राजस्थान जनगणना व साक्षरता - 2011
इस लेख में राजस्थान जनगणना एवं साक्षरता 2011 के नवीनतम और महत्वपूर्ण आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है। इसमें जनसंख्या वृद्धि, घनत्व, लिंगानुपात, साक्षरता दर और अनुसूचित जाति/जनजाति से जुड़े वे सभी तथ्य शामिल हैं जो परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं। यह लेख RAS, REET, CET, राजस्थान पुलिस और अन्य राज्य स्तरीय सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए एक सम्पूर्ण मार्गदर्शिका है।
राजस्थान में जनसंख्या का आकार व वृद्धि
1 मार्च, 2024 को राजस्थान की अनुमानित जनसंख्या 8.19 करोड़ है जो कि भारत का सातवाँ सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है।
2011 की जनगणना के अनुसार 1 मार्च, 2011 को राजस्थान की जनसंख्या लगभग 6.85 करोड़ व्यक्ति आँकी गई हैं। 2001 में यह लगभग 5.65 करोड़ व्यक्ति थी। इस प्रकार 2001-11 की अवधि में 2001 की जनसंख्या में लगभग 120 लाख व्यक्तियों की बढ़ोतरी हुई जो 21.30% वृद्धि को सूचित करती है। इसी अवधि में भारत की जनसंख्या में 17.7% की वृद्धि हुई थी। इस प्रकार 2001-2011 के दशक में राजस्थान में जनसंख्या की वृद्धि समस्त भारत की तुलना में लगभग 3.6% बिन्दु अधिक हुई है।
| वर्ष | जनसंख्या (करोड़ में) | दस वर्षीय वृद्धि (लाखों में) | दस वर्षीय दर (% में) |
|---|---|---|---|
| 1901 | 1.03 | - | - |
| 1911 | 1.10 | 7 | 6.70 |
| 1921 | 1.03 | (-) 7 | (-) 6.29 |
| 1931 | 1.17 | 14 | 14.14 |
| 1941 | 1.39 | 22 | 18.01 |
| 1951 | 1.60 | 21 | 15.20 |
| 1961 | 2.02 | 41 | 26.20 |
| 1971 | 2.58 | 57 | 27.83 |
| 1981 | 3.43 | 85 | 32.97 |
| 1991 | 4.40 | 97 | 28.44 |
| 2001 | 5.65 | 125 | 28.41 |
| 2011 | 6.85 | 120 | 21.30 |
- 1901-61 के 60 वर्षों में राजस्थान की जनसंख्या में लगभग 99 लाख की वृद्धि हुई, जबकि 2001-2011 के दस वर्षों में इसमें 1.20 करोड़ की वृद्धि दर्ज की गई है।
- 1911 से 1921 के बीच जनसंख्या में गिरावट आई थी।
राजस्थान में 2001-2011 की अवधि में जिलेवार जनसंख्या की वृद्धि दरें
- 2001-2011 की अवधि में राजस्थान के 33 जिलों में जनसंख्या की सर्वाधिक वृद्धि-दर बाड़मेर जिले में 32.5% पाई गई है, जबकि सबसे कम वृद्धि-दर गंगानगर जिले में 10% रही है।
- राज्य की औसत जनसंख्या वृद्धि-दर 21.3% की तुलना में पन्द्रह जिलों में, अर्थात् जयपुर, दौसा, डूंगरपुर, धौलपुर, जालौर, बाड़मेर, सिरोही, अलवर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, बाँसवाड़ा, जैसलमेर, जोधपुर व प्रतापगढ़ जिलों में जनसंख्या में अधिक प्रतिशत वृद्धि हुई तथा अन्य 18 जिलों में यह राज्य के औसत से कम रही।
- राज्य में सबसे अधिक आबादी जयपुर जिले की रही है जो 2011 में 66.26 लाख थी। यह राज्य की कुल जनसंख्या का 9.67% है। आबादी की दृष्टि से जैसलमेर का स्थान अंतिम आता है।
- 2011 में यहाँ की आबादी 6.70 लाख रही, जो राज्य की कुल जनसंख्या का मात्र 0.98 प्रतिशत रही है।
