राजस्थानी मुहावरे और लोकोक्तियाँ (कहावतें) | Rajasthani Muhavare aur Lokoktiyan

राजस्थानी मुहावरे और लोकोक्तियाँ (कहावतें)

इस लेख में राजस्थानी भाषा के प्रमुख मुहावरों और लोकोक्तियों (कहावतों) का विस्तृत संग्रह दिया गया है। इसमें मुहावरे और कहावत के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए उनके सटीक अर्थ और वाक्यों में प्रयोग को समझाया गया है। यह लेख विशेष रूप से राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS), REET, पटवार, और पुलिस कांस्टेबल जैसी सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि हिंदी और राजस्थानी व्याकरण खंड में यहाँ से अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं। इस पाठ्य सामग्री की मदद से छात्र अपनी भाषा शैली को प्रभावशाली बना सकते हैं और परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त कर सकते हैं।
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मुहावरा

मुहावरा मूलतः 'अरबी' शब्द है जिसका अर्थ है - बातचीत। मुहावरे सहज एवं नैसर्गिक है अतः इनका रूप परिवर्तन नहीं किया जा सकता। ऐसा करने से मुहावरे का भाषागत एवं अर्थगत सौंदर्य ही नष्ट हो जाता है।
"किसी भाषा का वह वाक्यांश जो लक्षणा अथवा व्यंजना शक्ति के बल पर मुख्यार्थ से भिन्न किसी अन्य अर्थ को व्यक्त करता है, मुहावरा कहलाता है।

कहावत

"कहावतें लोकानुभव पर आधृत उपवाक्य हैं, जिनमें कथन की पूर्णता विद्यमान होने के साथ-साथ व्यंजना शक्ति होती है और जिनका प्रयोग किसी परिस्थिति को स्पष्ट करने के लिए किया जाता है।" कहावतें प्रायः किसी घटना या प्रसंग पर आधारित प्रयोग बोलचाल की भाषा में अधिक होता है। इन्हें 'लोकोक्ति' भी कहते हैं।
भाषा को प्राणवान बनाने एवं उनकी अभिव्यक्ति क्षमता में वृद्धि के लिए मुहावरों एवं कहावतों का प्रयोग किया जाता है।

मुहावरे एवं कहावत में अन्तर

मुहावरा कहावत
मुहावरा वाक्यांश होता है। कहावत वाक्य होते हैं।
मुहावरों में लक्षणा की प्रधानता होती है। कहावतों में व्यंजना की प्रधानता रहती है।
मुहावरा भाषा में सजीवता या कथन में चमत्कार लाने के लिए प्रयुक्त होता है। कहावत का प्रयोग किसी कथन की पुष्टि के लिए होता है।
मुहावरा केवल गद्यात्मक होता है। कहावत गद्यात्मक या पद्यात्मक दोनों प्रकार की होती है।
मुहावरों के अन्त में 'ना' अनिवार्य रूप से जुड़ा रहता है। कहावत के अन्त में 'ना' जुड़ा होना अनिवार्य नहीं है।
मुहावरे को वाक्य के अनुरूप थोड़ा-बहुत परिवर्तित किया जा सकता है। कहावतों का प्रयोग अपरिवर्तित रूप में किया जाता है।

कम-से-कम शब्दों द्वारा वक्ता जब अपना आशय व्यक्त करता है तब उसे मुहावरे या कहावत की आवश्यकता पड़ती है। इनके प्रयोग से भाषा में लाक्षणिकता एवं व्यंजकता भी आ जाती है।

प्रमुख मुहावरे : अर्थ एवं प्रयोग

1. अंगूठा दिखाना - मना कर देना।
प्रयोग - मैंने मोहन से सौ रूपए माँगे पर उसने अंगूठा दिखा दिया।

2. अक्ल का दुश्मन - मूर्ख होना।
प्रयोग - कैसे अक्ल के दुश्मन हो, सड़ी सब्जी खरीद लाए।

3. अक्ल सठियाना - बुद्धि भ्रष्ट होना।
प्रयोग - तुम्हारी तो अक्ल सठिया गई है, जवान लड़के पर हाथ उठाते हो।

4. अंगूठे पर रखना - परवाह न करना।
प्रयोग - तुम्हारी इस अपमानजनक नौकरी को मैं अंगूठे पर रखता हूँ।

5. अन्धे की लकड़ी होना - एकमात्र सहारा।
प्रयोग - इकलौता पुत्र वृद्ध माता-पिता के लिए अन्धे की लकड़ी जैसा होता है।

6. अंगारे बरसना - तीव्र गर्मी पड़ना।
प्रयोग - जून के महीने की दोपहर में तो अंगारे बरसते हैं।

7. अपना उल्लू सीधा करना - अपना काम बना लेना।
प्रयोग - नेता लोग अपना उल्लू सीधा करने की कला में प्रवीण होते हैं।

8. अपने पैरों पर खड़ा होना - खुद कमाने लगना या स्वालम्बी होना।
प्रयोग - बेटे का विवाह तभी करूँगा जब वह अपने पैरों पर खड़ा हो जाएगा।

9. अपने मुंह मियां मिट्ठू बनना - अत्यन्त प्रशंसा करना।
प्रयोग - अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने से क्या होता है, तारीफ तो तब है जब दूसरे तुम्हारी सराहना करें।

10. अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारना - अपना ही अहित करना।
प्रयोग - अपने अधिकारी से लड़कर तुमने अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारने का काम किया।

11. अपनी खिचड़ी अलग पकाना - सबसे अलग रहना।
प्रयोग - समाज में रहने वाला व्यक्ति अपनी खिचड़ी अलग पकाकर कैसे सुखी रह सकता है।

12. अपना-सा मुँह लेकर रह जाना - लज्जित होना।
प्रयोग - चाची जी ने खरी बातें रमेश को सुनाई तो वह अपना-सा मुँह लेकर रह गया।

13. आँखों का तारा होना - अत्यधिक प्रिय होना।
प्रयोग - राम दशरथ की आँखों के तारे थे।

14. आँखें चुराना - संकोच के कारण सामना करने से हिचकना।
प्रयोग - तुमने जो काम करने का वादा कर दिया और अब आँखें चुराते फिरते हो।

15. आँखें लाल-पीली करना - क्रोध करना।
प्रयोग - शिव धनुष को टूटा हुआ देखकर परशुराम आँखें लाल-पीली करने लगे।

16. आँखें बिछाना - स्वागत करना, प्रतीक्षा करना।
प्रयोग - राधा कृष्ण के लिए आँखें बिछाए बैठी थी।

17. आँखों में धूल झोंकना - धोखा देना।
प्रयोग - चोर पुलिस की आँखों में धूल झोंककर भाग गया।

18. अक्ल पर पत्थर पड़ना - बुद्धि का काम न करना, मूर्ख बनना।
प्रयोग - मेरी ही अक्ल पर पत्थर पड़ गए थे, नहीं तो तुमसे शादी क्यों करती।

19. आग बबूला होना - अत्यधिक क्रोध करना।
प्रयोग - पिता के हत्यारे को देखकर मोहन आग बबूला हो गया।

20. आस्तीन का सांप होना - कपटी मित्र।
प्रयोग - आस्तीन के सांपों से सावधान रहना चाहिए, वे कभी भी धोखा दे सकते हैं।

