राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय
यह लेख राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को संजोने वाले प्रमुख संग्रहालयों का एक विस्तृत संकलन है। इसमें राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित सरकारी और निजी संग्रहालयों की स्थापना, उनके इतिहास और वहां प्रदर्शित दुर्लभ वस्तुओं की जानकारी दी गई है।
इस लेख को पढ़ने के बाद आपको निम्नलिखित विषयों के बारे में जानने को मिलेगा:
- ऐतिहासिक धरोहर: राजस्थान के राजघरानों के अस्त्र-शस्त्र, शाही पोशाकें, प्राचीन सिक्के और दुर्लभ पांडुलिपियों का परिचय।
- स्थापत्य और कला: संग्रहालयों की निर्माण शैली (जैसे राजपूत, मुगल और फारसी) और उनमें संरक्षित विश्व प्रसिद्ध कलाकृतियों (जैसे इजिप्ट की ममी और ईरानी गलीचे) की जानकारी।
- क्षेत्रीय विविधता: मारवाड़, मेवाड़, हाड़ौती और शेखावाटी क्षेत्र की विशिष्ट लोक कलाओं, जनजातीय संस्कृति और पुरातात्विक खुदाई (जैसे कालीबंगा) से प्राप्त अवशेषों का विवरण।
- विशेष संग्रहालय: गुड़ियों, लोक वाद्यों, तकनीकी विकास और युद्ध इतिहास (वॉर म्यूजियम) को समर्पित विशिष्ट संग्रहालयों की झलक।
केन्द्रीय संग्रहालय (अल्बर्ट हॉल म्यूजियम), जयपुर
भारतीय और फारसी शैली में निर्मित 'अल्बर्ट हॉल' का शिलान्यास महाराजा सवाई रामसिंह द्वितीय के समय प्रिंस अल्बर्ट ने 1876 ई. में किया था। उद्घाटन-1887 ई. एडवर्ड बेडफोर्ड
स्वतन्त्रता के पश्चात् इसे राज्य स्तरीय केन्द्रीय संग्रहालय का रूप दिया गया। इसमें मुख्यतः कला व औद्योगिक सामग्रियों का संग्रह हैं। गलीचों का भी प्रदर्शन किया गया है, जिनमें एक गलीचा ईरान का है जिसे ईरान के शाह ने 1640 ई. में मिर्जा राजा जयसिंह को भेंट किया था।
विभिन्न शैलियों के चित्र, उत्कृष्ट मूर्तियाँ, विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र और इजिप्ट की एक ममी इस संग्रहालय के प्रमुख आकर्षण हैं।
यह राजस्थान का सबसे बड़ा व सबसे प्राचीन संग्रहालय है।
सिटी पैलेस संग्रहालय, जयपुर
- इसे सवाई मानसिंह संग्रहालय भी कहा जाता है।
- स्थापना - 1959
- जयपुर के सिटी पैलेस स्थित संग्रहालय में राजस्थानी पोशाकों, पगड़ियों, मीनाकारी की वस्तुओं, आभूषणों व हस्तलिखित पाण्डुलिपियों का नायाब संग्रह हैं।
- राजपूत-मुगल काल के विभिन्न अस्त्र-शस्त्रों के अतिरिक्त सुन्दर और तराशी हुई मूँठ वाली तलवारें, मीनाकारी व जवाहरातों से अलंकृत म्यानों वाली तलवारें इस संग्रहालय की प्रमुख धरोहर हैं।
राजपूताना संग्रहालय, अजमेर
अजमेर में राजकीय संग्रहालय की स्थापना 'राजपूताना म्यूजियम' नाम से 'मैगजीन' नाम से प्रसिद्ध अकबर के किले में 1908 में हुई थी।
