राजस्थान की झीलें
इस लेख में राजस्थान की प्रमुख झीलों का विस्तृत भौगोलिक और ऐतिहासिक विवरण दिया गया है। इसमें खारे और मीठे पानी की झीलों के निर्माण, उनसे जुड़ी मान्यताओं, प्रमुख पर्यटन स्थलों और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्यों का समावेश है।
राजस्थान की प्रमुख झीलें
- झीलों का अध्ययन ‘लिम्नोलॉजी’ कहलाता है।
- राजस्थान में सर्वाधिक झीलें- उदयपुर
- भारत में सर्वाधिक झीलें- श्रीनगर
- विश्व में सर्वाधिक झीलें- फिनलैण्ड
राज्य में निम्न दो प्रकार की झीलें हैं:-
- खारे पानी की झीलें
- मीठे पानी की झीलें।
खारे पानी की झीलें
- राजस्थान में सर्वाधिक खारे पानी की झीलें डीडवाना-कुचामन, नागौर में है।
- समुद्र की औसत लवणता- 35‰
सांभर झील (जयपुर)
- निर्माण- वासुदेव चौहान ने बिजौलिया शिलालेख के अनुसार।
- चौड़ाई- 3-12 किमी.
- लम्बाई- 32 किमी.
- भारत का 8.9% नमक का उत्पादन।
- प्राकृतिक रूप से विस्तार- डीडवाना-कुचामन, अजमेर, जयपुर
- इसमें रूपनगढ़, मेंथा, खारी तथा खण्डेला नदियाँ गिरती है।
- इस झील की स्थिति 27° व 29° उत्तरी अक्षांशों व 74° और 75° पूर्वी देशान्तरों के मध्य है। यह जयपुर-फुलेरा रेलमार्ग पर जयपुर से 65 किलोमीटर दूर पश्चिम में फुलेरा तहसील में स्थित है। इसकी ऊँचाई समुद्रतल से लगभग 367 मीटर है।
- क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है।
नोट- कैस्पियन सागर - विश्व की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है।
- शाकम्भरी माता/देवयानी माता- इसको तीर्थों की नानी भी कहते है। यह मंदिर सांभर झील में स्थित है।
- इसमें नालीसर मस्जिद भी स्थित है।
- इसमें नमक क्यार पद्धति द्वारा तैयार किया जाता है।
- इसमें स्पाइरूलीना नामक शैवाल पाया जाता है जिसमें 65% प्रोटीन होता है।
- इस झील को सबसे प्राचीन जल विभाजक पर स्थित माना जाता है।
- यह झील अकबर-जोधा की विवाह स्थली रहा है।
- पर्यटन विकास के लिए इसको 23 मार्च 1990 को 'रामसर साइट' में चयनित किया गया है।
- यहाँ संत दादू दयाल ने प्रथम उपदेश दिया तथा दादू पंथ की स्थापना की गई।
- यहाँ 1960 में हिन्दुस्तान साल्ट लिमिटेड एवं 1964 में सांभर साल्ट लिमिटेड की स्थापना की गई।
- लवणता को कम करने के लिए- 'स्वेडाफ्रुटी' व 'साल्वेडोर' नामक वनस्पति लगाई जाती है।
- यहाँ कुरजां पक्षी (खींचन गाँव) एवं राजहंस (गुजरात का राज्य पक्षी) पक्षी आते हैं।
विश्व की सबसे खारी झीलें -
(i) वॉन झील (तुर्की) 330‰
(ii) मृत सागर (जॉर्डन)- 238‰
(iii) ग्रेट सॉल्ट लेक (U.S.A.) - 220‰
विश्व में खारे सागर-
(i) लाल सागर- 34-41‰
(ii) फारस खाड़ी- 37-38‰
(iii) रूम सागर या भूमध्य सागर- 37-39‰
पंचपदरा झील (बालोतरा)
- निर्माण- पंचा भील ने करवाया।
- यह लगभग 25 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र पर विस्तृत है यह झील वर्षा जल के ऊपर निर्भर नहीं है बल्कि नियत वाही जल स्त्रोतों से इसे पर्याप्त खारा जल मिलता रहता है।
