राजस्थान के खनिज
इस लेख में राजस्थान की समृद्ध खनिज संपदा और उनके वितरण का विस्तृत विवरण दिया गया है। इसमें धात्विक, अधात्विक और ऊर्जा खनिजों के साथ-साथ राज्य की प्रमुख खनन नीतियों (2024) और तेल बेसिनों की जानकारी शामिल है। यह राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं (RAS, REET, RSMSSB) की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मानव विकास के इतिहास में खनिजों की खोज की कई अवस्थाएँ देखी जा सकती है जैसे ताम्र युग, कांस्य युग एवं लौह युग। प्राचीन काल में खनिजों का उपयोग औजार बनाने, बर्तन बनाने एवं हथियार बनाने तक ही सीमित था। इसका वास्तविक विकास औद्योगिक क्रांति के पश्चात् ही संभव हुआ एवं निरंतर इसका महत्व बढ़ता रहा है।
खनन कार्य को प्रभावित करने वाले कारक
खनन कार्य की लाभप्रदता दो बातों पर निर्भर करती है-
- भौतिक कारक जिनमें खनिज निक्षेपों के आकार, श्रेणी एवं उपस्थिति की अवस्था को सम्मिलित करते है।
- आर्थिक कारक जिनमें खनिज की माँग, विद्यमान तकनीकी ज्ञान एवं उसका उपयोग, अवसंरचना के विकास के लिए उपलब्ध पूँजी एवं यातायात व श्रम पर होने वाला व्यय आता है।
खनन की विधियाँ
उपस्थिति की अवस्था एवं अयस्क की प्रकृति के आधार पर खनन के दो प्रकार है- धरातलीय एवं भूमिगत खनन। धरातलीय खनन को विवृत खनन भी कहा जाता है। यह खनिजों के खनन का सबसे सस्ता तरीका है, क्योंकि इस विधि में सुरक्षात्मक पूर्वोपायों एवं उपकरणों पर अतिरिक्त खर्च अपेक्षाकृत कम होता है एवं उत्पादन शीघ्र व अधिक होता है।
जब अयस्क धरातल के नीचे गहराई में होता है तब भूमिगत अथवा कूपकी खनन विधि का प्रयोग किया जाता है।
खनिजों की निम्नलिखित विशेषताएँ है -
- यह क्षेत्र में असमान रूप से वितरित होते हैं।
- खनिजों की गुणवत्ता और मात्रा के बीच प्रतिलोमी संबंध पाया जाता है अर्थात् अधिक गुणवत्ता वाले खनिज, कम गुणवत्ता वाले खनिजों की तुलना में कम मात्रा में पाए जाते हैं।
- सभी खनिज समय के साथ समाप्त हो जाते है। भू-गर्भिक दृष्टि से इन्हें बनने में लंबा समय लगता है और आवश्यकता के समय इनका तुरंत पुनर्भरण नहीं किया जा सकता। अतः इन्हें संरक्षित किया जाना चाहिए और इनका दुरूपयोग नहीं होना चाहिए क्योंकि इन्हें दुबारा उत्पन्न नहीं किया जा सकता।
राज्य में खनिज विकास हेतु निम्न संस्थान कार्यरत हैं-
1. खान एवं भू विज्ञान विभाग, उदयपुर
- स्थापना- 1949
- राज्य में विभिन्न प्रकार के 81 खनिज पाये जाते हैं, उनमें से वर्तमान में 58 खनिजों का उत्पादन हो रहा है।
- खनिज सम्पदा में झारखण्ड के बाद राजस्थान का दूसरा स्थान है।
- प्रथम- ओडिशा (44.11%)
- दूसरा- छत्तीसगढ़ (17.34%)
- तीसरा- राजस्थान (14.10%)
राज्य में खनिजों की खोज व उनके व्यवस्थित दोहन हेतु खान एवं भू-विज्ञान विभाग की स्थापना वर्ष 1949 में की गई थी।
2. राजस्थान स्टेट माइन्स एण्ड मिनरल्स लिमिटेड (R.S.M.M.L.)
राजस्थान स्टेट माइन्स एण्ड मिनरल्स लिमिटेड की गतिविधियाँ निम्न हैं:-
1. स्ट्रैटेजिक बिजनेस यूनिट-रॉक फॉस्फेट, झामरकोटड़ा, उदयपुर:- उदयपुर से 26 किलोमीटर दूर झामरकोटड़ा गाँव में स्थित देश के कुल रॉक फॉस्फेट के उत्पादन का 90 प्रतिशत उत्पादन उदयपुर के झामरकोटड़ा क्षेत्र में होता है।
2. स्ट्रैटेजिक बिजनेस यूनिट-जिप्सम, बीकानेर:- राज्य में देश का 82% जिप्सम भंडार हैं।
राजस्थान देश का 94% जिप्सम का उत्पादन करता है।
श्रीगंगानगर-बीकानेर-चूरू देश का 17% तथा राजस्थान का 19% उत्पादन करता है।
जिप्सम का उपयोग प्रमुख रूप से सीमेंट, प्लास्टर ऑफ पेरिस, जिप्सम बोर्ड एवं क्षारीय भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए किया जाता रहा है।
3. स्ट्रैटेजिक बिजनेस यूनिट - लाइमस्टोन, जोधपुर : कम्पनी द्वारा जैसलमेर तथा नागौर जिलों में लाइमस्टोन का उत्पादन किया जा रहा है। जैसलमेर व गोटन (नागौर) से निकलने वाले लाइमस्टोन की अपनी उच्च गुणवत्ता के कारण देश में बहुत माँग है।
जैसलमेर में लाइमस्टोन का उत्पादन वर्ष 1988 से लगातार किया जा रहा है।
4. स्ट्रैटेजिक बिजनेस यूनिट - लिग्नाइट, जयपुर : देश में उपलब्ध लिग्नाइट भण्डारों में तमिलनाडु के पश्चात राजस्थान का दूसरा स्थान है। कम्पनी द्वारा बाड़मेर जिले में दो खदानों (गिरल एवं सोनड़ी) एवं नागौर जिले में एक खदान (कसनऊ-मातासुख) को विकसित किया गया है।
गिरल (बाड़मेर) खदान से लिग्नाइट का उत्पादन वर्ष 1994 में प्रारम्भ किया गया था एवं सोनड़ी खदान (बाड़मेर) से उत्पादन वर्ष 2011 में प्रारम्भ किया गया था।
- कम्पनी द्वारा वर्ष 2003 से नागौर जिले में कसनऊ-मातासुख (नागौर) लिग्नाइट खदान से लिग्नाइट का उत्पादन प्रारम्भ किया गया।
- कपूरड़ी खदान से लिग्नाइट का उत्पादन अक्टूबर, 2011 से एवं जालीपा खदान (बाड़मेर) से उत्पादन नवम्बर, 2017 में प्रारंभ किया।
3. राजस्थान स्टेट पेट्रोलियम एवं कॉरपोरेशन लिमिटेड (R.S.P.C.L.)
