राजस्थान का अपवाह तंत्र | Rajasthan ka apvah tantra

राजस्थान का अपवाह तंत्र

इस लेख में राजस्थान की नदियों और उनके अपवाह तंत्र (Drainage System) का विस्तृत विवरण दिया गया है। इसमें राज्य की नदियों को तीन श्रेणियों- आंतरिक प्रवाह, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बाँटकर उनकी उत्पत्ति, प्रवाह क्षेत्र, सहायक नदियों और उन पर बने प्रमुख बाँधों की महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई है।

राजस्थान के अपवाह तंत्र को तीन भागों में विभाजित किया गया है।

राजस्थान का अपवाह तंत्र
  1. अरब सागर का अपवाह तंत्र 17% जैसे- लूणी, साबरमती माही, प. बनास
  2. अंत: प्रवाह अपवाह तंत्र 60% जैसे- घग्घर, कांतली काँकनेय, मेन्था खारी, रूपनगढ़
  3. बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र 23% जैसे- चम्बल, बनास, गम्भीरी, पार्वती

नोट-
  1. देश में सर्वाधिक अंत: प्रवाही नदियाँ राजस्थान में हैं, क्योंकि राज्य में मरूस्थल का सर्वाधिक विस्तार है।
  2. देश के कुल सतही या नदी जल का राजस्थान में 1.16% भाग है।
  • राजस्थान में कुल Water Block - 249
  • डार्क जोन में ब्लॉक - 209
  • सुरक्षित जोन - 40

आंतरिक प्रवाह की नदियाँ

rajasthan-internal-drainage-rivers

घग्घर नदी

  • उद्गम - कालका/शिवालिक पहाड़ी (हिमालय प्रदेश) इसके किनारे बनवाली सभ्यता (हरियाणा) का विकास हुआ है।
  • उपनाम- दृषद्वती नदी/मृत/नट/सोतर नदी/ब्रह्मव्रत नदी
ghaggar-river
  • प्रवाह क्षेत्र - हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान।
राजस्थान में बहाव वाले जिले-
श्री गंगानगर और हनुमानगढ़।
  • इसके प्रवाह क्षेत्र को राजस्थान में नाली जबकि पाकिस्तान में हकरा कहते हैं।
  • इसके किनारे सभ्यता - कालीबंगा, रंगमहल और पीलीबंगा।
  • फसल - नाली प्रदेश में सर्वाधिक चावल की खेती की जाती है। इसलिए इसे Rice Belt कहते हैं।
  • घग्घर का मैदान 'बग्गी' के नाम से जाना जाता है।
  • यह आंतरिक प्रवाह की देश की सबसे लम्बी नदी।
  • कुल लम्बाई - 465 कि.मी.
  • राजस्थान में लम्बाई- 120 कि.मी.
  • हिसार (HR) में ओटू झील इसके किनारे स्थित है।
  • इसके किनारे भटनेर दुर्ग (हनुमानगढ़) स्थित है।
  • अनूपगढ़, हनुमानगढ़, सूरतगढ़, फोर्ट अब्बास इसके किनारे स्थित है।

काँतली नदी (मौसमी नदी)

kantli-river-rajasthan
  • उद्गम - खण्डेला (सीकर)
  • इस नदी के किनारे सीकर में गणेश्वर सभ्यता तथा खेतड़ी (झुंझुनूँ) में सुनारी की सभ्यता विकसित हुई है।
  • कुल लम्बाई - 100 कि.मी./134
  • इसके प्रवाह क्षेत्र को सीकर व झुंझुनूँ में तोरावाटी कहते है तथा यह नदी चूरू की सीमा पर विलुप्त हो जाती है।
  • यह राज्य की आंतरिक अपवाह तंत्र की पूर्णतः सबसे लम्बी नदी है।
  • यह नदी मुख्यतः सीकर तथा झुंझुनूँ में बहती है।

कांकनी/काकनेय/मसूरदी नदी

kakni-river-jaisalmer
  • उद्गम - कोठारी गाँव (जैसलमेर)
  • विलुप्त - मिट्ठा खाड़ी
  • बुझ झील का निर्माण करती है।
  • अंत: प्रवाह की सबसे छोटी नदी है, जो मार्ग परिवर्तन के लिए जानी जाती है।
  • कुल लम्बाई - 17 किमी. है।

रूपनगढ़ नदी

rupangarh-river-ajmer
  • उद्गम : किशनगढ़ की पहाड़ियाँ (अजमेर)
  • विलीन : सांभर झील (जयपुर)
  • यह सांभर झील में दक्षिण दिशा से मिलती है।
  • इस नदी के किनारे पर 'निम्बार्क संप्रदाय' सलेमाबाद, किशनगढ़ (अजमेर) की प्रधान पीठ स्थित है।
  • प्रवाह क्षेत्र - अजमेर, जयपुर

मेथा/मेंढा/ मंढ़ा नदी

mentha-river-sambhar
  • उद्गम - मनोहरथाना पहाड़ी (जयपुर)
  • विलीन - सांभर झील में।
  • इस नदी के किनारे 'लूणवा नामक' स्थान (डीडवाना-कुचामन) पर लूणवा के जैन मंदिर स्थित है।
  • यह सांभर झील में उत्तर दिशा से मिलती है।
  • प्रवाह क्षेत्र- जयपुर, डीडवाना-कुचामन

साबी नदी

sabi-river
  • उद्गम - सेवर की पहाड़ियाँ (कोटपूतली)
  • विलुप्त - गुरूग्राम (हरियाणा) नफजगढ़ झील, पटौदी गाँव।
  • इसके किनारे जोधपुरा सभ्यता (कोटपूतली) विकसित हुई जहाँ 'हाथीदांत' के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
  • यह नदी कोटपूतली, बहरोड़, मुण्डावर, बानसूर, तिजारा तथा किशनगढ़बास तहसीलों से बहती है।
  • प्रवाह क्षेत्र जिले- कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा

