राजस्थान में ऊर्जा संसाधन
इस लेख में राजस्थान के ऊर्जा संसाधनों का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है, जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका है। इसमें राज्य के परंपरागत और गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों, जैसे तापीय विद्युत, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बायोमास परियोजनाओं की गहन जानकारी दी गई है। लेख में प्रमुख थर्मल पावर प्लांट (कोटा, सूरतगढ़, छबड़ा) और सौर पार्कों की विशेषताओं के साथ-साथ राज्य की ऊर्जा नीतियों और नोडल एजेंसियों पर भी चर्चा की गई है। RAS, RPSC, REET, और राजस्थान पुलिस जैसी परीक्षाओं के लिए यह लेख अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि इसमें नवीनतम डेटा और महत्वपूर्ण तथ्यों का समावेश किया गया है।
- ऊर्जा- अधिष्ठापित क्षमता (दिसम्बर, 2024 की स्थिति में) : 26,325.19 मेगावाट
राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड
दिनांक 19 जुलाई, 2000 को राज्य विद्युत मंडल के कार्यों को भारतीय कम्पनी अधिनियम, 1956 के तहत निम्नलिखित उत्पादन, प्रसारण एवं वितरण की तीन अलग-अलग कम्पनियों में विभाजन कर गठित किया गया-
जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड एवं जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड का गठन किया गया था।
ऊर्जा के मुख्य स्रोत
नोट- राज्य में सर्वाधिक विद्युत प्राप्ति तापीय ऊर्जा, पवन ऊर्जा तथा सौर ऊर्जा से होती है।
ऊर्जा प्राप्ति के मुख्यतः दो स्रोत माने जाते हैं-
1. परम्परागत ऊर्जा स्रोत
ऊर्जा के वे स्रोत जिनका एक बार उपयोग करने के बाद पुनः उपयोग नहीं ले सकते।
- (a) जल विद्युत
- (b) तापीय विद्युत- कोयला, खनिज, तेल, प्राकृतिक गैस
- (c) आण्विक विद्युत- इसके भण्डार सीमित होते हैं।
2. गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत/नव्यकरणीय स्रोत
ऊर्जा के वे स्रोत जिनका एक बार उपयोग करने के बाद पुनः उपयोग में ले सकते है।
इनके भण्डार असीमित होते हैं।
- (a) सौर ऊर्जा- सूर्य के प्रकाश से
- (b) पवन ऊर्जा- बहती हुई वायु से
- (c) बायोगैस ऊर्जा- अवशिष्ट पदार्थों के अपघटन से
- (d) बायोमास ऊर्जा- कचरा, धान की भूसी एवं सरसों की भूसी से
- (e) ज्वारीय तरंग ऊर्जा- समुद्री तरंगों से
- (f) भू-तापीय ऊर्जा- वह ऊर्जा जिसे पृथ्वी में संग्रहित ताप से निकाला जाता है।
राज्य में ऊर्जा के गैर परम्परागत स्रोत के लिए कार्यरत संस्थाएँ
राजस्थान में गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के विकास की प्रमुख एजेंसी
- राजस्थान ऊर्जा विकास अभिकरण (REDA)- स्थापना- 21 जनवरी, 1985 को
- राजस्थान स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RSPCL)- स्थापना- 1995 2002 में इस संस्था का विलय 'राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम' में कर दिया गया।
- राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम- RSPCL और REDA को मिलाकर अगस्त, 2002 में स्थापना की गई।
- राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम राज्य में गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों से ऊर्जा उत्पादन एवं ऊर्जा क्षमता को प्रोत्साहन देने के लिए भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की नोडल एजेन्सी है।