- 98% NaCl की मात्रा पायी जाती है जिसके कारण इस झील का नमक सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
- खारवाल जाति द्वारा 'वायु/रेस्ता पद्धति' द्वारा मोरली झाड़ी से नमक तैयार किया जाता है।
- यहाँ कुओं से नमक तैयार कोपिया पद्धति से किया जाता है।
- लवणता के आधार पर राजस्थान की सबसे खारी झील है।
डीडवाना झील (डीडवाना-कुचामन)
- यह 27°25' उत्तरी अक्षांश और 74°35' पूर्वी देशान्तर पर स्थित है। सोडियम क्लोराइड प्राप्त नहीं होता है।
- उपनाम- खाल्दा झील।
- नमक खाने योग्य नहीं है क्योंकि इसमें सोडियम सल्फाइड (NaS) पाया जाता है।
- यहाँ ब्राइन पद्धति द्वारा नमक तैयार किया जाता है।
- यहाँ नमक तैयार करने वाली स्थानीय संस्थाएँ देवल कहलाती है।
- इस झील के नमक से कागज भी तैयार किया जाता हैं।
- डीडवाना झील के किनारे राजस्थान का सबसे बड़ा सोडियम संयंत्र स्थापित किया गया है।
लूणकरणसर झील (बीकानेर)
इस झील से नमक बहुत ही कम बनाया जाता है।
कावोद झील (जैसलमेर)
इस झील में आयोडीन की दृष्टि से सर्वोत्तम नमक मिलता है।
बाप झील (फलोदी)
इस झील के किनारे राज्य का प्रथम कोयला संयंत्र स्थापित किया गया था।
नावा झील (डीडवाना-कुचामन)
भारत सरकार द्वारा आदर्श लवण पार्क स्थापित किया है।
इस झील में भी आयोडीन युक्त नमक मिलता है।
रेवासा (सीकर)
पोकरण झील (जैसलमेर)
फलौदी झील (फलौदी)
कोछोर झील (सीकर)
तालछापर झील (चूरू)
पीथमपुरी झील (सीकर)
मीठे पानी की झीलें
जयसमंद झील (सलूम्बर)
निर्माण- 1685-91 ई. में महाराणा जयसिंह ने करवाया।
- उपनाम- ढेबर झील/जलचरों की बस्ती
- राजस्थान की सबसे बड़ी कृत्रिम झील जिसका क्षेत्रफल- 55 km² है।
- नोट- भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झील- गोविन्द वल्लभ पंत सागर (हिमाचल) है।
- इसमें सात टापू बने हैं जिसमें सबसे बड़ा टापू बाबा का भागड़ा एवं सबसे छोटा टापू प्यारी है।
- इन टापुओं पर भील व मीणा जनजाति के लोग निवास करते हैं।
- इस झील में से वर्ष 1950 में दो नहरें निकाली गई है- (i) श्यामपुरा नहर, (ii) भाटखेड़ा नहर।
- इसमें 'बाबा का मगरा' नामक टापू पर 'आइसलैण्ड रिसॉर्ट होटल' बनी हैं।
- इस झील के किनारे रियासती काल में हिंसक पशुओं का शिकार देखने के लिए 'झरोखे' बनाये गए थे, इन झरोखों को 'औदिया' कहा जाता हैं।
- औदिया का शाब्दिक अर्थ 'अवलोकन स्तम्भ' होता है।
- इस झील में जलापूर्ति- गोमती नदी, झाबरी नदी, केलवा नदी से होती है।
इस झील की लम्बाई उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर लगभग 15 किलोमीटर है और इसकी चौड़ाई 2 से 8 किलोमीटर तक है। इन मुख्य नहरों की लम्बाई 324 किलोमीटर व वितरक नहरों की लम्बाई 125 किलोमीटर है इसका प्रबंध अब राज्य सरकार के सिंचाई विभाग के हाथों में है।
पिछोला झील (उदयपुर)
- निर्माण- 14 वीं सदी में राणा लाखा के समय छीतरमल चिड़ीमार नामक बंजारे ने बेड़च नदी के पानी को रोक कर करवाया।
