राजस्थान के महल
यह लेख राजस्थान की स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूनों, यानी यहाँ के ऐतिहासिक महलों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। इसमें जयपुर के प्रसिद्ध सिटी पैलेस, हवा महल और जल महल से लेकर जोधपुर के उम्मेद भवन और उदयपुर के जग मंदिर जैसे भव्य स्मारकों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, निर्माण शैली और मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डाला गया है।
लेख में महलों के वास्तुकारों, उनके निर्माण काल और वर्तमान उपयोग (जैसे हेरिटेज होटल या संग्रहालय) की सटीक जानकारी दी गई है। यह राजस्थान की राजसी विरासत, सांस्कृतिक समृद्धि और मुगल-राजपूत स्थापत्य शैली के संगम को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है।
चन्द्र महल, सिटी पैलेस, जयपुर
इस महल का निर्माण विद्याधर चक्रवती के नेतृत्व में सवाई जयसिंह ने 1729 ई. में करवाया। इस महल में सजावट का कार्य मानसिंह द्वितीय ने जर्मन कलाकार ए.एच.मूलर की देखरेख में करवाया।
इस महल में चाँदी के दो पात्र रखे हैं।
यह सात मंजिला महल है -
1. चन्द्र मन्दिर 2. सुख निवास 3. रंग मन्दिर 4. शोभा निवास 5. छवि निवास 6. श्रीनिवास 7. मुकुट मंदिर
- चन्द्रमहल में जयपुर शासकों के आदमकद चित्र बने हैं।
- इस महल के ऊपरी मंजिल में पोथी खाना स्थित है।
- 1959 में मानसिंह द्वितीय द्वारा संग्रहालय बनाया गया।
सिटी पैलेस में प्रवेश के 3 मार्ग है-
(1) वीरेन्द्र पोल (2) उदयपोल (3) त्रिपोलिया गेट
सिटी पैलेस के अन्दर प्रीतम निवास चौक बना है जिसके चार छोटे-दरवाजे बने है-
- लहरिया दरवाजा- यह द्वार भगवान गणेशजी को समर्पित है। इसे ग्रीन गेट भी कहते है।
- कमल द्वार- यह दरवाजा भगवान शिव व पार्वती को समर्पित है।
- गुलाब द्वार- यह दरवाजा सर्द ऋतु का प्रतिनिधित्व करता है।
- मयूर द्वार- यह द्वार भगवान विष्णु को समर्पित है तथा शरद ऋतु का प्रतिनिधित्व करता है। इसे 'पिकॉक गेट' भी कहते है। जनवरी 2017 ई. में इस दरवाजे पर 25 रूपये की डाक टिकट जारी की गई।
सलीम मंजिल, जयपुर
यह ईमारत जौहरी में स्थित है। यह इस्लाम धर्म की प्रमुख ईमारत है।
मुबारक महल/वैलकम पैलेस, जयपुर
यह महल सिटी पैलेस में है जो हिन्दू, मुस्लिम व ईसाई शैली में बना जयपुर का सबसे नया महल है। इसका निर्माण माधोसिंह द्वितीय ने मेहमानों के लिए करवाया। (1900 ई.)
