राजस्थान में पशु सम्पदा एवं डेयरी विकास
इस लेख में राजस्थान की पशु सम्पदा एवं डेयरी विकास का संपूर्ण विवरण दिया गया है। इसमें 20वीं पशु गणना के नवीनतम आँकड़े, प्रमुख पशु नस्लें (गाय, भैंस, भेड़, बकरी आदि), डेयरी योजनाएँ और पशुपालन विभाग की महत्वपूर्ण संस्थाओं की जानकारी शामिल है।
यह लेख RAS, REET, CET, राजस्थान पुलिस और अन्य सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
1. पशुपालन विभाग
स्थापना : 1957
राज्य में पशुधन की स्वास्थ्य सुरक्षा, नस्ल सुधार, पशु रोग से बचाव एवं उपचार हेतु विभाग के अधीन वर्तमान में 48 बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय कार्यरत हैं।
2. राजस्थान राज्य पशु चिकित्सा परिषद
स्थापना : 14 अप्रैल, 1988
3. राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड
- स्थापना : 25 मार्च, 1998
- राज सरस सुरक्षा कवच बीमा योजना (अष्टम चरण) - व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना 1 फरवरी, 2024 से लागू की गई है।
- मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना - इस योजनान्तर्गत वर्ष 2023-24 में दुग्ध उत्पादकों को ₹2 प्रति लीटर से ₹5 लीटर की दर से अनुदान राशि जारी की जा रही है।
पशु गणना
- प्रथम पशु गणना दिसंबर, 1919 से अप्रैल 1920 तक की गई, यह पशु गणना जयपुर, बीकानेर, जोधपुर, कोटा, बूंदी, टोंक, किशनगढ़ में हुई।
- स्वतंत्रता के बाद प्रथम पशु गणना 1951 में हुई। यह सातवीं पशु गणना थी इस में 2.46 करोड़ पशु थे।
- पशु गणना 'राजस्व विभाग' प्रत्येक 5 वर्ष बाद करवाता है। जिसका मुख्यालय अजमेर में है।
- राजस्व विभाग की स्थापना 1 अप्रैल 1949 में हुई।
- नवीनतम पशु गणना 2019 में हुई थी जो की 20वीं थी।
20वीं पशु गणना (भारत)
16 अक्टूबर 2019 को 20वीं पशु गणना जारी की गई।
20वीं पशुगणना में देश में कुल पशुधन = 535.78 (मिलियन) (53.578 करोड़)
19वीं पशुगणना में देश में कुल पशुधन की तुलना में 20वीं पशुगणना में 4.6% की बढ़ोतरी हुई।
देश में सर्वाधिक पशुधन = उत्तर प्रदेश UP में पशुधन 1.35% की गिरावट हुई।
सर्वाधिक पशुधन - उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, प. बंगाल, बिहार, आन्ध्रप्रदेश
पशुधन में सर्वाधिक वृद्धि - 1. प. बंगाल = 23.32%, 2. तेलंगाना = 22.21%, 3. आन्ध्र प्रदेश = 15.79%
नोट - 20वीं पशुगणना में भारत के सन्दर्भ में मुर्गी, बकरी, गाय, मिथुन, भैंस, भेड़ में वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि घोड़े, गधे, खच्चर, ऊँट, सुअर तथा याक में कमी दर्ज की गई है।
20वीं पशु गणना भारत के सन्दर्भ में कुल पशुधन का सर्वाधिक प्रतिशत निम्न प्रकार से है-
| पशुधन | कुल पशुधन का प्रतिशत |
|---|---|
| गाय | 36.04% |
| बकरी | 27.74% |
| भैंस | 20.47% |
| भेड़ | 13.83% |
20वीं पशुगणना 2019 राजस्थान के सन्दर्भ में
- यह नवीनतम पशुगणना है तथा पशुगणना प्रति 5 वर्ष बाद जारी होती है- इस कारण 33 जिलों के आंकड़े जारी है तथा नये जिलों के आंकड़े अगली पशु-गणना में जारी होंगे-
- 20वीं पशुगणना में कुल पशुधन = 5.68 करोड़
- 19वीं पशुगणना में कुल पशुधन = 5.77 करोड़
- 20वीं पशुगणना में इस बार 1.66% की कमी दर्ज की गई।