- गठन - 2008
- राज्य में अरावली रेन्ज के पश्चिम में विस्तृत रेगिस्तानी भू-भाग में हाइड्रोकार्बन व लिग्नाइट के भंडार निहित हैं। यह भू-भाग लगभग 1,50,000 वर्ग किमी. में फैला हुआ है। इसके अतिरिक्त पूर्व में विंध्याचल पठार (हाड़ौती क्षेत्र) में भी हाइड्रोकार्बन की उपलब्धता चिन्हित की गई है।
रिफाइनरी परियोजना
- उत्पाद- Fuels and Petrochemicals (पेट्रोउत्पाद जैसे कि पेट्रोल, डीजल, केरोसिन एवं पेट्रोकेमिकल जैसे कि पॉलीप्रोपिलिन, पॉलीएथिलीन इत्यादि)
- एचपीसीएल की इक्विटी- 74%
- राज्य सरकार की इक्विटी- 26%
- परियोजना स्थल- पंचपदरा, बालोतरा
- इन्दिरा गाँधी नहर से 28 MGD पानी की उपलब्धता।
- कार्य प्रारंभ- 16 जनवरी, 2018
- इसे ऋण इक्विटी अनुपात 2:1 द्वारा वित पोषित है।
खोजे गये खनिज तेल, भारी तेल एवं प्राकृतिक गैस क्षेत्र (Discovery Fields) निम्न है :-
1. खनिज तेल (Mineral Oil)
- बाड़मेर-सांचौर बेसिन में केयर्न वेदांता लिमिटेड द्वारा अब तक कुल 38 तेल एवं गैस क्षेत्रों की खोज की गई।
बहुराष्ट्रीय कम्पनी शैल इण्डिया द्वारा गुढामलानी (जिला बाड़मेर) में तेल की खोज की गई। राज्य में प्रथम बार लाइट क्रूड ऑयल की खोज की गई। इसे गुढ़ा तेल क्षेत्र नामकरण किया गया।
वर्ष 2001 में कोसलु के पास कुएँ की खुदाई की गई। इसे 'सरस्वती तेल क्षेत्र' नामकरण किया गया।
- केयर्न एनर्जी द्वारा ग्राम नगर जिला बाड़मेर (गुढ़ामालानी) के निकट खुदाई की गई। इसे 'रागेश्वरी तेल एवं गैस क्षेत्र' नामकरण किया गया।
बाड़मेर-सांचौर बेसिन में तीव्र गति से कार्य किया जा रहा है। अडेल को 'कामेश्वरी तेल क्षेत्र' नामकरण किया गया।
- नगाणा-कवास क्षेत्र बाड़मेर में जोगासर के पास कुएँ की खुदाई में तेल भंडार खोजे गए हैं। इसे 'मंगला तेल क्षेत्र' नामकरण किया गया।
- बायतू के पास कुएँ की खुदाई की गई। जिसे 'ऐश्वर्या तेल क्षेत्र' नामकरण दिया गया।
- नगाणा के पास तेल भण्डार खोजे गए हैं। इसे शक्ति नामकरण किया गया।
- बोंथिया के पास तेल भण्डार खोजे गए हैं। इसे 'भाग्यम' नामकरण किया गया।
- बाड़मेर-सांचौर बेसिन में दोहन हेतु कुल 923 कुएँ खोदे जा चुके हैं।
- सरस्वती तेल क्षेत्र से खनिज तेल का उत्पादन जुलाई, 2011 से आरम्भ किया जा चुका है। साथ ही रागेश्वरी गैस क्षेत्र से व्यावसायिक उत्पादन भी 23.03.2013 से आरम्भ हो चुका है। भाग्यम फिल्ड से दिनांक 21.01.2012 से उत्पादन आरम्भ किया जा चुका है।
- फरवरी, 2022 में वेदांता लिमिटेड ने एक नये तेल क्षेत्र 'दुर्गा' (बाड़मेर) की खोज की गई है।
बीकानेर क्षेत्र में नाल बड़ी तथा शालासर ONGCL के द्वारा तेल खोज की गई।
| क्षेत्र का नाम | किसके पक्ष में (कम्पनी) |
|---|---|
| मनिहारी टिब्बा, जैसलमेर (सबसे छोटा क्षेत्र) | ओ.एन.जी.सी.एल. |
| तनोट-डांडेवाला, जैसलमेर | ऑयल इण्डिया लिमिटेड |
| घोटारू विस्तार, जैसलमेर | ओ.एन.जी.सी.एल. |
| चिन्नेवाला-टीबा, जैसलमेर | ओ.एन.जी.सी.एल. |
| बाधेवाला, जैसलमेर | ऑयल इंडिया लिमिटेड |
| मंगला क्षेत्र, बाड़मेर (सबसे बड़ा क्षेत्र) | ओएनजीसी/केयर्न वेदांता लिमिटेड |
| भाग्यम-शक्ति, बाड़मेर | ओएनजीसी/केयर्न वेदांता लिमिटेड |
| कामेश्वरी-वेस्ट | ओएनजीसी/केयर्न वेदांता लिमिटेड |
| एस.जी.एल. डेवलपमेन्ट एरिया, जैसलमेर | ओएनजीसी/फोकस एनजी |
| साउथ खरातार, जैसलमेर | ओ.एन.जी.सी.एल. |
| चिन्नेवाला, जैसलमेर | ओ.एन.जी.सी.एल. |
| बाखरी टिब्बा | ऑयल इण्डिया लिमिटेड |
खनिजों का वर्गीकरण निम्न प्रकार से है
राजस्थान में खनिज संसाधन
देश में खनिजों की उपलब्धता और विविधता के मामले में राजस्थान सर्वाधिक समृद्ध राज्यों में से एक है। यहाँ 81 विभिन्न प्रकार के खनिजों के भण्डार है। इनमें से वर्तमान में 58 खनिजों का खनन किया जा रहा है। राजस्थान सीसा एवं जस्ता अयस्क, सेलेनाइट और वॉलेस्टोनाइट का एकमात्र उत्पादक राज्य है। देश में चाँदी, केल्साइट और जिप्सम का लगभग पूरा उत्पादन राजस्थान में होता है। राजस्थान देश में बॉल क्ले, फास्फोराइट, ओकर (गेरू), स्टेटाइट, फेल्सपार एवं फायर क्ले का भी प्रमुख उत्पादक है। राज्य का आयामी और सजावटी पत्थर यथा - संगमरमर, सेण्डस्टोन, ग्रेनाइट आदि के उत्पादन में भी देश में प्रमुख स्थान है। भारत में सीमेन्ट ग्रेड व स्टील ग्रेड लाइम स्टोन का राज्य अग्रणी उत्पादक है।
