विकास के आर्थिक, सामाजिक कार्यक्रम तथा फ्लैगशिप योजनाएँ (राजस्थान)

विकास के आर्थिक, सामाजिक कार्यक्रम तथा फ्लैगशिप योजनाएँ

इस लेख में राजस्थान सरकार की महत्वपूर्ण फ्लैगशिप योजनाओं और विकास कार्यक्रमों का विस्तृत संकलन दिया गया है। इसमें मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना, श्री अन्नपूर्णा रसोई, ग्रामीण रोजगार गारंटी (MGNREGA), और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी योजनाओं के नवीनतम आंकड़ों व प्रावधानों की जानकारी दी गई है। यह सामग्री RAS, REET, CET, राजस्थान पुलिस और अन्य राजकीय परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है, जिससे वे राज्य की आर्थिक और सामाजिक नीतियों को गहराई से समझ सकते हैं।
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राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA)

पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) संचालित है, जिसकी अवधि बढ़ाकर 31 मार्च, 2026 तक है। इस योजना के तहत केन्द्र एवं राज्य की हिस्सा राशि 60 : 40 के अनुपात में है। यह अभियान पंचायती राज संस्थाओं को सुदृढ़ करने एवं चुने हुये जनप्रतिनिधियों व कार्मिकों के क्षमतावर्द्धन एवं प्रशिक्षण प्रदान करने की केन्द्रीय प्रवर्तित योजना है। योजनान्तर्गत वित्तीय प्रावधान 60 प्रतिशत केन्द्रीयांश एवं 40 प्रतिशत राज्यांश के रूप में है।

सतत् विकास और हरित विकास

राजस्थान एस.डी.जी. सूचकांक का नवीनतम 5वाँ संस्करण 14 लक्ष्यों के 95 संकेतकों के आधार पर बनाया गया है। इस सूचकांक में 66.44 स्कोर के साथ झुंझुनूं जिला शीर्ष पर तथा नागौर एवं सीकर जिले क्रमशः द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर रहे हैं।

रोज़गार

राजस्थान में रोजगार, विकास का केंद्र बिंदु रहा है, जो अपनी विविध आबादी के लिए रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के राज्य के प्रयासों को दर्शाता है। बढ़ते औद्योगिक परिदृश्य के साथ, राज्य ने श्रम बाजार की गतिशीलता में महत्वपूर्ण बदलाव देखे हैं।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा आयोजित आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) भारत और सभी राज्यों में रोजगार और बेरोजगारी की स्थिति का आकलन करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के अनुसार वर्ष 2022-23 में बेरोजगारी दर 4.9 प्रतिशत थी जो कि जुलाई, 2023 से जून, 2024 में घटकर 4.7 प्रतिशत रह गई। यह नौकरी के अवसरों में वृद्धि को दर्शाता है।

जिलेवार प्रति व्यक्ति आय (प्रति व्यक्ति शुद्ध घरेलू उत्पाद) प्रचलित कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय
  • अलवर
  • भीलवाड़ा
  • जयपुर
  • अजमेर
  • जैसलमेर

स्थिर (2011-12) कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय
  • अलवर
  • जयपुर
  • राजसमंद
  • भीलवाड़ा
  • जैसलमेर

स्मार्ट सिटीज मिशन

जून, 2015 में भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए स्मार्ट सिटी मिशन का उद्देश्य ऐसे शहरों का विकास करना है, जो बुनियादी ढाँचे की सुविधा निवासियों को उच्च जीवन गुणवत्ता, स्वच्छ और टिकाऊ वातावरण और शहरी विकास के लिए स्मार्ट समाधान का उपयोग प्रदान करें।
राजस्थान में चार शहरों- जयपुर, उदयपुर, कोटा और अजमेर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकास के लिए चुना गया है।

श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना

प्रदेश में 'लक्ष्य अंत्योदय-प्रण अंत्योदय-पथ अंत्योदय' की संकल्पना को साकार कर रही सुशासन को समर्पित प्रदेश सरकार द्वारा वर्तमान में शहरी निकायों में श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना संचालित की जा रही है। आम जनता को ₹ 8 रुपये प्रति प्लेट की रियायती लागत पर शुद्ध और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है जिसमें राज्य सरकार ₹22 प्रति प्लेट का अनुदान देती है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एम.जी.एन.आर.ई.जी.एस.)

इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना एवं इसके द्वारा समावेशी विकास को बढ़ावा देना है। यह संपूर्ण राज्य में संचालित है। प्रत्येक परिवार को एक वित्तीय वर्ष के दौरान 100 दिन का सुनिश्चित रोजगार उपलब्ध कराना है जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने हेतु स्वेच्छा से तैयार है।

राजस्थान में मुख्यमंत्री ग्रामीण गारंटी योजना

(सी.एम.आर.ई.जी.एस.) के तहत मनरेगा के तहत 100 दिन का रोजगार पूरा होने पर 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार प्रदान किया जा रहा है। इसके अंतर्गत बारां जिले में निवासरत सहरिया जनजाति परिवारों, उदयपुर जिले में निवासरत कथौड़ी जनजाति परिवारों, और राज्य के विशेष योग्यजनों को 100 दिन का अतिरिक्त रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।

प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन)

"विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पी.वी.टी.जी.)" की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में सुधार के लिए, प्रधानमंत्री पीवीटीजी विकास मिशन शुरू किया गया है। मिशन का उद्देश्य 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) का विकास करना है।

प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण (पी.एम.ए.वाई.जी.)

योजनान्तर्गत लाभार्थियों का चयन सामाजिक, आर्थिक एवं जाति जनगणना-2011 (एसईसीसी-2011) के समकों के आधार पर किया जाता है। प्रत्येक लाभार्थी को सहायता राशि ₹ 1,20,000 देय है। प्रत्येक लाभार्थी को स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण हेतु अतिरिक्त राशि ₹ 12,000 देय है। मनरेगा योजना के अन्तर्गत लाभार्थी को दैनिक मजदूरी (90 मानव दिवस तक) भी देय है। व्यय राशि केन्द्र व राज्य सरकार के मध्य 60 : 40 अनुपात में वहन की जाती है।

विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एम.एल.ए.एल.ए.डी.)

उद्देश्य स्थानीय आवश्यकतानुसार आधारभूत संरचना का विकास, जनोपयोगी परिसम्पत्तियों का निर्माण एवं विकास के क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करना है। यह योजना नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में क्रियान्वित की जा रही है। प्रत्येक वित्तीय वर्ष में प्रति विधानसभा क्षेत्र के लिए ₹5 करोड़ का आवंटन निर्धारित किया गया है। कुल वार्षिक आवंटित राशि में से कम से कम 20 प्रतिशत राशि अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों के विकास पर अनुशंसित करना अनिवार्य है। माननीय विधायकों द्वारा सार्वजनिक उपयोगिताओं के मरम्मत एवं नवीनीकरण कार्यों के लिए वार्षिक आवंटन के 20 प्रतिशत तक की सिफारिश की जा सकती है।

सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एम.पी.एल.ए.डी.)