रूपारेल/लसावरी/वराह/लसवारी नदी

ruparel-river-bharatpur
  • उद्गम- उदयनाथ की पहाड़ियाँ, थानागाजी तहसील (अलवर)
  • संगम - मोती झील (भरतपुर)
  • इसके किनारे नौह सभ्यता (भरतपुर) विकसित हुई।
  • यह सीकरी बाँध (डीग) एवं मोती झील (भरतपुर) में जलापूर्ति करती है।
  • इसका उपनाम - रूपनारायण नदी
  • सीकरी बाँध (डीग) - इस बाँध के द्वारा नगर, कामा तथा डीग के बाँधों को भरा जाता है।
  • यह नदी अलवर, डीग तथा भरतपुर में बहती है।
  • मोती झील को भरतपुर की जीवन रेखा कहते हैं।

बाणगंगा नदी

  • उपनाम - अर्जुन की गंगा/ताला नदी/रुण्डित नदी।
  • उद्गम- बैराठ की पहाड़ियाँ, कोटपूतली-बहरोड़
  • बहाव क्षेत्र - कोटपूतली बहरोड़, जयपुर - दौसा- भरतपुर- उत्तरप्रदेश-फतेहाबाद- यमुना
  • इस नदी पर जमवारामगढ़ बाँध (जयपुर) एवं अजान बाँध (भरतपुर) निर्मित है।
  • इस नदी के द्वारा घना पक्षी उद्यान (भरतपुर) को पानी की आपूर्ति की जाती है।
वर्तमान समय में यमुना नदी के पूर्व की ओर खिसक जाने के कारण बाणगंगा भरतपुर की सीमा में ही समाप्त हो जाती है। जिसके कारण इसे 'रूण्डित नदी' कहा जाता है। यह अब आंतरिक प्रवाह की नदियों में शामिल की गई है।

काकुण्ड नदी (भरतपुर)

यह नदी बंध बारेठा बाँध (भरतपुर) का निर्माण करती है।

रोहिली नदी (जैसलमेर)


निमड़ा नदी (बाड़मेर)


अरब सागर की नदियाँ

arabian-sea-drainage-system-rajasthan

लूणी नदी (मारवाड़ की गंगा)

  • कुल लम्बाई - 495 कि.मी.
  • राजस्थान में कुल लम्बाई - 330 कि.मी.
  • उद्गम- नागपहाड़ (अजमेर)

उपनाम :
  • (i) साक्री/सागरमती (उद्गम स्थल से गोविन्दगढ़ तक )
  • (ii) रेहड/ नाहड़ा
  • (iii) अन्तः सलिला (यह नाम कालिदास के द्वारा दिया गया है।)
  • (iv) खारी और मीठी नदी।
सागरमती नदी एवं सरस्वती नदी दोनों आपस में गोविन्दगढ़ (पुष्कर) के निकट मिल जाने के बाद में लूणी नदी के नाम से जाना जाता है।
  • सरस्वती नदी के द्वारा पुष्कर झील को जल की आपूर्ति की जाती है।
  • बालोतरा इस नदी के दायें किनारे पर स्थित है।
  • इसके किनारे- गोविन्दगढ़ (अजमेर), बिलाड़ा (जोधपुर), बालोतरा, समदड़ी, तिलवाड़ा स्थित हैं।
  • तिलवाड़ा सभ्यता (बालोतरा) इसी नदी के किनारे विकसित हुई है।
  • जसवन्त सागर बाँध/पिचियाक बाँध (बिलाड़ा) निर्मित है।
लूणी नदी के बेसिन में निर्मित दलदली क्षेत्र में जो कृषि करते हैं सेवज कहलाता है।

luni-river-rajasthan

प्रवाह क्षेत्र- अजमेर, नागौर, ब्यावर, जोधपुर, बालोतरा, बाड़मेर, जालौर
  • बालोतरा के बाद इस नदी का जल खारा हो जाता है जिसका कारण टेथिस सागर के अवशेष है।
  • लूणी का बहाव क्षेत्र सांचौर में 'रेहड़/नेहड़' कहलाता है।

लूणी की सहायक नदियाँ
luni river tributaries

जोजड़ी नदी
  • उद्गम- पोडलू गाँव (नागौर)
  • विलीन- खेजड़ली खुर्द (जोधपुर) में लूणी से
  • यह लूणी की एकमात्र सहायक नदी है जो लूणी में दायीं ओर से मिलती है तथा इस नदी का उद्गम अरावली पर्वतमाला की पहाड़ियों से नहीं होता है।
  • किनारे- पिपाड़ सिटी (जोधपुर)
  • प्रवाह क्षेत्र - नागौर, जोधपुर

बाण्डी नदी
  • उद्गम- हेमावास (पाली)
  • विलीन- लखर थंब (जोधपुर) में लूणी से।
  • लखर थंब, पाली और जोधपुर की सीमा बनाता है।
  • इसकी सहायक नदी गुहिया है।
  • लूणी नदी में बायीं ओर से मिलने वाली प्रथम नदी है।
  • बहाव क्षेत्र - पाली, जोधपुर।
  • यह सबसे प्रदूषित नदी है। (Chemical River's)
  • इस नदी के किनारे महाराजा उम्मेद मिल्स लिमिटेड (पाली) स्थित है।
  • इस मिल में रंगाई छपाई उद्योग के कारण बाण्डी नदी का पानी प्रदूषित हो जाता है तथा यही पानी फिर लूणी नदी में चला जाता है। इस कारण लूणी नदी के जल के प्रदूषित होने का कारण भी रंगाई छपाई उद्योग है।

लीलड़ी नदी
  • उद्गम - पाली
  • संगम/विलीन - लूणी
  • प्रवाहित क्षेत्र - पाली, जोधपुर।

मीठड़ी नदी
  • उद्गम - अरावली पहाड़ी (पाली)
  • संगम/विलीन- पवाला गाँव (बालोतरा) में लूणी से मिल जाती है।
  • प्रवाह क्षेत्र- पाली, बालोतरा