- जीर्णोद्धार- राणा सांगा ने 1525 ई. में करवाया।
- यह झील राजमहल के पीछे बनी हुई है इसी कारण इसको 'पिछोला' झील कहते हैं।
- इसकी पाल का निर्माण 1559 ई. में राणा उदयसिंह द्वारा राजमहल की सुरक्षा के लिए कराया गया।
- यह उदयपुर की सबसे प्राचीन कृत्रिम झील एवं उदयपुर की सबसे सुन्दर झील है।
- इस झील में जग मंदिर एवं जग निवास स्थित है।
जग मंदिर
- निर्माण- 1620 ई. में कर्णसिंह ने।
- पूर्ण करवाया- 1651 ई. में जगत सिंह प्रथम ने।
- शहजादे खुर्रम (शाहजहाँ) को कर्णसिंह द्वारा गुजरात अभियान के तहत यहाँ शरण दी गई, इसी को देखकर ताजमहल के निर्माण की प्रेरणा मिली।
- 1857 की क्रांति के सैनिकों को 'स्वरूप सिंह' के समय यहाँ शरण दी गई।
जग निवास
- निर्माण- जगतसिंह द्वितीय ने 1746 ई. में करवाया।
- वर्तमान में इस महल में RTDC द्वारा हैरिटेज होटल बना दी गई है।
- इस झील में जगदीश मंदिर है जिसको सपनों का बना मंदिर भी कहते है।
- इसी झील के किनारे 'बीजारी' नामक स्थान पर 'गलकी' की स्मृति में 'नटनी का चबूतरा' बनाया गया है।
- महाराणा प्रताप व मानसिंह की मुलाकात इसी झील की पाल पर हुई।
- यहाँ बागोर की हवेली का निर्माण मेवाड़ के प्रधानमंत्री अमरचन्द बड़वा ने करवाया।
- यहाँ विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी रखी गई है।
फर्ग्यूसन ने यहाँ के महलों की तुलना लन्दन के विण्डसर महल से की है।
स्वरूपसागर झील (उदयपुर)
निर्माण- 1857 ई. में स्वरूप सिंह ने।
आकार- नहरनुमा।
यह झील पिछोला को फतेहसागर से जोड़ती हैं।
फतेहसागर झील (उदयपुर)
- उपनाम - देवाली तालाब, कनॉट बाँध
- निर्माण- 1688 ई. में महाराणा जयसिंह ने देवाली गाँव में करवाया।
- आधारशिला - ड्यूक ऑफ कनॉट के द्वारा रखी गई।
- पुनः निर्माण - 1898-1900 ई. फतेहसिंह द्वारा।
नोट- झीलों को जोड़ने का जनक - फतेहसिंह
- इस झील के सबसे बड़े टापू पर 'नेहरू उद्यान' स्थित है।
- दूसरे टापू पर 'सौर वैधशाला' अहमदाबाद की ओर से 1975 में स्थापित की गई जो भारत की प्रथम सौर वैधशाला है जिसको 1981 में भारतीय अंतरिक्ष विभाग से जोड़ा गया।
- इस वैधशाला में भारत की विशाल दूरबीन रखी गई है जिससे सूर्यग्रहण के समय सूर्य की विभिन्न कलाओं का अध्ययन किया जाता है।
- यहाँ मोती मगरी में 'प्रताप स्मारक' बना हुआ है।
उदयसागर झील (उदयपुर)
निर्माण- 1559 ई. में उदयसिंह के द्वारा।
- इस झील को जलापूर्ति आयड़ नदी के द्वारा की जाती है जिसके किनारे आहड़ सभ्यता विकसित हुई है तथा आयड़ नदी को उदयसागर झील के बाद में बेड़च नदी के नाम से जाना जाता है।
- इस झील के नजदीक मोती महल स्थित है।
नोट:- उदयपुर की सात बहिन झीलें निम्न हैं-
पिछोला, दूध थाली, गोवर्धन सागर, कुमारी तालाब, रंग सागर तालाब, स्वरूप सागर, फतेहसागर।
राजसमंद झील (राजसमंद)
- उपनाम- राजसमंद झील, नौ चौकी झील
- निर्माण- 1662-76 ई. में महाराणा राजसिंह ने गोमती नदी पर बाँध बनाकर कराया।