इस संग्रहालय में प्राचीन प्रतिमाएँ, मृण्मय प्रतिमाएँ, शिलालेख, सिक्के, ताम्र-पत्र, लघुरंगचित्र, उत्खनन में प्राप्त सामग्री, राजपूतकालीन वेशभूषाएँ, धातु प्रतिमाएँ एवं कला-उद्योग से संबंधित सामग्री संग्रहीत हैं।
राजकीय संग्रहालय, उदयपुर/विक्टोरिया हॉल म्यूजियम
महाराणा फतेहसिंह द्वारा ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया की पचास वर्षीय जुबली के अवसर पर 1887 में निर्मित विक्टोरिया हॉल में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड लेंसडाउन ने 1890 ई. में विक्टोरिया म्यूजियम का उद्घाटन किया। इस म्यूजियम का प्रथम क्यूरेटर प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा को नियुक्त किया गया था।
1968 में इस संग्रहालय को कर्णविलास महल में स्थानान्तरित कर इसका नाम 'प्रताप संग्रहालय' कर दिया गया। संग्रहालय में प्राचीन शिलालेख, फारसी शिलालेख, मेवाड़ क्षेत्र की विभिन्न कलात्मक प्रतिमाएँ और अनेक लघुचित्र प्रमुख रूप से संग्रहीत हैं।
भारतीय लोक कला मण्डल संग्रहालय, उदयपुर
इस संग्रहालय की स्थापना लोककलाविद् श्री देवीलाल सांभर के प्रयत्नों से 1942 में हुई थी। संग्रहालय में लोक कला की प्रतीक विभिन्न वस्तुओं का नायाब संग्रह है।
कठपुतलियाँ, लोक पोशाकें, आभूषण, नकाब, लोक वाद्य, मूर्तियाँ, मॉडल, चित्र, काष्ठ कलाकृतियाँ आदि संग्रहालय के आकर्षण हैं।
माणिक्य लाल वर्मा जनजाति संग्रहालय एवं शोध संस्थान, उदयपुर
इस संग्रहालय की स्थापना राज्य की जनजातियों की संस्कृति एवं सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था को संरक्षित तथा प्रदर्शित करने के उद्देश्य से 1983 में की गई थी।
संग्रहालय में जनजातियों से सम्बन्धित चित्र, वस्त्र, आभूषण, अस्त्र-शस्त्र, वाद्ययंत्र, माँडणे, भित्ति-चित्र, लोकनृत्य, मेले, उत्सव, वेशभूषा और कलाकृतियाँ आदि प्रदर्शित की गई हैं।
डॉल म्यूजियम (गुड़ियाघर), जयपुर
जयपुर में जे.एल.एन. मार्ग पर मूक बधिर विद्यालय के प्रांगण में 'भवानी बाई शेखसरिया चैरिटेबल ट्रस्ट' द्वारा संचालित डॉल म्यूजियम का उद्घाटन 7 अप्रैल, 1979 को मुख्यमंत्री श्री भैरोसिंह शेखावत द्वारा किया गया था।
इस संग्रहालय में भारत के विभिन्न हिस्सों की प्रसिद्ध गुड़ियों व कठपुतलियों के अतिरिक्त 30 से भी अधिक देशों की कठपुतलियाँ संग्रहित हैं।
प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय जयपुर
जयपुर में रामनिवास बाग के मध्य बने जन्तुआलय में स्थित इस संग्रहालय की स्थापना का श्रेय प्रसिद्ध वन्य जीव विशेषज्ञ श्री कैलाश साँखला को है।
संग्रहालय में जीव-जन्तुओं के विकास सहित वन्य जीवों के भूसा भरे मॉडलों को प्राकृतिक अवस्था में दर्शाया गया है।
राजकीय संग्रहालय (गंगा गोल्डन जुबली म्यूजियम), बीकानेर