21. आड़े हाथों लेना - खरी खोटी सुनाना।
प्रयोग - प्रधानमन्त्री ने अपने भाषण में पाकिस्तान को आतंकवादियों समर्थन करने के कारण आड़े हाथों लिया।

22. हाथ-पांव फूलना - घबरा जाना।
प्रयोग - दुर्घटना की खबर सुनते ही मेरे तो हाथ-पांव ही फूल गए।

23. आंखें दिखाना - धमकाना।
प्रयोग - हमें आंखें मत दिखाओ, तुम्हारे जैसे रोज आते हैं।

24. आटा-दाल का भाव मालूम पड़ना - कठिनाइयों का अनुभव होना या वास्तविकता का बोध होना।
प्रयोग - अभी मजे मार लो, जब विवाह हो जाएगा तब तुम्हें आटा-दाल का भाव मालूम पड़ेगा।

25. आग में घी डालना - क्रोध को भड़का देना।
प्रयोग - परशुराम तो क्रुद्ध थे ही ऊपर से लक्ष्मण की कुटिल मुस्कान ने आग में घी डालने का काम कर दिया।

26. आसमान टूट पड़ना - अचानक मुसीबत आ जाना।
प्रयोग - पिता का अचानक देहान्त हो जाने से उस बेचारे के सिर पर तो आसमान टूट पड़ा था।

27. आसमान पर दिमाग होना - अहंकारी होना।
प्रयोग - नौकरी मिलते ही तुम्हारा तो आसमान पर दिमाग हो गया है।

28. ईंट का जवाब पत्थर से देना - करारा जवाब देना।
प्रयोग - कश्मीर से आतंकवाद तभी समाप्त होगा जब ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा।

29. ईद का चाँद होना - कभी-कभी दिखना।
प्रयोग - आप तो शादी होने के बाद ईद के चाँद हो गए हैं।

30. ईंट से ईंट बजाना - ध्वस्त कर देना।
प्रयोग - मुकदमेबाजी ने उस परिवार की ईंट से ईंट बजा दी है।

31. उंगली पर नचाना - पूरी तरह से नियन्त्रण में रखना।
प्रयोग - श्याम की पत्नी उसे उंगली पर नचाती है।

32. उल्टे छुरे से मूंड़ना - ठग लेना।
प्रयोग - सुनार ने नकली आभूषण देकर मुझे तो उल्टे छुरे से मूंड़ लिया।

33. उड़ती चिड़िया के पंख गिनना - अत्यन्त चतुर होना।
प्रयोग - चाणक्य को आप क्या समझते हैं, वह उड़ती चिड़िया के पंख गिन सकता है।

34. ऊँट के मुँह में जीरा होना - अधिक खुराक वाले को कम देना।
प्रयोग - दारासिंह को ढाई सौ ग्राम दूध देना ऊँट के मुँह में जीरा देने जैसा है।

35. एक और एक ग्यारह होना - संगठन से शक्ति बढ़ जाना।
प्रयोग - तुम दोनों भाई मिलकर रहो तभी तुमसे लोग डरेंगे क्योंकि एक और एक ग्यारह होते हैं।

36. एड़ी चोटी का जोर लगाना - बहुत प्रयास करना।
प्रयोग - आई.ए.एस. की परीक्षा पास करने के लिए उसे एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा।

37. एक थैली के चट्टे-बट्टे होना - समान प्रवृत्ति का होना।
प्रयोग - सभी राजनीतिक दल एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं क्योंकि वे सभी सत्ता लोलुप हैं।

38. ओखली में सिर देना - जान बूझकर मुसीबत मोल लेना।
प्रयोग - फौज में भर्ती होकर तुम्हारे पुत्र ने तो ओखली में सिर दे दिया है।

39. औंधी खोपड़ी का होना - बेवकूफ होना।
प्रयोग - यार तुम तो औंधी खोपड़ी के हो, अपने मां-बाप से लड़ बैठे?

40. कलेजा ठण्डा होना - संतुष्ट एवं शान्त होना।
प्रयोग - पिता के हत्यारे को मृत्युदण्ड मिलने पर ही उसका कलेजा ठण्डा हुआ।

41. कलेजे पर पत्थर रखना - दिल मजबूत करना।
प्रयोग - युवा पुत्र की मृत्यु को माता-पिता कलेजे पर पत्थर रखकर ही सहन कर पाते हैं।

42. कलेजे पर सांप लोटना - अन्तर्दाह होना।
प्रयोग - पड़ौसी की लाटरी खुल जाने पर मोहन के कलेजे पर सांप लोटने लगा।

43. कलेजा मुँह को आना - घबरा जाना।
प्रयोग - दुर्घटना में घायल पुत्र को देखकर उसका कलेजा मुँह को आ रहा था।

44. काठ का उल्लू होना - मूर्ख सिद्ध होना।
प्रयोग - चार बार जेब कटवा चुकने से तुम तो काठ के उल्लू सिद्ध हो चुके हो।

45. कान काटना - चतुर होना।
प्रयोग - वह देखने में छोटा है, बांसुरी बजाने में बड़ों-बड़ों के कान काटता है।

46. कान खड़े होना - सावधान एवं सतर्क हो जाना।
प्रयोग - जंगल में शेर की दहाड़ सुनकर जानवरों के कान खड़े हो गए।

47. कान में तेल डालकर बैठना - सुनी-अनसुनी कर लेना।
प्रयोग - मैं दो माह से तगादा कर रहा हूँ और तुम हो कि कान में तेल डालकर बैठे हो।

48. कान का कच्चा होना - सुनी बात पर तुरन्त विश्वास कर लेना।
प्रयोग - अधिकारियों को कान का कच्चा नहीं होना चाहिए।

49. काम तमाम करना - मार डालना।
प्रयोग - पुलिस ने बदमाशों का काम तमाम कर दिया।

50. काला अक्षर भैंस बराबर होना - निरक्षर होना।
प्रयोग - मैं तो कागज पर अंगूठा ही लगाता हूँ क्योंकि मेरे लिए तो काला अक्षर भैंस बराबर है।

51. कुएं में बांस डालना - बहुत खोजबीन करना।
प्रयोग - यार चार दिन से तुम कहाँ गायब थे, तुम्हें खोजने के लिए तुम्हारे घरवाले कुएं में बांस डाल रहे थे।

52. कलई खुलना - पोल खुलना।
प्रयोग - जब तुम्हारे कारनामों की कलई खुलेगी तब पता चलेगा।

53. कलेजा फटना - दुःख होना।
प्रयोग - आतंकवादियों के अत्याचार की कहानी सुनकर मेरा तो कलेजा फटने लगा।

54. कीचड़ उछालना - बदनाम करना।
प्रयोग - राजनीतिक शिष्टता को परे कर आजकल नेता एक-दूसरे पर कीचड़ उछालते हैं।

55. खून खौलना - क्रोध आना।
प्रयोग - पुत्र के सिर पर लगे गोली के घाव को देखकर आतंकवादियों के प्रति उसका खून खौलने लगा।

56. खून का प्यासा होना - प्राण लेने को तत्पर।
प्रयोग - साम्प्रदायिक दंगों में पड़ोसी भी एक-दूसरे के खून के प्यासे हो जाते हैं।

57. खाक छानना - भटकना।
प्रयोग - नौकरी प्राप्त करने के लिए बहुत खाक छाननी पड़ी।

58. खून का घूँट पीना - क्रोध को दबाना।
प्रयोग - अतिथि के समक्ष पत्नी द्वारा खून का घूँट पिया।

