राजस्थान के प्रतीक चिन्ह व उपनाम | Rajasthan Ke Pratik Chinh Upnam

राजस्थान के प्रतीक चिन्ह व उपनाम

इस लेख में राजस्थान के राजकीय प्रतीक चिन्हों (जैसे खेजड़ी, गोडावण, रोहिड़ा) और विभिन्न शहरों के भौगोलिक उपनामों की विस्तृत जानकारी दी गई है। इसमें राजस्थान के प्रमुख व्यक्तियों, ऐतिहासिक स्थलों और भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों पर भी प्रकाश डाला गया है। यह लेख RAS, REET, CET, राजस्थान पुलिस और अन्य राजकीय परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और संग्रहणीय है।
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राजस्थान के प्रतीक चिन्ह

  • राजस्थान दिवस - 30 मार्च (प्रतिवर्ष)
  • राजधानी - जयपुर
  • क्षेत्रफल - 3,42,239 वर्ग किमी.
  • राज्य का लोकवाद्य यंत्र - अलगोजा
  • राज्य की भाषा - हिन्दी (हिन्दी दिवस 14 सितम्बर को मनाया जाता है)

राज्य पुष्प- रोहिड़ा

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  • इसे राजस्थान की ‘‘मरुशोभा’’ या ‘‘रेगिस्तान का सागवान’’ भी कहते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम ‘‘टिकोमेला अंडुलेटा’’ है। रोहिड़ा सर्वाधिक राजस्थान के पश्चिम क्षेत्र में देखने को मिलता है। जोधपुर में रोहिड़ा को ‘‘मारवाड़ टीक’’ के नाम से जाना जाता है व इन पुष्पों का रंग गहरा केसरिया-लाल, पीला होता है।

राज्य वृक्ष- खेजड़ी

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  • इसका वैज्ञानिक नाम ‘‘प्रोसेसिप-सिनेरेरिया’’ है। इसको राज्य वृक्ष का दर्जा 1983 में मिला। खेजड़ी की हरी फली - सांगरी, सूखी फली- खोखा व इसकी पत्तियों से बनाचारा लुंग/लूम कहलाता है। खेजड़ी के वृक्ष को सेलेस्ट्रेना (कीड़ा) व ग्लाइकोट्रामा (कवक) नामक दो कीड़े नुकसान पहुँचा रहे हैं। वैज्ञानिकों ने खेजड़ी के वृक्ष की कुल आयु 5000 वर्ष मानी है। राजस्थान में खेजड़ी के 1000 वर्ष पुराने 2 वृक्ष (मांगलियावास) अजमेर में मिले हैं। इसको वैज्ञानिक नाम केरोलस लीनीयस ने दिया था।
  • पाण्डवों ने अज्ञातवास के समय अपने अस्त्र-शस्त्र खेजड़ी के वृक्ष पर छिपाये थे। खेजड़ी के लिए राज्य में सर्वप्रथम बलिदान अमृतादेवी के द्वारा सन् 1730 में दिया गया। अमृता देवी द्वारा यह बलिदान भाद्रपद शुक्ल दशमी को जोधपुर के खेजड़ली गाँव में 363 लोगों के साथ दिया गया। अमृता देवी के पति का नाम रामोजी विश्नोई था। विश्नोई सम्प्रदाय द्वारा दिया गया यह बलिदान साका या खड़ाना कहलाता है, प्रत्येक वर्ष 12 सितम्बर को खेजड़ली दिवस के रूप में मनाया जाता है। वन्य जीव संरक्षण के लिए दिया जाने वाला सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार अमृतादेवी वन्य जीव पुरस्कार है। इस पुरस्कार की शुरूआत 1994 में हुई थी। इस पुरस्कार के तहत् संस्था को ₹ 50,000 व व्यक्ति को ₹ 25,000 दिए जाते हैं। प्रथम अमृता देवी वन्यजीव पुरस्कार पाली के गंगाराम विश्नोई को दिया गया। ऑपरेशन खेजड़ा की शुरूआत 1991 में हुई थी।

राज्य पक्षी- गोडावण

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  • इसका वैज्ञानिक नाम ‘क्रायोटिस-नाइग्रेसेप्स’ है। इसे राज्य पक्षी का दर्जा 1981 में दिया गया। इसे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भी कहा जाता है। यह शर्मिला पक्षी है और इसे माल-मोरड़ी भी कहा जाता है। गोडावण को सारंग, हुकना, तुकदर व बड़ा तिलोर भी कहा जाता है। गोडावण को हाड़ौती क्षेत्र (सोरसन) में माल-मोरड़ी के नाम से जाना जाता है, गोडावण के प्रजनन के लिए जोधपुर जंतुआलय प्रसिद्ध है।
  • गोडावण का प्रजनन काल अक्टूबर-नवम्बर का महीना माना जाता है। यह मूलतः अफ्रीका का पक्षी है। इसके ऊपरी भाग का रंग नीला व इसकी ऊँचाई 4 फीट होती है। इसका प्रिय भोजन मूँगफली व तारामीरा है।