राज्य में जनसंख्या के घनत्व की स्थिति
2011 के परिणामों के अनुसार राजस्थान में जनसंख्या का घनत्व प्रति वर्ग किलोमीटर 200 रहा, जबकि 2001 में यह 165 था। भारत में 2011 में घनत्व 382 रहा, जबकि 2001 में यह 325 रहा था। राज्यों में सबसे ज्यादा घनत्व बिहार में 1106 पाया गया है तथा सबसे कम अरुणाचल प्रदेश में 17 रहा है।
2011 जनगणना के अनुसार राज्य के 33 जिलों में भी परस्पर घनत्व के काफी अन्तर पाये जाते हैं। जयपुर जिले में घनत्व 595 रहा, जो सर्वाधिक था, तथा जैसलमेर जिले में यह न्यूनतम 17 रहा (यहाँ 2001 में 13 था)।
राज्य के 19 जिलों में घनत्व राज्य के औसत घनत्व से अधिक पाया गया है तथा शेष 14 जिलों में यह राज्य के औसत घनत्व से कम पाया गया है।
राज्य में लिंग-अनुपात (Sex-ratio) की स्थिति
राज्य में प्रति 1000 पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या 2011 में 928 रही, जबकि 2001 में यह 921 रही थी। इस प्रकार राजस्थान में लिंग-अनुपात में 7 अंकों की वृद्धि हुई है।
2001 में डूंगरपुर जिले में लिंग-अनुपात 1022 व राजसमंद जिले में 1000 पाया गया था। जो 2011 में क्रमशः घटकर 994 तथा 990 रह गया है। 2011 में न्यूनतम लिंग-अनुपात धौलपुर जिले में पाया गया है, जहाँ यह 846 रहा है।
0-6 वर्ष आयु-समूह में लिंग-अनुपात
- 2011 की जनगणना के परिणामों में सबसे ज्यादा चर्चित और चिन्ता का विषय 0-6 वर्ष आयु-समूह में लिंग-अनुपात (sex ratio) का माना गया है। राजस्थान में 0-6 के आयु-समूह में लिंग-अनुपात 2001 में 909 से घटकर 2011 में 888 हो गया है। इसका अर्थ यह है कि 1000 लड़कों के पीछे 2001 में लड़कियों की संख्या 909 थी, जो 2011 में घटकर मात्र 888 रह गयी।
राज्य में साक्षरता-दर (Literacy-rate)
- 2011 में राज्य में 7 वर्ष व इससे अधिक आयु की जनसंख्या में साक्षर व्यक्तियों का (प्रभावी) अनुपात 66.1% रहा है। पुरुषों में साक्षरता-दर लगभग 79.2% थी तथा स्त्रियों में यह लगभग 52.1% रही है।
- 2001-2011 के दशक में राजस्थान में कुल साक्षरता की दर में काफी सुधार हुआ है, लेकिन आज भी राज्य साक्षरता की दृष्टि से पिछड़ा हुआ माना जाता है। राज्य में महिलाओं में साक्षरता की दर नीची है। 2011 में ग्रामीण स्त्रियों में साक्षरता की दर केवल 45.8% थी, जो बहुत नीची थी।
- सिरोही जिले में ग्रामीण महिलाओं में साक्षरता की दर 32.7% (न्यूनतम) रही थी, जबकि झुन्झुनूँ जिले में यह 59.8% (अधिकतम) रही थी।
- राजस्थान की कुल जनसंख्या- 6,85,48,437
- शहरी जनसंख्या-1,70,48,085 (कुल जनसंख्या का 24.9 प्रतिशत)
- पुरुष-89,09,250
- महिला-81,38,835
- ग्रामीण जनसंख्या- 5,15,00352 (कुल जनसंख्या का 75.1 प्रतिशत)
- पुरुष- 2,66,41,747
- महिला- 2,48,58,605
- जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा जिला- जयपुर (66,26178)
- जनसंख्या की दृष्टि से सबसे छोटा जिला- जैसलमेर (66,9919)
- सर्वाधिक शहरी जनसंख्या वाला जिला- जयपुर (34,71,847)
- न्यूनतम शहरी जनसंख्या वाला जिला- प्रतापगढ़ (71,807)
- सर्वाधिक ग्रामीण जनसंख्या वाला जिला- जयपुर (31,54,331)
