राजस्थान की बावड़ियाँ, तालाब व झीलें
यह लेख राजस्थान की ऐतिहासिक बावड़ियों, तालाबों और झीलों का एक विस्तृत संकलन है, जो राज्य की प्राचीन जल प्रबंधन प्रणाली और उत्कृष्ट वास्तुकला को दर्शाता है। इसमें चाँद बावड़ी (आभानेरी), रानी जी की बावड़ी (बूंदी) और गैप सागर जैसे प्रमुख जलाशयों के ऐतिहासिक महत्व, उनके निर्माताओं और स्थापत्य शैलियों का वर्णन है।
इस लेख में जल संचयन के विभिन्न माध्यमों जैसे कुण्ड, टांका, जोहड़ और बावड़ी के तकनीकी अंतर को भी स्पष्ट किया गया है। साथ ही, यह लेख कई महत्वपूर्ण जलाशयों पर जारी भारतीय डाक टिकटों और उनसे जुड़ी सांस्कृतिक मान्यताओं (जैसे रावण की चंवरी) की जानकारी भी प्रदान करता है, जो राजस्थान की विरासत को समझने के लिए अत्यंत उपयोगी है।
गैप सागर, डूंगरपुर
इस सागर का निर्माण महारावल गोपीनाथ ने करवाया।
इस सागर के किनारे उदयसिंह ने उदय विलास महल तथा विजय राज राजेश्वर मन्दिर का निर्माण करवाया।
इस झील के अन्दर 'बादल महल' बना है।
अमर सागर/मूलसागर/गजरुप सागर, जैसलमेर
इस सागर का निर्माण गजसिंह ने करवाया।
इस सागर के सामने भारती बाबा का मठ व स्वांगिया माता का मन्दिर है।
जैतसागर - बूंदी
इसका निर्माण जैता मीणा ने करवाया।
इस तालाब के किनारे विष्णुसिंह ने सुख महल का निर्माण करवाया।
नागर-सागर, बूंदी
इसका निर्माण 1821 में रामसिंह की पत्नी चन्द्रभानु कंवर ने करवाया।
इस तालाब के प्रवेश द्वार पर आसनस्थ गणेश व सरस्वती की मूर्तियाँ हैं।
राणीसर तालाब, जोधपुर
इसका निर्माण राव जोधा की रानी जसमादे ने करवाया।
इस तालाब का शिल्पी पंचोली सदासुख झांवरिया था।
शंकर बेरी, जिया बेरी, पाट बेरी तालाब की तीन बेरियाँ हैं।
बालसमन्द, जोधपुर
इसका निर्माण गुर्जर प्रतिहार राव ने 1159 ई. में करवाया।
कायलाना झील, जोधपुर
इसका निर्माण जोधपुर के प्रशासक सर प्रतापसिंह ने करवाया। इसके किनारे उम्मेद सागर बाँध है जिसे 1933 में उम्मेद सिंह ने बनवाया।
यह झील जोधपुर को पेयजल उपलब्ध करवाती है।
रामगढ़ की डूंगरी - कन्यादह, बाराँ
यहाँ का शासक भैंसाशाह था जिसके चार पुत्रियाँ थीं जो मुस्लिमों से पारस पत्थर को बचाने के लिए उसे लेकर नदी में कूद गयी। जिस स्थान पर ये लड़कियां कूदी उसे कन्यादह कहते हैं।
पन्नालाल शाह का तालाब - खेतड़ी, झुंझुनूं
इसका निर्माण 1871 ई. में सेठ पन्नालाल शाह ने करवाया।
इस तालाब के किनारे स्थित महलों में स्वामी विवेकानन्द ठहरे थे।
तालाबशाही झील - बसेड़ी, धौलपुर
इस झील के किनारे 1617 ई. में जहाँगीर के मनसबदार सालेह खां ने खुर्रम के लिए एक महल बनवाया।
