राजस्थान के मेले
इस लेख में राजस्थान के विभिन्न जिलों में आयोजित होने वाले प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक मेलों की विस्तृत जानकारी दी गई है। इसमें प्रत्येक क्षेत्र के विशेष त्योहारों, उनकी तिथियों और उनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के बारे में बताया गया है।
इस पठन से आपको राजस्थान की विविध लोक-संस्कृति, वहाँ के मुख्य मंदिरों, लोक-देवताओं और विभिन्न समुदायों द्वारा मनाए जाने वाले उत्सवों के बारे में जानने को मिलेगा। साथ ही, इसमें राज्य के प्रमुख पशु-मेलों और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध महोत्सवों का भी विवरण मौजूद है।
जब किसी धार्मिक स्थल, मंदिर, झील, नदी पर एक साथ बहुत से लोग धार्मिक दृष्टि से एकत्रित होकर पूजा-पाठ, ध्यान आदि करते है, तो उसे मेला कहते है।
- जयपुर साहित्य उत्सव - जयपुर
- हस्तशिल्प मेला - जयपुर
- पतंग महोत्सव - जैसलमेर व जयपुर
- मारवाड़ महोत्सव - जोधपुर
- थार महोत्सव - बाड़मेर
- मत्स्य महोत्सव - अलवर
- मरू महोत्सव - जैसलमेर
- मीरा महोत्सव - चितौड़गढ़
- शरद महोत्सव - माउंट आबू
- ग्रीष्म महोत्सव - माउंट आबू
- ऊँट महोत्सव - बीकानेर
- हाथी महोत्सव - जयपुर
- ब्रज महोत्सव - भरतपुर
( 1 ) अजमेर-(RJ-01)
पुष्कर का मेला- पुष्कर, अजमेर
यह मेला कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक भरता है। यह राजस्थान का सबसे बड़ा/सबसे रंगीन/रंग-बिरंगा/सर्वाधिक विदेशी पर्यटकों का आगमन वाला मेला है। इस मेले को मेरवाड़ा कुम्भ कहते है। यह अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मेला है। इस मेले में ऊँट बिक्री सर्वाधिक होती है। यह मेला दीपदान के लिए प्रसिद्ध है। 2007 ई. में इस मेले पर भारत सरकार ने 2 रु. का डाक टिकट जारी की।
कल्पवृक्ष मेला
मांगलियावास-श्रावण अमावस्या।
ख्वाजा साहब का उर्स
अजमेर- रज्जब माह की 1-6 तारीख पनाँव शाह पीर का उर्स-अढ़ाई दिन झोपड़े में।
(2) अलवर-(RJ-02)
नारायणी का मेला
बरवा डूँगरी, राजगढ़, अलवर वैशाख शुक्ल एकादशी
पांडुपोल मेला
पांडुपोल, अलवर- भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पंचमी को हनुमानजी का मेला भरता है।
भर्तृहरि मेला
सरिस्का- भाद्रपद शुक्ल अष्टमी। कालबेलिया नृत्य। यह कनफटे नाथों की तीर्थस्थली है।
धोलागढ़ देवी मेला
बहुतुकला (कठूमर, अलवर) - बैशाख शुक्ल एकम से पूर्णिमा
(3) बाँसवाड़ा-(RJ-03)
- मानगढ़ मेला- मानगढ़ धाम- शरद पूर्णिमा (मार्गशीर्ष पूर्णिमा)
- घोटिया अम्बा मेला- घोटिया धाम- चैत्र अमावस्या
- गोपेश्वर मेला- घाटोल- कार्तिक पूर्णिमा
- अंदेश्वर मेला- बाँसवाड़ा- कार्तिक पूर्णिमा
(4) बाड़मेर-(RJ-04)
- कलाजी मेला- गोपीनाथ गढ़- आश्विन नवरात्र के प्रथम रविवार
- सुईया मेला- चौहटन (बाड़मेर) में पौष अमावस्या को यह मेला भरता है। यह मेला चार वर्ष में एक बार भरता है। जिस कारण इसे अर्द्धकुम्भ कहा जाता है।
