राजस्थान की प्रमुख दरगाह, मस्जिदें, मकबरे, एवं मीनारें
यह लेख राजस्थान की प्रमुख दरगाहों, मस्जिदों, मकबरों और मीनारों का एक अत्यंत ज्ञानवर्धक संकलन है। इसमें राज्य के मुस्लिम धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के महत्व को विस्तार से समझाया गया है।
यह लेख राजस्थान में स्थित प्रमुख इस्लामिक स्थलों जैसे हजरत शक्कर पीर बाबा (नरहड़), ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती (अजमेर) और गलियाकोट की दरगाह के धार्मिक महत्व को रेखांकित करता है। इसमें अढ़ाई दिन का झोंपड़ा और तोपखाना मस्जिद जैसी ऐतिहासिक इमारतों के संस्कृत पाठशाला से मस्जिद बनने तक के सफर का वर्णन है। साथ ही, लेख में दरगाह, मकबरा और मजार के बीच के सूक्ष्म अंतर को स्पष्ट करते हुए राजस्थान की सांप्रदायिक सद्भाव की परंपरा को दर्शाया गया है। यह राजस्थान की वास्तुकला और सूफी संस्कृति को समझने हेतु एक बेहतरीन स्त्रोत है।
प्रमुख दरगाहें
- हजरत शक्कर पीर बाबा की दरगाह, नरहड़ (झुँझुनूं)
- मिरान शाह की दरगाह- तारागढ़, (अजमेर)
- पिराने पीर का चिल्ला- अजमेर
- तारकीन शाह की दरगाह- मेड़ता, (नागौर)
- मीठेशाह की दरगाह- गागरोन, (झालावाड़)
- भूरे खां मजार- मेहरानगढ़, (जोधपुर)
- फखरुद्दीन पीर की दरगाह- गलियाकोट, (डूंगरपुर)
- हजरत दीवान शाह की दरगाह- कपासन, (चित्तौड़)
- काकाजी की दरगाह- प्रतापगढ़
नोट- इसे कांठल का ताजमहल कहते हैं।
- मस्ताना बाबा की दरगाह- उदयपुर
- धुल्ले/खुल्लेशाह की दरगाह-पाली
- खुदा बख्श बाबा की दरगाह-सादड़ी, (पाली)
- हजरत दौलत शाह की दरगाह - चौमूं (जयपुर)
- हजरत आमीन शाह की दरगाह - जयपुर
- अहमदअली शाह की दरगाह - जयपुर
- मौलाना जियाउद्दीन की दरगाह - जयपुर
- मिस्कीनशाह की दरगाह - जयपुर
- शेख मोहम्मद दरवेश की दरगाह - मोती डूंगरी (जयपुर)
- शेख बाबा इस्फाक की दरगाह - बड़ी खाटू (नागौर)
- हजरत चलफिर शाह की दरगाह - गलियाकोट (चित्तौड़गढ़)
- सैय्यद बादशाह की दरगाह - शिवगंज (सिरोही)
- अधार शिला दरगाह - कोटा
- हजरत मीरा साहब की दरगाह - बूंदी
- कमरूद्दीन शाह की दरगाह - झुँझुनूं
- हजरत जमालुद्दीन साहब की दरगाह - दौसा
- नजमुद्दीन परवाना की दरगाह - फतेहपुर (सीकर)
- अब्ब नशाह की दरगाह - सांचौर (जालौर)
- तन्हापीर की दरगाह - जोधपुर
- जेठा भुट्टा पीर की दरगाह - गजनेर (बीकानेर)
- चोटिला पीर दुलेशाह की दरगाह - नागौर
- बड़े पीर की दरगाह - नागौर
- अमीर अलीशाह की दरगाह - जयपुर
मस्जिद
जहाँ सजदा अर्थात साष्टांग प्रणाम करने का स्थान मस्जिद कहलाती है। मस्जिद में नमाज पढ़ी जाती है जो मुस्लिमों का अनिवार्य कर्तव्य है। जिस मस्जिद में केवल शुक्रवार के दिन नमाज पढ़ी जाती है, उसे 'जामा मस्जिद' कहा जाता है।
(1) अढ़ाई दिन का झोंपड़ा (अजमेर)
