राजस्थान में उद्योग धंधे एवं औद्योगिक संस्थान
इस लेख में राजस्थान की औद्योगिक संरचना और यहाँ के प्रमुख उद्योगों का विस्तृत विवरण दिया गया है। इसमें सूती वस्त्र, सीमेंट, चीनी और नमक जैसे बड़े उद्योगों के साथ-साथ राज्य की समृद्ध हस्तशिल्प कलाओं जैसे ब्लू पॉटरी और थेवा कला की जानकारी मिलेगी। साथ ही, औद्योगिक विकास के लिए कार्यरत सरकारी संस्थाओं और योजनाओं के बारे में भी जानने को मिलेगा।
उद्योग
व्यक्ति अपनी आजीविका को चलाने के लिए जो आर्थिक गतिविधियाँ करता है, उसे उद्योग कहते हैं।
कुटीर उद्योग
किसी एक परिवार के सदस्यों द्वारा अंशकालिक/पूर्ण रूप से किया जाता है।
निवेश- नाम मात्र का होता है।
लघु उद्योग
निवेश- पूँजी निवेश होता है।
उत्पादन- आधुनिक ढंग से तथा श्रमिकों की प्रधानता होती है।
ग्रामोद्योग
- स्थापित- 10 हजार से कम जनसंख्या वाले ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित
- भूमि, भवन, मशीनरी इत्यादि में प्रति कारीगर 15 हजार से कम स्थित पूँजी निवेश वाले उद्योग ग्रामोद्योग के अन्तर्गत आते हैं।
नोट : ग्रामोद्योग इकाइयों की स्थापना एवं हथकरघा से संबंधित मीरा सेठ समिति (21 जनवरी 1997) गठित की गई।
राजस्थान के उद्योगों का वर्गीकरण निम्न प्रकार से हैं-
A. कृषि आधारित उद्योग
कृषि आधारित उद्योग
- सूती
- ऊनी
- चीनी
- वनस्पति
1. सूती वस्त्र उद्योग
- यह भारत एवं राजस्थान का प्राचीनतम संगठित उद्योग हैं।
- यह कृषि क्षेत्र में सबसे बड़ा उद्योग है।
- भारत पाक विभाजन से सूती वस्त्र को सर्वाधिक नुकसान हुआ था।
- सूती वस्त्र उद्योग का औद्योगिक उत्पादन में 14 प्रतिशत व सकल घरेलू उत्पादन में 4 प्रतिशत योगदान रखता है।
- भारत में प्रथम सूती वस्त्र मिल फोर्ट ग्लास्टर (कोलकाता) में 1818 ई. में स्थापित की गई जो असफल रही।
- कवास जी डाँवर के द्वारा स्थापित मुंबई स्पिनिंग (स्थापना 1854 ई.) मिल भारत की प्रथम सफल सूती वस्त्र मिल है।
- राजस्थान के वर्तमान स्वरूप से पहले 7 सूती वस्त्र मिलें थी।
वर्तमान में कुल 23 सूती वस्त्र मिलें हैं-
(i) निजी क्षेत्र - 17
(ii) सहकारी क्षेत्र- 03
(iii) सार्वजनिक क्षेत्र - 03
- कृष्णा मिल्स लिमिटेड कार्यशील करघों की दृष्टि से सबसे बड़ी मिल है।
सार्वजनिक क्षेत्र की मिलें
- एडवर्ड मिल्स लिमिटेड व्यावर स्थापना - 1906
- विजय कॉटन मिल्स, विजयनगर (व्यावर) 1932
- महालक्ष्मी मिल्स लिमिटेड, ब्यावर 1925
नोट: 1974 में राष्ट्रीय वस्त्र निगम के द्वारा इन तीनों मिलों को निजी क्षेत्र से सार्वजनिक क्षेत्र में मिला दिया गया है।
सहकारी क्षेत्र की मिले
- गुलाबपुरा सहकारी मिल्स, भीलवाड़ा स्थापना - 1965 सहकारी क्षेत्र की प्रथम मिल
- श्रीगंगानगर सहकारी मिल्स, हनुमानगढ़ 1978
- गंगापुर सहकारी मिल्स भीलवाड़ा 1981
नोट: 1 अप्रैल, 1993 को इन तीनों मिलों को राजस्थान राज्य सहकारी स्पिनिंग एंड जिनिंग संघ मिल्स लिमिटेड (स्पिनफेड) में मिला दिया गया जिसका मुख्यालय जयपुर में है।
राजस्थान की अन्य सूती वस्त्र मिलें-
- मॉडर्न ग्रुप- भीलवाड़ा
- आदित्य मिल्स - किशनगढ़ (अजमेर)
- रिलाइन्स कोमैटिक्स मिल्स- उदयपुर
- राजस्थान टैक्सटाइल्स मिल्स - भवानीमण्डी (कोटा)
- श्रीगोपाल इण्डस्ट्रीज- कोटा
- फरवरी 2009 में केन्द्र सरकार के द्वारा भीलवाड़ा को वस्त्र निर्यातक का दर्जा दिया गया।
- भीलवाड़ा को टाउन ऑफ एक्सीलेंस फॉर टैक्सटाइल्स का दर्जा दिया गया है।
- कम्प्यूटर एडेड डिजाइन सेंटर- भीलवाड़ा
- भारत में सर्वाधिक सूती वस्त्र उत्पादन महाराष्ट्र (35 प्रतिशत) से होता है।
- भारत में मुंबई कपास का विराट नगर कहलाता है जिसको सूती वस्त्र की राजधानी भी कहते हैं।
- अहमदाबाद को भारत का मैनचेस्टर तथा भारत का बोस्टन कहते हैं।
नोट:- ओसाका को जापान का मैनचेस्टर एवं इवानोवा पूर्वी सोवियत संघ का मैनचेस्टर (रूस) कहलाता है।
2. ऊनी उद्योग
- वर्स्टेड स्पिनिंग मिल - लाडनू, (डीडवाना-कुचामन) चूरू
- आयात-निर्यात संस्थान कोटा
- स्टेट वुलन मिल बीकानेर
राजस्थान में 3 ऊन मण्डी हैं-
- बीकानेर- एशिया की सबसे बड़ी ऊन मण्डी
- ब्यावर
- केकड़ी (अजमेर)
- भीलवाड़ा में सिंथेटिक वुल, शॉल, कम्बल के कारखाने स्थित हैं।
- राज्य में टाउन्स ऑफ एक्सपोर्ट का दर्जा हैण्डीक्राफ्ट के क्षेत्र में जोधपुर को दिया गया हैं।
- शाहगढ़ (जैसलमेर) में भारत का प्रथम एकीकृत टैक्सटाइल्स पार्क विकसित किया जा रहा है।
- सर्वाधिक ऊन उत्पादन जिला- जोधपुर, जैसलमेर
- एशिया की सबसे बड़ी ऊन मण्डी- बीकानेर
- भारत में ऊनी वस्त्र उद्योग का शुभारंभ- कानपुर (1876 ई.)