राजस्थान में उत्पादित प्रमुख खनिज
- (i) 17-धात्विक खनिज एकमात्र उत्पादक- सीसा-जस्ता अयस्क अग्रणी उत्पादक- चाँदी
- (ii) 39 अधात्विक खनिज एकमात्र उत्पादक सेलेनाइट वोलस्टोनाइट अग्रणी उत्पादक- सीमेन्ट ग्रेड एवं स्टील ग्रेड लाइमस्टोन
- (iii) 3 ईंधन खनिज कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक
- (iv) 22 गौण खनिज अग्रणी उत्पादक- मार्बल, ग्रेनाइट, सेण्डस्टोन
सामान्यतः खनिजों का वर्गीकरण निम्न प्रकार से है-
I. धात्विक खनिज
इसका वर्गीकरण निम्न प्रकार से है
(i) लौह धात्विक खनिज-
(ii) अलौह धात्विक खनिज- सोना, चाँदी, प्लेटिनम, एल्यूमिनियम, मैग्नीशियम, सीसा-जस्ता, ताँबा, बॉक्साइट इत्यादि।
II. अधात्विक खनिज
संगमरमर, ग्रेनाइट, चूना पत्थर, बलुआ पत्थर, जिप्सम, नमक, अभ्रक, एस्बेस्टॉस इत्यादि।
I. धात्विक खनिज
सीसा जस्ता
- उपयोग- जहाज, बारूद एवं कांसा निर्माण में
- इसके मिश्रित रूप को गेलेना कहते हैं।
- मिश्रित रूप में पाए जाने के कारण इसको जुड़वा खनिज भी कहते हैं।
- सीसे के अयस्क निम्न हैं- गेलैना, पाइरोटाइट
- जस्ते के अयस्क निम्न हैं- जिंकाइट, विलेमाइट, कैलेमिन तथा जिंक सल्फाईड है।
सीसे जस्ते के नवीन भंडार की खोज निम्न जगह हुई है- सिरोही (पिंडवाड़ा, बसंतगढ़, दानवा, पिपेला)
- उदयपुर- देबारी, जावर एवं मोचिया मगरा पहाड़ियाँ, गिरवा
- राजसमंद- राजपुरा दरीबा, बेघूमी क्षेत्र
- भीलवाड़ा- रामपुरा अगूचा
- सवाई माधोपुर- चौथ का बरवाड़ा
- अलवर- गुढ़ा-किशोरदास, थानागाजी
- डूंगरपुर- घुंघराव माण्डो की पाल
- बाँसवाड़ा- वरडालियाँ
- सिरोही- क्यार गुढ़ा, देहरी, जोपार
- इसको जुड़वा खनिज भी कहा जाता है।
- यह विद्युत का कुचालक है तथा इसको गेलैना का अयस्क माना जाता है।
नोट : जस्ता तथा ताँबा को मिलाने से पीतल का निर्माण होता है। ताँबा तथा टिन के मिश्रण से कांसा बनता है।
सीसा जस्ता शोधन संयंत्र-
1. हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL)
स्थापना- 1966- देबारी (उदयपुर)
वर्तमान में इसे 'वेदान्ता ग्रुप' द्वारा खरीदा गया है।
2. हिन्दुस्तान सुपर जिंक लिमिटेड (HSZL)
चन्देरिया (चित्तौड़गढ़)
ब्रिटेन के सहयोग से स्थापित।
एशिया का सबसे बड़ा जिंक स्मेल्टर
3. दरीबा स्मेल्टर कॉम्पलैक्स (राजसमंद)
स्थापना- 2011
ताँबा/कॉपर
- उपयोग करके कच्चा ताँबा गलाने की क्षमता का विकास किया जा रहा है।
- इसके प्रमुख खनिज अयस्क निम्न हैं- कार्बोनेट, सल्फाइड, ऑक्साइड
सल्फ्यूरिक एसिड ताँबे के उप-उत्पाद के रूप में भी प्राप्त होता है जिसका उपयोग सुपर फास्फेट खाद निर्माण में किया जाता है। विद्युत उपकरण एवं तार बनाने में।
- झुन्झुनु : सिंघाना, खेतड़ी - बांबई, मदान-कुदान
- सीकर : नीमकाथाना
- अलवर : राजगढ़
- भीलवाड़ा : पुर-बनेड़ा
- सलूम्बर जिला : सलूम्बर
- चूरू : बिदासर
ताँबा उत्पादन
- प्रथम स्थान-मध्यप्रदेश (52%)
- दूसरा स्थान-राजस्थान (42%)
नोट- मानव द्वारा खोजी गई प्रथम धातु- ताँबा।
- विश्व में सर्वाधिक ताँबा उत्पादन- चिली (उत्तरी अमेरिका से)
- विश्व प्रसिद्ध खान- चुकचीमाता खान (चिली)
- सबसे गहरी खान- एल तेनीयत खान
- बूटे की खान- मोन्टाना राज्य (अमेरिका), सर्वाधिक ताँबा उत्पादक खान है।
नोट : सिरोही के बाद ताँबा पट्टी की नई खोज सीकर और झुंझुनूँ में।
लोहा
- यह वर्तमान औद्योगिक अर्थव्यवस्था का आधार स्तम्भ माना जाता है, इस कारण इसे औद्योगिक विकास की रीढ़ कहते हैं।
- यह आग्नेय चट्टानों में मिलता है।
- भारत तथा राजस्थान में सर्वाधिक लोहा हेमेटाइट प्रकार का मिलता है।
- सर्वोच्च गुणवत्ता वाला लोहा मेग्नेटाइट है जिसे काला लोहा भी कहते हैं।