राज्य में 25 लोकसभा एवं 10 राज्यसभा सदस्य है। इस योजनान्तर्गत प्रत्येक लोकसभा सांसद अपने संसदीय क्षेत्र के लिए प्रतिवर्ष ₹5 करोड़ तक की राशि के कार्यों हेतु जिला कलेक्टर को अनुशंसा कर सकता है।

बायो-फ्यूल प्राधिकरण

राज्य की बंजर भूमि में रतनजोत व अन्य समकक्ष अखाद्य तैलीय फसलों की खेती के द्वारा जैव-ईंधन के उत्पादन की व्यापक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य में बायोफ्यूल नीति की घोषणा के पश्चात वर्ष 2007 में बायोफ्यूल प्राधिकरण का गठन किया गया।

राजस्थान बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड

वर्ष 2016 में राज्य की बंजर भूमि और चारागाहों को विकसित करने के उद्देश्यों के साथ राजस्थान बंजर भूमि विकास बोर्ड का नाम परिवर्तन कर 'बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड' किया गया। 'बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड' का पुनर्गठन 11 फरवरी, 2022 को किया गया। राजस्थान बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड के अंतर्गत निम्नलिखित प्रमुख गतिविधियाँ क्रियान्वित की जा रही हैं।
जिला, ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर बंजर भूमि एवं चारागाह विकास समितियों का गठन किया गया।
समितियों के सदस्यों एवं अन्य हितधारकों की भूमिकाओं एवं दायित्वों के संबंध में क्षमता अभिवर्द्धन के प्रयोजन से कार्यक्रम तथा गतिविधियों का निर्धारण किया गया।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)

राजस्थान को 31 मार्च, 2018 तक खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया जा चुका है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2020-21 से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का दूसरा चरण शुरू किया गया है, जो पाँच वर्षों तक लागू रहेगा।

राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आर.जी.एस.ए.)

राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आर.जी.एस.ए.) वर्ष 2018 से क्रियान्वित किया जा रहा है। वर्तमान में इसे "पुनर्गठित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान" के नाम से क्रियान्वित किया जा रहा है। जिसकी अवधि मार्च, 2026 तक निर्धारित की गई है। यह अभियान पंचायती राज संस्थाओं को सुदृढ़ बनाने तथा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों एवं कार्मिकों को क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए केन्द्र प्रायोजित योजना है। योजना के अंतर्गत वित्त पोषण प्रावधान 60 प्रतिशत केन्द्रांश तथा 40 प्रतिशत राज्यांश के रूप में है।

मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना

  • इसका पहले नाम मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना था।
  • योजना का प्रकार- पारिवारिक, व्यक्तिगत
  • मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना का उद्देश्य चिकित्सा सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए सरकारी एवं साथ ही निजी सूचीबद्ध अस्पतालों में पात्र लाभार्थियों को कैशलेस उपचार प्रदान कर उच्च स्वास्थ्य देखभाल लागत के विरुद्ध परिवारों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है।
  • इस पॉलिसी का नया चरण 30 जनवरी, 2023 को शुरू किया गया, जहाँ बीमा कम्पनी को प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹ 1,965 की प्रीमियम राशि का भुगतान किया जाता है।
  • इस योजना के तहत प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹25 लाख का कैशलेस उपचार प्रदान किया जा रहा है, जो दो भागों में विभाजित है। बीमा मोड में ₹5.00 लाख तक और ट्रस्ट मोड में ₹20.00 लाख तक कवरेज प्रदान किया जाता है।
  • योजनान्तर्गत अंग प्रत्यारोपण और कॉकलियर इम्प्लांट के लिए विशेष पैकेज भी शामिल हैं, जैसे- अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण, किडनी प्रत्यारोपण, लिवर प्रत्यारोपण, हृदय प्रत्यारोपण और फेफड़े का प्रत्यारोपण। भारत के अन्य राज्यों में भी प्रतिपूर्ति के आधार पर अंग प्रत्यारोपण उपचार सुविधा की अनुमति है।
  • बजट घोषणा- 2024 के अनुसार कैंसर उपचार के 73 डे केयर पैकेज भी योजना में शामिल हैं।

मुख्यमंत्री निःशुल्क जाँच योजना

  • योजना प्रारम्भ : 2013
  • मुख्यमंत्री निःशुल्क जाँच योजना 7 अप्रैल, 2013 से लागू की गई। राजकीय अस्पतालों में संपूर्ण उपचार उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से जनहित में यह योजना शुरू की गयी।

निरोगी राजस्थान अभियान

  • योजना प्रारम्भ : 18 दिसम्बर, 2019
  • योजना का प्रकार : सामूहिक

निम्नलिखित गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं-
  • जनसंख्या नियंत्रण (परिवार कल्याण कार्यक्रम)।
  • वृद्धावस्था में स्वास्थ्य देखभाल।
  • महिला स्वास्थ्य (एनीमिया, कुष्ठ रोग, स्तन एवं बच्चेदानी का कैंसर तथा माहवारी)।
  • मौसमी संचारी रोग।
  • किशोरावस्था स्वास्थ्य (एनीमिया, कुपोषण, मोटापा, माहवारी एवं स्वच्छता)।
  • गैर संचारी रोग (जीवनशैली आधारित मोटापा, मधुमेह, रक्तचाप, मनोरोग, हृदययोग, पक्षाघात, कैंसर तथा फेफड़े संबंधी रोग)।
  • टीकाकरण एवं वयस्क टीकाकरण (सम्पूर्ण टीकाकरण)।
  • व्यसन रोग दवा (शराब, ड्रग्स व तम्बाकू)।
  • खाद्य पदार्थ एवं मिलावट।
  • प्रदूषण इत्यादि।

मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान योजना

मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान योजना 1 अप्रैल, 2022 से मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा एवं मुख्यमंत्री निःशुल्क जाँच योजना के विस्तार के रूप में शुरू की गई है। इस योजना के अन्तर्गत चिकित्सा महाविद्यालय से जुड़े चिकित्सालयों, जिला चिकित्सालयों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और उप-स्वास्थ्य केन्द्रों में आने वाले सभी इनडोर और आउटडोर मरीजों को आवश्यक दवाओं और जाँच की निःशुल्क सुविधा प्रदान की जाती है। वर्तमान में आवश्यक दवा सूची के अनुसार 1,242 औषधियाँ, 429 सर्जिकल आइटम और 157 सूचर्स आइटम सूचीबद्ध किए गए हैं। सूचीबद्ध दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं में दवाओं के परीक्षण द्वारा आपूर्ति की जा रही दवाइयों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाती है।

राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम

7 जनवरी, 2014 को राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। इस कार्यक्रम को आरएमएनसीएच + ए (प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल और किशोर स्वास्थ्य) रणनीति के तहत किशोरों को मजबूत और सशक्त बनाने के लिए विकसित किया गया है। यह प्रारंभ में राजस्थान के 12 उच्च प्राथमिकता वाले 332 सुविधाओं में किशोर अनुकूल स्वास्थ्य क्लिनिक- "उजाला क्लिनिक" स्थापित किए गए हैं, जिनमें से उक्त क्लिनिक 314 स्थानों पर कार्यरत है। 332 स्वास्थ्य संस्थानों में से 158 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर, 157 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर, 01 मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर, 10 जिला अस्पतालों पर तथा 06 उप जिला अस्पतालों पर उक्त क्लिनिक स्थापित हैं।

