राजस्थान में पर्यटन

राजस्थान में पर्यटन

इस लेख में राजस्थान पर्यटन विभाग के संगठनात्मक ढाँचे, प्रमुख महोत्सवों और पर्यटकों की नवीनतम स्थिति की विस्तृत जानकारी दी गई है। इसमें राज्य के सभी रोपवे, शाही रेल सेवाओं, प्रमुख पर्यटन सर्किट और पर्यटन नीतियों का सार शामिल है। यह लेख RPSC, REET और अन्य सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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पर्यटन विभाग: परिचय, संगठनात्मक ढाँचा एवं कार्य

पर्यटन विभाग वर्ष 1956 से एक स्वतन्त्र विभाग के रूप में कार्यरत है।
देश के प्रमुख महानगरों क्रमशः दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई एवं अहमदाबाद में कार्यालय संचालित है।
पर्यटन विभाग के नियन्त्रण में दो सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम क्रमशः राजस्थान पर्यटन विकास निगम लिमिटेड एवं राजस्थान राज्य होटल निगम लिमिटेड तथा एक स्वायत्त संस्थान 'राजस्थान पर्यटन और यात्रा प्रबन्ध संस्थान' (रिटमैन) कार्यरत है। इसके अतिरिक्त राजस्थान राज्य मेला प्राधिकरण भी विभाग के प्रशासनिक नियन्त्रण में कार्यरत है।
पर्यटन विभाग के प्रशासनिक नियन्त्रण में पर्यटन क्षेत्र में मानव संसाधन विकास हेतु चार संस्थान क्रमशः राज्य होटल प्रबन्धन संस्थान, जोधपुर व उदयपुर एवं फूड क्राफ्ट संस्थान, अजमेर व सुमेरपुर (पाली) संचालित किये जा रहे हैं।

पर्यटन विभाग के द्वारा आयोजित महोत्सव जिला तथा माह
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  • पतंग महोत्सव (जैसलमेर, जयपुर) - जनवरी
  • मारवाड़ महोत्सव (जोधपुर) - अक्टूबर

विदेशी पर्यटक यात्राओं की दृष्टि से शीर्ष देश (2024 )
  1. संयुक्त राज्य अमेरिका
  2. युनाइटेड किंगडम
  3. फ्रांस
  4. इटली
  5. जर्मनी

2024 के अनुसार पर्यटकों की स्थिति
  1. राजस्थान में स्वदेशी पर्यटकों में 28.50% की वृद्धि जबकि विदेशी पर्यटकों में 21.92% की वृद्धि दर्ज की गई है।
  2. सर्वाधिक स्वदेशी पर्यटक - 1. सीकर, 2. चित्तौड़गढ़, 3. अजमेर, 4.जैसलमेर
  3. सर्वाधिक विदेशी पर्यटक - 1. जयपुर, 2. उदयपुर, 3. जोधपुर, 4. अजमेर
  4. सर्वाधिक विदेशी पर्यटक - नवम्बर, दिसम्बर, कम विदेशी पर्यटक - जून, मई
  5. सर्वाधिक स्वदेशी पर्यटक - मार्च, सितम्बर, कम स्वदेशी पर्यटक - मई, जून
  • विश्व पर्यटन दिवस- 27 सितंबर
  • भारतीय पर्यटन दिवस- 25 जनवरी
  • वर्तमान में राजस्थान का पर्यटन लोगो- पधारो म्हारे देश
  • मीराबाई का संग्रहालय उदयपुर में है।
  • राजस्थान में पर्यटन निदेशालय की स्थापना- 1955