- विश्व में लोहा के संचित भण्डार यूक्रेन, ब्राजील, रूस में है।
- भारत में सर्वाधिक कच्चे लौह का उत्पादन- ओडिशा से होता है।
भारत में लोहा उत्पादक के प्रमुख राज्य व खानें
(i) ओडिशा-खानें- क्योंझर, मयूरभंज, कटक, सुंदरगढ़
(ii) छत्तीसगढ़-क्षेत्र- बस्तर और दुर्ग क्षेत्र। बस्तर व बेलाडेला की खानें एशिया की यंत्र सुसज्जित खानें हैं।
(iii) कर्नाटक इसमें बेलारी खान है।
- राजस्थान में सर्वाधिक लौह- जयपुर और दौसा से उत्पादित किया जाता है।
- भारत से सबसे बड़ा लोहा निर्यातक देश- जापान है।
- राजस्थान का प्रथम लोहा अयस्क परिष्करण संयंत्र-पुर-बनेड़ा (भीलवाड़ा) में तिरंगा पहाड़ी पर 'जिंदल' कम्पनी द्वारा लगाया है।
लौह के प्रकार (4)
मैग्नेटाइट- सर्वश्रेष्ठ किस्म- Fe3O4
इसमें लोहांश की मात्रा- 70%
सर्वाधिक उत्पादन- तमिलनाडु, कर्नाटक
यह कायांतरित चट्टानों से निकलता हैं।
इसका रंग- गहरा काला
हेमेटाइट- Fe2O3
इसमें लोहांश की मात्रा- 50-65%
सर्वाधिक उत्पादन- झारखण्ड, ओडिशा, छत्तीसगढ़
राजस्थान में केवल यहीं उत्पादित होता है।
इसका रंग लाल-भूरा
लिमोनाइट- 2Fe2O3H2O
इसमें लोहांश की मात्रा- 40-50%
सीडेराइट- FeCo3
इसमें लोहांश की मात्रा- 20-30%
राजस्थान की प्रमुख खानें व क्षेत्र-
- जयपुर - मौरिजा- बानोला, टोडाभाटा, तातेरी, बागावास, भाटों की गली।
- दौसा- नीमला-राइ्सेला, लालसोट
- सीकर- नीमकाथाना, चिपलाटा बागोली
- सीकर- राजपुरा, रामपुरा
- झुन्झुनु- सिंघाना, काली पहाड़ी, डाबला
- उदयपुर- नाथरा की पाल, थुर हुण्डेर क्षेत्र
- करौली- देदरोली, लीलोती
- बूंदी- लोहारपुर, इन्द्रगढ़, मोहनगढ़
टंगस्टन
- अयस्क- हुबनेराइट, फर्बराइट, शीलाइट, वुल्फ्रेमाइट, स्टेटाइट
- इसका गलनांक- 1350° सेन्टीग्रेड
यह विद्युत के साज-सामान में भी प्रयुक्त किया जाता है। टंगस्टन रक्षा विभाग को सप्लाई किया जाता है।
- नागौर- भाकरी (रावली पहाड़ी), डेगाना
- सिरोही- वाल्दा (बडाबेरा), रेवदर
- पाली- नाना-कराब, बीजापुर
- इसका सर्वाधिक गलनांक होता है।
- सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
- यह हीरे के बाद सर्वाधिक कठोर धातु है।
- देश का 75% उत्पादन राजस्थान करता है।
- सर्वाधिक भंडारण-कर्नाटक, राजस्थान, आन्ध्रप्रदेश
मैंगनीज
प्रमुख अयस्क- पाइरोलुसाइट, ब्रोनाइट, साइलोमेलीन
- बाँसवाड़ा : राथीमुरी एवं गरासिया, लीलवानी, कांचला, कांसला, काला-खुँटा, बारी-खुँटा, तलवाड़ा, तिम्मामोरी
- सवाई माधोपुर-
- राजसमंद
- अलवर
- उदयपुर- नेगड़िया
नोट- मैंगनीज को सभी व्यवसायों का आधार "JACKS OF ALL TRADE" कहते हैं।
- मैंगनीज उत्पादन में राजस्थान का 6th स्थान है।
- इसका रंग- काला
- उपयोग- लोहे को कठोर बनाने में।
- उत्पादन अवसादी चट्टानों से होता है।
भारत में उत्पादन
- मध्य प्रदेश
- महाराष्ट्र
- ओडिशा
चाँदी
- इसका अयस्क अग्नेटाइट, स्टेफ्लाइट, हॉर्नसिल्वर, ओस्टाइट, पाइराजाइराइट
- उदयपुर : जावर/जावरमाला पहाड़ी
- विश्व में सबसे अधिक चाँदी का उत्पादन मैक्सिको से होता है।
- अयस्क- अर्जेन्टाइट, पाइराजाइट, हॉर्न सिल्वर
- विद्युत का सर्वोत्तम सुचालक।
- जिन खानों से सीसा-जस्ता निकाला जाता है, उन्हीं से चाँदी का उत्पादन भी होता है।
- राज्य में चांदी उत्पादन प्लांट-चन्देरिया (चित्तौड़गढ़)
- राजस्थान देश का उत्पादन-99% (प्रथम स्थान)
सोना
- खोज- 2007 , ऑस्ट्रेलियाई कम्पनी- इण्डो गोल्ड
- 2006 के सर्वेक्षण अनुसार छछूंदरा, अजमेर में सोने की संभावना है।
सोना दो प्रकार से प्राप्त होता है।
- स्थल से प्राप्त सोने को ‘धातु रेखा भण्डार’ के नाम से जाना जाता हैं।
- जल से प्राप्त सोने को ‘प्लेसर भण्डार’ के नाम से जाना जाता हैं।
- भारत में सोन और पेरियार नदी के क्षेत्र में सोना मिलता है।
- शुद्ध सोना 24 कैरेट का होता है।
- आभूषण के लिए उपयोगी सोना 22 कैरेट।
- विश्व में सर्वाधिक सोने के भण्डार दक्षिण अफ्रीका की प्रसिद्ध खानों ‘जोहान्सबर्ग’ और ‘वेटरलैण्ड’ से निकाला जाता है।
- ऑस्ट्रेलिया की प्रसिद्ध सोने की खानें कार्लगुर्डी, कुलगार्डी है।