- न्यूनतम ग्रामीण जनसंख्या वाला जिला- जैसलमेर (5,80894)
- वह जिला जिसकी कुल जनसंख्या का सर्वाधिक प्रतिशत शहरी क्षेत्र में निवास करता है- कोटा (60.3%)
जनगणना व साक्षरता - 2011
| राजस्थान का सर्वाधिक पुरुष जनसंख्या वाला जिला | जयपुर |
| राजस्थान में सर्वाधिक महिला जनसंख्या वाला जिला | जयपुर |
| राजस्थान में सबसे कम साक्षरता वाला जिला | जालौर (54.9%) |
| राजस्थान में सर्वाधिक पुरुष साक्षरता वाला जिला | झुँझुनूँ (86.9%) |
| राजस्थान में सबसे कम पुरुष साक्षरता वाला जिला | प्रतापगढ़ (69.5%) |
| राजस्थान में सर्वाधिक महिला साक्षरता वाला जिला | कोटा (65.9%) |
| राजस्थान में सर्वाधिक जनसंख्या वृद्धि दर वाला जिला | बाड़मेर |
| राजस्थान में सबसे कम जनसंख्या वृद्धि दर वाला जिला | गंगानगर |
| राजस्थान की कुल साक्षरता | 66.1% |
| राजस्थान में सर्वाधिक साक्षरता वाला जिला | कोटा (76.6%) |
| राजस्थान का सर्वाधिक जनसंख्या वाला जिला | जयपुर |
| राजस्थान का सबसे कम जनसंख्या वाला जिला | जैसलमेर |
| राजस्थान का सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला | डूंगरपुर (994) |
| राजस्थान का सबसे कम लिंगानुपात वाला जिला | धौलपुर (846) |
| राजस्थान में सबसे कम पुरुष जनसंख्या वाला जिला | जैसलमेर |
| राजस्थान में सबसे कम महिला जनसंख्या वाला जिला | जैसलमेर |
| राजस्थान में जनसंख्या घनत्व | 200 |
| राजस्थान में सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला जिला | जयपुर (595) |
| राजस्थान में सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला जिला | जैसलमेर (17) |
| राजस्थान का लिंगानुपात | 928 |
| राजस्थान में सर्वाधिक पुरुष साक्षरता वृद्धि वाला जिला | भीलवाड़ा |
| राजस्थान में सबसे कम महिला साक्षरता वाला जिला | जालौर (38.5%) |
| राजस्थान में सर्वाधिक साक्षरता वृद्धि दर वाला जिला | डूंगरपुर |
| राजस्थान में सर्वाधिक जनसंख्या वृद्धि दर वाला जिला | बाड़मेर |
| राजस्थान में जनसंख्या वृद्धि दर (2001-2011) | 21.3% |
| राजस्थान की पुरुष साक्षरता | 79.2% |
| राजस्थान की महिला साक्षरता | 52.1% |
| राजस्थान में सर्वाधिक महिला साक्षरता वृद्धि वाला जिला | डूंगरपुर |
| राजस्थान की कुल पुरुष जनसंख्या | 3,55,50,997 |
| राजस्थान की कुल महिला जनसंख्या | 3,29,97,440 |
| राजस्थान की कुल जनसंख्या | 6,85,48,437 |
सर्वाधिक जनसंख्या वाले 5 जिले
| जिला | जनसंख्या |
|---|---|
| जयपुर | 66.26 लाख |
| जोधपुर | 36.87 लाख |
| अलवर | 36.74 लाख |
| नागौर | 33.07 लाख |
| उदयपुर | 30.68 लाख |
सबसे कम जनसंख्या वाले 5 जिले
| जिला | जनसंख्या |
|---|---|
| जैसलमेर | 6.70 लाख |
| प्रतापगढ़ | 8.68 लाख |
| सिरोही | 10.36 लाख |
| बूँदी | 11.11 लाख |
| राजसमन्द | 11.57 लाख |
सर्वाधिक दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर वाले 5 जिले
| जिला | दर |
|---|---|
| बाड़मेर | 32.55% |
| जैसलमेर | 31.8% |
| जोधपुर | 27.7% |
| बाँसवाड़ा | 26.5% |
| जयपुर | 26.2% |
