गृह विभाग एवं पुलिस प्रशासन (राजस्थान)

गृह विभाग एवं पुलिस प्रशासन

यह लेख राजस्थान में गृह विभाग एवं पुलिस प्रशासन की भूमिका, संरचना और कार्यप्रणाली को सरल, स्पष्ट और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें बताया गया है कि किस प्रकार संविधान के प्रावधानों के अंतर्गत राज्य सरकार कानून-व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा और सार्वजनिक शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाती है तथा गृह विभाग इसके लिए मार्गदर्शक और नियंत्रक संस्था के रूप में कार्य करता है।
लेख में राजस्थान पुलिस के गठन, संगठनात्मक ढांचे, प्रमुख कार्यों, प्राथमिकताओं और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, कारागार विभाग, नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षा, अभियोजन और राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला जैसे गृह विभाग के विभिन्न अंगों की भूमिका को व्यावहारिक दृष्टि से समझाया गया है। कुल मिलाकर यह सामग्री गृह विभाग और पुलिस प्रशासन को केवल एक शक्ति-संरचना नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा, न्याय और विश्वास को बनाए रखने वाले राज्य के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में प्रस्तुत करती है।
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संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची "राज्य सूची", की प्रविष्टि संख्या 1 व 2 के अनुसार 'लोक व्यवस्था' और 'पुलिस' राज्यों के उत्तरदायित्व हैं। किसी भी राज्य में कानून व्यवस्था बनाये रखने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन पर होती है। संविधान के अनु. 355 में यह विनिर्दिष्ट किया गया है कि संघ का यह कर्त्तव्य होगा कि वह बाह्य आक्रमण और आन्तरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की सरकार का इस संविधान के उपबन्धों के अनुसार चलाया जाना सुनिश्चित करें। उपरोक्त कार्य की पूर्ति हेतु केन्द्र स्तर पर गृह मंत्रालय एवं प्रत्येक राज्य स्तर पर गृह विभाग की स्थापना की गई है।
गृह विभाग राज्य में सुरक्षा, शांति एवं सौहार्द बनाये रखने के लिए, कानून का शासन लागू करने व समय पर न्याय प्रदान करने के लिए, समाज को अपराध मुक्त वातावरण प्रदान करने हेतु एवं उग्रवाद, विद्रोह व आतंकवाद को समाप्त करने के लिए राज्य सरकार को मार्गदर्शन एवं विशेषज्ञता प्रदान करता है।

संगठन

राजनैतिक स्तर पर गृह मंत्रालय का नेतृत्व कैबिनेट स्तर के एक वरिष्ठ मंत्री द्वारा किया जाता है। इसके प्रभारी मंत्री राज्य के गृह मंत्री होते हैं। कभी-कभी इसका नेतृत्व मुख्यमंत्री द्वारा भी किया जाता हैं। राजस्थान गृह विभाग में गृह मंत्री के अलावा प्रशासनिक प्रमुख के रूप में राज्य के गृह सचिव कार्यरत है। मुख्य सचिव (गृह) एवं उनके नीचे विशिष्ट सचिव गृह (कानून) होता हैं। इनकी सहायता हेतु पदसोपान में उपसचिव (सुरक्षा), उपसचिव (पुलिस), उपसचिव (मानवाधिकार), उपसचिव (अपील), उपसचिव (समन्वय), ओ.एस.डी. (जेल), उपसचिव (आपातकाल प्रबन्धक) होते हैं जिनके अन्तर्गत गृह विभाग के 14 ग्रुप विभाजित कर दिये गये हैं।

गृह विभाग के अन्तर्गत विभाग

गृह विभाग के अन्तर्गत राजस्थान पुलिस, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षा, कारागार, अभियोजन एवं राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला विभाग आते हैं। गृह विभाग के विभिन्न कार्यकारी अंगों द्वारा प्रत्येक वर्ष अपना प्रशासनिक प्रतिवेदन तैयार किया जाता है, जो विधानसभा के बजट सत्र के समय विधानसभा के पटल पर रखा जाता है। गृह विभाग इन सभी अंगों का प्रशासनिक नेतृत्व करता है तथा इनके कार्यों के पर्यवेक्षण हेतु उत्तरदायी है।