सूकडी नदी
  • उद्गम- देसूरी (पाली)
  • इस नदी पर बाँकली बाँध (जालौर) निर्मित है।
  • समदड़ी गाँव (बालोतरा) और जालौर का जिला मुख्यालय इस नदी के तट पर स्थित है।
  • इसकी सहायक नदी मघाई नदी पर रणकपुर (पाली) के जैन मंदिर स्थित है।
  • विलीन : समदड़ी गाँव (बालोतरा)
  • संत पीपा का मंदिर स्थित है।
  • प्रवाह क्षेत्र- पाली, जालौर, बालोतरा

जवाई नदी
jawai-river-pali
  • उद्गम- गौरिया पहाड़ी, बाली (पाली)
  • विलीन- गुढ़ामालाणी (बाड़मेर) में लूणी से
  • लूनी नदी की सबसे लम्बी सहायक नदी है।
  • इस नदी के किनारे जवाई बाँध सुमेरपुर तहसील (पाली) में स्थित है जिसे मारवाड़ का अमृत सरोवर कहते हैं।
  • यह पश्चिमी राजस्थान का सबसे लम्बा बाँध है। इस बाँध में सेई परियोजना के द्वारा जल की आपूर्ति होती है यह परियोजना राजस्थान की प्रथम जल सुरंग है।
  • जवाई बाँध में जल आपूर्ति के लिए सेई बाँध डाउन स्ट्रीम तथा साबरमती नदी बाँध बनाया जा रहा है।
  • प्रवाह क्षेत्र- पाली, जालौर, बाड़मेर।

खारी नदी
  • उद्गम- शेरगाँव पहाड़ी (सिरोही)
  • विलीन/संगम- जालौर में सायला गाँव में जवाई नदी से।
  • प्रवाह क्षेत्र- सिरोही, जालौर

सागी नदी
  • उद्गम - जसवन्तपुरा पहाड़ी (जालौर)
  • विलीन/संगम - बाड़मेर में गाँवध स्थान में लूणी से
  • प्रवाह क्षेत्र - जालौर, बाड़मेर

मित्री नदी
  • यह नदी जालौर की पहाड़ियों से निकलकर बाडमेर में लूणी नदी में मिल जाती है।
  • प्रवाह क्षेत्र - जालौर, बाड़मेर
ट्रिक- लीलड़ी का जवाई जोजड़ी की सगाई में खारी सुकड़ी मिठाई लाया।

माही नदी
  • उद्गम- मेहन्द झील, विंध्याचल की पहाड़ियाँ, धार जिला (मध्यप्रदेश)
  • राजस्थान में प्रवेश- खांधू गाँव (बाँसवाड़ा)
  • किनारे- पीपलखूंट (प्रतापगढ़), बेणेश्वर (डूंगरपुर), गलियाकोट (डूंगरपुर)
  • माही बेसिन बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, उदयपुर, सलूम्बर तथा डूंगरपुर में विस्तारित है।
  • यह नदी दक्षिणी राजस्थान से प्रवेश करके दक्षिणी राजस्थान में प्रवाहित होते हुए गुजरात में प्रवेश करके खंभात की खाड़ी में विलिन हो जाती है।
  • यह नदी कर्क रेखा को दो बार काटती है तथा अंग्रेजी के ऊल्टे यू (U) आकार में प्रवाहित होती है।
  • छप्पन का मैदान प्रतापगढ़ तथा बाँसवाड़ा के मध्य है।
  • सुजलाम-सुफलाम परियोजना का संबंध माही नदी से है।
  • इसके उपनाम कांठल की गंगा/दक्षिणी राजस्थान की गंगा/आदिवासियों की गंगा है।
  • प्रतापगढ़ और बाँसवाड़ा में यह 'छप्पन के मैदान' का निर्माण करती है।
mahi-river-rajasthan

इस नदी के द्वारा नवाटापुरा गाँव, बेणेश्वर (डूंगरपुर) में त्रिवेणी संगम का निर्माण होता है जैसे- माही-सोम-जाखम त्रिवेणी संगम है।
बहाव क्षेत्र- धार जिला - रतलाम - मंदसौर (मध्यप्रदेश) - बाँसवाड़ा - प्रतापगढ़ - डूंगरपुर - पंचमहल - माहीसागर - गोधरा - वड़ोदरा - (भुज) आनंद - खंभात की खाड़ी।
सहायक नदियाँ- ऐराव, अन्नास, चाप, मोरेल, सोम, जाखम।

इस नदी पर निम्न बाँध निर्मित हैं-

1. माही बजाज सागर बाँध - बोरखेड़ा, बाँसवाड़ा
  • कुल विद्युत उत्पादन 140 MW होता है।
  • यह राजस्थान का सबसे लम्बा बाँध (3109 मीटर/3.1 किलोमीटर) है।
  • माही बजाज सागर परियोजना 1972-83 निर्मित हुई है।

2. कागदी पिक-अप बाँध (बाँसवाड़ा)

3. कडाना/कडाणा बाँध - माहीसागर, गुजरात
  • यह नदी कर्क रेखा को दो बार काटती है।
नोट- मकर रेखा को दो बार काटने वाली नदी- लिम्पापो नदी।
  • इस नदी के किनारे डूंगरपुर में गलियाकोट तथा बोहरा सम्प्रदाय की प्रधान पीठ स्थित है।

माही नदी की सहायक नदियाँ
mahi-river-tributaries

ऐराव/इरू नदी (प्रतापगढ़-बाँसवाड़ा)
  • प्रतापगढ़ से निकलकर सोमालिया (बाँसवाड़ा) में माही नदी में विलीन हो जाती है।
  • प्रवाहित क्षेत्र - प्रतापगढ़, बांसवाड़ा।

जाखम नदी
  • उद्गम- भंवरमाता की पहाड़ियाँ, छोटी सादड़ी (प्रतापगढ़)
  • बहाव क्षेत्र- प्रतापगढ़- सलूम्बर- डूंगरपुर।
  • यह नदी सीतामाता अभ्यारण्य से गुजरती है।
  • इस नदी के किनारे राजस्थान का सबसे ऊँचा बाँध जाखम बाँध निर्मित हैं। (ऊँचाई 81 मीटर)