वर्तमान में पुस्तकालय है। मुबारक महल सर सैमुअल स्विंटन जैकब की देखरेख में बना।
रामबाग पैलेस, जयपुर
इसका निर्माण रामसिंह द्वितीय ने महत्त्वपूर्ण मेहमानों के लिए करवाया।
1836 ई. में इसके किनारे केसर बड़ारण का बाग भी बनाया गया।
वर्तमान में इस महल में रामबाग पैलेस होटल चलता है।
सिसोदिया रानी का महल, जयपुर
इसका निर्माण सवाई जयसिंह ने 1728 ई. में सिसोदिया रानी चन्द्र कंवर के लिए करवाया। इस महल में माधोसिंह प्रथम का जन्म हुआ था।
दीवारों पर शिकार व राधाकृष्ण चित्र है।
मोती डूँगरी महल, जयपुर
इस महल के किनारे गणेश जी व बिड़ला मंदिर है।
इसका निर्माण माधोसिंह द्वितीय ने करवाया।
मोती के समान दिखने देने के कारण इसका नाम मोती डूँगरी पड़ा।
इन महलों के किनारे पंचायतन शैली में लक्ष्मीनारायण/बिड़ला मन्दिर स्थित है।
इन महलों का पुनः निर्माण गायत्री देवी ने करवाया।
जल महल, जयपुर
इनका निर्माण सवाई जयसिंह ने करवाया था।
यह महल मानसागर झील के मध्य स्थित है।
इस महल को रोमांटिक महल भी कहा जाता है। माना जाता है कि सवाई जयसिंह ने अश्वमेघ यज्ञ के बाद ब्राह्मणों को भोजन इसी महल में करवाया था।
सामोद महल, जयपुर
इनका निर्माण बिहारीदास (1645-52 ई.) ने करवाया।
यह वर्तमान में हैरिटेज होटल है।
इन महलों में 19वीं सदी में शिवसिंह ने शीशमहल बनवाया।
आमेर महल, जयपुर
माना जाता है इसका प्रारम्भिक निर्माण 1550 ई. पृथ्वीराज के पुत्र रावल श्योसिंह ने करवाया था।
इनका निर्माण मानसिंह प्रथम ने हिन्दू पारसी शैली में करवाया। (1592 ई.)
इन महलों को पूर्ण सवाई जयसिंह ने करवाया।
जयसिंह ने दुर्ग में प्रवेश हेतु गणेश पोल का निर्माण करवाया जो इतिहासकार फर्ग्यूसन के अनुसार संसार का सर्वश्रेष्ठ प्रवेश द्वार है।
दीवान-ए-आम, शीश महल, यश मन्दिर, सुख मन्दिर, जनाना महल (सबसे प्राचीन) आदि अन्य महल हैं।
बिशप हैबर का कथन- "मैंने क्रेमलिन में जो कुछ देखा और अल ब्रह्मा के बारे में जो कुछ सुना है उससे भी बढ़कर ये महल है।"
दीवाने खास/सर्वतोभद्र/जय मन्दिर, आमेर
इन महलों का निर्माण सवाई जयसिंह ने करवाया।
जयपुर शासकों के राजग्रहण की परम्परा इन्हीं महलों में होती थी।
दीवाने खास में विश्व के सबसे बड़े दो चाँदी के पात्र रखे हैं। इन पात्रों का निर्माण माधोसिंह द्वितीय ने करवाया था।
शीशमहल
आमेर में दीवाने खास में शीशे का बारीक काम किया गया है। छत पर भी काँच के टुकड़े लगाये गये है। महाकवि बिहारी ने इस महल को 'दर्पण धाम' कहा।
दीवान-ए-आम
आमेर दुर्ग में इन महलों का निर्माण मिर्जा राजा जयसिंह ने करवाया। इस महल में राजा जनसाधारण से मिलता था। यह महल 40 कलात्मक स्तम्भों पर बना है।
सुख मंदिर