59. खटाई में पड़ना - व्यवधान आ जाना।
प्रयोग - नया अध्यादेश आ जाने से उसकी नियुक्ति का मामला खटाई में पड़ गया।

60. गाल बजाना - डींग हांकना।
प्रयोग - गाल बजाने वालों की असलियत सबको पता होती है।

61. गढ़े मुर्दे उखाड़ना - पुरानी एवं अप्रिय बातों का स्मरण करना।
प्रयोग - पति-पत्नी में तभी मेल हो सकता है जब वे गढ़े मुर्दे उखाड़ने की प्रवृत्ति से बचें।

62. गूलर का फूल होना - दुर्लभ होना।
प्रयोग - कहो भाई कहाँ चले गए थे, सब कह रहे थे कि गूलर के फूल हो गए हैं।

63. गांठ बांधना - याद रखना।
प्रयोग - बड़ों की नसीहत को सदैव गांठ में बांध लेना चाहिए।

64. गले पड़ना - जबरदस्ती सम्बन्ध का इच्छुक होना।
प्रयोग - वह लड़की जबरदस्ती मेरे गले पड़ रही है।

65. गुड़ गोबर कर देना - काम बिगाड़ देना।
प्रयोग - तुम्हारे तैश में आ जाने से सब गुड़ गोबर हो गया।

66. घाट-घाट का पानी पीना - अनुभवी होना।
प्रयोग - वह तुम्हारे झांसे में नहीं आने वाला क्योंकि वह तो घाट-घाट का पानी पी चुका है।

67. घी के दिए जलाना - प्रसन्न होना।
प्रयोग - राम के लौटने पर अयोध्यावासियों ने घी के दिए जलाए।

68. घाव पर नमक छिड़कना - दुःखी व्यक्ति को और दुखी करना।
प्रयोग - वह फेल हो ही गया है अब उसे खरी-खोटी सुनाकर तुम क्यों घाव पर नमक छिड़क रहे हो।

69. घुटने टेकना - हार मानना।
प्रयोग - शतरंज में विश्वनाथन आनन्द के सामने बड़े-बड़े दिग्गज खिलाड़ी घुटने टेकने को विवश हैं।

70. घड़ों पानी पड़ना - लज्जित होना।
प्रयोग - पिताजी ने पुत्र को सिगरेट पीते देख लिया तो बेचारे पर घड़ों पानी पड़ गया।

71. चाँद का टुकड़ा होना - बहुत सुन्दर होना।
प्रयोग - उसकी बहिन तो चाँद का टुकड़ा है।

72. चिकना घड़ा होना - बात का असर न होना।
प्रयोग - तुम्हें कब से समझा रहा हूँ कि रोज सुबह पढ़ा करो पर तुम तो चिकने घड़े हो।

73. चाँदी काटना - अधिक लाभ कमाना।
प्रयोग - आजकल व्यापार में खूब चाँदी काट रहे हो।

74. चाँदी का जूता मारना - रिश्वत देना।
प्रयोग - सरकारी कार्यालयों में चाँदी का जूता मारकर चाहे जो करा लो।

75. छक्के छुड़ाना - परास्त कर देना।
प्रयोग - कारगिल युद्ध में हमारे बहादुर जवानों ने शत्रु के छक्के छुड़ा दिए।

76. छप्पर फाड़ कर देना - अनायास लाभ होना।
प्रयोग - ईश्वर जब देता है तब छप्पर फाड़कर देता है।

77. छठी का दूध याद आना - अत्यधिक कठिन या कष्टप्रद होना।
प्रयोग - गणित का प्रश्न पत्र देखकर मुझे छठी का दूध याद आ गया।

78. छाती पर मूंग दलना - पास रहकर दिल दुखाना।
प्रयोग - कर्कशा सास से तंग आकर बहू ने दृढ़ता से कहा- आप चाहे जितना तंग कर लो पर मैं तो यहीं रहकर छाती पर मूंग दलूंगी।

79. छूमन्तर होना - गायब हो जाना।
प्रयोग - जुआ खेलोगे तो सारी सम्पत्ति छूमन्तर हो जाएगी।

80. छाती पर सांप लोटना - ईर्ष्या करना।
प्रयोग - मेरी उन्नति से आपकी छाती पर सांप क्यों लोटने लगता है।

81. जबान को लगाम देना - सोच समझकर बोलना।
प्रयोग - जबान को लगाम दो मोहन, क्या बड़ों से ऐसा बोलते हैं?

82. जान के लाले पड़ना - प्राण संकट में पड़ना।
प्रयोग - ऐसा तूफान आया कि मेरी जान के लाले पड़ गए।

83. जी खट्टा होना - मन फिर जाना।
प्रयोग - तुम्हारे दुर्व्यवहार ने जी खट्टा कर दिया।

84. जमीन पर पैर न रखना - अहंकार होना।
प्रयोग - नौकरी क्या मिल गई तुम तो जमीन पर पैर ही नहीं रखते।

85. जहर उगलना - बुराई करना।
प्रयोग - तुम कहते हो उसे क्षमा कर दूँ, वह है कि सदैव मेरे लिए जहर उगलता रहता है।

86. जान पर खेलना - प्राणों की बाजी लगाना।
प्रयोग - जान पर खेलकर सुरक्षाकर्मियों ने मुख्यमन्त्री को बचा लिया।

87. जी का गुबार निकालना - मन के असन्तोष को व्यक्त करना।
प्रयोग - देखो भाई साफ-साफ कहकर तुम भी अपने जी का गुबार निकाल लो तभी शान्ति मिलेगी।

88. टेढ़ी खीर होना - कठिन कार्य।
प्रयोग - कश्मीर समस्या को सुलझा पाना भारत के लिए टेढ़ी खीर है।

89. टाँग अड़ाना - दखल देना।
प्रयोग - आप हम दोनों के बीच अपनी टाँग क्यों अड़ा रहे हैं।

90. टें बोल जाना - मर जाना।
प्रयोग - दो लाठियों में ही टें बोल गया।

91.  टोपी उछालना - बेइज्जती करना।
प्रयोग - अपने बाप को गाली देकर तुम क्यों उनकी टोपी उछाल रहे हो।

92. टस से मस न होना - विचलित न होना, दृढ़ रहना।
प्रयोग - यार उसने जो कीमत बताई है, उसी पर टिका है, जरा भी टस से मस नहीं हो रहा।

93. ठाकुर सुहाती कहना - खुशामद करना।
प्रयोग - चमचों की आदत ठाकुर सुहाती करने की होती है।

94. ठोकर लगना - हानि उठाना।
प्रयोग - जब ठोकर लगेगी तब सम्बल भी नहीं पाओगे।

95. डकार जाना - हड़प जाना।
प्रयोग - वह उसके दो लाख के गहने डकार गया।

96. डोरे डालना - प्रेम में फँसाना।
प्रयोग - राधा मोहन पर डोरे डाल रही है।

97. डंके की चोट पर कहना - खुले आम कहना।
प्रयोग - मैं डंके की चोट पर कहता हूँ कि केन्द्र में मिली-जुली सरकार बनेगी।

98. ढोल की पोल होना - खोखला होना।
प्रयोग - तथाकथित बड़े आदमियों को निकट से देखने पर ही पता चलता है कि ढोल में पोल है।

99. ढिंढोरा पीटना - सबको बता देना।
प्रयोग - कभी-कभी ढिंढोरा पीटने से बनता हुआ काम भी बिगड़ जाता है।

100. तलवे चाटना - खुशामद करना।
प्रयोग - मुझे टिकट तो चाहिए नहीं फिर मैं नेताजी के तलवे क्यों चाटता फिरूँ?