- इसका निर्माण अकाल राहत योजना के अंतर्गत कराया गया।
- यहाँ 25 शिलालेख पर 1917 श्लोक 'रणछोड़ भट्ट' द्वारा 'राज प्रशस्ति' के रूप में लिखे गए है जिसकी भाषा संस्कृत है।
- इस प्रशस्ति पर मेवाड़ का इतिहास वर्णित है जो 'अमरकाव्य वंशावली' पर आधारित है।
नोट-'राय प्रशस्ति' जूनागढ़ (बीकानेर) में लिखी गई हैं।
- राजप्रशस्ति में 'मीणा' जाति का भी उल्लेख किया गया है।
- यह राजस्थान की दूसरी बड़ी कृत्रिम झील है।
- राज्य सरकार ने इस झील को धार्मिक दृष्टि से पवित्र झील घोषित किया गया है।
नन्दसमन्द झील (राजसमंद)
इसे राजसमंद की जीवन रेखा कहते हैं।
पुष्कर झील (अजमेर)
यह काल्डेरा का प्रमुख उदाहरण है।
निर्माण-
(i) ब्रह्माजी के फूल द्वारा
(ii) पुष्करणा ब्राह्मणों द्वारा
उपनाम- हिन्दुओं का पाँचवां तीर्थ/तीर्थों का मामा/तीर्थ राज/कोंकण तीर्थ/52 घाट झील/अर्द्ध चन्द्राकार झील।
नोट- तीर्थों का भाँजा- मचकुण्ड (धौलपुर) को कहते हैं।
- इस झील की सफाई 1996-97 में 'कनाडा' के आर्थिक सहयोग से की गयी।
- विश्व का प्रथम यज्ञ इसी झील के किनारे हुआ।
- मेनका ने विश्वामित्र की तपस्या यहीं भंग की थी।
- यहीं कौरवों और पांडवों का दिव्यमिलन हुआ।
- भगवान राम ने अपने पिता दशरथ का पिण्ड-दान यहीं पर किया।
- कालिदास ने 'अभिज्ञान शाकुन्तलम्' की रचना इसी झील के किनारे की थी।
- 1705 ई. में गुरू गोविन्द सिंह साहब ने 'गुरू ग्रंथ साहिब' का पाठ यहीं किया।
- मीठे पानी की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील।
- इस झील में 52 घाट हैं जिनका निर्माण मण्डौर के प्रतिहार शासक ने 944 ईस्वी. में कराया था।
- ब्रह्मा मंदिर को 2006 में राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया।
नोट:- अन्य ब्रह्मा मंदिर निम्न हैं-
- (i) छींछ का ब्रह्मा मंदिर (बाँसवाड़ा)
- (ii) आसोतरा (बालोतरा)
कार्तिक पूर्णिमा को इस झील के किनारे विशाल रंगीला मेला भरता है।
52 घाटों में सबसे बड़ा व पवित्र घाट 'गौ घाट' है 1911 में 'मैडम मैरी' की यात्रा के बाद इसका नाम 'जनाना-घाट' कर दिया गया।
1948 में गाँधी जी की अस्थियों के विसर्जन के बाद इसका नाम 'गाँधी घाट' कर दिया।
इस झील को सर्वाधिक नुकसान 'औरंगजेब' ने पहुँचाया।
इस झील के किनारे 400 मंदिर हैं इसलिए इसे 'मंदिरों की नगरी' भी कहते हैं।
इस झील का पुनः निर्माण 1809 ई. में 'मराठा सरदारों' द्वारा कराया गया।
इसी झील के पास में 'भर्तृहरि की गुफा' व 'कण्व ऋषि' का आश्रम है।
आनासागर झील (अजमेर)
निर्माण- 1137 ई. में अर्णोराज ने तुर्कों के खून से रक्त रंजित भूमि को 'चन्द्रा नदी' के जल को रोककर करवाया।
- जलापूर्ति- लूणी और बाण्डी नदी से।
- जहाँगीर ने 'दौलत बाग' का निर्माण कराया। इसी उद्यान में अंग्रेज अधिकारी 'टॉमस रो' व 'जहाँगीर' की मुलाकात हुई।
- इसी उद्यान में गुलाबों के फूलों से नूरजहाँ की माँ 'अस्मत बेगम' ने इत्र का निर्माण किया।
- रूठी रानी का महल भी यहीं स्थित हैं।