आमेर दुर्ग में स्थित इस महल का निर्माण राजाओं के ग्रीष्मकालीन निवास हेतु करवाया गया। इन महलों के दरवाजों पर हाथी दांत और चंदन का काम किया है।
यश मंदिर
यह महल दीवान-ए-खास के पास स्थित है जिसमें से रानियाँ दीवान-ए-खास की कार्यवाही देख सकती थी। इसे जस मंदिर महल भी कहते है।
सौभाग्य मंदिर
यह महल 'गणेशपोल' के पास स्थित है जिसका निर्माण रानियों के मनोरंजन हेतु करवाया गया। इसे सुहाग मंदिर भी कहते है।
हवा महल, जयपुर
1799 ई. में इनका निर्माण सवाई प्रतापसिंह ने राजघराने की महिलाओं को तीज व गणगौर की सवारी देखने के लिए करवाया।
इस महल में पांच मंजिले हैं -
1. शरद मन्दिर 2. रतन मन्दिर 3. विचित्र मन्दिर 4. प्रकाश मन्दिर 5. हवा मन्दिर
- इस महल का वास्तुकार लालचन्द था।
- इस महल की आकृति कृष्ण के मुकुट के समान है।
- इसे राजस्थान का एयर दुर्ग कहते हैं।
- इसके प्रवेश द्वार को आनन्द पोल कहते हैं।
- इस महल में 363 खिड़कियाँ हैं जिस कारण से इसे खिड़कियों का महल कहते हैं। 953 झरोखें हैं।
एडविन आलौल्ड कथन- "अलादीन का जिन्न भी इससे अधिक मोहक निवास स्थान का सृजन नहीं कर सकता था।''
- 1968 में इसे संरक्षित स्मारक घोषित किया गया।
- 1983 में इस महल में हवामहल म्यूजियम बनाया गया।
एक जैसे नौ महल, जयपुर
इन महलों का निर्माण माधोसिंह द्वितीय ने अपनी नौ पासवान रानियों के लिए नाहरगढ़ में करवाया। इन महलों का निर्माण विक्टोरिया शैली में किया गया था। ये महल तीन दिशाओं में बने है जिनके नाम हैं- ललित प्रकाश, चन्द्र प्रकाश, आनन्दप्रकाश, लक्ष्मीप्रकाश, फूल प्रकाश, बसन्त प्रकाश, सूरज प्रकाश, खुशहाल प्रकाश, जवाहर प्रकाश।
बादल महल, जयपुर
- निर्माण- सवाई जयसिंह
- माना जाता है यह जयपुर का सबसे प्राचीन महल है प्रारम्भिक समय में यहां शिकार के लिये ठहराव होता था।
पंचमहला (कोटपूतली, बहरोड)
इस महल का निर्माण मानसिंह ने अकबर के विश्राम के लिये करवाया। जब अकबर अजमेर जियारत करने वाले थे तब इसी महल में विश्राम करते थे। इसमें पांच मंजिल है।
कदमी महल (जयपुर)
इस महल का निर्माण 1237 ई. में राजदेव ने करवाया था। इस महल में एक छतरी है। जिसमें आमेर शासकों का राजतिलक होता था।
वर्तमान में कदमी महल आमेर दुर्ग में स्थित है।
अल्बर्ट हॉल (जयपुर)
यह राजस्थान की एकमात्र इमारत मानी जाती है। जिसका निर्माण हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई शैली में हुआ।
इस ईमारत की नींव सवाई रामसिंह द्वितीय के समय 6 फरवरी 1876 ई. को प्रिंस अल्बर्ट ने रखी। जिसका उद्घाटन 21 फरवरी, 1887 ई. में गवर्नर जनरल एडवर्ड ब्रेडफोर्ड ने किया।
इस भवन का निर्माण इंडो सार्सोनिक शैली में आकाल राहत कार्यों के दौरान करवाया गया। सर सैमुअल स्विंटन जैकब इसके वास्तुकार तथा तारा व चंदर नामक मिस्त्रियों द्वारा इसका निर्माण हुआ।
