राजस्थान में शिक्षा
इस लेख में राजस्थान के शैक्षिक परिदृश्य, महत्वपूर्ण योजनाओं (STARTS, PM SHRI) और स्वतंत्रता पूर्व से अब तक के शिक्षा विकास की विस्तृत जानकारी दी गई है। यह RAS, REET, LDC और राजस्थान पुलिस जैसी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें शिक्षा संभागों और प्रमुख अकादमियों का पूरा विवरण शामिल है।
| संस्था/समिति/संगठन | स्थापना |
|---|---|
| राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड | 4 दिसम्बर, 1957 |
| राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मण्डल | 29 दिसम्बर, 1973 (पंजीकरण) |
| SCERT/SIERT | 11 नवम्बर, 1978 |
| बालिका शिक्षा फाउण्डेशन | 30 मार्च, 1995 |
| राजस्थान मदरसा बोर्ड, जयपुर | 27 जनवरी, 2003 |
| राजस्थान प्रारम्भिक शिक्षा परिषद्, जयपुर | 3 नवम्बर, 1997 |
| राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल, जयपुर | 21 मार्च, 2005 |
| राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद्, जयपुर | 3 फरवरी, 2009 |
| शिविरा पत्रिका | 1960 |
| साक्षर भारत कार्यक्रम | 8 सितम्बर, 2009 |
स्टार्स परियोजना
राज्य कार्यक्रमों के लिए शिक्षण-अभिगम और परिणाम की सुदृढ़ता की शुरुआत वर्ष 2020-21 में 'समग्र शिक्षा' के माध्यम से की गई। इसका उद्देश्य भारत के छह राज्यों (यथा- हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, ओडिशा, मध्य प्रदेश और केरल) में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता एवं शासन में सुधार लाना है। योजना में केन्द्र एवं राज्य की वित्त सहभागिता अनुपात 60:40 है। विश्व बैंक द्वारा इस योजना अंतर्गत भारत सरकार को वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है।
पीएम श्री विद्यालय योजना
केन्द्र प्रवर्तित पीएम श्री विद्यालय योजना का 07 सितम्बर, 2022 को भारत सरकार द्वारा अनुमोदन किया गया। योजना का व्यापक लक्ष्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की अनुशंसाओं के अनुरूप सभी स्तरों पर गुणवत्तापूर्ण समान समावेशी शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित कर विद्यालयों का समग्र रूपान्तरण करना है। योजना के तहत आनन्ददायी वातावरण में विद्यार्थियों हेतु खेल आधारित, पूछताछ, खोज उन्मुख एवं विद्यार्थी केन्द्रित समग्र एवं एकीकृत शिक्षण विधियों का प्रयोग किया जाकर 21वीं सदी के प्रमुख कौशलों से सुसज्जित समग्र व सर्वांगीण व्यक्तियों का निर्माण करना है। पीएमश्री विद्यालय पर्यावरण अनुकूल गतिविधियाँ सौर पैनल, एलईडी लाइटिंग, प्राकृतिक खेती के साथ पोषण उद्यान, अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक मुक्त वातावरण तथा जल संरक्षण व संचयन को शामिल करते हुए हरित विद्यालय के रूप में स्थापित किये जायेंगे।
उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम
भारत सरकार द्वारा राज्य में केन्द्रीय प्रवर्तित उल्लास नवभारत योजना 1 अप्रैल, 2022 से राज्य में लागू की गई। इस योजना में राज्य के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के 15 वर्ष व अधिक आयु वर्ग के व्यक्तियों को साक्षर करने के लिए शामिल किया गया है। यह पूर्ण रूप से स्वयं सेवक आधारित जन अभियान है।