राजस्थान पर्यटन विकास निगम लिमिटेड- जयपुर
  • स्थापना-1978
  • उद्देश्य-पर्यटकों को आवास, भोजन तथा यातायात की सुविधा उपलब्ध करवाना।
इसके द्वारा निम्न लोगो जारी किया गया है-
  1. ढोला मारू-1978
  2. पधारो म्हारे देश-1993
  3. यह सर्वाधिक लोकप्रिय है तथा इसको ललित के. पवार द्वारा जारी किया गया है।
  4. रंगीलो राजस्थान (कलरफूल राजस्थान) 2008
  5. जाने क्या दिख जाए-2016
  6. पधारो म्हारे देश-2019
वर्तमान में यही है।
  • भारतीय पर्यटन विकास निगम लिमिटेड की स्थापना- 1966
  • राजीव गाँधी पर्यटन विकास मिशन- 5 जुलाई, 2001
  • महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट : इसमें महाराणा प्रताप के जीवन से सम्बन्धित पर्यटन स्थलों को विकसित करना है, जैसे- गोगुंदा (उदयपुर), कुंभलगढ़ (राजसमन्द), हल्दीघाटी (राजसमन्द) तथा उदयपुर है। इस सर्किट के लिए ₹100 करोड़ का प्रावधान है।
नोट: पर्यटन को उद्योग का दर्जा मोहम्मद यूनुस समिति की सिफारिश पर 1989 में दिया गया।
5 दिसम्बर, 2022 को राजस्थान ग्रामीण पर्यटन योजना को लागू किया गया, जिसमें स्टाम्प ड्यूटी में 100% की छूट दी जाएगी।
  • विभाग द्वारा राजस्थान के प्रचार हेतु फोटोग्राफी डे 19 अगस्त, 2021 के अवसर पर फोटोग्राफी चेलेन्ज कॉन्टेस्ट- 'रंग राजस्थान के' प्रारंभ किया गया।

राजस्थान के रोप-वे

  • राजस्थान रोप-वे एक्ट 1996 के तहत संचालित है।
राज्य में 7 रोप-वे संचालित हैं-

7 रोपवे

1. सुंधा माता मंदिर रोपवे जालौर (भीनमाल)
  • राजस्थान का प्रथम रोपवे
  • संचालित - 2006
  • लंबाई- 800 मीटर
  • वर्तमान में राजस्थान का सबसे लंबा रोपवे

2. मंशापूर्ण करणी माता मंदिर रोपवे (उदयपुर)
  • राजस्थान का दूसरा रोपवे
  • संचालित- जून 2008
  • लंबाई- 387 मीटर

3. सावित्री माता मंदिर रोपवे अजमेर (पुष्कर)
  • राजस्थान का तीसरा रोपवे
  • संचालित- 3 मई 2016
  • लंबाई- 700 मीटर

4. सामोद रोपवे (जयपुर)
  • संचालित- 25 मई, 2019
  • कनक वृन्दावन रोपवे प्रस्तावित
  • माउण्ट आबू रोपव (न्यायिक विवाद के कारण लंबित) सिरोही

5. अन्नपूर्णा माता रोप-वे जयपुर
  • यह खोले के हनुमान जी मंदिर परिसर में है, जो प्रदेश का प्रथम स्वचालित रोप वे होगा।
  • यह राज्य का 5वाँ रोपवे जबकि जयपुर का दूसरा रोप-वे होगा।
  • लम्बाई- 436 मीटर

6. नीमच माता रोप-वे उदयपुर
  • संचालित- 2024

7. हर्ष की पहाड़ी (सीकर)
  • संचालित- 2024

निम्न जगह रोप-वे प्रस्तावित है :
  1. त्रिनेत्र गणेशजी, रणथंभौर
  2. रामेश्वर महादेव मंदिर, बूंदी
  3. आमेर, जयपुर
  4. चौथ का बरवाड़ा, सवाईमाधोपुर
  5. फोर्ट टू लखेला, राजसमंद
  6. इन्द्रगढ़, बूंदी
  7. जीणमाता, सीकर
  8. गढ़ गणेश, जयपुर
  9. भैरव मंदिर, मेहंदीपुर (दौसा)
  10. कृष्णाराई माता, बारां
  11. सवाई माता, बारां
  12. राजाजी का तालाब, अजमेर
  13. चित्तौड़ फोर्ट, चित्तौड़गढ़