1887 ई. में इसमें संग्रहालय बना दिया गया जो राजस्थान का सबसे प्राचीन संग्रहालय है। इस संग्रहालय में मिश्र से लाई गई तुतु नामक महिला की ममी रखी है।
झाली रानी का महल (राजसमंद)
यह महल कुम्भलगढ़ दुर्ग में स्थित है। जिसका निर्माण राणा कुंभा ने अपनी रानी झाली रानी के लिये करवाया।
अभेडा महल (कोटा)
इस महल का निर्माण राव अभयसिंह ने चंबल नदी के किनारे करवाया। इस महल को 'हाड़ौती का हवामहल' कहते है।
काष्ठ महल (झालावाड़)
इस महल का निर्माण वन शोध संस्थान (देहरादून) ने 1936 में लकड़ी से करवाया।
महाराजा राजेन्द्रसिंह ने इस महल को किशन सागर झील के किनारे स्थापित करवाया।
इसे लकड़ी का विश्राम गृह/रैन बसेरा कहते है।
उम्मेद भवन पैलेस, जोधपुर
इस महल का निर्माण महाराजा उम्मेद सिंह ने अकाल राहत कार्यों के दौरान (1928-40) करवाया।
इस महल को छीतर पैलेस के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह महल छीतर पत्थर से बना है।
इस महल में केन्द्रीय हॉल, होटल, थियेटर, घड़ियों का संग्रहालय स्थित है। इस महल मे इंजीनियर हेनरी वोगन लैंचेस्टर थे।
राईका बाग पैलेस, जोधपुर
इस महल का निर्माण 1663 ई. में जसवंत सिंह प्रथम की हाड़ी रानी जसवंतदे ने करवाया।
1883 ई. में स्वामी दयानन्द सरस्वती इसी महल में उपदेश दिया करते थे।
बीजालाई के महल-कायलाना, जोधपुर
इन महलों का निर्माण महाराजा तख्तसिंह ने करवाया। इस महल का निर्माण शिकार गृह के रूप में करवाया गया।
एक थम्बा महल/प्रहरी मीनार, जोधपुर, मण्डोर
इन महलों का निर्माण महाराजा अजीत सिंह ने करवाया।
यह तीन मंजिला महल है।
इस महल का निर्माण 1718 ई. में हुआ।
बुलानी महल, जोधपुर
इन महलों का निर्माण महाराजा जयसिंह ने करवाया।
बादल विलास महल, जैसलमेर
इस महल का निर्माण 19वीं सदी (1884 ई.) में मुस्लिम सलावटों ने किया तथा महाराजा वैरीसाल को भेंट किया।
इस महल में पाँच मंजिलों का ताजिया टॉवर बना है। यह राजस्थान का सबसे ऊँचा बादल महल है।
जवाहर विलास महल, जैसलमेर
इस महल का निर्माण 19वीं सदी में करवाया गया था।
इस महल में झरोखे, छतरियाँ व दीवारों पर खुदाई का काम अद्भुत है।
इस महल में अधिकांश निर्माण 20वीं सदी में महाराव जवाहरसिंह ने करवाया।
राजमहल, उदयपुर
पिछोला झील के किनारे स्थित इन महलों का निर्माण महाराणा उदयसिंह ने करवाया। (1559 ई.)
फर्ग्यूसन ने इन महलों को राजस्थान के विंडसर महलों की संज्ञा दी।
यहाँ स्थित मयूर चौक में 5 मोरों के चित्र बने हैं।
इस महल में महाराणा प्रताप का भाला रखा है।
इन महलों को दो भागों में बांटा गया है -
- जनाना महल- इस महल में बादल महल व रंग महल स्थित हैं।