- कनाणा मेला - यह कनाणा (बाड़मेर) में प्रतिवर्ष शीतलाष्टमी के दिन भरता है। यहां मेले में गैर नृत्य किया जाता है।
- विरातरा मेला- चौहटन- माघ शुक्ल त्रयोदशी, भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी।
- थार समारोह - बाड़मेर- चैत्र शुक्ल षष्ठी
- कपालेश्वर महादेव मेला- चौहटन (बाड़मेर) - मरूस्थल का कुंभ
(5) भरतपुर-(RJ-05)
- गरूड़ मेला - कार्तिक शुक्ल तृतीया - बंशी पहाड़पुर (रूपवास, भरतपुर)
- जसवंत पशु मेला - आश्विन शुक्ल पंचमी से - भरतपुर पूर्णिमा
- बसंती पशु मेला - माघ अमावस्या से शुक्ल पंचमी - रूपवास (भरतपुर)
- हीरामन बाबा मेला - भाद्रपद व वैशाख शुक्ल चतुर्थी-नगला जहाज (वैर, भरतपुर)
- जगन्नाथजी मेला - यह मेला रूपवास भरतपुर में प्रतिवर्ष आश्विन शुक्ल अष्टमी से त्रयोदशी को भरता है। ओड़िशा की तरह यहां की रथ यात्रा प्रसिद्ध है।
(06) भीलवाड़ा-(RJ-06)
- तिलस्वा महादेव मेला - महाशिवरात्री (फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी- तिलस्वा, मांडलगढ़, भीलवाड़ा
- सवाई भोज मेला - भाद्रपद शुक्ल अष्टमी - आसींद, (भीलवाड़ा)
- फूलडोल मेला - चैत्र कृष्ण एकम से पंचमी - शाहपुरा (भीलवाड़ा)
- धनोप माता मेला - चैत्र शुक्ल एकम से दशमी- धनोप (शाहपुरा)
(07) बीकानेर-(RJ-07)
- चनणी चेरी मेला- फाल्गुन शुक्ल सप्तमी - देशनोक, बीकानेर
- कपिल मुनि मेला- कार्तिक पूर्णिमा - कोलायत, बीकानेर। कपिल मुनि सांख्य दर्शन के प्रणेता थे।
- करणी माता मेला- नवरात्रों में - देशनोक बीकानेर।
- जम्भेश्वर मेला- फाल्गुन व आश्विन अमावस्या-मुकाम, बीकानेर
(8) बूँदी-(RJ-08)
- बीजासण माता मेला- नवरात्र - इन्द्रगढ़, बूँदी
- कजली तीज मेला- भाद्रपद कृष्ण तृतीया - बूँदी
(9) चित्तौड़गढ़-(RJ-09)
- मीरा महोत्सव - शरद पूर्णिमा (आश्विन पूर्णिमा) - चित्तौड़गढ़
- मातृकुंडिया मेला- बैशाख पूर्णिमा - राशमी, चित्तौड़गढ़
- दशहरा मेला- आश्विन शुक्ल एकम से दशमी - निम्बाहेड़ा
- सांवलियाजी मेला- चैत्र शुक्ल दशमी - बड़ी सादड़ी
- जौहर मेला- चैत्र शुक्ल एकादशी - चित्तौड़गढ़ दुर्ग
(10) चूरू-(RJ-10)
- गोगाजी का मेला- भाद्रपद कृष्ण नवमी - ददरेवा
- श्याम पांडिया मेला- भाद्रपद अमावस्या - तारानगर, चूरू
- साहवा गुरूद्वारा मेला- कार्तिक पूर्णिमा - साहवा( तारानगर) यह राजस्थान में सिक्खों का सबसे बड़ा मेला है।
- सालासर - हनुमान जी मेला - चैत्र पूर्णिमा - सालासर( सुजानगढ़)। यहाँ बालाजी जी की एकमात्र दाढ़ी-मूँछ वाली मूर्ति है।
- इच्छापूर्ण बालाजी मंदिर मेला - सरदार शहर (चूरू)
(11) धौलपुर-(RJ-11)
- बाबू महाराज मेला- भाद्रपद शुक्ल एकादशी - सैंपऊ - धौलपुर
- महादेव मेला- फाल्गुन व श्रावण चतुर्दशी - सैंपऊ - धौलपुर
- तीर्थराज मेला- भाद्रपद शुक्ल षष्ठी - मचममुंड - धौलपुर
(12) डूँगरपुर-(RJ-12)
- नीलापानी मेला - कार्तिक पूर्णिमा - डूँगरपुर
- हड़मतिया मेला - कार्तिक पूर्णिमा - डूँगरपुर