- अखिल भारतीय ऊन विकास बोर्ड- जोधपुर
3. चीनी उद्योग
1. द मेवाड़ शुगर मिल, भोपालसागर (चित्तौड़गढ़)
- स्थापना- 1932
- निजी क्षेत्र में स्थापित
- यह कृषि पर आधारित दूसरा बड़ा उद्योग है।
- भारत में सर्वाधिक गन्ना उत्पादन- उत्तर प्रदेश
- सर्वाधिक चीनी मिलें- उत्तर प्रदेश
- सर्वाधिक मीठा गन्ना- तमिलनाडु का
2. राजस्थान स्टेट गंगानगर शुगर मिल्स लिमिटेड, श्रीगंगानगर
- 1 जुलाई, 1956 को सार्वजनिक क्षेत्र में मिलाया।
- यहाँ दी हाईटेक प्रिसीजन ग्लास फैक्ट्री कार्यरत है।
- यह सबसे प्रदूषित मिल है।
- चुकंदर संयंत्र 1968 में स्थापित किया गया जहाँ चुकंदर से चीनी बनाई जाती है।
- कम्पनी के 99.97 प्रतिशत अंश राज्य सरकार के हैं शेष अंशों पर निजी अंशधारियों का स्वामित्व है।
- इसका मुख्यालय जयपुर में है।
3. केशोरायपाटन शुगर मिल : बूँदी
- स्थापना- 1965 (सहकारी क्षेत्र में)
- यह वर्तमान में बंद है।
4. वनस्पति घी उद्योग
- राज्य की प्रथम वनस्पति घी फैक्ट्री - भीलवाड़ा, स्थापना : 1964 वर्तमान में 09 कारखाने : जयपुर, अलवर, भरतपुर, टोंक, कोटा, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, श्रीगंगानगर
B. रासायनिक उद्योग
- प्रथम जैव कारखाना- भरतपुर
- सोडियम सल्फेट कारखाना- डीडवाना
- राजस्थान राष्ट्रीय केमिकल्स एवं फर्टीलाइजर्स लिमिटेड, कपासन- चित्तौड़गढ़
- चम्बल फर्टीलाइजर्स एण्ड केमिकल्स लिमिटेड- कोटा
- चम्बल फर्टीलाइजर्स एण्ड केमिकल्स इंडस्ट्रीज- जयपुर
- श्रीराम फर्टीलाइजर्स लिमिटेड- श्रीरामनगर (कोटा)
- हिन्दुस्तान जिंक फर्टीलाईजर्स- कपासन (चित्तौड़गढ़)
- टायर ट्यूब कारखाना- अलवर
- जे. के. टायर्स कारखाना- राजसमंद
- कृत्रिम रेशों का कारखाना- कोटा, गुलाबपुरा, जयपुर, बाँसवाड़ा
- माचिस कारखाना- कोटा, उदयपुर, फतेहगढ़ (सीकर)
- ज्योति ट्रिपल खाद का कारखाना- खेतड़ी (झुन्झुनूँ)
- सल्फ्यूरिक एसिड प्लांट और मोदी अल्काइन एंड केमिकल लिमिटेड-अलवर
- दी राजस्थान एक्सप्लोसिव एण्ड कैमिकल लिमिटेड- धौलपुर
- श्रीराम केमिकल एवं फर्टीलाइजर लिमिटेड- कोटा
- यह राजस्थान का सबसे बड़ा खाद का उत्पादक कारखाना।
C. खनिज उद्योग का वर्गीकरण
(i) सीमेंट उद्योग
राजस्थान में प्रथम सीमेंट फैक्ट्री/कारखाना- लाखेरी (बूँदी)
- स्थापना- 1915
- उत्पादन- 1917
- यह क्लिक निकसन कंपनी द्वारा स्थापित।
भारत का प्रथम सफेद सीमेंट कारखाना- गोटन (नागौर)
- स्थापना- 1984
राजस्थान का सबसे बड़ा सफेद सीमेंट कारखाना खारिया खंगार, भोपालगढ़ तहसील (जोधपुर) की स्थापना 1988 में की गई।
अन्य सफेद सीमेंट कारखाने-भोपालगढ़ (जोधपुर), मांगरोल (बाराँ) है।
दक्षिणी एशिया का सबसे बड़ा सीमेंट कारखाना जयपुर उद्योग लिमिटेड है जो (सवाई माधोपुर) वर्तमान में बंद है।
सर्वाधिक सीमेंट का उत्पादन- चित्तौड़गढ़
कम सीमेंट उत्पादन- श्रीरामनगर, कोटा
उत्तरी भारत की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी- श्री सीमेंट है ।
मंगलम सीमेंट संयंत्र स्थापित - मोडक (कोटा) स्थापना- 1982
यह खनिज पर आधारित संरचनात्मक और आधारभूत उद्योग है जिसमें कच्चा माल के रूप में चूना पत्थर और जिप्सम का उपयोग किया जाता है।
विश्व में प्रथम सीमेंट फैक्ट्री पोर्टलैण्ड (इंग्लैंड) में 1824 ई. में स्थापित की गई जबकि भारत में प्रथम सीमेंट फैक्ट्री मद्रास (1904) में स्थापित की गई।
1. एसोसिएट सीमेंट कंपनी (A.C.C)- लाखेरी, बूँदी
क्लीक निक्सन कंपनी द्वारा-1915, उत्पादन-1917
यह राजस्थान का प्रथम सीमेंट कारखाना है
2. जयपुर उद्योग लिमिटेड (सवाई माधोपुर)
यह एशिया का सबसे बड़ा कारखाना है जो वर्तमान में बंद है।
यहाँ त्रिभुवन छाप सीमेंट बनती थी।
3. चित्तौड़गढ़
(i) जे. के. सीमेंट-1974 (निंबाहेड़ा) राजस्थान का सर्वाधिक सीमेंट उत्पादन करने वाला कारखाना।
(ii) चेतक सीमेंट -1987
(iii) आदित्य बिरला सीमेंट लिमिटेड -1995 लाफार्ज सीमेंट (फ्रांस) कंपनी जिसकी स्थापना मावलिया गाँव (चित्तौड़गढ़) में सीमेंट संयंत्र द्वारा की गई है।
4. श्री सीमेंट उद्योग- ब्यावर
1985 में भारत का सबसे बड़ा ड्राइ प्रोसेस (उत्पादन) वाला कारखाना।
2005 में 2008 में दो बार ऊर्जा के संरक्षण के क्षेत्र में 'गोल्डन पिकॉक' पुरस्कार दिया गया।
5. राज श्री सीमेंट - ब्यावर
6. J.K. सीमेंट - 1970 डबोक (उदयपुर)
7. J.K. लक्ष्मी सीमेंट - 1982 पिंडवाड़ा (सिरोही)
8. बिनानी सीमेंट लिमिटेड - 1997 पिंडवाड़ा (सिरोही)
वर्तमान में एशिया का सबसे बड़ा कारखाना - ग्रासिम सीमेंट लिमिटेड कोटपुतली, स्थापना- 2010 यहाँ अल्ट्राटेक कम्पनी सीमेंट बनाती है।
संचालन - लाफार्ज
9. मंगलम सीमेंट - मोडक (कोटा)
1982 ईस्वी में बिड़ला ग्रुप द्वारा स्थापित किया गया।
10. श्रीराम सीमेन्ट - रामनगर (कोटा) 1985
राजस्थान का सबसे कम उत्पादन क्षमता वाला कारखाना।