- 20वीं पशुगणना में राजस्थान का देश में दूसरा स्थान है तथा राजस्थान देश का 10.66% पशुधन रखता है।
- जारी - 16 अक्टूबर, 2019
- आयोजक- मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय भारत सरकार (Ministry of fisheries, Animal Husbandry and Dairying)
- गणना- राजस्व मण्डल एवं पशुपालन निदेशालय द्वारा संयुक्त रूप से गणना हुई = 1 अक्टूबर, 2018
- यह देश की पहली डिजिटल पशुगणना है।
- सर्वाधिक पशु-बाड़मेर, जोधपुर, जयपुर
- कम पशु-धौलपुर
| 20वीं पशुगणना | 19वीं पशुगणना | |
|---|---|---|
| बकरी | - 3.81 | + 1 |
| गाय | + 4.41 | + 9.94 |
| भैंस | + 5.53 | + 16.95 |
| भेड़ | - 12.94 | - 18.86 |
| घोड़ा | - 10.85 | + 48.50 |
| गधा | - 71.31 | - 20.23 |
| ऊँट | - 34.69 | - 22.79 |
नोट:- ऊपर के आँकड़ों के अनुसार 20वीं पशु गणना में बकरियों की संख्या में 3.81% की कमी हुई है, जबकि 19वीं पशु गणना में बकरियों की संख्या में 1% की वृद्धि हुई।
इसी प्रकार ऊपरी आँकड़ों के अनुसार + का संकेत वृद्धि को दर्शाता है जबकि - का संकेत कमी को दर्शाता है।
| पशुधन | देश में राजस्थान का स्थान | देश में राजस्थान का प्रतिशत |
|---|---|---|
| बकरी | I | 14% |
| गाय | VI | 7.24% |
| भैंस | II | 12.46% |
| भेड़ | IV | 10.64% |
| घोड़ा एवं टट्टू | III | 9.9% |
| गधा एवं खच्चर | I | 18.9% |
| ऊँट | I | 84.43% |
| मुर्गी | XVII | 1.70% |
| सुअर | XVII | 1.70% |
20वीं पशुगणना में राजस्थान के कुल पशुधन का प्रतिशत निम्न प्रकार है-
| पशुधन | राज्य के कुल पशुधन का प्रतिशत |
|---|---|
| बकरी | 36.69% |
| गाय | 24.54% |
| भैंस | 24.11% |
| भेड़ | 13.92% |
| घोड़ा | 0.06% |
| गधा | 0.04% |
| ऊँट | 0.37% |
| सुअर | 0.27% |
- प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पशुपालन का 13 प्रतिशत से अधिक सकल घरेलू आय में योगदान है।
- राष्ट्रीय उत्पादन में वर्ष 2022-23 में राज्य का योगदान दूध उत्पादन में 14.44% एवं ऊन उत्पादन में 47.98% है।
- राजस्थान का अंडा उत्पादन में 13वाँ स्थान (2.07%) है।
- राजस्थान का मांस उत्पादन में 12वाँ स्थान (2.37%) है।
प्रदेश में पशुधन का जिलेवार 5 सर्वाधिक घनत्व
| डूंगरपुर | 433 |
| बाँसवाड़ा | 386 |
| दौसा | 308 |
| जयपुर | 266 |
| सीकर | 256 |
प्रदेश में पशुधन का जिलेवार 5 सबसे कम घनत्व
| जैसलमेर | 62 |
| बीकानेर | 90 |
| बाराँ | 110 |
| चूरू | 117 |
| कोटा | 120 |
गाय
नस्लें-
अन्य नस्ल- गिर/रेंडा/अजमेरा
1. थारपारकर/थारी/मालाणी
सर्वाधिक रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली नस्ल।
मूल स्थान -सिंध, पाकिस्तान व मालाणी (बाड़मेर)
इसका क्षेत्र बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, फलोदी, जोधपुर है।
सिंध क्षेत्र से आने के कारण इसे उजली सिंधी भी कहते हैं।
इसका प्रजनन केंद्र चांदन (जैसलमेर) एवं बीछवाल (बीकानेर) में है।
2. राठी
- इसको राजस्थान की कामधेनू कहते हैं तथा यह डेयरी उद्योग के लिए प्रसिद्ध मानी जाती है।
- इसका क्षेत्र श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू है।
- यह लाल सिंधी, थारपारकर और साहीवाल का मिश्रित रूप मानी जाती है।
नोट-
साहीवाल
उत्पत्ति - मोटगोमरी (पाकिस्तान)