स्वतंत्रता पूर्व राजस्थान का शैक्षिक परिदृश्य
नोट- यह विषयवस्तु 'राजस्थान अध्ययन' कक्षा 10 के अनुसार है।
- राजस्थान में सर्वप्रथम शिक्षा के आधुनिकीकरण का प्रारम्भ अजमेर से माना जाता है।
- 1818 ई. से पूर्व प्रचलित शिक्षा को ब्रिटिश दस्तावेजों में देशी शिक्षा (इंडिजिनियस एजुकेशन) के नाम से संबोधित किया जाता था।
- 1819 ई. में अंग्रेज पादरी जावेज केरी को अजमेर का शिक्षा अधीक्षक नियुक्त किया गया और उनके नेतृत्व में अजमेर और पुष्कर में अंग्रेजी माध्यम में संचालित होने वाले विद्यालय स्थापित किये गये।
- 1835 ई. में अंग्रेजी भाषा राजकीय भाषा बन गई।
- 1844 ई. में लोक शिक्षण विभाग की स्थापना हुई।
- पंडित जनार्दन राय नागर ने 'सभी के लिए शिक्षा' के उद्देश्य से 21 अगस्त, 1937 में राजस्थान विद्यापीठ संस्था की स्थापना की।
- जयपुर में 1844 ई. में राजा रामसिंह के शासनकाल में पहला अंग्रेजी स्कूल महाराजा स्कूल खोला गया।
- सबसे पहले 1851 ई. में अजमेर का सरकारी स्कूल हाई स्कूल बना।
- 1860 में ब्यावर में पहला ईसाई मिशनरी स्कूल खोला गया।
- 1861 में मिशनरी संस्था कन्या वर्नाकुलर स्कूल प्रारंभ किया गया।
- 1866 में पुष्कर, अजमेर-मेरवाड़ा में प्रथम सरकारी कन्या विद्यालय खोला गया।
- जोधपुर में 1869 में महाराजा तख्तसिंह के शासनकाल में पहला अंग्रेजी स्कूल 'दरबार स्कूल' खोला गया।
विभिन्न देशी शिक्षण संस्थाएँ
परिवार प्राथमिक और व्यावसायिक शिक्षा केन्द्र होते थे।
हिन्दुओं की शिक्षण संस्थाएँ पाठशाला और चटशालाएँ होती थी। इन संस्थाओं में हिन्दी तथा संस्कृत पढ़ाई जाती थी।
जैनियों की शिक्षण संस्थाएँ उपाश्रय और वानिका होती थी। इन संस्थाओं में हिन्दी तथा प्राकृत पढ़ाई जाती थी।
मुसलमानों की शिक्षण संस्थाएँ मकतब होती थी। इन संस्थाओं में फारसी तथा उर्दू पढ़ाई जाती थी।
प्रशासनिक व्यवस्था
शासक अपनी इच्छा से शिक्षण कार्य करने वालों को भू अनुदान करते थे, जिसे हिन्दुओं की 'माफी जागीर' और मुसलमानों की 'मदद-ए-मास जागीर' कहा जाता था।
आधुनिक शिक्षा
ब्रिटिश सर्वोच्च काल में 1818 ई. से लेकर 15 अगस्त, 1947 की शिक्षा को आधुनिक शिक्षा के नाम से जाना जाता है।
आधुनिक शिक्षा का विकास मुख्यतः तीन संस्थाओं के माध्यम से हुआ-
- ब्रिटिश सर्वोच्चता
- मिशनरी
- निजी एवं सार्वजनिक संस्थाएँ
- 1824 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने कोलकाता में जनरल कमेटी ऑफ पब्लिक इंस्ट्रक्शन को राजपूताना में चार स्कूल खोलने के निर्देश दिए।
- राजपूताना में आधुनिक शिक्षा का प्रारंभ अजमेर-मेरवाड़ा से हुआ।
- 1819 में रेजीडेंट आक्टरलोनी के निर्देश के जेबन/जैवेज कैरी ने सर्वप्रथम आधुनिक शिक्षा का स्कूल अजमेर में खोला और उसके बाद पुष्कर, भिनाय (अजमेर) और केकड़ी में अंग्रेजी भाषा के स्कूल खोले।
- 1835 में अंग्रेजी भाषा राजकीय भाषा बन गई।
- 1836 में अजमेर में पहला सरकारी स्कूल खोला गया। जिसे 1851 में हाई स्कूल बनाया गया।
मेयो कॉलेज
- 1872 में वॉयसराय लॉर्ड मेयो के नाम पर अजमेर में मेयो कॉलेज की स्थापना हुई।
- प्रथम सत्र 1875-76 में शुरू हुआ।
- निर्माण कार्य प्रारंभ - 1872 ई.