गृह विभाग के निम्नलिखित अंग हैं-

(1) राजस्थान पुलिस

राज्य में पुलिस नागरिक सेवाओं के अन्तर्गत आती है। यह राजस्थान का शासी निकाय है। जिसकी प्रकृति एन्फोर्समेंट की है। स्वतंत्रता से पूर्व भारत देशी रियासतों में बंटा हुआ था। पुलिस प्रशासन की कोई एकल सुचारू व्यवस्था स्वतंत्र भारत में नहीं थी। आजादी के तुरन्त बाद सरदार पटेल ने रियासतों का एकीकरण करने में मुख्य भूमिका निभाई। स्वतंत्रता के समय राजस्थान में 19 रियासतें व 3 ठिकाने थे। राजस्थान का गठन इन रियासतों के एकीकरण से हुआ। राज्य में अच्छी गुणवत्ता वाली सुरक्षा सेवाओं की बहुत मांग थी। इससे पूर्व राजपूताने में कोई संयुक्त लोक सेवाऐं मौजूद नहीं थी। रियासतों की सुरक्षा और पुलिस बल की संरचना, कार्य व प्रशासनिक प्रक्रिया भिन्न-भिन्न थी। इन रियासतों के विलय के साथ उनके पुलिस बलों का एकीकरण करके एकल पुलिस बल बनाया गया। जिसे राजस्थान पुलिस का नाम दिया गया। राज्य पुलिस का प्रचलित नाम 'राजस्थान पुलिस सेवा' है इसका गठन 1948 में किया गया। इसके पश्चात 16 अप्रैल, 1949 को अध्यादेश जारी करके एकीकृत पुलिस का गठन किया गया जिसे ही 'राजस्थान पुलिस' कहा जाता है। इसलिए 16 को अप्रैल को प्रतिवर्ष राजस्थान पुलिस स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। राजस्थान सशस्त्र बल का गठन 19 अगस्त, 1950 में गठित की गई।

राजस्थान पुलिस महत्वपूर्ण तथ्य
  1. मुख्यालय- राजस्थान पुलिस का मुख्यालय (Police Headquarter-PHQ) जयपुर में है। 16 अप्रैल पुलिस दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  2. प्रतीक- राजस्थान पुलिस का प्रतीक 'विजय स्तम्भ' है। भगवान विष्णु को समर्पित यह 9 मंजिला इमारत चित्तौड़गढ़ में स्थित है। इसका निर्माण महाराणा कुम्भा ने सारंगपुर युद्ध (1437 ई.) में महमूद खिलजी पर विजय के उपलक्ष में करवाया।
  3. ध्येय वाक्य- राजस्थान पुलिस का ध्येय वाक्य “अपराधियों में डर आमजन में विश्वास” है। ध्वज- राजस्थान पुलिस में दो रंग गहरा नीला व लाल है। इस विजय में विजय स्तम्भ के शीर्ष पर अशोक स्तम्भ तथा विजय स्तम्भ के दोनों तरफ तलवार व ढाल के चिन्ह अंकित है। 30 मार्च, 1954 को जवाहर लाल नेहरू द्वारा सर्वप्रथम राजस्थान पुलिस ध्वज प्रदान किया। वर्तमान पुलिस ध्वज 17 अप्रैल, 1992 को राजस्थान के राज्यपाल एवं चन्नारेड्डी ने प्रदान किया।
  4. आदर्श वाक्य- “सेवार्थ कटिबद्धता” यह वाक्य वीरता व दृढ़ निश्चय का परिचायक है।
  • राज्य पुलिस आयोग का गठन 5 मई, 2013 को किया गया।
  • राज्य में 15 अगस्त, 2014 से छात्रा आत्मरक्षा कौशल योजना शुरू की गई है।
  • राज्य का धौलपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय 8 मार्च, 2008 को ISO प्रमाण पत्र के सम्मानित होने वाला उत्तर भारत का पहला पुलिस अधीक्षक कार्यालय तथा भारत का तीसरा।
  • जयपुर के शिप्रापथ थाना को विश्व का सर्वश्रेष्ठ पुलिस थाना घोषित किया गया है।
  • राज्य की महिला सशस्त्र बटालियन हाड़ा रानी बटालियन है।
  • राजस्थान के अजमेर में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल की बटालियन 2011-12 से तैनात की गयी।
  • 18 दिसम्बर, 2006 को ऑनलाइन एफ.आई.आर. शुरू करने वाला थाना, जयपुर जिले का कालवाड़ थाना है।
  • महाराणा प्रताप आर्म्ड बटालियन का मुख्यालय प्रतापगढ़ में है।
  • राज्य के प्रथम पुलिस महानिरीक्षक श्री आर. बनर्जी थे।