D.L.F. बियानी बिनानी सीमेंट का कारखाना - पाली यह पोर्टलैण्ड सीमेंट कंपनी द्वारा दयालपुरा व पाटन केरपुर गाँव में ₹410 करोड़ की लागत से सीमेंट संयंत्र स्थापित किया।
राजस्थान में सफेद सीमेंट
- J.K. व्हाइट सीमेन्ट- गोटन (नागौर), स्थापना 1984 यह राजस्थान का प्रथम सफेद सीमेंट कारखाना है।
- बिरला सफेद सीमेंट- भोपालगढ़ (जोधपुर)
- मैसर्स इंडियन रेयॉन सीमेंट कारखाना- खारिया खंगार (जोधपुर) राज्य में सफेद सीमेंट का सबसे बड़ा कारखाना।
(ii) काँच उद्योग
- द हाईटेक प्रसीजन ग्लास फैक्ट्री : धौलपुर, स्थापना : 1964, सार्वजनिक क्षेत्र
- सेमकोर ग्लास इण्डस्ट्रीज कोटा Samsung TV की पिक्चर ट्यूब बनाती है।
- धौलपुर ग्लास वर्क्स धौलपुर निजी क्षेत्र में
- एशिया का सबसे बड़ा ग्लास संयंत्र- अलवर
- सेंट गोबेन ग्लास फैक्ट्री : कहरानी (भिवाड़ी, खैरथल-तिजारा)
- समझौता - राज्य सरकार व फ्रांस के मध्य
- उद्घाटन - 19 अगस्त, 2008 - 25 अगस्त, 2010
- काँच निर्माण : जयपुर, कोटा, पाली, जोधपुर, बीकानेर, भरतपुर, उदयपुर
(iii) नमक उद्योग
झीलों से नमक उत्पादन की दृष्टि से राजस्थान प्रथम स्थान पर है।
सर्वाधिक सेंधा नमक हिमाचल प्रदेश में उत्पादित होता है।
राज्य में नमक उत्पादन निम्न हैं :-
1. पचपदरा (बालोतरा)
उच्च गुणवत्ता एवं सर्वश्रेष्ठ नमक।
यहाँ खारवाल जाति द्वारा नमक तैयार किया जाता है।
यहाँ लवण श्रमिक कल्याण योजना की शुरूआत- 3 सितंबर 2009 को की गयी।
2. सांभर झील (जयपुर)
- सांभर साल्ट लिमिटेड- 1964 में स्थापित किया गया जो केंद्र सरकार का उपक्रम है।
नोट- भारत का पहला साल्ट म्यूजियम - डांडी (गुजरात)
- राजस्थान का पहला साल्ट म्यूजियम - सांभर।
- यहाँ नमक वायु पद्धति/रेशता/वाष्पी/क्यार पद्धति के द्वारा नमक तैयार किया जाता है।
3. डीडवाना (जिला-डीडवाना-कुचामन)
(i) राजस्थान स्टेट केमिकल वर्क्स लिमिटेड- 1964
(ii) सोडियम सल्फेट संयंत्र स्थापित- 1964
D. इंजीनियरिंग उद्योग
| CEERI | CIMMCO | MEMU |
|---|---|---|
| सेन्ट्रल इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट :- झुन्झुनूँ | सेन्ट्रल इंडिया मशीनरी मैन्युफैक्चरिंग कम्पनी वेगन फैक्ट्री- भरतपुर | मेन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट - (गुलाबपुरा) भीलवाड़ा |
| स्थापना: 1953 | 1957 | 2013 |
| उद्देश्य: इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में अनुसंधान करना | रेल के डिब्बे | इलेक्ट्रॉनिक रेल के डिब्बे |
- नेशनल इंजीनियरिंग इण्डस्ट्रीज कारखाना जयपुर में है जो एशिया का सबसे बड़ा बियरिंग निर्माण कारखाना है।
- कृषि औजार बनाने का कारखाना जयपुर में स्थित है।
- मान इंडस्ट्रियल कॉर्पोरेशन (जयपुर)- यहाँ लोहे का सामान तथा इमारती दरवाजे निर्मित किये जाते है।
- इन्स्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड (कोटा)- इसकी एक शाखा जयपुर में भी स्थित है। इसके द्वारा थर्मामीटर, बिजली के उपकरण बनाये जाते हैं तथा इसके साथ ही रासायनिक उद्योगों में काम आने वाले यंत्र एवं मशीनों का भी उत्पादन करती है।
- बिजली के मीटर बनाने का कारखाना जयपुर में स्थित है।
- इंजीनियरिंग उद्योग केन्द्र भिवाड़ी (खैरथल-तिजारा) में स्थित है।
- आयरन एण्ड स्टील इंडस्ट्रीज लिमिटेड भवानी मंडी (कोटा) औद्योगिक क्षेत्र है।
- टी.वी. ट्यूब कारखाना कोटा में सेमकोर ग्लास लिमिटेड के तहत कार्यरत है।
- अभ्रक ईंट उद्योग का कारखाना भीलवाड़ा में स्थित है।
- खेल-कूद उपकरण के कारखाने हनुमानगढ़ में स्थित हैं।
- आयशर ट्रेक्टर कारखाना अलवर में स्थित हैं।
- पानी के इंजन का कारखाना लूणकरणसर (बीकानेर) में स्थित हैं।
- होण्डा सिएल कार का कारखाना भिवाड़ी (खैरथल-तिजारा) में स्थित हैं।
- टेलीफोन इंडस्ट्रीज भिवाड़ी (जिला-खैरथल-तिजारा) में स्थित है।
- ट्रेक्टर के कलपुर्जे का कारखाना- जोधपुर
- अशोका लीलैण्ड ट्रक-बस कारखाना- अलवर
- शालीमार इंडस्ट्रीज- जयपुर
- इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन- जयपुर
खादी से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
- अखिल भारतीय खादी बोर्ड की स्थापना- 1923
- राजस्थान में चरखा संघ का कार्य 1925 में अजमेर में हुआ।
- राजस्थान में 1926 में अमरसर (जयपुर) में चरखा संघ का प्रथम उत्पत्ति केन्द्र बनाया गया तथा बाद में सन् 1935 में इसको गोविंदगढ़ (जयपुर) में स्थानान्तरित कर दिया गया।
- राजस्थान में चरखा संघ का कार्यालय 1927 में जयपुर में स्थापित किया गया।
- ‘अखिल भारतीय चरखा संघ’ की स्थापना 1952 में की गई।
- राजस्थान खादी एवं बोर्ड की स्थापना 1955 में की गई है।
- एम. राधाकृष्णया समिति का गठन (1984-85) खादी एवं ग्रामोद्योग की समीक्षा करने के लिए गठित की गई है।
- राजस्थान में 1957 में खादी ग्रामोद्योग संस्था संघ की शुरुआत की गई है।