- उद्घाटन - 7 नवम्बर, 1885 में गवर्नर जनरल लॉर्ड डफरिन द्वारा।
- प्रवेश लेने वाले प्रथम विद्यार्थी - अलवर नरेश मंगलसिंह।
- प्रथम सत्र में कुल 23 छात्र थे।
- उद्देश्य - राजस्थान के शासकों और सामंतों के बालकों को शिक्षा देना।
- रियासतों में सर्वप्रथम अलवर महाराजा बन्ने सिंह की प्रेरणा से पंडित रूपनारायण ने 1842 में स्कूल खोला। 1844 ई. में सर्वप्रथम इसी स्कूल में आधुनिक परीक्षा प्रणाली को अपनाया गया।
- 19वीं शताब्दी के अंत तक जैसलमेर को छोड़कर राजपूताना की सभी रियासतों में राजकीय शिक्षण संस्थाएँ प्रारंभ हो चुकी थी।
महिला शिक्षा
- महिला शिक्षा राजपरिवार, कुलीन वर्ग, चारण महिलाओं, जैन साध्वियों, राज-परिवार से संबंधित दास-दासियों में प्रचलित थी।
- महिलाओं की शिक्षा औपचारिक और अनौपचारिक दोनों प्रकार की होती थी।
- राजकीय अभिलेखागार में 'जनानी ड्योढ़ी तहरीर' नाम से पृथक वर्ग का संग्रह होता था।
- महिला शिक्षा को स्थापित करने में मिशनरी संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
- 1861 में नसीराबाद में "मिशनरी संस्था कन्या वर्नाकुलर स्कूल" का प्रारंभ किया गया। यह राजपूताना का प्रथम स्कूल था जहाँ राजपूताना का गर्ल्स स्कूल प्रारंभ हुआ।
- 1866 में पुष्कर, अजमेर-मेरवाड़ा में प्रथम सरकारी कन्या विद्यालय खोला गया।
- देशी रियासतों में महिला शिक्षा को प्रोत्साहित करने का प्रथम प्रयास जयपुर महाराजा रामसिंह ने 7 मई, 1866 को क्रांति चन्द्र मुखर्जी के परामर्श पर कन्या विद्यालय स्थापित करके किया।
- टोंक रियासत में 1885 में मुस्लिम कन्याओं के लिए स्कूल खोला गया।
- स्वामी दयानंद सरस्वती ने महिला शिक्षा के महत्त्व को स्वीकारते हुए सत्यार्थ प्रकाश के तीसरे अध्याय में लिखा है कि अजमेर में परोपकारिणी सभा की स्थापना की गई, जिसके माध्यम से शिक्षा का प्रचार किया गया।
- अजमेर का सावित्री कॉलेज तथा उदयपुर का महिला महाविद्यालय आर्य समाज से प्रेरित था।
- 1927 में हटुण्डी (अजमेर) में गाँधी आश्रम की स्थापना की।
- महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अक्टूबर, 1935 में वनस्थली विद्यापीठ को स्थापित किया गया था।
- पहाड़ी लोगों को शिक्षित करने का प्रथम कदम ईसाई मिशनरी संस्थान ने दिसम्बर, 1863 में टोडगढ़ (ब्यावर) में रोवर्स स्कूल स्थापित करके किया।
- 1861 में जयपुर महाराजा ने अपने यहाँ शासक एवं सामंत परिवारों के लिए स्कूल खोले।
- 1877 में उदयपुर महाराजा ने सरकारी स्कूल में ही कुलीन वर्ग के लिए पृथक कक्षाएँ शुरू की।
तकनीकी शिक्षा
1901 में लॉर्ड कर्जन ने शिमला में शिक्षा सम्मेलन में तकनीकी शिक्षा को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने पर बल दिया लेकिन प्रथम विश्व युद्ध के बाद ही तकनीकी शिक्षा का प्रारंभ हो सका।
शिक्षक प्रशिक्षण
शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए सर्वप्रथम नसीराबाद (अजमेर) और ब्यावर में मिशनरियों द्वारा कक्षाएँ प्रारंभ की गई।
कॉलेज स्तर पर शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए सर्वप्रथम विद्याभवन एजूकेशन सोसाइटी ने टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज 1941 में प्रारंभ किया।
दूसरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज राजपूताना, मध्य भारत और ग्वालियर बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. जे.सी. चटर्जी के प्रयासों से 1941 में अजमेर में खोला गया।
तीसरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज 1946 में बीकानेर में प्रारंभ किया।
जनवरी, 1947 में जयपुर में राजपूताना विश्वविद्यालय स्थापित किया गया।