गोडावण पक्षी राजस्थान में 3 जिलों में देखा जा सकता है-
  1. मरुउद्यान - जैसलमेर, बाड़मेर
  2. सोरसन - बाराँ
  3. सोकलिया - अजमेर

राज्य पशु- चिंकारा

Rajasthan ka rajya pashu Chinkara
  • यह ‘एन्टीलोप’ प्रजाति का एक मुख्य जीव है। इसका वैज्ञानिक नाम गजैला-गजैला है। चिंकारे को छोटा हिरण के उपनाम से भी जाना जाता है। चिंकारा को 1981 में राज्य पशु का दर्जा मिला। चिंकारों के लिए नाहरगढ़ अभयारण्य (जयपुर) प्रसिद्ध है।

ऊँट
Rajasthan State Animal
  • ऊँट को राज्य पशु का दर्जा 2014 में मिला। इसको पशुधन की श्रेणी में रखा गया है।

राज्य गीत

"केसरिया बालम आओनी पधारो म्हारे देश"। इस गीत को मुख्यत: मांड गायिकी में गाया जाता है। इस गीत को सर्वप्रथम उदयपुर की मांगी बाई के द्वारा गाया गया। इस गीत को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अल्लाह जिल्ला बाई ने दिलवायी। अल्लाह-जिल्ला बाई को 'मरु कोकिला' भी कहते हैं।

राज्य का नृत्य- घूमर

घूमर नृत्य को राजस्थान के नृत्यों की आत्मा कहा जाता है। यह केवल महिलाओं द्वारा गोल घेरा बनाकर किया जाता है। इसे नृत्यों का सिरमौर (मुकुट) भी कहा जाता है।

राज्य का शास्त्रीय नृत्य- कत्थक

इसके प्रवर्तक भानू जी महाराज हैं। कत्थक उत्तरी भारत का प्रमुख नृत्य है। इनका मुख्य घराना भारत में लखनऊ तथा राजस्थान में जयपुर है।

राजस्थान का राज्य खेल

बॉस्केटबॉल, बॉस्केटबॉल को राज्य खेल का दर्जा 1948 में दिया गया।

राजस्थान की विभिन्न प्रादेशिक इकाइयों के प्रचलित प्राचीन नाम (पुनर्गठन से पूर्व)
प्राचीन नाम वर्तमान क्षेत्र
जांगल देश बीकानेर और जोधपुर का उत्तरी भाग
अहिच्छत्रपुर नागौर
यौद्धेय हनुमानगढ़ एवं गंगानगर के आसपास का क्षेत्र
सपादलक्ष जांगल देश के आसपास का क्षेत्र
शूरसेन भरतपुर, धौलपुर, करौली
गिरवा उदयपुर नगर क्षेत्र
गोडवाड दक्षिणी-पूर्वी बाड़मेर, जालौर व पश्चिमी सिरोही
शेखावाटी सीकर, चूरू व झुंझुनूँ
भोराठ का पठारी क्षेत्र उदयपुर के गोगुन्दा, राजसमन्द की कुम्भलगढ़ तहसील
मेरवाड़ा अजमेर से राजसमन्द जिले का दिवेर क्षेत्र
शाकम्भरी सांभर क्षेत्र
शिबी/मेदपाट/मेवाड़ उदयपुर एवं चित्तौड़
मालवा देश प्रतापगढ़, झालावाड़
माण्ड या वल्लदेश जैसलमेर
वागड़ या वार्गट डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़
आर्बुद व चन्द्रावती सिरोही व आबू के आसपास
मरुवार या मारवाड़ जोधपुर राज्य
मेवात अलवर, भरतपुर
गुर्जरत्रा जोधपुर, पाली के समीपवर्ती प्रदेश
हाड़ौती कोटा, बूूँदी, झालावाड़, बाराँ क्षेत्र
कुरूक्षेत्र अलवर राज्य के उत्तरी भाग
बांगड़ सीकर, चूरू, झुंझुनूँ, नागौर
भौमट डूंगरपुर, सिरोही, उदयपुर का अरावली प्रदेशीय भाग
थली बीकानेर, चूरू का अधिकांश एवं दक्षिणी गंगानगर की मरुभूमि
मत्स्य क्षेत्र अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली
डांग क्षेत्र करौली व सवाई माधोपुर का क्षेत्र
ऊपरमाल भैंसरोडगढ़ से लेकर बिजोलिया का पठारी भाग
छप्पन का मैदान बाँसवाड़ा एवं प्रतापगढ़ के बीच का भाग
तोरावाटी सीकर
मेवल डूंगरपुर व बाँसवाड़ा का मध्य भाग
कुरु उत्तरी अलवर
स्वर्णगिरि जालौर