- मर्दाना महल - इस महल में मोती महल, भीम महल, दिलखुश महल, माणक महल, शीश महल, कृष्ण महल, मदन महल, कांच की बुर्ज तथा किशन महल स्थित है।
कर्ण विलास महल, उदयपुर
निर्माण- कर्णसिंह
जगनिवास पैलेस - उदयपुर
इन महलों का निर्माण 1746 ई. में महाराणा जगतसिंह द्वितीय ने पिछोला झील के अन्दर करवाया।
वर्तमान में इस महल में होटल लैक पैलेस चलता है।
जगमिन्दर पैलेस, उदयपुर
इन महलों का निर्माण कर्णसिंह ने 1622 ई. में प्रारम्भ किया तथा जगतसिंह प्रथम ने इन्हें पूर्ण (1651 ई.) करवाया। यह महल भी पिछोला झील के अन्दर स्थित है।
कर्णसिंह ने जहाँगीर के विद्रोही पुत्र खुर्रम (शाहजहाँ) को इन्हीं महलों में शरण दी थी।
1857 की क्रांति के समय नीमच छावनी से भागे हुए अंग्रेज परिवारों को महाराणा स्वरूप सिंह ने इन्हीं महलों में शरण दी थी।
यहाँ बाबा गफूर की मजार भी स्थित है।
सज्जनगढ़ पैलेस, उदयपुर
इसे उदयपुर का मुकुटमणी व वाणी विलास महल कहते हैं। यहाँ गुलाब की बाड़ी है, जिससे इसे गुलाब बाग कहते हैं।
फतेहसागर झील के किनारे इन महलों का निर्माण प्रारम्भ महाराणा सज्जनसिंह ने तथा पूर्ण महाराणा फतेहसिंह ने करवाया।
इन महलों को मानसून पैलेस भी कहते हैं।
खुश महल, उदयपुर
इन महलों का निर्माण सज्जनसिंह ने करवाया।
सरदार निवास महल-बनेड़ा, (शाहपुरा, भीलवाड़ा)
इन महलों का निर्माण सरदार सिंह ने करवाया।
बदनौर महल-आसींद, (भीलवाड़ा)
गढ़ भवन पैलेस, झालावाड़
इस महल का निर्माण 1838 ई. में झाला मदन सिंह ने करवाया।
इस महल में शीशमहल, सभागार, जनानी ड्योढ़ी, रंगशालाएँ, झरोखे आदि दर्शनीय स्थल हैं।
खेतड़ी महल, (झुंझुनूँ)
इस महल का निर्माण महाराजा भोपालसिंह ने (1735-71) ग्रीष्मकालीन विश्राम के लिए करवाया। यह महल लकड़ी का बना है।
इसे शेखावाटी का ताजमहल व दूसरा हवामहल कहते हैं।
इस महल में लखनऊ जैसी भूल-भुलैया एवं जयपुर के हवामहल की झलक देखने को मिलती हैं।
अजीतसिंह ने महल में स्वामी विवेकानन्द को ठहराया था। (1889 ई.)
अबली मीणा का महल, कोटा
इस महल का निर्माण महाराव मुकुन्द सिंह हाड़ा ने अपनी पासवान रानी के लिए करवाया।
टॉड ने महल को राजस्थान का दूसरा/छोटा ताजमहल/हाड़ौती का ताजमहल कहा।
गुलाब महल, कोटा
इस महल का निर्माण महाराज जैत्र सिंह (13वीं सदी) ने करवाया।
अभेड़ा महल, कोटा
इस महल का निर्माण महाराव अभयसिंह ने करवाया जिसे हाड़ौती का हवामहल कहते है। यह महल चंबल नदी के किनारे स्थित है।
छत्रविलास महल, कोटा
इस महल का निर्माण रानी बृजकंवर के लिये किया।
इस महल का निर्माण महाराव दुर्जनशाल ने करवाया।
हवा महल, कोटा
इस महल का निर्माण महाराव रामसिंह द्वितीय ने करवाया।
सुनहरी कोठी, टोंक
इस महल का निर्माण मोहम्मद इब्राहिम अली खान ने करवाया।