आयुर्वेदिक चिकित्सा
आयुर्विज्ञान चिकित्सा के क्षेत्र में सर्वप्रथम जयपुर के महाराजा रामसिंह ने डॉ. ब्रुर के सहयोग से 1947 में सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज खोला।
1894 में नसीराबाद से 4 छात्राओं को आगरा मेडिकल कॉलेज में भेजकर पहली बार महिला डॉक्टर की पढ़ाई के क्षेत्र में राजपूताना ने कदम रखा।
विधि शिक्षा
1946 में भोपाल नोबल्स कॉलेज उदयपुर में एल.एल.बी. की कक्षाएँ प्रारंभ की।
महाराजा कॉलेज में रात्रिकालीन विधि विद्यालय प्रारंभ किया गया।
इसके अलावा लॉ कॉलेज जयपुर, जसवंत कॉलेज जोधपुर, राजऋषि कॉलेज अलवर तथा डूंगर कॉलेज बीकानेर में भी विधि का अध्ययन प्रारंभ हुआ।
अन्य
- 1854 में पहली बार वुड डिस्पैच में देशी रियासतों में स्कूल खोलने के परामर्श के आधार पर अजमेर-मेरवाड़ा में कंपनी के प्रतिनिधि शिक्षण कार्य में सक्रिय हुए।
- वुड डिस्पैच के प्रस्ताव पर कलकत्ता विश्वविद्यालय 1854 में स्थापित किया गया।
- 23 सितम्बर, 1887 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की घोषणा की गई।
- वित्त व्यवस्था हेतु प्रथम प्रयास 1866 में भरतपुर में बंदोबस्त व्यवस्था लागू करने के साथ हुआ।
- 1921 में सेलैंडर की रिपोर्ट के आधार पर विद्यालयों को 1929 में आवासीय शिक्षण संस्थान कॉलेज शिक्षा के कार्य संपादन किए।
- जुलाई, 1929 में बोर्ड ऑफ हाई स्कूल एंड इंटरमीडिएट एजूकेशन राजपूताना अजमेर मेरवाड़ा सेंट्रल इंडिया एंड ग्वालियर बोर्ड की स्थापना की, जिसका मुख्यालय अजमेर में रखा।
- बोर्ड के प्रथम अध्यक्ष जयपुर के विशिष्ट शिक्षा अधिकारी के. पी. किचलू को तीन वर्ष के लिए नियुक्त किया गया।
- 1930 में बोर्ड ने पहली बार परीक्षाओं का आयोजन करवाया, जिसमें 70 हाई स्कूल एवं 12 इंटर मीडिएट कॉलेज के विद्यार्थी परीक्षार्थी थे।
- जनवरी, 1947 में जयपुर में राजपूताना विश्वविद्यालय स्थापित किया गया।
स्वतंत्रता पश्चात् राजस्थान का शैक्षिक परिदृश्य
राजस्थान में शिक्षा विभाग का प्रमुख/अध्यक्ष - शिक्षामंत्री होता है।
शिक्षा मंत्री की सहायता के लिए राज्य शिक्षा मंत्री होता है।
राजस्थान में शिक्षा सचिवालय, शिक्षा आयुक्तालय और शिक्षा निदेशालय को स्थापित किया गया है।
शिक्षा सचिवालय
इसका प्रमुख पदाधिकारी शिक्षा सचिव होता हैं। इसका प्रमुख कार्य- शिक्षा के संबंध में विभिन्न नियमों और नीतियों का निर्माण करना और क्रियान्वयन करना है।
शिक्षा निदेशालय
इसका प्रमुख पदाधिकारी शिक्षा निदेशक होता है।
वास्तविक रूप से शैक्षिक प्रबन्धन के लिए शिक्षा निदेशक को उत्तरदायी माना जाता है।
शिक्षा निदेशालय का प्रमुख कार्य सरकार और शैक्षिक संस्थानों के बीच में सूचनाओं और सेवाओं का आदान-प्रदान करना तथा सचिवालय द्वारा शिक्षा के संबंध में जो नीतियां बनाई है, उसकी पालना को सुनिश्चित करना है। इसमें निम्न शामिल हैं-
- प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर (1950)
- माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर (1950)
- तकनीकी शिक्षा निदेशालय, जोधपुर (1956)
- संस्कृत शिक्षा निदेशालय, जयपुर (1957)
- कॉलेज शिक्षा निदेशालय, जयपुर (1958)
- सतत् शिक्षा एवं साक्षरता निदेशालय, जयपुर (2001)
1997 में प्राथमिक शिक्षा निदेशालय और माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर को अलग-अलग कर दिया।
दोनों ही निदेशालयों ने 1 जनवरी 1998 से अपने अलग-अलग भवन में कार्य करना शुरू कर दिया।
राजस्थान में शिक्षा संभाग/मण्डल
राजस्थान में शिक्षा की दृष्टि से पहले सात संभाग थे। वर्तमान में शिक्षा की दृष्टि से 9 संभाग है।