क्षेत्र - श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर सर्वाधिक दूध देने वाली, सर्वाधिक मीठा दूध
- यह गाय की द्विप्रयोजनीय नस्ल है।
- इसका प्रजनन केंद्र बीकानेर एवं नोहर (हनुमानगढ़) में है।
3. मेवाती/काठी- अलवर, भरतपुर, कोटपूतली-बहरोड़, डीग, खैरथल।
यह सबसे शक्तिशाली गाय है।
इसके बैल हल जोतने व बोझा ढोने के लिए उपयोगी
4. सांचौरी
इसका क्षेत्र जालौर, सिरोही, उदयपुर, पाली है।
इसका प्रजनन केन्द्र सांचौर में है।
5. कांकरेज
यह सबसे भारी नस्ल है तथा इसके सींग मजबूत होते हैं।
इसका मूल स्थान कच्छ का रन (गुजरात) है।
इसका क्षेत्र जालौर, पाली, सिरोही, बाड़मेर, बालोतरा।
इसका प्रजनन केंद्र कोडमदेसर (बीकानेर) में है।
6. मालवी
इसका मूल स्थान मालवा क्षेत्र (मध्यप्रदेश) को माना जाता है।
इसका प्रजनन केन्द्र डग (झालावाड़) में है।
चन्द्रभागा तथा गोमती सागर (झालावाड़) पशु मेला इसी नस्ल के लिए लगता है।
इसका क्षेत्र मुख्यतः बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, कोटा, बाराँ, झालावाड़ को माना जाता है।
7. नाागौरी
इसका मूल स्थान सुहालक (नागौर) प्रदेश है।
इसका क्षेत्र नागौर, जोधपुर, बीकानेर है।
इसका प्रजनन केन्द्र नागौर है।
इसके बैल तेज दौड़ने एवं बोझा ढोने के लिए प्रसिद्ध है।
वीर तेजाजी पशु मेला इसी नस्ल के लिए प्रसिद्ध हैं।
8. हरियाणवी
- इसका मूल स्थान रोहतक, गुरूग्राम, हिसार है।
- इसका क्षेत्र चूरू, हनुमानगढ़, सीकर, झुंझुनूँ, डीग, भरतपुर है।
- इसका प्रजनन केंद्र कुम्हेर (डीग) में है।
नोट- गिर गाय की नस्ल-इसका मुख्य क्षेत्र सौराष्ट्र (गुजरात) है। इसका मुख्य क्षेत्र अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ है। इसको अजमेरी रेण्डा के नाम से जाना जाता हैं। अनुसन्धान केन्द्र वल्लभनगर (उदयपुर) में स्थित है।
गाय की विदेशी नस्लें
(1) हॉलीस्टिन फ्रीजीयन- हॉलैंड और USA
(2) जर्सी- अमेरिका
(3) रेड डेन- डेनमार्क
(4) स्विस ब्राउन- स्विट्जरलैण्ड
- गाय का माँस बीफ कहलाता है।
- गौ-सेवा संघ अजमेर में स्थापित किया गया है।
- गौ-मूत्र से फिनाइल बनाने का प्रथम संयंत्र- हिंगोनिया गौशाला (जयपुर ग्रामीण) में स्थापित किया गया है।
- गोपाल योजना- 1990
- कामधेनु योजना- 1997-98
- जर्सी गाय 1½ वर्ष में गर्भधारण कर लेती है।
- साहीवाल अनुसंधान केन्द्र- कोडमदेसर (बीकानेर)।
नोट- देश का प्रथम गौ (COW) I.V.F सेंटर की शुरूआत जोजावर गाँव (पाली से की गई है।)
- 'गौ-सेवा निदेशालय राजस्थान' का नाम परिवर्तित कर 19.12.2014 से 'निदेशालय गोपालन' राजस्थान किया गया।
- राजस्थान पशु सम्पदा में समृद्ध राज्य है। राज्य में शुष्क क्षेत्र में दूध देने वाली उन्नत नस्ल (राठी, गीर, साहीवाल तथा थारपारकर), दूध व खेती दोनों कार्य के लिए कांकरेज व हरियाणा नस्ल के गौवंश तथा नागौरी व मालवी की संकर नस्ल प्रचुर मात्रा में हैं।
भैंस
1. मुर्रा भैंस
- उत्पत्ति- मोटगोमरी (पाक)
- भैंस की सर्वोत्तम नस्ल है।
- इसका मूल स्थान मोंटगोमरी (पाकिस्तान) को माना जाता है।
- सर्वाधिक दूध देने वाली भैंस
- प्रजनन केन्द्र-कुम्हेर, (डीग)
- इसका क्षेत्र अलवर, जयपुर, डीग, भरतपुर, दौसा।
- इस भैंस को खुण्डी भी कहते हैं।
- इसके सिंग मुड़े होते हैं।
2. नागपुरी
भैंस की यह नस्ल वजन में सबसे हल्की है।