  1. अलवर - राजस्थान का सिंह द्वार, राजस्थान का स्कॉटलैण्ड।
  2. अजमेर - राजपूताना की कुँजी, राजस्थान का नाका, भारत का मक्का, अण्डों की टोकरी।
  3. चित्तौड़गढ़ - राजस्थान का गौरव, खिज़्राबाद, पावर ऑफ सिटी।
  4. जोधपुर - सूर्य नगरी, सन सिटी, राजस्थान की ब्लू सिटी।
  5. जैसलमेर - राजस्थान की स्वर्ण नगरी, राजस्थान का अण्डमान, पंखों की नगरी, पीले पत्थरों का शहर, रेगिस्तान का गुलाब, झरोखों की नगरी, म्यूजियम सिटी, हवेलियों का शहर।
  6. जयपुर - राजस्थान की राजधानी, भारत का वेनिस, राजस्थान का पेरिस, सिटी ऑफ आइसलैण्ड, हैरिटेज सिटी, रंगश्री वैभव का द्वीप, रत्न नगरी, पन्ना नगरी, पिंक सिटी।
  7. कोटा - राजस्थान का कानपुर, राजस्थान की औद्योगिक नगरी, राजस्थान की शिक्षा नगरी, उद्यानों का घर, इन्द्रप्रस्थ नगर, राजस्थान का नालन्दा।
  8. उदयपुर - पूर्व का वेनिस, झीलों की नगरी, एशिया का वियना, तश्तरीनुमा बेसिन में बसा हुआ शहर, राजस्थान का कश्मीर, मेवाड़, मेदपाट, प्रागवाट, फाउन्टेन का शहर, लेक सिटी ऑफ इण्डिया, जिंक नगरी।
  9. सिरोही (माउण्ड आबू) - राजस्थान का शिमला, राजस्थान का बरखौयांस्क।
  10. नागौर - राजस्थान की धातु नगरी, औजारों की नगरी, अहिच्छत्रपुर।
  11. झालावाड़ - राजस्थान का नागपुर, राजस्थान का एलोरा, घण्टियों का शहर, राजस्थान का मॉसिनराम।
  12. भरतपुर - जाट रियासत।
  13. भीलवाड़ा - राजस्थान का मैनचेस्टर, वस्त्र नगरी, टैक्सटाइल सिटी, अभ्रक मण्डी।
  14. धौलपुर - रेड डायमंड सिटी, कोठी, राजस्थान का पूर्वी प्रवेश द्वार।
  15. बाँसवाड़ा - छप्पन का मैदान, सौ द्वीपों का शहर, आदिवासियों का नगर, राजस्थान का चेरापूँजी।
  16. प्रतापगढ़ व बाँसवाड़ा - छप्पन का मैदान।
  17. बूंदी - बावड़ियों का शहर, वृंदावंति, काशी।
  18. बीकानेर - ऊन का घर, राती घाटी, जांगल प्रदेश।
  19. हनुमानगढ़ - फलों की टोकरी।
  20. झुन्झुनूं - ताँबा नगरी।
  21. डूंगरपुर - पहाड़ों की नगरी।

महत्वपूर्ण भौगोलिक उपनाम

  • राजस्थान का ताजमहल - जसवंतथड़ा
  • राजस्थान का विण्डसर महल - राजमहल (उदयसिंह ने बनवाया) (उदयपुर)
  • राजस्थान का भुवनेश्वर - ओसियाँ (जोधपुर)
  • कांठल का ताजमहल - काकाजी पीर की दरगाह (प्रतापगढ़)
  • हाड़ौती का ताजमहल - अबली मीणा महल (कोटा)
  • दक्षिण भारत का ताजमहल - बीबी मकबरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र)
  • राजस्थान की अणु नगरी - रावतभाटा (चित्तौड़गढ़)
  • साल्ट सिटी - सांभर (जयपुर)
  • थार का घड़ा - चांदन नलकूप (जैसलमेर)
  • कोंकण तीर्थ/5वां तीर्थ/तीर्थों का मामा - पुष्कर (अजमेर)
  • थार की वैष्णो देवी, तनोट माता - (जैसलमेर)
  • राजस्थान की वैष्णो देवी - अर्बुदा माता (सिरोही)
  • तीर्थों का भांजा - मचकुण्ड (धौलपुर)
  • तीर्थों की नानी-देवयानी तीर्थ - सांभर झील (जयपुर ग्रामीण)
  • जल महलों की नगरी - डीग (भरतपुर), जल महल जयपुर में भी है।
  • हिमालय नगरी - माउण्ट आबू (सिरोही)
  • वराह नगरी - बाराँ
  • मंकी वैली - गलता जी (जयपुर)
  • लोढ़ी काशी - बाँसवाड़ा
  • उपकाशी - डीडवाना
  • राजस्थान का लघु माउण्ट - पीपलूद (बालोतरा)
  • मूर्तियों का अजायबघर - विजय स्तम्भ (चित्तौड़गढ़)
  • राजस्थान की काशी - बूँदी
  • छोटी काशी - जयपुर
  • राजस्थान का मैनचेस्टर - भीलवाड़ा
  • आधुनिक राजस्थान का मैनचेस्टर - भिवाड़ी (खैरथल-तिजारा)
  • आदिवासियों का शहर - बाँसवाड़ा
  • राजस्थान का खजुराहो - सोमेश्वर मंदिर (किराडू), बाड़मेर
  • मिनी खजुराहो - भिंडदेवरा (बाराँ)
  • सौ द्वीपों का शहर - बाँसवाड़ा
  • शैक्षणिक नगरी - कोटा
  • राजस्थान की मोनालिसा - बनी-ठणी, किशनगढ़ (अजमेर)
  • राजस्थान का छोटा/दूसरा ताजमहल - अबली मीणी का महल (कोटा)
  • मेवाड़ का खजुराहो - जगत मंदिर (उदयपुर)
  • राजस्थान का राजकोट - लूणकरणसर (बीकानेर)
  • राजस्थान का पंजाब - सांचौर (जालौर)