राजस्थान की बावड़ियाँ/कुण्ड
- बावड़ी - इसमें वर्षा के पानी का संग्रह किया जाता है तथा पैंदे तक पहुँचने के लिए सीढ़ियाँ होती हैं।
- कुण्ड - इसमें वर्षा का पानी इकट्ठा होता है।
- तालाब - इसमें वर्षा का पानी इकट्ठा होता है तथा यह ऊपर से खुला होता है। इसमें गहराई से लम्बाई-चौड़ाई होती है।
- जोहड़ - यह ऊपर से खुला होता है जिसमें वर्षा का पानी इकट्ठा होता है। इसकी गहराई चौपड़ों में होती है। इसके चारों ओर सीढ़ियाँ लगी होती हैं। शेखावाटी के प्रत्येक जोहड़ में गऊघाट बने हैं।
- टांका - इसमें वर्षा का पानी इकट्ठा किया जाता है। यह घर में बनी टंकी जैसा होता है। जयगढ़ दुर्ग (जयपुर) टांकों के लिए प्रसिद्ध है।
- कुआँ - इसकी गहराई अधिक होती है तथा इसमें जमीन का पानी आता है। बाटाडू का कुआं सिवाना (बालोतरा) को रेगिस्तान का जलमहल कहते हैं जिसका निर्माण रावल गुलाब सिंह ने करवाया।
प्रसिद्ध बावड़ियाँ
चाँद बावड़ी- आभानेरी, दौसा
- इस बावड़ी का निर्माण चंद द्वारा करवाया गया। (8वीं शदी)
- यह बावड़ी विश्व की सबसे गहरी बावड़ी है।
- अंधेरी एवं उजाली बावड़ी के दो प्रवेश द्वार हैं।
- इस बावड़ी को तिलिस्म बावड़ी व भूल-भुलैया बावड़ी भी कहते हैं क्योंकि इस बावड़ी की सीढ़ियों से नीचे उतरने के बाद उन्हीं सीढ़ियों से पुनः बाहर नहीं आया जा सकता है।
- ऊपर से देखने पर यह बावड़ी टिमटिमाते तारे की तरह दिखाई पड़ती है।
- यह बावड़ी गुर्जर प्रतिहार कला में बनी है जिसके किनारे हर्षत माता का मन्दिर है।
- यह बावड़ी 19.5 मीटर गहरी है। बावड़ी में 3500 सीढ़ियां है। इस बावड़ी के किनारे हर्षत माता का मंदिर है। 29 सितम्बर, 2017 ई. चाँद बावड़ी पर 5 रूपये की डाक टिकट जारी किया गया।
चाँद बावड़ी (जोधपुर)
इस बावड़ी का निर्माण राव जोधा की रानी चांद कंवर ने करवाया। चांद कंवर सोनगरा चौहान वंश की थीं जिस कारण इस बावड़ी को चौहान बावड़ी भी कहते हैं।
नौ लखा बावड़ी - (डूंगरपुर)
इस बावड़ी का निर्माण 1602 ई. में आसकरण की पत्नी ताराबाई/प्रीमल देवी ने करवाया।
इस बावड़ी का शिल्पी लीलाधर था।
मेड़तणी की बावड़ी (झुंझुनूँ)
इस बावड़ी का निर्माण बखत कंवर ने 18वीं सदी में अपने पति शार्दूलसिंह की स्मृति में करवाया।
चमना बावड़ी (शाहपुरा, भीलवाड़ा)
इस बावड़ी का निर्माण 1858 ई. में उम्मेद सिंह ने वैश्या चमना के लिए कराया यह तीन मंजिला बावड़ी है।
लवाण की बावड़ी (दौसा)
इसे डाकणिया बावड़ी भी कहते हैं।
रानी जी की बावड़ी (बूंदी)