- राज्य में सिरेमिक इलेक्ट्रिकल रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट सेंटर बीकानेर की स्थापना 2010 में की गई हैं।
- दीनदयाल हथकरघा योजना- शुरुआत- 1 अप्रैल 2000 ई. उद्देश्य- बुनकरों का उत्थान करना एवं यह केन्द्र प्रवर्तित योजना है।
- राजस्थान खादी ग्रामोद्योग विद्यालय- शिवदासपुरा (जयपुर) स्थापना- 2 अक्टूबर 1954
- शिल्प एवं माटीकला बोर्ड- स्थापना- 16 नवम्बर 2009 उद्देश्य- मिट्टी के बर्तन तथा टेराकोटा जैसी आकृतियाँ बनाने वाले दस्तकारों का उत्थान करना।
- भारतीय ऊन बोर्ड का राज्य में मुख्यालय जयपुर में है।
- "ऑपरेशन मोजड़ी कार्यक्रम" राज्य में नागौर, जयपुर एवं जोधपुर में संचालित है।
- "राजस्थान लघु उद्योग निगम" हस्तशिल्प के विकास के लिए जबकि हैण्डलूम उद्योग के विकास के लिए राजस्थान हथकरघा विकास निगम कार्यरत है।
- राज्य में "हस्तशिल्प डिजाइन विकास एवं शोध केन्द्र" जयपुर में जबकि "फुटवियर डिजाइन एवं डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट" जोधपुर में स्थापित किया गया है।
- मीनाकारी कार्य के लिए कुदरतसिंह जबकि ब्लू पॉटरी के लिए कृपाल सिंह शेखावत प्रसिद्ध हैं।
- बीकानेर, मथैरण एवं कैमल हाइड कला के लिए प्रसिद्ध है।
- राजस्थान में फुटवियर डिजाइन एवं डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट की स्थापना जोधपुर में की गई है।
प्रसिद्ध कार्य
- फूल उद्योग- पुष्कर
- बीड़ी उद्योग- ब्यावर
- ताँबे के बर्तन- भीलवाड़ा
- पीतल का काम- जयपुर
- लोई कारखाना- नापासर (बीकानेर)
- कूँपी उद्योग- बीकानेर
- बरड़ी उद्योग- जैसलमेर
- अजरख और मलीर प्रिंट- बाड़मेर
- लाख की चूड़ियाँ- जयपुर
- बातिक और गोटे का काम- खंडेला (सीकर)
- मूर्ति शिल्प- थानागाजी (अलवर)
- जिंक के खिलौने- अलवर
- पेचवर्क & चट्टापटी का कार्य- सीकर
- रमकड़ा उद्योग- गलियाकोट (डूंगरपुर)
- कोफ्तागिरि, तहनिषां और हाथी दाँत की चूड़ियाँ- जयपुर
- खेसले-लेटा- जालौर
- बेडशीट- सांगानेर
- नमदा- टोंक
- ऊनी बरड- जैसलमेर
- पोमचा- लहरिया -जयपुर
- फड़- शाहपुरा
- मलमल- मथानिया (जोधपुर)
- दरियाँ- टांकला (नागौर)
केन्द्र सरकार के उपक्रम जो राज्य में कार्यरत है
1. हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड - उदयपुर
सहयोग- ग्रेट ब्रिटेन
स्थापना- 1966
इसके 2 स्मेल्टर हैं- देबारी (उदयपुर), चंदेरिया (चित्तौड़गढ़)
2. हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड : खेतड़ी (झुंझुनूँ)
सहयोग- अमेरिका
स्थापना- 1967
3. हिन्दुस्तान मशीन टूल्स - अजमेर
सहयोग- चेकोस्लोवाकिया (चेक गणराज्य)
स्थापना- 1967
4. इन्स्ट्रुमेंटेशन लिमिटेड - कोटा
स्थापना- 1965
5. मॉडर्न बेकरीज- जयपुर
स्थापना- 1965
6. हिन्दुस्तान सॉल्ट लिमिटेड- सांभर (जयपुर)
स्थापना- 1960
इसकी शाखा सांभर सॉल्ट लिमिटेड की स्थापना- 1964
7. राजस्थान ड्रग्स एण्ड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड- जयपुर
स्थापना- 1978
हस्तशिल्प एवं खादी ग्रामोद्योग
राज्य के प्रमुख हस्तशिल्प कला निम्न हैं-
1. टेराकोटा
मिट्टी की मूर्तियों को आग के अन्तर्गत पकाकर बनाने की प्रक्रिया है।
इसके प्रमुख शिल्पी- मोहनलाल
इसके अन्तर्गत इनको राष्ट्रीय स्तर पुरस्कार भी दिया गया है।
इसके लिए प्रसिद्ध गाँव- मोलेला (राजसमंद), बू- नरावता (नागौर)
यह मूर्तियाँ निम्न की होती है-
देवी-देवता, स्त्री-पुरुष एवं पशु।
इस प्रकार की आकृतियाँ बनाते समय किसी भी प्रकार के औजार का प्रयोग नहीं किया जाता है बल्कि चिकनी मिट्टी को अपने हाथ से आकार दिया जाता है।
2. ब्लू पॉटरी
इसका प्रारंभ 19वीं शती के आरंभ में माना जाता है।
भारत में यह कला अफगानिस्तान एवं फारस से आयी है।
सवाई मानसिंह-II के समय (1835-1880 ई.) जयपुर में इस कला का विकास हुआ है।
इस कला को पुनर्जीवित करने का श्रेय कृपालसिंह शेखावत को जाता है।
इसमें 05 तत्वों का मिश्रण होता है जो निम्न है- गोंद (कहीरा), सोडियम कार्बोनेट (साजी), काँच, क्वार्ट्ज तथा मुल्तानी मिट्टी (फुलर्स अर्थ) होती है।
इसको 800° सेन्टीग्रेड तापमान में 2-3 दिन तक पकाया जाता है।
इसके प्रशिक्षण के लिए राज्य में 15 केन्द्र बनाये गये हैं।
3. थेवा कला (प्रतापगढ़)
रंगीन काँच पर सोना, चाँदी के रंगों द्वारा नक्काशी करने की कला को ही थेवा कला कहते हैं।
इस कला का स्वर्णकार 'नाथूजी सोनी' हैं।
यह कला अतिगोपनीय (ट्रेड सीक्रेट) रखने के कारण इसका अधिक विकास नहीं हुआ है तथा यह कला एक ही परिवार के लोग पीढ़ी दर पीढ़ी करते हैं।
इस कला को भौगोलिक उपदर्शन (रजिस्ट्रीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम 1999 के तहत ज्योग्राफिकल इंडिकेशन संख्या का प्रमाण पत्र दिया गया है।
यह प्रमाण पत्र इसलिए दिया जाता है कि किसी उत्पाद की विशेष गुणवत्ता, पहचान एवं प्रचलन के लिए दिया जाता है।
4. उस्ताकला (बीकानेर)
ऊँट की त्वचा पर सुनहरी कलाकारी ही उस्ता कला कहलाती है।