- शाहजहाँ ने 1627 ई. में 5 बारहदरी का निर्माण कराया।
फॉयसागर (अजमेर)
निर्माण- 1891-92 ई. में इंजीनियर फॉय द्वारा।
इस झील को बनाने में ₹ 2 लाख 69 हजार का खर्चा आया।
उद्देश्य- अजमेर को बाण्डी नदी की बाढ़ से बचाने हेतु किया गया।
इस झील के भरने के पश्चात् अतिरिक्त जल आनासागर झील में चला जाता है।
अजमेर की अन्य झीलें- बीसलसर झील, जैन सागर झील, फूल सागर झील
कोलायत झील (बीकानेर)
- उपनाम- मारवाड़ का सुन्दर उद्यान/शुष्क मरूधर का सुन्दर उद्यान।
- यहाँ कपिल मुनि ने अपनी माता की मुक्ति के लिए पाताल गंगा को उत्पन्न किया।
- इस झील के किनारे कपिल मुनि का 'कार्तिक पूर्णिमा' (नवम्बर) को मेला लगता है, जो 'दीपदान' के लिए प्रसिद्ध है।
- इस झील में भी 52 घाट बने हैं।
नोट- पुष्कर झील में भी 52 घाट बने हैं तथा उसका भी दीपदान प्रसिद्ध हैं।
विशेष- चारण जाति के लोग इस झील में स्नान नहीं करते हैं। यह मूल रूप से प्राकृतिक झील है। कोलायत झील को रेगिस्तान का सुन्दर 'मरूद्यान' कहा जाता है। महर्षि कपिल मुनि ने अपनी माँ के स्नान हेतु पाताल गंगा को इसी भूमि से निकाली थी। महाराजा गंगा सिंह ने इसके किनारे पर पाँच मन्दिर का निर्माण करवाया। महाराजा गंगा सिंह के द्वारा निर्मित 12 शिवलिंग के रूप में शिव मन्दिर का निर्माण करवाया।
गजनेर झील (बीकानेर)
इसको 'पानी का शुद्ध दर्पण' कहते हैं।
कायलाना झील/प्रताप सागर झील (जोधपुर)
प्राकृतिक झील है जिसका आधुनिकीकरण 1872 ई. में 'सर प्रताप सिंह' ने करवाया।
इस झील के किनारे भारत का प्रथम मरू वनस्पति उद्यान 'माचिया सफारी पार्क' स्थित है।
यह जोधपुर की सबसे बड़ी झील है।
इस झील में जलापूर्ति IGNP की लिफ्ट नहर 'राजीव-गाँधी' द्वारा होती है।
बालसमन्द झील (जोधपुर)
निर्माण- 1159 ईस्वी में बालक राव प्रतिहार द्वारा बनवाया गया।
जलापूर्ति- गुलाब सागर बाँध द्वारा।
इस झील के किनारे 'गुलाब उद्यान' स्थित है।
यहाँ सूरसिंह ने इस झील के उत्तरी भाग पर 'बारहदरी' का निर्माण कराया।
सूरसिंह ने अपनी रानी की याद में 'जनाना बाग' व 'आठ खम्भों' का एक महल बनाया।
गढ़सीसर झील (जैसलमेर)
निर्माण- 1156 ई. में रावल जैसल भाटी ने करवाया।
उपनाम- मारवाड़ का जलमहल।
अमर सागर झील (जैसलमेर)
यहाँ पर राज्य का प्रथम पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया है।
बुझ झील (जैसलमेर)
जलापूर्ति- काकनेय/मसूरदी नदी।
जैतसागर झील (बूँदी)
सिलीसेढ़ झील (अलवर)
निर्माण- 1845 ई. में विनय सिंह ने।
उपनाम- राजस्थान का नन्दन कानन।
इसमें RTDC द्वारा नौकायन का संचालन किया जाता है।
यहाँ 80 खंभों की छतरी/मूसी महारानी की छतरी स्थित हैं।
थैला झील- अलवर
मोती झील (भरतपुर)
निर्माण- महाराजा सूरजमल ने रूपारेल नदी पर करवाया।
इसे भरतपुर की लाइफ लाइन कहा जाता है।
हरित शैवाल के द्वारा यहाँ से नाइट्रोजन युक्त खाद बनाई जाती है।
पन्ना लाल शाह तालाब (खेतड़ी, झुँझुनूँ)
निर्माण-1870 ई.