इस संग्रहालय का उद्घाटन महाराजा गंगासिंह की गोल्डन जुबली के अवसर पर 5 नवंबर, 1937 को तत्कालीन वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो द्वारा किया गया था।
मुगल बादशाह जहाँगीर का अंगरखा व पल्लू से प्राप्त सरस्वती की पाषाण प्रतिमा इस संग्रहालय के मुख्य आकर्षण हैं। इतिहास, संस्कृति, पुरातत्त्व, प्राचीन अस्त्र-शस्त्र, प्राचीन सिक्के और बीकानेर व मुगल शैलियों के चित्र आदि बीकानेर संग्रहालय के विभिन्न कक्षों में सुसज्जित हैं।
करणी संग्रहालय, बीकानेर
जूनागढ़ किले में स्थित इस निजी संग्रहालय का नाम बीकानेर के पूर्व महाराजा डॉ. करणीसिंह के नाम पर रखा गया है। इस संग्रहालय में बीकानेर राजपरिवार से सम्बन्धित विभिन्न वस्तुओं के अतिरिक्त महाराजा गंगासिंह द्वारा द्वितीय विश्वयुद्ध में प्रयुक्त हवाईजहाज और शाही रेलगाड़ी के मॉडल संरक्षित हैं।
लालगढ़ म्यूजियम, बीकानेर
निजी ट्रस्ट द्वारा बीकानेर के लालगढ़ में संचालित लालगढ़ म्यूजियम में प्राचीन पाण्डुलिपियाँ व अस्त्र-शस्त्र आदि संग्रहित हैं। इसे सार्दूल संग्रहालय भी कहते हैं।
राजकीय संग्रहालय, चित्तौड़गढ़
चित्तौड़गढ़ के राजकीय संग्रहालय की स्थापना 1968 में चित्तौड़ के दुर्ग में स्थित फतेहप्रकाश महल में की गई थी।
इस संग्रहालय में पाषाणकालीन उपकरण, विभिन्न कलात्मक मूर्तियाँ, सिक्के, प्राचीन अस्त्र-शस्त्र और इस क्षेत्र से सम्बन्धित विभिन्न ऐतिहासिक व सांस्कृतिक वस्तुओं का आकर्षक संग्रह है।
मेहरानगढ़ संग्रहालय, जोधपुर
यह संग्रहालय जोधपुर के मेहरानगढ़ दुर्ग में स्थित है। इसमें मुख्यतः जोधपुर के राजपरिवार से सम्बन्धित विभिन्न महत्त्वपूर्ण वस्तुओं का संग्रह है।
प्राचीन अस्त्र-शस्त्र, राजसी पोशाकें, पालकियाँ और अन्य ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कलात्मक वस्तुएँ इस संग्रहालय में संग्रहित हैं।
राजकीय संग्रहालय, जोधपुर
जोधपुर का राजकीय संग्रहालय मंडोर में स्थित है, जिसकी स्थापना 1968 में हुई थी। विभिन्न चित्र विशेषतः जोधपुर के शासकों के चित्र, प्राचीन मुद्राएँ और अनेक कलात्मक पाषाण प्रतिमाएँ इस संग्रहालय में संग्रहित हैं।
राजकीय संग्रहालय, कोटा
डॉ. मथुरालाल शर्मा के प्रयासों से 1946 में कोटा संग्रहालय की स्थापना हुई थी, यह ब्रजविलास भवन में संचालित है। यहाँ प्राचीन मूर्तियाँ, पाषाणकालीन उपकरणों, अभिलेखों, ताम्रपत्रों, शिल्पखण्डों और हाड़ौती शैली के विभिन्न चित्रों का उत्कृष्ट संग्रह है।
राजकीय संग्रहालय, अलवर
अलवर स्थित विनय विलास महल में 1940 में संग्रहालय की स्थापना हुई थी। विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र, प्राचीन प्रतिमाएँ तथा अनेक पुरामहत्त्व की वस्तुएँ भी इस संग्रहालय में संग्रहित हैं। संग्रहालय की स्थापना तेजसिंह ने मेजर हार्वे के सहयोग से की।