2 जून, 2013 को मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने पाली और बीकानेर दो नए संभाग बनाये।
- जयपुर :- जयपुर, दौसा और अलवर।
- जोधपुर :- जोधपुर, जैसलमेर और बाड़मेर। (क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा संभाग है।)
- अजमेर :- अजमेर, भीलवाड़ा, नागौर और टोंक।
- उदयपुर :- उदयपुर, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, राजसमंद, चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़। (सर्वाधिक जिलों की संख्या वाला संभाग)
- पाली :- पाली, जालौर और सिरोही।
- बीकानेर :- बीकानेर, हनुमानगढ़, गंगानगर।
- चूरू :- चूरू, सीकर और झुंझुनूँ।
- कोटा :- कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़।
- भरतपुर :- भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर
राजस्थान में शिक्षा का संगठन
राजस्थान में शिक्षा के दो प्रकार हैं-
- प्राथमिक शिक्षा
- माध्यमिक शिक्षा
1. प्राथमिक शिक्षा
प्राथमिक शिक्षा के प्रसार के लिए नीति का सुझाव सबसे पहले वुड घोषणा पत्र (1854) दिया।
- पूर्व प्राथमिक शिक्षा - कक्षा 1 व 2, लहर कार्यक्रम, कौल्ड वेल कुक की खेल विधि से संबंधित है।
- प्राथमिक शिक्षा (कक्षा 3 से 5)
- उच्च प्राथमिक शिक्षा (कक्षा 6 से 8)
- प्राथमिक शिक्षा में समान पाठ्यक्रम व्यवस्था को लागू किया गया है, जो महात्मा गाँधी की बेसिक शिक्षा पर आधारित है।
- प्राथमिक शिक्षा पंचायतीराज के अधिकार क्षेत्र में कार्य कर रही हैं।
- 2 अक्टूबर 2010 को मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने पंचायती राज को पाँच नये विषय प्रदान किये, जिसमें से एक प्राथमिक शिक्षा है।
- प्राथमिक शिक्षा में पोषाहार कार्यक्रम 15 अगस्त, 1995 से लागू किया गया है और इसे लागू करने वाला प्रथम राज्य तमिलनाडु है।
प्राथमिक शिक्षा विभाग के कार्य/उद्देश्य
प्राथमिक शिक्षा से संबंधित नियमों, नीतियों का निर्माण करना और उसे लागू व क्रियान्वित करना।
प्राथमिक शिक्षा का प्रबन्धन व प्रशासन।
प्राथमिक शिक्षा में अपव्यय व अवरोधन को रोकना।
गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना।
प्राथमिक शिक्षा का सार्वभौमिकीकरण करना।
प्राथमिक शिक्षा में 100% नामांकन व ठहराव को प्राप्त करना।
सर्व शिक्षा अभियान एवं समस्या में सहयोग करना।
प्राथमिक शिक्षा का संगठन
प्राथमिक शिक्षा के संगठन में सरकारी तथा स्वायत्तशासी संस्थाओं को शामिल किया जाता है।
सरकारी संस्थाएँ
(i) राज. प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर
इसका मुखिया शिक्षा निदेशक होता है।
(ii) पंजीयक शिक्षा विभागीय परीक्षाएँ, बीकानेर
- यह एक स्वतंत्र विभाग है।
- इसका अध्यक्ष पंजीयक होता है।
- इस विभाग में जिला शिक्षा अधिकारी एवं वरिष्ठ उप जिला शिक्षा अधिकारी का एक-एक पद स्वीकृत किया गया है।
यह विभाग निम्नलिखित परीक्षाओं का आयोजन करता है-
- BSTC/DEED परीक्षा
- संगीत भूषण परीक्षा
- संगीत प्रभाकर परीक्षा
- SC/ST प्रतिभावान परीक्षा
- पत्राचार शिक्षण प्रशिक्षण परीक्षा
- जिला स्तरीय अधिगम स्तर मूल्यांकन परीक्षा
(iii) सतत् शिक्षा एवं साक्षरता निदेशालय, जयपुर
इसके द्वारा संपूर्ण साक्षरता, उत्तर साक्षरता एवं सतत् शिक्षा कार्यक्रम चलाएं जाते हैं।
साक्षर भारत कार्यक्रम :- इसका प्रारंभ 8 सितम्बर, 2009 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय के द्वारा बुनियादी साक्षरता कार्यक्रम के रूप में चलाया गया। इसका उद्देश्य 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को साक्षर करना है।
(iv) SCERT, उदयपुर :- इसकी स्थापना 11 नवम्बर, 1978 को की गई।