इस बावड़ी का निर्माण 1699 ई. में महाराजा अनिरुद्ध की रानी लाडकंवर नाथावती ने करवाया।
इस बावड़ी के किनारे शिव व पार्वती की मूर्तियाँ लगी हैं।
इसे बावड़ियों का सिरमौर कहते हैं। 29 दिसम्बर, 2017 ई. इस बावड़ी पर भारत सरकार ने 5 रूपये की डाक टिकिट जारी की।
भावलदेवी बावड़ी (बूंदी)
इस बावड़ी का निर्माण भावसिंह की पत्नी भावल देवी ने करवाया।
काकाजी की बावड़ी (बूंदी)
इस बावड़ी का निर्माण सरदार सिंह की पत्नी आली देवी ने करवाया।
एक चट्टान बावड़ी (मण्डोर, जोधपुर)
इस बावड़ी का निर्माण 7वीं सदी में माना जाता है क्योंकि इसके किनारे एक शिलालेख है जो 685 ई. का है। इसे रावण की चंवरी भी कहते हैं। माना जाता है कि यहाँ रावण का मंदोदरी से विवाह हुआ था।
विरुपुरी बावड़ी (उदयपुर)
इस बावड़ी का निर्माण 17वीं सदी में वीरू रानी ने एक साधु पुरी के कहने पर करवाया।
त्रिमुखी बावड़ी (उदयपुर)
इस बावड़ी का निर्माण महाराणा राजसिंह (1652-80 ई.) की रानी रामरसदे ने करवाया। (शिल्पी-नाथूगौड़)
नागर-सागर कुण्ड - बूंदी
इस कुण्ड का निर्माण 1942 में चन्द्रमान कंवर ने करवाया। 29 दिसम्बर 2017 ई. इस बावड़ी पर 15 रूपये की डाक टिकिट जारी की गई।
अनार कली की बावड़ी-बूंदी
इस बावड़ी का निर्माण राजा शत्रुशाल की दासी रानी अनारकली ने करवाया।
पन्ना मीणा की बावड़ी (जयपुर)
यह बावड़ी जयगढ़ दुर्ग के पास स्थित है जिस पर 29 सितम्बर, 2017 को 5 रूपये का टिकिट जारी किया गया।
- नादरघूँस बावड़ी - बूंदी
- धाभाई की बावड़ी - नानकपुरिया, बूंदी
- गुल्ला बावड़ी/गुलाब बावड़ी - बूंदी
- भोपन का कुआँ - कैथून, कोटा
- मांजी की बावड़ी - आमेर (जयपुर)
- चूली बावड़ी - सरजोली, जमवारामगढ़, (जयपुर)
- चार घोड़ों की बावड़ी - जोबनेर, (जयपुर)
- बीनोता की बावड़ी - सादड़ी, प्रतापगढ़
- राजा रसालू की बावड़ी - दौसा
- झाझीरामपुरा का कुण्ड - बसवा, (दौसा)
- आलूदा का कुबाणियां कुण्ड - लालसोट, (दौसा)
- चोखी बावड़ी - बनेड़ा, शाहपुरा (भीलवाड़ा)
- बाईजी की बावड़ी - बनेड़ा, शाहपुरा (भीलवाड़ा)
- खातन बावड़ी - चित्तौड़गढ़
- घोसुण्डा बावड़ी - चित्तौड़गढ़
- गौमुख कुण्ड - चित्तौड़गढ़
- सूर्य कुण्ड - चित्तौड़गढ़
- गंगोद भेद कुण्ड - आहड़, उदयपुर
- पनराय जी की बावड़ी - जोधपुर
- सुगंदा बावड़ी - जोधपुर
- इंजन बावड़ी - जोधपुर
- हरबोला बावड़ी - जोधपुर
- कांतन बावड़ी - जोधपुर
- नाजरजी की बावड़ी - जोधपुर
- तापी की बावड़ी - जोधपुर
- जालप बावड़ी - जोधपुर
- तुअरजी का झालरा - जोधपुर (इस बावड़ी का निर्माण 1740 ई. में अभयसिंह की रानी तूरकंवर ने करवाया)। 29 दिसम्बर 2017 ई. इस बावड़ी पर 5 रूपये की डाक टिकिट जारी हुई।