पुलिस के कार्य
राजस्थान पुलिस द्वारा अपराधों की रोकथाम, अनुसंधान तथा अपराधियों को न्यायालय से सजा दिलाने की कार्यवाही की जाती है। इसके लिये पुलिस मुख्यालय स्तर पर पुलिस आयोजना, कानून एवं व्यवस्था, अपराध विवेचन, यातायात, राजकीय रेलवे पुलिस, स्टेट क्राईम रिकार्ड ब्यूरो, पुलिस दूरसंचार, राजस्थान सशस्त्र बल, प्रशिक्षण, सतर्कता, पुलिस कल्याण एवं आधुनिकीकरण, पुलिस खेलकूद और उत्कृष्ट कार्यों के लिये पुरस्कार इत्यादि कार्य सम्पादित किये जाते हैं।

राज्य में पुलिस प्रशासन की संरचना
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राज्य में पुलिस प्रशासन का मुखिया पुलिस महानिदेशक (D.G.P.) होता है। यह पुलिस विभाग का सर्वोच्च अधिकारी होता है। यह भारतीय पुलिस सेवा का वरिष्ठतम अधिकारी होता है। यह मुख्यमंत्री का विश्वास पात्र होता है जो सम्पूर्ण राज्य में कानून व्यवस्था व शांति बनाए रखने के लिए उत्तरदायी होता है। इनकी सहायता के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) होता है। राज्य को पुलिस रेंज में बांटा जाता है। वर्तमान में 8 पुलिस रेंज जयपुर (शहर), जयपुर (ग्रामीण), जोधपुर, अजमेर, कोटा, बीकानेर, भरतपुर व उदयपुर है। पुलिस रेंज का सर्वोच्च पुलिस अधिकारी पुलिस महानिरीक्षक (I.G.P.) होता है। इनकी सहायता के लिए पुलिस उपमहानिरीक्षक (D.I.G.P.) होता है। पुलिस रेंज को जिलों में विभक्त किया जाता है।
जिला स्तर पर पुलिस प्रशासन का उत्तरदायित्व जिला पुलिस अधीक्षक निर्वहन करता है। वह भारतीय पुलिस सेवा (आई.पी.एस.) का सदस्य होता है। उसके अधीनस्थ उसकी सहायता के लिए उप-अधीक्षक, वृत्ताधिकारी, पुलिस इंस्पेक्टर आदि होते हैं। कानून व सुरक्षा की दृष्टि से जिले को कुछ वृत्तों में बांट दिया जाता है। प्रत्येक वृत्त का मुखिया वृत्ताधिकारी (CO) होता है। वृत्ताधिकारी के अधीन कुछ पुलिस थाने होते हैं, जिनका प्रभारी थानेदार या एस.एच.ओ. कहलाता है। कभी-कभी उप-निरीक्षक पुलिस को भी थानाधिकारी बना दिया जाता है। पुलिस प्रशासन की निम्नतम इकाई पुलिस चौकी होती है। पुलिस थाने में उप-निरीक्षक के अतिरिक्त सहायक उप-निरीक्षक, हवलदार व कॉन्स्टेबल होते हैं। इसके अलावा कुछ महिला थानों की स्थापना की जाती है और कुछ विशेष प्रकोष्ठ गठित किए जाते हैं। पदसोपानिक व्यवस्था में पुलिस महानिदेशक उच्चतम स्तर पर होता है और सबसे निम्न स्तर पर अनेक कॉन्स्टेबल कार्यरत् होते हैं।
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राजस्थान पुलिस की प्राथमिकताएँ
  • कानून व्यवस्था, सुरक्षा एवं शांति व्यवस्था बनाना।
  • आरक्षीगण का सशक्तिकरण एवं अभिप्रेरण करना।
  • केस ऑफिसर्स स्कीम के अन्तर्गत त्वरित गति से प्रकरणों का निस्तारण करना एवं हार्डकोर तथा आदतन/पेशेवर अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करना।
  • संगठित अपराध जैसे जुआ- सट्टा, शराब माफिया, भू-माफिया, मादक पदार्थ (ड्रग्स) माफिया, वैश्यावृत्ति, पर्यटक माफिया, (लपका) एवं धोखेबाजों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करना।
  • यातायात नियमों की सख्त पालना एवं अन्य एजेन्सी के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर गम्भीर दुर्घटनाओं में कमी लाना।
  • वाहनों की चोरी की रोकथाम एवं अधिक चौकसी हेतु प्रभावी कार्यवाही करना।
  • महिला परामर्श केन्द्रों की स्थापना।
  • पुलिसकर्मियों को व्यवहार कुशल एवं संवेदनशील बनाना।
  • जन सहभागिता (सी.एल.जी.) के माध्यम से पुलिस-जनता में आपसी सहयोग बढ़ाना एवं अपराधों की रोकथाम तथा विवादों को मैत्रीपूर्ण तरीके से निपटाना।
  • झूठे मुकदमों में कमी लाना।