राजस्थान के प्रमुख क्षेत्रों के उपनाम

  • नंद गाँव - कोटा
  • खेराड़, मालखेराड़ - जहाजपुर तहसील (भीलवाड़ा), टोंक
  • विराट - टोंक
  • रूणेचा - रामदेवरा (जैसलमेर)
  • माण्डव्यपुर - मण्डोर (जोधपुर)
  • सत्यपुर - सांचौर (जालौर)
  • सापदलक्ष - सांभर (जयपुर)
  • मत्स्य - भरतपुर, अलवर, करौली, धौलपुर
  • अर्जुनाय - भरतपुर, अलवर
  • चुंघेर - श्रीगंगानगर
  • रेड डायमंड सिटी - धौलपुर
  • मांच - जमवारामगढ़ (जालौर)
  • कोठी - धौलपुर
  • ढूँढाड़ - जयपुर, दौसा
  • बांगड़ प्रदेश - चूरू, सीकर, झुंझुनूं
  • कांठल - प्रतापगढ़
  • हेमकूट - कुम्भलगढ़
  • भटनेर - हनुमानगढ़
  • आलौर - अलवर
  • हरबूजी रो कोट - सुजानगढ़
  • योगिनीपट्टन - जावर
  • ब्रज नगर - झालरापाटन (झालावाड़)
  • रामनगर - श्रीगंगानगर
  • जलालाबाद - जालौर
  • भद्रावती - भाण्डारेज
  • श्रीपंथ - बयाना (भरतपुर)
  • वृंदावती - बूँदी
  • हरि अग्नि - पन्ना
  • प्रहरी मीनार - एक थम्बियाँ महल (मंडोर)
  • रामसर साइट - सांभर झील, केवलादेव अभयारण्य
  • भारतीय मैरिनो - चोकला भेड़
  • मृत नदी - घग्घर नदी
  • लवणवती - लूनी (लूणी)
  • हिन्दुआ सूरज - सिसोदिया वंश (मेवाड़)
  • घोड़ा जीरा - ईसबगोल
  • मसुरदी नदी - काकनी/कांकनेय नदी
  • चर्मण्वती - चम्बल नदी
  • वशिष्ठी नदी - बनास नदी
  • दीर्घवती - डीग
  • तीर्थराज - पुष्कर
  • नवाबों की नगरी - टोंक
  • गलियों का शहर - जैसलमेर
  • अर्जुन की गंगा - बाणगंगा नदी
  • वागड़ की गंगा - माही नदी
  • चिल्ह का टीला - जयगढ़ दुर्ग
  • वन की आशा (वर्णाशा) - बनास नदी
  • अकबर का दौलतखाना - मैग्जीन दुर्ग (अजमेर)
  • राजस्थान का दूसरा लिविंग फोर्ट - जैसलमेर का किला
  • मेवाड़ की संकटकालीन राजधानी - चावण्ड (सलूम्बर)
  • मारवाड़ की संकटकालीन राजधानी - सिवाणा दुर्ग (बालोतरा)
  • जालौर दुर्ग की कुँजी - सिवाणा दुर्ग (बालोतरा)
  • रणथम्भौर दुर्ग की कुँजी - झाईन दुर्ग
  • मारवाड़ का अमृत सरोवर - जवाई बाँध (पाली)
  • राजस्थान का कल्प वृक्ष - खेजड़ी
  • राजस्थान की कामधेनु - चम्बल नदी
  • कांठल की गंगा - माही नदी
  • सहरिया जाति का कुंभ - सीताबाड़ी
  • राजस्थान का वैल्लोर - भैंसरोडगढ़ दुर्ग (चित्तौड़गढ़)
  • आदिवासियों की गंगा - माही नदी
  • आदिवासियों का कुंभ - बेणेश्वर धाम (डूंगरपुर)
  • रेगिस्तान का सुन्दर मरू उद्यान - कोलायत झील (बीकानेर)
  • राजस्थान का लिविंग फोर्ट - चित्तौड़ का किला