- बीजवा माता मेला- चैत्र कृष्ण सप्तमी -रामदेवरा ( डूँगरपुर)
- वेणेश्वर मेला- माघ पूर्णिमा - नेवटपुरा। यह मेला सोम, माही, जाखम नदी के संगम पर भरता है। जिसे आदिवासियों का कुम्भ कहते हैं।
- गलियाकोट का उर्स- डूँगरपुर - यह राजस्थान में दाउदी बोहरा संप्रदाय का सबसे बड़ा उर्स है। यह उर्स मोहर्रम की 27 तारीख को भरता है।
(13) गंगानगर-(RJ-13)
- गणगौर मेला- चैत्र शुक्ल तृतीया - गंगानगर
- पंपाराम का मेला- फाल्गुन (7 दिन) - विजयनगर
- बुड्ढा जोहड़ मेला- श्रावण अमावस्या - रायसिंहनगर
(14) जयपुर-(RJ-14)
- तीज का मेला- श्रावण शुक्ल तृतीया- जयपुर
- गणगौर - चैत्र शुक्ल तृतीया - जयपुर
- संत दादू का मेला- आश्विन शुक्ल नवमी-नरायणा दूदू (जयपुर)
- शीतला माता मेला- चैत्र कृष्ण अष्टमी- चाकसू (जयपुर)
(15) जैसलमेर-(RJ-15)
- चुंघी तीर्थ मेला- भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी - जैसलमेर
- बाबा रामदेव मेला - भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी-रामदेवरा, रूणेचा।
- पर्यटन मरू मेला- माघ शुक्ल त्रयोदशी से पूर्णिमा-जैसलमेर
(16) जालौर -(RJ-16)
- शिवरात्रि मेला- फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी- जालौर
- आशापुरी माता मेला- चैत्र कृष्ण एकम- मोदरा (जालौर)
- शीतला माता मेला- चैत्र शुक्ल सप्तमी - जालौर
- सुंधा माता मेला- वैशाख व भाद्रपद त्रयोदशी से पूर्णिमा -दांतलावास
- सेवाड़िया मेला- चैत्र शुक्ल एकादशी- रानीवाड़ा, सांचौर
(17) झालावाड़ -(RJ-17)
- शिवरात्रि मेला- फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी- मनोहरथाना- भवानी मंडी
- बसंत पंचमी मेला- बसंत पंचमी
- नवरात्र मेला- चैत्र व आश्विन शुक्ल नवरात्र - चौमहला
- चंद्रभागा पशु मेला- कार्तिक पूर्णिमा- झालरापाटन
- गोमतीसागर पशु मेला- कार्तिक पूर्णिमा - झालरापाटन
(18) झुंझुनूं-(RJ-18)
- राणीसती मेला- भाद्रपद अमावस्या-झुंझुनूं। राजस्थान में सतीमाता का सबसे बड़ा मेला।
- रामदेवजी का मेला- भाद्रपद शुक्ल दशमी - नवलगढ़
- नरहड़ पीर का मेला- भाद्रपद कृष्ण अष्टमी- नरहड़
- मनसा माता मेला- चैत्र व आश्विन शुक्ल अष्टमी-उदयपुरवाटी
- शाकम्भरी माता मेला - नवरात्र- उदयपुरवाटी के पास
(19) जोधपुर-(RJ-19)
- रामदेवजी मेला- भाद्रपद शुक्ल द्वितीया-मसूरिया भाद्रपद शुक्ल द्वितीया के दिन रामदेवजी का जन्म हुआ था।
- चामुंडा माता मेला- चैत्र व आश्विन शुक्ल नवमी-मेहरानगढ़। चामुंडा माता गुर्जर प्रतिहारों की कुलदेवी व राठौड़ों की इष्टदेवी है।
- नागपंचमी मेला- भाद्रपद शुक्ल पंचमी-मंडोर (जोधपुर)
- वीरपुरी मेला- श्रावण के अन्तिम सोमवार-मंडौर (जोधपुर)
- धींगागवर बेंतमाह मेला- वैशाख शुक्ल तृतीया- जोधपुर
- खेजड़ली वृक्ष मेला- भाद्रपद शुक्ल दशमी-खेजड़ली (जोधपुर)। यह विश्व का एकमात्र वृक्ष मेला है।
(20) कोटा-(RJ-20)
- गेपरनाथ महादेव मेला- महाशिवरात्रि - रथकांकरा, कोटा