यह भैंस मुख्यतः गुजरात के सीमावर्ती जिलों में पायी जाती है।
3. जाफराबादी (मिनी ऐलीफेन्ट)
इसका मूलस्थान काठियावाड़ में है।
इसका क्षेत्र उदयपुर, सलूम्बर, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़ है।
4. बदावरी/भदावरी
इसका मुख्य क्षेत्र उत्तर प्रदेश को माना जाता है।
यह धौलपुर, जयपुर, दौसा तथा भरतपुर में पायी जाती है।
5. मेहसाणा मूल स्थान मेहसाणा (गुजरात)
- इसका सबसे लम्बा दुग्धकाल है।
- इसका मुख्य क्षेत्र बाड़मेर, सिरोही, जालौर है।
यह निम्न का संकरण है-
- मुर्रा
- सुरती
6. सुरती - इसका क्षेत्र सिरोही, उदयपुर एवं डूंगरपुर है।
- भैंस प्रजनन व अनुसंधान केन्द्र-वल्लभनगर (उदयपुर)
- भैंस प्रजनन फॉर्म-बांकलिया (डीडवाना-कुचामन)
- भैंस का मांस कारा बीफ कहलाता है।
बकरी
उपनाम- गरीब की गाय, चलता-फिरता फ्रिज।
नस्ल-
1. मारवाड़ी
यह प्राचीनतम नस्ल मानी जाती है।
इसका क्षेत्र बीकानेर, चूरू, जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी, जोधपुर है।
सर्वाधिक बकरियाँ इसी नस्ल की पाई जाती है।
2. शेखावाटी
काजरी के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई है।
इसके सींग नहीं होते हैं।
क्षेत्र- सीकर, चूरू, झुन्झुनूँ।
3. जखराना/अलवरी
यह सर्वश्रेष्ठ नस्ल मानी जाती है तथा सर्वाधिक दूध देती है।
इसका मूल स्थान बहरोड (कोटपूतली-बहरोड़) है।
यह अलवर, बहरोड़ में है।
4. बारबरी
यह सबसे सुंदर बकरी की नस्ल है।
इसका क्षेत्र भरतपुर, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर है।
इसकी सर्वाधिक प्रजनन क्षमता है।
5. सिरोही
यह बकरी की सबसे भारी नस्ल है।
इसका क्षेत्र सिरोही, जालौर तथा पाली है।
6. परबतसरी
यह संकर नस्ल (हरियाणा की बीटल व राजस्थान की सिरोही का मिश्रण) है।
इसका क्षेत्र अजमेर, नागौर, डीडवाना-कुचामन, बीकानेर है।
7. जमनापुरी
इसका क्षेत्र कोटा, बूँदी, बाराँ, झालावाड़ है तथा यह बकरी की द्विप्रयोजनीय नस्ल है।
इसका मूल स्थान इटावा (उत्तर प्रदेश) को माना जाता है।
यह बड़ी विशालकाय नस्ल है।
यह दूध देने के लिए भी जानी जाती है।
8. लोही
इसका क्षेत्र श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर है।
यह सर्वाधिक माँस देने वाली बकरी है।
बकरी से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण तथ्य-
- केंद्रीय बकरी अनुसंधान एवं प्रजनन केंद्र अविकानगर, मालपुरा (टोंक)
- बकरी प्रजनन फॉर्म तथा विकास केंद्र-रामसर (अजमेर) में है। जिसकी स्थापना 1981-82 में स्विट्जरलैंड के सहयोग से की गई है।
- वरूण गाँव (नागौर) की बकरियाँ प्रसिद्ध है।
- सबसे बड़ा बकरी पालन फार्म- बलेखण
- बकरी का माँस - ‘चेवणी’ कहलाता है।
- राजस्थान में पशुओं में सर्वाधिक बकरी पाई जाती है।
कुक्कुट
- इसके माँस को चिकन कहते हैं।
- अंडों की टोकरी अजमेर को कहा जाता है जबकि भारत में अंडों की टोकरी आंध्रप्रदेश को कहते हैं।
- देसी नस्ल की मुर्गियाँ बाँसवाड़ा में सर्वाधिक है।
- सर्वाधिक अंडे देने वाली मुर्गी -व्हाइट लेग हॉर्न है।
- कड़कनाथ योजना की शुरूआत बाँसवाड़ा से की गई है जो कुक्कुट पालन से संबंधित है।
- सर्वाधिक कुक्कुट की उत्तम नस्लें अजमेर में पाई जाती है।
- कुक्कुट प्रशिक्षण संस्थान अजमेर में स्थित है, जिसकी स्थापना 1988 में की गई है।