राजस्थान के प्रमुख व्यक्तियों के उपनाम

  • राजस्थान का नेहरू - पं. युगलकिशोर चतुर्वेदी (भरतपुर)
  • वागड़ के धणी - नरहड़ के पीर (झुंझुनूँ)
  • मेवाड़ के गाँधी - माणिक्यलाल वर्मा (उदयपुर)
  • राजस्थान का गाँधी - गोकुलभाई भट्ट
  • वागड़ का गाँधी - भोगीलाल पाण्ड्या
  • मारवाड़ का प्रताप/ प्रताप अग्रगामी/ भुला बिसरा राजा - राव चन्द्रसेन
  • चिड़ावा का गाँधी - मास्टर प्यारे लाल गुप्ता
  • वागड़ की मीरा - गवरी बाई (डूंगरपुर)
  • राजस्थान का नृसिंह - भक्तकवि दुर्लभ (डूंगरपुर)
  • घोड़े वाले बाबा - कर्नल जेम्स टॉड
  • मारवाड़ का गाँधी - जयनारायण व्यास
  • गाँधीजी का पाँचवाँ पुत्र - जमनालाल बजाज
  • जोधपुर की नूरजहाँ - गुलाब रॉय (कवि श्यामलदास ने नूरजहाँ कहा)
  • मेवाड़ केसरी - महाराणा प्रताप
  • हिन्दुपंत/हिन्दुपति/सैनिकों का भग्नावशेष - राणा सांगा
  • राजपूताने का कर्ण - रायसिंह (बीकानेर)
  • कलयुग का कर्ण - लूणकरण (बीकानेर)
  • मेवाड़ का कर्ण - भामाशाह
  • हिन्दू सुरताण - महाराणा कुम्भा
  • हिन्दु बादशाह - मालदेव
  • पाथल - महाराणा प्रताप
  • पीथल - पृथ्वीराज राठौड़
  • हल्दी घाटी का शेर - महाराणा प्रताप
  • अभिनव भरताचार्य - महाराणा कुम्भा
  • प्रबल हिन्दू राजा - टॉड
  • राय पिथौरा/दल पुंगल - पृथ्वीराज चौहान तृतीय
  • शांति दूत - जसवंत सिंह
  • पेड़ वाले बाबा - काकापुरी
  • शिक्षा संत - स्वामी केशवानंद
  • सांरगी के सरताज - सुल्तान खाँ
  • मेवाड़ की आँख - कुम्भलगढ़ का दुर्ग (राजसमंद)
  • कीका - महाराणा प्रताप
  • नगाड़े का जादूगर - रामकिशन सोलंकी
  • शेर-ए-भरतपुर - गोकुल वर्मा
  • गुरूजी - पं. द्वारका प्रसाद शर्मा
  • बृजराज - बदनसिंह (भरतपुर)
  • डिंगल का हेरोस/पाथल - पृथ्वीराज राठौड़
  • केसरिया हिन्द - महाराजा गंगासिंह
  • जांगलधर बादशाह - कर्णसिंह (बीकानेर)
  • ब्रजनिधि - प्रताप सिंह (जयपुर)
  • मोटा राजा - उदयसिंह (जोधपुर)
  • सितार-ए-हिन्द - रामसिंह द्वितीय
  • केसर ए हिन्द - गाँधी
  • सन्यासी राजा - मानसिंह राठौड़
  • रूठी रानी - भानमती उमादे
  • मेवाड़ का कर्ण - भामाशाह (पाली)
  • गरीब नवाज चिश्ती (अजमेर) - ख्वाजा मोईनुद्दीन
  • कैमल मैन - अशोक टांक
  • टाइगर मैन - कैलाश साँखला
  • मेवाड़ का उद्धारक - राणा हम्मीर/भामाशाह
  • मारवाड़ का उद्धारक - वीर दुर्गादास राठौड़
  • रेल वाले बाबा - किशनलाल सैनी
  • मंकी मैन - जानकीलाल भाण्ड
  • वाटर मैन - राव राजेन्द्र सिंह
  • राजस्थान की राधा - मीरा बाई
  • राजस्थान का कबीर - दादू दयाल (गुजरात)
  • 'दा-साहब' - हरिभाऊ उपाध्याय
  • भैंसों का चितेरा - परमानन्द चोयल
  • भीलों का चितेरा - बाबा गोवर्धन लाल
  • गाँवों का चितेरा - भूरसिंह शेखावत
  • बिज्जी - विजयदान देथा
  • मारवाड़ का बीरबल - बांकी दास
  • बाबोसा - भैरोसिंह शेखावत
  • नीड़ का चितेरा - सौभाग्यमल गहलोत
  • श्वानों का चितेरा - जगमोहन मातोड़िया
  • वीर सावरकर/राजस्थान राज्य कवि - सूर्यमल्ल मिश्रण
  • राजस्थान की जीजा बाई - रानी जयवंता बाई
  • मेवाड़ का भीष्म पितामह - कुंवर चुण्डा
  • राजस्थान के इतिहास का जनक - कर्नल जेम्स टॉड
  • सैनिकों का भग्नावशेष - राणा सांगा
  • मेवाड़ का चार्ल्स मार्टल - बप्पा रावल
  • पंचायती राज के जनक - बलवंतराय मेहता
  • राजस्थान के लोकनायक - जयनारायण व्यास
  • पत्रकारिता के भीष्म पितामह - पं. झाबरमल शर्मा
  • राजस्थान का अबुल फजल - मुहणौत नैणसी
  • राजस्थान की जलपरी - रीमा दत्ता
  • आदिवासियों का मसीहा - मोतीलाल तेजावत
  • आधुनिक राजस्थान का भागीरथ - महाराजा गंगासिंह
  • राजस्थान का लौह पुरुष - दामोदर लाल व्यास
  • वर्तमान राजस्थान का निर्माता - मोहन लाल सुखाड़िया
  • राजस्थान का अर्जुन - लिम्बाराम
  • तीर्थ यात्रियों का राजकुमार - ह्वेनसांग (चीनी यात्री)
  • स्थापत्य कला का जनक(राज. में) - महाराणा कुम्भा
  • 1857 की क्रांति के भामाशाह - अमरचन्द बांठिया
  • ब्ल्यू पॉटरी का जादूगर - कृपाल सिंह शेखावत
  • राठौड़ों का यूलिसिज - वीर दुर्गादास राठौड़
  • जाटों का प्लूटो - महाराजा सूरजमल जाट
  • राजस्थान में स्वतंत्रता संग्राम के भामाशाह - सेठ दामोदर दास राठी
  • हशमत वाला शासक/52 युद्धों का विजेता - राव मालदेव
  • मारवाड़ का पितृहन्ता - मालदेव
  • शेर-ए-राजस्थान - जयनारायण व्यास
  • मारवाड़ का चाणक्य - भाटी गोयन्द दास
  • किसान आन्दोलन के जनक - विजयसिंह पथिक (राजस्थान साधू सीताराम दास)