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना

सहयोग एवं उपहार योजना के स्थान पर मुख्यमंत्री कन्यादान योजना लागू की गई हैं। इस योजना के अन्तर्गत लड़कियों को विभिन्न चरणों में लाभान्वित किया जा रहा हैं। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक वर्ग के बी.पी.एल. परिवार की 18 वर्ष या इससे अधिक आयु की लड़कियों के विवाह पर ₹31,000 उपहार स्वरूप दिए जाते हैं, यदि लड़की दसवीं पास है तो ₹10,000 तथा यदि लड़की स्नातक है तो ₹ 20,000 की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। इसी प्रकार शेष सभी श्रेणियों के बी.पी.एल. परिवार, अन्त्योदय परिवार, आस्था कार्ड धारक, आर्थिक रूप से कमजोर विधवा महिलाऐं, विशेष योग्यजन व्यक्ति, पालनहार में लाभार्थियों की लड़कियों की शादी और 18 वर्ष से अधिक उम्र की महिला खिलाड़ियों को भी स्वयं की शादी में ₹21,000 दिये जा रहे हैं, यदि लड़की दसवीं पास है तो अतिरिक्त ₹ 10,000 तथा यदि लड़की स्नातक है तो ₹ 20,000 की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।

इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना

इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना केन्द्र सरकार द्वारा 7 अक्टूबर, 2009 से प्रारम्भ की गयी है। इस योजना के अन्तर्गत भारत सरकार के मापदण्डों के अनुरूप सूचीबद्ध बी.पी.एल. परिवार की 40 वर्ष व अधिक की आयु की विधवा महिलाऐं पेंशन की पात्र हैं। ₹1,000 प्रतिमाह पेंशन (40 वर्ष से अधिक किन्तु 75 वर्ष से कम आयु) और ₹1,500 प्रति माह (75 वर्ष व अधिक आयु) पेंशन देय हैं जिसमें 80 वर्ष से कम आयु के पेंशनर्स को ₹300 एवं 80 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनर्स को ₹500 प्रतिमाह केन्द्रांश तथा शेष राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जाती है।

इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय निःशक्त पेंशन योजना

इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय निःशक्त पेंशन योजना केन्द्र सरकार द्वारा 24 नवम्बर, 2009 से प्रारम्भ की गयी है। इस योजना के अन्तर्गत भारत सरकार के मापदण्डों के अनुरूप सूचीबद्ध बी.पी.एल. परिवार के व्यक्ति, जो बहु निःशक्तता से ग्रसित है और जिनकी आयु 18 वर्ष व उससे अधिक है, पेंशन के पात्र हैं। ₹ 1,000 प्रतिमाह पेंशन (18 वर्ष व अधिक किन्तु 75 वर्ष से कम आयु के पेंशनधारी), ₹ 1,250 प्रति माह (75 वर्ष 75 वर्ष से अधिक आयु) पेंशन देय हैं जिसमें 80 वर्ष से कम आयु के पेंशनर्स को ₹ 300 एवं 80 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनर्स को ₹ 500 प्रतिमाह केन्द्रांश तथा शेष राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जाती है।

मुख्यमंत्री वृद्धावस्था सम्मान पेंशन योजना

इस योजना के अन्तर्गत 55 वर्ष या इससे अधिक आयु की महिला एवं 58 वर्ष या इससे अधिक आयु के पुरुष वृद्धावस्था सम्मान पेंशन के रूप में ₹ 1,000 प्रतिमाह पाने के लिए पात्र है।

मुख्यमंत्री एकल नारी सम्मान पेंशन योजना

इस योजना के अन्तर्गत विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता महिलाओं को पेंशन दी जा रही है। इस योजना में ₹1,000 प्रतिमाह (पात्र लाभार्थी जिनकी आयु 18 वर्ष से अधिक और 75 व अधिक) पेंशन दी जा रही है। योजनांतर्गत लाभ प्राप्त करने हेतु सभी स्त्रोतों से वार्षिक आय ₹48,000 से कम हो।

मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन सम्मान पेंशन योजना

इस योजना में, विशेष योग्यजनों को ₹1,000 प्रतिमाह (75 वर्ष से कम आयु) पेंशन देय है। 75 वर्ष व अधिक आयु के पेंशनर को ₹1,250 प्रतिमाह पेंशन देय है। कुछ रोग से ठीक हुए विशेष योग्यजन व्यक्तियों को भी ₹2,500 प्रतिमाह पेंशन प्रदान की जा रही है और नामित मेडिकल बोर्ड से प्रमाणित सभी सिलिकोसिस पीड़ितों को प्रतिमाह ₹1,500 पेंशन प्रदान की जाती है। लाभार्थी को सभी स्त्रोतों से वार्षिक आय ₹60,000 से कम हो।

लघु एवं सीमांत वृद्धजन कृषक सम्मान पेंशन योजना

लघु एवं सीमान्त वृद्ध कृषकों में, जिन महिलाओं की आयु 55 वर्ष व अधिक तथा पुरुषों की आयु 58 वर्ष व अधिक हो, को वृद्धजन सम्मान पेंशन ₹1,000 प्रतिमाह देय है।

पालनहार योजना

पालनहार योजना 10 श्रेणियों के अन्तर्गत रहने वाले बच्चों को सहायता प्रदान करने के लिए राजस्थान सरकार की एक प्रमुख नकद हस्तांतरण योजना है। प्रारम्भ में यह योजना अनुसूचित जाति के अनाथ बच्चों के लिए शुरू की गई थी लेकिन बाद में इस सभी श्रेणियों के अनाथ बच्चों के लिए शुरू कर दिया गया। समय के साथ इस योजना के अन्तर्गत 9 श्रेणियाँ और शामिल की गई, जिनके माता-पिता दोनों आजीवन कारावास या मौत की सजा काट रहे हों या माता की मृत्यु हो गई है और पिता आजीवन कारावास काट रहा हो या इसके विपरीत पिता की मृत्यु हो गई है और माता आजीवन कारावास काट रही हो, विधवा के बच्चों

मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना

मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना विभिन्न प्रोफेशनल कोर्स एवं नौकरियों के लिये आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं तथा यूपीएससी द्वारा आयोजित अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा, आर.पी.एस.सी. द्वारा आयोजित राज्य की प्रशासनिक सेवा य अधीनस्थ सेवा संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा एवं अन्य पे लेवल 10 एवं ऊपर की अन्य परीक्षाएँ, रीट परीक्षा, आरएसएसबी द्वारा आयोजित पटवारी/कनिष्ठ सहायक व उक्त लेवल की अन्य परीक्षाएँ कांस्टेबल परीक्षा, इंजीनियर/मेडिकल प्रवेश परीक्षा, क्लैट, सीएफसी, सीएसईईटी एवं सीएमएएफसी की परीक्षाओं की तैयारी उत्कृष्ट ढंग से कराने हेतु वर्ष 2021-22 से प्रारम्भ की गई है।
उक्त योजना में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, विशेष पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, आर्थिक पिछड़ा वर्ग व विशेष योग्यजन जिनके परिवार की वार्षिक आय सीमा ₹8 लाख से कम या माता-पिता राजकीय सेवा में हों, जिनका पे मैट्रिक्स लेवल 11 तक का हो, पात्र हैं। वर्ष 2023-24 में 20,353 विद्यार्थियों ने योजनान्तर्गत सूचीबद्ध कोचिंग संस्थाओं में अपनी उपस्थिति दी है।