- सर्वाधिक मुर्गियाँ अजमेर में है।
- मुर्गी की देशी नस्लें बरसा, ट्रेनी, असील है।
- मुर्गी की विदेशी नस्ल व्हाइट लेग हॉर्न है।
- मुर्गियों में रानीखेत रोग होता है।
भेड
भेड़ की नस्लें-
भेड़ के बच्चे को 'उरणियों/लेम्ब' तथा झुंड को 'रेवड़' कहा जाता है।
- नाली- इसका क्षेत्र श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू है। इस भेड़ का रेशा लम्बा होता हैं।
- सोनाड़ी/चनोथर:
- इसका क्षेत्र बाँसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डूँगरपुर, उदयपुर, सलूम्बर है।
- यह वजन में भारी है।
- इसका प्रजनन केंद्र चित्तौड़गढ़ में है।
- चरते समय इस भेड़ के कान भूमि को स्पर्श करते हैं। इस कारण इसे चनोथर कहते हैं।
3. चोकला/शेखावाटी/छापर/भारतीय मेरीनो
- यह भेड़ की सर्वोत्तम नस्ल है।
- इसके चेहरे पर काला धब्बा होता है।
- इसका प्रजनन केंद्र कोडमदेसर (बीकानेर) है।
- इसका क्षेत्र सीकर, चूरू, झुंझुनूँ, बीकानेर है।
4. बागड़ी
इसका क्षेत्र अलवर तथा भरतपुर है।
इस भेड़ का 75% मुँह काला होता है।
5. पूँगल
इसका क्षेत्र बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर है।
इसका अनुसंधान केंद्र बीकानेर में है।
6. मगरा/बीकानेरी चोकला
इसका क्षेत्र बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर है।
यह सर्वाधिक माँस देने वाली भेड़ है।
इसका अनुसंधान केंद्र बीकानेर में है।
7. मालपुरी
इसका ऊन रेशा मोटा होता है।
इसका क्षेत्र टोंक, जयपुर, अजमेर है।
इसकी ऊन गलीचे के लिए प्रसिद्ध है।
इसका अनुसंधान केंद्र जयपुर में है।
8. मारवाड़ी
इसका क्षेत्र जैसलमेर, फलौदी, जोधपुर, बाड़मेर, पाली है।
राजस्थान में 50 प्रतिशत मारवाड़ी भेड़ें ही पाई जाती है।
इसका अनुसंधान केंद्र जैसलमेर में है।
9. जैसलमेरी
इसका क्षेत्र बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर, जोधपुर है।
यह सर्वाधिक ऊन देने वाली भेड़ है। (1 वर्ष में 4 किलो ऊन)
10. खेरी एक भेड़ की नस्ल है, जिसका क्षेत्र जैसलमेर, जोधपुर, नागौर है।
अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य
भेड़ की विदेशी नस्लें
1. मेरिनो- इसमें नर भेड़ों में सींग घुमावदार, मादा भेड़ों में सींग का अभाव, सर्वाधिक- ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड।
2. रेम्बुलेट- यह सबसे मजबूत एवं आकार में बड़ी होती है।
इसके सींग पीछे की ओर जाकर सिर के बाहर की ओर मुड़े होते हैं।
मादा के सींग नहीं होते हैं।
3. कोरिडेल- ऊन एवं माँस के लिए सर्वाधिक उपयुक्त
4. डोर्सेट नस्ल- टोंक
5. भेड़ प्रजनन केन्द्र
- फतेहपुर (सीकर)
- बांकलिया (डीडवाना-कुचामन)
6. केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान- अविकानगर (टोंक) स्थापना- 1962
- उद्देश्य- भेड़ एवं खरगोश से ऊन एवं प्रजनन, चारा विकास एवं नस्ल सुधार करना है।
- इसका उपकेन्द्र- मरु क्षेत्रीय परिसर उपकेन्द्र- बीछवाल (बीकानेर) में है।
7. भेड़ ऊन प्रशिक्षण संस्थान- जयपुर
- उद्देश्य - भेड़ एवं ऊन से संबंधित प्रशिक्षण देना।
8. केन्द्रीय ऊन विश्लेषण प्रयोगशाला बीकानेर की स्थापना 1965 में हुई है।
9. केन्द्रीय ऊन विकास बोर्ड जोधपुर की स्थापना 1987 में की गई।
भेड़ का माँस 'मटन' कहलाता है।
10. भेड़ व ऊन विभाग- जयपुर