भारत के राष्ट्रीय प्रतीक

राष्ट्रीय ध्वज
भारत का राष्ट्रीय ध्वज 22 जुलाई, 1947 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया। 14 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि के अधिवेशन में भारतीय महिलाओं की ओर से यह ध्वज राष्ट्र को समर्पित किया गया। भारत का राष्ट्रीय ध्वज तीन बराबर आडी पट्टियों से बना है, जिसमें सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और सबसे नीचे हरे रंग की पट्टी है। ध्वज की लम्बाई-चौड़ाई का अनुपात 3:2 है। सफेद पट्टी के बीच में नीले रंग का चक्र है। इस चक्र का प्रारूप सारनाथ में अशोक के सिंह स्तम्भ पर बने चक्र से लिया गया है।
जिसका व्यास लगभग सफेद पट्टी की चौड़ाई के बराबर है। इस चक्र में 24 तीलियाँ हैं। 25 जनवरी, 2002 को केन्द्र सरकार द्वारा भारत का नया ध्वज कोड 2002 बनाया गया। यह संशोधित ध्वज कोड 26 जनवरी, 2002 के प्रभाव में आने से अब यह राष्ट्रीय तिरंगा घरों, दफ्तरों, दुकानों की छतों पर लहराया जा सकता है। 23 जनवरी, 2004 को एक महत्वपूर्ण निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने यह घोषणा की, कि संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (अ) के अधीन राष्ट्रीय ध्वज फहराना नागरिकों का मूल अधिकार है।

राष्ट्रीय चिन्ह
भारत का राष्ट्रीय चिन्ह अशोक के सारनाथ सिंह स्तम्भ से लिया गया है। मूल स्तम्भ में शीर्ष पर चार सिंह है। इस मूल सिंह स्तम्भ का प्रारूप महाराजा अशोक ने 242-232 ईस्वी पूर्व बनाया था। भारत सरकार ने 26 जनवरी, 1950 को इसे राष्ट्रीय चिन्ह के रूप में अपनाया। चिन्ह के निचले भाग की प्लेट में देवनागरी लिपि में ‘सत्यमेव जयते’ के शब्द लिखे गये हैं। जिसे ‘मुण्डकोपनिषद्’ से लिया गया है। जिसका अर्थ है कि हमेशा सत्य की ही जीत होती है।