शाही रेल

1. पैलेस ऑन व्हील्स संचालन - 1982
  • प्रथम शाही रेल सेवा
नोट- 3 सितंबर, 1995 को शाही रेलगाड़ी को (द ओरिएन्टल एक्सप्रेस) नये सिरे से शुरू किया गया तथा इसका नाम रखा गया 'पहियों पर चलने वाला नया राजमहल'
  • यह रेलगाड़ी चित्तौड़गढ़, जैसलमेर, जोधपुर, जयपुर तथा दिल्ली तक संचालित है।

2. रॉयल राजस्थान ऑन व्हील- पैलेस ऑन व्हील्स की सफलता को देखते हुए 11 जनवरी, 2009 को इसकी शुरूआत की गई।

3. फेरी क्वीन - शुरूआत 2003
  • शेखावाटी की कलात्मक हवेलियों की सैर करवाने के लिए
  • शेखावाटी त्रिकोण- सीकर, चूरू, झुंझुनूं

4. विलेज ऑन व्हील्स - शुरूआत 2004

5. हेरिटेज ऑन व्हील्स - शुरूआत 2006

पर्यटन सर्किट

पर्यटन विकास हेतु राजस्थान को निम्न पर्यटन सर्किट में बाँटा गया है-
  1. ढूंढाड़ सर्किट : जयपुर, आमेर-सामोद, नाहरगढ़, रामगढ़, दौसा-आभानेरी
  2. अलवर (मेवात) सर्किट - अलवर, सिलीसेढ़, सरिस्का, पाण्डुपोल, तिजारा, राजगढ़, भानगढ़
  3. बृज सर्किट - भरतपुर, डीग, धौलपुर
  4. रणथम्भौर सर्किट - रणथम्भौर, टोंक
  5. माउण्ट आबू सर्किट - माउण्ट आबू, रणकपुर, पाली
  6. मेरवाड़ा सर्किट - अजमेर - पुष्कर - मेड़ता, नागौर
  7. शेखावाटी सर्किट - सीकर - झुंझुनूं, चूरू
  8. मरू त्रिकोण (डेजर्ट ट्रायंगल) सर्किट - जैसलमेर-जोधपुर-बीकानेर-बाड़मेर
  9. मेवाड़ सर्किट -उदयपुर, कुंभलगढ़, नाथद्वारा, चित्तौड़गढ़, जयसमंद, डूंगरपुर, (गलियाकोट), प्रतापगढ़
  10. हाड़ौती सर्किट - कोटा-बूंदी, बारां, झालावाड़

राजस्थान पर्यटन विकास निगम लिमिटेड के द्वारा निम्न जगह नौकायन संचालित है-
  1. फतेहसागर झील (उदयपुर)
  2. सिलीसेढ़ झील (अलवर)
  3. कायलाना झील (जोधपुर)
  4. नक्की झील (माउण्ट आबू, सिरोही)
Hriday योजना: शुरूआत 21 जनवरी, 2015 (Heritage City Development Augmentation Yojna)
उद्देश्य- विरासत शहरी क्षेत्रों में विरासत को बचाना और संरक्षण करना।
इस योजना के तहत 12 शहरों को चुना गया - अमरावती, अमृतसर, मथुरा, द्वारका, पुरी, वाराणसी, बादामी, कांचीपुरम, अजमेर (राजस्थान का एकमात्र शहर) वेलकन्नी, वारंगल, गया आदि।
विरासत के संरक्षण हेतु स्मारक, पुरावशेष स्थान एवं प्राचीन वस्तु अधिनियम 1961 में राजस्थान में लागू हुआ।

हेरिटेज होटल योजना

शुरूआत- 1991
ऐसा भवन जिसका स्थापत्य 1950 से पुराना हो तो उसको हेरिटेज प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।
देश का प्रथम हेरिटेज होटल- अजित भवन (जोधपुर)
  1. लालगढ़ पैलेस- बीकानेर
  2. गजनेर पैलेस- बीकानेर
  3. मण्डावा पैलेस- झुन्झुनु
  4. नीमराना पैलेस- कोटपुतली-बहरोड
  5. लक्ष्मी निवास पैलेस- भरतपुर
  6. सामोद पैलेस- जयपुर
  7. रामगढ़ पैलेस- जयपुर