उस्ता केमल हाइड ट्रेनिंग सेंटर - बीकानेर
उद्देश्य - उस्ता कला को संरक्षण देना।
यह राजसीको के संरक्षण में है।
5. कोटा डोरिया/मसुरिया - कोटा
6. फड़ पेंटिंग
शाहपुरा
7. पिछवाई
- मूर्ति के पीछे की दीवार पर कपड़े पर की जाने वाली चित्रकारी पिछवाई कहलाती है।
- रॉबर्ट स्केल्टन की पुस्तक 'राजस्थानी टेम्पल हैगिंग्स ऑफ दी कृष्णा कल्ट' में कृष्ण की लीलाओं में पिछवाई का प्रयोग किया गया।
पिछवाइयों की केन्द्रीय आकृतियाँ निम्न प्रकार से है-
श्रीनाथ जी (नाथद्वारा), गोविन्द देव जी (जयपुर), मथुरानाथ जी (कोटा), मथुरेस जी (मथुरा), मदनमोहन जी (करौली), द्वारिकाधीश (द्वारिका), विठ्ठल जी (पढरपुर-महाराष्ट्र) इत्यादि।
सर्वाधिक चर्चित पिछवाई कलाकार लच्छीराम जी (कोटा) है।
8. पीतल की नक्काशी
यह ईरान से भारत में आयी है।
9. हाथीदाँत
हाथीदाँत के खिलौने जयपुर में बनाये जाते हैं जबकि हाथीदाँत की चूड़ियाँ एवं चूड़े जोधपुर एवं पाली में बनाई जाती है।
10. तारकशी - जयपुर
शीशम की लकड़ी पर पीतल की फूल-पत्तियाँ एवं बेलबूटे की कलाकारी ही तारकशी कहलाती है।
11. गलीचा
राजस्थान में गलीचा उत्पादन जिले, टोंक, अलवर, सीकर, झुंझुनूँ
अर्थ- ऊन की मोटी चादरें
12. मीनाकारी
यह सोना, चाँदी एवं ताँबा की धातुओं पर किया जाता है।
इस कला को महाराजा मानसिंह-I लाहौर से लेकर आये।
राज्य में नाथद्वारा की मीनाकारी प्रसिद्ध है।
13. जहर-मोहरा
यह एक पत्थर है।
यह संगमरमर से भी अधिक सख्त होता है।
इसके प्रसिद्ध कलाकार- आनंदी लाल किरोड़ीपाल
प्रमुख केन्द्र- जयपुर
14. गोटा उद्योग
सूती का रेशम वस्त्रों पर चाँदी/ताँबा/स्टील/प्लास्टिक के बाने से बुनी बेला को गोटा कहते हैं।
राजस्थान में इसका प्रमुख केन्द्र- जयपुर
अन्य केन्द्र- नायला (जयपुर), अचरोल (जयपुर), चौथ का बरवाड़ा (सवाईमाधोपुर), खंडेला (सीकर) इत्यादि।
15. चमड़े का कार्य
जोधपुर - मोजड़ी प्रसिद्ध
नागौर एवं भीनमाल- कशीदा युक्त जूतियाँ
इसके अलावा मानपुरा माचेड़ी, (जयपुर) एवं तिलोनिया (अजमेर) भी चमड़ा आधारित वस्तुओं के निर्माण के लिए प्रसिद्ध है।
16. कपड़ा बुनाई, रंगाई, छपाई एवं बंधेज
- जैसे- दाबू प्रिंट- अकोला
- जाजम प्रिंट- चित्तौड़गढ़
- अजरक प्रिंट- बाड़मेर
- पिछवाई हस्तकला- नाथद्वारा
- कोटा डोरिया साड़ी- कोटा
- लहरिया एवं मोवडे- बीकानेर
- ओढ़निया एवं चुनड़ियाँ- जोधपुर
17. बगरू प्रिंट, जयपुर ग्रामीण
18. बंधेज
- इसमें रंगों को बाँधकर रोका जाता है जैसे-
- लहरिया- कपड़े को एक सिरे से दूसरे तक बाँधने से जो धारियाँ बन जाती हैं तो इस बंधेज को लहरिया कहते हैं।
- मोठड़ा- अगर लहरिया की धारियाँ एक-दूसरे को काटते हुए प्रतीत होती हैं तो उसे मोठड़ा कहते हैं।
- चुनरी- बूँदी जैसी आकृति की कलाकृति चुनरी कहलाती है।
- पोमचा- ओढ़नी के चारों तरफ कोरा पल्ला हो और मध्य में एक गोल फूल जैसी आकृति पोमचा कहलाती हैं।
- प्रमुख केन्द्र- जयपुर, जोधपुर, बाड़मेर, बीकानेर, पाली, सीकर, चूरू, झुन्झुनू एवं हाड़ौती क्षेत्र।
- हाड़ौती एवं शेखावाटी प्रदेश का बंधेज बहुत ही महीन होता है।
19. काष्ठ हस्तशिल्प
राज्य में काष्ठ के लिए प्रसिद्ध स्थान बस्सी (चित्तौड़गढ़) है।
बस्सी काष्ठ कला का जन्मदाता- प्रभात सुथार
लकड़ी का कार्य करने वाले को सुथार, बढ़ई एवं खाती कहते हैं।
प्रभात सुथार के द्वारा सर्वप्रथम एक लकड़ी की गणगौर बनायी गयी थी।
बेवाण (विमान)
- यह देवताओं की सवारी हेतु बनाया गया एक काष्ठ मंदिर है।
- उपनाम- रामरेवाड़ी, मिनिएचर वुड टेम्पल - इसके लिए बस्सी (चित्तौड़गढ़) के कलाकार प्रसिद्ध हैं।
- कठपुतली- इसके प्रसिद्ध कलाकार- श्री देवीलाल सांभर - राज्य में धागा पुतली के करतब प्रसिद्ध है जो मारवाड़ में प्रसिद्ध हैं।
- कावड़- यह 8 से 10 कपाटों का मंदिर है। इसके प्रत्येक कपाट के दोनों ओर देवी-देवताओं, संत-भक्तों एवं महापुरुषों के चित्र बने होते हैं।
20. पत्थर शिल्प कला
राजस्थान में तलवाड़ा गाँव (बाँसवाड़ा) इस कला के लिए प्रसिद्ध है।
इस गाँव को "पाण वारू ग्राम" अर्थात् पत्थरों वाला गाँव भी कहते हैं।
यहाँ सभी धर्मों एवं सम्प्रदायों की मूर्तियाँ बनायी जाती है।
इन मूर्तियों के लिए ये लोग देवलखान (डूंगरपुर) से निकाले गये पारेवा पत्थर का उपयोग करते हैं।
रमकड़ा
पत्थर की आकृतियाँ एवं खिलौने रमकड़ा कहलाते हैं।
रमकड़ा उद्योग के लिए गलियाकोट के दाऊदी बोहरा सम्प्रदाय (डूंगरपुर) के शिल्पी प्रसिद्ध है।
सिकन्दरा (दौसा)- यह लाल पत्थर से मकानों में लगने वाले झरोखे, जाली, छतरी एवं मंदिर इत्यादि का निर्माण किया जाता है।
राजस्थान में औद्योगिक संस्थान
औद्योगिक विकास
जनवरी, 2019 को केन्द्र सरकार ने उद्योग मंत्रालय का नाम परिवर्तित करके उद्योग संवर्द्धन और आन्तरिक व्यापार विभाग कर दिया गया।
वर्ष 2023-24 के दौरान राजस्थान से निर्यात में विभिन्न क्षेत्रों का योगदान निम्न है :-