- भेड़ के रोग-फडकिया, तरडिया, ब्लू टंग
- अविका क्रेडिट कार्ड योजना- 2004
- उद्देश्य- केन्द्रीय सहकारी बैंकों के माध्यम से भेड़ पालकों को ऋण उपलब्ध करवाना।
- अविका जीवन रक्ष योजना- 2004
- अविका कवच बीमा योजना- 2017
ऊँट
ऊँट के बच्चों को 'टोरडी' कहते हैं।
- जैसलमेरी ऊँट- सवारी और तेज दौड़ने के लिए प्रसिद्ध है। यह ऊँट की सर्वोत्तम नस्ल है, जो मारवाड़ क्षेत्र में पाया जाता है।
- बीकानेरी ऊँट- यह गाड़ी चलाने तथा हल जोतने हेतु प्रसिद्ध है। इसका क्षेत्र बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर है। राज्य में 50 प्रतिशत बीकानेरी ऊँट राजस्थान में पाए जातें हैं
3. गोमठ ऊँट की नस्लें दो प्रकार की है-
(A) महरी - सवारी के काम आता है।
(B) लादू - बोझा ढोने के लिए प्रसिद्ध है।
4. नाचना ऊँट- जैसलमेर
- यह सबसे सुंदर ऊँट है, जो सेना के जवानों के लिए भी उपयोगी है।
- उष्ट्र अनुसंधान केंद्र जोहड़बीड़, बीकानेर में है।
- उस्ताकला बीकानेर की प्रसिद्ध है, जिसका संचालन राजस्थान लघु उद्योग निगम के द्वारा किया जाता है। इसका प्रसिद्ध कलाकार हिसामुद्दीन उस्ता है।
- ऊँट में पाया जाने वाला रोग सर्रा होता है।
- राजस्थानी ऊँट केमेलस ड्रोमेडेरियस है।
ऊँट के आभूषण निम्न है-
- गला - गोरबंद
- पूँछ - परचनी
- टांग - गोडिया
- पेट - तंग/नेवार
- मुख - मोहरा/मोरखा
- पीठ - काठी/पिलाण
- नाक - गिरबाण
खरगोश
खरगोश की नस्ल को केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर (टोंक) द्वारा विकसित की गई है, जो निम्न है-
- व्हाइट जाइंट- इसका रंग सफेद होता है तथा कान लम्बे होते हैं।
- न्यूजीलैंड व्हाइट- इसका रंग सफेद होता है तथा इसका औसतन वजन कम होता है।
- ग्रे जाइंट, ब्लेक ब्राउन एवं अंगोरा प्रजाति- अंगोरा- यह ऊन उत्पादकों के लिए प्रसिद्ध है।
- सोवियत चिंचला
घोड़ा
1. मालानी- उत्पत्ति- यह काठियावाड़ी एवं सिंधी घोड़ों का मिश्रण माना जाता है।
यह गुणवत्ता के आधार पर विश्व में प्रसिद्ध है।
यह काठियावाड़ी की तरह सुंदर दिखता है।
2. काठियावाड़ी
अरबी नस्ल के घोड़ों के समान तेज दौड़ता है, इस कारण इसकी तुलना अरबी घोड़े के समान की गई है।
आजीविका के लिए अच्छे क्योंकि यह घुड़सवारी, रेस कोर्स एवं खेलकूद में काम आते हैं।
3. मारवाड़ी
- राज्य में सर्वाधिक घोड़े
- चेतक इसी नस्ल का घोड़ा माना जाता है
- अश्वपालकों का तीर्थ स्थल आलम जी का धौरा (बाड़मेर) कहलाता है।
- राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र- जोहड़बीड (बीकानेर)
- पशुपालन विभाग द्वारा 10 अश्व प्रजनन केन्द्र- 1. बिलाडा (जोधपुर), 2. सिवाणा (बालोतरा), 3. मनोहरथाना (झालावाड़), 4. बाली (पाली), 5. पाली, 6. जालौर, 7. चित्तौड़गढ़, 8. बीकानेर, 9. उदयपुर, 10. जयपुर
पशुधन विकास की योजनाएँ
- चारा विकास योजना-1959
- सर्रा रोग नियंत्रण योजना-2010-11 - यह ऊँट रोग रोकथाम के लिए है।
- ऊँट बीमा योजना- 2008-09
- पशुमाता उन्मूलन योजना- 1992
- अखिल भारतीय समन्वित शोध कार्यक्रम-1971
- केन्द्रीय ग्राम योजना- 1952
- हाफ-ए मिलियन जॉब प्रोग्राम- 1974 उद्देश्य- बेरोजगार स्नातकों की आजीविका के लिए कुक्कुट पालन व्यवस्था प्रारंभ की गई है।
- मुख्यमंत्री पशुधन निःशुल्क दवा योजना- 15 अगस्त 2012
