राजस्थान में सहकारिता आंदोलन

राजस्थान में सहकारिता आंदोलन

इस लेख में राजस्थान में सहकारिता आंदोलन का विस्तृत इतिहास, प्रमुख संस्थान (जैसे राजफैड, कॉनफैड) और महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई है। यह राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे RAS, REET, पटवार और पुलिस की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसमें नवीनतम ऋण माफी योजनाओं और डेयरी सहकारिता को भी कवर किया गया है।
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  • सहकारिता का मूल सिद्धांत- "एक सबके लिए, सब एक के लिए"
  • सहकारिता राज्य सरकार का विषय है।
  • संवैधानिक मान्यता- 97वें संविधान संशोधन के द्वारा अनुच्छेद 43 (B) में।
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  • भारत में सहकारिता की शुरुआत- 1903, दुर्भिक्ष आयोग के द्वारा
  • राजस्थान में प्रथम सहकारी बैंक- 1904, डीग
  • पहली सहकारी साख समिति- भिनाय (अजमेर) 1905
  • पहले सहकारिता कानून- 1915, (भरतपुर)
  • पहले सहकारिता आंदोलन की शुरुआत- 1919, (अजमेर)
  • सहकारी शताब्दी वर्ष- 2004
  • अंतर्राष्ट्रीय सहकारी वर्ष- 2012
  • सहकारिता दिवस- प्रत्येक वर्ष के जुलाई महीने के पहले सप्ताह के पहले शनिवार को।
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महिला सहकारिता साख योजना

  • अपना बचत घर योजना- शुरुआत- 17 जनवरी 2001 (मिनी महिला बैंक) आकोली (जालौर)
  • महिला नागरिक सहकारिता बैंक- शुरुआत- 30 अगस्त, 1995 इसको राजपूताना महिला नागरिक बैंक भी कहते हैं।
  • इनकी संख्या 6 है- उदयपुर (2), जयपुर (2), भीलवाड़ा, कोटा

डेयरी सहकारिता

  1. राज्य स्तर - राज. राज्य सहकारिता डेयरी फेडरेशन लिमिटेड स्थापना- 1977 मुख्यालय- जयपुर
  2. जिला स्तर - जिला स्तर समिति
  3. ग्राम स्तर - ग्राम दुग्ध समितियाँ
NOTE:- राजस्थान राज्य डेयरी निगम- स्थापना- 1975

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • राजस्थान राज्य सहकारी भेड़ एवं ऊन विपणन लिमिटेड-स्थापना- 1977 मुख्यालय- जयपुर
  • राजस्थान राज्य सहकारी तिलहन उत्पादन संघ स्थापना- 1990 मुख्यालय- जयपुर
  • राइसेम (RICEM) :- राजस्थान स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ को-ऑपरेटिव एज्युकेशन मैनेजमैंट, स्थापना- 1990, मुख्यालय- जयपुर
  • K.C.C. (किसान क्रेडिट कार्ड) शुरुआत- 1999 सबसे पहले दिया गया- श्री रामनिवास यादव (जयपुर) को दिया गया।
  • सहकारी सुगम कार्ड योजना- 2002 सबसे पहले दिया- श्रीमती रक्षा कुमारी (जयपुर) को दिया गया।

मुख्यमंत्री जनजाति जल धारा योजना- 2007
  • उद्देश्य- अनुसूचित जनजाति को सिंचाई में ऋण देना
  • निम्न जिले हैं : सिरोही, उदयपुर, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, बाराँ, प्रतापगढ़
  • सहकारी जीवन बीमा सुरक्षा योजना- 2008
  • सहकारी जीवाणु कारखाना- भरतपुर
  • ईसबगोल सहकारी संयंत्र- आबू रोड (सिरोही)
  • सहकारी कीटनाशक कारखाना- झोटवाड़ा (जयपुर)
  • किसानों के अनाजों को सुरक्षित रखने के लिए सहकारी शीत भंडार जयपुर एवं अलवर में हैं।
  • सहकारी ग्वारगम प्लांट- नागौर
  • भारत में कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्र में ऋण देने वाली सर्वोच्च संस्था नाबार्ड है।
  • नाबार्ड की स्थापना- 12 जुलाई 1982
  • राजस्थान के सहकारिता आंदोलन ने गाँव, ग्रामीण, युवाओं, महिलाओं, आदिवासियों, किसानों व जरुरतमंद लोगों के जीवन स्तर को समुन्नत करने के लिए अपनी सक्रिय हिस्सेदारी निभाते हुए विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। इस आन्दोलन को गति एवं दिशा राजस्थान राज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम 2001 एवं राजस्थान राज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम 2003 द्वारा दी गई है।
  • राज्य में सहकारिता क्षेत्र में शीर्ष स्तर पर 22 शीर्ष सहकारी संस्थाएँ (फेडरेशन), जिला स्तर पर 29 केन्द्रीय सहकारी बैंक, 24 जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ, 38 उपभोक्ता होलसेल भण्डार, 36 प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक पंजीकृत हैं।

