राजस्थान के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थान | Rajasthan ke sahityik evam sanskritik sansthan

राजस्थान के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थान

इस लेख में राजस्थान की प्रमुख साहित्यिक, सांस्कृतिक और अकादमिक संस्थाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है। इसमें राज्य की विभिन्न भाषाओं (हिन्दी, राजस्थानी, उर्दू, सिंधी, संस्कृत, ब्रज और पंजाबी) के विकास के लिए स्थापित अकादमियों, उनके स्थापना वर्ष, मुख्यालय और उनके द्वारा प्रकाशित पत्रिकाओं व दिए जाने वाले सर्वोच्च पुरस्कारों की जानकारी मिलेगी।
साथ ही, यह लेख राजस्थान के ऐतिहासिक अभिलेखागारों, संग्रहालयों, कला केंद्रों (जैसे जवाहर कला केंद्र) और लोक कलाओं के संरक्षण हेतु कार्य करने वाले संस्थानों (जैसे रूपायन संस्थान) की भूमिका को स्पष्ट करता है। पाठकों को राजस्थान की प्राचीन पांडुलिपियों, दुर्लभ ग्रंथों के संरक्षण और संगीत, नृत्य एवं चित्रकला को प्रोत्साहित करने वाले सरकारी व निजी प्रयासों को समझने में मदद मिलेगी।
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भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सांस्कृतिक धरोहर व संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए भारत में 7 सांस्कृतिक केन्द्र खोले हैं जिनमें पश्चिमी सांस्कृतिक केन्द्र उदयपुर में है।

राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर

राजस्थान में साहित्य की उन्नति और साहित्यिक चेतना के विकास व प्रसार के लिए 28 जनवरी, 1958 को राजस्थान साहित्य अकादमी की स्थापना की गई।
इस अकादमी की मासिक पत्रिका 'मधुमती' नाम से प्रकाशित की जाती है। राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा दिये जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार 'मीरा पुरस्कार' है।

राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, जयपुर

'राष्ट्रीय शिक्षा नीति-1968' के तहत हिन्दी भाषा में विश्वविद्यालय स्तरीय मानक पाठ्य पुस्तकों एवं संदर्भ ग्रंथों के निर्माण, प्रकाशन एवं हिन्दी भाषा के विकास के लिए 15 जुलाई, 1969 को राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी की स्थापना की गई।

मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी-फारसी शोध संस्थान, टोंक

  • टोंक के तीसरे नवाब मोहम्मद अली खाँ ने बनारस में अपनी नजरबंदी के दौरान 1867 ई. में अरबी और फारसी ग्रन्थों के संकलन का कार्य प्रारम्भ किया। उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र अब्दुल रहीम खाँ इन ग्रन्थों को टोंक ले आए।
  • 1978 में राज्य सरकार ने इस ऐतिहासिक एवं शैक्षिक सम्पदा के संरक्षण, प्रकाशन एवं अनुसन्धान के उद्देश्य से अरबी-फारसी शोध संस्थान की स्थापना की।
  • यहाँ संरक्षित ग्रन्थों में औरंगजेब की लिखी 'आलमगीरी कुरान' और शाहजहाँ द्वारा लिखवाई गई 'कुराने कमाल' दुर्लभ पुस्तकें हैं।

राजस्थान सिंधी अकादमी, जयपुर

राजस्थान सिंधी अकादमी की स्थापना 1979 में सिंधी साहित्य के विकास एवं प्रचार-प्रसार हेतु की गई थी। सिंधी भाषा की पुस्तकों का प्रकाशन, विद्वानों का सम्मान एवं साहित्यिक समारोहों का आयोजन अकादमी के प्रमुख ध्येय हैं। सिंधी अकादमी द्वारा 'रिहाण' पत्रिका का प्रकाशन किया जाता है।

राजस्थान उर्दू अकादमी, जयपुर

उर्दू भाषा एवं उर्दू साहित्य के विकास और उर्दू शिक्षण केन्द्रों का संचालन करने हेतु राजस्थान उर्दू अकादमी की स्थापना 1979 में की गई थी। नखलिस्तान नामक त्रैमासिक पत्रिका निकालती है।

राजस्थान संस्कृत अकादमी, जयपुर

संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं विकास और साहित्य के प्रकाशन हेतु 1981 में राजस्थान संस्कृत अकादमी की स्थापना की गई। अकादमी द्वारा 'माघ पुरस्कार' प्रदान किया जाता है। स्वर माला व स्वर मंगला पत्रिकाएँ हैं।

राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर

इस अकादमी का प्रमुख कार्य राजस्थानी भाषा व साहित्य का विकास और प्रकाशन है। 1983 में स्थापित इस संस्थान द्वारा 'जागती जोत' पत्रिका का प्रकाशन किया जाता है तथा 'सूर्यमल्ल मिश्रण पुरस्कार' प्रदान किया जाता है।