राजस्थान से निर्यात शीर्ष 5- वस्तुओं में इंजीनियरिंग, रत्न व आभूषण, धातु, कपड़ा तथा हस्तशिल्प है जिनका निर्यात में 65% से अधिक योगदान है।
अगस्त, 2021 में राजस्थान ने उद्योग मंत्रालय का नाम परिवर्तित करके उद्योग एवं वाणिज्य विभाग कर दिया गया जिसका विवरण निम्न प्रकार है-
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग- (वर्तमान मंत्री - कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़)
राज्य स्तर पर उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था निम्नानुसार है-
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के कार्य एवं योजनाएँ निम्न हैं, जिसका वर्गीकरण निम्न प्रकार है-
- I. उद्योग पंजीयन सम्बन्धित कार्य
- II. उद्योग हेतु प्रक्रिया का सरलीकरण
- III. उद्योगों की आधारभूत संरचना विकास, सामान्य राजकीय सहायता, प्रोत्साहन, पुरस्कार एवं शिविर
I. उद्योग पंजीकरण सम्बन्धित कार्य
(i) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के स्थापनार्थ उद्योग आधार/उद्यम पंजीकरण
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम ( एम.एस.एम.ई. )- उद्यम वर्गीकरण के मानदण्डों में दिनांक 1 जुलाई, 2020 के आधार पर निम्न वर्गीकरण है-
1. सूक्ष्म उद्योग
निवेश- ₹ 1 करोड़ से अधिक नहीं
कारोबार- ₹ 5 करोड़ से अधिक नहीं
2. लघु उद्योग
निवेश- ₹ 10 करोड़ से अधिक नहीं
कारोबार- ₹ 50 करोड़ से अधिक नहीं
3. मध्यम उद्योग
निवेश- ₹ 50 करोड़ से अधिक नहीं
कारोबार- ₹ 250 करोड़ से अधिक नहीं
II. उद्योग हेतु प्रक्रिया सरलीकरण
उद्यम स्थापित करने की प्रक्रियाओं का सरलीकरण (EoDB- Ease of Doing Business) के लिए उद्योग एवं वाणिज्य विभाग नोडल विभाग के रूप में कार्य करता है।
III. उद्योगों की आधारभूत संरचना विकास, सामान्य राजकीय सहायता, प्रोत्साहन, पुरस्कार, प्रदर्शनी एवं शिविर
राजस्थान औद्योगिक विकास नीति 2019 के उद्देश्य
- उद्यमशीलता एवं नवाचार
- पर्यावरण संरक्षण एवं सतत् औद्योगिक विकास
- उद्योग 4.0- प्रौद्योगिक अधिग्रहण, कौशल विकास, रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट को प्रोत्साहन देना।
- ईज ऑफ डुईंग और उद्योग समर्थक दृष्टिकोण को अपनाना।
- विशिष्ट श्रेणी-जयपुर
- A श्रेणी-अलवर, दौसा, अजमेर, भीलवाड़ा, पाली, जोधपुर, राजसमंद, उदयपुर, कोटा, बारां
- B श्रेणी-श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, सीकर, झुन्झुनु, नागौर, टोंक, भरतपुर, करौली, सवाईमाधोपुर, चित्तौड़गढ़, बाँसवाड़ा
- C श्रेणी-जैसलमेर, बाड़मेर, जालौर, सिरोही, डूंगरपुर, झालावाड़, बूँदी, धौलपुर
राज्य में सर्वाधिक मध्यम उद्योग-भिवाड़ी, भीलवाड़ा, कोटा
सर्वाधिक औद्योगिक इकाइयाँ जयपुर तथा सबसे कम जैसलमेर में है।
प्रमुख योजनाएँ
1. मुख्यमंत्री युवा उद्यम प्रोत्साहन योजना
शुरुआत- 19 मई, 2023
उद्देश्य- युवा स्नातक उद्यमी जिसकी उम्र 18 से 35 वर्ष को उद्योग स्थापित (विनिर्माण, सेवा, व्यापार) के लिए ऋण अनुदान देना।
जैसे-
(i) ₹ 25 लाख तक 8% ब्याज
(ii) ₹ 25 लाख से अधिक तथा ₹ 1 करोड़ तक की ऋण राशि पर 6 प्रतिशत ब्याज अनुदान प्रदान करना।
2. मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना (एम.एल.यू.पी.वाई.)
शुरुआत- 13 दिसम्बर, 2019
उद्देश्य- छोटे पैमाने के उद्यमियों का विस्तार एवं आधुनिकीकरण के लिए ऋण देना
जैसे-
(i) ₹ 25 लाख पर 8 प्रतिशत
(ii) ₹ 5 करोड़ पर 6 प्रतिशत
(iii) ₹ 10 करोड़ पर 5 प्रतिशत ब्याज पर अनुदान प्रदान किया जा रहा है।
3. मुख्यमंत्री लघु वाणिज्यिक वाहन स्वरोजगार
योजना- शुरुआत- 11 अक्टूबर, 2022
उद्देश्य- इसमें वाहन की ऑन रोड़ कीमत का 10 प्रतिशत या ₹ 60000 (जो भी कम हो) को अनुदान राज्य सरकार द्वारा तथा समकक्ष अनुदान संबंधित वाहन निर्माता कम्पनी द्वारा दिया जावेगा।
इस योजना में ₹ 15 लाख तक की ऑन रोड कीमत वाले वाणिज्यिक वाहन पात्र है। इस योजना में आवेदक की आयु 18 से 45 वर्ष के मध्य होनी चाहिए।
4. डॉ. भीमराव अंबेडकर राजस्थान दलित, आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना
उद्देश्य- SC/ST की भागीदारी बढ़ाने के लिए गैर-कृषि (विनिर्माण, सेवा, व्यापार) क्षेत्रों के विकास के लिए है, इसमें निम्न ऋण देय है-
(i) ₹ 25 लाख से कम = 9%
(ii) ₹ 25 लाख से ₹ 5 करोड़ = 7%
(iii) ₹ 5 करोड़ से ₹ 10 करोड़ = 6% तक
ब्याज अनुदान उपलब्ध करवाया जा रहा है।
5. युवा उद्यमिता प्रोत्साहन योजना (वाई.यू.पी.वाई.)
शुरुआत- 2013-14
उद्देश्य- उद्योगों में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना इस योजना में ₹ 2 करोड़ तक की ऋण सीमा पर 6% ब्याज अनुदान दिया जाता है।
इस योजना में युवा उद्यमियों की अधिकतम आयु 45 वर्ष निर्धारित की गई है।
6. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आई.आई.पी.)