- सोने की सर्वाधिक खपत भारत में होती है।
- भारत की प्रसिद्ध खान 'कोलार खान', 'हट्टी खान' (कर्नाटक 99% उत्पादन)
- देश का अधिकतम स्वर्ण अयस्क धारवाड़ शिस्ट शैलों की क्वार्टजाइट चट्टानों से निकलता है।
राजस्थान में सोना उत्पादक क्षेत्र
- बाँसवाड़ा- आनन्दपुर भूकिया, जगपुरा, भूकिया राजस्थान में सर्वाधिक सोना उत्पादक क्षेत्र।
- अजमेर - छाछुन्द, भिनाय
- अलवर- मुण्डियावास का खेड़ा
- दौसा- धान बासडी
- बाँसवाड़ा- धानोता
- उदयपुर- रामपुरा खेड़ा
नोट- शाहपुरा का देव तलाई (भीलवाड़ा) सोने के सर्वेक्षण के लिए चर्चित रहा है।
बेरेलियम
- उपयोग- आणविक रिएक्टर में।
- यह सेना के पास एकाधिकार में होता है तथा इसका उपयोग मंदक के रूप में किया जाता है।
उत्पादन
1. उदयपुर - शिकारबाड़ी 2. अजमेर - बांदरसिंदरी 3. जयपुर - गुजरवाड़ा
II. अधात्विक खनिज
1. अभ्रक
यह रबर के टायरों के निर्माण में भी प्रयुक्त होता है।
इसका रंग सफेद होता है।
इसके प्रकार निम्न हैं-
- मास्कोवाइट अभ्रक सफेद धारीदार अभ्रक।
- रूबी अभ्रक- सफेद अभ्रक।
- बायोटाइट- हल्का गुलाबी अभ्रक।
- यह विद्युत का कुचालक होता है।
- इसमें विश्व के संदर्भ में भारत का एकाधिकार है।
- अभ्रक की ईंट व चादरें बनाने का कारखाना- भीलवाड़ा।
- इसको खनिज व्यवसाय का बीमार बच्चा कहते हैं।
- राजस्थान में 40% 'रूबी अभ्रक' निकलता हैं।
- सर्वाधिक उत्पाद- आन्ध्रप्रदेश
- दूसरा स्थान- राजस्थान
राजस्थान में अभ्रक उत्पादन क्षेत्र
- भीलवाड़ा- दांता भूणास, प्रतापपुरा, शाहपुरा, फुलियाकला
- उदयपुर- भगतपुरा, चंपा गुढ़ा
- ब्यावर - ब्यावर
- अजमेर - भिनाय
2. एस्बेस्टॉस
एस्बेस्टॉस का उपयोग एस्बेस्टॉस सीमेंट, छत की चद्दरें, पाइप आदि बनाने में किया जाता है ।
उत्पादन
- अजमेर- नैराला, अर्जुनपुरा
- ब्यावर जिला- सेन्द्रा, मानपुरा
- राजसमंद- तिखी गुढ़ा
- उदयपुर- जांजर की पाल
- डूंगरपुर- गंटीघला, नलवा
- रेशेदार खनिज के रूप में उत्पादन। (उपनाम-रॉकवूल)
- भारत में सर्वाधिक उत्पादन राजस्थान करता है।
यह दो प्रकार का होता है
- एम्फीबॉलाइट - राजस्थान में निकलता है।
- क्राइसोलाइट
3. ग्रेफाइट
- अजमेर, अलवर, बाँसवाड़ा (घाटोल से खांदू तक)
- यह जल्दी से आग नहीं पकड़ता है।
- अधातु होकर भी विद्युत् का चालक है।
- उपनाम- ब्लैक लेड/काला सीसा/मिनरल कार्बन ग्रेफाइट उत्पादन में प्रथम स्थान ओडिशा का है।
उर्वरक खनिज
1. जिप्सम - हरसौंठ/खड़िया/सेलेनाइट/सेलबड़ी
यह सीमेंट उद्योग में भी प्रयुक्त होती है।
- नागौर- गोंठ मांगलोद, जोध्यासी, भादयासी, भड़ात्र, मंगोल, धाकोरिया
- बीकानेर- चूरू - श्रीगंगानगर क्षेत्र: बीकानेर-जामसर की खान
- जैसलमेर- बाड़मेर - जोधपुर, पाली क्षेत्र
- बाड़मेर- पीर की ढाणी
- पाली- खुटानी
2. रॉक फॉस्फेट
रॉक-फॉस्फेट का उपयोग सुपर फॉस्फेट के उत्पादन में किया जा रहा है।
- उदयपुर-झामर - कोटड़ा
- जैसलमेर-फतेहगढ़, बिरमानियाँ
- जयपुर-अचरोल
- अलवर-आण्डूका - अण्डवारी
3. पाइराइट्स: सलादीपुर (सीकर)
इससे गंधक का अम्ल निकाला जा सकता है। गंधक का अम्ल या तेजाब उर्वरक उद्योग के काम में आता है।
नोट: कैलसाइट: सीकर
4. पोटाश
श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू
5. फैल्सपार
- अजमेर (मकरेश क्षेत्र), भीलवाड़ा, राजसमंद, पाली यह काँच, मिट्टी के बर्तन आदि उद्योगों में प्रयुक्त होता है।
- यह अभ्रक का सह-उत्पाद है।
- देश में सर्वाधिक उत्पादन राजस्थान करता है।
- इसके अयस्क-माइक्रोबिलन, आर्थोक्लेज & इनवाइट। (मिश्रित खनिज)
- उपयोग- टिन शेड बनाने में।
- सर्वाधिक उत्पादन- मकरेश (अजमेर) उत्पादन 95%
रसायन खनिज
1. फुलर्स अर्थ/मुल्तानी मिट्टी
यह चिकनाहट को सोख लेती है और तेल से रंगीन पदार्थ हटाने में प्रयुक्त होती है।
- बाड़मेर- आलमसरियाँ, कपूरडी, भाडका
- जैसलमेर- खिमस, मंधा
- बीकानेर- पलाना, बरसिंगसर, जोगीड़ा
इसमें राज्य का एकाधिकार है।
देश में सर्वाधिक उत्पादन-तेलंगाना, राजस्थान
2. बेराइट्स