राष्ट्रीय गान
भारत का राष्ट्रीय गान जन-गण-मन है जिसकी रचना रवीन्द्रनाथ टैगोर ने की है। यह टैगोर की रचना गीतांजलि से लिया गया है। इसे संविधान सभा में 24 जनवरी, 1950 को राष्ट्रीय गान के रूप में अपनाया गया। 27 दिसम्बर, 1911 को पहली बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में इसे गाया गया। राष्ट्रीय गान के गायन की अवधि लगभग 52 सैकण्ड है। राष्ट्रगान का संक्षिप्त रुप 20 सैकण्ड में गाया जाता है। 27 दिसम्बर, 2011 को राष्ट्र गान के 100 वर्ष पूरे हुए हैं।

राष्ट्रीय गीत
भारत का राष्ट्रीय गीत बंकिमचन्द्र चटर्जी द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ है। इसे संविधान सभा में 26 जनवरी, 1950 को राष्ट्रीय गान के साथ अपनाया गया। इसे भी जन-गण-मन जैसा दर्जा प्राप्त है। सन् 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में सरला देवी चौधरानी ने पहली बार गाया। इसे बंकिमचन्द्र चटर्जी के 1882 में प्रकाशित ‘आनन्द मठ’ उपन्यास से लिया गया है।

राष्ट्रीय पंचाग
स्वतन्त्रता के समय भारत सरकार ने ईस्वी सदी के ग्रिगेरियन पंचांग का अनुसरण किया। राष्ट्रीय सरकार ने पंचांग संशोधन समिति की सिफारिश मंजूर की जिसके अनुसार राष्ट्रीय पंचांग के रूप में शक संवत को 22 मार्च, 1957 को अपनाया गया। यह पंचांग, भारत के राजपत्र, समाचार प्रसारण, नागरिकों के सम्बोधन, सरकारी कलैण्डर के रूप में किया जाता है। चैत्र का पहला दिन सामान्यतया 22 मार्च, को और लीप वर्ष में 21 मार्च को पड़ता है।

राष्ट्रीय पशु
भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ (पैंथरा टाइग्रिस-लिन्नायस) है। जो भारतीय प्रजाति ‘द रॉयल बंगाल टाइगर’ है। अप्रैल 1973 में बाघ परियोजना शुरू की गई।

राष्ट्रीय पक्षी
मोर (मयूर) भारत का राष्ट्रीय पक्षी है। इसे पावो क्रिस्टेटस भी कहा जाता है। ज्यादातर मोर भारतीय उपमहाद्वीपों में पाये जाते हैं। यह भारतीय वन्य प्राणी अधिनियम 1972 के अन्तर्गत राष्ट्रीय पक्षी पूरी तरह संरक्षित है।

राष्ट्रीय फूल (पुष्प)
भारत का राष्ट्रीय फूल ‘कमल’ (नेलंबो न्यूसिपरोगार्टन) है। यह सच्चाई का प्रतीक है जो आदमी को भौतिक बुराइयों से ऊँचा रख सकता है। प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति का शुभ प्रतीक है।

राष्ट्रीय फल
भारत का राष्ट्रीय फल आम (मेगनिफेरा इंडिका) है। आम रसीला फल है। भारत में कम से कम 100 किस्म के आम अलग-अलग आकारों में पाये जाते हैं।

राष्ट्रीय पेड़
भारत का राष्ट्रीय पेड़ बरगद है। बरगद का पेड़ भारत का अंजीर पेड़ है। जिसकी शाखाएँ विशाल क्षेत्र में फैली रहती हैं। यह भारतीय संस्कृति की पौराणिक गाथाओं का हिस्सा है। इसकी जड़ें बहुत गहरी होती हैं।

भारत के राष्ट्रीय दिवस
  • 15 अगस्त - स्वतंत्रता दिवस
  • 26 जनवरी - गणतन्त्र दिवस
  • 02 अक्टूबर - गाँधी जयंती (अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस)

भारत के अन्य प्रतीक
  • राष्ट्र भाषा - हिन्दी
  • राष्ट्र लिपि - देवनागरी
  • राष्ट्रीय वाक्य - ‘सत्यमेव जयते’
  • राष्ट्रीय मुद्रा - रुपया (₹)
  • राष्ट्रीय ग्रन्थ - गीता
  • राष्ट्रीय मंत्र - ओऽम
  • राष्ट्रीय खेल - हॉकी
  • राष्ट्रीय नदी - गंगा