उद्देश्य- उत्पादन मात्रा में अल्पकालिक परिवर्तन को मापता है इसका मापन मासिक आधार पर होता है।
इसका आधार वर्ष 2011-12 है, यह 3-वृहद समूहों पर आधारित है; विनिर्माण, खनन, विद्युत।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग से संबंधित अन्य प्रमुख संस्थान
- सेन्ट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी-जयपुर
- ब्रह्मगुप्त अनुसंधान एवं विकास केन्द्र-जोधपुर
- राष्ट्रीय फैशन तकनीकी संस्थान, जोधपुर (NIFT)- स्थापना- 2010 राज्य में फैशन तकनीकी से संबंधित उद्योगों के सर्वांगीण विकास हेतु।
- सिरेमिक इलेक्ट्रिकल रिसर्च एण्ड डेवलपपमेंट सेन्टर (CERDC)- बीकानेर- स्थापना 2005-06
वर्तमान में राज्य में 36 जिला उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र एवं 8 उपकेन्द्र ब्यावर, फालना (पाली), आबूरोड (सिरोही), बालोतरा, मकराना (डीडवाना-कुचामन ), किशनगढ़ (अजमेर), नीमराना (कोटपूतली-बहरोड़) एवं सुजानगढ़ (चूरू) कार्यरत है।
उद्योगों की समस्या के समाधान हेतु निम्न संस्थाएँ कार्यरत हैं-
- राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं विनियोजन निगम : (Rajasthan State Industrial Development and Investment Corporation) RIICO- स्थापना- जनवरी 1980
- राजस्थान में उद्योग एवं खनिज विकास के लिए सर्वप्रथम 28 मार्च 1969 को 'राजस्थान उद्योग एवं खनिज विकास निगम' (RIMDC) की स्थापना की गई थी।
- इसके बाद में उद्योग से खनिज को अलग करके नवम्बर 1979 में 'राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम' (RSMDC) की स्थापना की गई।
- RIICO का मुख्यालय- जयपुर
RIICO के कार्य
औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, भूमि आवंटन, आयात-निर्यात प्रवासी भारतीयों को विशेष सुविधा, ऋण उपलब्ध करवाने वाली सर्वोच्च संस्था है।
औद्योगिक क्षेत्र
- भिवाड़ी (खैरथल-तिजारा)
- टपूकड़ा (खैरथल-तिजारा)
- घिलोट (कोटपूतली-बहरोड़)
- नीमराना (कोटपूतली-बहरोड़)
- पाथरेड़ी (खैरथल-तिजारा)
- इन्द्रप्रस्थ-कोटा
- भगत की कोठी- जोधपुर
- बोरानाडा- जोधपुर
- विश्वकर्मा- जयपुर
- बड़ली- अजमेर
- माथासुला- जयपुर
- अमली- उदयपुर
- कुरज- राजसमंद
- खैरवा कोटकासिम (खैरथल-तिजारा)
- एग्रो एवं फूड प्रोसेसिंग जोन तिंवरी (जोधपुर)
- स्पोर्ट्स गुड्स और टॉयज जोन- खुशखेड़ा
विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special Economic Zone-SEZ)
- निर्यात को बढ़ावा देने के लिए SEZ नीति- 2003
- बोरानाडा- जोधपुर (हस्तशिल्प)- I- SEZ
- नीमराणा-(कोटपूतली-बहरोड़) (होजरी)
- सीतापुरा- जयपुर (जैम्स एण्ड ज्वैलरी- जैम्स वोर्स)
- ऊन गलीचा- बीकानेर
- महिन्द्रा सेज- जयपुर (IT)
- सूचना प्रौद्योगिकी सेज
- खुशखेड़ा (खैरथल-तिजारा), जयपुर, जोधपुर
- टेक्सटाईल्स सेज- बीकानेर
विशेष औद्योगिक पार्क/जोन
1. फार्मास्युटिकल्स जोन- उदयपुर
2. मैन्यूफैक्चरिंग जोन (कोटपूतली-बहरोड़)
3. ट्रांसपोर्ट जोन- राजसमंद
4. सिरेमिक जोन- नीमराणा, बीकानेर (खारा)
5. एकीकृत कपड़ा पार्क- जयपुर
6. लेदर कॉम्पलैक्स- मानपुरा माचेड़ी (चमड़ा उद्योग) जयपुर ग्रामीण, भिवाड़ी (खैरथल-तिजारा)
7. अपैरल पार्क- जयपुर (महला)- वस्त्र
8. ऊन पार्क- गोहना (ब्यावर), बीकानेर
9. जेट्रोफा पार्क (जापानी पार्क)-नीमराणा
10. कोटरा पार्क (दक्षिण-कोरिया) नीमराणा
11. अर्थ स्टेशन- जयपुर, जोधपुर
12. बॉयोटेक्नोलॉजी पार्क- सीतापुरा, चोपंकी (खैरथल-तिजारा
13. स्टोन पार्क- धौलपुर, जोधपुर, करौली (मासलपुर)
14. एग्रो फूड पार्क- जोधपुर (बोरानाडा) कोटा, अलवर, श्रीगंगानगर
प्रस्तावित- झालावाड़ (निजी क्षेत्र)
एग्रो एक्सपोर्ट जोन-जीरे के लिए :- जोधपुर, बाड़मेर, जालौर, नागौर, पाली,
धनिये के लिए एक्सपोर्ट जोन: कोटा, बूंदी, बाराँ, झालावाड़, चित्तौड़गढ़
15. C-DOS (पत्थर उद्योग) जयपुर (सीतापुरा) (Center for development of Stones)
16. साइबर पार्क- जोधपुर
17. सॉफ्टवेयर पार्क, कनकपुरा (जयपुर), जोधपुर, उदयपुर, कोटा
18. होजरी पार्क, चोपंकी (भिवाड़ी)
19. टैक्सटाईल्स पार्क- भीलवाड़ा
20. पुष्प पार्क- खुशखेड़ा (खैरथल-तिजारा)
21. मेगा फूड पार्क- रूपनगढ़ (अजमेर)
22. इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्पलैक्स- कूक्स, चोपंकी
23. मेगा टेक्सटाईल्स पार्क - काकाणी (जोधपुर)
24. MEd Tech मेडिकल डिवाइस पार्क - बोरानाडा (जोधपुर)
25. इंटीग्रेटेड रिसोर्स रिकवरी पार्क: थौलई औद्योगिक क्षेत्र, जमवारामगढ़ (जयपुर)
- वर्तमान में 424 औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित।
2024-25 में रीको के द्वारा 5 नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए गए हैं-
- चडुआल (आबूरोड़)- सिरोही
- बोरानाड़ा विस्तार- जोधपुर
- माथासुला द्वितीय चरण- जयपुर
- गणेश्वर- सीकर
- मूरड़ा- राजसमंद
- कांकाणी औद्योगिक क्षेत्र (जोधपुर)- यहाँ सोलर पैनल पार्क विकसित होगा।
- बोरानाड़ा (जोधपुर)- यहाँ हस्तशिल्प एवं फर्नीचर पार्क विकसित होगा।
राजस्थान राज्य वित्त निगम
- स्थापना- 17 जनवरी 1955, मुख्यालय- जयपुर
- कार्य- अति लघु औद्योगिक इकाइयों को 2000 से 20 करोड़ तक ऋण उपलब्ध करवाना।
राजस्थान वित्त निगम द्वारा संचालित ऋण योजनाएँ:-
- शिल्पबाड़ी योजना- ग्रामीण एवं शहरी दस्तकारों को ऋण योजना
- सिल्वर कार्ड योजना- वित्त निगम का अच्छा ऋणी जो 50 प्रतिशत ऋण अदायगी पर फिर से ऋण देना।
- गोल्ड कार्ड- वित्त निगम का अच्छा ऋणी जिसको तत्काल 30 लाख ऋण उपलब्ध करवाना।
- ब्रिजलोन- महिलाओं को उद्योग स्थापित के लिए ऋण देना
- टेक्नोक्रेट योजना- तकनीकी शिक्षा प्राप्त व्यक्ति को उद्योग स्थापित के लिए ऋण देना
- सेमफेक्स- भूतपूर्व सैनिकों को उद्योग स्थापित के लिए ऋण देना।
- प्लेटिनम कार्ड- वित्त निगम का अच्छा ऋणी जो 2 वर्षों तक ऋण अदायगी पर फिर से ऋण देना।
RAJSICO
- राजस्थान लघु उद्योग निगम (Rajasthan Small Industries Corporation LTD.)