सोम नदी
som-river-udaipur
  • उद्गम- ऋषभदेव, बीछामेड़ा की पहाड़ियाँ (उदयपुर)
  • यह नदी माही में नवाटापुरा (डूंगरपुर) गाँव में मिल जाती है।
  • इस नदी के किनारे सोम कागदी पिकअप बाँध परियोजना एवं सोम-कमला-अम्बा परियोजना (डूंगरपुर) निर्मित है।
  • प्रवाह क्षेत्र - उदयपुर, सलूम्बर, डूंगरपुर
  • सोम नदी की सहायक नदी कागदर नदी, जाखम, टीडी, सारणी है।

कागदर नदी-
  • उद्गम - उदयपुर
  • संगम - सलूम्बर (सोमनदी)
  • प्रवाह - उदयपुर, सलूम्बर

मोरेन
इस नदी का उद्गम डूंगरपुर की पहाड़ी से होता है तथा इस नदी का विलय गलियाकोट के नजदीक माही नदी में हो जाता है।

चाप (बाँसवाड़ा)
कालिंजरा (बाँसवाड़ा) से निकलकर माही नदी में विलीन।
प्रवाह क्षेत्र - बांसवाड़ा, डूंगरपुर।

अनास (मध्यप्रदेश-बाँसवाड़ा-डूंगरपुर)
इस नदी का उद्गम विन्ध्यांचल पर्वतमाला (मध्यप्रदेश) से होता है। यह नदी राजस्थान में मेलैडिखेड़ा (बाँसवाड़ा) में प्रवेश करती है।
इस नदी का विलय गलियाकोट के नजदीक माही नदी में हो जाता है।
इस नदी के किनारे अनास परियोजना (बाँसवाड़ा) स्थित है।

साबरमती नदी

  • उद्गम- गोगुंदा की पहाड़ियाँ, पादरला गाँव, झाडौल तह. (उदयपुर)
  • संगम - खंभात की खाड़ी।
  • कुल लंबाई- 416 किमी. (राजस्थान में कुल लंबाई 45 किमी.)
sabarmati-river-rajasthan
  • उदयपुर की झीलों में साबरमती नदी का जल प्रवाहित करने के लिए 'देवास सुरंग' (कुल लम्बाई 11.6 km) बनाई गई है। यह राजस्थान की सबसे लम्बी जल सुरंग है।

इसकी सहायक नदियाँ निम्न है-
वेतरक, सेई, हथमती, मेश्वा, माजम तथा वाकल है।
  • इस नदी के किनारे गाँधी नगर, अहमदाबाद तथा साबरमती आश्रम स्थित है।
  • इस नदी का उद्गम राजस्थान से होता है लेकिन यह नदी गुजरात की मुख्य नदी है।

पश्चिमी बनास

  • उद्गम- नया सानवाड़ा (सिरोही)
  • गुजरात में प्रवेश- साबरकांठा जिले से।
  • विलुप्त- कच्छ की खाड़ी। (लिटिल कच्छ रन)
  • राजस्थान का आबू शहर और गुजरात का दीसा/डीसा शहर इसी के तट पर स्थित है।
  • कुल लम्बाई 266 किमी., राजस्थान में लंबाई 50 किमी.।
  • सहायक नदी- सूकली नदी/सीपू नदी, गोहलन, कूकड़ी, बतरिया।
  • अपवाह क्षेत्र- सिरोही-गुजरात
west-banas-river-sirohi
नोट :-
नर्मदा नदी-
  • अरब सागर में गिरने वाली सबसे लंबी नदी।
  • लम्बाई- 1312 किलोमीटर।
  • सहायक नदियाँ- बरनेर, शेर, दूधी, शक्कर, तवा, हिरण, हथिनी।
  • नर्मदा नदी पर धुआँधार जलप्रपात निर्मित है तथा इस नदी के किनारे जबलपुर व औंकारेश्वर स्थित है।

नर्मदा सिंचाई परियोजना- यह परियोजना सरदार सरोवर बाँध परियोजना से निकाली गई है, यह परियोजना चार राज्यों की संयुक्त परियोजना है जो निम्न है-
  1. गुजरात
  2. मध्यप्रदेश
  3. राजस्थान
  4. महाराष्ट्र
narmada-canal-project-rajasthan
  • नर्मदा आंदोलन का संबंध बाबा आम्टे व 'अरूंधती राय' से है।
  • राजस्थान का हिस्सा- 0.50 MAF
  • नर्मदा नहर परियोजना से फव्वारा व बूँद-बूँद पद्धति से सिंचाई होती है।
  • नर्मदा नहर परियोजना की कुल लम्बाई 532 किलोमीटर है जिसमें से गुजरात में 485 किलोमीटर तथा राजस्थान में 74 किलोमीटर है।

ताप्ती नदी
  • अरब सागर में गिरने वाली दूसरी लम्बी नदी।
  • उद्गम- बैतूल (मध्यप्रदेश)
  • लम्बाई- 740 किलोमीटर
  • गुजरात का सूरत शहर इसी नदी के किनारे बसा हुआ है।

बंगाल की खाड़ी का अपवाह तंत्र

बंगाल की खाड़ी की राजस्थान से दूरी 2900 किलोमीटर है।
bay-bengal-drainage-system-rajasthan

चंबल नदी
  • उपनाम- चर्मण्वती, राज्य की कामधेनु, बारहमासी नदी, नित्यवाहिनी नदी, वाटरसफारी (कोटा) नदी।
  • प्रवाह क्षेत्र- चित्तौड़गढ़, कोटा, बूँदी, सवाईमाधोपुर, करौली, धौलपुर
  • राजस्थान और मध्यप्रदेश के साथ 252 किलोमीटर लम्बी अन्तर्राज्यीय सीमा बनाती है।
  • यह आध्यारोपित नदी का उदाहरण है।
  • कुल लम्बाई - 1051 किलोमीटर
  • राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी के अनुसार कुल लम्बाई- 965 km
  • इस नदी के अपवाह क्षेत्र को वृक्षाकार श्रेणी में रखा जाता है।
  • चम्बल नदी का सबसे गहरा स्थान 'केशोरायपाटन' में है।
  • यह नदी 3 राज्यों से गुजरती है- मध्यप्रदेश (320 km), राजस्थान (322 km), उत्तरप्रदेश (157 km)
  • चम्बल नदी कोटा तथा बूंदी के मध्य सीमा का निर्धारण करती है।
  • चम्बल के किनारे- रावतभाटा, कोटा, केशोरायपाटन
  • इस नदी पर 100 km के अन्तर्गत 3 बाँध निर्मित है जिस पर विद्युत उत्पादन भी होता है।