- उदयपुर- जगत, रेलपातालिया, केवड़ा।
- सलूम्बर जिला - बाबरमाल (सराड़ा तहसील)
- अलवर- राजगढ़
- राजसमंद- नाथद्वारा
3. डोलामाइट
यह चिप्स व पाउडर तथा चूना बनाने में भी काम आता है।
- अजमेर- बजला-काबरा
- जयपुर ग्रामीण- खोसीथल, भैंसलाना
- जैसलमेर- ओढ़ानियां
- फलौदी- इंदो की ढाणी
4. वर्मीक्युलाइट
इस पर अग्नि का प्रभाव नहीं होता। यह ताप व ध्वनि का अच्छा इन्सुलेटर होता है।
- अजमेर
- बाँसवाड़ा
5. वोलेस्टोनाइट
- यह सिरैमिक के उद्योग में काफी काम आता है। यह पेन्ट व कागज उद्योग में प्रयुक्त होता है।
- इसका सर्वप्रथम उत्पादन 1969 में सिरोही से किया गया। उत्पादन- सिरोही, उदयपुर, पाली
6. फ्लोराइड/फ्लोर्सपार
देश में सर्वाधिक उत्पादन-गुजरात- (68%), राजस्थान- (27%)
डूंगरपुर- माण्डों की पाल, काहिला क्षेत्र
जालौर- भीनमाल
7. कैल्साइट
यह कागज, वस्त्र, चीनी मिट्टी उद्योग, पेन्ट इत्यादि में काम आता है।
8. गेरू या ओकर्स (लाल और पीले)
ये खनिज पिगमेंट होते हैं। ये घुलते नहीं है और रंग बनाने, सीमेंट, रबड़, प्लास्टिक आदि उद्योगों में काम आते हैं। यह चित्तौड़गढ़ जिले में मिलता है।
मूल्यवान खनिज
1. पन्ना/हरी अग्नि
- राजसमंद- कालागुमान
- उदयपुर- गोगुंदा, टिक्की
- गोगुंदा (उदयपुर) से ब्यावर एवं मुहानी व बुबानी (अजमेर) ग्रीन फायर बेल्ट हैं। (कुल लम्बाई - 221 किमी.)
इसके उपनाम- हरी अग्नि/हरित अग्नि/एमरल्ड/मरकत (संस्कृत में)
- यह बेरिल किस्म का पत्थर है।
- पन्ना नगरी जयपुर को कहा जाता है।
- सर्वप्रथम पन्ना 1943 में कालागुमान (उदयपुर) से निकाला गया।
2. तामड़ा/गार्नेट/रक्त मणि/फिरोजा
1. टोंक
1. राजमहल, 2. जनकपुरा, 3. कुशालपुर, 4. गांवरी
2. अजमेर
1. सरवाड़
इसमें राजस्थान का एकाधिकार है।
3. क्वार्ट्ज
क्वार्ट्ज- यह चीनी मिट्टी के उद्योग व इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में प्रयुक्त होता है।
- अजमेर
- ब्यावर जिला
- टोंक जिला- देवली, मालपुरा
4. एक्वामैरी
- टोंक, अजमेर, भीलवाड़ा
5. सजावटी पत्थर
- मार्बल (संगमरमर)- डीडवाना-कुचामन - मकराना/मकरणा
- बैंगनी मार्बल : बाँसवाड़ा
- नीला मार्बल : पाली
- सतरंगी मार्बल : पाली
- काला-हरा मार्बल : डूंगरपुर
- पीला मार्बल : जैसलमेर
- काला मार्बल : भैंसलाना (जयपुर)
- लाल मार्बल : धौलपुर
- बादामी मार्बल : जोधपुर (जयपुर)
- गुलाबी मार्बल : जालौर, बाबरमाल (सलूम्बर जिला)
- सफेद मार्बल : राजसमंद, मकराना (डीडवाना-कुचामन)
- लहरदार मार्बल : राजसमंद
- हरा मार्बल : उदयपुर
- यह कायांतरित चट्टानों में पाया जाता है।
- राजस्थान संगमरमर से सर्वाधिक मूल्य अर्जित करता है।
- एशिया की सबसे बड़ी संगमरमर मंडी व परिशोधन केन्द्र-किशनगढ़ (अजमेर) में स्थित है।
- सर्वाधिक मार्बल का उत्पादन- राजसमंद।
- सर्वश्रेष्ठ किस्म का मार्बल- मकराना (डीडवाना-कुचामन)
7. ग्रेनाइट
- यह आग्नेय चट्टानों से प्राप्त होता है।
- यह महंगा पत्थर है।
- सर्वाधिक उत्पादन- जालौर
- पीला ग्रेनाइट- पीथला गाँव (जैसलमेर)
- हरा ग्रेनाइट- डूंगरपुर।
- ग्रेनाइट सिटी- जालौर
- काला ग्रेनाइट- कालाडेरा (जयपुर)
- गुलाबी ग्रेनाइट- जालौर
8. स्लेटी पत्थर
इसमें राज्य का एकाधिकार है।
उत्पादन क्षेत्र-
- अलवर : भाढणा, खुण्डरोट, बहरोड़
- कोटपूतली-बहरोड़ जिला : बहरोड़ में होता है।
9. घीया पत्थर
इसमें राज्य का एकाधिकार है।
सर्वाधिक उत्पादन-
- भीलवाड़ा- घेवरिया/चाँदपुरा
- उदयपुर- ऋषभदेव, नाथरा की पाल
कोटा स्टोन : कोटा, झालावाड़, चित्तौड़गढ़
चूना पत्थर : चित्तौड़गढ़, नागौर, बूंदी, जैसलमेर
घीया पत्थर, टेल्क व पाइरोपिलाइट :- ये खनिज टैल्कम पाउडर, खिलौने आदि बनाने में प्रमुख माने जाते हैं।
महत्त्वपूर्ण खनिज
1. नमक
उपयोग- रसायन कागज उद्योग, सल्फर, दवाईयाँ इत्यादि में होता है।
नमक उत्पादन- गुजरात-81%, तमिलनाडु-9%, राजस्थान-12%
राजस्थान में सर्वाधिक उत्पादन- 1. सांभर झील, 2. पंचपदरा झील, 3. डीडवाना झील, 4. लूणकरणसर झील