इस महल की दीवार एवं छतों में कांच, रत्न, सोने की बेल-बूटियों, फूल, मीनाकारी का काम किया गया है जिस कारण इसे शीश महल भी कहते हैं।
सुनहरी कोठी का पुनर्निर्माण 1823 ई. में नवाब वजीरूद्दौला ने करवाया था।
इसकी दूसरी मंजिल का निर्माण 1870 ई. में मोहम्मद इब्राहिम अली ने करवाया।
सुनहरी कोठी का नाम सर्वप्रथम 'जरनिगार' था।
राजमहल-देवली, टोंक
यह महल बनास नदी के तट पर स्थित है।
मुबारक महल, टोंक
इस महल में बकरा ईद पर ऊँट की कुर्बानी दी जाती है। इसे 1817 ई. में टोंक नवाब अमीर खां पिण्डारी ने प्रारम्भ किया।
सिटी पैलेस, अलवर
इन महलों में मुगल-राजपूतों शैली का मिश्रण है।
यहाँ 1776 ई. में विनयसिंह ने विनयविलास महल का निर्माण किया।
इस महल को पूर्ण 1793 ई. में महाराजा बख्तावर सिंह ने करवाया।
विजय मन्दिर महल, अलवर
इन महलों का निर्माण 1918 में महाराजा जयसिंह ने करवाया।
इस महल में स्थित सीताराम मन्दिर में रामनवमी के दिन विशाल मेला भरता है।
सिलीसेढ़ महल, अलवर
यह छह मंजिला महल है जिसका निर्माण 1844 ई. में महाराजा विनयसिंह ने अपनी रानी शिलादेवी के लिए करवाया।
वर्तमान में यहाँ तीन सितारा होटल है।
नोट- सिलीसेढ़ झील को राजस्थान का नंदन कानन कहते है।
अजीत पैलेस (जोधपुर)
इस महल का निर्माण जोधपुर के प्रधानमंत्री अजीत सिंह ने करवाया। अजीतसिंह ने यह महल महाराजा हनुवंतसिंह को भेंट किया था। अजीत भवन पैलेस भारत का प्रथम हेरिटेज होटल है।
जसवंतथड़ा (जोधपुर)
मारवाड़ का ताजमहल/राजस्थान का ताजमहल के नाम से प्रसिद्ध जसवंतथड़ा में मारवाड़ शासकों का दाह संस्कार किया जाता था।
इस भवन का निर्माण 1899 ई. में महाराजा सरदारसिंह ने जसवंतसिंह द्वितीय की याद में करवाया।
कैलाश बुर्जमहल-अलवर
इस महल का निर्माण 1939-40 ई. में महाराजा तेजसिंह के समय हुआ। इस भवन का निर्माण वायसराय लार्ड लिनलिथगो के अलवर आगमन पर करवाया गया। लार्ड लिनलिथगो की पुत्री के नाम पर इस महल को होप सर्कस कहा गया जिसे बाद में कैलाश बुर्ज कहा गया। यह तीन मंजिला भवन है जिसकी तीसरी मंजिल पर शिव मंदिर है। इसे अलवर का हृदय स्थल भी कहा जाता है।
सरिस्का पैलेस, अलवर
यह महल सरिस्का अभयारण्य में स्थित है जिसका निर्माण महाराजा जयसिंह ने ड्यूक ऑफ एडिनबर्ग के शिकार यात्रा के उपलक्ष्य में करवाया। (1902 ई.)
वर्तमान में यहाँ होटल सरिस्का पैलेस चलता है।
विनय विलास महल, अलवर
इस महल में टाइगर डेन होटल है।
इस महल का निर्माण विजयसिंह ने करवाया।
हवा बंगला-तिजारा, खैरथल
इस महल का निर्माण बखतावर सिंह व विनयसिंह ने करवाया।
समर-हाउस, अलवर
यह हाउस महाराजा शिवदानसिंह द्वारा निर्मित कम्पनी गार्डन (पुर्जन विहार) में बना है जिसका निर्माण महाराजा मंगलसिंह ने करवाया था।
डीग महल, डीग
प्रारम्भ बदनसिंह ने किया। (1725 ई.)