राजस्थान में घरेलू पर्यटक विजिट्स की संख्या- 2024
जिला- सीकर, चित्तौड़गढ़, अजमेर, जैसलमेर, सवाई माधोपुर

राजस्थान में अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटक विजिट्स की संख्या- 2024
जिला- जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, जैसलमेर, अजमेर

थीमेटिक टूरिज्म
राज्य अपनी जीवंत संस्कृति, समृद्ध विरासत और विविध प्राकृतिक परिदृश्यों को प्रदर्शित करते हुए पर्यटकों को अद्वितीय अनुभव प्रदान करने के लिए जाना जाता है। राज्य सरकार एडवेंचर टूरिज्म, इको-पर्यटन, फिल्म-पर्यटन और धार्मिक पर्यटन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। जिससे राजस्थान के फिल्म पर्यटन क्षेत्र को महत्त्वपूर्ण बढ़ावा मिला है, वर्ष 2024-25 (दिसम्बर, 2024 तक) में राज्य में 39 फिल्मों की शूटिंग हुई।

राजस्थान के 9 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल
  1. किले -जैसलमेर किला, चित्तौड़गढ़ किला, आमेर किला, रणथम्भौर किला, कुम्भलगढ़, गागरोन किला।
  2. वैधशाला स्थल- जंतर मंतर, जयपुर
  3. संरक्षित पार्ट- जयपुर का चारदीवारी वाला शहर
  4. राष्ट्रीय उद्यान- केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान

राजस्थान पर्यटन इकाई नीति (आरटीयूपी)- 2024
राजस्थान पर्यटन से जुड़े निवेशकों एवं उद्यमियों को देय लाभों में वृद्धि करने तथा निजी क्षेत्र में नई पर्यटन इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित कर इसके माध्यम से रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 4 दिसम्बर, 2024 को राजस्थान पर्यटन इकाई नीति (आरटीयूपी)- 2024 लागू की गई। निजी क्षेत्र, राज्य में प्रचलित भवन उपनियमों के तहत पर्यटन इकाइयों के लिए अलग भवन मानदण्ड निर्धारित किए जाएँगे।

राजस्थान में पर्यटन पुरस्कारों के साथ उत्कृष्टता
  1. बेस्ट डेकोरेशन एवं डिजाइन पुरस्कार: 10 फरवरी, 2024 को इंडिया ओटीएम, मुंबई में प्राप्त हुआ।
  2. क्रिएटिविटी पुरस्कार: 30 अप्रैल, 2024 को प्राइम टाइम अवॉर्ड 2023 में फिल्म "रोमांस ऑफ राजस्थान" के लिए जीता गया।
  3. सर्वश्रेष्ठ हेरिटेज डेस्टीनेशन पुरस्कार: 19 जुलाई, 2024 को अहमदाबाद में गुजरात ट्रैवल फेयर एक्सपो में सम्मानित किया गया।
  4. सर्वश्रेष्ठ वाइल्ड लाइफ होटल पुरस्कार: आरटीडीसी होटल कैसल झूमरबावड़ी, सवाईमाधोपुर को 19 जुलाई, 2024 को अहमदाबाद में गुजरात ट्रैवल फेयर एक्सपो में यह पुरस्कार मिला।
  5. पिल्ग्रिमेज डेस्टीनेशन ऑफ द ईयर पुरस्कार: 27 जुलाई, 2024 को बेंगलुरु में इंडिया इंटरनेशनल ट्रेवल मार्ट में प्राप्त किया गया।
  6. बेस्ट डिजिटल मार्केटिंग बाई स्टेट पुरस्कार: 31 अगस्त, 2024 को भोपाल में इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (आईआईटीएम) के 39वें वार्षिक सम्मेलन में जीता गया।
  7. द मोस्ट प्रॉमिसिंग वेडिंग डेस्टिनेशन पुरस्कार: 23 अक्टूबर, 2024 को पटना में ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर में प्राप्त हुआ।
  8. ब्राण्ड कैम्पेन ऑफ द ईयर पुरस्कार: 1 दिसम्बर, 2024 को पुणे में इण्डिया इण्टरनेशनल ट्रेवल मार्ट में प्राप्त किया गया।
  9. वेडिंग डेस्टीनेशनल ऑफ द ईयर पुरस्कार: 8 दिसम्बर, 2024 को हैदराबाद में इण्डिया इण्टरनेशनल ट्रेवल मार्ट में प्राप्त किया गया।