राज्य का 30% नमक निजी क्षेत्र में 70% नमक सार्वजनिक क्षेत्र में उत्पादन होता है।
2. बाल क्ले
उपयोग-सिरेमिक उद्योग
इसमें उत्पादन में राजस्थान का प्रथम स्थान है।
उत्पादन-
बीकानेर-हाडला, गजनेर, कोलायत, गुढा, नाल, खारी
जैसलमेर-देवीकोट, मंडा
3. फायर क्ले
उपयोग- ईट निर्माण हेतु
उत्पादन- बीकानेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़
ऊर्जा खनिज
1. प्राकृतिक गैस
- उत्पादन -जैसलमेर
- भण्डारण -जैसलमेर
- कुएँ (जैसलमेर)
डाण्डेवाला, गुमानेवाला, रामगढ़, तनोट, मनिहारी, टिब्बा, घोटारू
नोट- सर्वप्रथम प्राकृतिक गैस का उत्पादन-1994 में घोटारू में हुआ।
2. पेट्रोलियम
भण्डारण - बाड़मेर
बाड़मेर से कच्चे तेल का उत्पादन वर्तमान में 15 क्षेत्रों में किया जाता है।
- भारत कुल कच्चा तेल उत्पादन: 29.36 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष
विश्व में सर्वाधिक तेल उपभोक्ता देश:
- स्थान - संयुक्त राज्य अमेरिका
- स्थान - चीन
- स्थान - भारत
1. बाड़मेर
तेल के निम्न क्षेत्र हैं-
- नागाणा क्षेत्र : मंगला कुआँ
- कोसलु क्षेत्र : सरस्वती कुआँ
- बायतु क्षेत्र (बालोतरा): ऐश्वर्या कुआँ
- अन्य कुएँ : विजया, रागेश्वरी, भाग्यम
नोट: 29 अगस्त, 2009 को मंगला तेल कुएँ से सर्वप्रथम शुरुआत
2. जैसलमेर
- बाघेवाला
- साधेवाला
- तनोट
- चिल्नेवाला
3. बीकानेर
तूवरी क्षेत्र - पूनम OIL (ऑयल इंडिया लिमिटेड )
खनिज तेल के 04 बेसिन हैं जो 1.5 लाख वर्ग किमी. पर विस्तारित है-
कोयला
1. बाड़मेर -
2. बीकानेर - पलाना, बरसिंगसर, बिथनोक
3. नागौर -
- क्सनाऊ - इग्यार
- मातासुख
- मेड़ता
राजस्थान में टर्शियरी युग का लिग्नाइट कोयला पाया जाता है।
उपनाम - उद्योग की रोटी, काला सोना।
निर्माण - 25 करोड़ वर्ष पूर्व कार्बोनिफेरस युग में
कोयले के चार प्रकार निम्न है-
1. एन्थ्रेसाइट - सर्वश्रेष्ठ कोयला
इसमें कार्बन की मात्र- 90% से अधिक।
इसका रंग- काला चमकीला
2. बिटुमिन्स
इसमें कार्बन की मात्र- 50-85%
इसका रंग- काला गहरा भूरा
भारत में विश्व का 80% का बिटुमिन्स कोयला होता है।
3. लिग्नाइट
कार्बन की मात्रा- 25-35%
इसका रंग- भूरा कोयला
राजस्थान में लिग्नाइट कोयला निकलता है।
4. पीट - निम्न किस्म का कोयला।
- इसमें कार्बन की मात्रा 30% से कम होती है।
- इसका रंग- भूरा
- यह लकड़ी की तरह जलता है।
- भारत में कोयले की प्रथम खान 1774 ई. में रानीगंज, प.बंगाल है।
राजस्थान में सर्वाधिक उत्पादन
- बाड़मेर- कपूरड़ी, जालिया, गिरल, जोगेश्वरतला
- बीकानेर- पलाना, गुढ़ा, बिथनोक, नापासर, बरसिंहसर
महत्वपूर्ण तथ्य
खनिज नीति:
- I. नीति - 1978
- II. नीति - 1991 मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत
- III. नीति - 1994
- IV. नीति - 2011 - मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
- V. नीति - 2015 - मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया
पाइपलाइन
- (GJ) H हजीरा
- (MP) B बिजापुर
- (UP) J जगदीशपुर
- आधारित: गैस पाइपलाइन
- संचालित: GAIL (गेल) गैस ऑथोरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड
- गैस आपूर्ति: अंता (बाराँ)
- राजस्थान में प्रथम गैस परियोजना - 1989, अंता
नोट: राजस्थान की स्वयं की स्थापित प्रथम गैस परियोजना: रामगढ़ (जैसलमेर), स्थापना : 1994
जामनगर - लोनी गैस पाइपलाइन - गुजरात से दिल्ली तक
आपूर्ति - अजमेर, जयपुर।
विजयपुर (MP) गैस पाइपलाइन
आपूर्ति - गढ़ेपान (कोटा), बाराँ, केशोरायपाटन (बूँदी)
खनिज से संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य
राजस्थान खनिज नीति 2024
राजस्थान खनिज नीति 2024 का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण एवं सामुदायिक कल्याण सुनिश्चित करते हुए आर्थिक विकास के लिए राज्य के प्रचुर खनिज संसाधनों का लाभ उठाते हुए टिकाऊ, पारदर्शी और जिम्मेदार खनिज विकास को बढ़ावा देना है।
मुख्य विशेषताएँ