सबसे कम दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर वाले 5 जिले
| जिला | दर |
|---|---|
| श्रीगंगानगर | 10.06 |
| झुँझुनूँ | 11.7 |
| पाली | 11.99 |
| बूँदी | 15.4 |
| चित्तौड़गढ़ | 16.1 |
सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाले 5 जिले
| जिला | जन घनत्व ( व्य.प्र.वर्ग किमी. ) |
|---|---|
| जयपुर | 595 |
| भरतपुर | 503 |
| दौसा | 476 |
| अलवर | 438 |
| धौलपुर | 398 |
सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाले 5 जिले
| जिला | जन घनत्व ( व्य.प्र.वर्ग किमी. ) |
|---|---|
| जैसलमेर | 17 |
| बीकानेर | 78 |
| बाड़मेर | 92 |
| चूरू | 147 |
| जोधपुर | 161 |
सर्वाधिक दशकीय जनसंख्या घनत्व वृद्धि वाले 5 जिले
| जन घनत्व ( व्य.प्र.वर्ग किमी. ) | |||
|---|---|---|---|
| जिला | वर्ष 2001 | वर्ष 2011 | वृद्धि |
| जयपुर | 471 | 595 | +124 |
| दौसा | 384 | 476 | +92 |
| भरतपुर | 415 | 503 | +88 |
| बाँसवाड़ा | 315 | 397 | +82 |
| अलवर | 357 | 438 | +81 |
सबसे कम दशकीय जनसंख्या घनत्व वृद्धि वाले 5 जिले
| जन घनत्व ( व्य.प्र.वर्ग किमी. ) | ||||
|---|---|---|---|---|
| जिला | वर्ष 2001 | वर्ष 2011 | वृद्धि | |
| जैसलमेर | 13 | 17 | +4 | |
| बीकानेर | 63 | 78 | +15 | |
| गंगानगर | 163 | 179 | +16 | |
| पाली | 147 | 164 | +17 | |
| बाड़मेर | 69 | 92 | +23 | |
सर्वाधिक लिंगानुपात वाले 5 जिले
| जिला | लिंगानुपात ( 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या ) |
|---|---|
| डूंगरपुर | 994 |
| राजसमन्द | 990 |
| पाली | 987 |
| प्रतापगढ़ | 983 |
| बाँसवाड़ा | 980 |
सबसे कम लिंगानुपात वाले 5 जिले
| जिला | लिंगानुपात (1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या) |
|---|---|
| धौलपुर | 846 |
| जैसलमेर | 852 |
| करौली | 861 |
| भरतपुर | 880 |
| गंगानगर | 887 |
राजस्थान में सर्वाधिक साक्षरता वाले जिले
| कुल | महिला | पुरुष | |||
|---|---|---|---|---|---|
| जिला | प्रतिशत | जिला | प्रतिशत | जिला | प्रतिशत |
| कोटा | 76.6% | कोटा | 65.9% | झुँझुनूँ | 86.9% |
| जयपुर | 75.5% | जयपुर | 64.0% | कोटा | 86.3% |
| झुँझुनूँ | 74.1% | झुँझुनूँ | 61.0% | जयपुर | 86.1% |
| सीकर | 71.9% | श्रीगंगानगर | 59.7% | सीकर | 85.1% |
| अलवर | 70.7% | सीकर | 58.2% | भरतपुर | 84.1% |
राजस्थान में न्यूनतम साक्षरता वाले जिले
| कुल | महिला | पुरुष | |||
|---|---|---|---|---|---|
| जिला | प्रतिशत | जिला | प्रतिशत | जिला | प्रतिशत |
| जालौर | 54.9% | जालौर | 38.05% | प्रतापगढ़ | 69.5% |
| सिरोही | 55.3% | सिरोही | 39.7% | बाँसवाड़ा | 69.5% |
| प्रतापगढ़ | 56.0% | जैसलमेर | 39.7% | सिरोही | 70% |
| बाँसवाड़ा | 56.3% | बाड़मेर | 40.6% | जालौर | 70.7% |
| बाड़मेर | 56.5% | प्रतापगढ़ | 42.4% | बाड़मेर | 70.9% |
सर्वाधिक नगरीय प्रतिशत वाले पाँच जिले
| जिला | जनसंख्या प्रतिशत |
|---|---|
| कोटा | 60.31% |
| जयपुर | 52.4% |
| अजमेर | 40.08% |