राजस्थान पर्यटन नीति, 2020

  • राज्य में पर्यटन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अधिसूचना दिनांक 09 सितम्बर, 2020 के द्वारा 'राजस्थान पर्यटन नीति, 2020' को राज्य में लागू किया गया है।
  • मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना की एक उप-योजना के रूप में 'मुख्यमंत्री पर्यटन उद्योग सम्बल योजना' में पर्यटन उद्यमियों को 25 लाख तक के ऋण पर मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना में देय अधिकतम ब्याज अनुदान 8% से बढ़ाकर तीन वर्ष के लिए 9% देय।
  • राजस्थान को पसंदीदा फिल्म डेस्टिनेशन के रूप में प्रमोट करने तथा राजस्थानी फिल्मों की शूटिंग को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से 18 अप्रैल, 2022 को राजस्थान फिल्म पर्यटन प्रोत्साहन नीति-2022 राज्य में लागू कर दी गई है।
  • अनुभवात्मक पर्यटन को बढ़ावा देने, निवेश लाने एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिये 30 नवंबर, 2022 को राजस्थान ग्रामीण पर्यटन योजना, 2022 को राज्य में लागू कर दी गई है।

राजस्थान टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड- जयपुर

गठन - 24 नवम्बर, 1978
उद्देश्य - आवास, भोजन, यातायात, नौकायन उपलब्ध करवाना।
इसके द्वारा निम्न जगह नौकायन उपलब्ध है:-
  1. फतेहसागर झील (उदयपुर)
  2. सिलीसेढ़ झील (अलवर)
  3. कायलाना झील (जोधपुर)
  4. नक्की झील (माउंट आबू, सिरोही)

राजस्थान राज्य होटल्स निगम लिमिटेड

राजस्थान सरकार द्वारा होटलों के संचालन हेतु राजस्थान राज्य होटल्स निगम लिमिटेड की स्थापना 7, जून, 1965 को की गई थी।

परीक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण विभाग एवं संग्रहालय


1. पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, जयपुर
वर्ष 1950 में राजस्थान राज्य के निर्माण के साथ ही पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग का गठन किया गया।

2. निदेशालय, राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर
राजस्थान राज्य अभिलेखागार अपनी अपार एवं अमूल्य अभिलेख निधि के कारण देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपना विशिष्ट स्थान रखता है। यहाँ मुगलकाल से लेकर रियासतकालीन राजपूताने के दीर्घकालीन एवं ऐतिहासिक महत्व के अभिलेख सुरक्षित है।

3. मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान, टोंक
अरबी फारसी भाषा व साहित्य के विकास हेतु राज्य सरकार द्वारा 04.12.1978 को, निदेशालय अरबी फारसी शोध संस्थान की स्थापना की गई। वर्तमान नाम मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान, 1988 में रखा गया। यह संस्थान अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शोध संस्थान है।

4. निदेशालय, राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर
राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान का मुख्य कार्यालय जोधपुर में स्थित है

5. जवाहर कला केन्द्र, जयपुर
जवाहर कला केन्द्र की स्थापना वर्ष 1989 में राजस्थान सरकार द्वारा की गई है। राजस्थान की लोक एवं शास्त्रीय कलाओं का संरक्षण करना इसकी पहली प्राथमिकता रही है। 8 अप्रैल, 1993 को तत्कालीन राष्ट्रपति महामहिम डॉ. शंकर दयाल शर्मा के कर-कमलों से उद्घाटन के बाद इस संस्थान ने कला स्वरूपों में अभिनव प्रयोगों के माध्यम से कलाकारों एवं कला रसिकों के बीच एक विशेष पहचान बनाई है।