मुगल एवं राजपूत चित्र, अरबी, फारसी, उर्दू व संस्कृत की अनेक दुर्लभ प्राचीन पाण्डुलिपियाँ, अलवर शैली में चित्रित महाभारत, हजरत अली की तलवार, दाराशिकोह की तलवार, अकबर की तलवार, मोहम्मद गोरी की जिरह बख्तर, यशवंत राव होल्कर का जिरह बख्तर अलवर संग्रहालय के प्रमुख आकर्षण हैं।
राजकीय संग्रहालय, भरतपुर
भरतपुर संग्रहालय की स्थापना 1944 में महाराजा ब्रजेन्द्र सिंह ने लोहागढ़ दुर्ग में स्थित 'कचहरी' (दरबार हॉल) में रखी थी।
इस संग्रहालय में राज्य की शाही वस्तुओं सहित प्राचीन मूर्तियाँ, शिलालेख, 17वीं सदी के मुगल चित्र प्रतिमाएँ मृण्मूर्तियाँ धातु प्रतिमाएँ व अन्य ऐतिहासिक वस्तुएँ संगृहीत हैं। यहाँ 5 फीट लम्बा कुषाणकालीन शिवलिंग रखा है।
राजकीय संग्रहालय, झालावाड़
झालावाड़ के शासक भवानीसिंह ने 1915 में इस संग्रहालय की स्थापना की थी। विभिन्न ऐतिहासिक वस्तुएँ, प्राचीन सिक्के, लघुचित्र तथा विभिन्न पुरातत्व की सामग्रियाँ यहाँ संरक्षित हैं। यहाँ चामुण्डा माता की अनोखी मूर्ति है।
इस संग्रहालय में सुरक्षित मूर्तियों में नटराज, त्रिमूर्ति, सूर्यनारायण, लक्ष्मीनारायण, विष्णु और अर्द्धनारीश्वर प्रमुख हैं।
राजकीय संग्रहालय, माउंट आबू
1965 में स्थापित माउंट आबू के संग्रहालय में सिरोही क्षेत्र से प्राप्त पुरातत्व की सामग्रियों के अतिरिक्त पीतल के काम के बर्तन, सिरोही क्षेत्र की प्रतिमाएँ और सिक्के आदि संगृहीत हैं।
राजकीय संग्रहालय, जैसलमेर/लोक सांस्कृतिक संग्रहालय
1984 में स्थापित जैसलमेर संग्रहालय में जीवाश्म, पाषाणकालीन उपकरण, शिलालेख, सिक्के, परिधान, जैसलमेरी पत्थर से बनी कलाकृतियाँ, काष्ठ कलाकृतियाँ, हस्तशिल्प और प्राचीन भव्य प्रतिमाएँ प्रदर्शित हैं।
प्रमुख कला में किराडू से प्राप्त अर्द्धनारीश्वर, चँवरधारित विष्णु, बूँदी से प्राप्त नवग्रह, गणेश व जैसलमेर की शिव प्रतिमाएँ तथा जैसलमेर के अखैशाही सिक्के व गदैया सिक्के प्रमुख हैं।
कालीबंगा संग्रहालय (हनुमानगढ़)
सिन्धु घाटी सभ्यता के महत्त्वपूर्ण स्थल कालीबंगा का उत्खनन 1961-1969 में श्री बी.वी. लाल और श्री बी.के. थापर के नेतृत्व में किया गया। कालीबंगा के उत्खनन में प्राप्त पुरावशेषों की 1985-86 में कालीबंगा में संग्रहालय स्थापित कर सुरक्षित रखा गया है।
पुरातात्विक सामग्री के अतिरिक्त उत्खनन के विभिन्न चरणों के चित्र, जिनमें जुते खेत का चित्र, कब्रिस्तान, नगर-योजना, परकोटे आदि के चित्र भी प्रदर्शित हैं।
राजकीय संग्रहालय, डूंगरपुर
1959 में स्थापित इस संग्रहालय में प्राचीन मूर्तियों और डूंगरपुर राज्य से सम्बन्धित पुरावैभव की विभिन्न वस्तुओं का आकर्षक संग्रह है।