सिलिकोसिस पॉलिसी

खदानों, कारखानों, पत्थर तोड़ने, पत्थर की घिसाई, पत्थर पीसकर पाउडर बनाने, गिट्टी बनाने, सैंड स्टोन से मूर्ति बनाने इत्यादि कार्यों से धूल के सम्पर्क में आने से श्रमिक एक लाइलाज बीमारी सिलिकोसिस से पीड़ित हो जाता है। इस नीति में सिलिकोसिस पीड़ित व्यक्ति को आर्थिक मदद के साथ-साथ ऐसे कार्य स्थल एवं श्रमिकों की पहचान, उनके पुनर्वास, बीमारी की रोकथाम व नियन्त्रण के उपाय अपनाए जाएँगे। सिलिकोसिस रोग के प्रमाणीकरण पर पुनर्वास के लिए ₹3 लाख की सहायता प्रदान की जाती है। पीड़ित की मृत्यु पर उसके परिवार के आश्रित को ₹2 लाख प्रदान किये जाते हैं। पीड़ित को ₹1,500 प्रति माह सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रदान की जा रही है। मृतक की विधवा को उनकी आयु वर्ग के अनुसार ₹1,150 से ₹1,500 की विधवा पेंशन प्रदान की जा रही है। पालनहार योजना के तहत परिवार को अलग-अलग आयु वर्ग के अनुसार ₹ 750 से ₹ 1,500 मासिक एवं ₹ 2,000 (वार्षिक एकमुश्त) की सहायता दी जाती है। पीड़ित और उसके परिवार को एनएफएसए जैसी सभी बी.पी.एल. सुविधाओं के आस्था कार्ड धरक परिवार की तरह लाभ होगा। पीड़ित परिवार को अंतिम संस्कार के लिए ₹ 10,000 की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। सिलिकोसिस पॉलिसी के अन्तर्गत मार्च, 2024 तक ₹ 51,778.80 लाख व्यय कर 17,245 सिलिकोसिस पीड़ितों/परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करवायी गयी है।

महिला शक्ति उड़ान योजना

उड़ान योजना का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य के संबंध में महिलाओं और लड़कियों में जागरूकता पैदा करना एवं मुफ्त सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध करवाना है। इस योजना में लगभग 1.51 करोड़ किशोरियों/महिलाओं को निःशुल्क सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध करवाये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री राजश्री योजना

राज्य में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने और उनके स्वास्थ्य और शिक्षा की स्थिति में सुधार करने के लिए मुख्यमंत्री राजश्री योजना की घोषणा की गई। यह एक प्रमुख योजना है, जो राज्य में महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता लाने की अपेक्षा करती है। इस योजना के अन्तर्गत राजस्थान राज्य की जून, 2016 या उसके बाद जन्म लेने वाली बालिकाएँ वित्तीय सहायता प्राप्त करने की पात्र हैं। इस योजना के अन्तर्गत प्रत्येक पात्र बालिका के अभिभावक/संरक्षण को 6 किस्तों में कुल ₹ 50,000 की राशि प्रदान की जाती है।

इंदिरा गाँधी शहरी क्रेडिट कार्ड योजना

इंदिरा गाँधी शहरी क्रेडिट कार्ड योजना के तहत शहरी क्षेत्र के 5 लाख स्ट्रीट वैण्डर्स को ₹50,000 का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारंटी योजना

योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्र में निवास कर रहे जरूरतमंद परिवारों के 18 से 60 वर्ष आयु के व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध करवाकर वित्तीय सहायता प्रदान करना है। निःशुल्क पंजीकरण के आधार पर 100 कार्य दिवस का रोजगार उपलब्ध करवाने के साथ प्रारंभ की गयी, जिस वित्तीय वर्ष 2023-24 में बढ़ाकर 125 कार्य दिवस कर दिया है।

मुख्यमंत्री निः शुल्क दवा योजना

  • योजना प्रारम्भ- 2011
  • राज्य सरकार- 40%
  • केन्द्रीय सरकार- 60%
  • योजना का प्रकार - पारिवारिक, व्यक्तिगत, सामूहिक

महात्मा गाँधी (अंग्रेजी माध्यम) विद्यालय

  • योजना प्रारम्भ : 19-06-2019
  • योजना का प्रकार : व्यक्तिगत
  • राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती के अवसर पर महात्मा गाँधी राजकीय विद्यालय (अंग्रेजी माध्यम) कक्षा 1 से 12 तक स्थापित करने का निर्णय लिया गया। 749 महात्मा गाँधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में 89,570 नामांकन हो चुके हैं। इन विद्यालयों की लोकप्रियता एवं इनमें प्रवेश के लिए अभिभावकों एवं विद्यालयों की माँग को देखते हुए शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में एक-एक हजार महात्मा गाँधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय और शुरू किये जाने की घोषणा वर्ष 2022-23 के बजट में की गई है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मुख्यमंत्री कन्यादान/हथलेवा योजना

योजना का प्रकार : पारिवारिक
आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्गों की कन्याओं के विवाह पर आर्थिक सम्बल प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री कन्यादान योजना संचालित है। राजस्थान के मूल निवासी को ही यह सहायता देय है।
अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अल्पसंख्यक वर्ग के बीपीएल परिवारों की 18 वर्ष या इससे अधिक आयु की कन्याओं के विवाह पर 31,000 रुपए की सहायता। शेष सभी वर्गों के बीपीएल परिवारों, अन्त्योदय परिवार, आस्था कार्डधारी परिवार, आर्थिक दृष्टि से कमजोर विधवा महिलाओं, विशेष योग्यजन व्यक्तियों, पालनहार में लाभार्थियों की कन्याओं के विवाह पर तथा महिला खिलाड़ियों के स्वयं के विवाह पर 21,000 रुपए सहायता। कन्या के 10वीं पास होने पर 10,000 रुपए एवं स्नातक पास होने पर 20,000 रुपए की अतिरिक्त सहायता।

मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन सम्मान पेंशन योजना

योजना प्रारम्भ : 2013
योजना का प्रकार : व्यक्तिगत
योजना के अन्तर्गत विशेष योग्यजन व्यक्ति जो अन्धता, अल्प दृष्टि, चलन निःशक्तता, कुष्ठ रोग, मुक्त, श्रवण शक्ति का ह्रास, मानसिक विमंदता, मानसिक रोगी में से किसी एक अथवा अधिक विकलांगता से ग्रसित हो अथवा प्राकृतिक रूप से बौनेपन से ग्रसित हो तथा प्राकृतिक रूप से हिजड़ेपन से ग्रसित हो, जो राजस्थान का मूल निवासी हो तथा राजस्थान में रह रहा हो एवं जिसकी स्वयं की सम्मिलित वार्षिक आय 60 हजार रु. तक हों, पेंशन का पात्र होगा।
बीपीएल/अंत्योदय/आस्था कार्ड धारी परिवार/सहरिया/ कथौड़ी/खैरवा जाति के विशेष योग्यजन को आय संबंधी शर्त में छूट प्रदान की गयी है।