6. राजस्थान धरोहर प्राधिकरण, जयपुर
इस प्राधिकरण का पुनर्गठन माह 03 मार्च, 2014 को किया गया। पूर्व में नाम राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण था जिसे राज्य सरकार की स्वीकृति से राजस्थान धरोहर प्राधिकरण, जयपुर कर दिया गया है।

7. राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर
स्थापना: सन् 1957

8. राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर
स्थापना: सन् 1957

9. रवीन्द्र मंच सोसायटी, जयपुर
राजस्थान की राजधानी जयपुर में नृत्य, नाटक एवं संगीत कला के पोषण हेतु वर्ष 1963 में राज्य सरकार द्वारा रवीन्द्र मंच की स्थापना की गई थी।

10. जयपुर कथक केन्द्र, जयपुर
स्थापना वर्ष 1978 में की गई थी जबकि केन्द्र का कार्य औपचारिक रूप से 19 मई, 1979 से प्रारम्भ हुआ। राज्य सरकार द्वारा इस प्रकार के संस्थान की स्थापना का उद्देश्य जयपुर घराने के कथक नृत्य की प्राचीन एवं शास्त्रीय शैली को पुर्नजीवित करना एवं संवर्द्धित करना, विविध पाठ्यक्रमों द्वारा कथक नृत्य का प्रशिक्षण एवं अनुसंधान करना है।

11. राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर
स्थापना 28 जनवरी, 1958 ई. राज्य में साहित्य के विकास प्रोत्साहन व प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से की गई है।

12. राजस्थान संस्कृत अकादमी, जयपुर
स्थापना - 1980
उद्देश्य - संस्कृत भाषा एवं उसके साहित्य का संरक्षण, विकास एवं प्रोत्साहन।

13. राजस्थान सिन्धी अकादमी, जयपुर
स्थापना- 1979 में सिन्धी भाषा, साहित्य, कला एवं संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु की गई थी।

14. राजस्थान उर्दू अकादमी, जयपुर
स्थापना 1979 में उर्दू भाषा एवं साहित्यिक कार्यकलापों को प्रोत्साहन देने तथा विकास करने हेतु की गई थी।

15. राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी, जयपुर
प्रदेश में ब्रजभाषा के विकास, उन्नयन एवं संवर्धन के लिए राज्य सरकार ने 1985 में राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी की स्थापना की थी।

16. प. जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी, जयपुर
माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा वर्ष 2019 की बजट घोषणाओं में कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के अन्तर्गत बजट घोषणा की गई थी।

17. राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर
स्थापना 25 जनवरी, 1983 को हुई थी।
अकादमी द्वारा राजस्थानी भाषा की मासिक पत्रिका "जागती जोत" का नियमित प्रकाशन किया जा रहा है जो राजस्थानी भाषा-भाषी पाठकों में अति लोकप्रिय है।

18. राजस्थानी पंजाबी भाषा अकादमी, श्रीगंगानगर
पंजाबी भाषा, साहित्य, संस्कृति एवं कला का संरक्षण, संवर्द्धन एवं विकास और उसके द्वारा सांस्कृतिक एकता प्रोन्नत करने के लिये एक राज्य स्तरीय संगठन स्थापित किया।
स्थापना - 7 मार्च, 2006

19. भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर
वर्ष 1952 में पद्म श्री स्व. देवीलाल सामर द्वारा भारतीय लोक कला मण्डल की स्थापना की गई। इसका मुख्य कार्य राजस्थान तथा देश के अन्य क्षेत्रों की लोक संस्कृति को संरक्षित करना है।
  • देवस्थान विभाग- देवस्थान विभाग मन्दिर संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन का विभाग है। इस विभाग का गठन भूतपूर्व राजपूताना राज्य की छोटी-बड़ी रियासतों के विलीनीकरण के पश्चात्, पूर्व देशी राज्यों द्वारा राजकोष के माध्यम से संचालित मन्दिरों, मठों, धर्मशालाओं आदि के प्रबंधन एवं सुचारू संचालन हेतु वर्ष 1949 में बने वृहत् राजस्थान राज्य के साथ-साथ हुआ।