101. तीन तेरह होना - बिखर जाना।
प्रयोग - उनका कितना बड़ा परिवार था पर अब तो सब तीन-तेरह हो गया।

102. तीन-पांच करना - टालमटोल करना।
प्रयोग - ज्यादा तीन-पांच मत करो, काम करना है तो कर दो।

103. तलवार की धार पर चलना - कठिन कार्य करना।
प्रयोग - प्रेम करना तलवार की धार पर चलने जैसा है।

104. तिल का ताड़ करना - छोटी बात से मुकर जाना।
प्रयोग - बालकों की लड़ाई थी पर बड़ों ने उसमें हस्तक्षेप करके तिल का ताड़ बना दिया।

105. तलवार के घाट उतारना - मार डालना।
प्रयोग - नादिरशाह ने निर्दोष नागरिकों को तलवार के घाट उतार दिया।

106. थूक कर चाटना - कही बात से मुकर जाना।
प्रयोग - आपने वायदा तो नौकरी दिलाने का किया था पर अब साफ इनकार करके आप थूक कर चाटने का काम कर रहे हो।

107. थाली का बैंगन होना - सिद्धान्तिहीन होना।
प्रयोग - कुछ नेता तो थाली के बैंगन जैसे हैं, सरकार के मन्त्रीपद पाने के लिए वे तुरन्त पार्टी बदल लेते हैं।

108. दाँत खट्टे करना - पराजित कर देना।
प्रयोग - भारतीय सेना ने शत्रु सेना के दाँत खट्टे कर दिए।

109. दाल न गलना - काम न बनना।
प्रयोग - श्री कृष्ण के समक्ष कंस की दाल न गली।

110. दाँत काटी रोटी होना - गहरी मित्रता
प्रयोग - श्री कृष्ण और सुदामा में दाँत काटी रोटी का सम्बन्ध था।

111. दाग लगना - कलंक लगना।
प्रयोग - लड़की भाग जाने से उनके कुल में तो दाग लग गया।

112. दाँतों तले उंगली दबाना - आश्चर्य करना।
प्रयोग - छोटे से बच्चे के मुख से गम्भीर प्रवचन सुनकर श्रोता दाँतों तले उंगली दबाने लगे।

113. दाल में काला होना - आशंका होना।
प्रयोग - सवेरे-सवेरे मोहल्ले में पुलिस की जीप आई देखकर लोग सोचने लगे कि जरूर दाल में कुछ काला है।

114. दो-दो हाथ करना - युद्ध करना, लड़ना।
प्रयोग - पाकिस्तान से दो-दो हाथ किए बिना कश्मीर समस्या नहीं सुलझ सकती।

115. दिन में तारे दिखना - बुद्धि चकरा जाना।
प्रयोग - ऐसा हाथ दूँगा कि दिन में तारे दिखने लगेंगे।

116. धूप में बाल सफेद होना - अनुभव न होना।
प्रयोग - आपको विवाह की रस्में भी नहीं पता लगता है आपने तो धू प में बाल सफेद किए हैं।

117. धूल में मिला देना - नष्ट कर देना।
प्रयोग - अमेरिकी बमबारी ने अफगानिस्तान को धूल में मिला दिया।

118. धाक जमाना - प्रभावित करना।
प्रयोग - बढ़िया व्याख्यान देकर आपने अपने विद्वता की धाक जमा दी।

119. नाक रगड़ना - विनती करना।
प्रयोग - भले ही नाक रगड़ो पर मैं तुम्हें नहीं छोड़ने वाला नहीं।

120. नाक में दम करना - परेशान करना।
प्रयोग - इस लड़के ने तो नाक में दम कर दिया, जरा देखो चुप नहीं बैठता।

121. नमक हराम होना - कृतघ्न होना।
प्रयोग - मेरे नौकर ने जेवर चुराकर नमक हराम होने का प्रमाण दिया।

122. नौ दो ग्यारह होना - भाग जाना।
प्रयोग - बिल्ली को देखकर चूहे नौ दो ग्यारह हो गए।

123. नाक में नकेल पड़ना - उत्तरदायित्व का अनुभव होना।
प्रयोग - बेटे की शादी कर दो तभी उसकी नाक में नकेल पड़ेगी।

124. नाकों चने चबाना - बहुत सताना।
प्रयोग - ऐसे मकान खाली नहीं करूँगा कोर्ट में घसीटकर तुम्हें नाकों चने चबवा दूँगा।

125. नाक-भौं सिकोड़ना - अप्रसन्नता व्यक्त करना।
प्रयोग - दहेज में आए साधारण सामान को देखकर घर वाले नाक-भौं सिकोड़ने लगे।

126. नाक कटाना - प्रतिष्ठा को धूल में मिलाना।
प्रयोग - तुम्हारे भाई ने चोरी करके मेरी तो नाक कटा दी।

127. पत्थर की लकीर होना - अमिट होना।
प्रयोग - महापुरूष की कही बातें पत्थर की लकीर होती हैं, उन्हें आजमा कर देख लो।

128. पाँचों उंगली घी में होना - अधिक लाभ होना।
प्रयोग - युद्ध के अवसर पर व्यापारियों की पाँचों उंगलियां घी में होती हैं।

129. पीठ दिखाना - हार जाना।
प्रयोग - कारगिल में पाकिस्तानी सेना पीठ दिखाकर भाग गई।

130. पेट में दाढ़ी होना - कम उम्र में अधिक जानना।
प्रयोग - अर्चित को कम मत समझो, इसके पेट में दाढ़ी है।

131. पानी-पानी होना - लज्जित होना।
प्रयोग - पुत्र को हवालात में बन्द देखकर अधिकारी पिता पानी-पानी हो गया।

132. पेच ढीला होना - कुछ पागल होना।
प्रयोग - उसके मुँह मत लगो, उसके तो पेच ढीले हैं।

133. पीठ में छुरा भौंकना - धोखा देना।
प्रयोग - राजनीति में तमाम नेता पीठ में छुरा भौंकने का काम करते हैं।

134. पौ बारह होना - खूब लाभ होना।
प्रयोग - महंगाई के कारण व्यापारियों की पौ बारह हो रही है।

135. पाँचों उंगली बराबर न होना - एक समान न होना।
प्रयोग - आपकी यह धारणा गलत है कि बिहार के सभी लोग चोर-उचक्के होते हैं, क्योंकि पाँचों उंगली बराबर नहीं होतीं।

136. फूलकर कुप्पा होना - प्रसन्न होना।
प्रयोग - नौकरी मिल जाने की खबर सुनकर वह फूलकर कुप्पा हो गया।

137. फूला न समाना - अत्यन्त प्रसन्न होना।
प्रयोग - प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने पर सोहन फूला न समाया।

138. बन्दर घुड़की देना - डराना।
प्रयोग - प्रथम ने बन्दर घुड़की देकर चोर से सब उगलवा लिया।

139. बाल बांका न होना - कुछ भी हानि न होना।
प्रयोग - भगवान जिसकी रक्षा करता हो उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता।