चम्बल रिवर फ्रंट-कोटा
नदी - चम्बल
शुंभकर - घडियाल
उद्घाटन - 12 सितम्बर, 2023

हैंगिंग ब्रिज - कोटा
नदी- चम्बल
उद्घाटन- 29 अगस्त, 2017 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा यह NH-27 पर निर्मित है।
राज्य का प्रथम हैंगिंग ब्रिज है।
मध्यप्रदेश में इसकी सहायक नदियाँ- शिप्रा, सीवान, रेतम

चम्बल नदी के उद्गम से निम्न बाँध निर्मित हैं-
  • गाँधी सागर बाँध- मध्यप्रदेश
  • राणा प्रताप सागर बाँध- चित्तौड़गढ़
  • जवाहर सागर बाँध- कोटा
  • कोटा बैराज बाँध- कोटा

चम्बल नदी की सहायक नदियाँ

1. छोटी कालीसिंध नदी
यह नदी मध्यप्रदेश से निकलकर झालावाड़ से प्रवाहित होते हुए चम्बल नदी में मिल जाती है।

2. कालीसिंध
  • उद्गम- बांकली गाँव, देवास (मध्यप्रदेश)
  • राजस्थान में प्रवेश- बिंदा गाँव (झालावाड़)
  • बहाव क्षेत्र- मध्यप्रदेश - झालावाड़ - बाराँ - कोटा- नोनेरा गाँव में चंबल में मिल जाती है।
  • नोनेरा/नवनेरा बाँध- ऐबरा गांव, दिगोद (कोटा)
  • यह बाँध राम सेतु लिंक परियोजना का भाग है
kalisindh-river-rajasthan

NOTE: नोनेरा गाँव (कोटा) - कपिल मुनि की तपस्यास्थली है।
  • सहायक नदियाँ- चन्द्रभागा, परवन, उजाड, चौली
  • गागरोण जलदुर्ग: (गागरोण, झालावाड़)
  • कालीसिंध और आहू नदी के संगम पर स्थित है।

आहू नदी
  • उद्गम- उद्गम सुनेर क्षेत्र मध्यप्रदेश से
  • राजस्थान में प्रवेश- नंदपुर, झालावाड़
  • गागरोन झालावाड़ के पास कालीसिंध में विलय हो जाती है।
  • प्रवाह क्षेत्र- झालावाड़
  • सहायक नदी- पिपलाज

परवन नदी
  • यह मालवा पठार से 'अजनार व घोड़ा-पछाड़' नामक दो संयुक्त धाराओं में प्रवाहित होती है।
  • राजस्थान में प्रवेश- खरीबोर (झालावाड़)
नोट- मनोहर थाना दुर्ग परवन और काली खोह नदी के संगम पर स्थित है।

शेरगढ़ अभयारण्य
  • यह परवन नदी (बाराँ) के किनारे स्थित है इस अभयारण्य को साँपों की शरणस्थली कहते है।
  • प्रवाह क्षेत्र- झालावाड़, बारा, कोटा

निमाज/नैवज नदी
  • उद्गम- राजगढ (मध्यप्रदेश)
  • झालावाड़ में आकर परवन में मिल जाती है।

पार्वती
  • उद्गम- सेहोर गाँव (मध्यप्रदेश)
  • राजस्थान में प्रवेश- करियाहट गाँव (बाराँ)
  • चम्बल में विलय- पलिया गाँव (सवाईमाधोपुर)
  • बहाव क्षेत्र- बाराँ, कोटा, सवाईमाधोपुर।
  • सहायक नदियाँ- अंधेरी, रेतडी, विलास, बैंथली

बाराँ का किशनगंज शहर इस नदी के किनारे स्थित हैं।

अंधेरी नदी
  • उद्गम- मध्यप्रदेश
  • संगम- अटरू के नजदीक पार्वती से

कुनू नदी
  • उद्गम - शिवपुरी (मध्यप्रदेश)
  • इस नदी का विलय करौली में चम्बल नदी से हो जाता है।
  • यह नदी मुसेड़ी गाँव (बाराँ) से प्रवेश करती है।
  • प्रवाह क्षेत्र- बाराँ, मध्यप्रदेश, करौली

सीप नदी
  • उद्गम - श्योपुर जिला (मध्यप्रदेश)
  • संगम - खण्डार तहसील (सवाई-माधोपुर) में चम्बल नदी से मिल जाती है।

गुजाली नदी
  • उद्गम- नीमच (मध्यप्रदेश)
  • संगम- चम्बल में (चित्तौड़गढ़)
  • राजस्थान में प्रवेश- दौलतपुरा गाँव (चित्तौड़गढ़)
  • प्रवाह क्षेत्र- मध्यप्रदेश, चित्तौड़गढ़

बामणी नदी (चित्तौड़गढ़)
इस नदी का उद्गम हरिपुरा गाँव (चित्तौड़गढ़) से होता है तथा इसका विलय भैंसरोड़गढ़ दुर्ग के निकट चम्बल नदी में हो जाता है।

ईज नदी
इस नदी का उद्गम भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़) के निकट से होता है तथा यह नदी डाबी वन (चित्तौड़गढ़) में चम्बल नदी से मिल जाती हैं।

कुराल नदी
इस नदी का उद्गम बिजौलिया पठार (भीलवाड़ा) से होता है तथा यह नदी बूँदी में चम्बल नदी में मिल जाती है।
प्रवाह क्षेत्र- भीलवाड़ा, बूँदी