राजस्थान राज्य मेला प्राधिकरण

राजस्थान राज्य मेला प्राधिकरण का प्रशासनिक विभाग पर्यटन विभाग है।
प्राधिकरण द्वारा दिसम्बर, 2022 तक निम्नलिखित 42 मेलों का पंजीकरण किया गया हैं-
मेले का नाम एवं मेला स्थान जिला
खाटूश्याम जी मेला, खाटूश्याम जी सीकर
जीण माता का मेला, जीण माता, दांतारामगढ़ सीकर
श्री जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेला, भरतपुर भरतपुर
पूंछरी का मेला, ग्राम पंचायत सांवई, डीग डीग
ग्रीष्मकालीन नवरात्रा मेला, झील का बाड़ा, बयाना भरतपुर
शारदीय नवरात्रा मेला, झील का बाड़ा, बयाना भरतपुर
लोहार्गल मेला, ग्राम पंचायत लोहार्गल, उदयपुरवाटी झुंझुनूँ
बाबा रामदेव मेला, नगर पालिका नवलगढ़ झुंझुनूँ
हजरत हाजिब शक्करबार मेला, दरगाह वक्फ कमेटी नरहड, चिड़ावा झुंझुनूँ
पं. गणेश नारायण मेला एवं गुगोजी का मेला, चिड़ावा, झुंझुनूँ
बाबा सुन्दरदास मेला, गाडराटा, पापुरना खेतड़ी झुंझुनूँ
शेखावाटी हस्त शिल्प एवं पर्यटन मेला आबूसर झुंझुनूँ झुंझुनूँ
वीर बिग्गा जी मेला, रोही गाँव बिग्गा, तहसील श्री डूंगरगढ़ बीकानेर
कोलायत मेला, कोलायत बीकानेर
नवरात्रि मेला, देशनोक बीकानेर
जसनाथ जी मेला, कतरियासर बीकानेर
श्री मसाणिया भैरवधाम मेला, राजगढ़, अजमेर अजमेर
पुष्कर पशु मेला, नगर पालिका पुष्कर अजमेर
राष्ट्रीय दशहरा मेला, कोटा कोटा
परशुराम मेला ( फूटा देवल) केलवाड़ा राजसमंद
जल झूलनी मेला, कस्बा चारभुजा राजसमंद
घोटिया अम्बा मेला, बारीगामा बाँसवाड़ा
भैरव जी मेला, भवानपुरा बाँसवाड़ा
दशहरा मेला, कुशलबाल, बाँसवाड़ा बाँसवाड़ा
सीता माता मेला, पाल प्रतापगढ़
गौतमेश्वर जी मेला, गौतमेश्वर ग्राम प्रतापगढ़
शौली हनुमानजी मेला, शौली ग्राम प्रतापगढ़
अम्बा माता मेला, ग्राम अम्बामाता प्रतापगढ़
हरियाली अमावस्या मेला, उदयपुर उदयपुर
चावण्ड़ माता पशु मेला, मावली उदयपुर
दशहरा दीपावली मेला, उदयपुर उदयपुर
नवरात्रा मेला, मेहरानगढ़ फोर्ट जोधपुर
बाबा रामदेव मेला, ग्राम रूणीचा, रामदेवरा जैसलमेर
श्री कल्याण जी महाराज डिग्गी पद यात्रा मेला, डिग्गी टोंक
पशु मेला माण्डकला, नगर फोर्ट टोंक
तिल्स्वा महादेव मेला भीलवाड़ा
बेणेश्वर मेला, ग्राम तिल्स्वा बेणेश्वर, आसपुर डूंगरपुर
श्री मल्लीनाथ तिलवाड़ा पशु मेला बालोतरा
शीतला माता मेला, कानाना बालोतरा
श्री राणी भटियाणी जी मेला, जसोल बालोतरा
पशु मेला एवं शरद महोत्सव, धौलपुर धौलपुर
तीर्थराज मंचकुण्ड मेला, धौलपुर धौलपुर