राजस्थान ब्रज भाषा अकादमी, जयपुर

ब्रजभाषा अकादमी की स्थापना 1986 में की गई थी। ब्रज भाषा का विकास व प्रचार-प्रसार और प्रकाशन अकादमी का प्रमुख कार्य है। अकादमी द्वारा 'ब्रज शतदल' पत्रिका का प्रकाशन किया जाता है।

राजस्थान पंजाबी भाषा अकादमी, श्रीगंगानगर

पंजाबी भाषा के संरक्षण व विकास के लिए 2006 में राजस्थान पंजाबी भाषा अकादमी की स्थापना की गई।

पुरातत्त्व एवं संग्रहालय विभाग, जयपुर

राजस्थान में पुरातत्त्व संग्रहालय विभाग का गठन 1950 में किया गया। यह विभाग राज्य की पुरासम्पदा तथा धरोहरों की खोज, सर्वेक्षण, संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार का कार्य करता है। राज्य में स्थापित विभिन्न संग्रहालयों का संचालन इसी विभाग द्वारा किया जाता है। विभाग 'द रिसर्चर' नाम से पत्रिका का भी प्रकाशन करता है।

राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर

लिखित रूप में उपलब्ध ऐतिहासिक सामग्री के संकलन एवं संरक्षण के उद्देश्य से 1955 में जयपुर में 'राजस्थान राज्य अभिलेखागार' की स्थापना की गई। 1960 में इसे बीकानेर स्थानान्तरित कर दिया गया।
राजस्थान राज्य अभिलेखागार का प्रधान केन्द्र बीकानेर में है तथा शाखाएँ जयपुर, कोटा, उदयपुर, अलवर, भरतपुर, जोधपुर एवं अजमेर में स्थित हैं।
पुरालेख स्रोतों का विशाल संग्रह इन अभिलेखागारों में सुरक्षित हैं, जो उर्दू, फारसी, अंग्रेजी, हिंदी, डिंगल, पिंगल, ढूँढाड़ी, मारवाड़ी, मेवाड़ी, गुजराती, मराठी एवं हाड़ौती आदि भाषाओं में हैं तथा राजस्थान के ऐतिहासिक, आर्थिक, प्रशासनिक, सामाजिक व धार्मिक अध्ययन की दृष्टि से उपयोगी एवं दुर्लभ हैं। राजस्थान राज्य अभिलेखागार देश का प्रथम अभिलेखागार है जिसने 26 दिसम्बर, 2013 को अभिलेखागार में स्थित सम्पूर्ण दस्तावेजों को ऑनलाइन (Online) कर दिया।

राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर

प्राचीन पाण्डुलिपियों और दुर्लभ ग्रन्थों के संरक्षण, शोध एवं प्रकाशन हेतु 1950 ई. में जयपुर में स्थापना की गई जिसे 1958 ई. में जोधपुर स्थानान्तरित कर दिया गया।
राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान का मुख्यालय जोधपुर में है, जबकि क्षेत्रीय आधार पर बीकानेर, कोटा, अलवर, जयपुर, उदयपुर और चित्तौड़ में प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान की शाखाएँ कार्यरत हैं।

राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर

राज्य में नाट्य, लोक नाट्य, शास्त्रीय गायन, वादन, नृत्य, लोक संगीत एवं लोक नृत्य आदि के संचालन तथा संगीत व नाट्य विधाओं के प्रोत्साहन हेतु 1957 में राजस्थान संगीत नाटक अकादमी की स्थापना की गई थी।
संगीत व नाटक की शिक्षा, प्रशिक्षण, शोध एवं कलाकारों व छात्रों हेतु छात्रवृत्तियों व आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी राजस्थान संगीत नाटक अकादमी द्वारा की जाती है।
यहाँ से 'रंगयोग' नामक पत्रिका निकलती है।

राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर

ललित कलाओं के संचालन, प्रदर्शनियों के आयोजन, कलाकारों के सम्मान व आर्थिक सहायता प्रदान करने हेतु 1957 में राजस्थान ललित कला अकादमी की स्थापना की गई।

राजस्थान संगीत संस्थान जयपुर

राज्य में संगीत शिक्षा की उन्नति हेतु 1950 में राजस्थान संगीत संस्थान की स्थापना की गई। 1980 तक यह संस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग से सम्बद्ध रहा, 1980 में इसे कॉलेज शिक्षा निदेशालय से सम्बद्ध कर दिया गया।

जवाहर कला केन्द्र, जयपुर

राजस्थान सरकार द्वारा जवाहर कला केन्द्र की स्थापना 1983 ई. में की गई। जवाहर कला केन्द्र का वास्तुकार चार्ल्स कोरिया थे। यह ईमारत 1991 में बनकर तैयार हुई। यह केन्द्र प्रतिवर्ष सांस्कृतिक कार्यक्रम, कला प्रोत्साहन एवं क्राफ्ट मेलों का आयोजन करता है। राजस्थान की प्राचीन और संकटापन्न कलाओं का संरक्षण, संवर्द्धन और प्रचार-प्रसार जवाहर कला केन्द्र के प्रमुख ध्येय है। जवाहर कला केन्द्र परिसर में शिल्पग्राम, प्रदर्शनी, पुस्तकालय व थियेटर आदि स्थापित हैं।