मेज नदी
  • इस नदी पर बूंदी में राज्य का प्रथम सोलर लिफ्ट प्लांट बनाया गया जिसमें 522 सौर ऊर्जा प्लेटें लगाकर 167 किलोवाट के 2 सोलर प्लांट का निर्माण किया गया।
  • यह राज्य की प्रथम परियोजना जिसमें 25 हजार बीघा भूमि पर किसानों को निःशुल्क पानी उपलब्ध होगा तथा बिजली का उत्पादन भी किया जाएगा।
  • प्रवाह क्षेत्र- भीलवाड़ा, बूँदी
  • इस नदी का उद्गम बिजौलिया पठार (भीलवाड़ा) से होता है तथा यह नदी सीनपुर गाँव (बूँदी) में चम्बल नदी में मिल जाती है।

माँगली नदी
इस नदी का उद्गम बिजौलिया पठार से होता है तथा यह नदी बाईन्सखेड़ा (बूँदी) में मेज नदी से मिल जाती है।
इस नदी के द्वारा बूँदी जिले में भीमलत जलप्रपात का निर्माण किया जाता है।
प्रवाह क्षेत्र- भीलवाड़ा, बूँदी

घोड़ा पछाड़ नदी
उद्गम - बिजौलिया पठार (भीलवाड़ा)
संगम - सागवाड (बूँदी) में मांगली नदी से मिल जाती है।
प्रवाह क्षेत्र- भीलवाड़ा, बूँदी

पिपलाज नदी
इसका उद्गम पंचपहाड़ (झालावाड़) से होता है।

बनास नदी

  • उपनाम- वर्णाशा/वन की आशा/विशिष्ठी/विशिष्ठी
  • उद्गम- खमनौर की पहाड़ियाँ (राजसमंद) 
  • बहाव क्षेत्र- राजसमंद - चित्तौड़गढ़ - भीलवाड़ा - अजमेर - टोंक - सवाई माधोपुर (रामेश्वरम्)
  • राजस्थान में पूर्ण बहाव की दृष्टि से सबसे लंबी नदी।
  • कुल लम्बाई- 480 किलोमीटर
  • राज्य में इसका सर्वाधिक जल ग्रहण है।
  • यह सर्पिलाकार अपवाह तंत्र का उदाहरण है।
banas-river-rajasthan
  • बनास भू जल संरक्षण योजना- शुरुआत- 1999-2000 निम्न पाँच जिलों में संचालित- जयपुर, टोंक, अजमेर, भीलवाड़ा, सवाई माधोपुर।
  • बनास नदी के किनारे- नाथद्वारा, रेलमगरा, मातृकुडियां, बिसलपुर, टोंक।
यहा आध्यारोपित नदी का उदाहरण है।

निम्न परियोजना है-
  1. नंदसमद परियोजना राजसमंद
  2. बिसलपुर परियोजना देवली-टोंक
  3. ईशरदा परियोजना सवाईमाधोपुर

बनास नदी पर राजसमंद में बाघेरी का नाका परियोजना निर्मित है।

बनास नदी की सहायक नदियाँ
banas-river-tributaries

बेड़च
  • उद्गम- गोगुन्दा की पहाड़ियाँ (उदयपुर)
  • इस नदी को उद्गम स्थल पर 'आयड़' के नाम से जाना जाता है।
  • उदयसागर झील के पश्चात् 'बेड़च' के नाम से जाना जाता है।
  • घौसुण्डा बाँध- बेड़च नदी पर, अप्पावास गाँव (चित्तौड़गढ़) में निर्मित है।
  • यह नदी बीगोद में बनास नदी में विलय हो जाती है।
  • प्रवाह क्षेत्र- उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा।
  • कुल लम्बाई- 190 km
  • इसकी सहायक नदियाँ- वाकल/वागन, गुजरी, गंभीरी, औराई

वागन नदी
उद्गम- बड़ी सादड़ी (चित्तौड़गढ़)
संगम- बेड़च नदी

गुजरी नदी
उद्गम- कोटड़ी
संगम- बेड़च

गम्भीरी नदी
उद्गम- जावरा की पहाड़ियाँ (मध्यप्रदेश)
यह राजस्थान में चित्तौड़गढ़ के चटियावती नामक स्थान पर बेड़च में मिल जाती है।
चित्तौड़गढ़ दुर्ग गम्भीरी और बेड़च के संगम पर स्थित है।
चित्तौड़गढ़ दुर्ग मेसा के पठार पर स्थित है।
राजस्थान में प्रवेश निम्बाहेड़ा (चित्तौड़गढ़) से करती है।

मेनाल नदी
उद्गम- बिजौलिया पठार (भीलवाड़ा)
यह नदी मेनाल जलप्रपात (भीलवाड़ा) का निर्माण करती है।

कोठारी नदी
  • उद्गम- दिवेर की पहाड़ियाँ (राजसमंद)
  • बहाव क्षेत्र- राजसमंद-भीलवाड़ा
  • यह नदी नंदराय (भीलवाड़ा) में बनास में मिल जाती है।
  • इस नदी के किनारे बागोर की सभ्यता (भीलवाड़ा) विकसित हुई है।
  • यहाँ मध्य पाषाण काल के पशुपालन के प्राचीनतम अवशेष मिले है।
  • मेजा बाँध कोठारी नदी (भीलवाड़ा) पर बना हुआ है तथा इसके नजदीक 'ग्रीन माउण्ट पार्क' स्थित है।
  • प्रवाह क्षेत्र- राजसमंद - भीलवाड़ा

खारी नदी
उद्गम- बिजराल की पहाड़ियाँ (राजसमंद)
बहाव क्षेत्र- राजसमंद, भीलवाड़ा, ब्यावर, अजमेर, टोंक
इसका विलय बनास में हो जाता है।
यह ब्यावर तथा भीलवाड़ा जिले की सीमा का निर्धारण करती है।
इसके किनारे विजयनगर (ब्यावर) स्थित है।
इस नदी के किनारे देवनारायण भगवान का मंदिर (आंसीद) स्थित है।