  • राष्ट्रीय पक्षी :- सन् 1963 में मोर को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया था।
  • राष्ट्रीय खेल :- भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी है। भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी चुने जाने के समय हॉकी बहुत लोकप्रिय था। सन् 1928-1956 के बीच हॉकी में स्वर्णिम युग देखा और भारत ने ओलंपिक में लगातार 6 स्वर्ण पदक जीते थे।
  • भारत की राष्ट्रीय नदी :- गंगा भारत की राष्ट्रीय नदी है। हिंदुओं के अनुसार यह पृथ्वी पर सबसे पवित्र नदी है। वास्तव में, हिन्दू लोग इस नदी के तट पर कई अनुष्ठान करते हैं। भारतीय शहर, वाराणसी, इलाहाबाद (प्रयागराज) और हरिद्वार इस नदी के कारण प्रसिद्ध हैं। गंगा 2510 किमी. पहाड़ों, मैदानों और घाटियों से बहती है और यह देश की सबसे लम्बी नदी है।
  • राष्ट्रीय मुद्रा :- भारतीय रुपया, भारत गणराज्य की आधिकारिक मुद्रा है। इस मुद्रा का चलन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियंत्रित किया जाता है। भारतीय रुपये का प्रतीक देवनागरी व्यंजन “र” (रा) से लिया गया है। भारतीय रुपये का नाम चाँदी के सिक्का के नाम पर रखा गया है, जिसे रुपया कहा जाता है। इसे पहली बार 16वीं शताब्दी में सुल्तान शेरशाह सूरी द्वारा जारी किया गया था और बाद में मुगल साम्राज्य ने इसे जारी रखा था।
  • राष्ट्रीय विरासत पशु :- भारत का राष्ट्रीय विरासत पशु हाथी है। भारतीय हाथी एशियाई हाथी की उप-प्रजाति है और मुख्य भूमि एशिया में पाया जाता है। यह आईयूसीआईएन (IUCIN) द्वारा लुप्तप्रायः जानवरों में से एक के रूप में सूचीबद्ध है। इसे देश के चार अलग-अलग क्षेत्रों में देखा जा सकता है।
  • राष्ट्रीय जन्तु :- भारत का राष्ट्रीय जलीय जन्तु डॉल्फिन गंगा है, जिसे गंगा नदी डॉल्फिन भी कहा जाता है। यह स्तनधारी जलीय जन्तु भारत, बांग्लादेश और नेपाल की नदी गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना, कामफुली और सांगू में पाई जाती है, हालांकि, डॉल्फिन गंगा की प्रजातियों का प्रारम्भिक विस्तार और अधिक नहीं प्राप्त हुआ। डॉल्फिन गंगा वास्तविक रूप से नेत्रहीन जलीय जीव है और यह ताजे पानी में रहती है।
  • राष्ट्रीय सर्प :- किंग कोबरा भारत का राष्ट्रीय सर्प है, इसकी लम्बाई 8.5 से 10.8 फीट तक है। यह विषैला साँप भारत में दक्षिण-पूर्व एशिया के मध्य के जंगलों में पाया जाता है। भारत में अन्य साँप, छिपकली और चूहा का सांस्कृतिक महत्त्व है क्योंकि हिन्दू इन जन्तुओं की पूजा करते हैं।
  • शुभंकर :- अब हर जिले को किसी वन्यजीव (पशु व पक्षी) के नाम से जाना जायेगा। हर जिले की यह जिम्मेदारी होगी कि वह अपने जिला स्तर पर वन्यजीव को बचाने व संरक्षित करने की दिशा में काम करे। वर्तमान में 33 जिलों के ही शुभंकर जारी हैं-

जिला शुभंकर
अजमेर खड़मोर
अलवर सांभर
बाँसवाड़ा जलपीपी
बाराँ मगरमच्छ
बाड़मेर मरु लोमड़ी
भीलवाड़ा मोर
बीकानेर भट्ट तीतर
बूंदी सुर्खाब
चित्तौड़गढ़ चौसिंगा
चूरू काला हिरण
दौसा खरगोश
धौलपुर पछीड़ा
डूंगरपुर जांघिल
हनुमानगढ़ छोटा किलकिला
जैसलमेर गोडावण
जालौर भालू
झालावाड़ गागरौनी तोता
झुँझुनूँ काला तीतर
जोधपुर कुरजाँ
करौली घड़ियाल
कोटा ऊदबिलाव
नागौर राजहंस
पाली तेन्दुआ
प्रतापगढ़ उड़न गिलहरी
राजसमंद भेड़िया
सवाईमाधोपुर बाघ
श्रीगंगानगर चिंकारा
सीकर शाहीन
सिरोही जंगली मुर्गा
टोंक हंस
उदयपुर कब्रबिज्जू
जयपुर चीतल
भरतपुर सारस

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Kartik Budholiya

Kartik Budholiya

राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को RPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।