- दशहरा मेला- आश्विन शुक्ल दशमी - कोटा। इस मेले का प्रारम्भ 1895 ई. राव उम्मेदसिंह ने किया था।
(21) नागौर-(RJ-21)
राजस्थान में सर्वाधिक पशु मेले नागौर में भरते ।
- बलदेव पशु मेला- चैत्र कृष्ण एकम से पूर्णिमा- मेड़ता सिटी (नागौर)
- बाबा रामदेव पशु मेला - माघ शुक्ल एकम से माघ शुक्ल पूर्णिमा तक मानसर (नागौर)
- दधिमति माता मेला - चैत्र व आश्विन नवरात्र (शुक्ल अष्टमी) गोठ-मांगलोद (नागौर)
- तारकीन का उर्स- राज्य का दूसरा सबसे बड़ा उर्स है, जो काजी हमीदुद्दीन नागौरी की दरगाह पर नागौर में आयोजित होता है।
(22) पाली-(RJ-22)
- शीतला माता मेला- चैत्र कृष्ण अष्टमी - सोजत (पाली)
- परशुराम महादेव मेला - श्रावण शुक्ल षष्ठी-सप्तमी - देसुरी (पाली)
- गोरिया गणगौर मेला- शरद पूर्णिमा - गोरिया(बाली,पाली)
- दशहरा मेला- आश्विन शुक्ल दशमी - बाली (पाली)
- निंबो का नाथ मेला- वैशाख पूर्णिमा - फालना (बाली, पाली)
- वरकाना मेला- पौष शुक्ल दशमी - वरकाना (पाली)। यह मेला जैन धर्म का है।
- सोनाड़ा खेतलाजी का मेला- चैत्र शुक्ल एकम - सोनाड़ा, सारंगवास, पाली
- चोटिला पीर दुलेशाह का मेला- वैशाख शुक्ल सप्तमी कार्तिक कृष्ण एकम - हजरत पीर की मजार पर। रोहट (पाली)
(23) सीकर -(RJ-23)
- जीण माता मेला- नवरात्र - रेवासा (सीकर)
- खाटूश्यामजी मेला- फाल्गुन शुक्ल एकादशी व द्वादशी-खाटू (सीकर)
(24) सिरोही-(RJ-24)
- शीतला माता मेला- चैत्र कृष्ण सप्तमी - सिरोही
- गौर मेला- वैशाख शुक्ल चतुर्थी-सियावा
- मारकंडेश्वर मेला- भाद्रपद शुक्ल एकादशी व वैशाख पूर्णिमा- अंजारी गाँव
- गौतमजी का मेला- चैत्र शुक्ल त्रयोदशी-शिवगंज
- ऋषिकेश महादेव मेला- भाद्रपद शुक्ल एकादशी-उमरनी गाँव
- सारणेश्वर पशु मेला- भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से दशमी - सिरोही
- सारणेश्वर महादेव मेला- भाद्रपद शुक्ल द्वादशी - सारणेश्वर दुर्ग
(25) सवाई माधोपुर-(RJ-25)
- गणेशजी का मेला- भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी - रणथंभौर दुर्ग
- चौथ माता का मेला- माघ कृष्ण चतुर्थी- चौथ का बरवाड़ा। चौथ माता कंजर समाज की कुल देवी है।
- रामेश्वर घाट मेला- कार्तिक पूर्णिमा - त्रिवेणी रामेश्वर
- चमत्कारजी मेला- शरद पूर्णिमा - आलनपुर (स. माधोपुर)
- शिवरात्रि मेला- फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी - शिवाड़
(26) टोंक-(RJ-26)
- कल्याणजी का मेला- श्रावण अमावस्या, वैशाख पूर्णिमा - डिग्गी, टोंक- भाद्रपद शुक्ल एकादशी
(27) उदयपुर-(RJ-27)
- गणगौर मेला- चैत्र शुक्ल तृतीया-उदयपुर
- विक्रमादित्य मेला- चैत्र अमावस्या-उदयपुर
- ऋषभदेव मेला- चैत्र कृष्ण अष्टमी-नवमी-उदयपुर
- एकलिंगजी का मेला- फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी-कैलाशपुरी। एकलिंगजी गुहिल वंश के कुल देवता हैं।
(28) बाराँ-(RJ-28)
- फूलडोल मेला- भाद्रपद शुक्ल एकादशी-किशनगंज। यह राजस्थान का दूसरा फूलडोल मेला है। प्रथम फूलडोल मेला शाहपुरा (भीलवाड़ा) में भरता है।