| जोधपुर | 34.30% |
| बीकानेर | 33.86% |
सर्वाधिक नगरीय जनांकिकीय विशेषता वाले जिले (प्रथम पाँच)
| सर्वाधिक नगरीय जनसंख्या वाले जिले |
|---|
| जयपुर |
| जोधपुर |
| कोटा |
| अजमेर |
| बीकानेर |
न्यूनतम नगरीय जनसंख्या प्रतिशत वाले पाँच जिले
| जिला | जनसंख्या प्रतिशत |
|---|---|
| डूंगरपुर | 6.39% |
| बाड़मेर | 7.00% |
| बाँसवाड़ा | 7.10% |
| प्रतापगढ़ | 8.27% |
| जालौर | 8.30% |
न्यूनतम नगरीय जनसंख्या वाले पाँच जिले
| जिला |
|---|
| प्रतापगढ़ |
| डूंगरपुर |
| जैसलमेर |
| बाँसवाड़ा |
| जालौर |
राजस्थान में जनसंख्या वृद्धि (1898 से 2012)
| जनसंख्या का आकार | प्राप्त करने का वर्ष |
|---|---|
| प्रथम करोड़ | 1898 |
| द्वितीय करोड़ | 1961 |
| तृतीय करोड़ | 1977 |
| चतुर्थ करोड़ | 1988 |
| पंचम करोड़ | 1996 |
| षष्ठम करोड़ | 2003 |
| सप्तम करोड़ | 2012 |
परीक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण तथ्य
ग्रामीण क्षेत्र में सर्वाधिक लिंगानुपात
- पाली - 1003
- राजसमंद - 998
- डूंगरपुर - 996
ग्रामीण क्षेत्र में कम लिंगानुपात
- धौलपुर - 841
- करौली - 856
- जैसलमेर - 859
नगरीय क्षेत्र में सर्वाधिक लिंगानुपात
- टोंक - 985
- प्रतापगढ़ - 963
- बाँसवाड़ा - 964
नगरीय क्षेत्र में कम लिंगानुपात
- जैसलमेर - 807
- धौलपुर - 864
- अलवर - 872
2011 में 10 बिन्दु की वृद्धि दर्ज की गई।
1. भारत का लिंगानुपात
2001 ई. में 933 है
2. भारत का लिंगानुपात
2011 में 943 है
2011 में 7 बिन्दु की वृद्धि दर्ज की गई।
1. राजस्थान का लिंगानुपात
2001 में 921
2. राजस्थान का लिंगानुपात
2011 में 928
- 2011 की जनगणना में किसी भी जिले का लिंगानुपात 1000 दर्ज नहीं किया गया जबकि 2001 की जनगणना में डूंगरपुर (1021) तथा राजसमंद (1000) लिंगानुपात दर्ज किया गया।
- 2011 की जनगणना के अनुसार 15 जिलों का लिंगानुपात राज्य के औसत लिंगानुपात (928) से कम तथा 18 जिलों का लिंगानुपात औसत से अधिक दर्ज किया गया।
नोट
- बाराँ जिले का लिंगानुपात (929) राज्य के औसत लिंगानुपात के लगभग बराबर है।
- 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान का ग्रामीण लिंगानुपात 933 जबकि नगरीय लिंगानुपात 914 है।
इस जनगणना में ग्रामीण लिंगानुपात में 3 बिन्दु की वृद्धि जबकि नगरीय लिंगानुपात में 24 बिन्दु की वृद्धि दर्ज की गई।
0 से वर्ष 6 आयु वर्ग की जनसंख्या : 2011
- 0 - 6 वर्ष आयु वर्ग की कुल जनसंख्या- 1.06 करोड़ नोट: यह राज्य की कुल जनसंख्या का 15.5 प्रतिशत है।
- 0 में 6 वर्ष आयु वर्ग में पुरुष जनसंख्या- 56.39 लाख (15.9 %) तथा महिला जनसंख्या- 50.10 लाख (15.2%) है।
- 0 से 6 वर्ष आयु वर्ग की सर्वाधिक जनसंख्या- जयपुर
- 0 से 6 वर्ष आयु वर्ग की न्यूनतम जनसंख्या- जैसलमेर
- जनगणना- 2001 में राज्य का शिशु लिंगानुपात- 909
- जनगणना- 2011 में राज्य का शिशु लिंगानुपात- 888 नोट- इसमें 21 बिन्दु की कमी दर्ज की गई है।
- इस वर्ग का लिंगानुपात जनगणना 1981 से ही लगातार घट रहा है।
- सर्वाधिक शिशु लिंगानुपात - बाँसवाड़ा (934)