- प्रथम गैर-परम्परागत नीति- मार्च, 1999
- दूसरी गैर-परम्परागत नीति- अक्टूबर, 2004
- राजस्थान में ऊर्जा का प्रमुख स्रोत थर्मल पॉवर है।
- राजस्थान की एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति-2024
- उद्देश्य- 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य प्राप्त करना है।
राजस्थान में तापीय विद्युत परियोजना
तापीय विद्युत परियोजना
1. कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट - कोटा
स्थापना- 1978
उत्पादन शुरू- 1983
आधारित- कोयले पर (बिटुमिनस)
क्षमता- 1240 mw
इसमें कुल 7 इकाईयाँ हैं।
प्रथम थर्मल पावर प्लांट है।
दूसरा सुपर थर्मल पावर प्लांट है।
वर्ष 2000 से 2004 के चार वर्षों में भारत सरकार द्वारा गोल्ड शील्ड से पुरस्कृत
2. सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर प्लांट - सूरतगढ़ (ठुकराणा-गाँव) श्रीगंगानगर
स्थापना- मई 1998
उत्पादन शुरू- 1999
आधारित- तरल ईंधन पर, कोयला
क्षमता- 250 mw × 6 इकाईयाँ - 1500 mw
इसकी प्रथम इकाई का उत्पादन 1999 से शुरू
प्रथम सुपर थर्मल पावर प्लांट है।
इसे राजस्थान का आधुनिक विकास तीर्थ कहते है।
सूरतगढ़ सुपर क्रिटिकल तापीय विद्युतगृह (1320 mw)
क्षमता: 660 mw × 2 इकाईयाँ (7वीं व 8वीं)= 1320 mw
कुल उत्पादन- 2820 मेगावाट
कुल इकाईयाँ- 8
3. छबड़ा सुपर थर्मल पावर प्लांट - बाराँ
स्थापना- 8 दिसम्बर, 2005,
उत्पादन शुरू- 2010
आधारित- कोयले पर आधारित
क्षमता- 250 mw × 4 = 1000 mw
इसमें 4 इकाईयाँ है।
राजस्थान का तीसरा सुपर थर्मल पावर प्लांट
छबड़ा सुपर क्रिटिकल तापीय विद्युतगृह (1320 मेगावाट)
{क्षमता= 660 mw × 2 इकाईयाँ (5वीं व 6वीं) = 1320 mw
4. कालीसिंध सुपर थर्मल पावर प्लांट - झालावाड़
स्थापना- 2008
उत्पादन शुरू- 2013-14
आधारित- कोयला (मैसर्स डोंगफेंग चीन की सबक्रिटिकल पर)
क्षमता- 600 mw × 2 इकाईयाँ = 1200 mw
जलापूर्ति- कालीसिंध बांध
5. बाँसवाड़ा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट
बाँसवाड़ा - यहाँ प्रथम चरण में 660 mw × 2 = 1320 एवं दूसरे चरण में 500 mw की इकाई स्थापित की गई है।
6. दानपुर सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट, बाँसवाड़ा
1320 mw सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट के स्थान पर 1600 mw क्षमता के अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट की स्थापना की जायेगी।
7. राहूघाट विद्युत परियोजना-कास्केड चम्बल पन विद्युत परियोजना
राहूघाट परियोजना के अन्तर्गत चम्बल नदी पर करौली क्षेत्र में चार बाँध बनाने व उन पर स्थापित विद्युत गृहों से कुल 270 मेगावाट (सम्भावित) विद्युत उत्पादन, राजस्थान व मध्य प्रदेश की 50 : 50 भागीदारी के आधार पर प्रस्तावित।
अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड जैसलमेर
1. प्रथम हाईब्रिड प्लांट
क्षमता - 390 मेगावाट
शुरू - मई, 2022
2. दूसरा हाईब्रिड प्लांट
क्षमता - 600 मेगावाट
शुरू - सितम्बर, 2022
3. तीसरा हाईब्रिड प्लांट
क्षमता - 450 मेगावाट
शुरू - 5 दिसम्बर, 2022
ताप विद्युत गैस आधारित परियोजना
रामगढ़ गैस परियोजना - जैसलमेर
स्थापना - 1994
कुल क्षमता - 273.5 मेगावाट
यह राजस्थान की प्रथम गैस आधारित परियोजना है।