खेतड़ी के महाराज अजीत सिंह के आमंत्रण पर पधारे स्वामी विवेकानन्द को इसी तालाब में बने आवास में ठहराया गया।
नक्की झील (सिरोही)
- यह ज्वालामुखी द्वारा निर्मित क्रेटर झील है।
- राजस्थान की सबसे गहरी तथा समुद्र तल से सबसे ऊँची (1200 मी.) झील है।
- राजस्थान की एकमात्र झील जो सर्दियों में जम जाती है।
- धार्मिक मत- इस झील का निर्माण देवताओं ने अपने नाखूनों से किया था।
- ऐतिहासिक मत- इस झील का निर्माण-रसिया बालम नामक भील ने किया था।
- RTDC द्वारा नौकायन का संचालन भी किया जाता है।
- नक्की झील गरासिया जनजाति की धार्मिक आस्था का केन्द्र हैं।
- मंदिर- (i) रघुनाथ जी का प्राचीन मंदिर, (ii) भारत माता का मंदिर।
यहाँ 4 चट्टानें स्थित हैं -
(i) टॉड-रॉक- मेढ़क के समान
(ii) नन रॉक- महिला के समान
(iii) नंदी रॉक- बैल के समान
(iv) पैरेट रॉक- तोते के समान
यहाँ निम्न गुफाएँ हैं-
(i) राम झरोखा
(ii) आदि गुफा
(iii) चंबा गुफा
(iv) हाथी गुफा
यहाँ 'सनसेट प्वॉइंट' और 'हनीमून प्वॉइंट' स्थित है।
राज्य की एकमात्र हिल स्टेशन झील है।
गैब सागर (डूंगरपुर)
- निर्माण- महारावल गोपीनाथ
- उपनाम- एडवर्ड सागर बाँध
- इसके तट पर बादल महल स्थित है।
- कालीबाई स्मारक और विवेकानन्द स्मारक बना हुआ है।
बुड्ढा जोहड़ झील (श्रीगंगानगर)
जलापूर्ति- गंगनहर से
तालाबशाही झील (धौलपुर)
निर्माण- जहाँगीर ने
चौपड़ा झील (पाली)
संत मावजी ने 5 ग्रंथ लिखे जिन्हें 'चौपड़ा' कहा जाता हैं।
राज्य की अन्य महत्वपूर्ण झीलें
बूँदी- (i) किशोर सागर झील, (ii) फूलरानी झील, (iii) जैत सागर झील
- बाराँ- (i) सीताबाड़ी झील, (ii) रामगढ़ झील
- झालावाड़- (i) काडिला मानसरोवर झील, (ii) कृष्ण सागर झील
- चित्तौड़गढ़-(i) भोपाल सागर, (ii) मातृकुण्डिया झील- इसको राजस्थान का हरिद्वार कहते हैं।
भारत की प्रमुख 'झीलें'
- डल झील (जम्मू कश्मीर) - भारत की मीठे पानी की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील। इसमें से तुलबुल परियोजना संचालित है।
- लोकटक झील (मणिपुर) - इस झील के 70% भाग पर फुमण्डी घास पाई जाती है इस कारण इसमें भारत का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान केइबुललामजाओ स्थित है। पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील। यह झील मणिपुर की पहाड़ियों में स्थित है जहाँ सुन्दर हिरण संगाई मिलता है।
- चोलामु झील (सिक्किम)
- काबरा झील (बिहार)
- सुखना झील (चण्डीगढ़)
- सूरजताल झील (हिमाचल प्रदेश)
- चन्द्रताल झील (हिमाचल प्रदेश)
विश्व में झीलें
- टिटिकाका झील (पेरू एवं बोलिवीया की सीमा पर स्थित) यह सबसे ऊँची नौकायन झील है।
- मृत सागर- सबसे निम्न स्तर पर स्थित झील है।
- ग्रेट बियर झील (कनाडा)
- ग्रेट स्लेव झील (कनाडा)
- विनिपेग झील (कनाडा)
उत्तरी अमेरिका महाद्वीप की प्रमुख झीलें-
(i) सुपीरियर झील (ii) मिशीगन झील (iii) ह्यूरान झील (iv) ईरी झील (v) ओंटेरियो झील
विक्टोरिया झील
- यह झील युगाण्डा, केन्या और तंजानिया देश की सीमा पर स्थित है।
- यह विषुवत रेखा पर स्थित है।
- यहाँ से नील नदी का उद्गम होता है।
बैकाल झील (रूस)
यह सबसे गहरी व ताजे पानी की झील है, जिसकी गहराई- 1940 मी. है।
आयर झील (ऑस्ट्रेलिया)- यह ऑस्ट्रेलिया की सबसे गहरी झील है।




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