यह एक संस्कृत पाठशाला थी जिसका निर्माण विग्रहराज चतुर्थ ने करवाया। इस पाठशाला में हरकेलि नाटक की कुछ पंक्तियां लिखी गई है। 1194 ई. में मोहम्मद गौरी के सेनापति कुतुबद्दीन ने इसे तोड़कर मस्जिद बनवाई जिसे राजस्थान की प्रथम मस्जिद मानी जाती है। इसे 16 खम्भों का महल भी कहते है। इस मस्जिद के सामने पंजाब शाह पीर का अढ़ाई दिन का मेला भरता है जिस कारण इसे अढ़ाई दिन का झोपड़ा कहा जाता है।
(2) तोपखाना मस्जिद (जालौर)
यह मस्जिद जालौर दुर्ग में स्थित है। यहां पहले 'संस्कृत पाठशाला' नामक पाठशाला थी जिसका निर्माण परमारवंशी शासक राजा भोज ने करवाया था। जालौर के साके (1311-12) के समय दिल्ली सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने इस पाठशाला को तोड़कर मस्जिद बनवा दी जिसे अलाउद्दीन की मस्जिद कहते है। मस्जिद पर तोप रखी होने के कारण इसे तोप मस्जिद कहा जाता है। इसे राजस्थान की प्रथम मस्जिद माना जाता है।
नोट- अढाई दिन के झोंपड़े को भी प्रथम मस्जिद माना जाता है।
(3) जामा मस्जिद (शाहबाद, बाराँ)
इस मस्जिद का निर्माण औरंगजेब के समय (1658-1707 ई.) मुगल फौजदार मकबूल ने करवाया था। यह राजस्थान की सबसे बड़ी मस्जिद है।
(4) जामा मस्जिद (भरतपुर)
इस मस्जिद का निर्माण प्रारम्भ महाराजा बलवंत सिंह ने करवाया था। इस मस्जिद का निर्माण दिल्ली की जामा मस्जिद के नक्शे पर करवाया गया।
(5) जुमा मस्जिद (अजमेर)
इस मस्जिद का निर्माण 1638 ई. में मुगल बादशाह शाहजहाँ ने करवाया था। जिस कारण इसे शाहजहाँनी मस्जिद कहा जाता है।
- नालिसर मस्जिद-सांभर, (जयपुर)
- अकबर की मस्जिद-जयपुर
- मेड़ता मस्जिद-नागौर
- ऊषा मस्जिद-बयाना, (भरतपुर)
- इकममीनार मस्जिद-जोधपुर
- अलाउद्दीन खिलजी/फिरोजा की मस्जिद- जालौर
- मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह - अजमेर
- गुलाब खाँ मकबरा - जोधपुर
- ढाई दिन का झोंपड़ा - अजमेर
- खुदाबख्श बाबा की दरगाह - सादड़ी (पाली)
- गुलाम कलंदर - जोधपुर
- ईदगाह - जयपुर
- अली शाह पीर की मस्जिद - जयपुर
- मलिक शाह पीर की मजार - जालौर
नोट- यह राजस्थान की पहली मस्जिद मानी जाती है।
मकबरा
- गुलाब खां का मकबरा- जोधपुर
- अलाउद्दीन आलम शाह का मकबरा-तिजारा, खैरथल
- रजिया सुल्तान का मकबरा - टोंक
- बीबी जरीना का मकबरा - धौलपुर
- लैला मजनू की मजार - बिंजौर (श्रीगंगानगर)
- भूरे खां की मजार - मेहरानगढ़ (जोधपुर)
- अब्दुला पीर की मजार - भगवानपुरा (बांसवाड़ा)
- गुलाम कलंदर का मकबरा - जोधपुर
- हजरत शेख शाह - दौसा
- फतहसागर गुबंद - अलवर
मीनार
- गूलर कालू खां की मीनार - जोधपुर
- गमतागाजी की मीनार - जोधपुर
- सफदरजंग की मीनार - अलवर
- नेहर खां की मीनार - कोटा
- कुतुबमीनार - दिल्ली
- विजयस्तम्भ, कीर्ति स्तम्भ - चित्तौड़गढ़
- ईसरलाट (सरगासूली) - जयपुर