140. बीड़ा उठाना - प्रण करना।
प्रयोग - मैंने दो वर्ष में आई.ए.एस. परीक्षा उत्तीर्ण करने का बीड़ा उठा लिया है।

141. बगुला भगत होना - पाखण्डी होना।
प्रयोग - गेरूए कपड़े पहनने वाले इन बगुला भक्तों से सावधान रहने की आवश्यकता है।

142. बाल की खाल निकालना - सूक्ष्म विवेचन करना।
प्रयोग - वकील लोग बाल की खाल निकालकर ही मुकदमा जीतते हैं।

143. बगलें झांकना - निरुत्तर होना।
प्रयोग - अध्यापक के प्रश्न को सुनकर सारे विद्यार्थी बगलें झांकने लगे।

144. भीगी बिल्ली बनना - डर जाना।
प्रयोग - पुलिस को देखते ही अफीमची भीगी बिल्ली बन जाते हैं।

145. भूत सवार होना - पूरी तरह कार्य में जुट जाना।
प्रयोग - परीक्षा की तैयारी करने का भूत सवार हो गया है।

146. भैंस के आगे बीन बजाना - प्रभावित न कर पाना।
प्रयोग - मेरी बात पर तुम ध्यान नहीं दे रहे, लगता है मैं अब तक भैंस के आगे बीन बजा रहा था।

147. भेड़ चाल होना - बिना विचार के अनुसारी होना।
प्रयोग - नई सभ्यता अपनाने की होड़ लगी है, यह सब भेड़ चाल का दुष्परिणाम है।

148. मुंह में पानी आना - ललचाना।
प्रयोग - रसगुल्ले देखते ही पण्डित जी के मुंह में पानी आ गया।

149. मिली भगत होना - षड्यन्त्र में शामिल होना।
प्रयोग - इस हत्या में नेताजी की मिली भगत है, यह मैं दावे से कहता हूँ।