- पशु चिकित्सालय पशुपालक द्वार योजना- 1 अगस्त 2009
- बछड़ा पालन पशु आपके द्वार योजना- 2013
- मुख्यमंत्री पशुधन निःशुल्क दवा योजना- 15 अगस्त, 2012
- एडमास (ADMAS) योजना- 1 अप्रैल, 1999 (एनिमल डिजिज मॉनीटरिंग एंड सर्विलांस प्रोजेक्ट) सूत्रधार- डॉ. वर्गीज कुरियन
- भामाशाह पशुधन बीमा योजना- 23 जुलाई 2016 (जामडोली, जयपुर)
- WRMUL डेयरी (उत्तरी राजस्थान मिल्क यूनियन लिमिटेड)-बीकानेर
- URMUL डेयरी (वेस्टर्न राजस्थान मिल्क यूनियन लिमिटेड)-जोधपुर
- महिला डेयरी परियोजना (1992-93) इसके तहत भोजुसर (बीकानेर) में महिला दुग्ध उत्पादन सहकारी समिति की स्थापना की।
- राजस्थान की पुरानी डेयरी पद्मा (अजमेर) की स्थापना 1975 में की गई।
- पशु प्रजनन नीति- जनवरी, 2007
- यह नीति गौ-नस्ल के संवर्धन के लिए लायी गई थी।
- पशुधन विकास नीति- 17 फरवरी 2010
- भेड़ एवं बकरी प्रजनन नीति- 2013
सीमन बैंक- बस्सी (जयपुर)
उद्देश्य- गाय एवं भैंस वंश की नस्ल सुधार से संबंधित
दुधारू पशुओं की दूध वृद्धि के प्रथम जर्म प्लाज्मा केन्द्र बस्सी (जयपुर ग्रामीण) में स्थापित किया गया जबकि दूसरा नर्वा खीचियान (जोधपुर ग्रामीण) में स्थापित किया गया।
राज्य में 24 जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ है।
पशुधन निःशुल्क आरोग्य योजना
- दिनांक 15.8.2012 से योजना सभी जिलों में प्रारम्भ की गई।
- मैत्री (Multi Purpose A.I. Technician in Rural India) : राष्ट्रीय गोकुल मिशन अन्तर्गत प्रदेश में गौ-वंश एवं भैंसवंश में कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण व अन्य पशुपालन से संबंधित गतिविधियों का कवरेज बढ़ाने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा स्वीकृत (100% केन्द्रीय प्रवर्तित) रोजगारपरक योजना, प्रदेश में वर्ष 2018-19 से संचालित।
विभाग द्वारा आयोजित किये जाने वाले दस राज्य स्तरीय पशु मेले निम्नानुसार है :
| मेले का नाम | जिला |
|---|---|
| श्री गोमती सागर पशु मेला, झालरापाटन | झालावाड़ |
| श्री गोगामेड़ी पशु मेला, गोगामेड़ी | हनुमानगढ़ |
| श्री वीर तेजाजी पशु मेला, परबतसर | डीडवाना-कुचामन |
| श्री जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेला | भरतपुर |
| श्री कार्तिक पशु मेला, पुष्कर | अजमेर |
| श्री चन्द्रभागा पशुमेला, झालरापाटन | झालावाड़ |
| श्री रामदेव पशु मेला, नागौर | नागौर |
| श्री शिवरात्रि पशु मेला, करौली | करौली |
| श्री मल्लीनाथ पशु मेला, तिलवाड़ा | बालोतरा |
| श्री बलदेव पशु मेला, मेडतासिटी | नागौर |
- पशु चिकित्सालय महाविद्यालय- स्थापना- 16 अगस्त 1954 यह कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर के द्वारा संचालित है।
Note- अपोलो कॉलेज ऑफ वेटनरी मेडिसिन- जयपुर
- स्थापना- 2002-03
- यह राज्य का निजी क्षेत्र का पहला पशु चिकित्सालय है।
पशु पोषाहार संस्थान- जामडोली (जयपुर)
स्थापना- 1991
उद्देश्य- पशुओं की पोषाहार से संबंधित समस्या को दूर करना।
Note : राजस्थान राज्य पशुधन प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना भी जामडोली में की गई है।
- पशुधन विकास बोर्ड- स्थापना- 25 मार्च, 1998, मुख्यालय- जामडोली
- राजीव गाँधी कृषि एवं पशुपालन विकास मिशन- स्थापना- जनवरी, 2010