राजस्थान पुरासम्पदा संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण- इसके द्वारा पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पेनोरमा का निर्माण किया गया है।
पेनोरमा के अन्तर्गत ऐतिहासिक हस्तियाँ एवं लोक-देवताओं से सम्बन्धित है, ये पेनोरमा निम्न है-

पेनोरमा/स्मारक/संग्रहालय/परियोजना का नाम
लोकदेवता बाबारामदेवजी पेनोरमा रामदेवरा, जैसलमेर
महाराणा राजसिंह पेनोरमा, राजसमन्द
महाबलिदानी पन्नाधाय पेनोरमा-कमेरी, राजसमंद
1857 स्वतंत्रता संग्राम पेनोरमा-आऊवा, पाली
राणा सांगा स्मारक-खानवा, भरतपुर
लोक पूज्य देवता गोगाजी पेनोरमा एवं पर्यटक विश्राम स्थली- गोगामेड़ी, हनुमानगढ़
शहीद वीरबाला कालीबाई पेनोरमा-माण्डवा, डूंगरपुर
वीर अमरसिंह राठौड़ पेनोरमा, नागौर
संत सुन्दरदास पेनोरमा, दौसा
पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्मारक-धानक्या, जयपुर
लोक पूज्य देवता तेजाजी पेनोरमा-खरनाल, नागौर
हाड़ौती पेनोरमा, बाराँ
सन्त पीपाजी पेनोरमा-गागरोन, झालावाड़
संत शिरोमणि रैदास पेनोरमा-चित्तौड़खेड़ा, चित्तौड़गढ़
संत नागरीदास पेनोरमा-किशनगढ़, अजमेर
वीर हसन खाँ मेवाती पेनोरमा हसन खां-मेवाती नगर, अलवर
बप्पारावल पेनोरमा-मठाठा (ग्राम पंचायत कैलाशपुरी) उदयपुर
महाकवि माघ व गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त पेनोरमा-भीनमाल, जालौर
धन्ना भक्त पेनोरमा-धुवांकला, टोंक
मावजी महाराज पेनोरमा-बेणेश्वरधाम, डूंगरपुर
निम्बार्काचार्य पेनोरमा-सलेमाबाद, अजमेर
गुरू गोविन्द सिंह पेनोरमा-नरेना, जयपुर
राजा भर्तृहरि पेनोरमा पत्रकार कॉलोनी धोलीदूब, अलवर
वॉर मेमोरियल (सैन्य शक्ति स्मारक) दौरासर, झुंझुनूं
भगवान श्रीपरशुराम-मातृकुण्डिया, चित्तौड़गढ़
गुरू गोविन्द सिंह पेनोरमा-बुढ़ाजोहड़, श्रीगंगानगर
कृष्णभक्त अलीबख्श पेनोरमा-मुण्डावर, (खैरथल-तिजारा)
राष्ट्रीय जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय-मानगढ़ धाम, बाँसवाड़ा
श्रीसेन महाराज पेनोरमा-पुष्कर, अजमेर
वीर गोरा बादल पेनोरमा-भोईखेड़ा, चित्तौड़गढ़
वीर झाला मन्ना पेनोरमा-बड़ीसादड़ी, चित्तौड़गढ़
भक्त शिरोमणि करमेती बाई-खण्डेला, सीकर
चालकनेची पेनोरमा चालकना (तनोट माता का जन्म स्थान), बाड़मेर
राव शेखाजी पेनोरमा अमरसर, शाहपुरा, जयपुर
सुमेल-गिरि महासंग्राम पेनोरमा-नारपुरा, पाली
मीराबाई स्मारक-मेड़तासिटी, नागौर
महाराजा सूरजमल स्मारक, किशोरी महल, लोहागढ़, भरतपुर
नर्बदेशर धाम सीलू, सांचौर (जालौर)
रावत कान्धल पेनोरमा व साहवा सरोवर, चूरू
हाड़ी रानी स्मारक-सलूम्बर
मुचकुन्द पेनोरमा, धौलपुर
अलीबख्श पेनोरमा, मुंडावर

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Kartik Budholiya

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राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को RPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।