कुछ अन्य मुहावरों के अर्थ

मुहावरा - अर्थ
  1. अंग-अंग ढीला होना - बहुत थक जाना
  2. अन्धे के हाथ बटेर लगना - अनायास मिल जाना
  3. अक्ल के पीछे लट्ठ लिए फिरना - मूर्खतापूर्वक कार्य करना
  4. अपना रंग जमाना - प्रभावित करना
  5. अरमान निकालना - इच्छा पूरी करना
  6. आंख उठाकर न देखना - उपेक्षा करना
  7. आंधी के आम होना - आसानी से उपलब्ध
  8. आठ-आठ आंसू रोना - बुरी तरह पछताना
  9. आसमान से बातें करना - बहुत बड़ी-बड़ी बातें बनाना
  10. आसमान पर उड़ना - अभिमान करना
  11. आकाश के तारे गिनना - नींद न आना
  12. आकाश का चांद हाथ आना - दुर्लभ वस्तु प्राप्त होना
  13. आसन डोलना - अस्थिर हो जाना
  14. कोढ़ में खाज होना - दुख पर दुख आना
  15. खूंटे के बल कूदना - किसी का सहारा पाकर अकड़ना
  16. खून पसीना एक करना - कठिन परिश्रम करना
  17. अंगारों पर पैर रखना - जानबूझकर खतरे का काम करना
  18. अन्धे के आगे रोना - निर्दय व्यक्ति से दया की याचना करना
  19. अग्नि परीक्षा देना - साहसपूर्वक सामना करना
  20. अपना सिक्का जमाना - प्रभुत्व स्थापित करना
  21. कान भरना - झूठी शिकायत करना
  22. कान कतरना - चालाक होना
  23. कान काटना - होशियार होना
  24. कालानग होना - बहुत घातक व्यक्ति होना
  25. केर-बेर का संग - विपरीत मेल
  26. काम तमाम करना - मार डालना
  27. किस्मत फूटना - दुर्भाग्य से बुरे दिन आना
  28. कोल्हू का बैल होना - निरन्तर कार्य में लगा रहना
  29. इज्जत उतारना - अपमानित करना
  30. ईमान बगल में दबाना - बेईमान करना
  31. उठ जाना - मर जाना
  32. उल्टी गंगा बहाना - रीति विरुद्ध कार्य हो जाना
  33. उल्टी खोपड़ी का होना - मूर्ख या नासमझ
  34. ख्याली पुलाव पकाना - काल्पनिक बातें करना
  35. खाल खींचना - बहुत अधिक मारपीट करना
  36. खिचड़ी पकाना - गुप्त योजना, षड्यन्त्र करना
  37. खून सिर पर सवार होना - मार डालने को तत्पर होना
  38. खिल्ली उड़ाना - मजाक उड़ाना
  39. ओठ चबाना - क्रोध प्रकट करना
  40. ओठ बिचकाना - घृणा या अप्रसन्नता व्यक्त करना अहित होना
  41. औकात मालूम होना - वास्तविकता का ज्ञान होना
  42. औकात बता देना - मर्यादा का ज्ञान करा देना वास्तविकता का ज्ञान करा देना
  43. गांठ बांधना - अच्छी तरह समझ लेना याद रखना
  44. गाजर मूली समझना - तुच्छ एवं शक्तिहीन मानना
  45. गाढ़ी छनना - गहरी मित्रता होना
  46. गुरू घंटाल होना - असाधारण व्यक्तित्व
  47. गूड़ी का लाल होना - विशेष व्यक्ति
  48. गुल खिलना - कोई बखेडा करना
  49. घाव हरा करना - भूले हुए दुःख की याद दिलाना
  50. घी-खिचड़ी होना - खूब घुल-मिल जाना
  51. घोड़े बेचकर सोना - निश्चित हो जाना
  52. घूरे के दिन फिरना - अच्छे दिन आना
  53. घर काटने को दौड़ना - घर में मन न लगना
  54. चींटी के पर निकलना - विनाश के निकट होना
  55. चोटी का पसीना एड़ी तक आना - कड़ा परिश्रम करना
  56. चौदहवीं का चाँद होना - अत्यधिक सुन्दर होना
  57. चादर देखकर पांव पसारना - सामर्थ्य के अनुसार कार्य करना
  58. चार चाँद लगना - प्रतिष्ठा बढ़ना
  59. चंदूखाने की बातें होना - झूठी बातें होना
  60. चंडाल चौकड़ी - दुष्टों का समूह
  61. चिराग लेकर ढूंढना - बहुत खोजबीन करना
  62. चुल्लू भर पानी में डूब मरना - लज्जित होना
  63. चूड़ियाँ पहनना - कायरता पूर्ण कार्य
  64. चेहरे पर हवाइयां उड़ना - घबरा जाना
  65. फूल झड़ना - प्रिय वचन बोलना
  66. फूटी आंखों न देखना - घृणा करना
  67. बछिया का ताऊ होना - मूर्ख होना
  68. बहती गंगा में हाथ धोना - अवसर का लाभ उठाना
  69. बाल का धनी होना - अत्यन्त सरल कार्य
  70. बखिया उधेड़ना - किसी की गुप्त बात को प्रकट करना
  71. उंगली पकड़कर पहुंचा पकड़ना - पहले थोड़ा, बाद में पूरे पर अधिकार कर लेना
  72. एक पांव से खड़े रहना - आज्ञा पालन में तत्पर रहना
  73. एक लाठी से सबको हांकना - सबके साथ समान व्यवहार करना
  74. गच्चा खा जाना - धोखा खा जाना
  75. गेहूं के साथ घुन पिसना - दोषी के साथ निर्दोष का भी
  76. गूंगा का गुड़ होना - अनुभव को व्यक्त न कर पाना
  77. गोबर गणेश होना - निरा मूर्ख होना
  78. कच्चा चिट्ठा खोलना - सारा भेद खोल देना
  79. कच्ची गोली खेलना - अनुभवहीन होना
  80. कटे पर नमक छिड़कना - दुखी को और दुखी करना
  81. कमर कसना - तैयार (तत्पर) हो जाना
  82. कलेजा धक् से रह जाना - एकाएक डर जाना
  83. कहा सुनी होना - झगड़ा होना
  84. कान बिछाना - अड़चन पैदा करना
  85. काजल की कोठरी - कलंक लगने का स्थान
  86. काठ होना - निश्चेष्ट होना
  87. कान पकड़ना - गलती मान लेना
  88. कान पर जूं तक न रेंगना - कुछ भी प्रभाव न पड़ना
  89. घोंघा बसंत होना - मूर्ख व्यक्ति
  90. मिट्टी का माधो होना - मूर्ख या बुद्धू होना
  91. मुँह धोकर आना - आशा न करना
  92. मुट्ठी में कसा - वश में करना
  93. म्याऊँ का ठौर पकड़ना - खतरनाक काम करना
  94. मन के लड्डू खाना - कल्पना करके प्रसन्न होना
  95. मन मसोसना - विवश होना
  96. मन की मन में रहना - इच्छा पूरी न होना
  97. मक्खियां मारना - कुछ भी कार्य न करना
  98. मिट्टी में मिला देना - नष्ट कर देना
  99. मुँह से लार टपकना - प्राप्ति की इच्छा होना
  100. मुँह पे लगाम न होना - बिना सोचे-समझे कुछ भी कह देना
  101. मुंह फुलाना - रूठ जाना
  102. मोम होना - द्रवीभूत होना, दया से पिघलना
  103. रंग लाना - गुण दिखाना, प्रभाव दिखाना
  104. राई का पहाड़ बनाना - छोटी बात को बढ़ा देना।
  105. रास्ते पर लाना - सुधार करना
  106. राम-नाम सत्य होना - मर जाना
  107. रेल-पेल होना - अत्यधिक भीड़-भाड़
  108. लाल-पीला होना - बहुत गुस्सा होना
  109. लहू के आंसू पीना - दुःख सह लेना
  110. लल्लो चप्पो करना - खुशामद करना, चिकनी चुपड़ी
  111. बाएं हाथ का खेल होना - अत्यन्त सरल काम
  112. बालू से तेल निकालना - असम्भव को सम्भव कर दिखाना
  113. बाग-बाग होना - अत्यधिक प्रसन्न होना
  114. बेपेंदी का लोटा होना - वर्चस्व न होना
  115. भंडा फूटना - भेद खुल जाना
  116. भाड़ झोंकना - कुछ भी न करना
  117. भेड़िया धसान होना - अन्धानुकरण करना
  118. भाड़े का टट्टू होना - पैसा लेकर ही काम करने वाला
  119. भुजा उठाकर कहना - प्रतिज्ञा कहना
  120. मजा चखाना - बदला लेना
  121. मैदान मारना - जीत लेना, जीतना
  122. सींग कटाकर बछड़ों में काम करना - बूढ़े होकर भी बच्चों जैसा
  123. सेमल का फूल होना - थोड़े दिनों का अस्तित्व होना मिलना
  124. सिर मुड़ाते ही ओले पड़ना - कार्य के आरम्भ में ही परेशानी आना
  125. सीधी उंगली से घी न निकलना - आसानी से काम न बनना
  126. सोने में सुहागा होना - गुणों में और वृद्धि होना
  127. हाथ पसारना - मांगना
  128. हाथ-पैर मारना - प्रयास करना
  129. हुलिया तंग होना - आर्थिक तंगी होना
  130. हाथ भर का कलेजा - साहसी होना
  131. हौसला पस्त होना - उत्साह भंग होना
  132. हाथ धोकर पीछे पड़ना - बुरी तरह पीछे पड़ना
  133. हाथ को हाथ न सूझना - घना अन्धकार होना
  134. हौआ बैठना - भयभीत होना
  135. हाथ साफ करना - बेईमानी से लेना बातें करना
  136. लुटिया डुबोना - हानि करना, बरबाद करना
  137. लकीर का फकीर होना - अन्धविश्वासी होना
  138. लहू का प्यासा होना - जान से मारने को तत्पर
  139. लंगोटिया यार होना - गहरी मित्रता होना
  140. लोहा मानना - श्रेष्ठता स्वीकार करना
  141. सब्जबाग दिखाना - झूठी आशा देना
  142. सांप को दूध पिलाना - शत्रु का पोषण करना
  143. सफेद झूठ होना - पूरी तरह असत्य
  144. सिट्टी पिट्टी गुम हो जाना - भयभीत हो जाना
  145. सिर पर पाँव रखना - तुरन्त भाग जाना
  146. सिर हथेली पर रखना भागना - मरने-मारने को तैयार होना
  147. हवा लगना - प्रभावित होना
  148. हाथ लगना - प्राप्त होना
  149. हाथ के तोते उड़ना - स्तब्ध रह जाना, घबरा जाना
  150. हाथ मलना - पछताना
  151. हुलिया बिगाड़ना - दुर्दशा करना
  152. हाथ पर हाथ रखकर बैठना - कोई काम न करना
  153. हाथ पांव फूलना - घबरा जाना
  154. हालत पतली होना - दयनीय दशा होना
  155. हथेली पर सरसों जमाना - बहुत जल्दी काम कर लेने की इच्छा