डाई नदी
उद्गम- नसीराबाद की पहाड़ियाँ, अजमेर
बहाव क्षेत्र- अजमेर, टोंक
यह नदी राजमहल के पास बनास में विलय हो जाती है।
इस नदी पर लसाडिया बाँध (अजमेर) निर्मित है।

सहोदर/सोहदर नदी
उद्गम- अराय की पहाड़ियाँ (अजमेर)
टोरडी सागर बाँध (टोंक) इस नदी के किनारे स्थित है।
यह नदी टोंक में बनास से मिल जाती है।
प्रवाह क्षेत्र- अजमेर, टोंक

माशी नदी
  • उद्गम- सिलौरा की पहाड़ियाँ किशनगढ़, अजमेर
  • त्रिवणी संगम- (जोधपुरिया, टोंक) बनास + माशी + बांडी
  • प्रवाह क्षेत्र- अजमेर, जयपुर, टोंक

बांडी नदी
उद्गम- सामोद व आमलोद पहाड़ियाँ, जयपुर
जयपुर और टोंक में बहती हुई मांशी नदी में आकर मिलती है।

मोरेल नदी
उद्गम- चैनपुरा की पहाड़ियाँ, जयपुर
यह नदी जयपुर, दौसा, सवाई माधोपुर में बहती है तथा सवाई माधोपुर के खण्डार नामक स्थान पर बनास में मिल जाती है।
इस नदी पर मोरेल बाँध पीलू खेड़ा (सवाई माधोपुर) में स्थित है।

ढूंढ नदी
उद्गम- अचरोल, जयपुर
जयपुर- दौसा में बहती हुई मोरेल में मिलती है।

गंभीर नदी
  • उद्गम- सपोटरा गाँव, करौली
  • संगम- यमुना नदी
  • प्रवाह क्षेत्र- करौली, सवाईमाधोपुर, भरतपुर, धौलपुर, उत्तरप्रदेश
  • इसको उंटगन नदी कहते हैं।
  • किनारे- अजान बाँध (भरतपुर), श्री महावीर मंदिर (करौली)
  • राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश के मध्य सीमा का निर्धारण करती है।
  • इसकी 5 सहायक नदियाँ निम्न हैं- (1) अटा, (2) माची, (3) भैसावट, (4) भद्रावती, (5) बरखेड़ा
  • इन 5 नदियों पर राज्य का सबसे बड़ा मिट्टी से निर्मित पाँचना बाँध (करौली) है।

गंगा बेसिन
इसमें गंगा नदी की सहायक नदियाँ तथा उप सहायक नदियाँ आती हैं।
ganga-basin-rajasthan

अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य
संभाग का अपवाह तंत्र प्रकार में निम्न योगदान है-
  1. बीकानेर संभाग- आंतरिक अपवाह तंत्र का भाग है। जैसे- घग्घर नदी (आंतरिक अपवाह तंत्र का भाग है)
  2. जोधपुर संभाग- आंतरिक + अरब सागर अपवाह तंत्र का भाग है। जैसे- लूनी नदी (अरब सागर का भाग है), काकनेय नदी (आंतरिक अपवाह तंत्र का भाग है।)
  3. उदयपुर संभाग- अरब सागर + बंगाल की खाड़ी तंत्र का भाग है। जैसे- बनास नदी, तथा इसकी सहायक नदियाँ (बंगाल की खाड़ी का भाग है) सोम तथा जाखम नदी (अरब सागर अपवाह तंत्र का भाग है)
  4. कोटा संभाग- बंगाल की खाड़ी का भाग है। जैसे- चम्बल तथा इसकी सहायक नदियाँ है।
  5. भरतपुर संभाग- बंगाल की खाड़ी + आंतरिक अपवाह तंत्र का भाग है। जैसे- चम्बल नदी (बंगाल की खाड़ी का भाग है) तथा रूपारेल तथा काकुंड नदी आंतरिक अपवाह तंत्र का भाग है।
  6. जयपुर संभाग- आंतरिक + बंगाल की खाड़ी तंत्र का भाग है। जैसे- मोरेल नदी (बंगाल की खाड़ी का भाग) तथा मेंथा तथा साबी नदी (आंतरिक अपवाह तंत्र का भाग है।)
  7. अजमेर संभाग- तीनों अपवाह तंत्र का भाग है। जैसे- रूपनगढ़ नदी (आंतरिक प्रवाह का भाग), लूनी नदी (अरब सागर का भाग) तथा खारी, डाई नदी (बंगाल की खाड़ी का भाग है।)
  • बीकानेर, चूरू, फलौदी में नदियाँ नहीं हैं।
  • भारत के कुल सतही जल का राजस्थान में हिस्सा है- 1.04%
  • देश के कुल भूमिगत जल स्रोत का राज्य में हिस्सा- 3.50%

राजस्थान की मुख्य नदियों का राज्य में कुल जल-ग्रहण क्षेत्र का प्रतिशत निम्न है-
  • बनास नदी - 27.50%
  • लूनी नदी - 20.21%
  • चम्बल - 17.18%
  • माही - 9.46%
  • बाणगंगा एवं गंभीरी - 8.47%
  • पश्चिमी बनास - 1.77%
जल ग्रहण का अर्थ- एक नदी जो किसी क्षेत्र में जल बहाकर लाती है।
अपवाह श्रेणी- एक नदी एवं उसकी सहायक नदियों का अपवाह क्षेत्र अपवाह श्रेणी कहलाती है।

राजस्थान की मुख्य नदियों का कुल अपवाह क्षेत्र का योगदान निम्न है-
  • चम्बल नदी - 20.90%
  • लूनी नदी - 10.40%
  • माही नदी - 4.80%
  • साबरमती नदी - 1.00%
  • बनास नदी - 0.90%

राज्य में उपलब्ध जल की मात्रा के आधार पर अवरोही क्रम है-
(1) माही नदी, (2) चम्बल नदी, (3) बनास नदी, (4) लूनी नदी।