- परमारकालीन कीर्ति स्तम्भ - नागौर
- भीमलाट - बयाना (भरतपुर)
नोट- कुतुबमीनार (दिल्ली)- इस मीनार का निर्माण कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की स्मृति में कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1197 ई. में प्रारम्भ किया तथा पूर्ण 1232 ई. में इल्तुतमिश ने किया।
मस्जिद/मकबरा/दरगाह/मजार
- मस्जिद - धार्मिक स्थल जहाँ नमाज पढ़ जाती है।
- मकबरा - मुस्लिम धर्म में व्यक्ति को जहाँ दफनाया जाता है उस पर मकबरा बनाया जाता है।
- दरगाह - सूफी संत को जहाँ दफनाया जाता है उस पर दरगाह बनती है।
- मजार - किसी पीर को जहाँ दफनाया जाता है उस पर मजार बनती हैं।
1. हजरत शक्कर पीर बाबा की दरगाह (नरहड़, झुंझुनूं)- यह राजस्थान की सबसे बड़ी दरगाह है। पीर बाबा को बांगड़ के धणी कहते है। प्रतिवर्ष जन्माष्टमी (भाद्रपद कृष्ण अष्टमी) को उर्स भरता है। मानसिक विकलांग लोगों के मिट्टी रगड़ने से आराम मिलता है। यह दरगाह सांप्रदायिक सोहार्द्ध का अनूठा उदाहरण है। फतेहपुर सीकरी (आगरा, यूपी) के सलीम चिश्ती शक्कर पीर बाबा के ही शिष्य थे। इस दरगाह में तीन प्रवेश द्वार हैं- (1) बुलंद दरवाजा (2) बसेती दरवाजा (3) बगली दरवाजा
2. शेख हमीमुद्दीन नागौरी की दरगाह (नागौर)- ये ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती के शिष्य थे जो मोहम्मद गौरी के साथ राजस्थान आये थे। 1274 ई. में नागौर में इनकी वफात् (निधन हो गई। यहां अजमेर के बाद दूसरा सबसे बड़ा उर्स भरता है। अबू सईदी इनका मूलनाम था। सुवाल गांव (नागौर) को इन्होंने अपना केन्द्र बनाया। इन्हें संत तारकीन या सन्यासियों का सुल्तान कहते हैं।
3. सैय्यद फखरुद्दीन की दरगाह (गलियाकोट, डूंगरपुर)- यह दरगाह माही नदी के किनारे स्थित है। यह दाऊदी बोहरा संप्रदाय का प्रमुख तीर्थ स्थल है। मेला - मोहर्रम की 27 तारीख
4. मीरान साहब की दरगाह (बूंदी)
5. मीरान साहब की दरगाह (अजमेर)- यह दरगाह अजमेर दुर्ग में हैं। मीरान साहब का मूल नाम मीर सैय्यद हुसैन खिंगसवार था। जिन्होंने 1202 ई. में अजमेर दुर्ग की रक्षा हेतु अपने प्राण दे दिये। अजमेर दुर्ग में ही मीरान साहब के घोड़े की मजार है।
6. मलिक शाह की दरगाह (जालौर)- यह दरगाह जालौर दुर्ग में है जो सांप्रदायिकता के लिये जानी जाती है। इस दरगाह पर नाथ साधु भी चादर चढ़ाते हैं।
7. हजरत सैय्यद ख्वाजा फखरुद्दीन की दरगाह (अजमेर)- ये ख्वाजा मुइनुद्दीन के बड़े पुत्र थे।
ख्वाजा हिसामुद्दीन चिश्ती सांभर (जयपुर) ये ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के पौत्र थे।
8. ख्वाजा मुइनुद्दीन की दरगाह (अजमेर)- उपनाम-गरीब नवाज ये मोहम्मद गौरी के साथ राजस्थान (अजमेर) आए थे।

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