- न्यूनतम शिशु लिंगानुपात - झुंझुनूँ (837)
- सर्वाधिक नगरीय शिशु लिंगानुपात - नागौर (907)
- न्यूनतम नगरीय शिशु लिंगानुपात - धौलपुर (874)
- सर्वाधिक ग्रामीण शिशु लिंगानुपात - बाँसवाड़ा (937)
- न्यूनतम ग्रामीण शिशु लिंगानुपात - झुंझुनूँ (832)
- ग्रामीण शिशु लिंगानुपात - 892
- नगरीय शिशु लिंगानुपात - 874
- जनगणना- 2011 में 13 जिलों का शिशु लिंगानुपात 900 से अधिक है।
- जोधपुर जिले का शिशु लिंगानुपात (891) राज्य के औसत शिशु लिंगानुपात के लगभग बराबर है।
साक्षरता : जनगणना 2011
- केवल 2 जिलों की साक्षरता में गिरावट दर्ज की गई- चूरू, बाड़मेर
- निम्न जिलों की साक्षरता में सुधार हुआ है- डूंगरपुर, भीलवाड़ा, बाँसवाड़ा, टोंक, जोधपुर
- स्त्री साक्षरता में सर्वाधिक सुधार- डूंगरपुर, भीलवाड़ा
- स्त्री साक्षरता में कमी- बाड़मेर, चूरू
- राज्य के 14 जिलों में साक्षरता दर राज्य की औसत साक्षरता दर से अधिक है जबकि 19 जिलों की कम है।
- राज्य में स्त्री-पुरुष साक्षरता दर में अन्तर 27.1% है।
- राज्य में पुरुषों में साक्षरता दर अधिक है।
- करौली जिले की साक्षरता दर (66.2%) राज्य की औसत साक्षरता दर (66.1%) के लगभग बराबर है।
- ग्रामीण साक्षरता दर- 61.4%
- नगरीय साक्षरता दर- 79.7%
- सर्वाधिक नगरीय साक्षरता जिला- उदयपुर (87.5%)
- न्यूनतम नगरीय साक्षरता जिला- जालौर (71.1%)
- सर्वाधिक ग्रामीण साक्षरता जिला- झुंझुनूँ (73.4%)
- न्यूनतम ग्रामीण साक्षरता जिला- सिरोही (49%)
- ग्रामीण महिला साक्षरता दर- 45.8%
- नगरीय महिला साक्षरता दर- 70.7%
- सर्वाधिक ग्रामीण पुरूष साक्षरता दर- झुंझुनूँ (86.8%)
- न्यूनतम ग्रामीण पुरूष साक्षरता दर- सिरोही (64.6%)
- सर्वाधिक ग्रामीण महिला साक्षरता दर- झुंझुनूँ (59.8%)
- न्यूनतम ग्रामीण महिला साक्षरता दर- सिरोही (32.7%)
- सर्वाधिक नगरीय पुरूष साक्षरता दर- उदयपुर (93.4%)
- न्यूनतम नगरीय पुरूष साक्षरता दर- धौलपुर (81.3%)
- सर्वाधिक नगरीय महिला साक्षरता दर- उदयपुर (81.2%)
- न्यूनतम नगरीय महिला साक्षरता दर- जालौर (56.9%)
अनुसूचित जाति : जनगणना - 2011
- अनुसूचित जातियों की कुल जनसंख्या- 1,22,21,593 (122.21 लाख)
- यह कुल जनसंख्या का 17.83% है।
- अनुसूचित जाति (SC-Scheduled Caste) की जनगणना -2011 में वृद्धि दर- 26.1%
राज्य में सर्वाधिक अनुसूचित जाति जिला
- जयपुर- 10.03 लाख
- श्रीगंगानगर- 7.20 लाख
- नागौर- 7 लाख
कम अनुसूचित जाति जिला
- डूँगरपुर
- प्रतापगढ़
- बाँसवाड़ा
सर्वाधिक अनुसूचित जाति प्रतिशत जिला
- श्रीगंगानगर- 36.58%
- हनुमानगढ़- 27.85%
कम अनुसूचित जाति प्रतिशत जिला
- डूँगरपुर- 3.36%
- बाँसवाड़ा- 4.46%
- राज्य में देश की 6.07% अनुसूचित जाति निवासी करती है।
- राज्य में ग्रामीण जनसंख्या SC का प्रतिशत- 18.5%
- राज्य में नगरीय जनसंख्या में SC का प्रतिशत- 15.7%
- SC का लिंगानुपात- 923
- राज्य में SC का ग्रामीण लिंगानुपात- 923
- राज्य में SC का नगरीय लिंगानुपात- 922
- राज्य में SC का सर्वाधिक लिंगानुपात- राजसमंद (982)
- राज्य में SC का कम लिंगानुपात- धौलपुर (863)