पालनहार योजना

योजना प्रारम्भ : 2004-05
योजना का प्रकार : व्यक्तिगत
अनाथ बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा आदि की व्यवस्था संस्थागत नहीं की जाकर समाज के भीतर ही बच्चे के निकटतम रिश्तेदार/परिचित व्यक्ति/वयस्क भाई अथवा बहन को पालनहार बनाकर उनकी देखभाल, पालन-पोषण के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है।
योजना के अन्तर्गत अनाथ बच्चे, न्यायिक प्रक्रिया से मृत्यु दण्ड/आजीवन कारावास प्राप्त माता-पिता के बच्चे, निराश्रित पेंशन की पात्र विधवा माता के बच्चे, पुनर्विवाहित विधवा माता के बच्चे, एच.आई.वी./एड्स पीड़ित माता-पिता के बच्चे, कुष्ठ रोग से पीड़ित माता-पिता के बच्चे, नाता जाने वाली माता के बच्चे, विशेष योग्यजन माता-पिता के बच्चे, तलाकशुदा/परित्यक्ता महिला के बच्चे, सिलिकोसिस पीड़ित माता-पिता के बच्चों को सहायता प्रदान की जाती है।
पालनहार परिवार की वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। बच्चे की अधिकतम आयु 18 वर्ष से कम होनी चाहिए। आवेदन की तिथि से कम से कम 3 वर्ष की अवधि से राजस्थान में रह रहे हों।
वित्तीय वर्ष 2022-23 से पालन हार योजना में 0-6 आयु वर्ग के अनाथ बच्चों को मिलने वाली सहायता राशि 500 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 1500 रुपये एवं 6-18 आयु वर्ग के अनाथ बच्चों के लिए 1000 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये प्रतिमाह की गई है।

मुख्यमंत्री एकल नारी सम्मान पेंशन योजना

योजना का प्रकार : व्यक्तिगत
योजना में 18 वर्ष या इससे अधिक आयु की विधवा/ परित्यक्ता/तलाकशुदा महिला, जो राजस्थान की मूल निवासी हो, जिसकी स्वयं की नियमित आय का कोई स्रोत नहीं हो अथवा समस्त स्त्रोतों से कुल वार्षिक आय 48 हजार रुपये से कम हो, को पेंशन देय है।

मुख्यमंत्री वृद्धजन सम्मान पेंशन योजना

शुरूआत : 2013
योजना का प्रकार : व्यक्तिगत
योजना में 55 वर्ष या इससे अधिक आयु की महिला तथा 58 वर्ष या इससे अधिक आयु के पुरुष जिसके निर्वाह के लिए स्वयं एवं पति/पत्नी की नियमित आय का कोई स्त्रोत नहीं हो अथवा पति/पत्नी की समस्त स्त्रोतों से कुल वार्षिक आय 48 हजार रूपये से कम हो, को पेंशन देय हैं।
बी.पी.एल./अन्त्योदय/आस्था कार्ड धारी परिवार/सहरिया/कथौड़ी/खैरवा जाति के व्यक्तियों को आय संबंधी शर्त में छूट प्रदान की गई है। बजट 2023-24 में योजना के अंतर्गत 75 वर्ष से कम आयु की पेंशनर को ₹1000 प्रतिमाह एवं 75 वर्ष से अधिक आयु की पेंशनर को ₹1000 प्रतिमाह पेंशन देय है।

राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन योजना-2019

राजस्थान स्टेट कृषि विपणन बोर्ड
  • योजना प्रारम्भ : 17-12-2019
  • अवधि तक मान्य : 31 मार्च, 2024
  • वित्त पोषित :
  • योजना का प्रकार : व्यक्तिगत
  • योजना 12 दिसम्बर, 2019 को प्रारम्भ की गई है। कृषक कल्याण कोष के अंतर्गत बोर्ड की स्वयं की निधि से योजना के अन्तर्गत कृषि उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए पूँजीगत, ब्याज एवं विद्युत प्रभार/सौर ऊर्जा अनुदान तथा राज्य के उत्पादों के घरेलू एवं निर्यात व्यापार को प्रोत्साहन दिये जाने के लिए भाड़ा अनुदान देने का प्रावधान है। गुणवत्तायुक्त उत्पादन, बाजार विकास, कौशल विकास आदि के लिए विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता भी दिये जाने का प्रावधान है।
कृषक, कृषक उत्पादक संगठन एवं कृषि उद्योग तथा विपणन से जुड़े व्यक्ति/समूह/संस्था/प्रतिष्ठान आदि इस योजना का फायदा उठा सकते हैं।

एम.एस.एम.ई. अधिनियम-स्व प्रमाणीकरण

योजना प्रारम्भ : 2019
राज्य सरकार : 60%
केन्द्रीय सरकार : 40%
प्रदेश में एम.एस.एम.ई. इकाइयों की सरल स्थापना एवं विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा 17 जुलाई, 2019 को राजस्थान सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (स्थापना और प्रवर्तन का सुकरीकरण) अधिनियम लागू किया गया।
योजना के अंतर्गत उद्यमी के आवेदन के पश्चात् आवेदन प्राप्ति का प्रमाण-पत्र उसी समय ऑनलाइन पोर्टल पर जारी कर दिया जाता है, इसके तहत उद्यमी को 3 वर्ष तक राजस्थान के अधिनियमों के अन्तर्गत विभिन्न विभागों की किसी प्रकार की स्वीकृति एवं निरीक्षण की आवश्यकता नहीं है। हालांकि 3 वर्ष की समाप्ति के पश्चात् 6 माह में आवश्यक स्वीकृतियाँ उद्यमी को प्राप्त करनी होंगी।

मुख्यमंत्री युवा संबल योजना

योजना प्रारम्भ : 2019
योजना का प्रकार : व्यक्तिगत
युवाओं को बेरोजगारी के दंश से मुक्त करने में सहायता प्रदान करने के लिए एक फरवरी, 2019 से यह योजना शुरू हुई।
राज्य सरकार ने युवाओं में योजना की लोकप्रियता को देखते हुए वर्तमान में 1 लाख 60 हजार की सीमा को बढ़ाकर अधिकतम 2 लाख किया है। योजना को बेहतर बनाते हुए Employable बनाने की दृष्टि से पात्र बेरोजगार युवाओं को तीन माह का प्रशिक्षण दिलवाकर विभिन्न विभागों में 4 घण्टे प्रतिदिन इंटर्नशिप करवाई जायेगी।
पुरुष- ₹4000 प्रतिमाह
महिला/दिव्यांग/ट्रांसजेंडर - ₹4500 प्रतिमाह

कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना

योजना प्रारम्भ : 2015-16
अवधि तक मान्य : 12 माह
योजना का प्रकार : व्यक्तिगत
डूंगरपुर जिले की कालीबाई भील ने शिक्षा के लिये अपना जीवन समर्पित किया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए इस योजना में मेधावी छात्राओं के लिये चल रही अन्य स्कूटी वितरण योजनाओं को एकीकृत किया गया है।
राजस्थान के राजकीय एवं निजी विद्यालयों में कक्षा 12 तक नियमित छात्रा के रूप में अध्ययन करने एवं कक्षा 12वीं में अधिक अंक प्राप्त करने के लिये प्रोत्साहित एवं छात्राओं में प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने तथा उच्च अध्ययन के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से यह योजना राज्य में संचालित की जा रही है।
योजना के अन्तर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में कक्षा 12वीं में न्यूनतम 65 प्रतिशत प्राप्तांक से उत्तीर्ण तथा केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में कक्षा 12वीं में न्यूनतम 75 प्रतिशत प्राप्तांक से उत्तीर्ण छात्राएँ जो राजस्थान के किसी भी विद्यालय में अध्ययनरत हों।
पूर्व में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग से 10वीं कक्षा के परिणाम के आधार पर किसी छात्रा को स्कूटी प्राप्त हुई है तो उसी छात्रा को 12वीं के परिणाम के आधार पर पात्र होने पर 40,000 रूपये एकमुश्त राशि प्राप्त होगी।