राजस्थान कृषक ऋण माफी योजना 2019 (अल्पकालीन फसली ऋण माफी)
सहकारी बैंकों के किसानों के दिनांक 30.11.2018 को बकाया समस्त अल्पकालीन फसली ऋण माफ किये जाने हेतु राजस्थान कृषक ऋण माफी योजना, 2019 राज्य सरकार से अनुमोदित पश्चात दिनांक 7.2.2019 को जारी की गई।

राजस्थान कृषक ऋण माफी योजना 2019 (मध्यकालीन/दीर्घकालीन कृषि ऋण माफी) :
राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों एवं केन्द्रीय सहकारी बैंकों के ऐसे सभी लघु एवं सीमान्त कृषक जिनका कृषि ऋण दिनांक 30.11.2018 को अवधिपार की श्रेणी में वर्गीकृत है, माफ किये गये है।
जिसके क्रम में सहकारी बैंकों के किसानों की कर्जा माफी के लिए राजस्थान कृषक ऋण माफी योजना-2019 (सहकारी मध्यकालीन/ दीर्घकालीन कृषि ऋण माफी) राज्य सरकार से अनुमोदन पश्चात दिनांक 7.2.2019 को जारी की गई।

सहकारी फसली ऋण ऑनलाइन पंजीयन एवं वितरण योजना
खरीफ, 2019 में “सहकारी फसली ऋण ऑनलाइन पंजीयन एवं वितरण योजना, 2019 का शुभारम्भ किया गया है।

सहकारी जीवन सुरक्षा बीमा योजनाः राज्य सरकार के अनुमोदन पश्चात् राज्य के सहकारी बैंकों, प्राथमिक ऋणदात्री सहकारी समितियों के सदस्यों, अमानतदारों व स्टाफ को जीवन बीमा का लाभ प्रदान करने के लिये 13 अक्टूबर, 2008 से योजना प्रारम्भ की गई।

अरबन को-ऑपरेटिव बैंक
राजस्थान में वर्तमान में 39 अरबन/नागरिक सहकारी बैंक पंजीकृत है 39 अरबन बैंकों में से निम्न बैंक अवसायनाधीन है-
  1. श्री गंगनगर अरबन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड
  2. अजमेर अरबन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड
  3. अलवर अरबन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड
  4. लोक विकास अरबन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, जयपुर
  5. वैशाली अरबन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, जयपुर
  6. भीलवाड़ा महिला अरबन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड
  • अतः वर्तमान में 33 बैंक ही कार्यरत हैं। 3 बैंक रेलवे कर्मचारी सैलेरी अर्नर-सहकारी बैंक है एवं 6 बैंक महिला अरबन को-ऑपरेटिव बैंक की श्रेणी में आते हैं।
  • इन सभी बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंकिंग व्यवसाय हेतु लाइसेंस प्रदत्त है।
  • सहकारी उपभोक्ता सेवाओं का विस्तार - जिला सहकारी उपभोक्ता भण्डारों द्वारा व्यवसाय के माध्यम से प्रसिद्ध क्षेत्रीय उत्पादों (यथा सोजत की मेहन्दी, मथानियां की मिर्च, कोटा डोरिया की साड़ी, किशनगढ़ की 'बणी-ठणी' का चित्र इत्यादि) की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए व्यवसाय वृद्धि करने का प्रयास किया है।
  • सहकारी संस्थाओं में लोकतांत्रिक व्यवस्था : राज्य में सहकारी सोसायटियों का निर्वाचन एक स्वतंत्र निकाय "राजस्थान सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण" के द्वारा करवाया जाता है ।

दीर्घकालीन ऋण

(राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक एवं प्राथमिक भूमि विकास बैंक)
  • प्रदेश में सहकारी क्षेत्र में दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध करवाने के लिए राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक द्वारा 36 प्राथमिक भूमि विकास बैंकों एवं उनकी 124 शाखाओं के माध्यम से 5 से 15 वर्ष की अवधि के लिए दीर्घकालीन सहकारी ऋण वितरित किये जा रहे हैं। राज्य में भूमि विकास बैंकों के संघीय संगठन की शीर्ष संस्था के रूप में राज्य भूमि विकास बैंक की स्थापना 26 मार्च, 1957 को हुई थी। राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक द्वारा राष्ट्रीय बैंक (NABARD) से ऋण के रूप में पुनर्वित्त तथा भारत सरकार एवं राज्य सरकार के अंशदान हेतु विशेष ऋणपत्रों का निर्गमन कर धन राशि जुटाई जाती है। यह ऋण राशि लघु सिंचाई कृषि यंत्रीकरण, डेयरी विकास, मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, सुअर पालन, हौज निर्माण, फल वृक्षारोपण आदि कार्यों हेतु ऋण उपलब्ध करवाये जा रहे हैं।
  • इसके साथ-साथ ग्रामीण दस्तकारों एवं लघु उद्यमियों को अकृषि कार्य हेतु भी भूमि विकास बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध करवा रहे हैं।