(2) भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो

यह मुख्य रूप से राज्य में भ्रष्टाचार संबंधित मामलों की जाँच करती है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का मुख्य उद्देश्य लोक सेवकों एवं राजकीय प्रतिष्ठानों के अधिकारियों/कर्मचारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार से सम्बन्धित मामलों की जाँच करना, गुप्त सूचनाएँ एकत्रित कर उनको विकसित एवं सत्यापित करना, अपराधों का अन्वेषण करना, रिश्वत प्राप्त करने वाले लोक सेवकों को रंगे हाथों पकड़ना, राजकीय पद का दुरुपयोग करने वाले तथा आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने वाले भ्रष्ट तत्वों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करना है।
यह चार प्रकार के प्रकरण देखता है-
  • (i) ट्रेप प्रकरण
  • (ii) दुर्व्यवहार प्रकरण
  • (iii) आय से अधिक सम्पत्ति का मामला
  • (iv) गबन प्रकरण

(3) कारागार विभाग

न्यायालय से अभिरक्षा में भेजे गये व्यक्तियों को समुचित अभिरक्षा में रखना, राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय विधियों का पालन करते हुए बंदियों में विधि के प्रति सम्मान का भाव जागृत करना तथा अभिरक्षा में ऐसी शिक्षा देना एवं कार्य सिखाना जिससे वे रिहा होने के पश्चात् उद्देश्यपूर्ण जीवन जीते हुए, राष्ट्र के उपयोगी नागरिक के रूप में समाज में पुनर्स्थापित हो सकें।