स्वायत्तशासी संस्थाएँ
(i) राजस्थान मदरसा बोर्ड, जयपुर
- इसकी स्थापना 27 जनवरी, 2003 में की गई।
- यह एक स्वायत्तशासी संस्था है।
- मदरसा बोर्ड का 1 अध्यक्ष और 15 अन्य सदस्य होते हैं, जो राज्य सरकार द्वारा मनोनीत होते हैं।
- मदरसा एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ है- विद्यालय।
- मदरसा 20 वीं शताब्दी तक कुरान की शिक्षा (दीनी तालिम) पर केन्द्रित पाठ्यक्रम के साथ विद्यालय के रूप में मौजूद रहा।
राजस्थान मदरसा बोर्ड विधेयक, 2020
- राजस्थान मदरसा बोर्ड विधेयक, 2020 ध्वनिमत से पारित कर दिया।
- अल्पसंख्यक मामलात मंत्री शाले मोहम्मद ने विधेयक को चर्चा के लिए सदन में प्रस्तुत किया।
- अल्पसंख्यक मामलात मंत्री शाले मोहम्मद ने कहा कि मदरसा बोर्ड के द्वारा दीनी तालिम के साथ दुनियावी तालीम एवं आधुनिक तकनीकी शिक्षा के समायोजन से उर्दू अध्ययन व शिक्षण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
(ii) राजस्थान शिक्षाकर्मी बोर्ड, जयपुर।
राजस्थान शिक्षाकर्मी परियोजना का प्रारंभ 1984 में निदेशालय प्रौढ़शिक्षा वर्तमान नाम निदेशालय साक्षरता एवं सतत् शिक्षा के प्रशासनिक नियंत्रण में पंचायत समिति किशनगढ़ एवं दूदू में प्रायोगिक तौर पर प्रारंभ किया गया।
जिसके परिणाम अच्छे आने पर वर्ष 1987 में शिक्षाकर्मी परियोजना के संचालन हेतु अलग से शिक्षाकर्मी बोर्ड का गठन किया गया।
(iii) राजस्थान प्रारम्भिक शिक्षा परिषद्, जयपुर (RCEE)
इसकी स्थापना 3 नवम्बर, 1997 को की गई।
यह सर्व शिक्षा अभियान की नोडल एजेंसी है।
सत्र 2018-19 से इसके स्थान पर 'राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद्' का गठन किया गया है।
(iv) राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक मण्डल, जयपुर
इसका पंजीकरण 29 दिसम्बर, 1973 को हुआ और इसने 1 जनवरी, 1974 से विधिवत रूप से कार्य करना शुरू कर दिया।
2. माध्यमिक शिक्षा
माध्यमिक शिक्षा दो प्रकार की हैं।
(i) माध्यमिक शिक्षा (कक्षा 9 से 10)
(ii) उच्च माध्यमिक शिक्षा (कक्षा 11 से 12)
नया शिक्षक
यह मासिक पत्रिका है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा प्रकाशित की जाने वाली पत्रिका का नाम है।
इसमें माध्यमिक शिक्षा से संबंधित विभिन्न गतिविधियों और क्रियाकलापों का वर्णन किया जाता है।
शिविरा पत्रिका
शिविरा का पूरा नाम "शिक्षा विभाग राजस्थान" है।
यह शिक्षा विभाग की एक मासिक पत्रिका है।
इसका प्रकाशन 1960 से निदेशालय माध्यमिक शिक्षा विभाग, राजस्थान बीकानेर द्वारा किया जाता है।
इसके एक शैक्षिक सत्र में 11 अंक प्रकाशित होते हैं और पहला अंक जुलाई माह में तथा अंतिम अंक मई माह में प्रकाशित होता है।
इस पत्रिका में शिक्षा से संबंधित विभिन्न गतिविधियों और क्रियाकलापों का वर्णन किया जाता है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के कार्य/उद्देश्य
- माध्यमिक शिक्षा से संबंधित नियमों व नीतियों का निर्माण करना तथा लागू करना व क्रियान्वित करना।
- माध्यमिक शिक्षा का प्रबन्धन व प्रशासन।
- माध्यमिक शिक्षा का सार्वभौमीकरण करना।
- माध्यमिक शिक्षा में 100% नामांकन व ठहराव को सुनिश्चित करना।
- गुणवत्तापूर्ण माध्यमिक शिक्षा प्रदान करना।
- रसमा कार्यक्रम में सहयोग करना।
- माध्यमिक शिक्षा में अपव्यय व अवरोधन को रोकना।
- इसकी जाँच करना कि जो धनराशि जिस कार्य के लिए दी गई है, वह उसी कार्य में लगी है या नहीं।
राजस्थान में माध्यमिक शिक्षा का संगठन
(i) राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर
इसकी स्थापना 4 दिसम्बर, 1957 को जयपुर में की गई और 1 जनवरी, 1961 को इसे अजमेर में स्थापित किया गया।