देवनारायण छात्रा स्कूटी योजना

योजना प्रारम्भ : 2011-12
योजना का प्रकार : व्यक्तिगत
इसमें वार्षिक आय ₹2.5 लाख तक है।
राज्य की अति पिछड़े वर्ग की जातियों बंजारा, बालदिया, लबाना, गाड़िया लौहार, गाडोलिया, गूर्जर, राईका, रेबारी देबासी, देवा, गड़रिया के लिए यह योजना संचालित है। योजना का उद्देश्य उक्त वर्ग की छात्राओं को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड/केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित 12वीं कक्षा की परीक्षा तथा विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित स्नातक/स्नातकोत्तर डिग्री परीक्षाओं में अधिक से अधिक अंक लाने, उनमें प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने, उच्च अध्ययन हेतु आकर्षित करने एवं उच्च शिक्षा के लिए वाहन सुविधा उपलब्ध कराने तथा आर्थिक सहयोग प्रदान करना है।
राजस्थान मूल की विशेष पिछड़े वर्ग में से अति पिछड़े वर्ग की ये छात्राएँ जिन्होंने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड/केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित 12वीं परीक्षा उत्तीर्ण में पूर्णतया 50 प्रतिशत या इससे अधिक अंक प्राप्त किये हैं तथा राजस्थान स्थित राजकीय महाविद्यालयों, राज्य वित्त पोषित विश्वविद्यालयों में स्नातक डिग्री प्रथम वर्ष में प्रवेश लेकर नियमित अध्ययनरत हों।

श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना

योजना प्रारम्भ : 20-08-2020
अवधि तक मान्य : 36 माह
योजना का प्रकार : सामूहिक
प्रदेश में 'लक्ष्य अन्त्योदय-प्रण अन्त्योदय-पथ अन्त्योदय' के संकल्प को साकार कर रही सुशासन को समर्पित श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना राज्य सरकार द्वारा वर्तमान में शहरी निकायों में संचालित की जा रही है।
योजनान्तर्गत आमजन को ₹8 में प्रति थाली में दो समय (दोपहर एवं रात्रिकालीन) की स्थायी रसोईयों में सम्मानपूर्वक बैठाकर शुद्ध व पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है व राज्य सरकार द्वारा ₹22 प्रति थाली राजकीय अनुदान दिया जा रहा है। योजनान्तर्गत 31 मार्च, 2024 तक 19.17 करोड़ थाली परोसी जाकर जरूरतमन्दों को लाभान्वित किया जा चुका है।

श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना (ग्रामीण)

वर्तमान में दिनांक 06.01.2024 से 'श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना' का संचालन हो रहा है।
राज्य सरकार के निर्देशानुसार प्रदेश के सभी चिन्हित ग्रामीण कस्बों में श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना का संचालन राजस्थान ग्रामीण आजीविका परिषद् (राजीविका) के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूह के द्वारा किया जा रहा है।
योजनान्तर्गत 891 रसोईयों के माध्यम से दोपहर एवं रात्रि भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है। योजनान्तर्गत लाभार्थी से प्रति थाली 8 रुपये लिए जाएंगे एवं राज्य सरकार द्वारा प्रति थाली 22 रुपये राजकीय अनुदान के रूप में देय हो रहे थे।
प्रत्येक लाभार्थी को 600 ग्राम भोजन (300 ग्राम चपाती, 100 ग्राम दाल, 100 ग्राम सब्जियाँ, 100 ग्राम - चावल/बाजरा खिचड़ी और अचार) की थाली परोसी जा रही है।

विकसित भारत संकल्प यात्रा

पृष्ठभूमि- भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न फ्लैगशिप योजनाओं एवं इनके प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी आम जन तक पहुंचाने, योजनाओं को प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने, योजनाओं संबंधी जागरूकता एवं योजनाओं के निर्धारित लक्ष्य प्राप्ति के संबंध में विकसित भारत संकल्प यात्रा प्रारंभ की गई है।
देश में यात्रा प्रारंभ - 15 नवम्बर, 2023
राज्य में यात्रा की अवधि - 16 दिसम्बर से 26 जनवरी, 2024 (ग्रामीण)
नोडल विभाग - पंचायती राज विभाग
प्रत्येक ग्राम पंचायत एवं 10000 से अधिक की आबादी के शहरी स्थानीय निकाय।

घर-घर औषधि योजना

योजना प्रारम्भ : 01-08-2021
अवधि तक मान्य : 60 माह
योजना का प्रकार : पारिवारिक, व्यक्तिगत
मुख्यमंत्री ने 1 अगस्त, 2021 को अपने निवास पर गिलोय का पौधा लगाकर घर-घर औषधि योजना की शुरुआत की।
योजना के तहत वर्ष 2021-2026 के बीच प्रत्येक परिवार को तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, कालमेघ के 2-2 औषधीय पौधों का वितरण किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री किसान मित्र ऊर्जा योजना

योजना प्रारम्भ : जुलाई, 2021
योजना का प्रकार : व्यक्तिगत
मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने जून, 2021 को योजना का शुभारंभ किया। योजना का लाभ "लैट श्रेणी के कृषि उपभोक्ताओं एवं मीटर चालू अथवा खराब होने की स्थितियों में देय। यह अनुदान राशि प्रतिमाह अधिकतम 1000 रुपये एवं प्रतिवर्ष अधिकतम 12,000 रुपये है।

इंदिरा गाँधी मातृत्व पोषण योजना

योजना प्रकार : 19-11-2020
योजना का प्रकार : व्यक्तिगत
माननीय मुख्यमंत्री महोदय की वर्ष 2020-21 की बजट घोषणा की पालना में राज्य के 5 जिलों, जिनमें 4 जनजातीय जिले प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा और उदयपुर तथा 1 सहरिया बहुल जिला बाराँ सम्मिलित हैं, में इंदिरा गाँधी मातृत्व पोषण योजना माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा दिनांक 19.11.2020 को प्रारंभ की गई।
योजना के अंतर्गत दूसरी संतान से गर्भवती महिलाओं को पाँच चरणों में 6,000 रुपये का नकद लाभ दिया जा रहा है।
यह योजना पूर्णतया पेपरलैस है, जिसमें लाभार्थियों को कहीं आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के PCTS सॉफ्टवेयर में दर्ज लाभार्थियों की जानकारी को विभाग के राजपोषण पोर्टल से ऑनलाइन सत्यापन के बाद निर्धारित राशि सीधा उनके जन आधार से जुड़े बैंक खाते में जमा की जा रही है।

राजस्थान जन-आधार योजना

'एक संख्या, एक कार्ड व एक पहचान' के उद्देश्य की पूर्ति के लिए राजस्थान के मुख्य मंत्री ने 2019-20 के परिवर्तित बजट भाषण में 'राजस्थान जन-आधार योजना' घोषित की थी। इसका उद्देश्य विभिन्न स्कीमों के समग्रीकृत लाभों को सरल, पहुँच के लायक व पारदर्शी रूप में लोगों तक पहुँचाने का है। इसके लिए राजस्थान जन-आधार प्राधिकरण अधिनियम 2020, दिसम्बर 18, 2019 से लागू हो गया था।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM)

यह राजस्थान में 2007-08 में केन्द्र प्रवर्तित स्कीम (CSS) के रूप में प्रारम्भ किया गया था। इसमें गेहूँ व दालें - कृषि उत्पाद शामिल किये गये हैं। 2015-16 में इसमें भारत सरकार व राजस्थान का अंश 60 : 40 किया गया था।