इसको पानी की आपूर्ति इंदिरा गाँधी नहर परियोजना (IGNP) से होती है।
अन्ता गैस विद्युत परियोजना - बाराँ
स्थापना - 1989
कुल क्षमता - 420 मेगावाट
इसमें राजस्थान का हिस्सा - 19.81%
कैशोरायपाटन गैस विद्युत परियोजना - बूंदी
निजी क्षेत्र में संचालित है।
झामर कोटड़ा गैस परियोजना - उदयपुर
स्थापना - 2001
औरैया गैस विद्युत परियोजना - उत्तर प्रदेश
राजस्थान को 9.2% प्रदान होता है।
धौलपुर कम्बाइन्ड, साइकिल पावर प्लांट - धौलपुर
- धौलपुर में 330 मेगावाट कम्बाइन्ड साइकिल गैस आधारित विद्युतगृह की तीनों इकाईयों में वाणिज्यिक उत्पादन दिनांक 01.03.2008 को प्रारम्भ किया गया।
- संचालित - गैस ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल)
नोट- देश की प्रथम भूमिगत गैस परियोजना - मेड़ता रोड़ (नागौर)
लिग्नाइट कोयले पर आधारित विद्युत परियोजना
राज्य सरकार
गिरल विद्युत परियोजना - थुंबली गांव, शिव तहसील, बाड़मेर
स्थापित - 2007
उत्पादन - 2011
राजस्थान की प्रथम लिग्नाइट परियोजना
क्षमता - 125 mw × 2 = 250 mw
सहयोग - जर्मनी
संयुक्त परियोजना
भादरेस विद्युत परियोजना - भादरेस बाड़मेर
उद्घाटन - 2007
क्षमता - 135 mw × 8 = 1080 mw
निजी परियोजना
गुढ़ा परियोजना - बीकानेर
उत्पादन - 125 mw
निजी क्षेत्र की प्रथम लिग्नाइट परियोजना
कपूरडी जालिपा विद्युत परियोजना - बाड़मेर
कपूरडी - 500 mw
जालिपा - 1000 mw
कवई परियोजना - बाराँ
क्षमता - 330 mw × 4 = 1320 mw
केन्द्र सरकार
बरसिंगसर परियोजना - बीकानेर
उद्घाटन - 5 जून 2010
क्षमता - 125 mw × 2 = 250 mw
नोट- गिरल लिग्नाइट पावर लिमिटेड (250 मेगावाट)
- परियोजना के लिए ईंधन की आपूर्ति गिरल खनन परियोजना से है जिससे निकलने वाली लिग्नाइट में सल्फर की मात्रा अधिक होने के कारण दोनों इकाइयों में तकनीकी रूप से विद्युत उत्पादन में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा जिससे उत्पादन क्षमता भी प्रभावित हुई तथा इकाई 1 से जुलाई, 2014 व इकाई 2 से जनवरी, 2016 से उत्पादन बंद है।
राज्य की आण्विक विद्युत परियोजना
1. राजस्थान परमाणु शक्तिगृह/रावतभाटा एटॉमिक पावर प्लांट- रावतभाटा (चित्तौड़गढ़)
क्षमता- 1180 MW
संचालन- नाभिकीय ऊर्जा निगम द्वारा (NPC)
सहयोग- राज्य का पहला परमाणु विद्युत गृह है। उत्पादन 1973 को प्रारम्भ हुआ।
आधारित- यूरेनियम-235
2. नरैरा परमाणु शक्ति गृह - उत्तरप्रदेश (नरैरा)
इसमें राजस्थान का हिस्सा - 9.2%
बाँसवाड़ा परमाणु विद्युत गृह - यह नापला (बाँसवाड़ा) माही नदी के किनारे स्थापित किया जाएगा।
सौर ऊर्जा नीति
सौर ऊर्जा उत्पादन
- दिसम्बर, 2024 तक सौर ऊर्जा क्षमता- 5482.66 मेगावाट
- सौर ऊर्जा में वार्षिक वृद्धि दर 20.57 प्रतिशत है।
- राजस्थान अधिकतम सौर विकिरण तीव्रता लगभग 6-7 किलोवाट घण्टे/वर्गमीटर/प्रतिदिन और अधिकतम सौर दिवस (एक वर्ष में 325 दिवस से अधिक) एवं कम औसत वर्षा के कारण सौर ऊर्जा में समृद्ध है। राजस्थान में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार के आंकलन के अनुसार 142 गीगावाट क्षमता सौर ऊर्जा से स्थापित की जा सकती है।
- राज्य सरकार द्वारा राजस्थान अक्षय ऊर्जा नीति, 2023 दिनांक 6 अक्टूबर, 2023 को एवं हाइड्रोजन नीति दिनांक 29 सितम्बर, 2023 को जारी की गई है।
- राज्य की प्रथम सौर ऊर्जा नीति - 19 अप्रैल, 2011