(ii) राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद्, जयपुर
इसकी स्थापना 3 फरवरी, 2009 को जयपुर में की गई।
इसका मुख्य उद्देश्य माध्यमिक शिक्षा में गुणात्मक एवं मात्रात्मक ढाँचे में सुधार करना और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान का सफलतापूर्वक संचालन करना है।
सत्र 2018-19 में इसके स्थान पर राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद् का गठन किया गया।
(iv) बालिका शिक्षा फाउण्डेशन
इसकी स्थापना 30 मार्च, 1995 को जयपुर में की गई। इसका मुख्य उद्देश्य बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना है।
(v) राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल
- राजस्थान राज्य खुला विद्यालय "राजस्थान संस्था पंजीकरण अधिनियम, 1958" के अंतर्गत स्थापित किया गया।
- यह एक स्वायत्तशासी संस्था है।
- इसकी स्थापना 21 मार्च, 2005 को जयपुर में की गई।
- इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा से वंचित लोगों को शिक्षा से जोड़ना है।
- माध्यमिक शिक्षा में प्रवेश लेने के लिए विद्यार्थी की आयु 1 जुलाई को 14 वर्ष पूर्ण होनी चाहिए।
- माध्यमिक शिक्षा के 17 विषयों में से विद्यार्थी कोई भी 5 विषय ले सकता है।
- उच्च माध्यमिक शिक्षा में प्रवेश लेने हेतु विद्यार्थी को 10वीं कक्षा उत्तीर्ण तथा आयु 15 वर्ष पूर्ण होनी चाहिए। (अधिकतम आयु सीमा निर्धारित नहीं है।)
- उच्च माध्यमिक शिक्षा के 21 विषयों में से विद्यार्थी कोई भी 5 विषय ले सकता है।
- बोर्ड द्वारा प्रतिवर्ष दो बार परीक्षाएँ आयोजित करवाई जाती है।
विद्यार्थी 5 वर्ष की अवधि में 9 बार परीक्षा दे सकता है तथा एक बार में एक या एक से अधिक विषयों की परीक्षा दे सकता है।
- (vi) राजस्थान राज्य स्काउट गाइड
- (vii) IASE (उच्च अध्ययन शिक्षा संस्थान)
- (viii) CTE (शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय)
- (ix) B. Ed. महाविद्यालय।
- (x) शारीरिक शिक्षक महाविद्यालय।
- (xi) माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालय।
- (xii) माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर।
- (xiii) राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद्
प्रोत्साहन पुरस्कार
राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल, जयपुर से कक्षा 10वीं तथा 12वीं में राज्य स्तर पर सर्वाधिक अंक (न्यूनतम 60 प्रतिशत) प्राप्त करने वाले 4 अभ्यर्थियों को मीरा/एकलव्य पुरस्कार प्रदान किया जाता है, जिसमें 11,000 रुपये की राशि एवं एक प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है।
राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल, जयपुर से कक्षा 10वीं तथा 12वीं में जिला स्तर पर सर्वाधिक अंक (न्यूनतम 60 प्रतिशत) प्राप्त करने वाले 4 अभ्यर्थियों को मीरा/एकलव्य पुरस्कार प्रदान किया जाता है, जिसमें 3100 रुपये की राशि एवं एक प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है।
राजस्थान में अकादमी
- राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर - 1958
- राजस्थान विधि अकादमी, जयपुर - 1977
- राजस्थान उर्दू अकादमी, जयपुर - 1979
- राजस्थान संस्कृत अकादमी - 1980
- राजस्थान ब्रज भाषा अकादमी, जयपुर - 1983
- राजस्थान भाषा साहित्य एवं संस्कृत अकादमी, बीकानेर - 1985
- राजस्थान पंजाबी भाषा अकादमी, गंगानगर - 2006
एकीकृत स्कूल शिक्षा संकुल
- राजस्थान में एकीकृत स्कूल शिक्षा संकुल का प्रारम्भ 8 अगस्त, 2018 से किया गया।