प्रमुख कहावतें एवं उनके अर्थ

कहावत - अर्थ
  1. अपनी करनी पार उतरनी - जैसा करना वैसा भरना
  2. आधा तीतर आधा बटेर - बेतुका मेल
  3. अधजल गगरी छलकत जाय - थोड़ी विद्या या थोड़े धन को पाकर वाचाल हो जाना
  4. अन्धों में काना राजा - अज्ञानियों में अल्पज्ञ की मान्यता होना
  5. अक्ल बड़ी या भैंस - शारीरिक शक्ति की तुलना में बौद्धिक शक्ति की श्रेष्ठता होना
  6. अपनी-अपनी ढपली अपना-अपना राग - वैचारिक भिन्नता होना
  7. आम के आम गुठलियों के दाम - दुहरा लाभ होना
  8. अपने मुंह मियां मिट्ठू बनना - आत्म प्रशंसा करना
  9. आंख का अन्धा गांठ का पूरा - धनी मूर्ख
  10. अन्धेर नगरी चौपट राजा - मूर्ख राजा के राज्य में अन्याय होना
  11. आ बैल मुझे मार - जान बूझकर झगड़ा मोल लेना
  12. आगे नाथ न पीछे पगहा - पूर्ण स्वतन्त्र होना
  13. अपना हाथ जगन्नाथ - अपना किया हुआ काम लाभदायक होता है
  14. अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत - पहले सावधानी न बरतना बाद में व्यर्थ पछताना
  15. आगे कुआं पीछे खाई - सभी ओर से विपत्ति आना
  16. ऊँची दुकान फीका पकवान - मात्र दिखावा
  17. उल्टा चोर कोतवाल को डांटे - अपना दोष दूसरे के मत्थे मढ़ना
  18. उंगली पकड़कर पहुंचा पकड़ना - धीरे-धीरे साहस बढ़ जाना
  19. उल्टे बांस बरेली को - विपरीत कार्य करना
  20. उतर गई लोई क्या करेगा कोई - इज्जत जाने पर भय कैसा
  21. ऊधो का लेना न माधो का देना - किसी से कोई सम्बन्ध न रखना
  22. ऊँट की चोरी निहुरे-निहुरे - बड़ा काम लुक छिपकर नहीं होता
  23. एक पंथ दो काज - एक काम से दूसरा काम
  24. एक थैली के चट्टे बट्टे - समान प्रकृति वाले
  25. एक म्यान में दो तलवार - एक स्थान पर दो समान वस्तुएँ या व्यक्ति एक साथ नहीं रह सकते
  26. एक मछली सारे तालाब को गन्दा करती है - एक खराब व्यक्ति सारे समाज को बदनाम कर देता है
  27. एक हाथ से ताली नहीं बजती - झगड़ा दोनों ओर से होता है
  28. एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा - दुष्ट व्यक्ति में और भी दुष्टता का समावेश होना
  29. एक अनार सौ बीमार - कम वस्तु चाहने वाले अधिक
  30. एक बूढ़े बैल को कौन बांध धुस देय - अकर्मण्य (या वृद्ध) को कोई नहीं रखना चाहता
  31. ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डरना - जान-बूझकर प्राणों को संकट में डालने वाले प्राणों की चिन्ता नहीं करते
  32. अंगूर खट्टे हैं - वस्तु न मिलने पर उसमें दोष निकालना
  33. कहां राजा भोज कहां गंगू तेली - बेमेल एकीकरण
  34. काला अक्षर भैंस बराबर - निरक्षर या अनपढ़
  35. कोयले की दलाली में मुंह काला - बुरे काम से बुराई मिलना
  36. काम का न काज का - बिना काम बैठे-बैठे खाना
  37. काठ की हण्डिया बार-बार नहीं चढ़ती - कपटी व्यवहार हमेशा नहीं किया जा सकता
  38. का बरखा जब कृषि सुखाने - काम बिगड़ने पर सहायता व्यर्थ होती है
  39. कभी नाव गाड़ी पर कभी गाड़ी नाव पर - समय पड़ने पर एक-दूसरे की मदद करना
  40. खोदा पहाड़ निकली चुहिया - कठिन परिश्रम का तुच्छ परिणाम
  41. खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे - अपनी शर्म छिपाने के लिए व्यर्थ का काम
  42. खग जाने खग ही की भाषा - समान प्रवृत्ति के लोग एक-दूसरे को समझ पाते हैं
  43. गंजेड़ी यार किसके, दम लगाई खिसके - मतलबी यार स्वार्थ साधने के बाद साथ छोड़ देते हैं
  44. गुड़ खाए गुलगुलों से परहेज - ढोंग रचना
  45. घर की मुर्गी दाल बराबर - अपनी वस्तु का कोई मोल नहीं
  46. घर का भेदी लंका ढाये - घर का शत्रु अधिक खतरनाक होता है
  47. घर खीर तो बाहर भी खीर - अपना घर सम्पन्न हो तो बाहर भी सम्मान मिलता है
  48. चिराग तले अंधेरा - अपना दोष स्वयं दिखाई नहीं देता
  49. चोर की दाढ़ी में तिनका - अपराधी व्यक्ति सदैव सशंकित रहता है
  50. चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए - कंजूस होना
  51. चोर-चोर मौसेरे भाई - एक से स्वभाव वाले
  52. जल में रहकर मगर से बैर - स्वामी से शत्रुता नहीं करना चाहिए
  53. जाके पांव पर फटी बिवाई वो क्या जाने पीर पराई - भुक्त भोगी ही दूसरों का दुख जान पाता है
  54. थोथा चना बाजे घना - ओछा आदमी अपने महत्व का अधिक प्रदर्शन करता है
  55. छाती पर मूंग दलना - कोई ऐसा काम होना जिससे आपको व दूसरों को कष्ट पहुँचे
  56. दाल भात में मूसलचन्द - व्यर्थ में दखल देना
  57. धोबी का कुत्ता घर का न घाट का - कहीं का न रहना
  58. नेकी और पूछ-पूछ - बिना कहे ही भलाई करना
  59. नीम हकीम खतरे जान - अल्पज्ञान खतरनाक
  60. दूध का दूध पानी का पानी - ठीक-ठीक न्याय करना
  61. बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद - गुणहीन गुण को नहीं पहचानता
  62. पर उपदेश कुशल बहुतेरे - दूसरों का उपदेश देना सरल
  63. नाम बड़े दर्शन छोटे - प्रसिद्धि के अनुरूप गुण न होना
  64. भागते भूत की लंगोटी सही - जो मिल जाये वही काफी है
  65. मान न मान मैं तेरा मेहमान - जबरदस्ती गले पड़ना
  66. सिर मुंडाते ही ओले पड़े - कार्य प्रारम्भ होते ही विघ्न आना
  67. हाथ कंगन को आरसी क्या - प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या जरूरत
  68. होनहार बिरवान के होत चीकने पात - होनहार व्यक्ति बचपन में पता चल जाता है
  69. बद अच्छा बदनाम बुरा - बदनामी बुरी चीज़ है
  70. मन चंगा तो कठौती में गंगा - शुद्ध मन से भगवान प्राप्त होते हैं