रवीन्द्र मंच, जयपुर

15 अगस्त, 1963 को स्थापित रवीन्द्र मंच विभिन्न सांस्कृतिक संस्थानों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन का प्रसिद्ध स्थान है।

जयपुर कथक केन्द्र, जयपुर

जयपुर कथक केन्द्र की स्थापना 1978 में हुई थी। राजस्थान के प्राचीन एवं शास्त्रीय कथक नृत्य शैली का विकास और कथक नृत्य का प्रशिक्षण देना जयपुर कथक केन्द्र का प्रमुख कार्य है।

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की स्थापना उदयपुर में 1986 में की गई है। इसके द्वारा राजस्थान के कलाकारों को मंच प्रदान कर कलाकारों को अपनी कला के प्रदर्शन के अवसर प्रदान किये जाते हैं। यह भारत सरकार द्वारा स्थापित सात सांस्कृतिक केन्द्रों में से एक है। यह केन्द्र राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, दमन-दीव का है।

महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र, जोधपुर

इसकी स्थापना जोधपुर महाराजा मानसिंह ने 2 जनवरी, 1805 ई. को मेहरानगढ़ दुर्ग में की थी। इस शोध केन्द्र में सैकड़ों पुस्तकों और पाण्डुलिपियों का संग्रह है, जो इतिहास, संस्कृति की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य उपलब्ध सामग्री का अनुसंधान करना है।

अनूप लाइब्रेरी, बीकानेर

बीकानेर महाराजा अनूपसिंह द्वारा स्थापित अनूप लाइब्रेरी में

पोथीखाना, जयपुर

पोथीखाना लाइब्रेरी के नाम से 1952 ई. महाराजा मानसिंह द्वितीय ने स्थापना जयपुर में की थी। यहां अरबी, फारसी व राजस्थानी भाषा के अनेक ग्रंथों का संग्रह है।

आचार्य रामचरण प्राच्य विद्यापीठ संग्रहालय, जयपुर

इस संग्रहालय की स्थापना जयपुर में 1960 ई. में की गई। यहां जयपुर का प्राचीनतम अखबार रखा है। यहां तंत्र-मंत्र व जड़ी-बूटियों की जानकारी देने वाले ग्रंथ रखे है।

रूपायन संस्थान

इस संस्थान की स्थापना 1960 ई. में कोमल कोठारी ने बोरूंदा (जोधपुर) में की थी। यह संस्था पश्चिमी राजस्थान की लोक कला व लोक कलाकारों में बढ़ावा देने का कार्य करती है इस ने घुड़ला नृत्य को संरक्षण दिया था। इस संस्था से लोक संस्कृति व मरूचक्र नामक पत्रिकाएं निकलती है।

राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स एण्ड क्राफ्ट्स-जयपुर

जयपुर शासक सवाई मानसिंह द्वितीय ने 1857 ई. में जयपुर में मदरसा-ए-हुनरी की स्थापना की। 1865 ई. में इसका नाम महाराजा स्कूल ऑफ आर्ट्स एण्ड क्राफ्ट रखा गया जो आगे चलकर राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स एण्ड क्राफ्ट्स हो गया।

राजस्थानी ज्ञानपीठ संस्थान, बीकानेर

इस संस्थान द्वारा 'राजस्थानी गंगा' पत्रिका निकलती है।

राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी (जोधपुर)

  • स्थापना - 1955 ई.
  • पत्रिका - परम्परा

राजस्थानी प्रचारिणी सभा, जयपुर


जगदीश सिंह गहलोत शोध संस्थान- जोधपुर

स्थापना - 1975 ई.

राजस्थानी भाषा बाल साहित्य प्रकाशन, लक्ष्मणगढ़ (सीकर)

पत्रिका - पणहारी

अम्बेडकर पीठ, मूण्डला (जयपुर)

स्थापना - 14 अप्रैल, 2007 ई.
पदेन अध्यक्ष - मुख्यमंत्री

राजस्थानी प्रचारिणी सभा, जयपुर

पत्रिका - मरूवाणी

पं. झाबरमल शर्मा शोध संस्थान, जयपुर

स्थापना - 2000 ई.

भारतीय जलोक कला मण्डल, उदयपुर

स्थापना - 1952 ई.
संस्थापक - देवीलाल सामर
उद्देश्य - लोक कलाओं व कठपुतली नृत्य का संरक्षण।

गुरूनानक संस्थान, जयपुर

कला-संस्कृति के संरक्षण हेतु स्थापित।

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