इन महलों का निर्माण महाराजा सूरजमल ने 1755-65 ई. में करवाया।
यह महल जलमहल के रुप में प्रसिद्ध है।
इन महलों में मुगलशैली में सुन्दर उद्यान लगे हुए हैं।
श्रावण-भादों, केशव भवन, नंदभवन, हरिदेव भवन, गोपाल भवन आदि इनमें अन्य महल हैं।
इन महलों में गोपाल महल सबसे बड़ा है जिसमें काले पत्थर से निर्मित शाहजहाँ का सिंहासन रखा है।
डीग को जलमहलों की नगरी भी कहते है।
मृगया महल-बयाना भरतपुर
गोपाल भवन-डीग, भरतपुर
उदयविलास पैलेस, डूंगरपुर
इन महलों का निर्माण महारावल उदयसिंह ने करवाया।
इन महलों में पौराणिक देवी-देवताओं के चित्र उकेरे गये हैं।
जूना महल, डूंगरपुर
इन महलों का निर्माण 1282 ई. में रावलवीर सिंह देव ने करवाया।
यह सात मंजिला महल है।
इन महलों में भित्ति-चित्र व कांच का काम किया गया है।
बादल महल, डूंगरपुर
एक थम्बिया महल, डूंगरपुर
यह महल शिवसिंह ने अपनी माता की स्मृति में बनवाया।
इसका निर्माण महारावल शिवसिंह ने करवाया।
महल का निर्माण रानी ज्ञान कुंवरी की स्मृति में करवाया गया।
रंगमहल, बूँदी
इन महलों का निर्माण महाराव छत्रसाल ने करवाया।
इन महलों की दीवारों पर धार्मिक, ऐतिहासिक, शिकार के भित्ति-चित्रों का चित्रण हुआ है।
केसर विलास महल (सिरोही)
इस महल का निर्माण केसरीसिंह ने करवाया।
स्वरूपनिवास (सिरोही)
इस महल का निर्माण स्वरूपसिंह ने करवाया।
मोती महल (जोधपुर)
इन महलों का निर्माण मेहरानगढ़ दुर्ग में 1545 ई. में महाराजा सूरसिंह ने करवाया। इन महलों की दीवारों पर महाराजा तख्त सिंह ने सोने की पॉलिश करवाई।
फूल महल (जोधपुर)
इन महलों का निर्माण 1724 ई. में अभयसिंह ने करवाया।
रूठी रानी का महल (अजमेर)
जोधपुर शासक मालदेव (1532-62 ई.) की रानी मानवती उमादे अपने पति से रूठकर यहां आ गई जिसका अजमेर दुर्ग में महल बना है।
सुख महल-जैतसागर, बूँदी
इन महलों का निर्माण महाराव विष्णुसिंह ने 1773 ई. में करवाया।
जगमिन्दर महल, कोटा
जगमिन्दर महल किशोर सागर तालाब में स्थित है। जिसका निर्माण दुर्जनशाल की रानी ब्रजकुंवरी (1743-45 ई.) ने करवाया था।
लालगढ़ पैलेस, बीकानेर
इस महल का निर्माण यूरोपीय शैली में हुआ।
इस महल का निर्माण महाराजा गंगा सिंह ने अपने पिता लाल सिंह की याद में लाल पत्थरों से करवाया।
इस महल में एक विशाल पुस्तकालय स्थित है।
इस महल का उद्घाटन 24 नवम्बर, 1915 ई. लॉर्ड हार्डिंग ने किया। महल का डिजाइन सर सैमुअल स्विंटन जैकब ने बनाया। महल में सार्दुल संग्रहालय, अनूप लाईब्रेरी, होटल व राजपरिवार का निवास है।
तालाबशाही महल, धौलपुर
इस महल का निर्माण सलेह खाँ ने 1622 ई. में करवाया। सलेह खां शाहजहां का मनसबदार था।
तलहटी महल, जोधपुर
इन महलों का निर्माण महाराजा सूरसिंह ने अपनी रानी सौभाग्य देवी के लिए करवाया।
सरदारसमंद पैलेस, पाली
इस महल का निर्माण 1933 ई. में महाराजा उम्मेद सिंह ने करवाया था जो वर्तमान में हैरिटेज होटल है।
गजनेर महल, गजनेर (बीकानेर)
इस महल का निर्माण गजसिंह ने अकाल राहत कार्यों के दौरान करवाया जिसका पुनः निर्माण गंगासिंह ने करवाया।
पद्मिनी महल, चित्तौड़गढ़
निर्माण- रतनसिंह

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