- इसमें पूर्व प्राथमिक कक्षा से लेकर कक्षा 12 तक के विद्यालयों को शामिल किया गया है।
राजस्थान शैक्षिक पहल
राजस्थान में शैक्षिक पहल कार्यक्रम को सितम्बर 2005 में शुरू किया गया।
यह कार्यक्रम PPP (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) पर आधारित है।
वर्ष 2009 में शैक्षिक पहल का विलय SSA में कर दिया गया है।
REI की वैबसाईट www.rei.org.in है, जिसे फरवरी, 2009 में लॉन्च किया गया।
राजस्थान में इस कार्यक्रम का संचालन (नोडल एजेन्सी) प्रारम्भिक शिक्षा परिषद्, शिक्षा संकुल, जयपुर के द्वारा किया जाता है।
शैक्षिक पहल को आर्थिक सहयोग देने का कार्य 4 संस्थाओं के द्वारा दिया जा रहा है -
- भारतीय औद्योगिक परिसंघ- यह सबसे अधिक आर्थिक सहायता देगा।
- विश्व आर्थिक मंच।
- वैश्विक ई-विद्यालय तथा सामुदायिक पहल
- राजस्थान सरकार।
REI का उद्देश्य
विशेष आवश्यकता वाले बालक/बालिकाओं हेतु गुणात्मक व समावेशी शिक्षा के अवसर ढूँढना।
शिक्षा से वंचित बालक/बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने हेतु प्रयास करना।
बालिकाओं के बहुआयामी विकासशील उद्देश्यों के साथ-साथ प्रारम्भिक स्कूली शिक्षा का सार्वजनिकीकरण।
विश्वस्तरीय प्रौद्योगिकी के माध्यम से शैक्षिक सबलीकरण।
कम्प्यूटर साक्षरता के साथ-साथ गुणवत्ता आधारित आयाम जैसे- विद्यालय भवन, पौष्टिक भोजन, स्वच्छता एवं स्वास्थ्यवर्द्धन हेतु शुद्ध पेयजल तथा आधुनिक शौचालय युक्त सुविधाओं द्वारा बच्चों का संपूर्ण विकास।
समता मूलक समाज की स्थापना।
आईसीटी तथा गैर आईसीटी के माध्यम से कौशलों का विकास करना तथा अधिगम स्थल को बढ़ाना।
बालक-बालिका के मध्य लैंगिक मतभेद में न्यूनता लाना।
शैक्षिक सेवाओं के स्तर का विस्तार करना।
SSA में सहयोग करना।
शिक्षा में भौतिक, भौगोलिक और क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करना।
विद्यालय का भौतिक सामग्री, उपकरण और खेल सामग्री प्रदान करना।
सभी को आगे बढ़ने के समान अवसर प्रदान करना।
शैक्षिक पहल कार्यक्रम कार्यधाराएँ
- सूचना और संचार प्रौद्योगिकी कार्यधारा :- इसमें शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में सूचना तकनीकी, संचार तकनीकी, नवीन गतिविधि, क्रियाकलाप आदि सभी को महत्त्व दिया जाता है।
- गैर सूचना व संचार प्रौद्योगिकी कार्यधारा :- इसमें शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में सामुदायिक संसाधन, सामाजिक गतिविधि और सामाजिक पद्धतियों को शामिल किया जाता है।
- पढ़ो राजस्थान :- ये कार्यक्रम शिक्षा की दृष्टि से पिछड़े हुए 14 जिलों में चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य कक्षा 1 व 2 के विद्यार्थियों की वर्तनी और उच्चारण में सुधार करना है।
राज शिक्षा
- राजस्थान शिक्षा विभाग की अधिकृत वेबसाईट www.rajshiksha.gov.in है।
- प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर तथा संयुक्त सचिव प्रारम्भिक शिक्षा को इसका नोडल अधिकारी बनाया गया है।
- इस वेबसाईट पर प्रारम्भिक व माध्यमिक शिक्षा से संबंधित समस्त योजनाएँ डाली गई हैं।
- education.rajasthan.gov.in :- यह सत्र 2016-17 से राजस्थान सरकार, शिक्षा विभाग द्वारा अधिकृत किया गया educational portal है।
- राजस्थान ई-ज्ञान:- शैक्षणिक पोर्टल राजस्थान ई-ज्ञान का प्रारंभ 12 फरवरी, 2016 को किया गया।
- राजीव गाँधी कैरियर पोर्टल:- यूनिसेफ के सहयोग से इसे तैयार करने वाला राजस्थान भारत का पहला राज्य है। इसका प्रारंभ 6 फरवरी, 2019 को पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा शिक्षा संकुल, जयपुर में किया गया।



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