मुख्यमंत्री जलधारा योजना

राज्य में पिछले कुछ वर्षों से हो रही अल्प वर्षा के कारण भूजल स्तर में लगातार गिरावट के कारण क्षेत्र (अनुसूचित जनजाति/सहरिया क्षेत्र) की अधिकांश पंचायत समितियाँ डार्क श्रेणी में वर्गीकृत हो गयी हैं, जिससे बैंकों को लघु सिंचाई उद्देश्यों के लिए ऋण वितरण करने में कठिनाई उत्पन्न हुई है। अतः क्षेत्र के कृषकों को डार्क जोन क्षेत्र में भी लघु सिंचाई जैसे कूप गहरा करवाना, नलकूप निर्माण, पम्पसेट विद्युतीकरण आदि उद्देश्यों हेतु ऋण उपलब्ध कराने के लिये अनुसूचित जनजाति/सहरिया क्षेत्र के के निम्न जिलों (उदयपुर, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, बारां एवं सिरोही) की 25 पंचायत समितियों में (जिनमें 4 सुरक्षित, 8 अर्द्धसंवेदनशील एवं 13 डार्क जोन में वर्गीकृत है) मुख्यमंत्री जनजाति (अनुसूचित/सहरिया क्षेत्र) जलधारा योजना, 15.12.2007 से प्रारम्भ की गयी है । इस योजनान्तर्गत प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों एवं केन्द्रीय सहकारी बैंकों द्वारा कृषकों को ऋण उपलब्ध कराया जावेगा। ऋण की अवधि 5 से 15 वर्ष है।

सहकारी विपणन : गठन 26 नवम्बर, 1957

सहकारी विपणन के क्षेत्र में राज्य स्तर पर राजस्थान क्रय-विक्रय सहकारी संघ (राजफैड) एवं प्राथमिक स्तर पर 274 क्रय-विक्रय एवं फल-सब्जी क्रय-विक्रय सहकारी समितियाँ पंजीकृत हैं। राजफैड राज्य की क्रय-विक्रय सहकारी समितियों की शीर्ष सहकारी संस्था है।

राजफैड के प्रमुख कार्य

  • किसानों को कृषि उपज का उचित मूल्य दिलवाने हेतु सदस्य क्रय-विक्रय सहकारी समितियों के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य तथा वाणिज्यक कृषि उपज की खरीद करना।
  • किसानों को उचित मूल्य पर उन्नत व प्रमाणिक खाद-बीज की आपूर्ति करना।
  • पशु आहार फैक्ट्री के माध्यम से पशु आहार का उत्पादन व विक्रय।
  • राज्य की क्रय-विक्रय सहकारी समितियों की शीर्ष संस्था के रूप में उनका मार्गदर्शन व व्यावसायिक विकास करना। उनके अधिकारियों व कर्मचारियों के प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था करना।
  • कमजोर चिन्हित क्रय-विक्रय सहकारी समितियों का मार्गदर्शन एवं व्यवसाय विकास करना।

सहकारी उपभोक्ता

राज्य के सहकारी उपभोक्ता आंदोलन में शीर्ष स्तर पर राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड, जयपुर (कॉनफैड) एवं जिला स्तर पर 37 सहकारी उपभोक्ता होलसेल भण्डार गठित हैं। राज्य के उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हेतु उपभोक्ता संघ एवं जिला सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडारों द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत नियंत्रित वस्तुओं के साथ-साथ अनियंत्रित उपभोक्ता वस्तुएँ एवं राज्य कर्मचारियों, पेन्शनर्स एवं आमजन को दवाईयाँ उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

उपभोक्ता संघ का गठन एवं उद्देश्य

राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड, जयपुर (कॉनफैड) की स्थापना दिनांक 27.03.1967 को राज्य के उपभोक्ताओं को उत्तम गुणवत्तायुक्त वस्तुएँ उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने के लिए की गई थी। उपभोक्ता क्षेत्र की शीर्ष सहकारी संस्था कॉनफैड का कार्यक्षेत्र समस्त राजस्थान राज्य है एवं पंजीकृत कार्यालय जयपुर में स्थित है। कॉनफैड का मूल उद्देश्य सदस्य सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडारों के कारोबार का समन्वय करना, सुविधाएँ प्रदान करना, प्रोत्साहित करना एवं होलसेल भंडारों के गठन एवं विकास में सहायता देकर सहकारी उपभोक्ता आन्दोलन को सुदृढ़ करना है। कॉनफैड द्वारा वर्तमान में जयपुर में अपने 08 उपहार विक्रय केन्द्रों के माध्यम से उचित मूल्य पर अच्छी गुणवत्ता के उत्पाद उपलब्ध करवाये जा रहे हैं।