अनुसूचित जनजाति : जनगणना - 2011
- राज्य में अनुसूचित जनजाति (S.T. Scheduled Tribe) की जनसंख्या- 92,38,534 (92.38 लाख)
- यह राज्य की कुल जनसंख्या का 13.5% है।
- देश की कुल S.T. का राजस्थान में प्रतिशत- 8.86%
सर्वाधिक S.T. जनसंख्या
- उदयपुर- 15.25 लाख
- बाँसवाड़ा- 13.72 लाख
- डुँगरपुर- 9.83 लाख
कम S.T. जनसंख्या
- बीकानेर
- नागौर
- चूरू
सर्वाधिक S.T. प्रतिशत जिला
- बाँसवाड़ा- 76.38%
- डुँगरपुर- 70.82%
- प्रतापगढ़- 63.42%
कम S.T. प्रतिशत जिला
- नागौर- 0.31%
- बीकानेर- 0.33%
- चूरू- 0.55%
- राज्य में S.T. का लिंगानुपात- 948
- राज्य में नगरीय S.T. का लिंगानुपात- 893
- राज्य में ग्रामीण S.T. का लिंगानुपात- 951
- राज्य में S.T. का सर्वाधिक लिंगानुपात- डुँगरपुर (1000)
- राज्य में S.T. का न्यूनतम लिंगानुपात- धौलपुर (842)
राजस्थान के लिए नई जनसंख्या नीति की घोषणा
सरकार ने 20 जनवरी, 2000 को राज्य के लिए नई जनसंख्या-नीति की घोषणा की थी। आन्ध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश के बाद जनसंख्या नीति की घोषणा करने वाला राजस्थान तीसरा राज्य था। राज्य की जनसंख्या नीति के चार मुख्य बिन्दु रखे गये, जो इस प्रकार हैं-
- प्रजनन व बाल स्वास्थ्य को आधार मान कर सेवाएँ प्रदान करने के लिए सर्वेक्षण करके पैकेज तैयार करना
- सेवा-प्रणाली के प्रबन्ध में गुणात्मक सुधार करना
- छोटे परिवार की अवधारणा के लिए उपयुक्त वातावरण तैयार करना, तथा सेवाएँ प्रदान करने तथा सामाजिक चेतना जागृत करने में पंचायती राज संस्थाओं, स्वैच्छिक संगठनों, निजी, सहकारी व अन्य संस्थाओं को भागीदार बनाना।
नई जनसंख्या-नीति को लागू करने के सम्बन्ध में सरकार ने निम्न बातों पर जोर देने का निर्णय लिया था-
छोटे परिवार का माहौल तैयार करने के लिए महिला-साक्षरता बढ़ाने पर बल दिया गया था। इसके लिए प्राथमिक शिक्षा के लिए वांछित कानून बनाया जाना था, बालिकाओं के लिए स्कूलों की स्थापना की जानी थी तथा महिला-शिक्षा- पाठ्यक्रम में महिला स्वास्थ्य और प्रजनन स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी का समावेश किया जाना था।
प्रथम प्रसव में विलम्ब, दो प्रसवों के बीच अन्तराल, प्रजनन व्यवहार में पुरुषों के उत्तरदायी योगदान तथा सुखी व सीमित परिवार की अवधारणाओं का प्रचार-प्रसार किया जाना था। बालक-बालिकाओं को मानव-प्रजनन, जीव-विज्ञान, आरोग्य पद्धतियों और उत्तरदायी यौन व्यवहार व परिवार नियोजन साधनों की जानकारी दी जानी थी। इसके लिए शिक्षा-पाठ्यक्रमों में आवश्यक संशोधन किया जाना था।
जनसंख्या की नई रणनीति का केन्द्र बिन्दु परिवार रखा गया। राज्य में बाल विवाह पर अंकुश लगाने के लिए विवाह का कानूनी पंजीकरण, सरकारी सुविधाओं व सेवाओं के लिए विवाह की स्वीकृत न्यूनतम आयु को अनिवार्य तथा वर्तमान कानून को अधिक दण्डात्मक बनाया गया। महिला सशक्तिकरण (Women-empowerment) के लिए विशेष योजनाएँ तैयार की जानी थी।