(4) नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षा

नागरिक सुरक्षा- नागरिक सुरक्षा का मुख्य उद्देश्य जनता की सुरक्षा जनता द्वारा करना है। इस उद्देश्य के अन्तर्गत राष्ट्रीय कार्य में सहयोग के लिए इच्छुक नौजवानों एवं प्रौढ़ नागरिकों को नागरिक सुरक्षा का प्रशिक्षण देकर निम्नलिखित सेवाओं में स्वयं सेवक नियुक्त किया जाता है-
  1. मुख्यालय सेवा
  2. संचार सेवा
  3. वार्डन सेवा
  4. हताहत सेवा
  5. अग्नि शमन सेवा
  6. प्रशिक्षण सेवा
  7. बचाव सेवा
  8. डिपो एण्ड ट्रांसपोर्ट सेवा
  9. सप्लाई सेवा
  10. साल्वेज सेवा
  11. कल्याण सेवा
  12. मृतक अन्तिम क्रिया सेवा

गृह रक्षा संगठन
विधि और व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की सहायता करना।
असामान्य संकटों में मदद करने के लिए, नागरिक संकटकालीन संगठन का मुख्य आधार होना।
सहायक अग्निशमन, परित्राण (Rescue), संचार एवं एम्बुलेंस सर्विसेज का मुख्य आधार (Nucleus) होना।
जब सामान्य सर्विसेज निष्क्रिय हो तब परिवहन, संचार, बिजली, जल तथा परमावश्यक सर्विसेज चलाना।
सरकार की समाज कल्याण योजना में मदद करना।
ऐसे में अन्य कर्तव्यों का पालन करना जो राज्य सरकार या कमाण्डेंट जनरल द्वारा समय-समय पर सौंपे जायें। इसके अतिरिक्त नागरिक सुरक्षा की कुछ सेवाओं के लिए यह जनशक्ति प्रदान करता है। सीमा गृह रक्षा का मुख्य कृत्य सेना के सहायक के रूप में कार्य करना, सीमा क्षेत्र के निवासियों का मनोबल दृढ़ बनाये रखना तथा महत्त्वपूर्ण संस्थानों व संवेदनशील ठिकानों की सुरक्षा कर भारतीय सेना की कमाण्ड में रहते हुए राष्ट्र की रक्षा करना है। इसके अतिरिक्त आवश्यकता पड़ने पर चुनावों एवं अन्य अवसरों पर कानून-व्यवस्था बनाये रखने तथा आन्तरिक सुरक्षा में पुलिस/प्रशासन की सहायता करना है।

(5) गृह अभियोजन

राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों में पुलिस द्वारा प्रस्तुत चालान एवं कतिपय अन्य विभागों द्वारा प्रस्तुत परिवादों में राज्य सरकार की ओर से पैरवी करने का दायित्व इस विभाग का है। जिला स्तर पर इसका दायित्व सहायक लोक अभियोजक निर्वहन करता है। यह भी उल्लेखनीय है कि इस विभाग द्वारा सम्पादित कार्यों के, किसी तरह के भौतिक लक्ष्य निर्धारित नहीं होते। इस विभाग द्वारा न्यायालयों में पदस्थापित अभियोजन अधिकारीगण अनुसंधान के दौरान एवं अनुसंधान के पश्चात् राय देकर अदालतों में राज्य सरकार की ओर से कुशलता से पैरवी कर मुकदमों के शीघ्र एवं सफल निस्तारण में सहयोग प्रदान करते हैं।

(6) राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला

अपराधों की वैज्ञानिक तकनीकों द्वारा जाँच करना राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला का प्रमुख कार्य है। राजस्थान में इसकी स्थापना जून, 1959 में जयपुर में की गई। आधुनिक परिपेक्ष्य में अपराध हेतु विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए श्रेष्ठतम वैज्ञानिक तकनीकों से राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला, राजस्थान, जयपुर को सक्षम व स्वावलम्बी बनाना, जिससे आपराधिक न्याय प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सके व आमजन को त्वरित न्याय सुलभ हो सके।

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Kartik Budholiya

Education, GK & Spiritual Content Creator

Kartik Budholiya is an education content creator with a background in Biological Sciences (B.Sc. & M.Sc.), a former UPSC aspirant, and a learner of the Bhagavad Gita. He creates educational content that blends spiritual understanding, general knowledge, and clear explanations for students and self-learners across different platforms.