- गौ-सेवा निदेशालय- जुलाई, 2013
- राजस्थान गौ सेवा आयोग- मार्च, 1995
राजस्थान राज्य पशुपालक कल्याण बोर्ड-
- स्थापना- अप्रैल 2005
- उद्देश्य- रेबारी/रायका जाति के पशुपालकों की उन्नति के लिए
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन- 2013-14
- इसमें भारत सरकार की 14 योजनाओं को शामिल किया गया है।
- राज्य में अवशीतन केन्द्र निम्न है: झालावाड़, चित्तौड़गढ़, टोंक, धौलपुर।
- उन्नत दूध परीक्षण एवं अनुसंधान
राज्य में सहकारी डेयरी फेडरेशन के अन्तर्गत 4 पशु आहार संयंत्र है जो निम्न है-
- झोटवाड़ा (जयपुर) : स्थापना - 1978-79 राजस्थान का पहला पशु आहार संयंत्र, यह राजफैड द्वारा संचालित है।
- नदबई पशु आहार संयंत्र- भरतपुर, स्थापना- 1979-80, यह सबसे छोटा पशु आहार संयंत्र है।
- तबीजी पशु आहार संयंत्र- अजमेर, स्थापना - 1980-81
- जोधपुर पशु आहार संयंत्र- जोधपुर, स्थापना- 1982-83, राज्य में सर्वाधिक बिक्री यहीं से होती है। राजस्थान पशु चिकित्सालय महाविद्यालय, बीकानेर की स्थापना 1954 में की गई।
राजकीय कुक्कुट प्रशिक्षण संस्थान- अजमेर
- स्थापना - 1988
- मत्स्य प्रशिक्षण विद्यालय उदयपुर में स्थापित है।
- प्रथम मत्स्य अभयारण्य - बड़ी तालाब (उदयपुर)
- मत्स्य सर्वेक्षण एवं अनुसंधान कार्यालय उदयपुर में है।
- राष्ट्रीय मत्स्य बीज उत्पादन फॉर्म निम्न है- कासिमपुरा (कोटा), भीमपुरा (बाँसवाड़ा)
वृहद चारा बीज उत्पादन फॉर्म- मोहनगढ़ (जैसलमेर)
- स्थापना - 1990-91
- राज्य में कपिला गौ-अभयारण्य 2014 में सांगानेर में स्थापित किया गया है।
ऑक्सीटोसीन हार्मोन
दूध उतार के लिए यह हार्मोन दिया जाता है। गाय के दूध में भैंस के दूध की तुलना में 10 गुना ज्यादा कैरोटीन होता है। भारत में प्रथम बार हिमकृत वीर्य का उपयोग 1971 में अजमेर में किया गया। दूध को सुखा देने की प्रक्रिया को "कडोर्सिंग" कहते हैं तथा उसके बाद में क्रीम, घी, आइसक्रीम इत्यादि उत्पाद बनाये जा सकते हैं। भेड़ के नवजात बच्चे को लेम्ब/लेम्बकिन कहते हैं। मुर्गियों का सबसे खतरनाक रोग रानीखेत है तथा यह टार्टफ्यूरेन्स (पैराक्सो) वायरस से फैलता है।
मुर्गियों के अन्य रोग- साल्मोनीमा, मोरेक्स
किसी भी जानवर की दूध देने की क्षमता 'कासे पे डिग्री' कहलाती है।
दूध में सर्वाधिक वसा की मात्रा नवम्बर में एवं सबसे कम जनवरी में होती है।
दुधारू पशुओं में दूधतार रोग "थनेला रोग" कहलाता है।
शुद्ध घी में मिलावट की जाँच करने की प्रक्रिया बैलेंटा परीक्षण कहलाती है जबकि यह परीक्षण कार्बोलिक अम्ल के द्वारा होता है।
मत्स्य विभाग
- स्थापना- 1982
- रंगीन मछली एक्वेरियम गैलेरी व ब्रीडिंग यूनिट परियोजना : राज्य में बाँध बीसलपुर में सजावटी मछली परियोजना का निर्माण किया गया है।
- मत्स्य विभाग द्वारा आदिवासी मछुआरों के उत्थान हेतु महत्वाकांक्षी योजना 'आजीविका मॉडल', जो शून्य राजस्व मॉडल है, राज्य के तीन जलाशयों जयसमन्द (सलूम्बर), माही बजाज सागर (बाँसवाड़ा) एवं कडाना बैक वाटर (डूंगरपुर) में प्रारम्भ की गई है।
राजस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय
राजस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर की स्थापना 13 मई, 2010 को हुई।



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