- क. आर्थिक विकास और निवेश: खनिज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना और राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जी.एस.डी.पी.) में इस क्षेत्र के योगदान को बढ़ाना
- ख. रोजगार सृजन: वर्ष 2047 तक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 1 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना।
- ग. स्थिरता और ई.एस.जी. अनुपालन: शून्य-अपशिष्ट खनन, पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों और अपशिष्ट प्रबंधन रणनीतियों को लागू करना।
- घ. प्रौद्योगिकी एकीकरण: उन्नत अन्वेषण तकनीकों, ए.आई.- आधारित निगरानी और डिजिटल प्रशासन अपनाकर पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
- ड. अवैध खनन शमन: जी.पी.एस.- आधारित ट्रैकिंग, जियो-फेंसिंग और रीयल-टाइम निगरानी का उपयोग कर अवैध गतिविधियों को रोकना।
हीरा
- यह कार्बन का शुद्ध अपररूप है।
- इसकी प्रसिद्ध खान पन्ना (मध्य प्रदेश) है।
- मध्यप्रदेश से निकाले जाने वाले हीरे लोप, मुगल महान, पिट्ट है।
- 'कोहिनूर हीरा' आंध्रप्रदेश की 'गोलकुंडा खान' से निकाला गया था।
- सबसे बड़ा हीरा कुलीनान का हीरा 3106 कैरेट का है जो दक्षिण अफ्रीका की प्रीमियम खान से निकाला गया।
- भारत में सबसे बड़ी हीरा मंडी- मुंबई
राजस्थान में उत्पादन
- बाड़मेर
- प्रतापगढ़-केसरपुरा, मानपुरा
- चित्तौड़गढ़
यूरेनियम
- उपयोग- परमाणु नाभिकीय विखंडन में।
- अयस्क- पिचब्लैंड सामरसकाइट
क्षेत्र-
- भीलवाड़ा - भूणास, कुराडिया गांव की पहाड़िया (जहाजपुर तहसील)
- उदयपुर- उमरा क्षेत्र
- सीकर- खंडेला क्षेत्र
- बारां- रामगढ़
- बाँसवाड़ा
- डूंगरपुर।
थोरियम- राज्य में बांसवाड़ा, पाली, चित्तौड़गढ़ में मिलता है।
लीथियम- राज्य में अजमेर तथा राजगढ़ (राजसमंद) में मिलता है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण
- ताँबा- इनका उपयोग करके कच्चा ताँबा गलाने की क्षमता का विकास किया जा रहा है।
- सीसा व जस्ता
- टंगस्टन- यह विद्युत के साज-सामान में भी प्रयुक्त किया जाता है। टंगस्टन रक्षा विभाग को सप्लाई किया जाता है।
- एस्बेस्टस- एस्बेस्टस का उपयोग एस्बेस्टस सीमेंट, छत की चद्दरें, पाइप आदि बनाने में किया जाता है।
- फैल्सपार- यह काँच, मिट्टी के बर्तन आदि उद्योगों में प्रयुक्त होता है।
- सिलिका रेत- यह काँच उद्योग में कच्चे माल के रूप में काम में आती है।
- क्वार्ट्ज़- यह चीनी मिट्टी के उद्योग व इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में प्रयुक्त होता है।
- मैग्नेसाइट- यह रिफ्रैक्टरी ईंटों के निर्माण में व्यापक रूप से प्रयुक्त किया जाता है।
- वरमीक्यूलाइट- इस पर अग्नि का प्रभाव नहीं होता। यह ताप व ध्वनि का अच्छा इन्सूलेटर होता है।
- वोलस्टोनाइट- यह सिरैमिक उद्योग में काफी काम आता है। यह पेन्ट व कागज उद्योग में भी प्रयुक्त होता है।
- चायना क्ले व व्हाइट क्ले- यह बर्तन बनाने व विद्युत इन्सूलेटर के रूप में काम आता है।
- फायर क्ले- यह फायर क्ले ईंट, ब्लॉक्स आदि बनाने में काम आती है।
- डोलोमाइट- यह चिप्स व पाउडर तथा चूना बनाने में भी काम आता है।
- अभ्रक- यह रबर के टायरों के निर्माण में भी प्रयुक्त होता है।
- जिप्सम- यह सीमेंट उद्योग में भी प्रयुक्त होती है।
- रॉक-फॉस्फेट- रॉक-फॉस्फेट का उपयोग सुपर फॉस्फेट के उत्पादन में किया जा रहा है।
- पाइराइट्स- इससे गन्धक का अम्ल निकाला जा सकता है। गन्धक का अम्ल या तेजाब उर्वरक उद्योग के काम में आता है।
- मुल्तानी मिट्टी- यह चिकनाहट को सोख लेती है और तेल से रंगीन पदार्थ हटाने में प्रयुक्त होती है।
- घीया पत्थर, टेल्क व पाइरोपिलाइट- ये खनिज टैल्कम पाउडर, खिलौने आदि बनाने में प्रमुख माने जाते हैं।
- कैल्साइट- यह कागज़, वस्त्र, चीनी मिट्टी उद्योग, पेन्ट इत्यादि में काम आता है।
- गेरू या ओकर्स (लाल और पीले)- ये खनिज पिगमेंट होते हैं। ये घुलते नहीं है और रंग बनाने, सीमेंट, रबड़, प्लास्टिक आदि उद्योगों में काम आते हैं। यह चित्तौड़गढ़ जिले में कई स्थानों पर मिलता है।





Post a Comment