- राज्य की दूसरी सौर ऊर्जा नीति - 8 अक्टूबर, 2014
- राज्य की तीसरी सौर ऊर्जा नीति - 18 दिसम्बर, 2019
सोलर पार्क कार्यक्रम- भड़ला सोलर पार्क (जिला-फलौदी)- भड़ला (फलौदी) में 2245 मेगावाट क्षमता का सोलर पार्क चार चरणों (फेज) में विकसित किया गया है।
जिसका विवरण निम्नानुसार हैं-
- भड़ला सोलर पार्क में प्रथम फेज राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड द्वारा स्वयं के स्तर पर विकसित किया गया है तथा द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ फेज को नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार की सोलर पार्क योजना के अन्तर्गत विकसित किया गया है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार की सोलर पार्क योजना के अन्तर्गत अन्य निर्माणाधीन सोलर पार्कों का विवरण निम्नानुसार है-
प्रथम सौर ऊर्जा नीति - अप्रैल, 2011
- राजस्थान देश का प्रथम राज्य है जहाँ सौर ऊर्जा नीति को मंजूरी दी गई। राज्य का पूर्णतया सौर ऊर्जा गाँव- लुम्बासर (बीकानेर)
- राजस्थान की दूसरी सौर ऊर्जा नीति- 8 अक्टूबर, 2014
- राज्य का पहला सौर ऊर्जा पर आधारित फ्रिज- बालेसर (जोधपुर)
- राज्य में पहला खारे पानी को मीठे पानी में बदलने के लिए सौर ऊर्जा पर आधारित संयंत्र - भालेरी गाँव (चूरू)
- राज्य का पहला पूर्णतया सौर ऊर्जा से संचालित टी.वी. रिले केन्द्र रावतभाटा (चित्तौड़)
- राज्य का पहला सौलर ऊर्जा से विद्युत गाँव - नयागाँव (जयपुर)
- राज्य में सौर ऊर्जा से संचालित सबसे बड़ा वाटर हीटर (बिट्स) बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ पिलानी- झुंझुनूँ
- राज्य का पहला पूर्णतया सौर ऊर्जा से संचालित रेलवे स्टेशन - गौरमघाट (राजसमंद) - अजमेर मण्डल
- राज्य का पहला सौर ऊर्जा पर आधारित मिल्क चिलिंग प्लांट - भरतपुर
- राज्य का पहला सौर ऊर्जा पर आधारित विद्युत संयंत्र - मथानिया (जोधपुर)
- प्रथम कृषि आधारित सौर ऊर्जा संयंत्र का शुभारंभ राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के द्वारा भालोजी (कोटपूतली-बहरोड़) में किया गया।
- सौर ऊर्जा से संबंधित शोध एवं विकास के लिए सबसे बेहतर जिला-जैसलमेर, फलौदी, जोधपुर
पवन ऊर्जा
पवन ऊर्जा कार्यक्रम (पवन ऊर्जा)
राजस्थान में दिसम्बर, 2024 तक पवन तथा सौर ऊर्जा को मिलाकर कुल स्थापित क्षमता का 37.59% है।
पवन ऊर्जा में वार्षिक वृद्धि दर- 5.30%
भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ विण्ड एनर्जी (एनआईडब्ल्यूई) द्वारा किये गये अध्ययन के अनुसार राज्य में पवन ऊर्जा की 150 मीटर की ऊँचाई (धरातल स्तर से) पर अनुमानित क्षमता लगभग 284 गीगावाट है। राज्य में दिसम्बर, 2024 तक कुल 4414.12 मेगावाट क्षमता हो गई।
1. अमरसागर (जैसलमेर)
स्थापित- 10 अप्रैल, 1999
राजस्थान का प्रथम पवन संयंत्र
2. देवगढ़ (प्रतापगढ़)
स्थापना- 6 मार्च, 2000
दूसरा पवन ऊर्जा संयंत्र
3. बीठड़ी (फलौदी) राज्य का तीसरा पवन ऊर्जा संयंत्र
स्थापित- 15 अप्रैल, 2001
4. सोढ़ा बंधन (जैसलमेर)
स्थापना- 28 जून, 2004
राज्य का सबसे बड़ा पवन ऊर्जा संयंत्र - 25 मेगावाट
5. बड़ा बाग (जैसलमेर)
स्थापना- 2001
प्रथम निजी क्षेत्र में पवन संयंत्र
6. हर्ष पर्वत (सीकर)
दूसरा सर्वाधिक क्षमता- 12 मेगावाट
निजी क्षेत्र में स्थापित है।