इसकी मुख्य बाते इस प्रकार हैं-
  • कृषकों को बीज, उर्वरक, सिंचाई के पम्प सेट्स आदि उपलब्ध कराये जाते है
  • 14 जिलों में क्रियान्वित
  • मोटे अनाज में मक्का, 5 जिलों में क्रियान्वित
  • 2018-19 में यह CSS के रूप में लागू, ज्वार के लिए 10 जिले, बाजरे के लिए 21 जिले निर्धारित।
  • कपास के लिए पौध-संरक्षण का प्रदर्शन व वितरण।
  • तिलहन व ऑयल पॉम मिशन (TBO's) के अन्तर्गत बीज का उत्पादन व वितरण किया जाता है।

कृषि-विस्तार व प्रौद्योगिकी का राष्ट्रीय मिशन

इसके अन्तर्गत भारत सरकार व राज्य सरकार का अंश 60 : 40 है।
4 उप-मिशन इस प्रकार हैं: कृषि विस्तार, बीज व प्लांटिंग मिशन, कृषि यंत्रीकरण के लिए मिशन, राष्ट्रीय-ई-गवर्नेन्स योजना

सुस्थिर कृषि के लिए राष्ट्रीय मिशन

इसमें भी भारत सरकार व राज्य सरकार का 60 : 40 अंश है। इसके अन्तर्गत 4 उप-मिशन इस प्रकार हैं: वर्षा आधारित क्षेत्र विकास, उप-स्वास्थ्य कार्ड स्कीम, परम्परागत कृषि विकास योजना एवं एग्रो-वानिकी मिशन।
राजीव गाँधी जल-संचय योजना - लागू-20 अगस्त, 2019
इसका वाटरशेड अंश भी है। इस पर भारत सरकार व राज्य सरकार का अंश 60 : 40 रखा गया है।

सौभाग्य योजना

प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना-सौभाग्य योजना 11 अक्तूबर, 2017 को प्रारम्भ की गई थी। इसके अन्तर्गत सभी इच्छुक परिवारों को (ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में) बिजली उपलब्ध की जाती है। 26 दिसम्बर, 2019 तक उन सभी ग्रामवासियों के परिवारों को बिजली उपलब्ध करा दी गई थी, जिनकी इच्छुक परिवारों के रूप में पहचान की जा चुकी थी।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम

इसके अन्तर्गत आँगनबाड़ी केन्द्रों में जन्म के समय प्राप्त सुविधा प्राप्त 15 साल तक के बच्चे, जो मदरसों में पढ़ते हैं, उनकी चार Ds के लिए जाँच की जाती है- Defects of birth, Diseases, Deficiencies, Development Delays & Disabilities (40 चिन्हित बीमारियों के सम्बन्ध में)। ये जाँच Mobile Health Tram द्वारा की जाती है। तत्पश्चात् उनका इलाज किया जाता है।

आयुष्मान भारत (स्वास्थ्य व कल्याण केन्द्र)

भारत सरकार ने इसे दो भागों में जारी किया था। एक तो प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMAY) एवं दूसरा भाग स्वास्थ्य व कल्याण केन्द्रों (HWC) के रूप में। इसका प्रमुख उद्देश्य व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल उपलब्ध कराना है, जिसमें प्रजनन, मातृ और स्वास्थ्य देखभाल उपलब्ध कराना होता है जिसमें उपचारात्मक देखभाल, संचारी रोग, असंचारी रोग, रोगी के दर्द सम्बन्धी देखभाल, बुजुर्ग देखभाल, मौखिक स्वास्थ्य ई.एन. टी. देखभाल और बुनियादी आपातकालीन सेवाएँ शामिल होती हैं।

इसके प्रमुख घटक हैं :
  • विस्तारित सेवाएँ उपलब्ध कराना
  • निरंतर देखभाल-टेली हैल्थ व रैफरल
  • एच. आर.-एम. एल. एच. पी और मल्टीस्किलिंग विस्तार
  • दवाओं व जाँचों का विस्तार
  • सामुदायिक में बिलाई जेशन व स्वास्थ्य संवर्धन
  • आई.टी. प्रणाली को मजबूत करना
  • आधारभूत संरचना
  • क्रियान्वयन के लिए साझेदारी
  • वित्तीय/भुगतान कराने में सुधार
  • आयुष्मान भारत महात्मा गाँधी राजस्थान स्वास्थ्य बीमा योजना का नवीन चरण 30 जनवरी, 2021 से प्रारम्भ किया गया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन : परियोजना एक नजर में

परियोजना प्रारंभ होने की तिथि केन्द्र में अप्रैल, 2005 से एवं राज्य में मई, 2005 से
परियोजना का विस्तार 1 मई, 2013 से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अन्तर्गत राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (NUHM) एवं राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) उप मिशन के रूप में कार्यरत हैं ।
राज्य में परियोजना की आवश्यकता प्रजनन स्वास्थ्य एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं सेवाओं की पहुँच में सुधार ।
परियोजना का उद्देश्य मातृ एवं बाल मृत्युदर को कम करना एवं जनसंख्या स्थायित्व, स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण एवं चिकित्सा की अन्य पद्धतियों को मुख्यधारा का अंग बनाना हैं ।
वित्तीय सहायता देने वाली संस्था स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार
प्रोजेक्ट कवरेज राज्य के सभी जिले

जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK)

मातृ मृत्यु दर तथा शिशु मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा भारत सरकार के सहयोग से "जननी-शिशु सुरक्षा कार्यक्रम" का शुभारंभ 12 सितम्बर, 2011 से किया गया है।
योजना का उद्देश्य- गर्भवती महिलाओं, प्रसूताओं एवं बीमार नवजात शिशुओं (शिशु को 1 वर्ष की उम्र तक) पर होने वाले अतिरिक्त खर्च (Out of Pocket Expenditure) के बोझ को कम कर उन्हें सरकारी चिकित्सा संस्थाओं में सभी प्रकार की सेवाएँ निःशुल्क उपलब्ध कराना है।
यह योजना गर्भवती महिला, प्रसूताओं एवं बीमार नवजात शिशु के राजकीय चिकित्सा संस्थाओं में निःशुल्क इलाज पर बल देती है।

जननी सुरक्षा योजना (JSY)

जननी सुरक्षा योजना का शुभारम्भ राजस्थान में सितम्बर, 2005 से किया गया।
योजना के उद्देश्य-
  1. मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना।
  2. संस्थागत प्रसवों की संख्या में वृद्धि करना।

निरोगी राजस्थान अभियान

माननीय मुख्यमंत्री महोदय के द्वारा राजस्थान के समस्त नागरिकों के लिए स्वास्थ्य समस्याओं एवं उनके निदान के लिए राज्य सरकार की पहली वर्षगांठ के अवसर पर 18 दिसम्बर 2019 से "निरोगी राजस्थान अभियान" का शुभारंभ किया गया।
इसके अंतर्गत बीमारियों से बचाव हेतु निम्न कार्य किये जायेंगे-
  1. जनसंख्या नियंत्रण (परिवार कल्याण कार्यक्रम)।
  2. वृद्धावस्था में स्वास्थ्य की देखभाल (जेरियेट्रिक सेन्टर)।
  3. महिला स्वास्थ्य (एनीमिया, कुपोषण, स्तन एवं बच्चेदानी का कैंसर, माहवारी)।
  4. संचारी रोग (मौसमी बीमारियाँ)।
  5. किशोरावस्था स्वास्थ्य (एनीमिया, कुपोषण, मोटापा, माहवारी एवं स्वच्छता)।
  6. गैर संचारी रोग (जीवनशैली आधारित मोटापा, मधुमेह, बी.पी., मनोरोग, हृदयरोग, पक्षाघात, कैंसर, फेफड़े संबंधी रोग)।
  7. टीकाकरण एवं वयस्क टीकाकरण (संपूर्ण टीकाकरण)।
  8. व्यसन रोग (शराब, ड्रग्स, तम्बाकू)।
  9. खाद्य पदार्थ एवं मिलावट।
  10. प्रदूषण इत्यादि।