- सीताबड़ी का मेला- ज्येष्ठ अमावस्या -सीताबड़ी (केलवाड़ा)। इसे सहरियों का कुम्भ कहा जाता है।
(29) दौसा-(RJ-29)
- बीजासणी का मेला- चैत्र पूर्णिमा - लालसोट
- गणगौर मेला- चैत्र शुक्ल तृतीया - लालसोट
- बसंत पंचमी मेला- माघ पंचमी मेला - दौसा
- श्रीरामपुरा मेला- भाद्रपद कृष्ण अष्टमी - बसवा
- मेहंदीपुर बालाजी मेला- चैत्र पूर्णिमा- मेहंदीपुर। यहां भूत प्रेतों का ईलाज होता है।
(30) राजसमंद-(RJ-30)
- जन्माष्टमी मेला- भाद्रपद कृष्ण अष्टमी - नाथद्वारा
- देवझूलनी मेला- भाद्रपद शुक्ल एकादशी- चारभुजा
- हल्दीघाटी मेला- 21 जून - हल्दीघाटी
- अन्नकूट मेला- कार्तिक शुक्ल एकम - नाथद्वारा
(31) हनुमानगढ़-(RJ-31)
- ब्रह्माणी माता मेला- नवरात्र - पल्लू (रावतसर)
- भद्रकाली मेला- नवरात्र- हनुमानगढ़
- गोगामेड़ी मेला- भाद्रपद कृष्ण नवमी- गोगामेड़ी (नोहर)
(32) करौली-(RJ-34)
- महावीरजी मेला- चैत्र शुक्ल त्रयोदशी से
- कैलादेवी मेला- चैत्र शुक्ल अष्टमी- करौली। यहां लक्खी मेला भरता है।
- शिवरात्रि पशु मेला- फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी - करौली
(33) प्रतापगढ़-(RJ-35)
- गौतमेश्वर मेला- वैशाख पूर्णिमा - अरनोद। गौतमेश्वर मीणाओं के आराध्य देव हैं।
(34) ब्यावर
- बादशाह मेला - ब्यावर - फाल्गुन पूर्णिमा।
- तेजाजी मेला- ब्यावर - भाद्रपद शुक्ल दशमी
- रामदेवजी मेला- भाद्रपद शुक्ल एकादशी - रायपुर (ब्यावर)
(35) तिजारा-खैरथल
- चंद्रप्रभु मेला- तिजारा, खैरथल। (फाल्गुन शुक्ल सप्तमी व श्रावण सप्तमी)
(36) कोटपूतली-बहरोड़
- बिलारी माता मेला- कोटपुतली बहरोड़- चैत्र कृष्ण अष्टमी
- चूहड़सिद्ध मेला- बानसूर, कोटपुतली- महाशिवरात्री (फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी)
- गिरधारीदास मेला - यह मेला बानसूर (कोटपूतली) में चैत्र शुक्ल द्वादशी को भरता है।
- बाणगंगा मेला- वैशाख पूर्णिमा- विराटनगर, (कोटपुतली)
(37) बालोतरा
- मल्लीनाथ पशु मेला- तिलवाड़ा- चैत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशी। यह राजस्थान का सबसे प्राचीन पशु मेला है।
- बसंत मेला - यह मेला सिणधारी (बालोतरा) में प्रतिवर्ष मार्गशीर्ष कृष्ण तृतीया को भरता है।
- नाकोड़ा मेला- नाकोड़ा- (बालोतरा) पौष कृष्ण दशमी
- खेड़ा मेला- बालोतरा- भाद्रपद शुक्ल अष्टमी-नवमी
- बजरंग पशु मेला - आश्विन शुक्ल द्वितीया से अष्टमी-बजरंग (सिणधारी, बालोतरा)
(38) डीग
- गंगा दशहरा मेला - ज्येष्ठ शुक्ल सप्तमी - कामां, डीग।
- ब्रज यात्रा मेला - माघ कृष्ण द्वादशी से माघ शुक्ल पंचमी- डीग।
- भोजन थाली मेला - भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा- कामां (डीग)
(39) डीडवाना-कुचामन
- तेजाजी पशु मेला- भाद्रपद शुक्ल दशमी से पूर्णिमा- परबतसर, (डीडवाना)। यह राजस्थान का आय की दृष्टि से सबसे बड़ा मेला है।

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