लोक संस्कृति शोध संस्थान संग्रहालय, चूरू
इस संग्रहालय की स्थापना 1964 में इतिहासकार गोविन्द अग्रवाल के प्रयासों से हुई थी। संग्रहालय में लोकजीवन, परम्पराओं व संस्कृति से सम्बन्धित विभिन्न वस्तुओं के अतिरिक्त प्राचीन दस्तावेज, पुरातत्व सामग्री, ताड़पत्र, पाण्डुलिपियाँ व प्राचीन बहियों व रिकार्डों का संग्रह है।
नाहटा संग्रहालय - सरदारशहर (चूरू)
यहाँ हाथी दाँत व चंदन की खुदाई की कलाकृतियाँ रखी हैं।
सर छोटूराम स्मारक संग्रहालय-हनुमानगढ़
इस संग्रहालय की स्थापना 1938 ई. में स्वामी केशवानंद ने संगरिया में की थी। यहाँ 1921 ई. की चैम्बर ऑफ प्रिंसेज व महाराजा रणजीतसिंह के दरबार की फोटो दर्शनीय है।
मीरा संग्रहालय-उदयपुर
इस संग्रहालय की स्थापना 2011 ई. में की गई। यहाँ मीरा से संबंधी सामग्री रखी गई है।
दिलाराम संग्रहालय, आमेर
इस संग्रहालय में बिहारी सतसई संबंधी चित्र है।
शेखावाटी संग्रहालय-सीकर
इस संग्रहालय की स्थापना 2006 में की गई।
बांगड़ राजकीय संग्रहालय-पाली
इस संग्रहालय की स्थापना 1983 ई. में की गई। यहाँ सुगाली माता की मूर्ति, जीवन्त स्वामी की कांस्य प्रतिमा गरासिया जनजाति के वाद्य यंत्र व पाषाणकालीन उपकरण रखे हैं।
बिड़ला तकनीकी म्यूजियम-झुंझुनूँ
इस म्यूजियम की स्थापना 1954 ई. में की गई जो देश का प्रथम उद्योग एवं तकनीकी म्यूजियम है।
नोट- पिलानी (झुंझुनूँ) में 1929 ई. में घनश्याम दास बिड़ला ने बिड़ला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (BITS) की स्थापना की।
मोती महल संग्रहालय-बूँदी
यह संग्रहालय बूँदी दुर्ग में स्थित है।
स्वामी विवेकानन्द म्यूजियम- खेतड़ी (झुंझुनूँ)
इस संग्रहालय की स्थापना 2013 में स्वामी विवेकानन्द की 150वीं जयन्ती पर खेतड़ी के फतेहविलास महल में में की गई थी।
लोकवाद्ययों का संग्रहालय (जोधपुर)
यहाँ प्राचीन लोकवाद्ययों का संग्रह है।
हल्दीघाटी संग्रहालय- राजसमंद
इस संग्रहालय की स्थापना मोहनलाल माली ने की थी। इस संग्रहालय का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। यहाँ महाराणा प्रताप के जीवन की घटनाओं को एकत्रित किया गया है।
वॉर म्यूजियम (जैसलमेर)
इस संग्रहालय को 24 अगस्त, 2015 ई. में प्रारम्भ किया गया। इसे युद्ध संग्रहालय कहते है क्योंकि यहाँ 1965 व 1971 ई. में हुए पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध का चित्रण किया गया है। यहाँ युद्ध में प्राप्त पाकिस्तानी टैंकों को प्रदर्शनी हेतु रखा गया है।
लोक सांस्कृतिक संग्रहालय -गढ़ीसर (जैसलमेर)
स्थापना - 1948 ई.
मारवाड़ का मुकुट सरदार संग्रहालय - जोधपुर
स्थापना - 1909 ई.

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