- स्थापना- 3 जून 1961, मुख्यालय- जयपुर
- कार्य- लघु उद्योगों को कच्चा माल, विपणन, उद्योगों में सामंजस्य, प्रदर्शनी, सेमिनार, मेला आयोजन तथा गलीचा प्रशिक्षण उपलब्ध करवाना।
निर्यात हेतु आधारभूत सुविधाएँ
1. एयर कार्गो कॉम्पलैक्स- जयपुर स्थापना- 1979
2. इनलैण्ड कन्टेनर डिपो (I.C.D.) (अंतर्देशीय कन्टेनर डिपो)
A. मानसरोवर (जयपुर)- 1989, प्रथम- ICD
B. बासनी (जोधपुर)- 1995
C. भिवाड़ी (खैरथल-तिजारा)- 1999
D. भीलवाड़ा- 2000
वर्तमान में जयपुर तथा जोधपुर को आयात-निर्यात की सुविधा उपलब्ध
प्रशिक्षण केन्द्र
1. वुड सीजनिंग प्लांट एण्ड कॉमन सर्विस फेसिलिटी सेंटर- बोरानाड़ा - 1999 यह सौर ऊर्जा पर आधारित है।
2. प्रशिक्षण केन्द्र:
A. फड़ चित्रकला- शाहपुरा (भीलवाड़ा)
B. कोटा- बूँदी चित्रकला- कोटा
C. मारवाड़-जोधपुर चित्रकला- जोधपुर
D. ऊँट के चमड़े पर सुनहरी नक्काशी (उस्ताकला)- बीकानेर
हस्तशिल्प एवं पर्यटन कॉम्पलैक्स
राजस्थली कॉम्पलैक्स आमेर (जयपुर) प्रारंभ- मार्च 2007
RUDA
- ग्रामीण गैर कृषि विकास अभिकरण- (RUDA) जयपुर (Rural Non Agriculture Development Agency)
- स्थापना- नवम्बर, 1995
- वर्तमान में रूडा तीन उपक्षेत्र यथा - चर्म, लघु खनिज तथा ऊन व वस्त्र के दस्तकारों के लिए कार्य कर रहा है।
- कार्य- ग्रामीण दस्तकारों को संगठित व प्रशिक्षित करना, तकनीकी उत्थान करना, नेटवर्क स्थापित करना।
RUDA द्वारा संचालित विशेष परियोजना-
- (i) शिल्प ग्राम- बाड़मेर, सवाईमाधोपुर
- (ii) बुनाई केन्द्र- लेटा (जालौर), मांगरोल (बाराँ), सालावास (जोधपुर)
- (iii) हस्तशिल्प गाँव- कैथून (कोटा-डोरिया साड़ी), नायला (जयपुर)
तालछापर हस्तशिल्प उत्पाद परियोजना- संचालित 2007
राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड- जयपुर
- स्थापना: 1955
- राजस्थान में सर्वप्रथम चरखा संघ की स्थापना 1927 में जयपुर (सांगानेर) में की गई।
- खादी कामगार आर्थिक प्रोत्साहन योजना शुरुआत- 13 जुलाई, 2022
- उद्देश्य- खादी के उत्पादन को प्रोत्साहित करना।
इसके निम्न केन्द्र हैं-
- ऊन अनुभाग, बाड़मेर
- ऊनी उत्पत्ति केन्द्र, बीकानेर
प्रशिक्षण केन्द्र
- पुष्कर (अजमेर)
- सांगानेर (जयपुर)
- माउंट आबू (सिरोही)
राजस्थान राज्य हथकरघा निगम लिमिटेड
- स्थापना- मार्च 1984 (जयपुर)
- राजस्थान प्रदेश में हाथकरघा उद्योग की उन्नति, सहायता, वृद्धि एवं विकास हेतु कार्य करना।
राजस्थान राज्य सहकारी बुनकर संघ
- स्थापना- 26 अगस्त 1957 (जयपुर)
- आधुनिक तकनीक एवं डिजाईन का बुनकरों को प्रशिक्षण देना एवं उच्च मूल्य के उत्पादों का उत्पादन करवाना।
दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रीयल कोरिडोर (DMIC) - जयपुर
- गठन - फरवरी, 2014
- पुर्नगठन - 27 नवम्बर, 2020
- DMIC की परिधि में 22 जिले आयेंगे।
Note: दिल्ली -मुम्बई डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर-
- भारत सरकार द्वारा दिल्ली और मुम्बई के बीच डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की स्थापना की जा रही है, जिसकी कुल लम्बाई 1504 किलोमीटर है। यह दादरी (उत्तरप्रदेश) से प्रारम्भ होकर दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से होता हुआ, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात व महाराष्ट्र के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक जायेगा। फ्रेट कॉरिडोर का अधिकतम हिस्सा (लगभग 38%) राजस्थान से होकर गुजरता है, जिसकी कुल लम्बाई लगभग 567 किमी है।
DMIC के 5 क्षेत्र है:-
1. खुशखेड़ा -भिवाड़ी नीमराना निवेश क्षेत्र (के.बी.एन.आई.आर.)
- पर्यावरण स्वीकृति मिली: 2014, क्षेत्रफल: 165 वर्ग किमी.
- अधिसूचना जारी: दिसम्बर, 2020, इसमें गाँव-43
2. जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र
- इसको पर्यावरण स्वीकृति- जुलाई 2017, अधिसूचना जारी - अक्टूबर, 2020, क्षेत्रफल-154 वर्ग किमी., गाँव-09
- इसमें रोहट तहसील पाली को विकसित किया जा रहा है।
नोट: 1+2 क्षेत्र के विकास के लिए राजस्थान इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (रिडको) का गठन 15 मार्च, 2022 को किया गया।
3. अजमेर - किशनगढ़ निवेश क्षेत्र
4. राजसमंद - भीलवाड़ा निवेश क्षेत्र
5. जयपुर दौसा औद्योगिक क्षेत्र
नोट: DMIC में 5 क्षेत्र में 2 निवेश क्षेत्र (1 व 3) तथा 3-औद्योगिक क्षेत्र (2, 4 व 5) है।
डिजाइन संस्थान के द्वारा राजस्थान के निम्न कृषि, प्राकृतिक वस्तु तथा शिल्पकलाओं को भौगोलिक सूचकांक दिया जा चुका है-
- कोटा डोरिया- हस्तशिल्प।
- जयपुर की ब्लू पॉटरी- हस्तशिल्प
- मोलेला वर्क (राजसमंद)- हस्तशिल्प
- सांगानेरी हैंड ब्लॉक प्रिन्ट (जयपुर)- हस्तशिल्प
- कठपुतली- हस्तशिल्प
- बीकानेरी भुजिया- कृषि
- फुलकारी- हस्तशिल्प
- थेवा कला (प्रतापगढ़)- हस्तशिल्प
- मकराना मार्बल (डीडवाना-कुचामन)- प्राकृतिक वस्तु
- ब्लू पॉटरी (लोगो)- जयपुर
- कठपूतली (लोगो)- सम्पूर्ण राजस्थान
- कोटा डोरिया (लोगो)- कोटा
- मोलेला कला (लोगो)- नाथद्वारा
- मेहंदी-सोजत (पाली)
- पोकरन की पॉटरी- जैसलमेर
- बगरू प्रिंट-जयपुर




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