जनऔषधि केन्द्र

वर्तमान में उपभोक्ता संघ द्वारा जयपुर में एवं उपभोक्ता भण्डारों द्वारा उदयपुर/जोधपुर/झुंझुनूँ/डूंगरपुर जनऔषधि केन्द्र संचालित किये जा रहे हैं।

खादी काउन्टर

वर्ष 2019 में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती पर जोधपुर, राजसमन्द, एवं चूरू भण्डार द्वारा एक-एक खादी का काउन्टर प्रारम्भ किया गया है।

ऑनलाइन शॉपिंग

जोधपुर/उदयपुर/कोटा भण्डारों एवं उपभोक्ता संघ, जयपुर द्वारा वर्ष 2016-17 में ऑन लाइन शॉपिंग का कार्य प्रारम्भ किया गया।

तिलम संघ

राजस्थान राज्य सहकारी तिलहन उत्पादक संघ (तिलम संघ) की स्थापना वर्ष 1990 में हुई थी। इसका कार्य सोयाबीन, सरसों, मूँगफली आदि का संग्रहण तथा प्रोसेसिंग कर विपणन करना है।

तिलम संघ के अधीन आठ तेल मिलें क्रमश

कोटा, बीकानेर, फतेहनगर (मावली तहसील, उदयपुर), श्रीगंगानगर, जालौर, मेड़तासिटी (नागौर), गंगापुरसिटी एवं झुंझुनूँ में स्थापित की गई थी। वर्तमान में संघ की जालौर, मेड़तासिटी, गंगापुरसिटी, झुंझुनूँ एवं बीकानेर कुल पाँच इकाइयाँ निरंतर हानि में चलने के कारण बंद कर दी गई हैं। झुंझुनूँ व जालौर परियोजना का बेचान कर दिया गया है।

स्पिनफैड

राजस्थान राज्य सहकारी स्पिनिंग एवं जिनिंग मिल्स फैडरेशन लिमिटेड (स्पिनफैड), जयपुर का गठन 07 मार्च, 1992 को किया गया था।
मंत्रिमण्डल आज्ञा से स्पिनफैड की सभी इकाईयों गुलाबपुरा (भीलवाड़ा), गंगापुर (भीलवाड़ा) एवं हनुमानगढ़ को दिनांक 22.07.2017 से विधिक रूप से बंद (क्लोजर) किया गया हैं। क्लोजर दिनांक तक का श्रमिकों को बकाया वेतन/ले-ऑफ वेजेज का भुगतान कर दिया गया है।

राजस्थान सहकारी शिक्षा एवं प्रबन्ध संस्थान (राइसेम)

राजस्थान सहकारी शिक्षा एवं प्रबन्ध संस्थान (राइसेम) का गठन राजस्थान संस्था रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1958 के तहत 9 मार्च, 1990 को सहकारिता क्षेत्र में शिक्षा, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान के लिए एक उपयोगी एवं दृढ़ संकल्पित प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में किया गया था।

संस्थान का मुख्य उद्देश्य

सतत् परिवर्तनीय आर्थिक नीतियों, बैंकिंग, कृषि से संबंधित चुनौतियों के परिप्रेक्ष्य में सहकारिता से संबंधित सहकारी एवं गैर सहकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें नवीन चुनौतियों के अनुरूप सहकारिता की महत्ता को बनाये रखने हेतु प्रशिक्षित करने के साथ ही सहकारिता आन्दोलन की उत्तरोत्तर प्रगति की दृष्टि से व्यावसायिक प्रबन्धक एवं दक्ष कार्मिक वर्ग को तैयार करना हैं।

सहकारी राज्य सहकारी संघ

राजस्थान राज्य सहकारी संघ की स्थापना 21 दिसम्बर 1957 को हुई थी। वर्तमान में राजस्थान राज्य सहकारी संघ के सदस्यों की संख्या 359 हैं। राज्य सहकारी संघ का मुख्य उद्देश्य सहकारी शिक्षण-प्रशिक्षण एवं प्रचार-प्रसार है एवं राज्य सरकार द्वारा व भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ, नई दिल्ली द्वारा सौंपे गये दायित्वों का पालन करना हैं।

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राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ Kartik Budholiya छात्रों को RPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के लिए निरंतर शोध-परक कंटेंट साझा करते हैं।