कुछ अन्य प्रमुख कहावतें और उनके अर्थ

  1. अन्धे के आगे रोवे अपने नैना खोवे - नासमझ अन्यायी के आगे दुखड़ा सुनाना व्यर्थ है
  2. अंधा बांटे रेवड़ी फिर-फिर अपने को देय - न्याय की अवहेलना करके अपनों को लाभ पहुँचाना
  3. अन्धेर नगरी चौपट राजा - अन्याय का बोलबाला होना
  4. आंख का अन्धा गांठ का पूरा - मूर्ख धनवान व्यक्ति
  5. अंधा क्या चाहे दो आंखें - इच्छित वस्तु की अनायास प्राप्ति होना
  6. अन्धा पीसे कुत्ता खाय - मूर्ख के धन का उपयोग दूसरे ही करते हैं
  7. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता - अकेला व्यक्ति कोई बड़ा सामूहिक कार्य नहीं कर सकता
  8. आधी छोड़ पूरी को धावै आधी मिले न पूरी पावै - अतिलाभ के चक्कर में त्याग
  9. आंख का अन्धा नाम नयनसुख - नाम के विपरीत गुण
  10. आए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास - उद्देश्य से भटक जाना
  11. आम खाने से मतलब कि पेड़ गिनने से - अपने मतलब की बात करना, व्यर्थ न करना
  12. आया है जो जाएगा राजा रंक फकीर - सबकी मृत्यु सुनिश्चित है
  13. आसमान से गिरा खजूर पर अटका - एक विपत्ति से मुक्त होते ही दूसरी विपत्ति आ जाना
  14. इस हाथ से दे उस हाथ ले - कर्म का फल शीघ्र मिलता है
  15. ईश्वर की माया कहीं धूप कहीं छाया - संसार में कहीं सुख तो कहीं दुख
  16. उतावला सो बावला - मूर्ख व्यक्ति जल्दबाजी में काम करते हैं
  17. ऊसर बरसे तृन नहीं जाए - मूर्ख पर उपदेश का प्रभाव नहीं पड़ता
  18. ऊंट के मुंह में जीरा - आवश्यकता से बहुत कम होना
  19. ऊंट बिलाई लै गई तो हाँ-हाँ कहना - शक्तिशाली की अनुचित बात का समर्थन करना
  20. एक और एक ग्यारह - संगठन से शक्ति बढ़ती है
  21. एक तो चोरी ऊपर से सीना जोरी - अपराधी द्वारा रौब जमाना
  22. ओछे की प्रीति बालू की - ओछे व्यक्ति से मित्रता टिकती नहीं भीती है
  23. कहे से कुम्हार गधे पर नहीं चढ़ता - कहने से काम न करना
  24. कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा भानुमती ने कुनबा जोड़ा - सिद्धान्तहीन गठबन्धन
  25. का वर्षा जब कृषि सुखाने - अवसर बीत जाने पर सहायता मिलने का कोई लाभ नहीं है
  26. कानी के ब्याह में सौ जोखिम - कमी आने पर अनेक बाधाएँ आती हैं
  27. कौआ चले हंस की चाल - दूसरे का अनुकरण/नकल करने की प्रवृत्ति
  28. को उन्तप होब ध्यहिका हानि - परिवर्तन का प्रभाव न पड़ना
  29. खाल उठाए सिंह की स्यार सिंह नहि होय - बाहरी रूप बदलने से गुण नहीं बदलते
  30. गंगा गए गंगादास जमुना गए जमुनादास - जो व्यक्ति सामने हो उसी की प्रशंसा करना
  31. गागर में सागर भरना - कम शब्दों में अधिक बात करना
  32. घर में नहीं दाने अम्मा चली भुनाने - सामर्थ्य से बाहर कार्य करना
  33. घर का जोगी जोगना आन गांव का सिद्ध - अपरिचितों के बीच ही सम्मान मिलता है
  34. चन्दन की चुटली भीली गाड़ी भरा न काठ - उत्तम वस्तु थोड़ी भी अच्छी है
  35. चट मंगनी पट ब्याह - शुभ कार्य तुरन्त सम्पन्न कर देना चाहिए
  36. चार दिन की चांदनी फिर अन्धेरी रात - थोड़े समय का सुख तत्पश्चात् दुःख
  37. चित्त भी मेरी पट्ट भी मेरी - शक्तिशाली अपना लाभ हर तरफ से चाहता है
  38. चौबे गए छब्बे बनने दुबे बनकर आ गए - लाभ के बदले हानि
  39. चन्दन विष व्याप्त नहीं लिपटे रहत भुजंग - सज्जन पर कुसंग का प्रभाव नहीं पड़ता
  40. छोटे मियां तो छोटे मियां बड़े मियां सुभान अल्लाह - छोटे से बड़ा और भी अधिक बुरा
  41. छछूंदर के सिर में चमेली का तेल - कुरूप के लिए सौन्दर्य प्रसाधन का तेल
  42. जान है तो जहान है - जीवन ही सब कुछ है
  43. जिसकी लाठी उसकी भैंस - शक्ति का बोलबाला
  44. जैसे नागनाथ वैसे सांपनाथ - दुष्टों की प्रवृत्ति एक जैसी होना
  45. जैसी करनी वैसी भरनी - कार्य के अनुसार फल मिलना
  46. जंगल में मोर नाचा किसने देखा - गुण की कदर गुणवानों के बीच होती है
  47. जैसा देश वैसा भेष - देशकाल के अनुरूप परिवर्तन करना चाहिए
  48. झूठ के पांव नहीं होते - असत्य अधिक समय तक नहीं टिकता
  49. डेढ़ पाव आटा पुल पै रसोई - थोड़ी सम्पत्ति पर भारी दिखावा
  50. ठण्डा लोहा गरम लोहे को काट देता है - क्रोध पर शान्ति की विजय होती है
  51. तन पर नहीं लत्ता पान खाय अलबत्ता - झूठी रईसी दिखाना
  52. तिरिया तेल हमीर हठ न चढ़े दूजी बार - दृढ़ प्रतिज्ञ लोग अपनी बात पर डटे रहते हैं
  53. तुरन्त दान महाकल्याण - जो कार्य करने हों उसे तुरन्त कर डालना
  54. तेली का तेल जले मशालची का दिल जले - उपकार कोई करे, ईर्ष्या किसी और को हो
  55. तीन लोक से मथुरा न्यारी - सबसे अलग रहना
  56. तुम डाल-डाल हम पात-पात - चालाक से भी अधिक चालाक होना
  57. तेते पांव पसारिए जेती लांबी सौर - सामर्थ्य के भीतर कार्य करना
  58. दुविधा में दोनों गए माया मिली न राम - दुविधा में दोनों काम बिगड़ जाते हैं
  59. दुधारू गाय की लात भी अच्छी - लाभदायक की बात सहन करनी पड़ती है
  60. दूध का दूध पानी का पानी - सही न्याय करना
  61. दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है - एक बार धोखा खाने के बाद व्यक्ति बहुत सावधानी बरतता है
  62. दान की बछिया के दाँत नहीं देखे जाते - मुफ्त में मिली वस्तु के गुण अवगुण नहीं देखे जाते
  63. दूर के ढोल सुहावने होते हैं - दूर की वस्तु अच्छी लगती है
  64. पांचों उंगलियां बराबर नहीं - सभी में समान गुण नहीं होते
  65. पुचकारा कुत्ता सिर चढ़े - ओछे लोग मुंह लगाने पर अनुचित लाभ उठाते हैं
  66. प्यादे ते फरजी भयो टेढ़ो-टेढ़ो जाए - तुच्छ पद पाने पर इतराने लगता है
  67. प्रभुता पाहि काहि मद नहीं - व्यक्ति अधिकार पा घमण्डी हो जाता है
  68. बोया पेड़ बबूल का आम कहां ले होय - बुरे कर्म का अच्छा फल नहीं हो सकता है
  69. बीती ताहि बिसारि दै आगे की सुधि लेय - भूतकाल को भूलकर भविष्य के लिए संभल जाना चाहिए
  70. भई गति सांप छछूंदर करी - असमंजस की स्थिति में पड़ना
  71. भैंस के आगे बीन बजावै - मूर्ख को उपदेश देना व्यर्थ है
  72. मन के हारे हार हैं मन के जीते जीत - मन के हारने से हार है एवं मन के जीतने से जीत
  73. मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक - सीमित क्षेत्र तक पहुंच होना
  74. मेंढ़की को जुकाम - अपनी औकात से ज्यादा नखरे
  75. मेरी बिल्ली मुझी को म्याऊं - जिसका खाये उसी पर रौब (आश्रयदाता को आंखें दिखाना)
  76. मुख में राम बगल में छुरी - कपट-पूर्ण व्यवहार
  77. रस्सी जल गई पर ऐंठ न गई - बुरी अवस्था में भी अच्छा व्यक्ति अपनी शान नहीं छोड़ता
  78. यह मुँह मसूर की दाल - अपनी योग्यता से अधिक पाने की अभिलाषा करना
  79. सांप मरे न लाठी टूटे - बिना हानि के कार्य सम्पन्न होना
  80. सौ सुनार की एक लुहार की - निर्बल की सौ चोटों की तुलना में बलवान की एक चोट काफी है

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को RPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।