने वाला नृत्य।
  • तीड़ा - मनसबदारों को दिया जाने वाला ध्वज।
  • देसूटो - देश निकाला।
  • परूसो - किसी के घर भोजन की थाली भेजना।
  • फूहली - राखी के बदले बहन को दी जाने वाली पोशाक।
  • बराड़ - प्रत्येक घर से लिया जाने वाला चंदा।
  • मंगलियो - मिट्टी का पात्र।
  • माटो - कन्या के साथ भेजी जाने वाली बड़ी-पापड़।
  • साई - किसी वस्तु की खरीद पर दी जाने वाली अग्रिम राशि।
  • हुंडी - सेठ-साहूकारों का भुगतान पत्र।
  • डींगरो - पशुओं के गले में लटका लकड़ी का लट्ठ।
  • इडर/तड़ीत - ऊँट का पांचवा पैर।
  • तोबर - घोड़े को दाना खिलाने का थैला।
  • न्याया/दावण - दूध निकालते समय गाय के बांधते है।
  • नकेल/नकतोरण - ऊँट के नाम में।
  • निगड़ - हाथी के पैर की बेड़ी।
  • नौल - ऊँट के पैरों में ताला लगी जंजीर।
  • छीवर/ढेर/पचावो - बाजरी की कड़बी का ढेर।
  • पागड़ों - घोड़े पर चढ़ने के लिए लगा पायदान।
  • फंकी - अनाज का महीनतम कचरा।
  • फांस - लकड़ी या बाँस का बारीक टुकड़ा जो चमड़ी में फस जाए।
  • फाटक - आवारा पशुओं को बंद रखने का स्थान।
  • बांटो - पशुओं को खिलाने की सामग्री।
  • अड़क - बिना बोए उगने वाला अनाज।
  • बुग - कुत्ते के लगने वाला कीड़ा।
  • कुतर - बाजरी के पुलों को काटकर बनाया गया चारा।
  • गुणा - मूंग, मोठ, चना आदि के सूखे डंठल।
  • गेंगरी - चने के पौधो का कच्चा फल।
  • जेट - चना, मोठ, मूंग आदि को काटकर इकट्ठा करना।
  • भुरट - कांटेदार डोड वाला घास।
  • धातवारण - किसान के लिए भोजन ले जाने वाली महिला।
  • मुड़ासो - सिर पर वजन उठाने के लिए कपड़े का बनाया गया चक्का।
  • सटको - पानी खींचने का पाईप

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Kartik Budholiya

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राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को RPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।