पढ़ना लिखना अभियान

भारत सरकार द्वारा राज्य में केन्द्रीय प्रवर्तित नवीन योजना "पढ़ना लिखना अभियान" की प्रशासनिक स्वीकृति 8 मई, 2020 को जारी कर दी गई है। यह योजना राज्य के समस्त जिलों के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित की जाएगी। योजना में राज्य के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के 15 वर्ष व अधिक आयु वर्ग के व्यक्तियों को साक्षर करने हेतु सम्मिलित किया गया हैं। इसमें विशेष प्राथमिकता महिला वर्ग की साक्षरता पर दिया गया है। यह पूर्ण रूप से स्वयंसेवक आधारित जन अभियान है।

मुख्यमंत्री युवा कौशल योजना (MMYKY)

योजना का शुभारंभ दिनांक 7 नवम्बर, 2019 को माननीय राज्य मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग (स्वतंत्र प्रभार) एवं माननीय राज्य मंत्री, कौशल, नियोजन एवं उद्यमिता विभाग (स्वतंत्र प्रभार) द्वारा किया गया।
इस योजना का उद्देश्य राजकीय महाविद्यालयों में अध्ययनरत स्नातक स्तर के नियमित विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से उनके कौशल को विकसित कर रोजगार/स्वरोजगार के लिये सक्षम बनाना है ताकि अपने अध्ययन के उपरान्त ये प्राप्त कौशल के अनुसार रोजगार प्राप्त कर सकें अथवा स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ कर सकें।

Skill Acquisition and Knowledge Awareness for Livelihood Promotion (SANKALP)

कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय/ राज्य स्तर पर संस्थागत तंत्र को मजबूत करने, गुणवत्तायुक्त-प्रशिक्षकों एवं मूल्यांकन कर्ताओं का पूल बनाने तथा सभी कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के मध्य अभिसरण हेतु Skill Acquisition and Knowledge Awareness for Livelihood Promotion (SANKALP) परियोजना प्रारम्भ की गई है। यह कार्यक्रम कौशल विकास कार्यक्रमों की गुणवत्ता एवं बाजार की प्रासंगिकता में सुधार तथा महिलाओं, एससी, एसटी, पीडब्ल्यूडी प्रतिभागियों व समाज के अन्य वंचित समूहों के प्रतिशत में भी वृद्धि करेगा।

महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 के अन्तर्गत संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम राजस्थान 2 फरवरी, 2006 से राज्य के 6 जिलों यथा- बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, करौली, सिरोही, झालावाड़ एवं उदयपुर में प्रारम्भ की गई। द्वितीय चरण में यह योजना राज्य के अन्य 6 जिलों यथा- बाड़मेर, चित्तौड़गढ़, जैसलमेर, जालौर, टोंक एवं सवाईमाधोपुर में 2 मई, 2007 से प्रारम्भ की गई है। तृतीय चरण में यह योजना राज्य के शेष सभी 21 जिलों में 1 अप्रैल, 2008 से प्रारम्भ की जा चुकी है।
यह योजना वर्तमान में समस्त जिलों पर लागू है।

वित्तीय प्रबंधन- महात्मा गाँधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी स्कीम राजस्थान योजना भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित योजना है। योजनान्तर्गत भारत सरकार व राज्य सरकार द्वारा निम्नानुसार वित्तीय भार वहन किये जाने का प्रावधान है-
(i) भारत सरकार द्वारा वहन किये जाने वाले व्यय-
  • (क) अकुशल शारीरिक श्रमिकों की मजदूरी लागत
  • (ख) कुशल एवं अर्द्धकुशल श्रमिकों की मजदूरी तथा सामग्री लागत का 75 प्रतिशत अंश
  • (ग) केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित मापदण्डों के अनुसार प्रशासनिक खर्चे। इनमें कार्यक्रम अधिकारियों तथा उनके सहायक कर्मियों के वेतन व भत्ते के साथ-साथ कार्य स्थलों पर उपलब्ध कराये जाने वाली सुविधाओं का व्यय भी सम्मिलित है।

(ii) राज्य सरकार द्वारा वहन किये जाने वाले व्यय-
  • (क) कुशल एवं अर्द्धकुशल श्रमिकों की मजदूरी तथा सामग्री लागतों का 25 प्रतिशत अंश
  • (ख) यदि राज्य सरकार 15 दिवस के भीतर किसी आवेदक को रोजगार नहीं दे पाती है, तो उसको दिया जाने वाला बेरोजगारी भत्ता
  • (ग) राज्य रोजगार गारन्टी परिषद के प्रशासकीय खर्चे

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना

माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा दिनांक 13 फरवरी, 2024 को पीएम सूर्य घर योजना के अन्तर्गत हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए एक करोड़ घरों पर सौर संयंत्र स्थापित करने की घोषणा की गई।

मुख्यमंत्री निःशुल्क बिजली योजना (कृषि अनुदान)

"मुख्यमंत्री किसान मित्र ऊर्जा योजना" के अंतर्गत कृषि उपभोक्ताओं को ₹1,000 प्रति माह (एक वर्ष में अधिकतम ₹12,000) का अनुदान प्रदान किया जा रहा था। वित्त वर्ष 2023-24 की बजट घोषणा में इस योजना को मुख्यमंत्री निःशुल्क बिजली योजना (कृषि अनुदान) के साथ मिला दिया गया है, योजना के अंतर्गत वर्तमान में 2,000 यूनिट प्रति माह तक उपभोग करने वाले कृषि उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली प्रदान की जा रही है। इस योजना का लाभ बिलिंग माह जून, 2023 से दिया जा रहा है। यदि प्रतिमाह विद्युत उपभोग 2,000 यूनिट से अधिक है तो पुरानी योजना "मुख्यमंत्री किसान मित्र ऊर्जा योजना" के तहत उस माह विशेष में ₹ 1,000 प्रतिमाह सब्सिडी प्रदान की जायेगी।

मुख्यमंत्री निःशुल्क बिजली योजना (घरेलू अनुदान)

इस योजना के तहत 100 यूनिट तक मासिक विद्युत उपभोग करने वाले सभी घरेलू उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली (शून्य बिल) प्रदान की जायेगी। इसके अतिरिक्त यदि उपभोक्ता का एक माह में 200 यूनिट तक विद्युत उपभोग है, तो पहले 100 यूनिट के विद्युत शुल्क, फिक्स चार्ज और नगरीय उपकर की बिल की छूट दी जाएगी। 200 यूनिट से अधिक विद्युत उपभोग वाले उपभोक्ताओं को भी पहली 100 यूनिट मुफ्त मिलेंगी परन्तु अन्य सभी शुल्क उपभोक्ताओं को वहन करना होगा। इस योजना का लाभ बिलिंग माह जून, 2023 से दिया जा रहा है। इस योजना के अन्तर्गत बिलिंग माह मार्च, 2024

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को RPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।