राजस्थान के प्रमुख जलप्रपात

जलप्रपात (Waterfall) स्थान (Location) नदी (River)
चूलिया भैंसरोड़गढ़ चंबल नदी
मेनाल मेनाल (भीलवाड़ा) मेनाल नदी
भीमलत भीमलत (बूंदी) मांगली
अरणा-जरणा जोधपुर -
दिर भरतपुर काकुण्ड नदी
दमोह धौलपुर बांडी
भीलबेरी पाली -

नदियों के किनारे विकसित प्रमुख सभ्यताएँ

नदी (River) सभ्यता (Civilization) जिला (District)
घग्घररंगमहल, कालीबंगा, पीलीबंगाहनुमानगढ़
बनासगिलुण्डराजसमंद
कोठारीबागौरभीलवाड़ा
बेड़चआहड़उदयपुर
बेड़चनगरीचित्तौड़गढ़
लूनीतिलवाड़ाबालोतरा
बेड़चबालाथलउदयपुर
बाणगंगाबैराठकोटपूतली-बहरोड़
साबीजोधपुराकोटपूतली-बहरोड़
कांतलीसुनारीझुंझुनूँ
कांतलीगणेश्वरसीकर
रूपारेलनौजभरतपुर

नदियों के किनारे स्थित प्रमुख नगर

नदी नगर
माहीगलियाकोट (डूंगरपुर), बेणेश्वर
बनासनाथद्वारा, राजसमंद, मातृकुण्डिया (चित्तौड़गढ़), टोंक
चम्बलकेशोरायपाटन (बूँदी), रावतभाटा (चित्तौड़गढ़), कोटा
लूनीबिलाड़ा (जोधपुर), तिलवाड़ा-नाकोड़ा-बालोतरा-समदड़ी (बालोतरा)
जोजड़ीपीपाड़ (जोधपुर)
सोमआसपुर-देवसोमनाथ (डूंगरपुर)
कोठारीभीलवाड़ा
बेड़चचित्तौड़गढ़, उदयपुर
गम्भीरीबयाना (भरतपुर)
बांडीपाली
रूपनगढ़सलेमाबाद (किशनगढ़)
जवाईसुमेरपुर (पाली)
खारीविजयनगर (ब्यावर), गुलाबपुरा तथा आसीन्द (भीलवाड़ा)
कांतलीगणेश्वर (सीकर)
कालीसिन्धझालावाड़
सूकड़ीसोजत (पाली)

राजस्थान में नदियों का जिलेवार विवरण

जिले का नाम नदियों के नाम
अजमेरसागरमती, सरस्वती, डाई, लूणी, रूपनगढ़, डाल या डेन/डाई, बनास नदी
अलवररूपारेल, काली, गौरी, चूहड़, सौता
उदयपुरबेड़च, वाकल, सोम, जाखम, साबरमती, मानसी, गोमती, सेई
कोटाचम्बल, काली सिंध, पार्वती, नेवाज, आलनिया, आहु, तकली, परवन, निवाज, अंधेरी
गंगानगरघग्घर
चित्तौड़गढ़बनास, बेड़च, बामणी, बागली, बागन, औराई, गम्भीरी, सीबना, गुंजली, गुजरी, वारदा
चूरूकोई नदी नहीं, पूर्व में कांतली सांखण ताल तक जाती थी
जयपुरबाणगंगा ताला, बाण्डी, ढूँढ, मोरेल, रतनगंगा, माशी, मेन्था, सखा, द्रव्यवती
जालौरजवाई, सूकड़ी, सागी, खारी
जैसलमेरलाठी, आंधना, धोगड़ी, काकनेय, धरूआ
जोधपुरलूनी, जोजरी, मीठड़ी, गुणाईमाता
झालावाड़काली सिंध, छोटी कालीसिन्ध, परवन, कालीखड़, छापी, उजाड़, क्यासरी, आहु, नेवाज, धार, रेवा, चंवली, पार्वती
झुंझुनूँकान्तली
टोंकबनास, मांसी, बाँडी, सोहदरा, डाई, ढील
डूंगरpurसोम, माही, सोनी, अनास, जाखम
नागौरलूनी, हरसौर, जोजड़ी
पालीलीलड़ी, बाण्डी, सूकड़ी, जवाई, गुहिया
बाड़मेरलूनी, जवाई
बाँसवाड़ामाही, अनास, चैनी, हरन, इरु, चाप
बीकानेरकोई नदी नहीं
बूँदीकुराल, चम्बल, मांगाल, मेज, घोड़ा पछाड़
भरतपुरवरहा, बाणगंगा, रुपारेल, काकुंड
भीलवाड़ाबनास, कोठारी, बेड़च, मेनाल, खारी, चन्द्रभागा
सवाई माधोपुरचम्बल, बनास, मोरेल, सीप, पार्वती
सिरोहीपश्चिमी बनास, सूकड़ी, पोसालिया, खाती, कृष्णावती, झूला, सिपु, कपालगंगा, ओरा
सीकरकान्तली, खण्डेला, पावटा, कांबत, मेंथा, कृष्णावती
धौलपुरचम्बल, मेंढ़का, सेरनी
दौसामोरेल, बाणगंगा
बाराँपार्वती, परवन, नेवाज, कुनू, कालीसिंध, कुकू
राजसमंदबनास, चन्द्रभागा, खारी, कोठारी
हनुमानगढ़घग्घर
करौलीचम्बल, भैंसावट, बरखेड़ा, माची, अटा, भद्रावती, गंभीर, मोरेल
प्रतापगढ़जाखम, माही, सोम
डीडवाना-कुचामनमेंथा नदी, खारी नदी
कोटपूतली-बहरोड़बाणगंगा, साबी नदी
खैरथल-तिजारासाबी नदी
डीगरूपारेल नदी
ब्यावरखारी नदी
बालोतरालूनी नदी, सुकडी नदी
सलूम्बरसोम नदी, जाखम नदी
फलौदीकोई नदी नहीं

Post a Comment

Post a Comment (0)

Previous Post Next Post
Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को RPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।