नई नीति में वित्तीय योजना समाप्त कर दी गई। दो बच्चों के बाद भी नसबंदी नहीं कराने वालों को हतोत्साहित किया गया। दो से अधिक बच्चे होने पर अयोग्यता के प्रावधान सहकारी संस्थाओं तथा राज्य कर्मचारियों की सेवा-शर्तों में शामिल करने की बात कही गयी।
सुरक्षित-प्रसव-सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए सन् 2001 तक प्रत्येक गाँव में प्रशिक्षित दाई की सुविधा मुहैया कराने पर जोर दिया गया। प्रशिक्षित दाई की सुविधा प्रदान करने के लिए दाई-कर्म-प्रशिक्षण-कोर्स चालू किया जाना था तथा आयुर्वेद-चिकित्सालयों में प्रसव सुविधा उपलब्ध कराई जानी थी।
आशा की गयी थी कि इस नई स्पष्ट, व्यावहारिक व प्रावैगिक नीति के क्रियान्वयन से राज्य में जन्म-दर अवश्य घटेगी। नई जनसंख्या नीति घोषित करने की दिशा में सरकार की पहल काफी सराहनीय मानी जा सकती है।
राज्य सरकार ने जनसंख्या-नियंत्रण व परिवार-नियोजन को बढ़ावा देने के लिए 20 जून, 2001 को एक अधिसूचना जारी की थी, जिसके अनुसार राज्य में 1 जून, 2002 को या इसके पश्चात् दो से अधिक बच्चों वाले अभ्यर्थी को सरकारी नौकरी नहीं देने की बात शामिल की गई, तथा यह भी कहा गया था कि ऐसे व्यक्तियों की पदोन्नति पर भी पाँच वर्ष तक विचार नहीं किया जायेगा। पहले एक बच्चा हो, और यदि बाद में एक से अधिक बच्चे होते हैं, तो दूसरी बार के जन्मे बच्चों की एक इकाई ही समझी जायेगी। यह एक महत्त्वपूर्ण कदम माना गया था। आशा की गयी कि इससे परिवार-नियोजन को प्रोत्साहन मिलेगा।
पूर्व में गहलोत सरकार ने 'शुभ लक्ष्मी योजना' शुरू की थी, जिसका उद्देश्य लड़की के जन्म के प्रति अनुकूल भावना को प्रोत्साहन देना रहा है। इसके अन्तर्गत बेटी के जन्म पर (संस्थागत प्रसव पर) ₹2,100 का चैक दिया जाएगा (जननी सुरक्षा योजना की राशि के अतिरिक्त), एक वर्ष पूर्ण होने पर टीका लगवाने पर दूसरा चैक ₹2,100 का दिया जायेगा, और 5 वर्ष होने पर स्कूल में प्रवेश पर ₹3,100 का तीसरा चैक दिया जायेगा। इस प्रकार कुल ₹7,300 का नकद उपहार बेटी के जन्म के सम्बन्ध में दिया जायेगा। इसका प्रयोजन राज्य में लिंग-अनुपात को सुधारने में मदद देना माना गया है।
अपने पूर्व शासन-काल में मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने एक या दो पुत्रियों के बाद बच्चे बंद करने पर प्रत्येक बालिका के लिए ₹10 हजार की प्रेरणा राशि 'मुख्यमंत्री बालिका संबल योजना' के तहत् देने की व्यवस्था की थी, जो राशि 18 वर्ष की आयु पाने पर ₹40 हजार देय की गयी थी। ₹10 हजार की राशि पोस्ट-ऑफिस या बैंक में निवेश की जानी थी। 2016-17 के बजट में 'मुख्यमंत्री राजश्री योजना' लागू की गयी। यह एक फ्लैगशिप कार्यक्रम है। इसमें महिला सशक्तिकरण एवं जेण्डर समानता की अपेक्षा है। 1 जून, 2016 या बाद में जन्म लेने वाली बालिकाएँ वित्तीय लाभ हेतु पात्र हैं। माता-पिता/अभिभावकों को 6 चरणों में कुल राशि ₹50,000 का भुगतान किया जाता है।
अब केन्द्र में मोदी सरकार द्वारा 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान की शुरुआत करने से इस दिशा में प्रगति की रफ्तार तेज होगी और राज्य सरकार भी नये प्रयासों को अपनायेगी।

Post a Comment