7. पोहरा (जैसलमेर)
स्थापना- 28 मार्च, 2010
पवन ऊर्जा नीति- 18 जुलाई, 2012
- पवन ऊर्जा उत्पादन हेतु न्यूनतम 20 किमी./घंटे की गति से चलने वाली हवा की आवश्यकता होती है।
- राजस्थान में पहला पवन ऊर्जा संयंत्र अमर सागर 1999 (जैसलमेर) में राजस्थान स्टेट पावर कॉर्पोरेशन द्वारा निर्मित है, जहाँ 2 मेगावाट विद्युत का उत्पादन किया जाता है।
- स्थापित- 10 अप्रैल, 1999
- लोकार्पण- 21 अक्टूबर, 1999
- राज्य का सबसे बड़ा पवन ऊर्जा संयंत्र - सोडा बंधन (जैसलमेर) 25 मेगावाट
- दूसरा बड़ा संयंत्र- हर्ष पर्वत (सीकर) 12 मेगावाट
- नवीन राजस्थान पवन एवं हाइब्रिड ऊर्जा नीति-18 दिसम्बर, 2019
- जैसलमेर में हाइब्रिड विंड सोलर प्लांट स्थापित है।
बायोमास ऊर्जा
बायोमास संयंत्र निम्न हैं-
कोटा बायो गैस प्लांट-कोटा
उत्पादन शुरू- दिसम्बर, 2022
यह देश का सबसे बड़ा बायो गैस प्लांट है।
इसमें देवनारायण योजना के तहत् 1200 पशुपालक परिवार के 5 हजार सदस्य यहाँ प्रतिदिन एक लाख लीटर खाद बनाने की क्षमता है।
यह जैविक खाद फास्फेट रिच ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर बनाएगा।
इसके अलावा 17 आवश्यक तत्वों वाला जैविक तरल खाद का निर्माण भी होगा।
बायोमास ऊर्जा
- अक्षय ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों में बायोमास ऊर्जा भी एक स्वच्छ ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत है। राजस्थान राज्य में बायोमास ऊर्जा के महत्वपूर्ण स्रोत सरसों की तूड़ी व विलायती बबूल है। राज्य में मार्च, 2024 तक 128.45 मेगावाट क्षमता के 14 बायोमास संयंत्र स्थापित किये जा चुके हैं जिसमें से 28 मेगावाट क्षमता के 2 संयंत्र वर्ष 2012 से बन्द हैं। वर्तमान में कुल 105.40 मेगावाट क्षमता के 8 बायोमास संयंत्रों की स्थापना का कार्य प्रगति पर है। राजस्थान सरकार ने 29 सितम्बर, 2023 को बायोमास एवं वेस्ट टू ऐनर्जी नीति 2023 जारी की है।
- बायोमास नीति 26 फरवरी 2010 को घोषित इस नीति में राज्य में 300 मेगावाट से अधिक उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
- राज्य का पहला बायोमास आधारित संयंत्र - पदमपुर 7 मेगावाट (गंगानगर)
- हाड़ौती में पहला बायोमास संयंत्र - रंगपुर (कोटा)
- कचरे से बिजली बनाने का संयंत्र - जयपुर
- विलायती बबूल से बिजली बनाने का संयंत्र - नोला बाँस (अजमेर)
- राज्य में सबसे पहले अजमेर जिले में संपूर्ण ग्राम विद्युतीकृत हुए।
- राजस्थान में प्रथम सरसों की खल पर आधारित बिजलीघर - खेड़ली (अलवर)
राजस्थान की हिस्सेदारी परियोजनाएँ
1. ऊरी विद्युत परियोजना (जम्मू-कश्मीर)
राजस्थान-ऊरी प्रथम- 8.96%
ऊरी-द्वितीय 11.40%
2. सलाल विद्युत परियोजना (जम्मू-कश्मीर)
2.95%
3. दुहस्ती विद्युत परियोजना (जम्मू-कश्मीर)
10.88%
4. टनकपुर विद्युत परियोजना (उत्तराखण्ड)
राजस्थान का हिस्सा- 11.53%
5. टिहरी विद्युत परियोजना 7.5%
6. धौलीगंगा विद्युत परियोजना (उत्तराखण्ड)
राजस्थान का हिस्सा- 9.64%
7. पार्वती विद्युत परियोजना (हिमाचल प्रदेश)
राजस्था का हिस्सा- 10.91%
8. राहूघाट परियोजना (करौली)
राजस्थान (50%) तथा मध्यप्रदेश (50%) का हिस्सा
9. नाथपा-झाकरी परियोजना (हिमाचल प्रदेश)
राजस्थान का हिस्सा- 7.47%




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