- नारायणी माता का कुण्ड - अलवर
- जच्चा बावड़ी - हिण्डौन सिटी, (करौली)
- भीकाजी की बावड़ी - अजमेर
- सोनगिरि बावड़ी - खण्डेला (सीकर)
- झालरा बावड़ी - सीकर
- खेतानों की बावड़ी - झुंझुनूँ
- तुलस्यानों की बावड़ी - झुंझुनूँ
- चैतनदास की बावड़ी - झुंझुनूँ
- शाही बावड़ी - धौलपुर
- फूल बावड़ी - छोटी खाँटू (डीडवाना-कुचामन)
- झालीबाव बावड़ी - राजसमंद
- औस्तीजी की बावड़ी - शाहबाद (बारां)
- राजा जी की बावड़ी - बारां
- तपसी बावड़ी - शाहबाद (बारां)
- परचा बावड़ी - रूणेचा (जैसलमेर)
नीमराणा की बावड़ी (कोटपुतली)
यह नौ मंजिला बावड़ी है जिसका निर्माण 1689 ई. में मानसिंह ने करवाया। कुछ जानकारी के अनुसार इस बावड़ी का निर्माण टोडरमल द्वारा माना जाता है। 29 सितम्बर, 2017 ई. नीमराणा बावड़ी पर 5 रूपये की डाक टिकिट जारी हुई।
बड़गांव की बावड़ी (कोटा)
इस बावड़ी का निर्माण शत्रुशाल की रानी जादौणा ने करवाया था।
हाड़ी रानी की बावड़ी (टोड़ारायसिंह, टोंक)
इसका निर्माण राजकुमारी ने करवाया था।
बुद्ध सागर (टोड़ारायसिंह, टोंक)
इस बावड़ी के पास संत पीपा की गुफा स्थित है।
सेठानी का जोहड़ा (जोधपुर)
इस बावड़ी का निर्माण महाराजा अभयसिंह सेठ स्व. भगवानदास बागला की रानी ने करवाया।
तूरजी का झालरा (जोधपुर)
इस बावड़ी का निर्माण महाराजा अभयसिंह की रानी तूर कंवर ने 1740 ई. में करवाया। 29 सितम्बर, 2017 ई. में इस बावड़ी पर 5 रुपये का डाक टिकट जारी किया गया। इसका पानी दूध जैसा सफेद होने के कारण दूध बावड़ी कहलाती है।
- जसवंत सागर - जोधपुर
- तख्त सागर - जोधपुर
- नई सड़क बावड़ी - जोधपुर
- गोरूध बावड़ी - जोधपुर
- अनारा बावड़ी - जोधपुर
- खरबूजा बावड़ी - जोधपुर
- रघुनाथ बावड़ी - जोधपुर
- पांचवा मंजीसा बावड़ी - जोधपुर
- उम्मेद सागर - जोधपुर
- स्वरूप सागर - जोधपुर
- सौभाग्य सागर - जोधपुर
- फूलनाथ तालाब - बीकानेर
- अनूप सागर - बीकानेर
- पीरजी का नाका - नागौर
- प्रताप सागर - नागौर
- भाकरी - नागौर
- लाखोलाव तालाब - मुंडवा, नागौर
- घड़सीसर तालाब - जैसलमेर
- कालीसिल पीपलदा - सवाई माधोपुर
- मोरासागर - सवाई माधोपुर
- ईसरदा - सवाई माधोपुर
- परवन परियोजना - बारां
- सीताबड़ी - बारां
- उम्मेद सागर - बारां
- बनेठी - बारां
- बुद्ध सागर - टोंक
- माधोसागर - दौसा
- आलूदा का बुबानिया कुण्ड - दौसा
- डिग्गी तालाब - अजमेर
- मुंडोती - अजमेर
- तालाबशाही - धौलपुर
- हरीशचन्द्र सागर - झालावाड़

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